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सितंबर शुरू होते ही निपटा लें टैक्स के ये 5 काम, मिस हुई डेडलाइन तो बढ़ेगी टेंशन

सितंबर 2026 टैक्सपेयर्स के लिए काफी अहम रहने वाला है. इस महीने TDS, TCS जमा करने से लेकर एडवांस टैक्स की दूसरी किस्त और ऑडिट रिपोर्ट जमा करने तक कई जरूरी काम पूरे करने हैं. किसी भी डेडलाइन को मिस करने पर पेनल्टी या इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से जांच का सामना करना पड़ सकता है. अगर आप टैक्स से जुड़े काम खुद संभालते हैं या किसी बिजनेस, ट्रस्ट या संस्था से जुड़े हैं, तो सितंबर की ये तारीखें अभी से नोट कर लेना बेहतर रहेगा. सितंबर में कौन-कौन सी तारीखें हैं जरूरी? तारीख क्या करना है? किसके लिए जरूरी 7 सितंबर अगस्त 2026 का TDS/TCS जमा करना TDS/TCS जमा करने वाले टैक्सपेयर्स 14 सितंबर फॉर्म नंबर 132 जारी करना TDS काटने वाले टैक्सपेयर्स 15 सितंबर एडवांस टैक्स की दूसरी किस्त जमा करना एडवांस टैक्स देने वाले टैक्सपेयर्स 15 सितंबर फॉर्म 1 और फॉर्म नंबर 137 से जुड़े काम संबंधित स्टॉक एक्सचेंज और प्रशासनी कार्यालय 30 सितंबर फॉर्म नंबर 141 और जरूरी ऑडिट रिपोर्ट जमा करना संबंधित टैक्सपेयर्स, ट्रस्ट और संस्थाएं 7 सितंबर को कौन सा काम निपटाना है? 7 सितंबर सबसे पहली अहम डेडलाइन है. इस दिन तक अगस्त 2026 में काटा या जमा किया गया TDS और TCS केंद्र प्रशासन के पास जमा करना होगा. प्रशासनी अथॉरिटी की ओर से कलेक्ट किया गया TDS/TCS भी इसी दिन बिना इनकम टैक्स चालान के केंद्र प्रशासन के पास जमा करना होगा. इसके अलावा अगस्त में खरीदारों से मिले फॉर्म नंबर 127 के डिक्लेरेशन को भी इसी तारीख तक अपलोड करना है. 14 और 15 सितंबर को क्या करना होगा? 14 सितंबर तक जुलाई 2026 में काटे गए TDS से जुड़ा फॉर्म नंबर 132 जारी करना होगा. इसके बाद 15 सितंबर की डेडलाइन और भी अहम है. इस दिन टैक्स ईयर 2026-27 के लिए एडवांस टैक्स की दूसरी किस्त जमा करनी होगी. साथ ही इनकम टैक्स रूल्स, 2026 के तहत अगस्त 2026 का फॉर्म 1 भी जमा करना है. यह स्टेटमेंट स्टॉक एक्सचेंज की ओर से उन ट्रांजैक्शन के लिए जारी किया जाता है, जिनमें सिस्टम में रजिस्टर्ड होने के बाद क्लाइंट कोड बदले गए हों. प्रशासनी कार्यालयों को भी 15 सितंबर तक फॉर्म नंबर 137 जमा करना है, जहां अगस्त का TDS/TCS बिना चालान के जमा किया गया है. 30 सितंबर को किन लोगों को संभलना होगा? 30 सितंबर को भी कई जरूरी काम पूरे करने हैं. अगस्त 2026 में सेक्शन 393(1) के तहत काटे गए टैक्स के लिए फॉर्म नंबर 141 में चालान-कम-स्टेटमेंट जमा करना होगा. इसके अलावा असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए सेक्शन 44AB के तहत ऑडिट रिपोर्ट की भी डेडलाइन है. यह उन कॉरपोरेट और नॉन-कॉरपोरेट असेसी के लिए लागू है, जिनकी इनकम टैक्स रिटर्न जमा करने की तारीख 31 अक्टूबर 2026 है. ट्रस्ट, फंड, अस्पताल, यूनिवर्सिटी और एजुकेशनल या मेडिकल संस्थानों को भी जरूरत के मुताबिक फॉर्म 10B या फॉर्म 10BB में ऑडिट रिपोर्ट जमा करनी होगी. ये भी पढ़ें: 8th Pay Commission: आज खत्म होगी 20 कंसल्टेंट पदों की भर्ती, ₹1.8 लाख तक सैलरी, जानें कौन कर सकता है अप्लाई The post सितंबर शुरू होते ही निपटा लें टैक्स के ये 5 काम, मिस हुई डेडलाइन तो बढ़ेगी टेंशन appeared first on Naya Vichar.

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Nepal Flood: बाढ़ में बहकर आए 250 शव, 100 को दफनाने पर भड़के हिंदू परिवार, कहा- सम्मान से हो अंतिम संस्कार

Nepal Flood : शवों को अस्थायी कब्रों में दफनाने के इस फैसले को लेकर सवाल उठ रहे हैं. आरोप है कि शवों को दफनाने के दौरान हिंदू धर्म की अंतिम संस्कार परंपराओं का पालन नहीं किया गया. इससे मृतकों के परिवारों में नाराजगी बढ़ गई है. नेपाल के दक्षिण-मध्य हिस्से में स्थित चितवन जिले में इस त्रासदी की भयावहता साफ दिखाई दे रही है. बुधवार (26 अगस्त) को आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद करीब 250 शव पहचान का इंतजार कर रहे हैं, जबकि उन्हें अस्थायी रूप से दफनाने के लिए जल्दबाजी में गहरी खाइयां खोदी गई हैं. इस बाढ़ और भूस्खलन में नेपाल और तिब्बत में कम से कम 900 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है और 3,000 से अधिक लोग लापता हैं. बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित इलाके से सैकड़ों किलोमीटर दूर चितवन में बरामद किए गए. ये शव भोटेकोशी नदी के तेज बहाव में बहकर पहुंचे थे. 100 शवों को अस्थायी रूप से दफनाया गया अधिकारियों ने बताया कि फॉरेंसिक टीमों पर बढ़ते दबाव के बीच शनिवार को करीब 100 शवों को अस्थायी रूप से दफनाया गया. शवों को लेकर गाड़ियों का एक काफिला घने और हरे-भरे जंगल वाले इलाके में पहुंचा. वहां एक खुदाई मशीन ने गहरी खाई खोदी. शवों की पहचान और उन्हें संभालने की प्रक्रिया देख रहे पुलिस निरीक्षक अनिल थापा ने बताया कि शवों को दफनाने से पहले सभी के डीएनए सैंपल लिए जा रहे हैं. इससे बाद में शवों की पहचान करने में मदद मिलेगी और परिवारों को अपने लापता परिजनों के बारे में जानकारी मिल सकेगी. ये भी पढ़ें: Nepal Flood : जिस तरह की झील से नेपाल में आई तबाही, वैसी ही 200 ग्लेशियर लेक हिंदुस्तानीय सीमा में, बना हुआ है जलप्रलय का खतरा पुलिस निरीक्षक अनिल थापा ने बताया कि अधिकारियों ने शवों के डीएनए सैंपल सुरक्षित रखे हैं. शवों के चेहरे और पहचान में मदद करने वाली दूसरी खास चीजों की तस्वीरें भी ली जा रही हैं. हर शव को एक अलग नंबर दिया गया है, ताकि बाद में परिवार उसकी पहचान कर शव ले सकें. उन्होंने बताया कि कई शव करीब चार दिनों तक बाढ़ के पानी में पड़े रहे थे. इसलिए उन्हें बाहर निकालने तक सड़ने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी, जिससे पहचान करना मुश्किल हो रहा है. शव तेजी से सड़ रहे हैं पूरे इलाके में कई मकान, वाहन और खेतों में इस्तेमाल होने वाले ट्रैक्टर अब भी कीचड़ में आधे दबे हुए हैं. अधिकारियों के मुताबिक, जिले में फॉरेंसिक सुविधाओं की कमी और मुर्दाघरों में पर्याप्त जगह न होने से बड़ी संख्या में बरामद शवों को संभालने की चुनौती और बढ़ गई है. अधिक नमी और भीषण गर्मी के कारण शव तेजी से सड़ रहे हैं. स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि शवों को खुले में ज्यादा समय तक रखने से बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ सकता है. ये भी पढ़ें: नया विचार की ग्राउंड जीरो रिपोर्ट: नेपाल कांग्रेस के नेता ने नेपाल बाढ़ को बताया राष्ट्रीय संकट, चीन पर लगे आरोपों को किया खारिज अपने दो रिश्तेदारों के लापता होने के बाद उनकी तलाश कर रहीं रूबी चौधरी ने कहा कि परिवारों की सहमति के बिना शवों को दफन नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘‘मृतकों के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाना चाहिए. हमारी परंपरा है कि मृतक का अंतिम संस्कार नदी के किनारे उसके निकटतम परिजनों की मौजूदगी में किया जाता है.’’ लोगों का आरोप- शवों को दफनाने में जल्दबाजी की गई नेपाल में बाढ़ की तबाही के बाद शवों को दफनाए जाने को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ रही है. कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि मृतकों को सम्मान के साथ अंतिम विदाई नहीं मिल पायी. लापता परिजनों की तलाश कर रहे परिवारों ने भी सवाल उठाया कि क्या अधिकारियों ने शवों को दफनाने में जल्दबाजी की. यह मामला इसलिए भी संवेदनशील है, क्योंकि नेपाल में हिंदू आबादी बड़ी संख्या में है और यहां परंपरा के अनुसार मृतकों का अंतिम संस्कार आमतौर पर दाह संस्कार से किया जाता है. The post Nepal Flood: बाढ़ में बहकर आए 250 शव, 100 को दफनाने पर भड़के हिंदू परिवार, कहा- सम्मान से हो अंतिम संस्कार appeared first on Naya Vichar.

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नेपाल में प्राकृतिक आपदा का असर : पूजा में घूमने की योजना रद्द कर रहे बंगाल के पर्यटक ट्रेन-विमान के टिकट कैंसल

नेपाल में भीषण बाढ़ और प्राकृतिक आपदा के कारण मृतकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. बड़ी संख्या में पर्यटकों के अब भी लापता होने की समाचार है. ऐसे में पूजा की छुट्टियों में नेपाल घूमने की योजना बना रहे कई पर्यटकों ने अपनी यात्रा रद्द करनी शुरू कर दी है. ट्रैवल एजेंसियों ने यात्रियों के लिए पहले ही ट्रेन और विमान के टिकट बुक कर लिये थे, लेकिन अब यात्रियों के दबाव के कारण उन्हें टिकट रद्द करने पड़ रहे हैं. बंगाल के लोगों का पसंदीदा पर्यटन स्थल रहा है नेपाल हर साल पूजा की छुट्टियों में बंगाल के लोग परिवार के साथ घूमने निकलते हैं. नेपाल शुरू से ही बंगाल के लोगों का पसंदीदा पर्यटन स्थल रहा है. इस बार भी पर्यटकों ने करीब दो महीने पहले ही विभिन्न ट्रैवल एजेंसियों के जरिये टिकट और होटल की बुकिंग करा ली थी. हालांकि, नेपाल में आयी प्राकृतिक आपदा के बाद पर्यटक अपनी यात्राएं रद्द कर रहे हैं. इससे ट्रैवल एजेंसियों को खासा नुकसान उठाना पड़ रहा है. प्राकृतिक आपदा के बाद डर गये हैं पर्यटक : कल्लोल बेलूड़ की एक पर्यटन एजेंसी के मालिक कल्लोल पान ने बताया कि पूजा के दौरान 65 लोगों के एक दल को लेकर नेपाल जाने की योजना थी. यात्रा के लिए टिकट भी बुक किये जा चुके थे, लेकिन अब यह यात्रा रद्द कर दी गयी है. प्राकृतिक आपदा की तस्वीरें देखने के बाद पर्यटक डर गये हैं और अब नेपाल जाने के लिए तैयार नहीं हैं. उन्होंने बताया कि नेपाल की बजाय पर्यटकों को अंडमान, सिक्किम या भूटान ले जाने की योजना बनायी जा रही है. ये भी पढ़ें: शिक्षक दंपती और SAIL के पूर्व कर्मचारी समेत बंगाल के 32 तीर्थयात्री लापता, शुभेंदु और ममता बोले- सभी सकुशल लौटेंगे ट्रेन, विमान और होटल की बुकिंग हुई रद्द सलकिया की एक अन्य पर्यटन एजेंसी के मालिक अभिजीत मंडल ने बताया कि पूजा की छुट्टियों के दौरान नेपाल की 2 यात्रा की योजना थी. विमान और ट्रेन के टिकट बुक हो चुके थे. यहां तक कि होटलों को अग्रिम राशि भी दी जा चुकी थी, लेकिन पर्यटकों ने नेपाल यात्रा रद्द कर दी है. होटल प्रबंधन अग्रिम राशि कब तक लौटायेगा, यह बता पाना अभी संभव नहीं है. ये भी पढ़ें: नेपाल बाढ़ 2026: कैलाश मानसरोवर यात्रा का वीजा खारिज होना बंगाल की बुजुर्ग स्त्री के लिए बना वरदान अब नेपाल जाने का सवाल ही नहीं : मनोज बेलूड़ निवासी मनोज कुमार झा ने बताया कि इस वर्ष पूजा की छुट्टियां बिताने के लिए उन्होंने तैयारी शुरू की थी. मिथिला एक्सप्रेस से रक्सौल तक का टिकट भी बुक हो गया था, लेकिन अब नेपाल जाने का सवाल ही नहीं उठता है. The post नेपाल में प्राकृतिक आपदा का असर : पूजा में घूमने की योजना रद्द कर रहे बंगाल के पर्यटक ट्रेन-विमान के टिकट कैंसल appeared first on Naya Vichar.

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Digital Marketing vs Digital Analytics: इंडस्ट्री में किसकी डिमांड ज्यादा?

Digital Marketing vs Digital Analytics: आज के समय में जब हर बिजनेस ऑनलाइन हो रहा है, डिजिटल फील्ड में करियर बनाने के मौके तेजी से बढ़े हैं. छात्रों के बीच ‘डिजिटल मार्केटिंग’ और ‘डिजिटल एनालिटिक्स’ दो सबसे फेमस करियर ऑप्शन्स बनकर सामने आए हैं. हालांकि, किस फील्ड में ज्यादा स्कोप है और किसे चुनना सही रहेगा, इसको लेकर युवाओं में अक्सर कन्फ्यूजन रहता है. Digital Marketing vs Digital Analytics: मुख्य अंतर डिजिटल मार्केटिंग और डिजिटल एनालिटिक्स दोनों ही डिमांडिंग फील्ड्स हैं. जहां डिजिटल मार्केटिंग में क्रिएटिविटी, सोशल मीडिया और ब्रांड प्रमोशन पर फोकस रहता है, वहीं डिजिटल एनालिटिक्स में डेटा, कोडिंग और टेक्निकल एनालिसिस मुख्य है. मार्केटिंग में शुरुआती नौकरियां आसानी से मिल जाती हैं, जबकि एनालिटिक्स में शुरुआती सैलरी पैकेज और लॉन्ग-टर्म ग्रोथ बेहतर मिलती है. तुलना का आधार डिजिटल मार्केटिंग डिजिटल एनालिटिक्स मुख्य काम ब्रांड प्रमोशन, लीड जनरेशन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट यूजर बिहेवियर, डेटा एनालिसिस और बिजनेस रिपोर्टिंग जरूरी स्किल्स कंटेंट राइटिंग, SEO, सोशल मीडिया ट्रेंड्स, क्रिएटिविटी SQL, Google Analytics, Python, मैथ और लॉजिक जॉब के अवसर एंट्री-लेवल पर अधिक नौकरियां और आसान एंट्री स्पेशलाइज्ड रोल्स और तेजी से बढ़ती टेक्निकल डिमांड शुरुआती सैलरी सामान्य से मध्यम डिजिटल मार्केटिंग की तुलना में अधिक शुरुआती पैकेज किसे चुनना चाहिए? जिनकी सोच क्रिएटिव है और कम्यूनिकेशन बेहतर है जिन्हें नंबर्स, डेटा और टेक्निकल टूल्स में रुचि है ये भी पढ़ें: रिम्स में MBBS नामांकन का दूसरा दिन, 180 सीटें बढ़कर हुईं 250 डिजिटल मार्केटिंग: क्रिएटिविटी का स्पोर्ट्स डिजिटल मार्केटिंग का मुख्य उद्देश्य ब्रांड की रीच बढ़ाना और नए ग्राहक जोड़ना है. अगर आपकी सोच क्रिएटिव है, कम्यूनिकेशन स्किल्स अच्छी हैं और आप कंटेंट या सोशल मीडिया ट्रेंड्स को जल्दी समझते हैं, तो यह फील्ड आपके लिए एकदम सही है. डिजिटल एनालिटिक्स: डेटा की ताकत डिजिटल एनालिटिक्स का काम वेबसाइट या ऐप के डेटा को समझकर बिजनेस फैसले लेना होता है. AI और बिग डेटा के दौर में कंपनियों के लिए डेटा एनालिस्ट की मांग बहुत तेजी से बढ़ी है. अगर आपकी रुचि नंबरों, आंकड़ों और एनालिसिस में है, तो आपको इस फील्ड को प्राथमिकता देनी चाहिए. Digital Marketing vs Digital Analytics: इंडस्ट्री की मांग किस तरफ है? इंडस्ट्री ट्रेंड्स को देखें तो डिजिटल मार्केटिंग में नौकरियों की संख्या हमेशा ज्यादा रहती है, क्योंकि हर छोटे-बड़े बिजनेस को मार्केटर की जरूरत होती है. दूसरी तरफ, डिजिटल एनालिटिक्स एक स्पेशलाइज्ड फील्ड है, जहां शुरुआती सैलरी पैकेज और लॉन्ग-टर्म करियर ग्रोथ ज्यादा देखने को मिलती है. आज के दौर में इन दोनों का कॉम्बिनेशन यानी ‘डेटा-ड्रिवन मार्केटिंग’ जानने वालों की मार्केट में सबसे ज्यादा डिमांड है. ये भी पढ़ें: MPESB Exam Calendar 2026: मध्य प्रदेश में 18 हजार से अधिक पदों पर होगी भर्ती, देखें एग्जाम कैलेंडर The post Digital Marketing vs Digital Analytics: इंडस्ट्री में किसकी डिमांड ज्यादा? appeared first on Naya Vichar.

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IPL 2027 Impact Player Rule: क्या IPL 2027 से खत्म होगा Impact Player Rule? BCCI ने 10 टीमों से मांगी राय

IPL 2027 Impact Player Rule: IPL 2027 शुरू होने से पहले ‘इम्पैक्ट प्लेयर नियम को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. हिंदुस्तानीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने लीग की सभी 10 फ्रेंचाइजियों से इस नियम पर उनकी राय मांगी है. टीमों को अपना फीडबैक देने के लिए 31 अगस्त तक का समय दिया गया है. हालांकि, अभी यह तय नहीं हुआ है कि नियम खत्म होगा या जारी रहेगा. अचानक ‘इम्पैक्ट प्लेयर रूल पर क्यों मांगी राय? IPL में फ्रेंचाइजियों से हर सीजन के बाद क्रिकेट ऑपरेशंस से जुड़े मामलों पर फीडबैक लेना सामान्य है. लेकिन इस बार ‘इम्पैक्ट प्लेयर रूल को खास तौर पर शामिल किया गया है. यही वजह है कि IPL 2027 में इस नियम के भविष्य को लेकर चर्चा तेज हो गई है. BCCI ने अपने कम्युनिकेशन में IPL 2026 कैप्टन मीटिंग का भी हवाला दिया है. इसे भी पढ़े- Dwayne Bravo Jersey Number 47 Retired: ड्वेन ब्रावो की No. 47 जर्सी हुई रिटायर, CPL में पहली बार हुआ ऐसा रोहित और अक्षर समेत कई खिलाड़ी कर चुके हैं विरोध रोहित शर्मा, हार्दिक पंड्या और अक्षर पटेल ने नियम पर उठाए सवाल ऑलराउंडर्स की भूमिका घटने को लेकर बढ़ी चिंता नियम से ऑलराउंडर्स के महत्व पर असर पड़ने की बात अक्षर पटेल ने 2026 सीजन से पहले कहा था कि वह इस नियम के पक्ष में नहीं हैं अब सवाल कि क्या इम्पैक्ट प्लेयर नियम स्पोर्ट्स का संतुलन बिगाड़ रहा है? बल्लेबाजों को फायदा, गेंदबाजों पर दबाव? इस नियम की वजह से टीमों को मैच के दौरान अपनी रणनीति बदलने का अतिरिक्त मौका मिलता है. आलोचकों का कहना है कि इससे बल्लेबाजी को फायदा और गेंदबाजों पर दबाव बढ़ सकता है. IPL 2026 में भी कई बड़े स्कोर देखने के बाद बैट और बॉल के बीच संतुलन पर बहस हुई. इसे भी पढ़े- Sri Lanka Women’s Champions Trophy 2027: श्रीलंका से छिनी विमेंस चैंपियंस ट्रॉफी 2027 की मेजबानी, क्या टीम भी होगी बाहर? IPL 2027 में क्या बदलेगा? फिलहाल ‘इम्पैक्ट प्लेयर रूल खत्म होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. BCCI अब फ्रेंचाइजियों की राय इकट्ठा करेगा और उसके बाद अगले सीजन के लिए जरूरी बदलावों पर फैसला लिया जा सकता है. यानी IPL 2027 में यह नियम पहले जैसा रहेगा, बदलेगा या खत्म होगा कि इसका जवाब अभी बाकी है. The post IPL 2027 Impact Player Rule: क्या IPL 2027 से खत्म होगा Impact Player Rule? BCCI ने 10 टीमों से मांगी राय appeared first on Naya Vichar.

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सेंसेक्स 285 अंक नीचे, Nifty भी लाल, क्रूड ऑयल 90 डॉलर के पार पहुंचते ही बाजार पर बढ़ा दबाव

कारोबार के दौरान BSE सेंसेक्स 284.52 अंक यानी 0.37 फीसदी गिरकर 76,979.99 पर रहा. वहीं, NSE निफ्टी 50 58.10 अंक यानी 0.24 फीसदी टूटकर 24,117.55 पर कारोबार करता दिखा. बाजार पर दबाव की वजहें क्या हैं? मार्केट एक्सपर्ट अजय बग्गा के मुताबिक, ग्लोबल मार्केट्स इस समय एक साथ कई बड़े घटनाक्रमों का असर झेल रहे हैं. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नए सिरे से तनाव बढ़ने से तेल की कीमतों में फिर से तेजी आई है. इसके अलावा, जैक्सन होल में अमेरिकी फेडरल रिजर्व चेयर केविन वॉर्श की महंगाई को लेकर सख्त टिप्पणियों ने भी बाजार का मूड बिगाड़ा. उन्होंने 2 फीसदी के इन्फ्लेशन टारगेट को दोहराते हुए कहा कि फेड को इस बात का भरोसा होना चाहिए कि महंगाई साफ तौर पर और पर्याप्त तेजी से तय लक्ष्य की ओर बढ़ रही है. मार्केट ने इस रुख को हॉकीश यानी सख्त माना है, जिससे 16 सितंबर की फेड मीटिंग में इंटरेस्ट रेट बढ़ने की उम्मीद बढ़ी है. ऊंची ब्याज दरें हिंदुस्तान जैसे इमर्जिंग मार्केट्स के लिए दबाव पैदा कर सकती हैं. एशियाई बाजारों में कैसा रहा माहौल? हिंदुस्तानीय बाजार अकेले दबाव में नहीं थे। सोमवार को ज्यादातर एशियाई मार्केट्स भी लाल निशान में रहे. बाजार बदलाव साउथ कोरिया कोस्पी -1.46% ताइवान वेटेड इंडेक्स -1.17% जापान निक्केई 225 -1.08% गिफ्ट निफ्टी -0.61% स्ट्रेट्स टाइम्स +0.45% थाईलैंड सेट कंपोजिट +0.18% अमेरिकी मार्केट्स से भी कमजोर संकेत मिले. डाउ जोन्स फ्यूचर्स में गिरावट रही, जबकि एसएंडपी 500 और टेक-हेवी नैस्डैक भी लाल निशान में बंद हुए. हिंदुस्तान के लिए महंगा क्रूड ऑयल क्यों चिंता की बात है? रिपोर्टिंग के समय ब्रेंट क्रूड 2.27 फीसदी चढ़कर 90.10 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड ऑयल 2.03 फीसदी बढ़कर 85.09 डॉलर पर पहुंच गया. हिंदुस्तान दुनिया के बड़े क्रूड ऑयल इम्पोर्टर्स में शामिल है, इसलिए लंबे समय तक तेल महंगा रहने से देश की इकोनॉमी पर दबाव बढ़ सकता है. बग्गा के मुताबिक, हिंदुस्तान वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही में तीन तरफ से दबाव का सामना कर रहा है. ऊंचा क्रूड ऑयल, सामान्य से कम मानसून और हॉकीश अमेरिकी फेड के साथ ईरान कॉन्फ्लिक्ट से बढ़ा ग्लोबल तनाव. ऐसे में रुपये पर दबाव और इम्पोर्टेड इन्फ्लेशन बढ़ने की चिंता रहती है. निवेशकों के लिए आगे क्या संकेत हैं? एक्सपर्ट्स का कहना है कि मौजूदा हालात में पूरे बाजार को लेकर ज्यादा आशावादी होने के बजाय सेलेक्टिव पोजिशनिंग बेहतर हो सकती है. हिंदुस्तानीय बाजार में अर्निंग्स सीजन भी मिला-जुला रहा है और पिछले चार हफ्तों से प्रमुख इंडेक्स सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव के साथ कंसोलिडेशन में हैं. हालांकि, डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स यानी डीआईआई बाजार को सहारा देते दिखे. देवार्श वकिल के अनुसार, फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स यानी एफआईआई करीब 150 करोड़ रुपये के नेट सेलर रहे, जबकि डीआईआई ने लगभग 12,500 करोड़ रुपये का निवेश किया. यानी विदेशी बिकवाली के बीच घरेलू खरीदारी फिलहाल बाजार के लिए एक अहम सहारा बनी हुई है. सोने में भी गिरावट दर्ज की गई और यह 0.68 फीसदी फिसलकर 4,422.93 डॉलर पर रहा. अब निवेशकों की नजर वेस्ट एशिया के हालात, कच्चे तेल की चाल और अमेरिकी फेड के अगले फैसले पर रहेगी. ये भी पढ़ें: ईरान-अमेरिका भिड़े तो महंगा हुआ तेल, Brent $89.18 और WTI $84.32 पर The post सेंसेक्स 285 अंक नीचे, Nifty भी लाल, क्रूड ऑयल 90 डॉलर के पार पहुंचते ही बाजार पर बढ़ा दबाव appeared first on Naya Vichar.

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10 ग्राम सोना ₹10 सस्ता, चांदी ₹100 लुढ़की, 31 अगस्त को खरीदारी से पहले जान लें नया भाव

31 अगस्त को सोना और चांदी खरीदने की सोच रहे हैं तो पहले आज का ताजा भाव जान लीजिए. आज दोनों की कीमतों में हल्की गिरावट देखने को मिली है. 24 कैरेट सोना ₹1 प्रति ग्राम सस्ता हुआ है, जबकि चांदी ₹100 प्रति किलो सस्ती हुई है. हालांकि आपको बता दें कि यहां दिए गए भाव पिछले कारोबारी सेशन के बंद होने के समय और आज के उपलब्ध भाव के आधार पर हैं.  सोने का आज क्या है भाव? आज हिंदुस्तान में 24 कैरेट सोना ₹15,823 प्रति ग्राम और 22 कैरेट सोना ₹14,504 प्रति ग्राम पर है. यानी 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत ₹1,58,230 है. बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए राहत की बात यह है कि इन राज्यों के प्रमुख शहरों में भी सोना कल के मुकाबले थोड़ा सस्ता हुआ है. सोने का रेट टेबल: शहर आज का भाव (24 कैरेट, 10 ग्राम) कल का भाव कितना घटा या बढ़ा पटना ₹1,58,280 ₹1,58,290 ₹10 घटा रांची ₹1,58,230 ₹1,58,240 ₹10 घटा लखनऊ ₹1,58,380 ₹1,58,390 ₹10 घटा दिल्ली ₹1,58,380 ₹1,58,390 ₹10 घटा कोलकाता ₹1,58,230 ₹1,58,240 ₹10 घटा मुंबई ₹1,58,230 ₹1,58,240 ₹10 घटा चांदी में कितनी राहत मिली? चांदी आज ₹2,54,900 प्रति किलो है. कल इसका भाव ₹2,55,000 प्रति किलो था. यानी एक दिन में चांदी ₹100 सस्ती हुई है. 100 ग्राम चांदी का भाव आज ₹25,490 और 10 ग्राम का भाव ₹2,549 है.  चांदी का रेट टेबल: शहर आज का भाव (1 किलो) कल का भाव कितना घटा या बढ़ा पटना ₹2,54,900 ₹2,55,000 ₹100 घटा रांची ₹2,54,900 ₹2,55,000 ₹100 घटा लखनऊ ₹2,54,900 ₹2,55,000 ₹100 घटा दिल्ली ₹2,54,900 ₹2,55,000 ₹100 घटा कोलकाता ₹2,54,900 ₹2,55,000 ₹100 घटा मुंबई ₹2,54,900 ₹2,55,000 ₹100 घटा कीमतों में गिरावट क्यों आई? दुनियाभर के बाजार में सोने और चांदी पर दबाव बना हुआ है. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिकी प्रशासनी बॉन्ड से मिलने वाले ब्याज में बढ़ोतरी का असर कीमती धातुओं की कीमतों पर पड़ा है.  ये भी पढ़ें: कहीं पेट्रोल सस्ता तो कहीं डीजल महंगा, पटना से मुंबई तक चेक करें 31 अगस्त के ताजा भाव The post 10 ग्राम सोना ₹10 सस्ता, चांदी ₹100 लुढ़की, 31 अगस्त को खरीदारी से पहले जान लें नया भाव appeared first on Naya Vichar.

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JPSC घोटाला : यूपी परीक्षा घोटाले के आरोपी से कराया JPSC में खेल, OMR शीट में गड़बड़ी कर बनायी घोटाले की योजना

रांची. JPSC नियुक्ति घोटाला और जेएसएससी सीजीएल गड़बड़ी की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है. जांच में सामने आया है कि उत्तर प्रदेश में परीक्षा घोटाले में शामिल रहा मो. उस्मान ही जेपीएससी में गड़बड़ी का मास्टरमाइंड था. उस्मान को JPSC में काम करने का दिया न्योता उत्तर प्रदेश में उस्मान दूसरी कंपनी में काम करता था और वहां आयोजित परीक्षाओं में ओएमआर शीट में गड़बड़ी करता था. इसकी जानकारी टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह को हुई, जिसके बाद उन्होंने ही उस्मान को JPSC में काम करने का न्योता दिया. उसे टीडीपीएल का कर्मी बताया गया, जबकि वह मूल रूप से दूसरी कंपनी का स्टाफ था और टीडीपीएल ने उसे हायर किया था. उस्मान के साथ तीन अन्य लोगों की सहायता से जेपीएससी के अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट में गड़बड़ी करायी जाती थी. ओएमआर की पीडीएफ में छेड़छाड़ की जाती थी और मूल डेटा को भी बदला जाता था. यूपी में हुई परीक्षाओं की गड़बड़ी की भी जांच CID अब उत्तर प्रदेश में हुई परीक्षाओं में गड़बड़ी और इसमें संलिप्त लोगों की भूमिका की सत्यता की जांच कर रही है. सीआईडी यह भी जांच कर रही है कि क्या जेपीएससी परीक्षा घोटाले में सारी गड़बड़ियां टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह ही करते थे और क्या यह स्पोर्ट्स सिर्फ ओएमआर शीट तक सीमित था या मुख्य परीक्षा की कॉपियों में भी गड़बड़ी होती थी. इस मामले में गिरफ्तार उस्मान और एक अन्य आरोपी ने रामवीर सिंह पर ही सीधे आरोप लगाये हैं. जेपीएससी की उप-परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी ने भी टीडीपीएल के निदेशक को ही मुख्य कर्ता-धर्ता बताया है. ये भी पढ़ें: अमृत हिंदुस्तान योजना से संवर रहे रांची मंडल के 15 स्टेशन, 132.5 करोड़ से हो रहा है कायाकल्प JPSC पेपर लीक में एक और आरोपी गिरफ्तार JPSC पेपर लीक मामले में सीआईडी ने रविवार को गिरिडीह से एक और आरोपी समीर कुमार को बेंगाबाद थाने से गिरफ्तार किया है. वहीं, दिल्ली से गिरफ्तार दो आरोपियों से भी सीआईडी लगातार पूछताछ कर रही है. पूछताछ में आरोपियों ने वेबेल, इससे जुड़ी संस्था आईएनएस और कुछ अन्य कंपनियों के बारे में जानकारी दी है. आरोपियों का कहना है कि वे निचले स्तर पर काम करते थे, जबकि मुख्य काम और जेएसएससी से सभी तरह की बातचीत वेबेल कंपनी के निदेशक मिथिलेश सिंह और दो अन्य व्यक्ति किया करते थे. The post JPSC घोटाला : यूपी परीक्षा घोटाले के आरोपी से कराया JPSC में स्पोर्ट्स, OMR शीट में गड़बड़ी कर बनायी घोटाले की योजना appeared first on Naya Vichar.

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FMGE एलिजिबिलिटी सर्टिफिकेट के लिए 1 सितंबर से करें अप्लाई, जानें पूरी प्रक्रिया और लास्ट डेट

FMGE 2026 Eligibility Certificate: नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (FMGE) 2026 के लिए Eligibility Certificate (EC) आवेदन प्रक्रिया की डेट जारी कर दी है. एलिजिबिलिटी सर्टिफिकेट के लिए ऑनलाइन अप्लाई करने की प्रक्रिया 1 सितंबर 2026 को सुबह 10 बजे से शुरू होगी. कैंडिडेट्स NMC की ऑफिशियल वेबसाइट के जरिए अप्लाई कर सकेंगे. 1 सितंबर से शुरू होगा आवेदन FMGE 2026 के लिए Eligibility Certificate का आवेदन 1 सितंबर 2026 से शुरू होगा. कैंडिडेट 20 सितंबर 2026 को शाम 6 बजे तक आवेदन कर सकते हैं. FMGE Screening Test 2026 में शामिल होने के लिए पात्र कैंडिडेटों को पहले NMC से Eligibility Certificate प्राप्त करना जरूरी होगा. कैंडिडेट आवेदन प्रक्रिया शुरू होने के बाद NMC के आधिकारिक पोर्टल application.nmc.org पर जाकर अपना फॉर्म भर सकते हैं. FMGE 2026 की परीक्षा तारीख अभी घोषित नहीं National Board of Examinations in Medical Sciences (NBEMS) आने वाले महीनों में FMGE Screening Test 2026 आयोजित करेगा. हालांकि, अभी तक परीक्षा की ऑफिशियल डेट घोषित नहीं की गई है. कैंडिडेटों को परीक्षा शेड्यूल से जुड़ी नई जानकारी के लिए NBEMS और FMGE की ऑफिशियल वेबसाइट पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है. आवेदन करते समय इन बातों का रखें ध्यान NMC ने Eligibility Certificate के लिए आवेदन करने वाले कैंडिडेटों को फॉर्म भरते समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है. आवेदन फॉर्म में सभी जानकारी ध्यान से भरें. केवल एक्टिव मोबाइल नंबर ही दर्ज करें. आवेदन शुरू करने से पहले जरूरी डॉक्यूमेंट्स तैयार रखें. आवेदन की प्रक्रिया निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी करें. फॉर्म भरने से पहले NMC की ओर से जारी सभी दिशा-निर्देश ध्यान से पढ़ें. आवेदन जमा करने के बाद इसकी जानकारी सेव रखें. आवेदन का स्टेटस कैसे पता करें? कैंडिडेट अपने Eligibility Certificate आवेदन से जुड़ी जानकारी या स्टेटस के संबंध में NMC से संपर्क कर सकते हैं. इसके लिए eligibility.regn@nmc.org.in और eligibility@nmc.org.in ईमेल आईडी पर अपनी समस्या या सवाल भेजे जा सकते हैं. क्या है FMGE? FMGE यानी Foreign Medical Graduate Examination हिंदुस्तान में विदेश से मेडिकल की पढ़ाई करने वाले मेडिकल ग्रेजुएट्स के लिए आयोजित स्क्रीनिंग टेस्ट है. हिंदुस्तान में मेडिकल प्रैक्टिस के लिए पात्रता प्राप्त करने की प्रक्रिया में यह परीक्षा महत्वपूर्ण है. FMGE 2026 की परीक्षा डेट और अन्य शेड्यूल से जुड़ी जानकारी NBEMS की ओर से बाद में जारी की जाएगी. कैंडिडेटों को सलाह है कि वे आवेदन और परीक्षा से जुड़ी किसी भी अपडेट के लिए NMC, FMGE और NBEMS की आधिकारिक वेबसाइट नियमित रूप से चेक करते रहें. ये भी पढ़ें: IIT Guwahati का ये BTech ब्रांच दिलाता है तगड़ा प्लेसमेंट, Microsoft से जॉब ऑफर The post FMGE एलिजिबिलिटी सर्टिफिकेट के लिए 1 सितंबर से करें अप्लाई, जानें पूरी प्रक्रिया और लास्ट डेट appeared first on Naya Vichar.

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प्यास बुझाएं या जान बचाएं: जंगली जानवरों के खौफ के बीच डेढ़ किमी दूर झरने से पानी ढो रहे चापा के ग्रामीण

प्रतिनिधि, लिट्टीपाड़ा. प्रखंड की करमाटांड़ पंचायत का चापा गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है. आदिम जनजाति पहाड़िया बहुल इस गांव के करीब 200 ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल के लिए रोजाना डेढ़ किलोमीटर दूर पहाड़ी झरने तक जाना पड़ता है. सबसे चिंता की बात यह है कि जिस झरने से ग्रामीण अपनी प्यास बुझाते हैं, उसी स्रोत पर जंगली और पालतू जानवर भी पानी पीते हैं. इसके बावजूद दूसरा विकल्प नहीं होने के कारण ग्रामीण इसी पानी के सहारे जीवन गुजारने को मजबूर हैं. तीन टोलों में बसा गांव, किसी टोले में नहीं नल-जल ग्रामीण रमेश पहाड़िया, छोटा मेंसा पहाड़िया, अर्जुन पहाड़िया, सजनी पहाड़ीन, देवी पहाड़ीन, सुरजी पहाड़ीन, डोंबा पहाड़िया (प्रधान) समेत अन्य ने बताया कि चापा गांव तीन टोलों में बसा है, लेकिन किसी भी टोले में स्वच्छ पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं है. पानी के लिए स्त्रीओं, बुजुर्गों और बच्चों को प्रतिदिन करीब डेढ़ किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है. प्यास बुझाने वाला झरना, जानवरों का भी सहारा ग्रामीणों के मुताबिक, झरने के पानी की शुद्धता को लेकर हमेशा चिंता बनी रहती है. इसी जलस्रोत पर जंगली और पालतू जानवर भी पानी पीते हैं. बारिश के दिनों में स्थिति और खराब हो जाती है. आसपास की गंदगी और मिट्टी पानी में मिल जाने से इसके दूषित होने का खतरा बढ़ जाता है. ग्रामीणों को आशंका है कि लंबे समय तक ऐसे पानी के इस्तेमाल से जलजनित बीमारियों का खतरा बना रहता है. पानी ढोने में बीत रहा रोज का वक्त डेढ़ किलोमीटर दूर से पानी लाने का सबसे ज्यादा असर स्त्रीओं और बच्चों पर पड़ रहा है. रोजाना पानी ढोने में काफी समय खर्च हो जाता है. इससे घरेलू कामकाज के साथ-साथ ग्रामीणों की आजीविका भी प्रभावित होती है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि गांव में ही स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था हो जाए तो उन्हें बड़ी राहत मिलेगी. पेयजल के साथ सड़क-बिजली भी बनी परेशानी ग्रामीणों ने बताया कि गांव में सिर्फ पेयजल ही नहीं, बल्कि सड़क, बिजली और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है. उनका कहना है कि आदिम जनजाति बहुल गांव होने के बावजूद विकास योजनाओं का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से गांव में जल्द स्थायी स्वच्छ पेयजल व्यवस्था कराने की मांग की है. उनका कहना है कि गांव में पेयजल सुविधा उपलब्ध होने से स्त्रीओं और बच्चों को रोजाना डेढ़ किलोमीटर की दूरी तय करने से मुक्ति मिलेगी और दूषित पानी से होने वाली बीमारियों का खतरा भी कम होगा. The post प्यास बुझाएं या जान बचाएं: जंगली जानवरों के खौफ के बीच डेढ़ किमी दूर झरने से पानी ढो रहे चापा के ग्रामीण appeared first on Naya Vichar.

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