Passports: सोशल मीडिया पर बहस छिड़ने के बाद प्रशासन ने साफ कर दिया है कि मोदी प्रशासन ने पिछले 12 सालों में पासपोर्ट को लेकर कोई नया फैसला नहीं लिया है. यह कल तय नहीं किया गया है कि पासपोर्ट नागरिकता का सबूत नहीं है. न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार प्रशासन ने बताया- पासपोर्ट अधिनियम 1967 के अनुसार, गैर-नागरिकों को भी पासपोर्ट दिया जा सकता है. क्या है पासपोर्ट अधिनियम 1967 ? पासपोर्ट अधिनियम 1967 पूरे हिंदुस्तान में विदेश यात्रा और पासपोर्ट से जुड़े नियमों (जैसे पासपोर्ट बनाना, रिन्यू करना या रद्द करना) को संभालता है. इस कानून में एक विशेष नियम है कि प्रशासन जरूरत पड़ने पर किसी विदेशी या गैर-नागरिक को भी पासपोर्ट या यात्रा से जुड़े दस्तावेज दे सकती है. इसी वजह से पासपोर्ट को नागरिकता का अंतिम सबूत नहीं माना जाता. पासपोर्ट आपकी पहचान और विदेश यात्रा के लिए एक जरूरी दस्तावेज है, जो यह तो दिखाता है कि आप नागरिक हो सकते हैं, लेकिन आपकी असली नागरिकता देश के संविधान और नागरिकता कानून (Citizenship Act) से तय होती है, किसी एक पासपोर्ट से नहीं. बॉम्बे हाई कोर्ट ने 2013 में क्या दिया था फैसला? बॉम्बे हाई कोर्ट ने 2013 में अपने फैसले में यह स्पष्ट किया था कि हिंदुस्तान में किसी भी व्यक्ति की नागरिकता ‘नागरिकता अधिनियम, 1955’ (The Citizenship Act, 1955) के तहत तय होती है. निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण पर सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आधार नागरिकता का पक्का सबूत नहीं है, बल्कि सिर्फ पहचान का दस्तावेज है. पीआईबी ने 20 दिसंबर 2019 को नागरिकता को लेकर दिया था जवाब 20 दिसंबर 2019 को प्रशासन की संस्था पीआईबी (PIB) ने एनआरसी और सीएए से जुड़े कुछ जरूरी सवालों के जवाब दिए थे. उन्होंने बताया था कि कोई भी व्यक्ति अपनी जन्म तिथि और जन्म के स्थान का प्रमाण देकर अपनी नागरिकता साबित कर सकता है. पीआईबी ने यह भी साफ किया कि हिंदुस्तान में नागरिकता देने या तय करने का काम नागरिकता नियम 2009 के तहत होता है, जो कि हमारे मूल नागरिकता कानून 1955 पर बने हैं. पासपोर्ट को लेकर विदेश मंत्रालय ने क्या दिया था बयान विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने 24 जून पासपोर्ट सेवा दिवस के दिन बयान दिया कि पासपोर्ट यात्रा का दस्तावेज है, नागरिकता का सबूत नहीं. यह ऐसा दस्तावेज नहीं है जो नागरिकता साबित करता हो. बयान सामने के बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई. राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने इस मामले पर प्रशासन पर निशाना साधा. उन्होंने एक्स पर कहा, तो फिर कौन सा दस्तावेज नागरिकता का साक्ष्य है? बीएलओ मेरी नागरिकता पर शक कर सकता है, मुझे वोट देने से रोक सकता है. नतीजा : भाजपा चुनाव जीत जाती है. MEAJune 24, 2026 : “A passport is a travel document, and not a document of citizenship.” Which document then is proof of citizenship? BLO can doubt my citizenship Deprive me of my vote Result BJP wins the election Over to Supreme Court ! — Kapil Sibal (@KapilSibal) June 24, 2026 भाजपा नेता अमित मालवीय ने क्या कहा? भाजपा नेता अमित मालवीय ने कहा कि विदेश मंत्रालय ने कोई नई नीति घोषित नहीं की है, बल्कि केवल एक स्थापित कानूनी स्थिति को दोहराया है. एक्स पर एक पोस्ट में, उन्होंने कहा कि हिंदुस्तानीय अदालतों ने बार-बार यह माना है कि पासपोर्ट नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं है, और 2013 के बॉम्बे उच्च न्यायालय के फैसले और बाद के उन कथनों का हवाला दिया है जिनमें कहा गया है कि नागरिकता का निर्धारण नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत पात्रता और सहायक साक्ष्यों के आधार पर किया जाता है. महुआ मोइत्रा ने प्रशासन पर कसा तंज तृणमूल कांग्रेस नेता महुआ मोइत्रा ने इस मुद्दे पर प्रशासन पर तंज कसा. उन्होंने एक्स पर कहा, ऐसा लगता है कि आज हिंदुस्तानीय नागरिकता का एकमात्र सबूत हिंदू और भाजपा का मतदाता होना है. इसके अलावा और कुछ नहीं चलेगा. गीतकार जावेद अख्तर ने विदेश मंत्रालय के बयान को बताया बेतुका गीतकार जावेद अख्तर ने विदेश मंत्रालय के स्पष्टीकरण को बेतुका बताया. उन्होंने एक्स पर कहा, विदेश मंत्रालय का कहना है कि पासपोर्ट यात्रा का दस्तावेज है, नागरिकता का सबूत नहीं. सच में??? तो क्या वे कुछ लोगों को यह यात्रा दस्तावेज पूरी तरह आश्वस्त हुए बिना दे रहे हैं कि यह व्यक्ति हिंदुस्तानीय नागरिक है?? यह बेतुका है. The post क्या गैर-नागरिकों को भी मिल सकता है हिंदुस्तानीय पासपोर्ट? जानिए क्या कहता है पासपोर्ट अधिनियम 1967 appeared first on Naya Vichar.