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आज का सूर्य ग्रहण भारत में नहीं आएगा नजर! जानिए क्या गर्भवती महिलाओं के लिए सूतक और नियम लागू होंगे?

Surya Grahan 2026: साल 2026 का प्रमुख सूर्य ग्रहण आज 12 अगस्त को लगेगा. यह एक खगोलीय घटना है, जिसमें चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आकर कुछ समय के लिए सूर्य के प्रकाश को ढक देता है. ग्रहण की पूर्ण अवस्था ग्रीनलैंड, आइसलैंड, उत्तरी रूस, स्पेन और पुर्तगाल के कुछ हिस्सों में दिखाई देगी. हिंदुस्तान इस ग्रहण के दृश्यता क्षेत्र में शामिल नहीं है. गर्भवती स्त्रीओं के लिए धार्मिक मान्यता क्या कहती है? हिंदुस्तानीय परंपरा में ग्रहण के समय गर्भवती स्त्रीओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दौरान भगवान का स्मरण, मंत्र जाप और सकारात्मक विचार करना शुभ माना जाता है. हालांकि, ग्रहण के कारण गर्भस्थ शिशु को नुकसान पहुंचता है, इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. कौन से मंत्रों का कर सकती हैं जाप? धार्मिक आस्था के अनुसार गर्भवती स्त्री ग्रहण के दौरान शांत मन से ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप कर सकती हैं. इसके अलावा महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी शुभ माना जाता है. अपनी श्रद्धा के अनुसार ‘ॐ सूर्याय नमः’ या गायत्री मंत्र का मानसिक जाप किया जा सकता है. मंत्र जाप को मन को शांत रखने और सकारात्मक वातावरण बनाने का धार्मिक उपाय माना जाता है. ग्रहण के दौरान क्या करना चाहिए? यदि गर्भवती स्त्री धार्मिक मान्यताओं का पालन करना चाहती हैं तो घर में रहकर मंत्र जाप, ध्यान या भगवान का स्मरण कर सकती हैं. पर्याप्त पानी पीना, समय पर भोजन करना और आराम करना ज्यादा जरूरी है. किसी भी तरह की कमजोरी या परेशानी महसूस होने पर आराम करें और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लें. ये भी पढ़ें: सूर्य ग्रहण का राशिफल: आज बदलेगी ग्रहों की चाल, जानें मेष से मीन तक का ऐसा रहेगा हाल क्या ग्रहण देखना गर्भवती स्त्री के लिए खतरनाक है? हिंदुस्तान में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां रहने वाली गर्भवती स्त्रीओं के लिए ग्रहण देखने से जुड़ा प्रत्यक्ष आंखों का जोखिम नहीं है. सामान्य स्थिति में सूर्य को सीधे देखना आंखों के लिए नुकसानदायक हो सकता है, चाहे व्यक्ति गर्भवती हो या नहीं. इसलिए दिखाई देने वाले सूर्य ग्रहण को बिना उचित सोलर फिल्टर के सीधे नहीं देखना चाहिए. ये भी पढ़ें: ग्रहण का गर्भस्थ शिशु पर क्या पड़ता है असर? जानें धार्मिक आस्था, मान्यता और इससे बचने के पीछे की असली वजह मान्यता और विज्ञान को अलग-अलग समझें सूर्य ग्रहण के दौरान चाकू न चलाने, कुछ न खाने या गर्भस्थ शिशु को नुकसान होने जैसी कई मान्यताएं प्रचलित हैं, लेकिन इनके पीछे वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं. गर्भवती स्त्री के लिए इस दौरान सबसे जरूरी है कि वह पर्याप्त पोषण, आराम और चिकित्सकीय सलाह का ध्यान रखे. धार्मिक आस्था के अनुसार मंत्र जाप करना मानसिक शांति के लिए किया जा सकता है, लेकिन इसे चिकित्सकीय सुरक्षा का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए. The post आज का सूर्य ग्रहण हिंदुस्तान में नहीं आएगा नजर! जानिए क्या गर्भवती स्त्रीओं के लिए सूतक और नियम लागू होंगे? appeared first on Naya Vichar.

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धर्मांतरण और भूमि अधिग्रहण पर शुभेंदु अधिकारी का ध्यान, अगले तीन माह में लायेंगे कानून

बांकुड़ा : मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी जंगलमहल में विकास के लिए प्रयासरत हैं. उन्होंने बांकुरा में 7 जिलों के अधिकारियों के साथ एक प्रशासनिक बैठक की. बैठक के बाद उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की. शुभेंदु ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में तीन महीने के कार्यकाल में किए गए कार्यों और शेष कार्यों के बारे में विस्तृत जानकारी दी. सीमांत, सीमावर्ती और वन क्षेत्रों में हो रहे धर्मांतरण का मुद्दा उठाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासन विदेशी धन की मदद से चल रहे धर्मांतरण की प्रक्रिया से भलीभांति अवगत है, जिसमें वन क्षेत्रों के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों की कमजोरी का फायदा उठाया जा रहा है. इसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाएगी. अपने कार्यों का रखा ब्योरा प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने एक बार फिर मीडिया को अपनी प्रशासन द्वारा लिए गए विभिन्न निर्णयों की याद दिलाते हुए कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में भूमि हस्तांतरण, ओबीसी सूची का संशोधन, इमाम-मुअज़्ज़म भत्ते की समाप्ति और गौ संरक्षण के उपाय किए गए हैं. उन्होंने यह भी बताया कि मुहर्रम के त्योहार के दौरान तलवारों के साथ जुलूस या प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. पश्चिम बंगाल की अन्य महत्वपूर्ण समाचारों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें दो काम जो अगले तीन माह में होंगे इस संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा-कुछ ही दिनों में यूसीसी (यूसीसी) लागू हो जाएगी. एक देश, एक राष्ट्रपति, एक राज्य, एक मुख्यमंत्री, एक कानून. शुभेंदु ने कहा कि इसके बाद मुख्यमंत्री के रूप में उनके पास दो और कार्य शेष हैं. उन्होंने कहा- मेरे पास दो और कार्य शेष हैं. धार्मिक धर्मांतरण और भूमि अधिग्रहण पर कानून लाना. मैं यही कर रहा हूं. उन्होंने अगले तीन महीनों के लिए एक योजना भी तैयार की है, जिसमें जंगलमहल के विकास पर विशेष जोर दिया गया है. Also Read: बंगाल में होगी जाति प्रमाणपत्रों की जांच, अब तक 45,000 लोग संदिग्ध सूची में The post धर्मांतरण और भूमि अधिग्रहण पर शुभेंदु अधिकारी का ध्यान, अगले तीन माह में लायेंगे कानून appeared first on Naya Vichar.

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15 अगस्त पर ट्राई करें ये Tricolor Fashion Ideas, साड़ी से कुर्ती तक दिखेगा देशभक्ति वाला अंदाज

Tricolor Fashion Ideas: 15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस का दिन हर हिंदुस्तानीय के लिए खास होता है. इस दिन चारों तरफ तिरंगे के रंगों की खूबसूरती देखने को मिलती है. ऐसे में अगर आप भी स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अपने लुक में देशभक्ति का रंग शामिल करना चाहती हैं, तो इसके लिए बहुत ज्यादा मेहनत करने की जरूरत नहीं है. आप अपने रोजमर्रा के कपड़ों में ही केसरिया, सफेद और हरे रंग को शामिल करके खूबसूरत ट्राई कलर लुक (Tricolor Fashion Ideas) पा सकती हैं. आइए जानते हैं कुछ आसान ट्राई कलर फैशन आइडियाज, जिन्हें आप 15 अगस्त पर ट्राई कर सकती हैं.  तिरंगे रंग की साड़ी से पाएं एलिगेंट लुक 15 अगस्त के दिन साड़ी पहनना चाहती हैं तो तिरंगे के रंगों वाली साड़ी एक बेहतरीन विकल्प हो सकती है. आप केसरिया, सफेद और हरे रंग के कॉम्बिनेशन वाली साड़ी चुन सकती हैं. अगर पूरी साड़ी में तीनों रंग नहीं चाहतीं, तो सफेद साड़ी के साथ हरे या केसरिया रंग का बॉर्डर भी काफी सुंदर लगेगा. PC: AI Generated ट्राई कलर दुपट्टा (Tricolor Fashion Ideas) अगर आपके पास पहले से ही सफेद या क्रीम कलर का सूट है तो नया आउटफिट खरीदने की जरूरत नहीं है.  इसके साथ केसरिया, सफेद और हरे रंग वाला दुपट्टा कैरी करें. चाहें तो दुपट्टे पर तिरंगे रंग की हल्की कढ़ाई या प्रिंट भी चुन सकती हैं.  PC: AI Generated तिरंगे रंग की एक्सेसरीज से पूरा करें लुक अगर आप पूरे आउटफिट में तिरंगे के रंग नहीं पहनना चाहतीं, तो एक्सेसरीज की मदद ले सकती हैं. ग्रीन चूड़ियां, केसरिया ईयररिंग्स या तिरंगे रंग की हेयर एक्सेसरी (Tricolor Fashion Ideas) आपके सिंपल लुक को भी खास बना सकती है. PC: AI Generated यह भी पढ़ें: 15 अगस्त पर बेटियों को दें ये खास तोहफा, सुनाएं इन 10 स्त्रीओं की प्रेरणादायक कहानी The post 15 अगस्त पर ट्राई करें ये Tricolor Fashion Ideas, साड़ी से कुर्ती तक दिखेगा देशभक्ति वाला अंदाज appeared first on Naya Vichar.

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सूर्य ग्रहण का राशिफल: आज बदलेगी ग्रहों की चाल, जानें मेष से मीन तक का ऐसा रहेगा हाल

Surya Grahan 2026 Rashifal: सूर्य ग्रहण का ज्योतिष में विशेष महत्व माना जाता है. आज 12 अगस्त 2026 बुधवार को साल का अंतिम सूर्यग्रहण लगने जा रहा है. मान्यता है कि ग्रहण के दौरान सूर्य से जुड़ी ऊर्जा प्रभावित होती है, जिसका असर सभी 12 राशियों पर अलग-अलग रूप में पड़ सकता है. आइए जानते हैं मेष से मीन राशि तक सूर्य ग्रहण का संभावित प्रभाव. मेष राशि मेष राशि के जातकों के लिए सूर्य ग्रहण आत्ममंथन और नई योजनाओं पर विचार करने का समय हो सकता है. कार्यक्षेत्र में जल्दबाजी से बचें. धन से जुड़े मामलों में सोच-समझकर फैसला लें. परिवार में किसी बात को लेकर तनाव हो सकता है, इसलिए वाणी पर संयम रखें. वृषभ राशि वृषभ राशि वालों को इस दौरान खर्चों पर नियंत्रण रखने की जरूरत है. अचानक कुछ ऐसे खर्च सामने आ सकते हैं, जिनकी आपने योजना नहीं बनाई हो. नौकरी और व्यापार में मेहनत का परिणाम धीरे-धीरे मिल सकता है. स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही न करें और पर्याप्त आराम करें. मिथुन राशि मिथुन राशि के जातकों के लिए सूर्य ग्रहण करियर और आर्थिक मामलों में बदलाव का संकेत दे सकता है. नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं. व्यापार करने वालों को कोई महत्वपूर्ण अवसर प्राप्त हो सकता है. दोस्तों और सहकर्मियों के साथ गलतफहमी से बचें. कर्क राशि कर्क राशि वालों के लिए सूर्य ग्रहण कार्यक्षेत्र में नई संभावनाएं लेकर आ सकता है. नौकरी में बदलाव या नई जिम्मेदारी के बारे में विचार कर सकते हैं. वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संबंध अच्छे बनाए रखें. परिवार के किसी सदस्य की सलाह आपके लिए उपयोगी साबित हो सकती है. सिंह राशि आज के राशिफल के अनुसार  सिंह राशि के जातकों के लिए सूर्य ग्रहण महत्वपूर्ण माना जा सकता है. आत्मविश्वास में उतार-चढ़ाव महसूस हो सकता है. करियर में कोई बड़ा निर्णय लेने से पहले अच्छी तरह विचार करें. आर्थिक स्थिति सामान्य रहेगी, लेकिन अनावश्यक निवेश से बचना बेहतर होगा. कन्या राशि कन्या राशि वालों को इस अवधि में अपनी योजनाओं को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए. कार्यस्थल पर किसी व्यक्ति से मतभेद हो सकता है. पैसों के लेन-देन में सतर्क रहें. परिवार के साथ समय बिताने से मानसिक तनाव कम करने में मदद मिल सकती है. ये भी पढ़ें: ग्रहण का गर्भस्थ शिशु पर क्या पड़ता है असर? जानें धार्मिक आस्था, मान्यता और इससे बचने के पीछे की असली वजह तुला राशि तुला राशि के जातकों के लिए सूर्य ग्रहण रिश्तों और साझेदारी से जुड़े मामलों को प्रभावित कर सकता है. व्यापारिक साझेदारी में पारदर्शिता रखें. दांपत्य जीवन में छोटी बातों को लेकर विवाद करने से बचें. आर्थिक मामलों में संतुलित निर्णय लेना लाभकारी रहेगा. वृश्चिक राशि वृश्चिक राशि वालों को नौकरी और स्वास्थ्य के मामले में विशेष सावधानी रखनी चाहिए. काम का दबाव बढ़ सकता है. किसी पुराने विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाने का प्रयास करें. खानपान और दिनचर्या पर ध्यान देना आपके लिए फायदेमंद रहेगा. धनु राशि धनु राशि के जातकों के लिए सूर्य ग्रहण प्रेम, शिक्षा और रचनात्मक कार्यों से जुड़े मामलों में बदलाव ला सकता है. विद्यार्थियों को पढ़ाई पर अधिक ध्यान देना होगा. प्रेम संबंधों में पारदर्शिता बनाए रखें. निवेश से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहेगा. ये भी पढ़ें: सूर्य ग्रहण लव अलर्ट: ग्रहण के दौरान दिल के मामलों में सतर्क रहें! जानें मेष से मीन तक का संपूर्ण होरोस्कोप मकर राशि मकर राशि वालों के लिए सूर्य ग्रहण परिवार और संपत्ति से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण हो सकता है. घर में किसी बदलाव या खरीदारी की योजना बन सकती है. कार्यक्षेत्र में जिम्मेदारियां बढ़ेंगी. परिवार के सदस्यों की भावनाओं को समझने का प्रयास करें. कुंभ राशि कुंभ राशि के जातकों को इस दौरान अपनी वाणी और व्यवहार पर विशेष ध्यान देना चाहिए. छोटी बात विवाद का कारण बन सकती है. नौकरी और व्यापार में नए संपर्क बन सकते हैं. यात्रा के दौरान सावधानी रखें और जरूरी दस्तावेजों को सुरक्षित रखें. मीन राशि मीन राशि वालों के लिए सूर्य ग्रहण आर्थिक और व्यक्तिगत मामलों में आत्ममंथन का समय हो सकता है. आमदनी बढ़ाने के नए अवसर मिल सकते हैं, लेकिन खर्च भी बढ़ सकता है. स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहें. किसी भी बड़े आर्थिक फैसले में जल्दबाजी न करें. The post सूर्य ग्रहण का राशिफल: आज बदलेगी ग्रहों की चाल, जानें मेष से मीन तक का ऐसा रहेगा हाल appeared first on Naya Vichar.

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शराबबंदी के 10 साल, बिहार में आखिर क्या-क्या बदला, आंकड़ों से समझिए एक-एक बात

Bihar Sharabbandi: बिहार में शराबबंदी को लागू हुए 10 साल हो चुके हैं. 1 अप्रैल 2016 को जब तत्कालीन नीतीश कुमार प्रशासन ने राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू की थी, तब इसे सिर्फ शराब की बिक्री रोकने वाला कानून नहीं बताया गया था. इसके पीछे एक महत्वपूर्ण सामाजिक उद्देश्य था. प्रशासन का तर्क था कि अगर शराब आसानी से उपलब्ध नहीं होगी तो घरेलू हिंसा कम होगी, स्त्रीओं के खिलाफ अपराध घटेंगे, परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरेगी और शराब पर खर्च होने वाला पैसा बच्चों की पढ़ाई और घर की दूसरी जरूरतों पर खर्च होगा. शुरुआत में इस फैसले को स्त्रीओं का व्यापक समर्थन भी मिला. लेकिन 10 साल बाद तस्वीर को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं. क्या बिहार में शराबबंदी ने अपने उन सामाजिक लक्ष्यों को हासिल किया, जिनके लिए इसे लागू किया गया था? क्या शराब पीने वालों की संख्या वास्तव में कम हुई? क्या घरेलू हिंसा और स्त्रीओं के खिलाफ अपराध घटे? क्या परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधरी? या फिर शराब की मांग खत्म होने के बजाय उसका रास्ता बदल गया और वैध शराब की जगह अवैध शराब, तस्करी और दूसरे नशीले पदार्थों ने ले ली? इन्हीं सवालों के बीच देश की प्रतिष्ठित आर्थिक नीति अनुसंधान संस्था नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च यानी NCAER की एक रिसर्च ने बिहार की शराबबंदी को लेकर बहस फिर तेज कर दी है. इंडिया पॉलिसी फोरम में पेश किए गए रिसर्च पेपर ‘बिहार के विकास का व्यापक परिप्रेक्ष्य: उपलब्धियां, अपूर्ण एजेंडा और आगे की राह’ में रत्ना सहाय के नेतृत्व में अर्थशास्त्रियों की टीम ने बिहार के विकास से जुड़े कई पहलुओं का स्टडी किया है. रिपोर्ट में शराबबंदी को लेकर शोधकर्ताओं ने बेहद महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं और प्रशासन को पूर्ण शराबबंदी खत्म कर नियंत्रित या विनियमित बिक्री की दिशा में जाने की सलाह दी है. लेकिन कहानी इतनी सीधी भी नहीं है. क्योंकि दूसरी तरफ NFHS के आंकड़े बताते हैं कि शराब की खपत में बड़ी गिरावट आई है. तो फिर असली तस्वीर क्या है? आइए आंकड़ों और दावों के जरिए समझते हैं कि बिहार में शराबबंदी के 10 साल में आखिर बदला क्या? पहले समझिए, शराबबंदी लागू करने की जरूरत क्यों महसूस हुई थी? 1 अप्रैल 2016 को बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू की गई. उस समय प्रशासन का सबसे बड़ा तर्क था कि शराब सिर्फ व्यक्ति की आदत नहीं, बल्कि परिवार और समाज की समस्या है. मान्यता यह थी कि शराब की वजह से घरेलू हिंसा बढ़ती है. शराब पर पैसा खर्च होने से परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ती है और इसका सबसे ज्यादा असर स्त्रीओं और बच्चों पर पड़ता है. प्रशासन को उम्मीद थी कि शराब की उपलब्धता बंद होने के बाद परिवार की आय का इस्तेमाल दूसरी जरूरतों के लिए होगा. यही वजह थी कि शराबबंदी को सिर्फ कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि स्त्री सुरक्षा, परिवार की आर्थिक स्थिति और सामाजिक सुधार का फैसला बताया गया. स्त्रीओं ने भी इस फैसले का बड़े स्तर पर समर्थन किया. लेकिन सवाल यही है कि 10 साल बाद उस समर्थन और उम्मीद का परिणाम क्या निकला? स्त्रीओं के खिलाफ हिंसा पर क्या असर पड़ा? NCAER की रिसर्च का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यही है. रिसर्चर्स के मुताबिक, शराबबंदी का प्रमुख उद्देश्य स्त्रीओं के खिलाफ हिंसा और घरेलू हिंसा को कम करना था. लेकिन आंकड़ों के विश्लेषण से यह साफ नहीं दिखता कि शराबबंदी के बाद स्त्रीओं के खिलाफ अपराधों में अपेक्षित कमी आई हो. रिसर्च में दावा किया गया है कि शराबबंदी के बाद स्त्रीओं के खिलाफ रिपोर्ट किए गए अपराधों में कमी आने के बजाय वृद्धि हुई. यानी जिस लक्ष्य को शराबबंदी की सबसे बड़ी वजह बताया गया था, उसी पर सवाल खड़ा हो गया. हालांकि यहां एक दूसरा आंकड़ा भी तस्वीर को अलग तरीके से देखने को मजबूर करता है. NFHS के आंकड़ों के मुताबिक बिहार में शराब की खपत में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. पुरुषों में शराब की खपत NFHS-4 के अनुसार बिहार में 15 से 49 वर्ष की उम्र के 28.9 प्रतिशत पुरुष शराब पीते थे. NFHS-5 में यह आंकड़ा घटकर 17 प्रतिशत रह गया. NFHS-6 में यह और घटकर 16.5 प्रतिशत दर्ज किया गया. यानी शराब पीने वाले पुरुषों के अनुपात में बड़ी गिरावट आई. तो सवाल फिर वही है- अगर शराब पीने वालों की संख्या इतनी कम हुई, तो स्त्रीओं के खिलाफ हिंसा में अपेक्षित गिरावट क्यों नहीं दिखी? इसका एक जवाब यह हो सकता है कि स्त्रीओं के खिलाफ होने वाला हर अपराध सिर्फ शराब की वजह से नहीं होता. इसके पीछे सामाजिक, आर्थिक और पारिवारिक समेत कई दूसरे कारण भी होते हैं. यही वजह है कि शराबबंदी के असर को सिर्फ अपराध के आंकड़ों से देखना भी पूरी तस्वीर नहीं देता. घरेलू हिंसा का आंकड़ा क्या कहता है? NFHS के आंकड़े एक दिलचस्प तस्वीर सामने रखते हैं. NFHS-4 में अत्यधिक शराब पीने वाले पतियों की 83.1 प्रतिशत पत्नियों ने शारीरिक या यौन हिंसा का अनुभव होने की बात कही थी. वहीं शराब नहीं पीने वाले पतियों के मामलों में यह आंकड़ा 31.7 प्रतिशत था. NFHS-5 में अत्यधिक शराब पीने वाले पतियों के मामलों में यह आंकड़ा 83.3 प्रतिशत रहा, जबकि शराब नहीं पीने वाले पतियों के मामलों में यह 33.8 प्रतिशत दर्ज किया गया. यानी शराब और घरेलू हिंसा के बीच संबंध जरूर दिखाई देता है. लेकिन दूसरी तरफ यह भी स्पष्ट है कि शराब न पीने वाले परिवारों में भी घरेलू हिंसा के मामले मौजूद हैं. इसलिए सवाल यह नहीं है कि शराब घरेलू हिंसा का कारण है या नहीं. सवाल यह है कि क्या शराब बंद करने भर से घरेलू हिंसा खत्म हो सकती है? NCAER की रिसर्च इसी बिंदु पर शराबबंदी की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करती है. गर्भावस्था के दौरान हिंसा में क्या हुआ? NFHS-5 के अनुसार बिहार में गर्भावस्था के दौरान हिंसा के मामलों में 2 प्रतिशत की कमी आई. तुलना करें तो उत्तर प्रदेश में यह कमी 0.7 प्रतिशत और पश्चिम बंगाल में 1.5 प्रतिशत रही. यानी इस मोर्चे पर बिहार में गिरावट पड़ोसी राज्यों की तुलना में ज्यादा रही. इस आंकड़े को शराबबंदी के सकारात्मक प्रभाव के रूप में भी देखा जा सकता है. लेकिन पूरी तस्वीर में अवैध

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भारतीय खेल जगत में 12 अगस्त क्यों है खास? जानिए इसके पीछे की पूरी कहानी

Gold Medal In Hockey: हिंदुस्तानीय हॉकी के लिए कैलेंडर की तारीखें सिर्फ दिन और महीने का हिसाब नहीं हैं. कुछ तारीखें ऐसी हैं, जिनसे मैदान पर मिली जीत, देश की भावनाएं और खिलाड़ियों की मेहनत की कहानी जुड़ी हुई है. 12 अगस्त भी ऐसी ही तारीख है. इस दिन हिंदुस्तानीय हॉकी ने ओलंपिक में ऐसे मुकाम हासिल किए, जिनकी चर्चा आज भी होती है. खास बात यह है कि 12 अगस्त को हिंदुस्तान ने ओलंपिक में दो बार गोल्ड मेडल जीतकर इस दिन को हॉकी के लिए खास बना दिया. आजाद हिंदुस्तान का पहला ओलंपिक गोल्ड View on Instagram 12 अगस्त 1948 को लंदन ओलंपिक में हिंदुस्तानीय हॉकी टीम मैदान पर उतरी. देश को आजाद हुए अभी सिर्फ एक साल हुआ था. इससे पहले हिंदुस्तान ओलंपिक में हिस्सा लेता रहा था, लेकिन यह पहला मौका था जब हिंदुस्तानीय खिलाड़ी तिरंगे के नीचे मैदान में उतर रहे थे. फाइनल में हिंदुस्तान के सामने वही ब्रिटेन था, जिसने करीब दो शताब्दियों तक हिंदुस्तान पर शासन किया था. फेमस वेम्बली में स्पोर्ट्सा गया मैच मुकाबला लंदन के मशहूर वेम्बली स्टेडियम में स्पोर्ट्सा गया. करीब 10 हजार दर्शकों के सामने हिंदुस्तानीय टीम ने शानदार स्पोर्ट्स दिखाते हुए ब्रिटेन को 4-0 से हरा दिया. बारिश से मैदान गीला था और परिस्थितियां आसान नहीं थीं, लेकिन हिंदुस्तानीय खिलाड़ियों के पास बेहतरीन गेंद नियंत्रण, सटीक पासिंग और शानदार तालमेल था. ब्रिटेन के खिलाफ जीत के साथ हिंदुस्तानीय टीम ने स्वतंत्र हिंदुस्तान के लिए पहला ओलंपिक गोल्ड मेडल जीत लिया. Also Read: टीम इंडिया के टी20 कप्तान बाली में मना रहे छुट्टियां, शर्टलेस फोटो देखकर फैंस ऐसे कर रहे रिएक्ट बंटवारे के बाद बदली थी टीम की तस्वीर View on Instagram 1947 में देश आजाद हुआ, लेकिन साथ ही विभाजन का दर्द भी मिला. इसका असर हिंदुस्तानीय हॉकी टीम पर भी पड़ा. पंजाब के कई बेहतरीन खिलाड़ी पाकिस्तान चले गए. इनमें नियाज खान, शाह रुख मोहम्मद, अजीज मलिक और अली शाह दारा जैसे नाम शामिल थे. इसके बावजूद हिंदुस्तानीय टीम ने अपनी तैयारी में कोई कमी नहीं छोड़ी. तत्कालीन इंडियन हॉकी फेडरेशन के प्रमुख नवल टाटा ने खिलाड़ियों के लिए मुंबई में कैंप और अभ्यास मैच आयोजित करवाए. टीम को बेहतर तैयारी का समय मिले, इसके लिए खिलाड़ियों को जहाज की जगह हवाई यात्रा से लंदन भेजा गया. कप्तान किशन लाल के नेतृत्व वाली टीम में केडी सिंह बाबू, लेस्ली क्लॉडियस, केशव दत्त, रणधीर सिंह जेंटल और गोलकीपर आर. फ्रांसिस जैसे खिलाड़ी शामिल थे. Also Read: प्रैक्टिस सेशन के बाद रवींद्र जडेजा ने किया ‘पुष्पा’ वाला मूव, वीडियो देख फैंस को आई अल्लू अर्जुन की याद फिर 8 साल बाद 12 अगस्त को ही आया गोल्ड 12 अगस्त की तारीख ने हिंदुस्तानीय हॉकी को एक और यादगार पल दिया. 1956 मेलबर्न ओलंपिक में हिंदुस्तानीय टीम ने लगातार तीसरा ओलंपिक स्वर्ण जीतने का लक्ष्य लेकर मैदान में कदम रखा. इस बार फाइनल में सामने पाकिस्तान था. मुकाबला बेहद कड़ा रहा, लेकिन 38वें मिनट में फुलबैक रणधीर सिंह जेंटल ने गोल कर हिंदुस्तान को बढ़त दिलाई. यही गोल निर्णायक साबित हुआ और हिंदुस्तान ने पाकिस्तान को हराकर लगातार तीसरा ओलंपिक स्वर्ण अपने नाम कर लिया. Also Read: हिंदुस्तान-अफगानिस्तान T20 सीरीज की तारीखें तय, 13 सितंबर से दिल्ली में भिड़ेंगी दोनों टीमें The post हिंदुस्तानीय स्पोर्ट्स जगत में 12 अगस्त क्यों है खास? जानिए इसके पीछे की पूरी कहानी appeared first on Naya Vichar.

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रोहतास: गुप्ता धाम के रास्ते में बड़ा हादसा, खाई में गिरने से तीन कांवरियों की मौत; 24 घंटे बाद शव बरामद

Guptadham Accident: बड्डी थाना क्षेत्र के पनारी घाट से गुप्ता धाम जाने के रास्ते सोमवार की शाम पैर फिसलने से गहरी खाई में गिरकर तीन कांवरियों की मौत हो गई. मृतकों में भोजपुर जिले के तरारी थाना क्षेत्र के करथ गांव निवासी 50 वर्षीय मुमताज अंसारी तथा औरंगाबाद जिले के ओबरा थाना क्षेत्र के शंकरपुर गांव निवासी 35 वर्षीय शंभू मेहता और अमरपुरा गांव निवासी प्रयाग मेहता शामिल हैं. बड्डी और चेनारी पुलिस ने करीब 24 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद शवों को बरामद किया. गुप्ता धाम जाने के दौरान खाई में गिरा भोजपुर का कांवरिया गुप्ता धाम जाने के क्रम में सबसे पहले भोजपुर जिले के तरारी थाना क्षेत्र के करथ गांव निवासी 50 वर्षीय मुमताज अंसारी का पैर फिसल गया और वह पहाड़ी से नीचे गहरी खाई में जा गिरा. आसपास मौजूद श्रद्धालुओं ने पनारी में तैनात पुलिस अधिकारियों को इसकी सूचना दी. इसके बाद पुलिस ने कड़ी मशक्कत कर मुमताज के शव को बाहर निकाला. पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया. भीड़ में अनियंत्रित होकर खाई में गिरे दो कांवरिये मुमताज के शव को परिजनों को सौंपने के बाद पुलिस को दो और कांवरियों के खाई में गिरने की सूचना मिली. औरंगाबाद जिले के ओबरा थाना क्षेत्र के शंकरपुर गांव निवासी 35 वर्षीय शंभू मेहता और अमरपुरा गांव निवासी प्रयाग मेहता भीड़ के कारण अनियंत्रित होकर उसी जगह खाई में गिर गए. शंभू मेहता की घटनास्थल पर ही मौत हो गई, जबकि प्रयाग मेहता गंभीर रूप से घायल हो गए. दोनों को खाई से बाहर निकालने में काफी समय लग गया. इस दौरान प्रयाग मेहता की भी मौत हो गई. पुलिस ने बरामद किए दोनों शव बड्डी थानाध्यक्ष रामवृक्ष कुमार ने बताया कि मुमताज अंसारी के शव को परिजनों को सौंप दिया गया है. वहीं शंभू मेहता और प्रयाग मेहता के शव भी बरामद कर लिए गए हैं. मृतकों के परिजनों को घटना की सूचना दे दी गई है. दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल सासाराम भेजा जा रहा है. दूसरी सोमवारी पर गुप्ता धाम पहुंचे थे करीब तीन लाख श्रद्धालु सावन की दूसरी सोमवारी पर पवित्र गुफा में जलाभिषेक के लिए करीब तीन लाख श्रद्धालु गुप्ता धाम पहुंचे थे. श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण करमचट डैम, उगहनी घाट और पनारी घाट में अचानक भीड़ बढ़ गई. दूसरे जिलों और प्रदेशों से आने वाले अधिकतर श्रद्धालु पनारी घाट के रास्ते गुप्ता धाम जाना पसंद करते हैं. भीड़ बढ़ने के कारण श्रद्धालुओं को पहाड़ी पर चढ़ाई के दौरान काफी परेशानी हुई. बताया गया कि पनारी घाट के इस रास्ते में हर वर्ष खाई में गिरने से श्रद्धालुओं की मौत होती रही है. इसे लेकर पुलिस और प्रशासन की ओर से हर वर्ष चेतावनी भी जारी की जाती है. इसके बावजूद लापरवाही के कारण श्रद्धालु हादसों का शिकार हो जाते हैं. The post रोहतास: गुप्ता धाम के रास्ते में बड़ा हादसा, खाई में गिरने से तीन कांवरियों की मौत; 24 घंटे बाद शव बरामद appeared first on Naya Vichar.

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पाकिस्तान, सऊदी और तुर्की डिफेंस डील पर आया भारत का बयान, MEA ने कहा- समझौते पर है कड़ी नजर

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने द्विसाप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा, “हम पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं. जहां तक इस नए समझौते का सवाल है, हम अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा, क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के दृष्टिकोण से इसके निहितार्थों की समीक्षा कर रहे हैं.” उन्होंने जोर देकर कहा कि हिंदुस्तान अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इसके लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा. क्या है मक्का रक्षा समझौता? 7 अगस्त को सऊदी अरब के मक्का शहर में सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए. समझौते की मुख्य शर्तें और मुख्य बातें सामूहिक सुरक्षा: किसी भी एक सदस्य देश पर हुए सशस्त्र हमले को तीनों देशों पर हमला माना जाएगा. संयुक्त रक्षा सहयोग: तीनों देश रक्षा उत्पादन बढ़ाने, साझा सैन्य अभ्यास और आतंकवाद विरोधी अभियानों में सहयोग का विस्तार करेंगे. संयुक्त राष्ट्र चार्टर का हवाला: तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन के अनुसार, यह समझौता यूएन चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत आत्मरक्षा के अधिकार पर आधारित है और यह किसी विशेष देश के खिलाफ नहीं है. सऊदी अरब ने दी सफाई इस समझौते के बाद क्षेत्रीय तनाव की आशंकाओं के बीच सऊदी अरब ने एक अलग बयान जारी कर स्पष्ट किया है कि यह समझौता कोई धार्मिक गुट या परमाणु अभियान नहीं है. रियाध के अनुसार, इसका उद्देश्य केवल आत्मनिर्भर रक्षा क्षमताएं हासिल करना है और इससे अन्य अरब व वैश्विक देशों के साथ उसके मौजूदा संबंधों पर कोई असर नहीं पड़ेगा. पश्चिम एशिया संकट के बीच हुआ समझौता यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम एशिया में तनाव अपने चरम पर है. हाल ही में ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर संकट गहरा गया है. हिंदुस्तान के लिए इस नए गुट का बनना सामरिक और कूटनीतिक दोनों मोर्चों पर अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है. ये भी पढ़ें: लीबिया में ड्रोन अटैक से तेल रिफाइनरी में भीषण आग, कार बम विस्फोट में सैन्य खुफिया प्रमुख की मौत The post पाकिस्तान, सऊदी और तुर्की डिफेंस डील पर आया हिंदुस्तान का बयान, MEA ने कहा- समझौते पर है कड़ी नजर appeared first on Naya Vichar.

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Air India Flight turbulance case : पायलट नशे की हालत में उड़ा रहा था विमान? डोप टेस्ट में पाया गया पॉजिटिव

Air India Flight turbulance case : एयर इंडिया की फुकेत-दिल्ली उड़ान के दौरान हुई टर्बुलेंस की घटना में कई यात्री घायल हुए थे. न्यूज एजेंसी पीटीआई के सूत्रों के मुताबिक, पायलट डोप टेस्ट में पॉजिटिव पाया गया है. जांच में पाया गया कि पायलट ने विमान उड़ाने के दौरान गांजा का सेवन कर रखा था. इसके बाद DGCA (नागरिक उड्डयन मंत्रालय) ने जांच पूरी होने तक चालक दल के दोनों सदस्यों को उड़ान ड्यूटी से हटा दिया है. टर्बुलेंस के कारण विमान में आई थी अचानक ऊंचाई में गिरावट यह मामला 4 अगस्त को फुकेत से दिल्ली आ रही एअर इंडिया की उड़ान AI2379 (एयरबस A320) से जुड़ा है. उड़ान के दौरान विमान अचानक करीब 300 फीट नीचे आ गया था, जिसके बाद विमान में सवार यात्रियों और क्रू मेंबर्स को चोटें आई थीं. विमान में 137 यात्री और 8 क्रू सदस्य समेत कुल 145 लोग सवार थे. एअरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) के अनुसार, घटना के दौरान 20 यात्रियों और 4 केबिन क्रू सदस्यों को चोटें आई थीं. हालांकि विमान बाद में सुरक्षित तरीके से दिल्ली एयरपोर्ट पर उतर गया था. पायलट और को-पायलट की हुई थी जांच नियमों के तहत घटना के बाद विमान के दोनों पायलटों की नशीले पदार्थ के सेवन को लेकर जांच कराई गई थी. नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने 9 अगस्त को बताया था कि मुख्य पायलट की शुरुआती जांच रिपोर्ट में कुछ ऐसे संकेत मिले थे, जिसके बाद नमूनों को पुष्टि के लिए आगे प्रयोगशाला जांच में भेजा गया था. अब सूत्रों के अनुसार, अंतिम जांच रिपोर्ट में गांजे के सेवन की पुष्टि हुई है. AAIB कर रहा है घटना की विस्तृत जांच वहीं, AAIB ने इस घटना की जांच शुरू कर दी है. ब्यूरो ने बताया कि जांच के दौरान विमान के सिस्टम, फ्लाइट डेटा, ऑपरेशनल रिकॉर्ड, मेडिकल जानकारी और मानव कारकों से जुड़े पहलुओं की जांच की जा रही है. Also read : PHOTOS : उफनते नाले में बहा पुल, युवक लापता… रेस्क्यू टीम के बचाव अभियान की ग्राउंड तस्वीरें AAIB ने कहा कि जांच का उद्देश्य घटना के कारणों और उससे जुड़े कारकों का पता लगाना है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके. एजेंसी ने यह भी कहा है कि जांच पूरी होने से पहले किसी एक जानकारी के आधार पर निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए. The post Air India Flight turbulance case : पायलट नशे की हालत में उड़ा रहा था विमान? डोप टेस्ट में पाया गया पॉजिटिव appeared first on Naya Vichar.

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Student Silent March: हाथों में फूल, लेकिन जुबां रही खामोश, रांची में छात्रों ने निकाला साइलेंट मार्च

रांची से अभिषेक आनंद और अरविंद कुमार सिंह की रिपोर्ट Student Silent March: झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन मंगलवार को 18वें दिन भी जारी रहा. आंदोलन के तहत छात्रों ने राजधानी रांची में अनोखे तरीके से विरोध दर्ज कराया. ‘JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच’ की अगुवाई में बड़ी संख्या में छात्र और अभ्यर्थी हाथों में फूल लेकर मौन जुलूस में शामिल हुए. जयपाल सिंह स्टेडियम से शुरू हुआ यह साइलेंट मार्च अल्बर्ट एक्का चौक तक पहुंचा. जुलूस में नारेबाजी से परहेज जुलूस के दौरान छात्रों ने नारेबाजी से परहेज किया और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को सामने रखा. हाथों में फूल और जुबां पर खामोशी के जरिए प्रदर्शनकारियों ने भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और व्यवस्था में सुधार की मांग की. छात्रों का कहना है कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति या नेतृत्वक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य से जुड़े सवालों को लेकर है. 25 जुलाई से आंदोलन कर रहे हैं छात्र JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और अनियमितताओं को लेकर छात्र और अभ्यर्थी 25 जुलाई से आंदोलन कर रहे हैं. मंगलवार को आंदोलन का 18वां दिन रहा. इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने अलग-अलग माध्यमों से प्रशासन और संबंधित आयोगों के सामने अपनी मांगें रखने की कोशिश की है. छात्रों का कहना है कि राज्य में प्रशासनी नौकरियों के लिए आयोजित होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बेहद जरूरी है. लाखों अभ्यर्थी इन परीक्षाओं की तैयारी में वर्षों का समय और संसाधन लगाते हैं. ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठने से अभ्यर्थियों का भरोसा प्रभावित होता है. भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग आंदोलन कर रहे छात्रों की प्रमुख मांगों में JPSC और JSSC की कार्यप्रणाली में सुधार शामिल है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि दोनों आयोगों की परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि अभ्यर्थियों को निष्पक्ष अवसर मिल सके. छात्रों ने कई परीक्षाओं को रद्द करने की मांग भी उठायी है. उनका कहना है कि जिन परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आये हैं, उनकी निष्पक्ष जांच जरूरी है. इसके साथ ही परीक्षा प्रक्रिया में जिम्मेदारी तय करने और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा पैदा नहीं होने देने के लिए ठोस सुधार की मांग की जा रही है. CBI या सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के पैनल से जांच की मांग प्रदर्शनकारी छात्र भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवादों की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं. उनकी मांग है कि मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी CBI से करायी जाए. वैकल्पिक तौर पर राज्य के बाहर के उच्च न्यायालयों के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों का पैनल गठित कर जांच कराने की मांग भी की गयी है. छात्रों का तर्क है कि जांच ऐसी एजेंसी या समिति से होनी चाहिए, जिस पर किसी तरह का दबाव या पक्षपात का आरोप नहीं लगे. इसी मांग को लेकर मंच की ओर से लगातार प्रशासन पर दबाव बनाया जा रहा है. छह प्रदर्शनकारी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर आंदोलन के दौरान छह प्रदर्शनकारी छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर भी बैठे हैं. इनमें से दो छात्रों की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है. इससे आंदोलन को लेकर चिंता भी बढ़ी है. छात्र संगठनों की ओर से प्रशासन से मांग की जा रही है कि वह आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए जल्द समाधान निकाले और प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत के माध्यम से उनकी मांगों पर निर्णय ले. प्रशासन और छात्रों के बीच छठे दौर की वार्ता भी बेनतीजा रविवार को JPSC-JSSC मंच के प्रतिनिधियों और झारखंड प्रशासन के बीच छठे दौर की वार्ता हुई थी. हालांकि, बातचीत के बावजूद किसी ठोस नतीजे पर सहमति नहीं बन सकी. दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे पर मामले के समाधान को लेकर गंभीर नहीं होने के आरोप लगाये गये. लगातार कई दौर की बातचीत के बाद भी समाधान नहीं निकलने से छात्रों का आंदोलन जारी है. इसी क्रम में मंगलवार को छात्रों ने मौन जुलूस के जरिए अपना विरोध दर्ज कराया. इसे भी पढ़ें: विधानसभा में सीएम हेमंत सोरेन का बड़ा ऐलान, 14वीं JPSC और दो बैकलॉग परीक्षाएं होंगी रद्द फूलों के साथ दिया शांतिपूर्ण विरोध का संदेश मंगलवार के मार्च की खास बात यह रही कि प्रदर्शनकारियों ने हाथों में फूल लेकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी. नारेबाजी के बजाय मौन रहकर छात्रों ने प्रशासन और प्रशासन का ध्यान अपनी मांगों की ओर खींचने की कोशिश की. जयपाल सिंह स्टेडियम से अल्बर्ट एक्का चौक तक निकले इस मार्च में छात्रों ने भर्ती परीक्षाओं में सुधार, पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग दोहरायी. आंदोलन के 18वें दिन भी समाधान नहीं निकलने के बाद अब आगे की रणनीति पर छात्रों की नजर है. वहीं, प्रशासन के सामने भी चुनौती है कि बातचीत के कई दौर के बावजूद बने गतिरोध को कैसे खत्म किया जाए. इसे भी पढ़ें: CAG Report: झारखंड को 327 करोड़ का राजस्व घाटा, 1.60 लाख करोड़ के खर्च का कोई हिसाब नहीं The post Student Silent March: हाथों में फूल, लेकिन जुबां रही खामोश, रांची में छात्रों ने निकाला साइलेंट मार्च appeared first on Naya Vichar.

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