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अब प्लास्टिक के पैकेट में नहीं मिलेगा पान मसाला, FSSAI ने बदले नियम

FSSAI के अनुसार अब पान मसाला पैक करने के लिए ऐसे किसी कागज या मटेरियल का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा, जिसमें प्लास्टिक (जैसे पॉलीथीन, PVC) या एल्युमिनियम फॉइल की परत चढ़ी हो. पैकिंग पूरी तरह प्लास्टिक-मुक्त और इको-फ्रेंडली होनी चाहिए. किन चीजों में पैक हो सकेगा पान मसाला? बिना प्लास्टिक/एल्युमिनियम कोटिंग वाले सादे कागज या नेचुरल मटेरियल में. धातु के बने छोटे टीन डिब्बों में. कांच की बोतलों या डिब्बों में. पर्यावरण के नियमों का पालन जरूरी पान मसाला बनाने वाली कंपनियों को प्लास्टिक कचरा प्रबंधन के सख्त नियमों का भी पालन करना होगा. क्यों लिया गया यह फैसला? आम तौर पर पान मसाला जिन चमकदार प्लास्टिक पाउच में आता है, वे पर्यावरण को तो नुकसान पहुंचाते ही हैं, साथ ही लंबे समय तक प्लास्टिक और केमिकल के संपर्क में रहने से सेहत पर भी बुरा असर पड़ता है. इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने जनता से सलाह और सुझाव मांगने के बाद इस नए नियम को आधिकारिक रूप से देश भर में लागू कर दिया है. ये भी पढ़ें: 10 और 20 रुपये के आएंगे प्लास्टिक नोट, प्रशासन ने 200 करोड़ नोटों के परीक्षण को दी मंजूरी The post अब प्लास्टिक के पैकेट में नहीं मिलेगा पान मसाला, FSSAI ने बदले नियम appeared first on Naya Vichar.

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लगातार तीसरी बार वेस्टइंडीज को खेलना होगा वर्ल्ड कप क्वालीफायर, 2 बार की चैंपियन को नहीं मिली डायरेक्ट एंट्री

दो बार की विश्व चैंपियन वेस्टइंडीज के लिए वनडे वर्ल्ड कप 2027 की राह मुश्किल हो गई है. टीम इस बार भी सीधे विश्व कप के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाएगी. अफगानिस्तान के क्वालीफाई करने के बाद वेस्टइंडीज की उम्मीदें खत्म हो गई. अब टीम को वर्ल्ड कप में जगह बनाने के लिए क्वालीफायर स्पोर्ट्सना होगा. लगातार तीसरी बार वेस्टइंडीज को क्वालीफायर स्पोर्ट्सना होगा. वनडे वर्ल्ड कप 2027 का आयोजन 4 अक्टूबर से 21 नवंबर के बीच होगा. दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया मिलकर इस टूर्नामेंट की मेजबानी करेंगे. तीसरी बार क्वालिफायर स्पोर्ट्सेगी वेस्टइंडीज वेस्टइंडीज फिलहाल वनडे रैंकिंग में 10वें स्थान पर है. यही वजह है कि उसे सीधे वर्ल्ड कप में जगह नहीं मिली. खास बात यह है कि लगातार तीसरी बार वेस्टइंडीज को क्वालीफायर मुकाबला स्पोर्ट्सना होगा. अब वेस्टइंडीज को वर्ल्ड कप क्वालीफायर के जरिए शानदार प्रदर्शन करते हुए वर्ल्ड कप का रास्ता तय करना होगा. 2023 में भी नहीं स्पोर्ट्सी थी वेस्टइंडीज वेस्टइंडीज 2023 में हिंदुस्तान में स्पोर्ट्से गए वनडे वर्ल्ड कप के लिए भी क्वालीफाई नहीं कर पाई थी. यह वनडे विश्व कप के इतिहास में पहली बार था, जब वेस्टइंडीज की टीम टूर्नामेंट से बाहर रही. इसके बाद टीम 2025 चैंपियंस ट्रॉफी के लिए भी क्वालीफाई नहीं कर सकी. फरवरी 2027 में होगा क्वालीफायर वर्ल्ड कप 2027 का क्वालिफाइंग टूर्नामेंट अगले साल फरवरी में स्पोर्ट्सा जाएगा. हालांकि, अभी इसकी मेजबानी किस देश को मिलेगी, यह तय नहीं हुआ है. क्वालीफायर जीतने वाली टीम को वर्ल्ड कप के दूसरे राउंड में सीधे जगह मिलेगी. क्वालीफायर में दूसरे, तीसरे और चौथे स्थान पर रहने वाली टीमों की उम्मीद भी खत्म नहीं होगी. इन तीनों टीमों को ‘सुपर सीरीज’ नाम के पहले राउंड में स्पोर्ट्सने का मौका मिलेगा. इस राउंड की विजेता टीम वर्ल्ड कप के दूसरे राउंड में पहुंचेगी और उसके पास टूर्नामेंट में जगह बनाने का एक और मौका होगा. ये भी पढ़ें: रेप केस में क्रिकेटर अभिषेक पोरेल गिरफ्तार, शादी का वादा कर संबंध बनाने का आरोप क्वालीफायर में कौन-कौन सी टीमें स्पोर्ट्सेंगी? वेस्टइंडीज और आयरलैंड के अलावा वर्ल्ड कप लीग-2 की शीर्ष चार टीमें भी क्वालिफायर में हिस्सा लेंगी. आयरलैंड और वेस्टइंडीज को 30 सितंबर 2026 की वनडे रैंकिंग के आधार पर जगह मिलेगी. ये दोनों मेजबान देशों को छोड़कर सबसे निचली रैंक वाली पूर्ण सदस्य टीमें हैं. चार टीमों की जगह के लिए पहले होगा प्लेऑफ क्वालिफायर में चार और टीमों को जगह मिलेगी. इसके लिए पहले क्वालीफायर प्लेऑफ स्पोर्ट्सा जाएगा. इसमें कुल आठ टीमें हिस्सा लेंगी. इनमें वर्ल्ड कप लीग-2 की निचली चार टीमें और चैलेंज लीग की चार टीमें शामिल होंगी. प्लेऑफ की शीर्ष चार टीमें मुख्य क्वालीफायर में पहुंचेंगी. चैलेंज लीग में कुल 12 टीमें हैं, जिन्हें छह-छह टीमों के दो ग्रुप में बांटा गया है. हर टीम तीन राउंड-रॉबिन टूर्नामेंट स्पोर्ट्सेगी. दोनों ग्रुप की शीर्ष दो टीमें आगे बढ़कर क्वालीफायर प्लेऑफ में जगह बनाएंगी. इन टीमों को मिलेगी सीधी एंट्री 30 सितंबर 2026 तक आईसीसी वनडे रैंकिंग में शीर्ष आठ स्थान पर रहने वाली टीमों को सीधे वर्ल्ड कप में जगह मिलेगी. हालांकि, इस रैंकिंग में मेजबान दक्षिण अफ्रीका और जिम्बाब्वे को नहीं गिना जाएगा, क्योंकि दोनों टीमों की जगह मेजबान होने के कारण पहले से तय है. ये भी पढ़ें: सौरव गांगुली को जान से मारने की धमकी, बेलघरिया से जुड़े तार; पुलिस ने शुरू की जांच अब तक इन टीमों ने पक्की की जगह ऑस्ट्रेलिया, हिंदुस्तान, न्यूजीलैंड, पाकिस्तान, श्रीलंका, इंग्लैंड और बांग्लादेश सीधे वर्ल्ड कप में जगह बना चुके हैं. अफगानिस्तान ने भी आयरलैंड के खिलाफ लगातार दो वनडे जीतकर अपनी जगह पक्की कर ली है. दक्षिण अफ्रीका और जिम्बाब्वे मेजबान होने के कारण पहले से ही टूर्नामेंट का हिस्सा हैं. वेस्टइंडीज के सामने बड़ी चुनौती वेस्टइंडीज के लिए यह स्थिति इसलिए भी चिंता की बात है क्योंकि टीम कभी वनडे क्रिकेट की सबसे मजबूत टीमों में गिनी जाती थी. दो बार की विश्व चैंपियन टीम अब लगातार तीसरी बार क्वालिफायर स्पोर्ट्सने की स्थिति में है. ऐसे में 2027 वर्ल्ड कप में जगह बनाने के लिए उसे क्वालिफाइंग टूर्नामेंट में अपना दम दिखाना होगा. ये भी पढ़ें: अफगानिस्तान ने पक्का किया वर्ल्ड कप टिकट, वेस्टइंडीज की राह फिर मुश्किल; जानें पूरा समीकरण The post लगातार तीसरी बार वेस्टइंडीज को स्पोर्ट्सना होगा वर्ल्ड कप क्वालीफायर, 2 बार की चैंपियन को नहीं मिली डायरेक्ट एंट्री appeared first on Naya Vichar.

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NIT दुर्गापुर का प्लेसमेंट रिकॉर्ड, 510+ जॉब ऑफर, 80 लाख का पैकेज

NIT Durgapur Placement 2026: एनआईटी दुर्गापुर की पढ़ाई के साथ-साथ यहां का प्लेसमेंट रिकॉर्ड भी छात्रों को काफी आकर्षित करता है. 2025-26 के प्लेसमेंट आंकड़ों में 510 से ज्यादा जॉब ऑफर दर्ज किए गए हैं. वहीं, इस दौरान सबसे ज्यादा पैकेज करीब 80 लाख रुपये सालाना तक पहुंचा है. आइए प्लेसमेंट रिकॉर्ड को करीब से समझते हैं. NIT Durgapur Placement 2026 में क्या रहा खास? NIT दुर्गापुर के 2025-26 प्लेसमेंट आंकड़ों को देखें तो संस्थान में 510+ जॉब ऑफर दिए गए. प्लेसमेंट का कुल प्रतिशत 84.4 फीसदी रहा. यानी हर 100 योग्य छात्रों में करीब 84 छात्रों को प्लेसमेंट मिला. कॉलेज के आंकड़ों के मुताबिक इस दौरान औसत पैकेज 12.16 लाख रुपये सालाना रहा. ब्रांच वाइज प्लेसमेंट रिकॉर्ड प्लेसमेंट ग्राफ में अलग-अलग ब्रांच के योग्य और चयनित छात्रों का आंकड़ा भी दिया गया है. इसमें CSE यानी Computer Science and Engineering के छात्रों की संख्या सबसे ज्यादा नजर आती है. CSE के करीब 145 छात्र प्लेसमेंट के लिए योग्य थे, जिनमें लगभग 130 छात्रों को जॉब ऑफर मिला. NIT दुर्गापुर का प्लेसमेंट रिकॉर्ड इसके अलावा Mechanical Engineering, Electrical Engineering, Electronics and Communication Engineering, Civil Engineering और अन्य ब्रांच के छात्रों को भी कंपनियों ने मौका दिया. ये भी पढ़ें: IIT ISM धनबाद से करना चाहते हैं कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई, जानें फीस, प्लेसमेंट और एडमिशन प्रोसेस इन कंपनियों से आए प्लेसमेंट ऑफर कंपनी सेक्टर Amazon ई-कॉमर्स / टेक्नोलॉजी Microsoft टेक्नोलॉजी / सॉफ्टवेयर Samsung इलेक्ट्रॉनिक्स / टेक्नोलॉजी Apple टेक्नोलॉजी / इलेक्ट्रॉनिक्स NVIDIA सेमीकंडक्टर / AI Intel सेमीकंडक्टर / टेक्नोलॉजी AMD सेमीकंडक्टर / प्रोसेसर Qualcomm सेमीकंडक्टर / वायरलेस टेक्नोलॉजी Cisco नेटवर्किंग / टेक्नोलॉजी Accenture IT / कंसल्टिंग Oracle सॉफ्टवेयर / क्लाउड Visa फाइनेंस / पेमेंट टेक्नोलॉजी JPMorgan Chase & Co. बैंकिंग / फाइनेंस Texas Instruments सेमीकंडक्टर / इलेक्ट्रॉनिक्स Salesforce क्लाउड / सॉफ्टवेयर Myntra ई-कॉमर्स / फैशन ICICI Bank बैंकिंग / फाइनेंस Media.net डिजिटल एडटेक / टेक्नोलॉजी Zscaler साइबर सिक्योरिटी / क्लाउड Electronic Arts गेमिंग / टेक्नोलॉजी 80 लाख का पैकेज NIT Durgapur के प्लेसमेंट सीजन में 80 लाख रुपये सालाना का हाईएस्ट पैकेज निश्चित तौर पर छात्रों के लिए सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक रहा. हालांकि सिर्फ हाईएस्ट पैकेज देखकर कॉलेज का प्लेसमेंट रिकॉर्ड समझना सही नहीं होगा. औसत पैकेज 12.16 लाख रुपये है. NIT Durgapur Placement 2026-27 Check Details NIT दुर्गापुर क्यों है खास? NIT दुर्गापुर ने NIRF Engineering Ranking में 49वीं रैंक हासिल की है. संस्थान की टीमों ने लगातार 3 बार Smart India Hackathon का खिताब जीता है. NIT दुर्गापुर की 2 टीमें ICPC Regional तक पहुंच चुकी हैं. यहां के 50 से ज्यादा छात्र Codeforces पर Expert रैंक हासिल कर चुके हैं. 40 से ज्यादा छात्रों ने LeetCode पर Knight रैंक हासिल की है. CodeChef पर 50 से ज्यादा छात्र 4-Star रेटिंग हासिल कर चुके हैं. Google Summer of Code में NIT दुर्गापुर के 5 छात्रों ने योगदान दिया है. संस्थान में 7,037 से ज्यादा रिसर्च पब्लिकेशन और 4,378 से ज्यादा जर्नल पब्लिकेशन हैं. इंटर्नशिप का भी मौका NIT दुर्गापुर में छात्रों को सिर्फ फाइनल प्लेसमेंट तक सीमित नहीं रहना पड़ता. संस्थान की ओर से इंटर्नशिप के अवसर भी मिलते हैं. शेयर किए गए प्लेसमेंट अपडेट में Amazon में 6 महीने की इंटर्नशिप हासिल करने वाले छात्रों का भी उल्लेख है. ये भी पढ़ें: IIT ISM धनबाद का प्लेसमेंट रिकॉर्ड, 1.22 करोड़ का पैकेज, 230+ कंपनियों से जॉब ऑफर The post NIT दुर्गापुर का प्लेसमेंट रिकॉर्ड, 510+ जॉब ऑफर, 80 लाख का पैकेज appeared first on Naya Vichar.

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iPhone 18 Pro Max की कीमत 1.6 लाख के पार! 2nm चिप, बड़ा बैटरी पैक और कैमरा अपग्रेड से बदलेगा गेम

Apple का अगला सबसे प्रीमियम आईफोन यानी iPhone 18 Pro Max लॉन्च से पहले ही चर्चा में है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी इस बार फोन में सिर्फ प्रोसेसर अपग्रेड तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि बैटरी, कैमरा और परफॉर्मेंस में भी बड़े बदलाव कर सकती है. सबसे बड़ा झटका हिंदुस्तानीय खरीदारों को कीमत को लेकर लग सकता है. मौजूदा लीक और सप्लाई चेन रिपोर्ट्स की मानें तो बढ़ती मेमोरी कंपोनेंट लागत के चलते iPhone 18 Pro Max की शुरुआती कीमत 1.6 लाख रुपये के पार जा सकती है. हालांकि, Apple ने अभी लॉन्च डेट, स्पेसिफिकेशन या कीमत की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है. सितंबर में हो सकता है iPhone 18 Pro Max का लॉन्च Apple आमतौर पर अपनी नई iPhone सीरीज को सितंबर में पेश करती है और iPhone 18 सीरीज के साथ भी यही रणनीति देखने को मिल सकती है. रिपोर्ट्स में सितंबर 2026 के दूसरे सप्ताह को संभावित लॉन्च विंडो बताया जा रहा है. 9 सितंबर की तारीख को लेकर भी अटकलें हैं, लेकिन Apple की तरफ से अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है. अगर कंपनी अपने पुराने लॉन्च पैटर्न को बरकरार रखती है, तो लॉन्च के कुछ समय बाद प्री-ऑर्डर शुरू हो सकते हैं और करीब एक सप्ताह बाद बिक्री शुरू होने की उम्मीद की जा सकती है. हिंदुस्तान में भी Apple का फोकस लगातार बढ़ा है, इसलिए हिंदुस्तानीय बाजार में नए Pro Max मॉडल की उपलब्धता वैश्विक लॉन्च के आसपास रहने की संभावना है. हालांकि, शुरुआती दौर में ज्यादा स्टोरेज और लोकप्रिय कलर वाले मॉडल की सप्लाई सीमित रह सकती है. कैमरे में आ सकता है बड़ा बदलाव, वेरिएबल अपर्चर की चर्चा iPhone 18 Pro Max में कैमरा सिस्टम इस बार सबसे बड़ा अपग्रेड बन सकता है. रिपोर्ट्स के अनुसार, Apple मुख्य कैमरे में वेरिएबल अपर्चर तकनीक दे सकती है. इस तकनीक में कैमरे का लेंस जरूरत के हिसाब से अपना अपर्चर बदल सकता है. कम रोशनी में ज्यादा लाइट सेंसर तक पहुंचाने के लिए बड़ा अपर्चर मददगार हो सकता है, जबकि अलग परिस्थितियों में अपर्चर को नियंत्रित करने से फोटो की डेप्थ और एक्सपोजर पर बेहतर कंट्रोल मिल सकता है. यानी सिर्फ मेगापिक्सल बढ़ाने के बजाय Apple कैमरा हार्डवेयर को ज्यादा एडवांस बनाने की कोशिश कर सकती है. टेलीफोटो कैमरे में भी बड़े अपर्चर की चर्चा है. अगर ये बदलाव अंतिम मॉडल में आते हैं, तो iPhone 18 Pro Max फोटोग्राफी और वीडियो रिकॉर्डिंग के मामले में पिछली पीढ़ी से ज्यादा सक्षम हो सकता है. बड़ी बैटरी के साथ भारी और मोटा हो सकता है फोन बैटरी को लेकर भी iPhone 18 Pro Max में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. कुछ रिपोर्ट्स में ई-सिम वाले मॉडल के लिए करीब 5,567mAh बैटरी का दावा किया गया है. तुलना के लिए iPhone 17 Pro Max में करीब 5,088mAh बैटरी होने की रिपोर्ट सामने आई है. अगर यह जानकारी सही साबित होती है, तो नए मॉडल में लगभग 500mAh ज्यादा क्षमता मिल सकती है. इसका फायदा लंबे बैटरी बैकअप के रूप में देखने को मिल सकता है. खासतौर पर वीडियो स्ट्रीमिंग, गेमिंग, कैमरा और लगातार 5G इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को इसका फायदा मिल सकता है. हालांकि, बड़ी बैटरी का असर फोन के डिजाइन पर भी पड़ सकता है. रिपोर्ट्स में iPhone 18 Pro Max का वजन 240 ग्राम से ज्यादा होने की संभावना जताई गई है. यानी ज्यादा बैटरी बैकअप के बदले यूजर्स को थोड़ा भारी और संभवतः मोटा फोन मिल सकता है. हिंदुस्तान में बिकने वाले मॉडल की वास्तविक बैटरी क्षमता सिम कॉन्फिगरेशन के आधार पर अलग हो सकती है. 2nm चिप से बढ़ेगी परफॉर्मेंस, लेकिन कीमत भी चढ़ सकती है iPhone 18 Pro Max में नई पीढ़ी की 2nm चिप मिलने की उम्मीद है. छोटे मैन्युफैक्चरिंग प्रॉसेस से चिप की पावर एफिशिएंसी और परफॉर्मेंस में सुधार की गुंजाइश रहती है. इसका सीधा फायदा गेमिंग, एआई फीचर्स, वीडियो एडिटिंग और लंबे समय तक हाई-परफॉर्मेंस इस्तेमाल में मिल सकता है. लेकिन यही नई तकनीक फोन की कीमत बढ़ाने की वजह भी बन सकती है. इसके अलावा DRAM और NAND जैसे मेमोरी कंपोनेंट की बढ़ती कीमतें भी Apple के प्रोडक्शन कॉस्ट पर असर डाल सकती हैं. खासतौर पर ज्यादा स्टोरेज वाले मॉडल में यह प्रभाव ज्यादा दिखाई दे सकता है. हिंदुस्तान में 1.6 लाख रुपये से ऊपर जा सकती है शुरुआती कीमत iPhone 17 Pro Max की हिंदुस्तान में 256GB स्टोरेज वाले मॉडल की शुरुआती कीमत 1,49,900 रुपये रही है. ऐसे में iPhone 18 Pro Max के लिए भी इसी कीमत को बनाए रखना संभव है, लेकिन इसके लिए Apple को बढ़ी हुई कंपोनेंट लागत का कुछ हिस्सा खुद वहन करना पड़ सकता है. मौजूदा रिपोर्ट्स के आधार पर 256GB मॉडल की संभावित कीमत करीब 1,49,900 रुपये से शुरू होकर 1,74,900 रुपये या उससे ऊपर तक जा सकती है. अगर कीमत में मामूली बढ़ोतरी होती है, तो यह करीब 1,54,900 से 1,59,900 रुपये के बीच हो सकती है. वहीं, ज्यादा लागत वाले परिदृश्य में कीमत 1,64,900 से 1,69,900 रुपये तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है. हालांकि, ये सभी अनुमान हैं. Apple की आधिकारिक कीमत सामने आने तक इन्हें पक्की जानकारी नहीं माना जाना चाहिए. GST, आयात शुल्क, रुपये की विनिमय दर, स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग और Apple की प्राइसिंग रणनीति अंतिम कीमत को प्रभावित कर सकती है. iPhone 17 Pro Max वालों के लिए अपग्रेड कितना सही? अगर आपके पास iPhone 15 Pro Max या इससे पुराना मॉडल है, तो iPhone 18 Pro Max में संभावित कैमरा, बैटरी और प्रॉसेसिंग अपग्रेड आपके लिए ज्यादा मायने रख सकते हैं. खासकर उन यूजर्स के लिए जो मोबाइल फोटोग्राफी, वीडियो शूटिंग और हाई-एंड गेमिंग को प्राथमिकता देते हैं. लेकिन iPhone 17 Pro Max इस्तेमाल करने वालों के लिए तस्वीर थोड़ी अलग हो सकती है. सिर्फ एक जनरेशन के बाद अपग्रेड करने से मिलने वाला फायदा तभी बड़ा होगा, जब नया कैमरा सिस्टम, 2nm चिप और बड़ी बैटरी रोजमर्रा के इस्तेमाल में स्पष्ट अंतर पैदा करें. वहीं, बजट को लेकर सतर्क खरीदारों के लिए iPhone 18 सीरीज का लॉन्च एक अलग मौका भी ला सकता है. नई सीरीज आने के बाद iPhone 17 Pro Max और दूसरे पुराने Pro मॉडल पर डिस्काउंट बढ़ सकते हैं. ऐसे में 2026 की

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पटना के डॉक्टर से 2.03 करोड़ की वसूली, मुजफ्फरपुर में कोचिंग चलाने वाली महिला ने किया ब्लैकमेल

Patna Crime News : पटना जिले के राजीव नगर थाना क्षेत्र में दुष्कर्म के झूठे केस में फंसाने और जान से मारने की धमकी देकर एक डॉक्टर से 2.03 करोड़ रुपये वसूलने का मामला सामने आया है. डॉक्टर की पत्नी ने मुजफ्फरपुर के मिठनपुरा इलाके की एक कोचिंग संचालिका, उसके पति और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ राजीव नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है. राजीव नगर पुलिस ने केस दर्ज किए जाने की पुष्टि की है. पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है. कोचिंग संचालिका पहले दोस्ती की, बाद में पैसों की मांग डॉक्टर की पत्नी ने पुलिस को दी शिकायत में बताया है कि वर्ष 2024 में मुजफ्फरपुर के मिठनपुरा स्थित एक कोचिंग संस्थान की संचालिका और उसके पति ने उनके डॉक्टर पति से दोस्ती की. इसके बाद स्त्री और डॉक्टर के बीच व्हाट्सएप पर बातचीत होने लगी. आरोप है कि इसी दौरान स्त्री ने अपनी मां के इलाज के नाम पर 20 हजार रुपये की मदद मांगी. इसके बाद अलग-अलग बहाने बनाकर लगातार पैसों की मांग की जाने लगी और डॉक्टर मदद के नाम पर रकम देते रहे. बाद में मिठनपुरा में नया कोचिंग संस्थान खोलने के लिए 10 लाख रुपये की मांग की गई. रकम वापस करने का आश्वासन मिलने पर डॉक्टर ने कथित तौर पर 10 लाख रुपये भी दे दिए. पुरानी सेल्फी दिखाकर दुष्कर्म केस की धमकी दी शिकायत के अनुसार, लगातार पैसों की मांग से परेशान होकर डॉक्टर ने आगे रकम देने से इनकार कर दिया. इसके बाद नवंबर 2025 में कोचिंग संचालिका और उसके पति ने डॉक्टर को मुजफ्फरपुर स्थित अपने कार्यालय के पास बुलाया. आरोप है कि वहां स्त्री ने एक पुरानी सेल्फी दिखाकर डॉक्टर को दुष्कर्म के केस में फंसाने की धमकी दी. शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि पैसे नहीं देने पर डॉक्टर को जान से मारने की धमकी दी गई. इसके बाद डर के कारण डॉक्टर ने अलग-अलग बैंक खातों के माध्यम से कथित तौर पर कुल 2.03 करोड़ रुपये कोचिंग संचालिका और उसके पति को दे दिए. स्टांप पेपर पर लिखवाया कि रकम वापस नहीं मांगेंगे शिकायत में डॉक्टर की पत्नी ने आरोप लगाया है कि रकम लेने के बावजूद आरोपितों ने डॉक्टर पर और दबाव बनाया. उनसे स्टांप पेपर पर लिखवाया गया कि अब तक दी गई राशि वापस नहीं मांगी जाएगी. डॉक्टर ने मुजफ्फरपुर कोर्ट परिसर में स्टांप पेपर पर कथित घोषणा भी कर दी. इसके बाद भी पैसों की मांग जारी रहने का आरोप है. कभी आत्महत्या करने तो कभी दुष्कर्म का केस दर्ज कराने का डर दिखाकर डॉक्टर से रकम मांगने की बात शिकायत में कही गई है. डॉक्टर की पत्नी ने संगठित गिरोह चलाने का लगाया आरोप डॉक्टर की पत्नी ने पुलिस को बताया है कि आरोपित एक संगठित गिरोह के रूप में काम कर रहे हैं. आरोप है कि गिरोह सीधे-साधे लोगों को झूठे केस में फंसाने की धमकी देकर ब्लैकमेल करता है. लगातार पैसों की मांग से परेशान होकर डॉक्टर की पत्नी ने राजीव नगर थाने में कोचिंग संचालिका, उसके पति और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है. पुलिस जांच में जुटी राजीव नगर पुलिस ने मामला दर्ज किए जाने की पुष्टि की है. पुलिस शिकायत में लगाए गए आरोपों, बैंक खातों में हुए लेन-देन, व्हाट्सएप बातचीत और स्टांप पेपर से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है. पुलिस का कहना है कि जांच के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी. इसे भी पढ़ें : पटना में स्कूल से घर नहीं पहुंची नाबालिग छात्रा, अपहरण की आशंका में पांच घंटे रहा सड़क जाम The post पटना के डॉक्टर से 2.03 करोड़ की वसूली, मुजफ्फरपुर में कोचिंग चलाने वाली स्त्री ने किया ब्लैकमेल appeared first on Naya Vichar.

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CAG Report: झारखंड को 327 करोड़ का राजस्व घाटा, 1.60 लाख करोड़ के खर्च का कोई हिसाब नहीं

CAG Report: प्रशासनी योजनाओं और राजस्व व्यवस्था की निगरानी में चूक का खामियाजा राज्य को भुगतना पड़ रहा है. नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की मंगलवार को विधानसभा के पटल पर रखी गयी रिपोर्ट में विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किये गये हैं. रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्य में नियमों को दरकिनार कर 18 साल से कम उम्र के युवाओं को गियर वाली बाइक चलाने का लाइसेंस दे दिया गया. मनरेगा के पैसे से गाड़ियों की मरम्मत करायी गयी. पीएम आवास योजना में 6.32 लाख पात्र परिवारों को लक्ष्य नहीं मिला. जबकि, 2.90 लाख अपात्र लोगों के नाम लाभुक सूची में शामिल कर दिये गये. मनरेगा में 50 लाख से अधिक काम अधूरे पड़े हैं. कई विभागों की व्यवस्था में खामियां रिपोर्ट में सीएजी की रिपोर्ट में परिवहन, वाणिज्य कर, ग्रामीण विकास, पेयजल एवं स्वच्छता और उत्पाद विभाग की व्यवस्था में कई स्तर पर खामियां चिह्नित की गयी हैं. वित्तीय प्रबंधन पर भी रिपोर्ट ने सवाल उठाये हैं. बताया गया है कि मार्च 2025 तक 1.60 लाख करोड़ से अधिक की राशि से जुड़े उपयोगिता प्रमाण-पत्र लंबित थे. खजाने से पैसा निकला, हिसाब बाकी राज्य की वित्तीय स्थिति पर सीएजी की रिपोर्ट में पूंजीगत व्यय को लेकर चिंता जतायी गयी है. वर्ष 2024-25 में पूंजीगत व्यय पिछले साल की तुलना में 2,160 करोड़ कम हुआ. इसका असर परिसंपत्तियों के निर्माण और विकास योजनाओं की गति पर पड़ा. सबसे बड़ा सवाल उपयोगिता प्रमाण-पत्रों को लेकर है. मार्च 2025 तक 1,60,565.80 करोड़ की राशि से जुड़े उपयोगिता प्रमाण-पत्र लंबित थे. यानी, बड़ी रकम खर्च होने के बावजूद संबंधित विभाग यह प्रमाणित नहीं कर पाये थे कि राशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के अनुसार हुआ है. मनरेगा : 50 लाख से ज्यादा काम अधूरे रिपोर्ट ने मनरेगा में काम की रफ्तार और उसे पूरा करने की स्थिति को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है. 2019-24 के दौरान प्रस्तावित कार्यों में केवल 27 फीसदी काम पूरे हो सके. करीब 49 फीसदी यानी 50.21 लाख काम अधूरे रह गये. इन कार्यों पर 2,633 करोड़ खर्च हो चुके थे. काम अधूरे रहने के साथ मजदूरी भुगतान में भी देरी हुई. मार्च 2025 तक मजदूरों की 321.84 करोड़ की मजदूरी लंबित थी. रिपोर्ट में मनरेगा की राशि से वाहनों की मरम्मत और आउसोर्सिंग एजेंसियों के कर्मियों को भुगतान करने के मामले भी पकड़े गये. जल जीवन मिशन : 24 फीसदी गांवों में एक भी नल नहीं जल जीवन मिशन में भी लक्ष्य और उपलब्धि के बीच बड़ा अंतर मिला. राज्य के केवल 55 फीसदी ग्रामीण घरों तक नल से जल पहुंच पाया था. राष्ट्रीय औसत करीब 80 फीसदी है. वहीं, 24 फीसदी गांवों में एक भी घर में नल का कनेक्शन नहीं था. यानी योजना के बावजूद बड़ी आबादी अभी भी पाइप से पानी की सुविधा से दूर रही. शराब दुकानदारों पर नहीं लगा 8.35 करोड़ का जुर्माना सीएजी को उत्पाद विभाग में भी राजस्व वसूली में चूक मिली है. निर्धारित न्यूनतम स्टॉक नहीं रखने वाले शराब विक्रेताओं पर 8.35 करोड़ का जुर्माना नहीं लगाया गया. नियमों के उल्लंघन के बावजूद विभाग ने दंडात्मक कार्रवाई नहीं की, जिससे प्रशासन को राजस्व का नुकसान हुआ. पांच जिलों में 305 नाबालिगों को बाइक का लाइसेंस परिवहन विभाग में नियमों की अनदेखी के मामले सामने आये हैं. ऑडिट के दौरान पांच जिलों में 18 वर्ष से कम उम्र के 305 आवेदकों को गियर वाली मोटरसाइकिल चलाने का लाइसेंस जारी किये जाने का पता चला. सारथी सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी के कारण जिस उम्र में कानून गियर वाली बाइक चलाने की अनुमति नहीं होती, उस उम्र में विभाग ने लाइसेंस जारी कर दिया. अस्थायी पंजीकरण (टीआर) की वैधता छह महीने के बजाय केवल एक महीने रखे जाने के कारण 327.35 करोड़ के राजस्व पर असर पड़ा. ऑडिट में 6,640 ऐसे वाहन भी मिले, जिनका अस्थायी पंजीकरण होने के बाद स्थायी पंजीकरण नहीं कराया गया. उन वाहनों से कर वसूली नहीं की जा रही है. इसके अलावा 1.24 लाख वाहनों का टैक्स बकाया मिला. इससे 11.24 करोड़ रुपये के संभावित राजस्व वसूली प्रभावित हुई. 28 फीसदी पात्र लाभुकों को नहीं मिला पीएम आवास प्रधानमंत्री आवास योजना, ग्रामीण की ऑडिट ने लाभुकों के चयन और लक्ष्य निर्धारण दोनों पर सवाल खड़े किये हैं. राज्य ने 22.34 लाख पात्र परिवारों की पहचान की थी. लेकिन केंद्र से 16.02 लाख परिवारों का ही लक्ष्य मिला. यानी 6.32 लाख पात्र परिवारों को योजना का लाभ नहीं मिल सका. यह संख्या कुल पात्र परिवारों की करीब 28 फीसदी है. दूसरी तरफ, लाभुकों के चयन में भी बड़ी चूक हुई. एक ओर पात्र परिवार योजना के दायरे से बाहर रह गये, दूसरी ओर अपात्र लोगों के नाम सूची में पहुंच गये. सूची में 2.90 लाख अपात्र लोगों को शामिल कर दिया गया. बाद में इन नामों को हटाया गया. रिपोर्ट में बताया गया है कि योजना के तहत पूर्ण हो चुके करीब आठ फीसदी आवासों में शौचालय की सुविधा नहीं मिली. यह स्थिति तब है, जब राज्य को खुले में शौच से मुक्त घोषित किया जा चुका है. इसे भी पढ़ें: विधानसभा में सीएम हेमंत सोरेन का बड़ा ऐलान, 14वीं JPSC और दो बैकलॉग परीक्षाएं होंगी रद्द जीएसटी में आंकड़ों का स्पोर्ट्स, 343.58 करोड़ की विसंगति वाणिज्य कर विभाग में जीएसटी और ई-वे बिल के आंकड़ों की जांच में 343.58 करोड़ की कर देयता और आइटीसी से संबंधित विसंगतियां सामने आयी हैं. रिटर्न में घोषित कारोबार और ई-वे बिल के आंकड़ों में कई मामलों में मेल नहीं था. ऑडिट में 23 बड़े करदाताओं का भी मामला सामने आया. इन करदाताओं ने आयकर रिटर्न में 95.43 करोड़ की बिक्री दिखायी, लेकिन जीएसटी के तहत उनका पंजीकरण नहीं था. विभाग इन मामलों की समय पर पहचान कर कार्रवाई नहीं कर सका. इसे भी पढ़ें: मेदिनीनगर एयरपोर्ट से जल्द शुरू होगी उड़ान सेवा, सांसद वीडी राम ने लोकसभा में उठाया मुद्दा The post CAG Report: झारखंड को 327 करोड़ का राजस्व घाटा, 1.60 लाख करोड़ के खर्च का कोई हिसाब नहीं appeared first on Naya Vichar.

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FCRA बिल को JPC के पास भेजने की तैयारी, अल्पसंख्यक और ईसाई संगठनों में बढ़ी बेचैनी

मानसून सत्र के दौरान इस विधेयक को 12 अगस्त को लोकसभा में चर्चा और पारित कराने के लिए सूचीबद्ध किए जाने की संभावना थी. एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार नेतृत्वक दलों और ईसाई संगठनों द्वारा उठाए गए मुद्दों के बाद प्रशासन अब इसे जेपीसी को सौंपने पर विचार कर रही है. यह मूल विधेयक 25 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था, जो हिंदुस्तान में व्यक्तियों, संघों और कंपनियों द्वारा विदेशी योगदान की प्राप्ति और उपयोग को विनियमित करता है. क्या हैं विधेयक के प्रमुख प्रावधान? विदेशी फंड और संपत्ति की देखरेख: अगर किसी एनजीओ (NGO) या संस्था का विदेशी फंड लेने का लाइसेंस (FCRA रजिस्ट्रेशन) रद्द या खत्म हो जाता है, तो उसका बचा हुआ विदेशी पैसा और उससे खरीदी गई संपत्तियां फिलहाल एक प्रशासनी अधिकारी (नामित प्राधिकरण) के पास जमा करा दी जाएंगी. संपत्ति का फैसला (वापसी या जब्ती): अगर संस्था तय समय के अंदर अपना लाइसेंस दोबारा चालू करा लेती है, तो उसकी संपत्ति और पैसा उसे वापस मिल जाएगा. लेकिन अगर समय पर लाइसेंस रिन्यू नहीं हुआ, तो वह पूरी संपत्ति हमेशा के लिए प्रशासन के पास चली जाएगी. धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और कोर्ट जाने का हक: अगर जब्त की गई संपत्ति में कोई मंदिर, मस्जिद या पूजा-पाठ का स्थान शामिल है, तो उसका धार्मिक स्वरूप बदला नहीं जाएगा. इसके अलावा, अगर संस्था प्रशासनी फैसले से असहमत है, तो वह अदालत में अपील कर सकती है. कम सजा और केंद्र की मंजूरी: नियम तोड़ने पर मिलने वाली अधिकतम जेल की सजा 5 साल से घटाकर 1 साल कर दी गई है. साथ ही, अब राज्य की कोई भी पुलिस या जांच एजेंसी केंद्र प्रशासन की पूर्व इजाजत के बिना इस कानून के तहत जांच शुरू नहीं कर सकती. गृह मंत्री अमित शाह से मिले प्रतिनिधिमंडल विधेयक के प्रावधानों को लेकर ईसाई और अल्पसंख्यक संगठनों के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी. मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने भी एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल (जिसमें ‘काउंसिल ऑफ चर्चेस इन मिजोरम’ के प्रतिनिधि शामिल थे) के साथ गृह मंत्री से मुलाकात कर क्षेत्रीय और धार्मिक चिंताएं रखीं. प्रतिनिधिमंडल की मांग है कि विधेयक को या तो वापस लिया जाए या फिर जेपीसी के पास भेजा जाए. ये भी पढ़ें: ‘वंदे मातरम्’ के अपमान पर होगी 3 साल तक की जेल, राष्ट्रपति मुर्मू ने विधेयक को दी मंजूरी ये भी पढ़ें: केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने वाला बिल लोकसभा से पास, हंगामे के बीच ध्वनिमत से मिली मंजूरी The post FCRA बिल को JPC के पास भेजने की तैयारी, अल्पसंख्यक और ईसाई संगठनों में बढ़ी बेचैनी appeared first on Naya Vichar.

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स्वतंत्रता दिवस समारोह से पहले दिल्ली में हाई अलर्ट, 19 आतंकवादियों के पोस्टर लगाए गए

मुख्य समारोह स्थल लाल किले की सुरक्षा के लिए मल्टी लेयर बैरिकेडिंग की गई है. यहां 15 अगस्त को वीआईपी और आम जनता की भारी मौजूदगी को देखते हुए दिल्ली पुलिस व अर्धसैनिक बलों के लगभग 15,000 से 20,000 जवानों की तैनाती की जाएगी. अत्याधुनिक तकनीक से निगरानी सुरक्षा में किसी भी चूक को टालने के लिए तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है. सीसीटीवी नेटवर्क: लाल किले और आसपास के इलाकों में चेहरा पहचान प्रणाली (FRS) से लैस लगभग 1,000 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं. स्मारक के भीतर बने अत्याधुनिक कंट्रोल रूम से पुलिस और तकनीकी टीमें तीन किलोमीटर से अधिक के दायरे में हर गतिविधि पर नजर रख रही हैं. ‘अभिज्ञान’ ऐप और FRS वैन: भीड़भाड़ वाले इलाकों में अपराधियों की पहचान के लिए पुलिस ‘अभिज्ञान’ ऐप का इस्तेमाल कर रही है, जिसमें एक करोड़ से अधिक अपराधियों का डेटाबेस है. इसके अलावा, रणनीतिक जगहों पर हाई-रिजॉल्यूशन कैमरों से लैस एफआरएस वैन तैनात हैं, जो भीड़ में चेहरों को स्कैन कर डेटाबेस से मिलान करती हैं. एंटी-ड्रोन सिस्टम और स्नाइपर्स: ऊंची इमारतों और रणनीतिक बिंदुओं पर स्नाइपर तैनात किए गए हैं. साथ ही, किसी भी अनधिकृत हवाई गतिविधि से निपटने के लिए ड्रोन रोधी प्रणालियां सक्रिय कर दी गई हैं. ड्रोन और पतंगबाजी पर पूर्ण प्रतिबंध संवेदनशील प्रतिष्ठानों, दिल्ली मेट्रो, बस टर्मिनलों, रेलवे स्टेशनों और बाजारों में सतर्कता बढ़ा दी गई है. लाल किले के आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा कारणों से पतंग और ड्रोन उड़ाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है. खुफिया इनपुट को देखते हुए पुलिस दिल्ली और आसपास के इलाकों में संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार पैनी नजर बनाए हुए है. ये भी पढ़ें: स्वतंत्रता दिवस समारोह: पहली बार लाल किले की प्राचीर से गाया जाएगा ‘वंदे मातरम’, मंच पर दिखेंगे Gen-Z The post स्वतंत्रता दिवस समारोह से पहले दिल्ली में हाई अलर्ट, 19 आतंकवादियों के पोस्टर लगाए गए appeared first on Naya Vichar.

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सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर विवादों के पीछे क्या है कारण ? जानिए सिस्टम में कहां है गड़बड़ी

झारखंड प्रशासन के साथ छात्रों की रविवार को कई दौर की बातचीत के बाद भी समाधान नहीं निकला. नतीजा यह हुआ कि छात्र सोमवार को रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से विधानसभा की ओर बढ़ गए. झारखंड में जारी छात्रों का यह आंदोलन प्रशासनी भर्ती परीक्षाओं की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है. लेकिन यह सिर्फ झारखंड की कहानी नहीं है. देश के दूसरे राज्यों में भी पेपर लीक, नकल, सॉल्वर गैंग, प्रश्न पत्र की गोपनीयता भंग होने और परीक्षा रद्द होने जैसी घटनाएं सामने आती रही हैं. पिछले कुछ वर्षों में ऐसे मामलों ने भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर लगातार सवाल खड़े किए हैं. लेकिन सवाल यह है कि क्या समस्या सिर्फ पेपर लीक तक सीमित है? या भर्ती परीक्षाओं की पूरी प्रक्रिया में ही ऐसे लूपहोल हैं, जिनका बार-बार फायदा उठाया जाता है? कितना बड़ा है देश में भर्ती परीक्षाओं का संकट? इस सवाल का जवाब सिर्फ पेपर लीक की संख्या गिनकर नहीं मिलेगा. असली संकट तीन स्तरों पर दिखाई देता है. परीक्षा की विश्वसनीयता, भर्ती प्रक्रिया में लगने वाला समय और अभ्यर्थियों का व्यवस्था पर भरोसा पिछले कुछ वर्षों में प्रशासनी भर्ती परीक्षाओं के साथ-साथ प्रवेश और दूसरी सार्वजनिक परीक्षाओं में भी पेपर लीक, नकल और दूसरी अनियमितताओं के मामले सामने आए हैं. केंद्र प्रशासन ने 2024 में Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act लागू किया. इस कानून में पेपर लीक, उत्तर कुंजी से जुड़ी गड़बड़ी और परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल जैसी गतिविधियों के खिलाफ सजा का प्रावधान किया गया है. यह कानून UPSC, SSC, रेलवे भर्ती बोर्ड, NTA और केंद्र प्रशासन की दूसरी अधिसूचित सार्वजनिक परीक्षाओं पर लागू होता है. 2026 में प्रशासन ने इस कानून को और सख्त करने के लिए संशोधन विधेयक भी लोकसभा में पेश किया है. इसमें सजा बढ़ाने, जांच के लिए विशेष टास्क फोर्स, जांच पूरी करने की समयसीमा और मामलों के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट जैसे प्रावधान प्रस्तावित हैं. लेकिन कानून सख्त होने के बावजूद एक सवाल अपनी जगह बना हुआ है. तो क्या सख्त कानून से व्यवस्था भरोसेमंद हो जाएगी? क्योंकि पेपर लीक होने के बाद दोषी को सजा देना जरूरी है, लेकिन उससे भी जरूरी यह समझना है कि पेपर लीक कैसे हुआ  ? तो गड़बड़ आखिर है कहां ? अगर पूरी प्रक्रिया को देखें तो समस्या किसी एक जगह नहीं है. पेपर लीक उसका सबसे ज्यादा दिखाई देने वाला हिस्सा है. लेकिन उसके पीछे प्रश्नपत्र की सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों की निगरानी, बाहरी एजेंसियों की जवाबदेही, डिजिटल सिस्टम की सुरक्षा, रिजल्ट प्रक्रिया, शिकायत निवारण और भर्ती में होने वाली देरी जैसे कई सवाल जुड़े हुए हैं. इसलिए हर बार सिर्फ एक आरोपी को पकड़ लेने या परीक्षा दोबारा करा देने से समस्या खत्म नहीं होती. जरूरत यह देखने की है कि जिस सिस्टम में गड़बड़ी हुई, वह गड़बड़ी होने तक पहुंचा कैसे? और उसे दोबारा होने से रोकने के लिए क्या बदला गया? क्योंकि अगर सिस्टम में वही कमजोरी बनी रहती है, तो एक परीक्षा के बाद दूसरी परीक्षा में भी वही सवाल खड़े हो सकते हैं. झारखंड का सवाल सिर्फ झारखंड का नहीं है झारखंड में सड़क पर उतरे छात्र सिर्फ एक परीक्षा का जवाब नहीं मांग रहे. उनका सवाल उस पूरी व्यवस्था से है जिसमें उन्हें परीक्षा देने से पहले ही यह भरोसा नहीं रहता कि परीक्षा समय पर होगी, निष्पक्ष होगी और उसका परिणाम समय पर आएगा. यही सवाल देश के दूसरे राज्यों के उन अभ्यर्थियों का भी है, जिन्होंने पेपर लीक, परीक्षा रद्द होने या भर्ती में देरी का सामना किया है. पढ़िए देश दुनिया और बिहार झारखंड की ओरिजिनल समाचार The post प्रशासनी भर्ती परीक्षाओं को लेकर विवादों के पीछे क्या है कारण ? जानिए सिस्टम में कहां है गड़बड़ी appeared first on Naya Vichar.

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SBI में 9124 पदों पर वैकेंसी, ग्रेजुएट्स आज से कर सकते हैं आवेदन

SBI Clerk Recruitment: बैंक में नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अच्छी समाचार है. SBI यानी State bank of india ने जूनियर एसोसिएट के पदों पर भर्ती निकाली है. इस भर्ती के तहत कुल 9124 पदों पर कैंडिडेट्स की नियुक्ति की जाएगी. इसके लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया आज यानी 11 अगस्त 2026 से शुरू हो गई है. इच्छुक कैंडिडेट्स SBI की ऑफिशियल वेबसाइट sbi.bank.in पर जाकर ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं. आवेदन करने की आखिरी तारीख 31 अगस्त 2026 तय की गई है. SBI Clerk Recruitment: 9124 पदों पर होगी भर्तियां SBI की इस भर्ती में जूनियर एसोसिएट के कुल 9124 पद शामिल हैं. इनमें अलग-अलग कैटेगरी के लिए पद निर्धारित किए गए हैं. भर्ती के लिए कैंडिडेट की उम्र 1 अप्रैल 2026 को कम से कम 20 साल और अधिकतम 28 साल होनी चाहिए. आरक्षित कैटेगरी के कैंडिडेट्स को नियम के अनुसार उम्र में छूट दी जाएगी. 7680 पद रेगुलर वैकेंसी के हैं और बाकि 1444 पद बैकलॉग वैकेंसी के हैं. श्रेणी नियमित पद बैकलॉग पद कुल पद सामान्य (UR) 3,253 — 3,253 EWS 760 — 760 OBC 1,716 480 2,196 SC 1,114 355 1,469 ST 837 964 1,801 कुल 7,680 1,444 9,124 SBI Clerk Eligibility: कौन कर सकता है आवेदन? SBI जूनियर एसोसिएट भर्ती के लिए किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से किसी भी विषय में ग्रेजुएशन की डिग्री रखने वाले कैंडिडेट्स आवेदन कर सकते हैं. जो कैंडिडेट ग्रेजुएशन के फाइनल ईयर या सेमेस्टर में हैं, वे भी निर्धारित शर्तों के अनुसार आवेदन कर सकते हैं. इस भर्ती में कैंडिडेट्स का चयन पहले प्रीलिम्स परीक्षा और फिर मेन्स परीक्षा के आधार पर होगा. इसके बाद संबंधित लोकल लैंग्वेज का टेस्ट भी देना होगा. SBI Clerk Application Fee: कितनी है आवेदन फीस? SBI Clerk भर्ती के लिए सामान्य, EWS और OBC कैटेगरी के कैंडिडेट्स को 750 रुपये आवेदन फीस देनी होगी. वहीं SC, ST और दिव्यांग कैंडिडेट्स के लिए आवेदन फीस नहीं रखी गई है. फीस का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से किया जा सकता है. ये भी पढ़ें: हाईकोर्ट में 10वीं पास से लेकर ग्रेजुएट के लिए वैकेंसी, सैलरी 60 हजार से ज्यादा How To Apply SBI Clerk Form: ऐसे करें ऑनलाइन अप्लाई सबसे पहले SBI की ऑफिशियल वेबसाइट sbi.bank.in पर जाएं. अब करियर सेक्शन में जाकर Current Openings पर क्लिक करें. यहां Junior Associates भर्ती से जुड़े लिंक को खोलें और Apply Online पर क्लिक करें. अब रजिस्ट्रेशन करके मांगी गई जानकारी भरें. इसके बाद फोटो, सिग्नेचर और जरूरी डॉक्यूमेंट अपलोड करें. आवेदन फीस जमा करने के बाद फॉर्म को सबमिट कर दें. अंत में भरे हुए फॉर्म का प्रिंटआउट या PDF जरूर सेव कर लें. आप डायरेक्ट नीचे दिए गए लिंक पर भी क्लिक कर ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं SBI Junior Clerk Application Apply Online SBI की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, इस भर्ती की प्रीलिम्स परीक्षा सितंबर 2026 में आयोजित की जा सकती है. परीक्षा की सटीक तारीख और एडमिट कार्ड से जुड़ी जानकारी बाद में जारी की जाएगी. बाकि जानकारी नीचे दिए ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक पर क्लिक कर देख सकते हैंं. SBI Junior Clerk Recruitment 2026 Offcial Notificaion ये भी पढ़ें: Railway Recruitment 2026: इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में अप्रेंटिस के 1,010 पदों पर भर्ती The post SBI में 9124 पदों पर वैकेंसी, ग्रेजुएट्स आज से कर सकते हैं आवेदन appeared first on Naya Vichar.

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