Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का माहौल गरमाता जा रहा है और बीजेपी की उम्मीदवार सूची पर सबकी नजरें टिकी हैं. इस बीच पटना की कुम्हरार सीट से पांच बार के विधायक अरुण कुमार सिन्हा ने आगामी चुनाव न लड़ने की घोषणा कर नेतृत्वक गलियारों में हलचल मचा दी है. पार्टी की पहली लिस्ट आने से पहले ही सिन्हा के इस कदम ने टिकट वितरण को लेकर चल रही अटकलों को और हवा दे दी है.
सूची जारी होने से पहले ही पीछे हटे सिटिंग विधायक
बीजेपी की पहली उम्मीदवार सूची अभी जारी नहीं हुई है, लेकिन उससे पहले ही सिटिंग विधायक अरुण कुमार सिन्हा ने अपनी दावेदारी से हटने की घोषणा की. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर उन्होंने लिखा— “आगामी विधानसभा चुनाव में मैं प्रत्याशी के रूप में चुनाव नहीं लड़ूंगा, लेकिन संगठन के लिए कार्य करता रहूंगा. पिछले 25 वर्षों में आप सभी ने जो विश्वास एवं सहयोग दिया, उसका सदा आभारी रहूंगा. कार्यकर्ता सर्वोपरि, संगठन सर्वोपरि.”
उनके इस बयान ने साफ कर दिया कि कुम्हरार सीट पर इस बार बीजेपी की तरफ से नया चेहरा उतरने वाला है.
आगामी विधानसभा चुनाव में मैं प्रत्याशी के रूप में चुनाव नहीं लडूंगा, लेकिन संगठन के लिए कार्य करता रहूँगा ।
पिछले 25 वर्षों में आप सभी ने जो विश्वास एवं सहयोग दिया उसका सदा आभारी रहूँगा ।
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Il संगठन सर्वों परी ll— Arun Kumar Sinha (Modi Ka Parivar) (@ArunkrsinhaMLA) October 13, 2025
वरिष्ठ नेताओं के टिकट पर ‘नई पीढ़ी’ की रणनीति का असर
बीजेपी के अंदरूनी हलकों में पिछले कुछ समय से चर्चा थी कि पार्टी इस बार अधिक आयु वाले और वरिष्ठ नेताओं के टिकट काटकर नई पीढ़ी को अवसर दे सकती है. इसी रणनीति की आंच कुम्हरार सीट तक पहुंची और अरुण सिन्हा का नाम संभावित बदलाव की सूची में बताया जा रहा था. सिन्हा का पीछे हटना इस बात की पुष्टि करता दिख रहा है कि पार्टी इस चुनाव में चेहरे बदलने की नीति पर गंभीरता से काम कर रही है.
कुम्हरार सीट: बीजेपी का पारंपरिक गढ़, अरुण सिन्हा का दबदबा
कुम्हरार विधानसभा सीट पटना शहर की नेतृत्व में बीजेपी का एक मजबूत गढ़ मानी जाती है. अरुण कुमार सिन्हा यहां से लगातार कई बार चुनाव जीतते आए हैं और उन्होंने अपने कार्यकाल में पटना में कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई है. उन्हें पार्टी के भीतर एक अनुशासित, ईमानदार और संगठननिष्ठ नेता के रूप में जाना जाता है. इस सीट पर उनका प्रभाव वर्षों से बना रहा है, इसलिए उनका चुनावी मैदान से हटना पार्टी के स्थानीय समीकरणों पर सीधा असर डालेगा.
‘कार्यकर्ता सर्वोपरि’, संगठन के प्रति निष्ठा दोहराई
अपने संदेश में अरुण सिन्हा ने स्पष्ट कहा कि पार्टी का निर्णय उन्हें स्वीकार है और वे आगे भी संगठन के लिए काम करते रहेंगे. उन्होंने अपने समर्थकों से अपील की कि वे बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर भरोसा बनाए रखें. सिन्हा के इस बयान को पार्टी अनुशासन और व्यक्तिगत त्याग के रूप में देख रहे हैं, खासकर उस दौर में जब टिकट कटने पर असंतोष के स्वर कई जगहों से उठते हैं.
अरुण सिन्हा का चुनाव से हटने का ऐलान उस वक्त आया है जब एनडीए में सीट बंटवारा फाइनल हो चुका है और उम्मीदवारों की सूची कभी भी जारी हो सकती है. ऐसे में इस निर्णय को एक रणनीतिक कदम भी माना जा रहा है, ताकि पार्टी के भीतर असंतोष की कोई लहर न उठे और नए चेहरे के लिए रास्ता सहजता से खुल सके.
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