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Author name: Vinod Jha

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इजरायल ने सालों तक हैक किए ईरान के ट्रैफिक कैमरे, खामेनेई को ऐसे बनाया निशाना

Israel Hacked Iran’s Traffic Cameras: इजरायल ईरान युद्ध में शिया मुल्क को काफी नुकसान झेलना पड़ रहा है. हालांकि, अब तक जितनी बार दोनों दोनों देशों के बीच झड़प हुई है, हर बार सबसे ज्यादा नुकसान ईरान का ही होता है.  इस बार तो इजरायल ने ईरान पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई और ईरानी सेना के शीर्ष अधिकारियों की लक्षित हत्या को अंजाम दिया. तो आखिर इजरायल ऐसा कैसे कर लेता है? एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि इजरायल ने वर्षों तक तेहरान के ट्रैफिक कैमरों को हैक किया और मोबाइल फोन नेटवर्क तक पहुंच बनाई, ताकि खामेनेई और उनकी सुरक्षा टीम की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके. लंदन के अखबार Financial Times की एक रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि इजरायल की खुफिया एजेंसियों ने एक दीर्घकालिक योजना के तहत इस पर काम किया.  रिपोर्ट में कई सूत्रों के हवाले से  दावा किया गया है कि तेहरान के लगभग सभी ट्रैफिक कैमरे लंबे समय से हैक थे और उनकी फुटेज एन्क्रिप्ट कर सर्वरों तक भेजी जाती थी. इसी हैकिंग के जरिए इजरायली और अमेरिकी बलों को खामेनेई की लोकेशन का सटीक पता चला, जिसके बाद टारगेटेड हमले में उन्हें मार गिराया गया. इजरायल ने सूक्ष्मतम जानकारी इकट्ठा की रिपोर्ट में कहा गया है कि एक खास कैमरा एंगल बेहद अहम साबित हुआ, जिससे यह पता लगाने में मदद मिली कि बॉडीगार्ड अपनी निजी गाड़ियां कहां पार्क करते थे और पाश्चर स्ट्रीट के पास स्थित परिसर के भीतर की दैनिक गतिविधियों की जानकारी मिलती थी. वहीं सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी और इजरायली खुफिया अधिकारियों ने खामेनेई की दिनचर्या का गहराई से अध्ययन किया था कि वे कहां रहते थे, किन लोगों से मिलते थे, कैसे बात करते थे और हमले की स्थिति में कहां शरण ले सकते थे. रिपोर्ट के मुताबिक, वे अन्य वरिष्ठ नेतृत्वक और सैन्य नेताओं की गतिविधियों पर भी नजर रख रहे थे, जो 86 वर्षीय धर्मगुरु के साथ कम ही एक जगह इकट्ठा होते थे. जैसे ही ईरान को मिली सूचना 1 मिनट में किया काम सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, खामेनेई समेत ईरान के शीर्ष अधिकारी शनिवार सुबह तेहरान के एक परिसर में अलग-अलग स्थानों पर बैठक करने वाले थे. इस परिसर में सुप्रीम लीडर का कार्यालय, राष्ट्रपति भवन और राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र के दफ्तर स्थित हैं. सूत्रों ने बताया कि पहले रात में हमले की योजना थी, लेकिन इसे बदलकर दिन में हमला करने का फैसला किया गया. इजरायल के स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 6 बजे लड़ाकू विमानों ने उस परिसर पर सटीक-निर्देशित हथियार दागे, जिसे अमेरिका-इजरायल के समन्वित अभियान का शुरुआती चरण बताया गया है. ये भी पढ़ें:- फ्रांस बढ़ाएगा परमाणु हथियार, मैक्रों ने नई न्यूक्लियर नीति का किया ऐलान, US से मिले झटके बाद लिया फैसला वहीं, एपी की रिपोर्ट के अनुसार, एक अज्ञात इजरायली सैन्य अधिकारी ने बताया कि हवाई हमलों में 60 सेकंड के भीतर तीन ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर, रिवोल्यूशनरी गार्ड के प्रमुख और करीब 40 वरिष्ठ अधिकारियों की मौत हो गई. अधिकारी के अनुसार, दिनदहाड़े हमला करने से अचानकपन (सरप्राइज) का तत्व मिला. ईरान लगा रहा था अमेरिका और इजरायल की डेथ के नारे- नेतन्याहू इस बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान पर हमलों को सही ठहराया. फॉक्स को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि ईरान का इस्लामी शासन अमेरिका को नष्ट करने के लिए कमिटेड है. उन्होंने कहा कि ईरान 47 वर्षों से ‘डेथ टू अमेरिका’ के नारे लगा रहा है. उन्होंने आपके दूतावासों पर बमबारी की. उन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दो बार हत्या की कोशिश की. उन्होंने अपने ही लोगों की हत्या की, नरसंहार किया और दुनिया भर में आतंक का जाल फैलाया.  ये भी पढ़ें:- हिंदुस्तान हमला करने वाला है… भयभीत पाकिस्तानी प्रेसिडेंट जरदारी बोले; हम बातचीत को तैयार पश्चिम एशिया में संघर्ष लगातार जारी है. ईरानी नेतृत्व खाड़ी देशों और क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना रहा है, जबकि अमेरिका का कहना है कि उसकी सशस्त्र सेनाओं की ओर से सबसे कड़े हमले अभी बाकी हैं. वहीं, ईरान अमेरिकी सैन्य ठिकानों और मिडिल ईस्ट में उसके दूतावासो को निशाना बना रहा है.  The post इजरायल ने सालों तक हैक किए ईरान के ट्रैफिक कैमरे, खामेनेई को ऐसे बनाया निशाना appeared first on Naya Vichar.

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ईरान के साथ जंग में कितने अमेरिकी सैनिक मारे गये? US सेंट्रल कमांड ने बताया

Israel Iran War : एक दिन पहले पहली बार अमेरिकी सैनिकों की मौत का खुलासा होने के बाद अमेरिका ने चेतावनी दी है. उसने कहा है कि युद्ध जारी रहने पर हताहतों की संख्या बढ़ सकती है. फिलहाल जंग समाप्त होने का कोई संकेत नहीं नजर आ रहा है. CENTCOM (US सेंट्रल कमांड) ने 3 मार्च को एक्स पर लिखा कि 2 मार्च की शाम 4 बजे तक 6 अमेरिकी सैनिक युद्ध में शहीद हो चुके हैं. हाल ही में अमेरिकी सेनाओं ने उन दो सैनिकों के शव बरामद किए, जो ईरान के शुरुआती हमलों में लापता थे. आगे सोशल मीडिया पर लिखा गया कि ईरान के खिलाफ अभियान अभी भी जारी है. शहीद हुए सैनिकों की पहचान उनके परिवार को सूचित करने के 24 घंटे बाद ही सार्वजनिक की जाएगी. अमेरिका की सेनाएं नुकसान कम करने का प्रयास कर रही है. CENTCOM Update TAMPA, Fla. – As of 4 pm ET, March 2, six U.S. service members have been killed in action. U.S. forces recently recovered the remains of two previously unaccounted for service members from a facility that was struck during Iran’s initial attacks in the region.… — U.S. Central Command (@CENTCOM) March 2, 2026 पेंटागन ने 2 मार्च को क्या बताया था इससे पहले पेंटागन ने सोमवार को पुष्टि की कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में चार अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं. ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने कहा है कि युद्ध जारी रहने पर और अधिक हताहत हो सकते हैं. हालिया संघर्ष में देश की सेनाओं को भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. अमेरिका ने अपने नागरिकों यहां से बाहर निकलने को कहा ईरान पर हमले तेज करने के बीच अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने सुरक्षा जोखिमों के कारण 12 से अधिक पश्चिम एशियाई देशों से अपने नागरिकों को बाहर निकलने की सलाह दी. अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मीडिया से  इस संबंध में बात की. उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना की ओर से घातक हमले अभी बाकी हैं. अगला चरण ईरान के लिए वर्तमान स्थिति से भी अधिक कठोर होने वाला है. हिंसा के और बढ़ने की आशंका के बीच विदेश मंत्रालय ने सुरक्षा जोखिमों के कारण 12 से अधिक पश्चिम एशियाई देशों से अपने नागरिकों को बाहर निकलने की सलाह दी. यह भी पढ़ें : सऊदी, कुवैत में US एंबेसी पर ईरान का हमला, अमेरिका बोला- इन 15 देशों को तुरंत छोड़ दें अमेरिकी इजराइल और अमेरिका ने ईरान पर हमले तेज कर दिए हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यह अभियान संभवत: कई सप्ताह तक चल सकता है. ईरान और उसके सहयोगियों ने इजराइल, खाड़ी देशों और एनर्जी प्रोडक्शन से जुड़े अहम ठिकानों पर जवाबी हमले किए हैं. हमलों की तीव्रता, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत और हालात को स्थिर करने की कोई स्पष्ट योजना न होने से इस संघर्ष के लंबा खिंचने की आशंका है. The post ईरान के साथ जंग में कितने अमेरिकी सैनिक मारे गये? US सेंट्रल कमांड ने बताया appeared first on Naya Vichar.

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कोल इंडिया के वेज बोर्ड कर्मचारियों को होली का तोहफा, 24.5% महंगाई भत्ता निर्धारित

धनबाद से धर्मेंद्र की रिपोर्ट DA Hike: कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने अपने वेज बोर्ड कर्मचारियों एवं सहायक कंपनियों के कर्मियों के लिए परिवर्तनीय महंगाई भत्ता में संशोधन करते हुए 24.5 प्रतिशत प्रति माह निर्धारित किया है. कंपनी द्वारा जारी कार्यालय ज्ञापन के अनुसार यह नई दर एक मार्च 2026 से प्रभावी होगी. आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह संशोधन दिसंबर 2025 तिमाही (अक्टूबर 2025 से दिसंबर 2025) के औसत अखिल हिंदुस्तानीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर तय किया गया है. संशोधित महंगाई भत्ता एक मार्च 2026 से 31 मई 2026 तक लागू रहेगा. तिमाही आधार पर होती है समीक्षा सीआईएल प्रबंधन ने बताया कि वेज बोर्ड कर्मचारियों के महंगाई भत्ते की समीक्षा प्रत्येक वर्ष तिमाही आधार पर की जाती है. यह संशोधन 1 मार्च, 1 जून, 1 सितंबर और 1 दिसंबर से प्रभावी होता है. संबंधित तिमाही के औसत अखिल हिंदुस्तानीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आंकड़ों के आधार पर नई दर तय की जाती है. इसे भी पढ़ें: झारखंड में चांडिल के आरिफ टार्जन का कमाल, मारुति 800 को बना दिया लैंबॉर्गिनी एवेंटाडोर कर्मचारियों को मिलेगा महंगाई से राहत प्रबंधन के इस फैसले से कंपनी और उसकी सहायक इकाइयों में कार्यरत वेज बोर्ड कर्मचारियों को महंगाई के अनुरूप आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है. बढ़ी हुई दर से कर्मचारियों के वेतन में आंशिक बढ़ोतरी होगी, जिससे बढ़ती महंगाई के बीच राहत मिल सकेगी. इसे भी पढ़ें: झारखंड का एक गांव, जिसने 40 साल के संघर्ष के बाद हटाया बेचिरागी का ठप्पा The post कोल इंडिया के वेज बोर्ड कर्मचारियों को होली का तोहफा, 24.5% महंगाई भत्ता निर्धारित appeared first on Naya Vichar.

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सऊदी, कुवैत में US एंबेसी पर ईरान का हमला, अमेरिका बोला- इन 15 देशों को तुरंत छोड़ दें अमेरिकी नागरिक

Iran Attack on US Embassy: ईरान ने अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में ताबड़तोड़ मिसाइलें बरसा रहा है. ईरान मिडिल ईस्ट में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाने के बाद अब उसके दूतावासों को निशाना बना रहा है. मंगलवार को सऊदी अरब की राजधानी रियाद और कुवैत में स्थित अमेरिकी दूतावासों पर ईरान ने ड्रोन हमले किए.  बढ़ते तनाव के बीच, संयुक्त राज्य अमेरिका ने एक आपातकालीन एडवाइजरी जारी की और अपने नागरिकों से मिडिल ईस्ट के एक दर्जन से अधिक देशों से ‘तुरंत प्रस्थान’ करने को कहा है. एडवाइजरी में ‘गंभीर सुरक्षा जोखिमों’ का हवाला दिया गया है. सऊदी अरब की राजधानी रियाद में स्थित अमेरिकी दूतावास पर मंगलवार (3 मार्च) को ड्रोन हमला हुआ. अंतर्राष्ट्रीय न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से पुष्टि की कि रियाद स्थित दूतावास परिसर में आग लग गई और धमाके की आवाज सुनी गई. सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की कि रियाद में अमेरिकी दूतावास पर दो ड्रोन से हमला हुआ, जिससे सीमित आग लगी और इमारत को मामूली भौतिक नुकसान पहुंचा. अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, दूतावास ‘दो यूएवी (मानवरहित हवाई वाहन) से निशाना बनाया गया, जिन्होंने चांसरी की छत और उसकी परिधि को क्षतिग्रस्त किया.’ फिलहाल किसी के घायल होने की सूचना नहीं है. शुरुआती रिपोर्टों में यह उल्लेख नहीं किया गया है कि हमला किस समूह ने किया. अभी तक किसी भी संगठन ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है.  सऊदी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि इस घटना को ‘सीमित आग’ बताया, जिससे ‘मामूली नुकसान’ हुआ. रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास पर हमले के वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए. 🚨🇺🇸🇸🇦 BREAKING: Senior US official reportedly confirms the American Embassy in Riyadh was hit in an attack, likely by a drone. Source: @officialrnintel Axios https://t.co/cRS3ATdXso pic.twitter.com/BD4TD0QNKa — Mario Nawfal (@MarioNawfal) March 3, 2026 कुवैत एंबेसी में भारी नुकसान हुआ इससे पहले सोमवार को कुवैत स्थित अमेरिकी दूतावास पर भी तेहरान की ओर से दागे गए ड्रोन से हमला हुआ, राहत की बात रही कि दूतावास को कई ड्रोन से नुकसान पहुंचा. एफपी की रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को दूतावास परिसर से धुआं उठते देखा. यह ईरान द्वारा खाड़ी क्षेत्र में जवाबी हमलों का तीसरा दिन था. कुवैत में तैनात एक अन्य राजनयिक ने कहा कि हमले में दूतावास की इमारत सीधे निशाने पर ली गई. बाद में दूतावास ने चेतावनी जारी करते हुए कहा कि ‘कुवैत के ऊपर मिसाइल और यूएवी (ड्रोन) हमलों का खतरा जारी है’ और लोगों से परिसर में न आने की अपील की. An AFP correspondent saw black smoke rising from the US embassy in Kuwait on Monday, with the diplomatic mission telling people not to come to the premises as Iran pressed on with a third day of Gulf attacks. Sirens earlier sounded over the city following the latest volley of… pic.twitter.com/VmPWjrYQFz — AFP News Agency (@AFP) March 2, 2026 ये भी पढ़ें:- अमेरिका-इजराइल ने ईरान के न्यूक्लियर साइट पर किया हमला 15 मिडिल ईस्ट देशों को छोड़ दें अमेरिकी इन हमलों के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सोशल मीडिया एक्स पर एक वीडियो संदेश साझा करते हुए अमेरिकी नागरिकों से कई मध्य पूर्वी देशों को तुरंत छोड़ने की अपील की. उन्होंने लिखा, ‘मध्य पूर्व में मौजूद सभी अमेरिकी नागरिकों के लिए: आपकी सुरक्षा और संरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है. 2 मार्च को शाम 4 बजे (EST) अपडेट की गई इस एडवाइजरी में बहरीन, कुवैत, मिस्र, लेबनान, ईरान, ओमान, इराक, कतर, इजरायल, वेस्ट बैंक और गाजा, सऊदी अरब, सीरिया, जॉर्डन, संयुक्त अरब अमीरात और यमन शामिल हैं. यह घटनाक्रम 28 फरवरी को कई ईरानी शहरों में अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए समन्वित हवाई हमलों के बाद हो रहे हैं. इन हमलों में अमेरिका द्वारा ईरान के सैन्य कमांड सेंटर, एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल ठिकानों और प्रमुख प्रशासनी ढांचे को निशाना बनाया गया था. इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई और चार वरिष्ठ सैन्य एवं सुरक्षा अधिकारियों की मौत हो गई थी. जवाब में ईरान ने इजरायल, बहरीन, कुवैत, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन समेत पूरे क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों और सहयोगियों पर बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागे, जिससे मध्य पूर्व में संघर्ष और व्यापक हो गया और नागरिकों तथा प्रवासियों के लिए खतरा बढ़ गया. ये भी पढ़ें:- फ्रांस बढ़ाएगा परमाणु हथियार, मैक्रों ने नई न्यूक्लियर नीति का किया ऐलान, US से मिले झटके बाद लिया फैसला 4-5 हफ्ते तक जारी रह सकता है युद्ध- ट्रंप इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई चार से पांच हफ्तों तक चल सकती है, हालांकि जरूरत पड़ने पर वे इसे इससे अधिक समय तक जारी रखने के लिए भी तैयार हैं. उन्होंने सोमवार को वाइट हाउस में आयोजित एक कार्यक्रम में यह बयान दिया. उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान के खिलाफ अपना सैन्य अभियान जारी रखेगा, ताकि ‘उस शासन की मिसाइल क्षमताओं, परमाणु महत्वाकांक्षाओं और आतंकवाद के समर्थन को समाप्त किया जा सके.’ The post सऊदी, कुवैत में US एंबेसी पर ईरान का हमला, अमेरिका बोला- इन 15 देशों को तुरंत छोड़ दें अमेरिकी नागरिक appeared first on Naya Vichar.

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होली के बाद रूखे बालों को ऐसे बनाएं फिर से मुलायम और चमकदार

Holi Hair Care Tips: होली का त्योहार रंगों और खुशियों से भरा होता है, लेकिन इन रंगों का असर हमारे बालों पर भी पड़ता है. अबीर और केमिकल वाले गुलाल बालों को रूखा, बेजान और कमजोर बना सकते हैं. कई बार रंगों की वजह से बाल उलझने लगते हैं, टूटने लगते हैं और उनकी प्राकृतिक चमक भी कम हो जाती है. ऐसे में जरूरी है कि होली के बाद बालों की सही तरीके से देखभाल की जाए. कुछ आसान घरेलू उपाय और सही हेयर केयर रूटीन अपनाकर आप अपने बालों को दोबारा स्वस्थ, मुलायम और चमकदार बना सकते हैं. तुरंत हल्के शैम्पू से धोएं रंग स्पोर्ट्सने के बाद बालों को ज्यादा देर तक बिना धोए न रखें. माइल्ड या हर्बल शैम्पू से 1–2 बार हल्के हाथों से धोएं. जोर से रगड़ने से बाल और कमजोर हो सकते हैं. गुनगुने तेल से मसाज नारियल तेल या बादाम तेल को हल्का गुनगुना करके 20–30 मिनट तक बालों में मसाज करें. इससे सूखापन कम होगा और जड़ों को पोषण मिलेगा. डीप कंडीशनिंग जरूर करें शैम्पू के बाद अच्छा कंडीशनर लगाएं. हफ्ते में एक बार हेयर मास्क या दही और शहद का पैक भी लगा सकते हैं. इससे बालों की नमी वापस आएगी. अंडा या दही हेयर पैक अगर बाल ज्यादा रूखे हो गए हैं तो अंडे का सफेद हिस्सा या दही लगाएं. 20 मिनट बाद धो लें. इससे बाल मुलायम और मजबूत बनेंगे. हीट स्टाइलिंग से बचें होली के बाद कुछ दिनों तक हेयर ड्रायर, स्ट्रेटनर या कर्लर का इस्तेमाल न करें. इससे बालों को रिकवर होने का समय मिलेगा. खूब पानी पिएं सिर्फ बाहर से ही नहीं, अंदर से भी बालों की देखभाल जरूरी है. पर्याप्त पानी और पौष्टिक आहार लें. यह भी पढ़ें: कम उम्र में ही हो गई गंजेपन की शुरुआत? पुरुषों की ये 5 गलतियां हैं जिम्मेदार यह भी पढ़ें: रात की ये 3 आदतें बालों को बना देती हैं कमजोर, गंजेपन से बचना है तो तुरंत करें सुधार The post होली के बाद रूखे बालों को ऐसे बनाएं फिर से मुलायम और चमकदार appeared first on Naya Vichar.

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फ्रांस बढ़ाएगा परमाणु हथियार, मैक्रों ने नई न्यूक्लियर नीति का किया ऐलान, US से मिले झटके बाद लिया फैसला

France Nuclear Policy: फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने परमाणु हथियारों के संभावित उपयोग से जुड़ी फ्रांस की नीति (डॉक्ट्रिन) में बदलाव की घोषणा की है. उन्होंने इसे देश की प्रतिरोधक (डिटरेंस) रणनीति के नए चरण की शुरुआत बताया. फ्रांस के बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों वाले सैन्य अड्डे से इस मुद्दे पर संबोधित किया. मैक्रों ने कहा कि पेरिस अपनी परमाणु नीति को नाटो के व्यापक मिशन के अनुरूप समायोजित करेगा, लेकिन अपने परमाणु शस्त्रागार पर पूर्ण राष्ट्रीय संप्रभुता बनाए रखेगा. उन्होंने यूरोपीय सहयोगियों को परमाणु प्रतिरोध अभ्यासों में भाग लेने का निमंत्रण भी दिया, ताकि महाद्वीपीय सुरक्षा समन्वय को मजबूत किया जा सके.  फ्रांस 24 की रिपोर्ट के अनुसार, मैक्रों ने कहा, ‘मैं चाहता हूं कि यूरोपीय देश अपनी किस्मत पर फिर से खुद नियंत्रण हासिल करें.’ मैक्रों ने जोर देकर कहा कि फ्रांस की परमाणु क्षमता शांति बनाए रखने के लिए समर्पित रहेगी, लेकिन उन्होंने देश के शस्त्रागार की ताकत को भी रेखांकित किया. उन्होंने चेतावनी दी कि फ्रांस की परमाणु शक्ति इतनी प्रभावशाली है कि ‘कोई भी देश, कोई भी ताकत, चाहे वह कितनी भी मजबूत क्यों न हो, उससे उबर नहीं सकेगी.’ फ्रांस: 10 मार्च को शिखर सम्मेलन रिपोर्ट के अनुसार, दशकों बाद फ्रांस पहली बार अपने परमाणु वारहेड्स (परमाणु हथियारों की संख्या) बढ़ाने की तैयारी में है. यह फैसला रूस-यूक्रेन युद्ध और ट्रांस-अटलांटिक रक्षा गारंटी के भविष्य को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच लिया गया है. राष्ट्रपति ने यह भी घोषणा की कि फ्रांस 10 मार्च को पेरिस में एक शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा, जिसका उद्देश्य परमाणु ऊर्जा के विकास और उपयोग को बढ़ावा देना है. उन्होंने कहा कि फ्रांस नागरिक परमाणु ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए अच्छी स्थिति में है. फ्रांस की न्यूक्लियर डॉक्ट्रिन फ्रांस की परमाणु प्रतिरोध नीति एक रक्षात्मक रणनीति पर आधारित है, जिसका उद्देश्य देश के महत्वपूर्ण राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है. फ्रांसीसी संविधान के तहत राष्ट्रपति सेना के सर्वोच्च कमांडर होते हैं और परमाणु हथियारों के संभावित उपयोग का अंतिम निर्णय उन्हीं के पास होता है. फ्रांस की परमाणु त्रयी (न्यूक्लियर ट्रायड) में चार परमाणु-सशस्त्र पनडुब्बियां शामिल हैं. ले त्रिओंफां, ले तेमेरेर, ले विजिलां और ले तेरिब्ल, जो अटलांटिक तट पर स्थित इल लॉन्ग बेस पर तैनात हैं. 1972 से अब तक कम से कम एक पनडुब्बी लगातार गश्त पर रहती है, जिससे निरंतर हमले की क्षमता सुनिश्चित होती है. विमानवाहक पोत Charles de Gaulle भी परमाणु-सशस्त्र राफेल लड़ाकू विमानों को तैनात करने में सक्षम है. ये भी पढ़ें:- कुवैत ने 3 अमेरिकी F-15E विमानों को मार गिराया, US का बयान आया सामने स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट और फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स के अनुमानों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि फ्रांस के पास लगभग 290 परमाणु वारहेड हैं. इस तरह वह रूस, अमेरिका और चीन के बाद दुनिया की चौथी सबसे बड़ी परमाणु शक्ति है. यूरोप पर अमेरिकी दबाव और रूस-यूक्रेन युद्ध ने बदला परिदृश्य मैक्रों का यह संबोधन ऐसे समय में आया है जब रूस द्वारा यूक्रेन पर आक्रमण के बाद यूरोप की सुरक्षा संरचना में बदलाव आ रहे हैं. साथ ही यूक्रेन, ग्रीनलैंड और नाटो को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ तनाव भी बना हुआ है. यूरोपीय नेताओं के बीच अमेरिका की पारंपरिक ‘न्यूक्लियर अम्ब्रेला’ (परमाणु सुरक्षा छतरी) को लेकर अनिश्चितता बढ़ रही है. ऐतिहासिक रूप से अमेरिका ने नाटो सहयोगियों को परमाणु सुरक्षा का आश्वासन दिया है, जिससे उन्हें स्वतंत्र परमाणु क्षमता विकसित करने की आवश्यकता नहीं पड़ी. यूरोपीय संघ के भीतर फ्रांस ही एकमात्र परमाणु हथियार संपन्न देश है. ये भी पढ़ें:- अमेरिका-इजराइल ने ईरान के न्यूक्लियर साइट पर किया हमला पिछले महीने म्यूनिख में मैक्रों ने कहा था, ‘हमें परमाणु प्रतिरोध की अवधारणा को फिर से परिभाषित करना होगा.’ उन्होंने बताया कि जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और अन्य यूरोपीय नेताओं के साथ इस विषय पर रणनीतिक संवाद हो चुका है. उन्होंने कहा, ‘यूरोप को एक भू-नेतृत्वक शक्ति बनना सीखना होगा.’ The post फ्रांस बढ़ाएगा परमाणु हथियार, मैक्रों ने नई न्यूक्लियर नीति का किया ऐलान, US से मिले झटके बाद लिया फैसला appeared first on Naya Vichar.

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होगी बारिश या बढ़ेगा तापमान, जानें होली में कैसा रहेगा मौसम

Holi Weather Forecast : IMD के अनुसार, एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टरबेंस) की वजह से मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है. 4 से 8 मार्च  के बीच जम्मू-कश्मीर में, 7 और 8 मार्च को हिमाचल प्रदेश में जबकि 8 मार्च उत्तराखंड में हल्की बारिश के साथ बर्फबारी की संभावना है. राजस्थान में तापमान सामान्य से ऊपर राजस्थान में तापमान बढ़ने लगा है. तापमान सामान्य से ऊपर दर्ज किया जा रहा है. मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ेगा. मौसम केंद्र जयपुर ने बताया कि इस समय राज्य के अधिकांश भागों में न्यूनतम व अधिकतम तापमान सामान्य से 2-6 डिग्री सेल्सियस ऊपर दर्ज किया जा रहा है. आगामी एक सप्ताह मौसम शुष्क रहने की संभावना है. दिल्ली का मौसम कैसा रहेगा दिल्ली का अधिकतम तापमान मंगलवार को 30 से 32 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है. आसमान साफ रहेगा. वहीं 4 मार्च को यानी होली के दिन अधिकतम तापमान 32 से 34 डिग्री सेल्सियस जबकि न्यूनतम तापमान 15 से 17 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है. इस दिन भी आसमान साफ रहने की संभावना व्यक्त की गई है. बिहार का मौसम कैसा रहेगा मौसम विभाग के अनुसार, बिहार में 6 मार्च तक मौसम सामान्य और संतुलित रहने की संभावना है. 7 मार्च से तापमान में और बढ़ोतरी देखने को मिलेगी. अधिकतम तापमान 34 से 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जिससे दिन में गर्मी बढ़ने की संभावना है. इन इलाकों का अधिकतम तापमान बढ़ेगा 1. उत्तर-पश्चिम हिंदुस्तान के मैदानी इलाकों में अगले 5 दिनों में अधिकतम तापमान 2-4°C तक धीरे-धीरे बढ़ेगा. इसके बाद तापमान में कोई खास बदलाव नहीं होगा. 2. मध्य हिंदुस्तान के मैदानी इलाकों में अगले 5 दिनों में तापमान 2-4°C तक धीरे-धीरे बढ़ेगा. इसके बाद अगले 2 दिनों में कोई खास बदलाव नहीं होगा. यह भी पढ़ें : होली से पहले ही बदलेगा मौसम का मिजाज, बिहार में गर्मी दिखाएगी अपना रौद्र रूप 3. छत्तीसगढ़ और विदर्भ में अगले 3 दिनों में तापमान लगभग 2-3°C बढ़ने की संभावना है, उसके बाद कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन नहीं होगा. 4. महाराष्ट्र में अगले 4 दिनों के दौरान तापमान 2-4°C तक धीरे-धीरे बढ़ने की संभावना है. इसके बाद अगले 3 दिनों में तापमान में कोई खास बदलाव नहीं होगा. 5. गुजरात में अगले 3 दिनों में तापमान 3-5°C तक धीरे-धीरे बढ़ने की संभावना है. इसके बाद अगले 3 दिनों में कोई खास बदलाव नहीं होगा. The post होगी बारिश या बढ़ेगा तापमान, जानें होली में कैसा रहेगा मौसम appeared first on Naya Vichar.

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आज दिखेगा ब्लड मून, होली से पहले पूर्ण चंद्रग्रहण का अद्भुत नजारा न चूकें

Blood Moon 2026:  आज 3 मार्च 2026, मंगलवार का दिन एक अनोखी खगोलीय घटना का साक्षी बनने जा रहा है.  साल 2026 का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण आज रात दिखाई देगा, ठीक होली के रंगों से एक दिन पहले यानी 4 मार्च से पहले.  यानी 3 मार्च की रात आकाश में एक अद्भुत खगोलीय घटना घटित होने जा रही है. चंद्रमा सीधे पृथ्वी की छाया से गुजरेगा और पूर्ण चंद्र ग्रहण दिखाई देगा. खास बात यह है कि इस बार ग्रहण एक सुविधाजनक समय पर लगेगा, इसलिए इसे देखने के लिए न तो अलार्म लगाने की जरूरत है और न ही आधी रात को नींद तोड़ने की. ऑस्ट्रेलिया और ऑटेरोआ (न्यूजीलैंड) इस अद्भुत नजारे को देखने के लिए सबसे उपयुक्त स्थानों में होंगे. कैसे शुरू होगा यह खगोलीय नजारा? मंगलवार शाम को पूर्ण और चमकीले चंद्रमा पर धीरे-धीरे पृथ्वी की छाया पड़नी शुरू होगी. शुरुआत में यह बदलाव हल्का सा लगेगा, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतेगा, चंद्रमा का एक हिस्सा अंधकार में डूबता जाएगा. इस चरण को आंशिक ग्रहण कहा जाता है. जब चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी की गहरी छाया में प्रवेश कर जाएगा, तब वह लाल रंग की आभा में चमकने लगेगा. खगोलविद इस क्षण को “पूर्णता” कहते हैं. यही वह समय होता है जब चंद्रमा का रूप सबसे आकर्षक और रहस्यमय दिखाई देता है. क्यों कहा जाता है ‘रक्त चंद्रमा’? पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा का लाल दिखाई देना लोगों के मन में जिज्ञासा और आश्चर्य पैदा करता है. इसी वजह से इसे “रक्त चंद्रमा” या “ब्लड मून” कहा जाता है. इतिहास में कई संस्कृतियों ने इस लालिमा को अशुभ संकेत के रूप में देखा, लेकिन आधुनिक विज्ञान इसके पीछे का स्पष्ट कारण बताता है. जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, तो सूर्य की सीधी रोशनी चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाती. पृथ्वी का वायुमंडल सूर्य के प्रकाश को मोड़कर चंद्रमा तक पहुंचाता है. इस प्रक्रिया में नीली रोशनी बिखर जाती है और केवल लाल रंग की किरणें चंद्रमा तक पहुंच पाती हैं. इसी कारण चंद्रमा लाल दिखाई देता है. चंद्र ग्रहण कब और कितनी देर तक रहेगा? चंद्र ग्रहण एक धीमी गति से घटित होने वाली घटना है, जो कई घंटों तक चलती है. इस बार चंद्रमा को पृथ्वी की छाया में पूरी तरह प्रवेश करने में लगभग 75 मिनट लगेंगे. इसके बाद करीब एक घंटे तक पूर्ण ग्रहण रहेगा, जब चंद्रमा पूरी तरह लाल दिखाई देगा. फिर अगले 75 मिनट में चंद्रमा धीरे-धीरे छाया से बाहर निकल आएगा और अपनी सामान्य चमक में लौट आएगा. चूंकि पृथ्वी की छाया चंद्रमा से काफी बड़ी होती है, इसलिए पृथ्वी के रात्रि भाग में रहने वाले सभी लोग इस घटना को लगभग एक ही समय पर देख सकेंगे. केवल स्थानीय समय के अनुसार देखने का समय अलग-अलग होगा. ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में कैसा रहेगा दृश्य? पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के कुछ हिस्सों में ग्रहण की शुरुआत उस समय होगी जब चंद्रमा क्षितिज के नीचे होगा. जैसे-जैसे चंद्रमा ऊपर उठेगा, वह आंशिक रूप से छाया में आ चुका होगा. गोधूलि की हल्की रोशनी में इसे देखना थोड़ा मुश्किल हो सकता है, क्योंकि चंद्रमा सूर्यास्त के समय उगेगा. हालांकि थोड़े धैर्य के साथ इंतजार करने पर दृश्य स्पष्ट होता जाएगा. जैसे-जैसे अंधेरा गहराएगा, लालिमा लिए चंद्रमा पूर्वी आकाश में साफ दिखाई देने लगेगा. ऑस्ट्रेलिया के अन्य हिस्सों में ग्रहण थोड़ी देर से शुरू होगा. वहीं ऑटेरोआ (न्यूजीलैंड) में स्थानीय समयानुसार रात 10 बजकर 50 मिनट पर ग्रहण की शुरुआत होगी. यहां आसमान पूरी तरह अंधेरा होगा और चंद्रमा उत्तर दिशा में काफी ऊंचाई पर रहेगा, जिससे यह दृश्य बेहद शानदार दिखाई देगा. चंद्रमा लाल क्यों हो जाता है? जब चंद्रमा पृथ्वी की छाया में प्रवेश करता है, तो शुरुआत में वह काला या धुंधला दिखाई देता है. लेकिन जैसे ही वह पूरी तरह छाया में समा जाता है, पृथ्वी का वायुमंडल सूर्य के प्रकाश को मोड़कर चंद्रमा तक पहुंचाता है. वायुमंडल में मौजूद धूल, बादल और कण इस लालिमा की तीव्रता को प्रभावित करते हैं. यदि वातावरण अधिक धूल भरा हो, तो चंद्रमा गहरा लाल दिखाई देगा. यदि वातावरण साफ और पारदर्शी हो, तो चंद्रमा हल्के नारंगी रंग में चमक सकता है. ये भी पढ़ें: सूतक काल आरंभ, आज लगने जा रहा है साल का पहला चंद्रग्रहण इस पूरी प्रक्रिया को ‘रेले प्रकीर्णन’ कहा जाता है. यही कारण है कि दिन में आकाश नीला दिखाई देता है, क्योंकि नीली रोशनी अधिक बिखरती है और लाल रोशनी लंबी दूरी तय कर पाती है. हर बार पूर्ण चंद्र ग्रहण क्यों नहीं होता? हालांकि चंद्रमा हर महीने पृथ्वी की परिक्रमा करता है, फिर भी हर पूर्णिमा को चंद्र ग्रहण नहीं लगता. इसका कारण यह है कि चंद्रमा की कक्षा पृथ्वी की कक्षा से थोड़ी झुकी हुई है. इसलिए सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा हमेशा एक सीध में नहीं आते. जब ये तीनों पिंड बिल्कुल सीध में आ जाते हैं, तभी पूर्ण चंद्र ग्रहण संभव होता है. अन्य समय में चंद्रमा केवल पृथ्वी की बाहरी छाया यानी उपछाया से गुजरता है, जिससे हल्का सा धुंधलापन आता है, जिसे सामान्य आंखों से पहचानना मुश्किल होता है. 2029 तक आखिरी मौका खगोलविदों के अनुसार, यह पूर्ण चंद्र ग्रहण 2029 तक “रक्त चंद्रमा” देखने का आखिरी अवसर होगा. 2027 में होने वाले तीन ग्रहण केवल उपछाया ग्रहण होंगे, जिन्हें महसूस करना लगभग असंभव होगा. इसलिए इस बार का ग्रहण विशेष महत्व रखता है. एक अद्भुत अनुभव चंद्र ग्रहण हमें यह याद दिलाता है कि हम एक विशाल और रहस्यमय ब्रह्मांड का हिस्सा हैं. इसे देखने के लिए किसी विशेष उपकरण की आवश्यकता नहीं होती—सिर्फ साफ आसमान और थोड़े धैर्य की जरूरत है. जब चंद्रमा लाल आभा में चमके, तो उस क्षण को जरूर महसूस करें. यह न केवल एक वैज्ञानिक घटना है, बल्कि प्रकृति का एक मनमोहक दृश्य भी है, जिसे हर किसी को कम से कम एक बार अवश्य देखना चाहिए. The post आज दिखेगा ब्लड मून, होली से पहले पूर्ण चंद्रग्रहण का अद्भुत नजारा न चूकें appeared first on Naya Vichar.

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सूतक काल आरंभ, आज लगने जा रहा है साल का पहला चंद्रग्रहण

Chandra Grahan 2026 Sutak Kaal: साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को लगने जा रहा है. खास बात यह है कि यह ग्रहण होली के दिन पड़ रहा है, जिसके कारण धार्मिक मान्यताओं में इसका महत्व और बढ़ गया है. यह चंद्र ग्रहण दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से शुरू होकर शाम 6 बजकर 47 मिनट तक चलेगा. ग्रहण के साथ ही सूतक काल भी प्रभावी रहेगा, जिसे शास्त्रों में विशेष महत्व दिया गया है. सूतक काल शुरू चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है. इसी आधार पर 3 मार्च को सुबह 6 बजकर 20 मिनट से सूतक प्रभावी हो चुका है. ग्रहण समाप्त होते ही सूतक काल भी समाप्त माना जाएगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक काल के दौरान शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते. इस समय को संयम, साधना और सावधानी का काल माना जाता है. सूतक काल के नियम क्या हैं? सूतक लगते ही कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक माना गया है: पूजा-पाठ या देवी-देवताओं की मूर्तियों को स्पर्श न करें. किसी भी प्रकार के शुभ या मांगलिक कार्य से बचें. बाल, नाखून या दाढ़ी कटवाने से परहेज करें. भोजन पकाना या खाना वर्जित माना जाता है. बाहरी मेल-मिलाप और अनावश्यक यात्राओं से बचने की सलाह दी जाती है. हालांकि ये सभी नियम धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं, और लोग अपनी आस्था के अनुसार इनका पालन करते हैं. हिंदुस्तान के प्रमुख शहरों में चंद्र ग्रहण का समय देश के अलग-अलग शहरों में चंद्र ग्रहण अलग-अलग समय पर दिखाई देगा. नीचे प्रमुख शहरों के समय दिए गए हैं: दिल्ली दिल्ली: शाम 6:26 बजे से 6:46 बजे तक (20 मिनट) बिहार और झारखंड पटना: शाम 5:55 बजे से 6:46 बजे तक (51 मिनट) रांची: शाम 5:55 बजे से 6:46 बजे तक (51 मिनट) उत्तर प्रदेश और आसपास के शहर लखनऊ: शाम 5:59 बजे से 6:47 बजे तक (48 मिनट) कानपुर: शाम 6:14 बजे से 6:46 बजे तक (32 मिनट) वाराणसी: शाम 6:04 बजे से 6:46 बजे तक (43 मिनट) मेरठ: शाम 6:17 बजे से 6:47 बजे तक नोएडा: शाम 6:20 बजे से 6:47 बजे तक आगरा: शाम 6:16 बजे से 6:47 बजे तक प्रयागराज: शाम 6:08 बजे से 6:46 बजे तक (38 मिनट) पूर्वी हिंदुस्तान कोलकाता: शाम 5:43 बजे से 6:46 बजे तक (1 घंटा 03 मिनट) भुवनेश्वर: शाम 5:54 बजे से 6:46 बजे तक (52 मिनट) गुवाहाटी: शाम 5:27 बजे से 6:46 बजे तक (1 घंटा 19 मिनट) दक्षिण हिंदुस्तान चेन्नई: शाम 6:21 बजे से 6:46 बजे तक (26 मिनट) हैदराबाद: शाम 6:26 बजे से 6:46 बजे तक (20 मिनट) बेंगलुरु: शाम 6:32 बजे से 6:46 बजे तक (14 मिनट) क्यों खास माना जा रहा है यह ग्रहण? होली जैसे बड़े त्योहार के दिन चंद्र ग्रहण लगना धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जा रहा है. कई लोग इसे केवल खगोलीय घटना मानते हैं, जबकि कई घरों में इसे लेकर नियम-कायदे अपनाए जाते हैं. पूर्णिमा के दिन ग्रहण लगना भी इसे अधिक प्रभावशाली बनाता है. इसलिए इस बार का चंद्र ग्रहण धार्मिक और सांस्कृतिक दोनों दृष्टि से चर्चा में है. 3 मार्च 2026 का चंद्र ग्रहण केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि आस्था और परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण दिन भी है. सूतक काल के नियमों का पालन करते हुए लोग इसे श्रद्धा और सावधानी के साथ देखेंगे. यदि आप इसे देखना चाहते हैं, तो अपने शहर के समय के अनुसार तैयार रहें और इस दुर्लभ खगोलीय घटना का साक्षी बनें. The post सूतक काल आरंभ, आज लगने जा रहा है साल का पहला चंद्रग्रहण appeared first on Naya Vichar.

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अमेरिकी राजदूत गोर कुछ ज्यादा ही सक्रिय हैं, पढ़ें प्रभु चावला का आलेख

हाल ही में, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने अपने एक्स हैंडल पर एक महत्वपूर्ण तस्वीर साझा की. इसमें मंत्री के साथ विवादास्पद अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक और राजदूत सर्जियो गोर आत्मीय मुद्रा में दिखाई दे रहे थे. यह छवि शिष्टाचार के बजाय भाईचारे का संदेश दे रही थी. अतीत में राजकीय यात्राओं के दौरान ऐसी तस्वीरें सार्वजनिक मंचों पर शायद ही कभी साझा की जाती थीं. अमेरिकी राजदूत गोर ने वह अंतर पैदा कर दिया है. राजदूत पारंपरिक रूप से वे अदृश्य प्रेरक होते हैं, जो छायादार गलियारों में फुसफुसाकर परामर्श देते हैं, न कि आक्रामक स्वामी की तरह सुर्खियों में छाये रहते हैं. फिर भी, नयी दिल्ली के व्यस्त राजनयिक मंच पर, हिंदुस्तान में अमेरिका के नये राजदूत दूत गोर ने इस बुनियादी सिद्धांत को ऐसी भव्यता के साथ तोड़ा है, जो ढिठाई की सीमा को छूती है. मात्र 38 वर्ष की आयु में, हालिया स्मृति में इस महत्वपूर्ण पद पर तैनात होने वाले सबसे कम उम्र के राजदूत, एक बवंडर की तरह आये हैं. उन्होंने 14 जनवरी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना परिचय पत्र सौंपने से बहुत पहले ही अपना संचालन शुरू कर दिया था. उनका अति सक्रिय कार्यकाल अमेरिकी अतिरेक का सुझाव देता है. उन्होंने रक्षा प्रतिष्ठानों, राज्यों की राजधानियों, कॉरपोरेट बोर्डरूम और नेतृत्वक सैलूनों के दौरे पहले ही पूरे कर लिये हैं. उन्होंने अपने आवास पर भव्य दावतों की मेजबानी की है. हिंदुस्तानीय मंत्री और सांसद न केवल उनसे मिलते हैं, बल्कि इन मुलाकातों को प्रतिष्ठा के प्रतीक के रूप में प्रचारित करते हैं. कोई उन्हें किसी विदेशी राष्ट्रपति का नामित व्यक्ति नहीं, बल्कि एक वास्तविक ‘अमेरिकी वायसराय’ समझने की भूल कर सकता है, जिसकी सत्ता के हर गलियारे तक बेरोकटोक पहुंच है. वह कोई साधारण राजनयिक नहीं हैं. सोवियत मूल के नेतृत्वक संचालक और ट्रंप के वफादार गोर कभी व्हाइट हाउस प्रेसिडेंशियल पर्सनेल ऑफिस के प्रमुख थे. उनका नामांकन विवादों के घेरे में था : एलन मस्क ने एक बार उन्हें ‘सांप’ कहा था, क्योंकि उन पर आरोप था कि उन्होंने हजारों अन्य लोगों की जांच करते समय मस्क के व्यक्तिगत सुरक्षा मंजूरी कागजी कार्रवाई में जानबूझकर देरी की थी. पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने उन्हें हिंदुस्तान-विशिष्ट राजनयिक अनुभव की कमी का हवाला देते हुए अयोग्य करार दिया था. आलोचकों ने उन्हें एक ऐसे ‘इनसाइडर ऑपरेटर’ के रूप में चित्रित किया, जो भाषा की बारीकियों के बजाय वफादारी परीक्षणों में माहिर है. सीनेट की सुनवाई में गोर ने गरजते हुए कहा था कि ट्रंप ने यह बिल्कुल ‘स्पष्ट कर’ दिया है कि हिंदुस्तान को रूसी तेल खरीदना बंद करना होगा. वाशिंगटन और उसके बाहर उनके विरोधियों ने उन्हें ट्रंप की दुनिया में सबसे मुखर हिंदुस्तान विरोधी आवाजों में से एक बताया था. इसकी तुलना उनके साथियों के शालीन संयम से करें. यूरोप, जापान, चीन और रूस के राजदूत दिल्ली में खुद को आधिकारिक सम्मेलनों, संक्षिप्त विज्ञप्तियों और औपचारिक हाथ मिलाने तक सीमित रखते हैं. गोर के तत्काल पूर्ववर्ती एरिक गार्सेटी ने भी ऊर्जावान होने के बावजूद नपा-तुला व्यवहार बनाये रखा था. पिछले महीने गोर अमेरिकी हिंद-प्रशांत कमान के कमांडर एडमिरल सैमुअल जे पापारो के साथ हिंदुस्तानीय सेना के पश्चिमी कमान मुख्यालय के हाई प्रोफाइल दौरे के लिए चंडीगढ़ पहुंचे. वहां उन्हें परिचालन तत्परता, पश्चिमी मोर्चे पर रणनीतिक गतिशीलता और यहां तक कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बारे में जानकारी दी गयी-ये वे विवरण हैं, जो आमतौर पर संप्रभु राष्ट्र की अपनी नजरों के लिए आरक्षित होते हैं. हिंदुस्तानीय विपक्षी दल आक्रोश से भड़क उठे. फिर भी गोर ने एक्स पर गर्व से लिखा : ‘अभी चंडीगढ़ उतरा हूं. पश्चिमी कमान के दौरे के लिए उत्सुक हूं.’ हिंदुस्तान के नेतृत्वक, सैन्य और व्यापारिक अभिजात वर्ग-फोर स्टार जनरलों से लेकर बैकबेंच सांसदों तक, औद्योगिक दिग्गजों से लेकर राज्य स्तर के नौकरशाहों तक-के साथ इस निरंतर मेलजोल ने गोर के अंतर्निहित उद्देश्यों पर परेशान करने वाले सवाल खड़े कर दिये हैं. विपक्षी दलों ने, जो पहले से ही बढ़ते अमेरिकी असर के प्रति सतर्क हैं, इस तमाशे को नयी दिल्ली के नीतिगत प्रतिष्ठान पर वाशिंगटन के अनुचित प्रभाव के प्रमाण के रूप में लिया है. जिसे गोर पुल बनाना कहते हैं, उनके आलोचक उसे प्रभाव का सौदा और हिंदुस्तान के निर्णय लेने वाले तंत्र में एक सुनियोजित पैठ मानते हैं. गोर हिंदुस्तान-अमेरिका व्यापार सौदे को आगे बढ़ाने, रूसी तेल खरीद से जुड़े टैरिफ समायोजन पर बातचीत करने और सेमीकंडक्टर तथा एआइ आपूर्ति शृंखलाओं के लिए ‘पैक्स सिलिका डिक्लेरेशन’ जैसी पहलों का समर्थन करने में सहायक रहे हैं. अपने उद्घाटन दूतावास संबोधन और बाद की टिप्पणियों में उन्होंने खुद को एक अपरिहार्य सेतु निर्माता के रूप में पेश किया है. फिर भी, इस सौहार्द के नीचे एक चिंताजनक विषमता छिपी है. आलोचकों ने उनकी इस अति संलिप्तता के पैटर्न पर चिंता जतानी शुरू कर दी है. रक्षा समझौतों के बीच पश्चिमी कमान की गोर की यात्रा को एक बड़े सिंड्रोम के प्रतीक के रूप में कोसा गया है-जहां अमेरिकी दूत सलाह देना बंद कर देते हैं और निर्देश देना शुरू कर देते हैं. एक विदेशी राजदूत, जिसे अभी मुश्किल से मान्यता मिली है, एक फोर स्टार अमेरिकी एडमिरल के साथ संवेदनशील सैन्य चर्चाओं में शामिल है. यह कूटनीति नहीं है, शालीनता के लिबास में प्रभुत्व है. उनके पूर्ववर्तियों ने खुद को प्रोटोकॉल तक सीमित रखा था. गोर इससे परे जाते हैं. पहुंच की इस संस्कृति को विकसित करके, संभ्रांत लोगों को अपने आवास पर आमंत्रित करके, वायरल तस्वीरों के लिए पोज देकर और खुद को हिंदुस्तानीय सत्ता संरचनाओं की नसों में डालकर, गोर उस पुराने संदेह को खतरनाक बल देते हैं कि हिंदुस्तान अमेरिकी धुन पर नाचता है. नयी दिल्ली में गोर का यह अति सक्रिय आधिपत्य एक चेतावनी भरी कथा के रूप में काम करना चाहिए. राजनयिकों को अदृश्य प्रेरक बने रहना चाहिए, सलाहकार के रूप में कार्य नहीं करना चाहिए. हिंदुस्तान, जो प्राचीन भव्यता और आधुनिक पुनरुत्थान की सभ्यता है, ऐसे दूतों का हकदार है, जो स्वायत्तता को नष्ट किये बिना गठबंधन को ऊपर उठायें. इससे कम कुछ भी कूटनीति नहीं है, यह दूसरे नाम से प्रभुत्व है. यह उस स्वतंत्रता का अपमान है, जिसकी हिंदुस्तान इतनी मजबूती से रक्षा करता है. (ये लेखक के निजी विचार हैं.) The post अमेरिकी राजदूत गोर

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