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महाकुंभ में कब-कब होगा शाही स्नान? जानिए टेंट से लेकर रहने तक की सारी डिटेल्स

नया विचार – देश दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक अनुष्ठान महाकुंभ जल्द ही शुरू होने वाला है। इस साल प्रयागराज से संगम किनारे महाकुंभ का कार्यक्रम हो रहा है। हिंदुस्तान में चार तीर्थ स्थान व पवित्र नदियों पर महाकुंभ का आयोजन किया जाता है।वहीं मुख्य तौर पर 4 तीर्थ स्थान, उज्जैन में शिप्रा नदी , प्रयागराज संगम , गंगा नदी हरिद्वार ,व गोदावरी नदी मासिक में इस मेले का आयोजन होता है। भारी मात्रा मे लोग स्नान और दर्शन के लिए आते है। लगभग 45 दिनों तक महाकुंभ का मेला चलता है। महाकुंभ में शाही स्नान का बेहद ही ज्यादा महत्त्व है।शाही स्नान में सबसे साधु – संत स्नान करते है , उसके बाद आम तीर्थयात्री गंगा में डुबकी लगाते है। आइए जानते है इस समाचार को विस्तार से ….. कब से कब तक चलेगा महाकुंभ का मेला 13 जनवरी 2025 से पौष पूर्णिमा से महाकुंभ की शुरुआत होने जा रही है।बता दें , महाकुंभ पूरे 12 सालों के बाद लगता है। पौष पूर्णिमा से शुरू हुआ महाकुंभ महाशिवरात्रि के दिन समाप्त होगा। यानी की महाकुंभ का आखिरी स्नानं 26 जनवरी 2025 को किया जाएगा। इस महाकुंभ में देश से ही बल्कि विदेशो से बहुत से श्रद्धालु आते है।महाकुंभ सबसे बड़ा और प्रमुख धार्मिक अनुष्ठान माना जाता है। महाकुंभ 2025 पहला शाही स्नान की तिथि  महाकुंभ का पहला शाही स्नान 14 जनवरी 2025 को किया जाएगा। इस दिन मकर सक्रांति है। हिन्दू धर्म में इस दिन गंगा स्नान करने का ख़ासा महत्त्व है। इस दिन गंगा स्नानं के साथ सूर्य देव भी पूजा करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। कहते है ऐसा करने से व्यक्ति के सभी कष्ट दूर हो जाते है। और उसकी सभी कामनाएं पूर्ण होती है। इसके साथ ही इस दिन गंगा स्नान के बाद घी , गुड़ और खिचड़ी का दान करने से सारे कष्ट दूर होते है और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन होंगे शाही स्नान  महाकुंभ मेले में शाही स्नान का बेहद ही ज्यादा महत्व है।सारे स्नान शाही नहीं होते है। महत्वपूर्ण या ख़ास दिनों पर शाही स्नान का आयोजन किया जाता है। इस साल महाकुंभ के मेले में तीन शाही स्नान होंगे व तीन सामान्य स्नान होंगे। इस साल बसंत पंचमी ,मकर सक्रांति , व मौन अमावस्या के दिन शाही स्नान रहेगा। महाकुंभ मेले में कब होगा शाही स्नान ?  14 जनवरी , 2025 ( मकर सक्रांति ) – शाही स्नान 29 जनवरी , 2025 ( मौनी अमावस्या) – शाही स्नान 3 फरवरी ( बसंत पंचमी ) – शाही स्नान इस दिन होगा आम तीर्थयात्री का स्नान  13 जनवरी 2025 ( पौष पूर्णिमा) – स्नान 12 फरवरी 2025 ( माघी पूर्णिमा) – स्नान 26 फरवरी 2025 ( महाशिवरात्रि) – स्नान महाकुंभ के टेंट में मिलेगी ये सुविधाएं और इतना होगा किराया  अगर आप भी इस फाइव स्टार होटल में रुकते है तो इसके आपको एक दिन का किराया 15 -20 हजार तक चुकाना पड़ेगा। वहीं अगर आप विला में रुकने का प्लान कर रहे है तो इसके लिए आपको 24 घंटे का 20 हजार किराया देना होगा।इसके साथ ही खाना में मिलेगा पारंपरिक और स्वादिस्ट भोजन का स्वाद। महाकुंभ में ठहरने के साथ मिलेगी और भी बहुत सी सुविधाएं… ये मिल रहा है ख़ास  पारंपरिक स्वादिष्ट भोजन – यहां का भोजन हिंदुस्तानीय परंपराओं के अनुसार तैयार किया जाता है।देशी घी से बने पकवान, खिचड़ी और तरह तरह की मिठाइयां श्रद्धालुओं को ख़ास अनुभव देती है। योग और ध्यान सेशन – गंगा के किनारे हर सुबह योग और ध्यान के कार्यक्रम होंगे , ये एक शांति और सुकून देने वाला अनुभव होगा। जो आपके मन और शरीर दोनों का खुश कर देगा। सुरक्षा और सुविधा – इस टेंट की खासियत है कि यहां सुरक्षा और सुविधाओं का खास ख्याल रखा जाता है। 24 घंटे सुरक्षा , सीसीटीवी कैमरे और स्टाफ से श्रद्धालु पूरी तरह से सुरक्षित रहेंगे।

आस्था, समस्तीपुर

श्रीमद् भागवत कथा के श्रवण से मिलती है मुक्ति :आचार्य पुरुषोत्तम

नया विचार सरायरंजन : भगवान की विभिन्न कथाओं में श्रीमद् भागवत मोक्षदायिनी है। इसके श्रवण से राजा परीक्षित को मोक्ष की प्राप्ति हुई और कलयुग में आज भी इसका प्रत्यक्ष प्रमाण देखने को मिलते हैं । यह बात ख्यातिप्राप्त श्रीमद् भागवत कथावाचक आचार्य पुरुषोत्तम दास ने सोमवार को कही। वे प्रखंड के श्रवण टॉकीज सरायरंजन के प्रांगण में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के पांच में दिन श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा के सुनने से प्राणी को मुक्ति मिलती है। सत्संग और कथा के माध्यम से मनुष्य भगवान की शरण में पहुंचता है,वरना वह इस संसार में आकर मोह माया के चक्कर में पड़ जाता है। इसलिए मनुष्य को समय निकालकर श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कलयुग में भागवत कथा साक्षात श्री हरि का रूप है। पावन हृदय से इसका स्मरण मात्र करने पर करोड़ों पुण्य का फल प्राप्त हो जाता है। इस कथा को सुनने के लिए देवी– देवता भी तरसते हैं और दुर्लभ मानव प्राणी को ही इस कथा के श्रवण का लाभ प्राप्त होता है। मौके पर रामचंद्र साहू, शिवनारायण साहू , राजेश्वर साह, प्रमोद कुमार साहू, विमल कुमार साहू , श्रवण कुमार साह, प्रद्योत कुमार हरि,विजय कुमार साहू दिनेश कुमार साहू, सोनू कुमार, मोनू कुमार,टुन्नू कुमार सहित सैकड़ो श्रद्धालु मौजूद रहे। फोटो :प्रवचन करते आचार्य पुरुषोत्तम दास

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ऐसा शिव मंदिर जहां शिवलिंग एवं मजार की होती एक साथ पूजा

नया विचार समस्तीपुर :  जिले के मोरवा स्थित खुदनेश्वर मंदिर एक अद्वितीय और विशेष मंदिर है, जो अपनी अनोखी विशेषता के लिए जाना जाता है। इस मंदिर में एक ही स्थल पर शिवलिंग और मजार स्थापित है ,जो हिंदू – मुस्लिम की एकता और सौहार्द का प्रतीक है।  मोरवा स्थित खुदनेश्वर धाम मंदिर  इस मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है, और इसकी स्थापना के बारे में कई कथाएं प्रचलित हैं। एक कथा के अनुसार, इस मंदिर की स्थापना एक स्थानीय राजा ने करवाई थी, जो भगवान शिव का बहुत बड़ा भक्त था। राजा ने अपने राज्य की समृद्धि और सुख-शांति के लिए भगवान शिव से प्रार्थना की थी और उन्होंने इस मंदिर का निर्माण करवाया था।   एक अन्य कथा के अनुसार, इस मंदिर की स्थापना एक सूफी संत ने करवाई थी, जो इस क्षेत्र में आये थे और उन्होंने यहां पर एक मजार की स्थापना की थी। बाद में कुछ हिंदू भक्तों ने इसी स्थल पर एक शिवलिंग की स्थापना की, जो आज भी यहां पर स्थापित है। इस मंदिर की विशेषता यह है कि यहां पर एक ही स्थल पर शिवलिंग और मजार को स्थापित किया गया है। यह एक अद्वितीय उदाहरण है हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बीच एकता और सौहार्द का। यह मंदिर दोनों समुदायों के लोगों के लिए एक तीर्थ स्थल के रूप में कार्य करता है, जहां वे अपनी पूजा-अर्चना और प्रार्थना कर सकते हैं। मंदिर में स्थापित शिवलिंग एवं मजार   इस मंदिर में पूजा-अर्चना और मेले की विशेषता पूरे क्षेत्र में प्रसिद्ध है। यहां की पूजा-अर्चना बहुत ही विशेष और आकर्षक है, जिसमें विभिन्न प्रकार के पूजा और अनुष्ठान किए जाते हैं। मंदिर में विभिन्न प्रकार के मेले भी लगते हैं, जिनमें स्थानीय लोगों के अलावा दूर-दूर से भी लोग आते हैं।इस मंदिर का महत्व न केवल धार्मिक है, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थल भी है। यह मंदिर समस्तीपुर जिले की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और यहां की पूजा-अर्चना और मेले की विशेषता पूरे क्षेत्र में प्रसिद्ध है। आजकल इस मंदिर को एक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल के रूप में भी विकसित किया जा रहा है। यहां की सुंदरता और आकर्षण के कारण दूर-दूर से लोग यहां आते हैं और मंदिर की विशेषता को देखते हैं। मंदिर के आसपास का क्षेत्र भी बहुत ही सुंदर और आकर्षक है, जो पर्यटकों के लिए एक आदर्श स्थल है।

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