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Author name: Vinod Jha

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दिल्ली टीम में नहीं मिला मौका, पिता के एक फैसले ने रातोंरात बदली संजू सैमसन की किस्मत

Sanju Samson Father Decision: दिल्ली की गलियों से निकलकर हिंदुस्तानीय क्रिकेट के बड़े सितारों में शामिल हुए संजू सैमसन ने अपने करियर के शुरुआती संघर्षों और पिता के बड़े फैसले को जियोस्टार के शो ‘सुपरस्टार्स’ में याद किया है. टी20 विश्व कप 2026 में हिंदुस्तान की खिताबी जीत में अहम भूमिका निभाने वाले विकेटकीपर बल्लेबाज ने बताया कि दिल्ली की राज्य टीम में जगह नहीं मिलने के बाद उनके पिता विश्वनाथन ने पूरा परिवार केरल शिफ्ट करने का फैसला लिया था. सैमसन के मुताबिक, यही फैसला उनके क्रिकेट करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ. जियोस्टार से बात करते हुए सैमसन ने क्या कहा? जियोस्टार के शो ‘सुपरस्टार्स’ में बातचीत के दौरान सैमसन ने कहा कि स्कूल के दिनों में वह अपने दोस्तों को डीडीसीए की जैकेट पहनकर दिल्ली का प्रतिनिधित्व करते देखते थे, जिससे उन्हें भी राज्य टीम के लिए स्पोर्ट्सने की प्रेरणा मिलती थी. उन्होंने कई बार ट्रायल और स्टेट कैंप में हिस्सा लिया तथा रन भी बनाए, लेकिन दिल्ली की टीम में जगह नहीं बना सके. सैमसन ने बताया, “एक दिन ट्रायल खत्म होने के बाद टीम की सूची जारी हुई और उसमें मेरा नाम नहीं था. हम चुपचाप घर लौट आए. घर पहुंचते ही मेरे पापा ने मां से कहा कि हमें केरल जाना होगा और शिफ्ट होना होगा.” पिता अपने फैसले पर अड़े रहे सैमसन ने कहा कि उनकी मां ने बच्चों की पढ़ाई का हवाला देते हुए कुछ साल इंतजार करने की बात कही, लेकिन उनके पिता अपने फैसले पर अड़े रहे. सैमसन के अनुसार, “पापा ने कहा कि हमें अभी जाना है. सामान पैक करो, मैं तीन दिन में टिकट बुक कर रहा हूं.” इसके बाद पूरा परिवार केरल चला गया और वहीं से उनके पेशेवर क्रिकेट सफर की शुरुआत हुई. सैमसन ने बचपन की यादें शेयर की सैमसन ने दिल्ली में अपने बचपन की यादें भी साझा कीं. उन्होंने बताया कि उनके पिता दिल्ली पुलिस की फुटबॉल टीम का हिस्सा थे और स्पोर्ट्स का माहौल बचपन से ही उनके आसपास था. जीटीबी नगर स्थित पुलिस कॉलोनी में दोस्तों के साथ टेनिस बॉल से क्रिकेट स्पोर्ट्सते-स्पोर्ट्सते उनका स्पोर्ट्स के प्रति लगाव बढ़ा. फुटबॉल स्पोर्ट्सने के लिए कभी मजबूर नहीं किया हिंदुस्तानीय बल्लेबाज ने कहा कि उनके पिता ने कभी उन्हें फुटबॉल स्पोर्ट्सने के लिए मजबूर नहीं किया, जबकि वह खुद फुटबॉल से जुड़े थे. सैमसन के मुताबिक, उनके पिता को उनकी बल्लेबाजी में प्रतिभा नजर आई और उन्होंने उन्हें तथा उनके भाई को क्रिकेट पर ध्यान देने की सलाह दी. अरुण जेटली स्टेडियम से जुड़े यादों को लेकर सैमसन ने क्या कहा? सैमसन ने दिल्ली के फिरोज शाह कोटला (अब अरुण जेटली स्टेडियम) के नाम से जाना जाता है. संजू से वहां की एक खास याद को भी शेयर किया. उन्होंने बताया कि उनके पिता की वहां ड्यूटी थी और उन्होंने विशेष अनुमति लेकर उन्हें नेट्स में अभ्यास करने का मौका दिलाया. सैमसन ने कहा कि वह, उनके भाई और उनके पिता करीब एक घंटे तक नेट्स में अभ्यास करते रहे, जो उनके बचपन की सबसे यादगार क्रिकेट की यादों में से एक है. आज हिंदुस्तानीय क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बना चुके संजू सैमसन का मानना है कि उनके पिता का दिल्ली छोड़कर केरल जाने का फैसला ही उनके करियर की नींव बना, जिसने उन्हें घरेलू क्रिकेट से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का रास्ता दिखाया. यह भी पढ़ें: हिंदुस्तान-इंग्लैंड का दूसरा टी20 मुकाबला फ्री में कब, कहां और कैसे देखें? जानें पूरी डिटेल The post दिल्ली टीम में नहीं मिला मौका, पिता के एक फैसले ने रातोंरात बदली संजू सैमसन की किस्मत appeared first on Naya Vichar.

पटना, बिहार

बख्तियारपुर–ताजपुर पुल निर्माण के दौरान CFT मशीन में तकनीकी खराबी, ट्रे झुकने से 4 मजदूर घायल

नया विचार न्यूज़ पटना। बख्तियारपुर–ताजपुर पुल परियोजना में शनिवार सुबह निर्माण कार्य के दौरान एक तकनीकी खराबी के कारण हादसा हो गया। घटना सुबह करीब 9 बजे परियोजना के P-38 पिलर पर हुई, जहां निर्माण कार्य में इस्तेमाल की जा रही CFT मशीन के एक हिस्से में अचानक तकनीकी खराबी आ गई। इसके चलते मशीन के नीचे लगी ट्रे एक ओर झुक गई और वहां काम कर रहे चार श्रमिक इसकी चपेट में आकर घायल हो गए। घटना के तुरंत बाद मौके पर मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। सभी घायल श्रमिकों को तत्काल उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल भेजा गया, जहां उनका इलाज जारी है। चिकित्सकों की निगरानी में उनका समुचित उपचार किया जा रहा है। पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि घायलों के स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखी जा रही है और उन्हें हरसंभव चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। हादसे के बाद संबंधित स्थल पर तकनीकी टीम को बुलाकर मशीन की जांच शुरू कर दी गई। साथ ही आवश्यक मरम्मत का कार्य भी प्रारंभ कर दिया गया है, ताकि निर्माण कार्य पूरी सुरक्षा के साथ आगे बढ़ाया जा सके। विभाग घटना के कारणों की भी विस्तृत जांच कर रहा है। पथ निर्माण विभाग ने कहा कि राज्य प्रशासन और विभाग के लिए श्रमिकों का जीवन, स्वास्थ्य और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। विभाग परियोजना में कार्यरत सभी श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन कराने के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि बख्तियारपुर–ताजपुर पुल परियोजना की गुणवत्ता, निर्माण कार्य की सुरक्षा और समयबद्ध क्रियान्वयन को लेकर किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

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रिश्ते में बढ़ रही हैं गलतफहमियां? कम्युनिकेशन बेहतर बनाने के लिए अपनाएं ये टिप्स

Relationship Tips: हर रिश्ते की नींव भरोसे, सम्मान और बेहतर बातचीत पर टिकी होती है. जब दो लोग खुलकर अपनी बातें साझा करते हैं, तो एक-दूसरे को समझना आसान हो जाता है. लेकिन समय के साथ कई बार व्यस्त दिनचर्या, काम का दबाव या छोटी-छोटी गलतफहमियां कम्युनिकेशन को प्रभावित करने लगती हैं. ऐसे में रिश्ते में दूरी महसूस होने लगती है. अगर आप चाहते हैं कि आपका रिश्ता लंबे समय तक मजबूत और खुशहाल बना रहे, तो रोजमर्रा की कुछ छोटी आदतें आपके लिए काफी मददगार साबित हो सकती हैं. आइए जानते हैं उन आसान तरीकों के बारे में. खुलकर अपनी बात रखें PC- Gemini अगर किसी बात से आपको खुशी, दुख या परेशानी महसूस हो रही है, तो उसे मन में दबाकर रखने के बजाय अपने पार्टनर से शांत तरीके से साझा करें. खुलकर बातचीत करने से एक-दूसरे की भावनाओं को समझना आसान होता है और गलतफहमियां पनपने की संभावना कम रहती है. सही समय पर करें बातचीत PC- Gemini हर विषय पर तुरंत बात करना जरूरी नहीं होता. अगर मामला संवेदनशील है, तो ऐसे समय का इंतजार करें जब आप दोनों शांत हों और बिना किसी जल्दबाजी के एक-दूसरे की बात सुन सकें. सही समय पर की गई बातचीत अक्सर बेहतर नतीजे देती है. ध्यान से सुनना भी है जरूरी अच्छा कम्युनिकेशन सिर्फ अपनी बात कहने तक सीमित नहीं होता, बल्कि सामने वाले की बात को पूरे ध्यान से सुनना भी उतना ही जरूरी है. बीच में टोके बिना पार्टनर की बात सुनें और उनकी भावनाओं को समझने की कोशिश करें. सम्मानजनक भाषा का करें इस्तेमाल गुस्से या बहस के दौरान कटु शब्दों का इस्तेमाल रिश्ते को नुकसान पहुंचा सकता है. इसलिए हमेशा सम्मानजनक भाषा में अपनी बात रखें. इससे बातचीत सकारात्मक बनी रहती है और विवाद बढ़ने की संभावना कम होती है. रोज थोड़ा समय साथ बिताएं भले ही दिन कितना भी व्यस्त क्यों न हो, अपने पार्टनर के लिए कुछ समय जरूर निकालें. साथ बैठकर दिनभर की बातें करना, एक-दूसरे का हाल पूछना और छोटी-छोटी खुशियां साझा करना रिश्ते को मजबूत बनाता है. रिश्ते में बेहतर कम्युनिकेशन किसी एक दिन में नहीं बनता, बल्कि यह रोज की छोटी-छोटी कोशिशों का परिणाम होता है. अगर दोनों साथी एक-दूसरे की बात समझने और सम्मान देने की आदत अपनाएं, तो रिश्ता लंबे समय तक मजबूत, खुशहाल और भरोसेमंद बना रह सकता है. यह भी पढ़ें: रियल लव या टाइम पास? इन इशारों से तुरंत समझ जाएंगे रिश्ते का सच The post रिश्ते में बढ़ रही हैं गलतफहमियां? कम्युनिकेशन बेहतर बनाने के लिए अपनाएं ये टिप्स appeared first on Naya Vichar.

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राम मंदिर चंदा विवाद पर मोहन भागवत की पहली प्रतिक्रिया-राम-राम

Mohan Bhagwat: राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने अयोध्या राम मंदिर चंदा विवाद पर पहली बार प्रतिक्रिया दी है. शनिवार को नागपुर में जब उनसे पत्रकारों ने इस बारे में पूछा तो उन्होंने बहुत ही संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए केवल राम-राम कहा. पत्रकारों ने उनसे पूछा था कि चंदा में कथित हेराफेरी से भगवान राम में लोगों की आस्था को धक्का पहुंचाने की कोशिश हुई है, तो वे बस छोटा सा जवाब देकर चले गए. मोहन भागवत का यह बयान, संघ के प्रशासन्यवाह दत्तात्रेय होसबाले के उस बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने यह कहा था कि चंदा में हेरफेर के मामले से रामभक्तों की आस्था को ठेस पहुंची है. उन्होंने यह मांग भी भी की थी कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए. #WATCH | Nagpur, Maharashtra: “Ram-Ram, ” says RSS chief Mohan Bhagwat when asked that some people are undermining faith in Lord Shri Ram pic.twitter.com/JvnandvqAL — ANI (@ANI) July 3, 2026 हिंदू धर्म को बदनाम करने की कोशिश दत्तात्रेय होसबाले ने शुक्रवार को अपने बयान में कहा था कि चंदा विवाद की घटना से बहुत दुखी और गुस्से में हूं. उन्होंने मामले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) से दोषियों को सजा दिलाने की अपील की थी. उन्होंने यह भी कहा था कि हिंदू विरोधी और देश विरोधी ताकतें हिंदू धर्म को बदनाम करने के लिए इस घटना का फायदा उठाने की कोशिश कर रही हैं. होसबाले ने राम भक्तों से धैर्य और संयम बरतने की अपील की थी. चंदा विवाद के बाद से विपक्ष के निशाने पर है मोदी प्रशासन श्रीराम मंदिर चंदा विवाद के सामने आने के बाद से मोदी प्रशासन विपक्ष के निशाने पर है. विपक्ष का यह कहना है कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में राममंदिर बनवाने का श्रेय खुद ले रहे हैं, तो उन्हें यहां हुई चंदा चोरी की जिम्मेदारी भी लेनी होगी. चंदा विवाद सामने आने के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने इस्तीफा दे दिया है. बावजूद इसके उनकी भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं. विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने भी अपने बयान में यह कहा था कि इस मामले में चंपत राय लापरवाही के दोषी हो सकते हैं. ये भी पढ़ें : राम मंदिर चंदा मामले में RSS की पहली प्रतिक्रिया, होसबाले ने कहा-हिंदू समाज धैर्य बनाए रखे The post राम मंदिर चंदा विवाद पर मोहन भागवत की पहली प्रतिक्रिया-राम-राम appeared first on Naya Vichar.

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संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त तक, इन मुद्दों पर आमने-सामने होंगे सत्तापक्ष और विपक्ष

Parliament Monsoon Session 2026 Date: इस सत्र के दौरान कुल 25 दिनों की अवधि में प्रशासन और विपक्ष के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर तीखी बहस होने के आसार हैं. साथ ही कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा हो सकती है. संसद सत्र की जानकारी संसदीय कार्य मंत्री और अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने दी. Monsoon session 2026 of the Parliament to be held from 20th July to 13th August. pic.twitter.com/AhxNRQzAXe — ANI (@ANI) July 4, 2026 पश्चिम बंगाल में बीजेपी की धमाकेदार जीत के बाद होने जा रहा मानूसन सत्र मानसून सत्र पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में बीजेपी और उसके सहयोगियों की जीत के बाद होने जा रहा है. इसमें पश्चिम बंगाल की जीत भाजपा के लिए सबसे अहम है, क्योंकि वह पहली बार राज्य की सत्ता में आई है. मानसून सत्र में दिख सकता है तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (UBT) में बगावत का असर तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (UBT) में बगावत का असर भी मानसून सत्र में देखने को मिल सकता है. लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को 20 TMC और छह शिवसेना (UBT) सांसदों की उस मांग पर फैसला लेना है, जिसमें उन्होंने अलग गुट के तौर पर मान्यता मांगी है. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को तृणमूल के 20 और शिवसेना (UBT) के छह सांसदों की उस मांग पर फैसला लेना है, जिसमें उन्होंने अलग गुट के तौर पर मान्यता मांगी है. प्रशासन के लिए पिछला सत्र रहा था निराशाजनक पिछला सत्र प्रशासन के लिए इस लिहाज से निराशाजनक था कि 2029 से लोकसभा एवं विधानसभाओं में स्त्रीओं के लिए आरक्षण लागू करने तथा लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाने संबंधी संविधान संशोधन विधेयक निचले सदन में पारित नहीं हो पाया था. प्रशासन के एजेंडे में शामिल हैं प्रमुख विधेयक परिसीमन विधेयक (Delimitation Bill): अप्रैल के विशेष सत्र में दो-तिहाई बहुमत की कमी (352 वोटों की जरूरत थी, लेकिन 298 मिले थे) के कारण यह पास नहीं हो पाया था. हालांकि, विपक्ष (TMC और शिवसेना-UBT) के आंतरिक समीकरणों और बगावत के बाद बदले नेतृत्वक माहौल में प्रशासन इस ऐतिहासिक विधेयक को दोबारा पास कराने की पूरी कोशिश करेगी. स्त्री आरक्षण संशोधन विधेयक: 33% स्त्री आरक्षण को पूरी तरह से लागू करने के लिए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की सीटों की संख्या में वृद्धि करने से जुड़ा यह संविधान संशोधन विधेयक भी प्रशासन की प्राथमिकताओं में है. 130वां संविधान संशोधन विधेयक (PM-CM की अयोग्यता से जुड़ा बिल): इस विधेयक पर बनी संयुक्त संसदीय समिति (JPC) 17 जुलाई को अपनी रिपोर्ट सौंप सकती है. इस विधेयक के अनुसार कोई भी प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री जेल में रहते हुए पद पर नहीं रह सकेगा. गिरफ्तारी के 30 दिनों के भीतर जमानत न मिलने पर, 31वें दिन पद छोड़ना होगा. विपक्ष इन मुद्दों पर प्रशासन को घेरने की तैयारी में मानसून सत्र काफी हंगामेदार होने के आसार हैं. सत्र में विपक्ष को पेपर लीक और परीक्षा विवाद, 130वें संविधान संशोधन का विरोध, विपक्षी दलों में तोड़-फोड़ और सांसदों का दलबदल, महंगाई और बेरोजगारी, ऑपरेशन सिंदूर, राम मंदिर चंदा चोरी जैसे मुद्दों को लेकर प्रशासन को घेरने की तैयारी में है. ये भी पढ़ें: रक्षा मंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव लाने की तैयारी में कांग्रेस, क्या है पूरा मामला? The post संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त तक, इन मुद्दों पर आमने-सामने होंगे सत्तापक्ष और विपक्ष appeared first on Naya Vichar.

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चंद्रिमा भट्टाचार्य ने भी छोड़ा ममता बनर्जी का साथ, सभी पदों से दिया इस्तीफा, नहीं जायेंगी कालीघाट

खास बातें ऑथराइज्ड सिग्नेटरी के अधिकार भी छोड़े सुब्रत बख्शी की जगह मिली थी प्रदेश अध्यक्ष की कमान दमदम उत्तर विधानसभा सीट से चुनाव हार गयीं थीं चंद्रिमा नेताओं के पलायन के बीच इस्तीफे ने बढ़ायी मुश्किलें Chandrima Bhattacharya TMC Resignation: 80 में 58 विधायक छोड़ चुके हैं ममता का साथ Chandrima Bhattacharya TMC Resignation: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में करारी हार के बाद अंदरूनी कलह और बिखराव से जूझ रही तृणमूल कांग्रेस (TMC) को शनिवार को एक और झटका लगा. पार्टी की नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व वरिष्ठ मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य (Chandrima Bhattacharya) ने पार्टी के सभी सांगठनिक पदों से इस्तीफा दे दिया है. ऑथराइज्ड सिग्नेटरी के अधिकार भी छोड़े चंद्रिमा भट्टाचार्य ने तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी को एक पत्र भेजकर सूचित किया है कि वह प्रदेश अध्यक्ष के दायित्व से तत्काल प्रभाव से मुक्त हो रही हैं. उन्होंने न केवल अध्यक्ष पद छोड़ा है, बल्कि पार्टी के सभी सांगठनिक पदों, बैंक खातों के आधिकारिक हस्ताक्षरकर्ता (Authorized Signatory) के अधिकार और चुनाव आयोग के समक्ष ममता बनर्जी के अधिकृत प्रतिनिधि के तौर पर भी अपनी दावेदारी वापस ले ली है. सुब्रत बख्शी की जगह मिली थी प्रदेश अध्यक्ष की कमान पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में निराशाजनक प्रदर्शन और टूट के बाद ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस ने पार्टी में बड़ा फेरबदल किया था. 5 जून को ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पर हुई राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में अनुभवी नेता सुब्रता बख्शी को हटाकर चंद्रिमा भट्टाचार्य को पश्चिम बंगाल टीएमसी का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया था. इसे भी पढ़ें : चंद्रिमा भट्टाचार्य का स्टाइल स्टेटमेंट और घर में डर्बी युद्ध, जानें ममता बनर्जी की भरोसेमंद मंत्री के अनसुने राज दमदम उत्तर विधानसभा सीट से चुनाव हार गयीं थीं चंद्रिमा हालांकि, इस चुनाव में चंद्रिमा खुद दमदम उत्तर (Dum Dum Uttar) विधानसभा सीट से भाजपा के सौरभ सिकदार से चुनाव हार गयीं थीं. चुनाव हारने के बावजूद पार्टी को पुनर्जीवित करने के लिए उन्हें यह बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गयी थी, लेकिन पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष और आंतरिक गुटबाजी के कारण वे एक महीना भी इस पद पर नहीं टिक सकीं. बंगाल की समाचारें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें नेताओं के पलायन के बीच इस्तीफे ने बढ़ायी मुश्किलें चंद्रिता भट्टाचार्य का यह इस्तीफा ऐसे समय में आया है, जब तृणमूल कांग्रेस पहले से ही चौतरफा कानूनी और नेतृत्वक संकटों से घिरी हुई है. पार्टी के बागी नेता रीतब्रत बनर्जी के गुट की शिकायत के बाद बिधाननगर पुलिस और कलकत्ता हाईकोर्ट ने टीएमसी के करीब 440 करोड़ रुपए वाले बैंक खातों पर रोक (Debit Freeze) लगा रखी है. West Bengal | Chandrima Bhattacharya, who was supporting Mamata Banerjee, resigns from all posts of the party. pic.twitter.com/gHbVVmdLBm — ANI (@ANI) July 4, 2026 Chandrima Bhattacharya TMC Resignation: 80 में 58 विधायक छोड़ चुके हैं ममता का साथ विधानसभा चुनाव में हार के बाद टीएमसी के 80 में से 58 विधायक पहले ही पाला बदलकर रीतब्रत बनर्जी के बागी धड़े में शामिल हो चुके हैं. ममता बनर्जी की बेहद करीबी चंद्रिमा भट्टाचार्य का इस तरह पूरी तरह से सांगठनिक सांगठों से पीछे हट जाना इस बात का संकेत है कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और अस्तित्व की जंग गंभीर मोड़ पर पहुंच चुकी है. इसे भी पढ़ें चुनाव आयोग पहुंचा तृणमूल का ‘सिंबल’ युद्ध, 10 बागी विधायक दिल्ली में, ममता बनर्जी बोलीं- गद्दार हमेशा गद्दार ही रहेंगे पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में क्यों नहीं आयीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी? पश्चिम बंगाल में 4.06 लाख करोड़ का बजट पेश, चंद्रिमा भट्टाचार्य की बड़ी घोषणाएं यहां पढ़ें पश्चिम बंगाल का बजट : प्रशासनी कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 4 प्रतिशत बढ़ाने का ऐलान The post चंद्रिमा भट्टाचार्य ने भी छोड़ा ममता बनर्जी का साथ, सभी पदों से दिया इस्तीफा, नहीं जायेंगी कालीघाट appeared first on Naya Vichar.

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पुराने जमाने में हर घर के बाहर क्यों होता था चबूतरा? वजह है बेहद दिलचस्प

Why old indian houses had platforms: अगर आपने गांवों या पुराने समय के बने मकानों को ध्यान से देखा होगा, तो उनके मुख्य दरवाजे के बाहर एक ऊंचा चबूतरा जरूर नजर आया होगा. आज के आधुनिक घरों में यह डिजाइन कम ही देखने को मिलता है, लेकिन पहले के समय में चबूतरा लगभग हर घर का जरूरी हिस्सा माना जाता था. यह केवल बैठने की जगह नहीं था, बल्कि परिवार और समाज की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया जाता था. लोगों के मिलने-जुलने का केंद्र पहले के समय में लोगों के पास मनोरंजन के साधन बहुत सीमित थे. शाम के समय पड़ोसी और गांव के लोग घर के बाहर बने चबूतरे पर बैठकर बातचीत करते, हालचाल पूछते और दिनभर की बातें साझा करते थे. इस तरह चबूतरा सामाजिक मेल-जोल को बढ़ाने का एक अहम स्थान हुआ करता था. घर की निजता बनाए रखने में मददगार पुराने समय में अगर कोई मेहमान या बाहरी व्यक्ति घर आता था, तो उसे सीधे अंदर ले जाने के बजाय चबूतरे पर ही बैठाया जाता था. इससे घर के भीतर रहने वाले लोगों, खासकर स्त्रीओं की निजता बनी रहती थी. साथ ही घर का कामकाज भी बिना किसी रुकावट के चलता रहता था. रोजमर्रा के कामों के लिए उपयोगी चबूतरा स्त्रीओं के लिए भी काफी काम की जगह था. यहां बैठकर अनाज साफ करना, सब्जियां काटना, अचार या पापड़ सुखाना, सर्दियों में धूप सेंकना और पड़ोस की स्त्रीओं के साथ बातचीत करना आम बात थी. इसलिए यह घर की दिनचर्या का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता था. बारिश और गंदगी से बचाव ऊंचे चबूतरे का एक व्यावहारिक फायदा भी था. इससे बारिश का पानी, कीचड़ और धूल-मिट्टी सीधे घर के अंदर नहीं पहुंच पाती थी. साथ ही जमीन से ऊंचाई होने के कारण कई छोटे-छोटे कीड़े-मकोड़ों के घर में आने की संभावना भी कम हो जाती थी. इसलिए खास था चबूतरा पुराने समय का चबूतरा केवल घर की खूबसूरती बढ़ाने के लिए नहीं बनाया जाता था. यह सामाजिक जीवन, घर की सुरक्षा, परिवार की निजता और रोजमर्रा की सुविधाओं का अहम हिस्सा था. यही वजह है कि आज भी पुराने घरों की बात होती है, तो उनके बाहर बने चबूतरे की अपनी एक अलग पहचान और महत्व याद किया जाता है. यह भी पढ़ें: पुराने घरों के बीच में क्यों होता था आंगन? वजह जानकर कहेंगे- हमारे पूर्वज कितने समझदार थे The post पुराने जमाने में हर घर के बाहर क्यों होता था चबूतरा? वजह है बेहद दिलचस्प appeared first on Naya Vichar.

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राजस्थान को 1.06 करोड़ की सौगात: पीएम मोदी बोले- चुनौती कितनी भी हो, संकल्पों से पीछे नहीं हटता भारत

PM Modi Rajasthan: इस मौके पर पीएम मोदी ने विपक्ष पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि भाजपा प्रशासनें सिर्फ शिलान्यास करके परियोजनाओं को छोड़ नहीं देतीं, बल्कि उन्हें पूरा करने के लिए दिन-रात काम करती हैं. दो महीने के भीतर पूरा किया वादा: पीएम मोदी पीएम मोदी ने विकास कार्यों की गति का जिक्र करते हुए कहा, “दो महीने पहले हमने यहां शिलान्यास किया था. इसके बाद आए एक बड़े हादसे के बावजूद इतनी तेजी से काम पूरा करना हमारी प्रशासन की कड़ी मेहनत की मिसाल है. चुनौती कितनी भी बड़ी या अप्रत्याशित हो, नया हिंदुस्तान अपने संकल्पों से पीछे नहीं हटता और न ही अपनी गति धीमी करता है. हिंदुस्तान इसे हर हाल में कर दिखाता है.” #WATCH | Balotra, Rajasthan | Prime Minister Narendra Modi says, “… The West Asia war has given rise to the biggest energy crisis of the 21st century… The willpower and efforts of the new India of the 21st century have overcome this biggest energy crisis of the 21st century.… pic.twitter.com/05GPA7PXoy — ANI (@ANI) July 4, 2026 मिडिल ईस्ट जंग के बीच ऊर्जा संकट को हिंदुस्तान ने दी मात वैश्विक हालातों पर बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध ने 21वीं सदी के सबसे बड़े ऊर्जा संकट को जन्म दिया है. लेकिन नए हिंदुस्तान की इच्छाशक्ति और समय पर लिए गए सही फैसलों ने इस संकट पर काबू पा लिया. ये भी पढ़ें: जापान की PM को ‘छोटी बहन’ क्यों बोले पीएम मोदी? जानिए इसके पीछे की पूरी कहानी घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत 2,000 रुपये तक पहुंच सकती थी : पीएम मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “हमारी LPG की लगभग 60% जरूरतें आयात से पूरी होती थीं, जिसमें से 90% सप्लाई खाड़ी देशों से होर्मुज के रास्ते आती थी, लेकिन अचानक युद्ध जैसे हालात के कारण यह सप्लाई लगभग रुक गई. आप अंदाजा लगा सकते हैं कि हमारे देश पर कितना बड़ा संकट मंडरा रहा था. संकट शुरू होते ही हमने अपनी रिफाइनरी क्षमताओं का इस्तेमाल करने पर ध्यान दिया. जो रिफाइनरियां पहले दूसरे उत्पाद बनाती थीं, उन्हें LPG बनाने के निर्देश दिए गए और सिर्फ सात दिनों के भीतर LPG का उत्पादन बढ़ गया. संकट के दौरान घरेलू LPG का उत्पादन 35,000 मीट्रिक टन से बढ़कर 54,000 मीट्रिक टन हो गया. जिन रिफाइनरियों ने पहले कभी LPG का उत्पादन नहीं किया था, उन्हें इसके लिए तैयार किया गया. प्रशासन ने यह भी सुनिश्चित किया कि खाना पकाने वाली गैस की मांग का पूरा बोझ सिर्फ़ LPG पर न पड़े. PNG कनेक्शन बढ़ाने के लिए एक अभियान शुरू किया गया. बहुत कम समय में, हिंदुस्तान ने 11 लाख से ज्यादा घरों को PNG से जोड़ा. मौजूदा हालात को देखते हुए, घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत 2,000 रुपये तक पहुंच सकती थी, जैसा कि बाजार के बड़े विशेषज्ञों ने अनुमान लगाया था. फिर भी, अभी भी घरेलू LPG सिलेंडर 950 रुपये से कम कीमत पर उपलब्ध कराया जा रहा है.” जोधपुर एयरपोर्ट का नया टर्मिनल बढ़ाएगा मारवाड़ का मान जोधपुर में नए एयरपोर्ट टर्मिनल के उद्घाटन पर प्रसन्नता जताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सोशल मीडिया पर लोग इसके आर्किटेक्चर और इंटीरियर की जमकर तारीफ कर रहे हैं. इस नए टर्मिनल में हर जगह राजस्थान की सांस्कृतिक झलक दिखाई देती है, जिससे आने वाले समय में मारवाड़ क्षेत्र में पर्यटन, व्यापार और रोजगार को एक नई गति मिलेगी. ये भी पढ़ें: हिंदुस्तान प्रशासन का एक्शन, JeM-LeT से जुड़े 23 पाकिस्तानियों को आतंकी घोषित किया The post राजस्थान को 1.06 करोड़ की सौगात: पीएम मोदी बोले- चुनौती कितनी भी हो, संकल्पों से पीछे नहीं हटता हिंदुस्तान appeared first on Naya Vichar.

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8th Pay Commission: कर्मचारियों के लिए जरूरी अपडेट, डेटा जमा करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई तक बढ़ी

8th Pay Commission: अगर आप 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) की हर छोटी-बड़ी अपडेट पर नजर रखते हैं, तो यह समाचार आपके लिए है. लाखों केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनर्स इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि नया वेतन आयोग कब अपनी सिफारिशें देगा. इसी बीच आयोग ने एक अहम फैसला लिया है. Data Collection Portal पर जरूरी जानकारी जमा करने की आखिरी तारीख अब 31 जुलाई कर दी गई है. यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि कई मंत्रालय, प्रशासनी विभाग और केंद्र शासित प्रदेश तय समय के भीतर जरूरी डेटा अपलोड नहीं कर पाए थे. आखिर डेडलाइन बढ़ाने की जरूरत क्यों पड़ी? सोचिए, अगर सभी विभाग समय पर अपनी जानकारी ही नहीं देंगे, तो वेतन आयोग सही तस्वीर कैसे तैयार करेगा? यही वजह है कि कई विभागों की मांग पर आयोग ने उन्हें थोड़ा और समय देने का फैसला किया. अब सभी संबंधित मंत्रालयों और विभागों को 31 जुलाई तक अपना डेटा ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करना होगा. क्या ईमेल या PDF भेजने से काम चल जाएगा? बिल्कुल नहीं. आयोग ने साफ शब्दों में कहा है कि Data Collection Portal के अलावा किसी भी माध्यम से भेजी गई जानकारी स्वीकार नहीं की जाएगी. इन तरीकों से भेजा गया डेटा मान्य नहीं होगा— ईमेल फिजिकल कॉपी Excel शीट PDF फाइल कोई भी दूसरा माध्यम यानी संबंधित संस्थाओं को सिर्फ आधिकारिक पोर्टल का ही इस्तेमाल करना होगा. इस डेटा का कर्मचारियों से क्या कनेक्शन है? असल में, 8वां वेतन आयोग देशभर से जरूरी जानकारी और सुझाव जुटा रहा है. मंत्रालयों और विभागों से मिलने वाला यही डेटा आगे चलकर वेतन, भत्तों और पेंशन से जुड़ी सिफारिशें तैयार करने में मदद करेगा. यानी यह प्रक्रिया सीधे तौर पर आयोग की रिपोर्ट तैयार करने का हिस्सा है. फिलहाल आयोग की योजना 2027 के मध्य तक अपनी अंतिम रिपोर्ट प्रशासन को सौंपने की है. अब आगे क्या होगा? डेटा जुटाने के साथ-साथ आयोग अलग-अलग राज्यों में जाकर भी कर्मचारियों के संगठनों और अन्य हितधारकों से बातचीत कर रहा है. इसी कड़ी में 6 और 7 जुलाई को आयोग भुवनेश्वर (ओडिशा) का दौरा करेगा. वित्त मंत्रालय के अनुसार, जो केंद्रीय प्रशासनी संगठन, संस्थान, कर्मचारी संघ या यूनियन आयोग से मिलकर अपनी बात रखना चाहते हैं, वे ऑनलाइन अपॉइंटमेंट लेकर बातचीत कर सकते हैं. ये भी पढ़ें: 8th Pay Commission : भुवनेश्वर में शुरू होगी अहम बैठक, सैलरी, पेंशन और HRA पर क्या होगा फैसला The post 8th Pay Commission: कर्मचारियों के लिए जरूरी अपडेट, डेटा जमा करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई तक बढ़ी appeared first on Naya Vichar.

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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में RSS के बयान पर मनोज झा बोले- आस्था से खिलवाड़ हुआ और लोगों से चुप रहने को कहा जा रहा

Ram Mandir Donation Case: अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया के बाद नेतृत्वक बयानबाजी तेज हो गई है. आरजेडी सांसद मनोज झा ने RSS के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि आस्था से जुड़े इतने बड़े मामले में सवाल पूछने वालों को गलत ठहराया जा रहा है, जबकि श्रद्धालुओं से धैर्य रखने की अपील की जा रही है. क्या कहा मनोज झा ने? मनोज झा ने कहा कि राम मंदिर फंड में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाने वालों को ‘हिंदू विरोधी’ और ‘राष्ट्र विरोधी ताकतें’ बताया जा रहा है. उन्होंने कहा कि जिन लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ हुआ है, उन्हें ही चुप रहने की सलाह दी जा रही है. सांसद ने आगे कहा कि आपकी आस्था के साथ खिलवाड़ हुआ और अब कहा जा रहा है कि चुप रहो. ‘RSS धर्म का ठेकेदार नहीं’ आरजेडी सांसद ने कहा कि कोई भी संगठन हिंदू धर्म का ठेकेदार नहीं हो सकता. उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म RSS के जन्म से पहले भी था और आगे भी रहेगा. इसलिए किसी को यह अधिकार नहीं है कि वह तय करे कौन सवाल पूछे और कौन नहीं. बिहार की ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें RSS ने क्या कहा? इससे पहले RSS ने शुक्रवार को पहली बार बयान दिया. प्रशासन्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने वीडियो जारी कर कहा कि रामलला मंदिर में रखे दानपात्रों में जमा राशि की चोरी दुर्भाग्यपूर्ण है. इससे रामभक्तों की भावनाओं और श्रद्धा को आघात पहुंचा है. उन्होंने आगे कहा कि उनका भरोसा बचाना जरूरी है. स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की जांच में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उन्हें कठोर दंड मिलना चाहिए. दत्तात्रेय होसबाले ने आगे कहा कि करोड़ों रामभक्तों के समर्पण, त्याग और बलिदान से भव्य राम मंदिर का निर्माण हुआ है. ट्रस्ट को मंदिर के प्रबंधन और संचालन व्यवस्था में मौजूद सभी कमियों को दूर करने के लिए प्रभावी कदम उठाना चाहिए. करोड़ों रामभक्तों की आस्था और विश्वास को बनाए रखने के लिए वित्तीय प्रबंधन, संचालन प्रणाली और व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी, त्रुटिरहित और धर्मसम्मत होनी चाहिए. हिंदू समाज धैर्य और संयम बनाए रखे प्रशासन्यवाह होसबाले ने हिंदू समाज से धैर्य और संयम बनाए रखने की अपील भी की. उन्होंने कहा कि कुछ हिंदू विरोधी और राष्ट्र विरोधी ताकतें इस घटना का फायदा उठाकर हिंदू धर्म और समाज की छवि खराब करने की कोशिश कर रहीं हैं. ऐसे प्रयासों को विफल करने के लिए संयम जरूरी है. Also Read: बिहार में मुखिया का चुनाव लड़ने से पहले पढ़ लें ये समाचार, 10 साल बाद बदल सकता है आरक्षण रोस्टर, जानिए क्या है नियम The post राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में RSS के बयान पर मनोज झा बोले- आस्था से खिलवाड़ हुआ और लोगों से चुप रहने को कहा जा रहा appeared first on Naya Vichar.

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