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बिहार कैबिनेट के 30 बड़े फैसले: हरित हाइड्रोजन नीति को मंजूरी, 21644 घरों को ग्रिड से जोड़ा जाएगा, संग्रहालयों में 35 पदों पर होगी भर्ती

Bihar Cabinet Decision: बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 30 एजेंडों पर मुहर लगी है. बैठक में हरित ऊर्जा से लेकर कानून-व्यवस्था और सड़क निर्माण तक कई फैसले लिए गए. बिहार हरित हाइड्रोजन नीति-2026 के ड्राफ्ट को मंजूरी दी गई. इसके अलावा 30 नए वाटर कैनन और 86 वज्र वाहन खरीदने का फैसला हुआ. हरित हाइड्रोजन नीति-2026 को मंजूरी राज्य में हरित हाइड्रोजन के उत्पादन और इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाएगा. इसके लिए बिहार हरित हाइड्रोजन नीति-2026 के ड्राफ्ट को मंजूरी मिली है. प्रशासन की ओर से पहले भी इस नीति के तहत निवेश और रोजगार की संभावनाओं पर चर्चा की गई थी. कानून-व्यवस्था के लिए 30 वाटर कैनन कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 30 नए वाटर कैनन खरीदे जाएंगे. इसके साथ ही 8 नए वाहन भी खरीदे जाएंगे. इन खरीद के लिए कुल 62.52 करोड़ रुपये की प्रशासनिक मंजूरी दी गई है. संग्रहालयों में 35 पदों पर होगी नियुक्ति राज्य के संग्रहालयों में 35 पदों पर अस्थायी नियुक्ति को मंजूरी मिली है. नियमित नियुक्ति होने तक इन पदों को संविदा या निविदा के आधार पर भरा जाएगा. 21,644 घरों को ग्रिड से जोड़ने की योजना कैमूर और रोहतास के 177 गांवों के 21,644 घरों को बिजली ग्रिड से जोड़ा जाएगा. इसके लिए RDSS के तहत पहले से स्वीकृत योजना की लागत में संशोधन किया गया है. योजना की लागत 117.80 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 361.86 करोड़ रुपये कर दी गई है. वजन-माप से जुड़े नियमों में बदलाव वजन और माप से जुड़े नियमों को लागू करने के लिए बिहार विधिक माप विज्ञान (GATC) नियमावली-2026 को मंजूरी दी गई है. इसके साथ ही वजन-माप से जुड़े नियमों के प्रवर्तन के लिए संशोधन नियमावली-2026 को भी मंजूरी मिली है. Press Cabinet 30.09.2026.pdf बहादुरपुर की जर्जर कॉलोनी का होगा पुनर्विकास पटना के बहादुरपुर सेक्टर-6 स्थित बिहार राज्य आवास बोर्ड की जर्जर कॉलोनी का पुनर्विकास किया जाएगा. इसके लिए NBCC (India) Ltd. के साथ MoU करने की मंजूरी दी गई है. सेक्टर-5 में 8.5 एकड़ जमीन पर परियोजना टीवी टावर के पास बहादुरपुर सेक्टर-5 में आवास बोर्ड की 8.5 एकड़ जमीन है. यहां स्व-वित्तपोषित परियोजना विकसित की जाएगी. परियोजना के लिए NBCC के साथ MoU किया जाएगा. इससे जुड़े जरूरी फैसले लेने के लिए बिहार राज्य आवास बोर्ड को अधिकृत किया गया है. मुंगेर में 7 किमी सड़क के लिए 115.90 करोड़ मुंगेर के तारापुर विधानसभा क्षेत्र में वंशीपुर से बिहमा तक करीब 7 किलोमीटर सड़क बनेगी. सड़क का निर्माण या पुनर्निर्माण किया जाएगा. यह सड़क धोबई, गोगाचक, रोलसीहा मंदिर और गोगनगंज होते हुए जाएगी. इसके लिए 115.90 करोड़ रुपये की संशोधित प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है. मुंगेर में एक और सड़क पर खर्च होंगे 87.63 करोड़ सात निश्चय-2 के तहत मुंगेर में एक और सड़क का निर्माण होगा. रनगांव-भागलपुरा पथ से धौनी होते हुए बिराय तक सड़क बनाई जाएगी. इसके लिए 87.63 करोड़ रुपये की संशोधित प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है. पोषण कार्यक्रम के तहत खाद्य उत्पादों की आपूर्ति कैबिनेट ने पोषण कार्यक्रम के तहत खाद्य उत्पादों की आपूर्ति से जुड़े प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है. बैठक में इसके अलावा अन्य विभागों के कई प्रस्तावों पर भी सहमति बनी है. Also Read: CM के प्रधान सचिव पद से हटे दीपक कुमार, अब सम्राट प्रशासन ने दी नई जिम्मेदारी, जानें क्यों अहम है यह बदलाव The post बिहार कैबिनेट के 30 बड़े फैसले: हरित हाइड्रोजन नीति को मंजूरी, 21644 घरों को ग्रिड से जोड़ा जाएगा, संग्रहालयों में 35 पदों पर होगी भर्ती appeared first on Naya Vichar.

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मेरठ नीला ड्रम मर्डर केसः मुस्कान और साहिल दोषी करार, कोर्ट की टिप्पणी- समाज में ऐसे अपराधियों की जगह नहीं

UP News: मेरठ के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत का फैसला आ गया है. ब्लू ड्रम केस के नाम से चर्चित इस मामले में जिला अदालत ने मुस्कान और साहिल को दोषी करार दिया है. हालांकि, दोनों को क्या सजा मिलेगी, इसका फैसला अभी नहीं हुआ है. कोर्ट ने सजा पर दोनों का पक्ष सुनने के लिए 15 दिन का समय दिया है. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनाया फैसला जिला जज अरविंद मिश्रा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए फैसला सुनाया. अदालत ने दोनों दोषियों को सजा के मुद्दे पर अपनी बात रखने का मौका दिया है. उनसे पूछा जाएगा कि उन्हें कम सजा क्यों दी जानी चाहिए. इसके बाद कोर्ट सजा पर अपना फैसला सुनाएगा. कोर्ट की कड़ी टिप्पणी फैसला सुनाते हुए जज ने अपराध को लेकर कड़ी टिप्पणी की. अदालत ने कहा, “सभ्य समाज में ऐसे अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं है.” कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद मामले की गंभीरता एक बार फिर सामने आई. अब अगली सुनवाई में सजा की अवधि तय की जाएगी. परिजनों ने फांसी की मांग की सजा के ऐलान में 15 दिन का समय दिए जाने से सौरभ के परिजन नाराज हैं. उनका कहना है कि उन्हें फांसी से कम कोई भी सजा मंजूर नहीं है. वहीं, दोषी को सजा से पहले अपना पक्ष रखने का मौका देना कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है. इसी प्रक्रिया के तहत अदालत ने दोनों को 15 दिन का समय दिया है. 15 दिन बाद तय होगी सजा दोष सिद्ध होने के बाद अब इस मामले का अगला अहम पड़ाव सजा पर सुनवाई है. 15 दिन बाद अदालत दोनों पक्षों की दलीलें सुन सकती है. इसके बाद मुस्कान और साहिल को दी जाने वाली सजा पर फैसला होगा. फिलहाल सौरभ के परिजनों के साथ-साथ इस चर्चित मामले में लोगों की नजरें अगली सुनवाई पर टिकी हैं. Also Read: शाहजहांपुर में घर पहुंचने से बस 100 मीटर दूर थी तराना, अचानक पीछे से आई ट्रैक्टर-ट्रॉली, फिर खत्म हो गयी हंसी खुशी जिंदगी The post मेरठ नीला ड्रम मर्डर केसः मुस्कान और साहिल दोषी करार, कोर्ट की टिप्पणी- समाज में ऐसे अपराधियों की जगह नहीं appeared first on Naya Vichar.

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165km की रेंज, 505 Nm टॉर्क, ₹1.75 लाख से शुरू और ₹999 में प्री-बुकिंग, आ रही है Ultraviolette की ये ऑफ-रोड इलेक्ट्रिक बाइक

हिंदुस्तानीय इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर कंपनी Ultraviolette जल्द ही मार्केट में एक और बड़ा प्रोडक्ट लॉन्च करने की तैयारी कर रही है. कंपनी अपनी नई और दमदार इलेक्ट्रिक ऑफ-रोड बाइक ‘Shockwave’ को हिंदुस्तान में लॉन्च करने वाली है. इसे साल 2027 की पहली तिमाही यानी  जनवरी से मार्च के बीच बाजार में उतारा जा सकता है. रेंज और रफ्तार में है दमदार कंपनी ने इसे एक हल्की, स्पोर्टी और मजेदार बाइक के रूप में डिजाइन किया है. इस बाइक में पुराने जमाने की 2-स्ट्रोक मोटरसाइकिलों जैसी फील मिलेगी. बैटरी और रेंज: इसमें 4kWh की बैटरी मिलेगी. कंपनी का दावा है कि फुल चार्ज होने पर यह 165 किलोमीटर (IDC रेंज) तक की रेंज देगी. पावर: इसकी इलेक्ट्रिक मोटर 14.5 bhp की पावर और 505 Nm का जबरदस्त टॉर्क जनरेट करती है. रफ्तार: यह बाइक हवा से बातें करते हुए महज 2.9 सेकंड में 0 से 60 किमी प्रति घंटे की स्पीड पकड़ लेगी. इसकी टॉप स्पीड 120 kmph होगी. ये भी पढ़ें: एक बार चार्ज करने पर 153 km की रेंज, 3 घंटे से कम में चार्ज, कीमत ₹1 लाख से भी नीचे, लोगों को खूब पसंद आ रहा है ये इलेक्ट्रिक स्कूटर एक नजर में बाइक के स्पेसिफिकेशन फीचर डिटेल बैटरी 4kWh रेंज (IDC) 165 किलोमीटर मोटर पावर 14.5 bhp पीक टॉर्क 505 Nm 0-60 kmph स्पीड 2.9 सेकंड टॉप स्पीड 120 kmph सीटिंग सिंगल और डुअल सीट के विकल्प नया 100V इलेक्ट्रिकल आर्किटेक्चर यह कंपनी की पहली बाइक है जो नए 100V इलेक्ट्रिकल आर्किटेक्चर पर बनी है. आसान भाषा में कहें तो यह बाइक के तारों और सिस्टम का बिल्कुल नया डिजाइन है. इससे बाइक की पावर डिलीवरी, हीटिंग मैनेजमेंट और चार्जिंग की स्पीड काफी बेहतर हो जाएगी. कंपनी अपनी आने वाली नई बाइक ‘Tesseract’ में भी इसी तकनीक का इस्तेमाल करेगी. खराब रास्तों की चैंपियन इस बाइक को सिर्फ शहर की पक्की सड़कों के लिए नहीं, बल्कि उबड़-खाबड़ रास्तों के लिए भी बनाया गया है: पहिए: बाइक में आगे 21 इंच और पीछे 17 इंच के स्पोक व्हील्स दिए गए हैं. दोनों टायर्स डुअल-पर्पज यानी सड़क और मिट्टी दोनों के लिए डिजाइन किए गए हैं. सस्पेंशन: झटकों से बचाने के लिए आगे टेलीस्कोपिक फोर्क्स और पीछे मोनोशॉक सस्पेंशन दिया गया है. सेफ्टी और स्मार्ट फीचर्स राइडिंग को सेफ और कंट्रोल में रखने के लिए इसमें कई आधुनिक फीचर्स दिए गए हैं: स्विचेबल डुअल-चैनल ABS (एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम). अलग-अलग रास्तों के लिए 4 ट्रैक्शन कंट्रोल मोड. 6 लेवल की रीजेनरेटिव ब्रेकिंग, जिसे राइडर अपनी जरूरत के हिसाब से सेट कर सकता है. शानदार लुक के लिए पूरी बाइक में LED लाइट्स दी गई हैं. तैयारियां जोरों पर Ultraviolette ने अपनी फैक्ट्री में प्रोडक्शन की तैयारी अभी से शुरू कर दी है, जिससे लॉन्च के समय सप्लाई में देरी की संभावना कम हो सकती है. कंपनी इसे लाइटवेट इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल के रूप में पोजिशन कर रही है, जो खासकर युवाओं और एडवेंचर लवर्स को आकर्षित कर सकती है. कुल मिलाकर, 165km की रेंज और शानदार टॉप स्पीड वाली यह बाइक इलेक्ट्रिक मार्केट में बड़ा उलटफेर कर सकती है. अब देखना यह है कि लॉन्च के वक्त कंपनी इसकी कीमत कितनी रखती है. कितनी हो सकती है कीमत Ultraviolette Shockwave की कीमत ₹1.75 लाख से शुरू होगी. जो ₹2 लाख तक हो सकती है. आप कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट से ₹999 रुपए में इसे प्री-बुक कर सकते हैं, जिसकी डिलीवरी आपको Q4 यानी चौथे तिमाही में मिलेगी. इसकी टक्कर सिमिलर फीचर्स और इसी रेंज में आने वाली Avore EX2S, Odysse Vader & Kawasaki KLX230R से होगी. ये भी पढ़ें: 7 हजार में बना दी इलेक्ट्रिक स्प्लेंडर, पुरानी बाइक से इंजन निकाला और फिट कर दी बैटरी, देसी जुगाड़ का कमाल, ऑनलाइन ऐसे वीडियोज की भरमार The post 165km की रेंज, 505 Nm टॉर्क, ₹1.75 लाख से शुरू और ₹999 में प्री-बुकिंग, आ रही है Ultraviolette की ये ऑफ-रोड इलेक्ट्रिक बाइक appeared first on Naya Vichar.

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Astrology Special: प्राचीन ज्योतिष से आधुनिक विज्ञान तक, शनि के दो पुत्र गुलिक और मांडी का क्या है रहस्य

Shani Gulik Mandi Secrets: हिंदुस्तानीय ज्योतिष में शनि को एक रहस्यमय ग्रह माना गया है. पुराने ज्योतिष ग्रंथों में शनि से जुड़े गुलिक और मांडी का भी उल्लेख मिलता है. कई परंपराओं में इन्हें “शनि के पुत्र” कहा गया है. खास बात यह है कि गुलिक और मांडी कोई वास्तविक ग्रह नहीं हैं, बल्कि समय के आधार पर गणना करके इनकी स्थिति तय की जाती है. अब दिलचस्प बात यह है कि आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान में भी शनि से जुड़े ऐसे रेडियो संकेतों का अध्ययन हुआ है, जिनके दोहराने के समय में अंतर देखा गया और समय के साथ उनमें बदलाव भी दर्ज किया गया. यही वजह है कि गुलिक-मांडी की प्राचीन अवधारणा और शनि से जुड़े इन रेडियो संकेतों की तुलना चर्चा का विषय बन सकती है. हालांकि, दोनों के बीच कोई सीधा वैज्ञानिक संबंध अभी साबित नहीं हुआ है. गुलिक और मांडी क्या हैं? हिंदुस्तानीय ज्योतिष के अनुसार गुलिक और मांडी को शनि से जुड़ी विशेष गणनाओं के रूप में देखा जाता है. इन्हें आसमान में मौजूद किसी ग्रह या पिंड की तरह नहीं देखा जाता. इनकी स्थिति दिन और रात के समय को आधार बनाकर निकाली जाती है. इसी वजह से इन्हें सामान्य ग्रहों से अलग माना जाता है. कुछ प्राचीन ग्रंथों में गुलिक और मांडी का शनि से संबंध बताया गया है. ज्योतिष की अलग-अलग परंपराओं में इनके बारे में व्याख्या भी अलग-अलग मिलती है. गुलिक व मांडी को दर्शाती तस्वीर (फोटो- एआई) शनि से निकलने वाली रेडियो तरंगों का विज्ञान ने किया अध्ययन शनि का अध्ययन करने के लिए NASA, ESA और Italian Space Agency ने मिलकर Cassini-Huygens मिशन चलाया था. कैसिनी (Cassini) अंतरिक्ष यान ने शनि और उसके आसपास के वातावरण का लंबे समय तक अध्ययन किया. इस दौरान शनि से आने वाली प्राकृतिक रेडियो तरंगों का भी अध्ययन किया गया. इन्हें वैज्ञानिक Saturn Kilometric Radiation यानी SKR कहते हैं. आसान भाषा में समझें तो ये शनि के आसपास के वातावरण से मिलने वाले रेडियो संकेत हैं. शनि के उत्तर और दक्षिण से मिले अलग संकेत वैज्ञानिकों ने इन रेडियो संकेतों के दोहराने के समय का अध्ययन किया. इसमें शनि के उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों से जुड़े संकेतों में अंतर देखा गया. इसे समझाने के लिए कभी-कभी “दो रेडियो घड़ियों” का उदाहरण दिया जा सकता है. लेकिन यह केवल समझाने का तरीका है. वास्तव में शनि के आसपास कोई दो घड़ियां नहीं थीं. वैज्ञानिक अलग-अलग रेडियो संकेतों के दोहराने के समय को माप रहे थे. ये भी पढ़ें: Lakshmi Narayan Yog 2026: बुध-शुक्र की युति से बनेगा लक्ष्मी-नारायण योग, इन 5 राशि वालों के लिए आर्थिक रूप से शुभ रहेंगे आने वाले दिन समय के साथ इन संकेतों में भी बदलाव आया शनि के इन रेडियो संकेतों की दर हमेशा एक जैसी नहीं रही. अगस्त 2009 के आसपास शनि का विषुव (इक्विनॉक्स) हुआ. इसके कुछ महीनों बाद, 2010 की शुरुआत में, उत्तर और दक्षिण से जुड़े रेडियो संकेतों की दरों में महत्वपूर्ण बदलाव देखा गया. मार्च 2010 के आसपास दोनों की दरें एक-दूसरे को पार करती हुई दिखाई दीं. यानी जिस अंतर के साथ दोनों संकेत दोहराए जा रहे थे, उसमें समय के साथ बदलाव हुआ. वैज्ञानिकों ने इस बदलाव का अध्ययन शनि के चुंबकीय वातावरण और वहां होने वाले मौसमी बदलावों के संदर्भ में किया है. क्या इसका गुलिक-मांडी से कोई संबंध है? एक तरफ प्राचीन ज्योतिष में शनि से जुड़े गुलिक और मांडी हैं, जिनकी स्थिति समय के आधार पर गणना की जाती है. दूसरी तरफ आधुनिक विज्ञान में शनि से जुड़े अलग-अलग रेडियो संकेत हैं, जिनके दोहराने के समय में अंतर और बदलाव देखा गया. लेकिन दोनों को एक ही घटना मानना सही नहीं होगा. Cassini ने गुलिक या मांडी की खोज नहीं की थी. वैज्ञानिकों ने शनि से आने वाली रेडियो तरंगों का अध्ययन किया था. इसलिए इन रेडियो संकेतों को गुलिक या मांडी का वैज्ञानिक प्रमाण कहना उचित नहीं है. फिर यह तुलना क्यों दिलचस्प है? इस तुलना को वैज्ञानिक प्रमाण के बजाय एक रोचक समानता के रूप में देखा जा सकता है. प्राचीन ज्योतिष में शनि से जुड़े दो ऐसे संकेतकों की चर्चा मिलती है, जिन्हें समय के आधार पर निर्धारित किया जाता है. आधुनिक विज्ञान में शनि से जुड़े रेडियो संकेतों के दो अलग-अलग स्रोतों की आवधिकता में अंतर और समय के साथ बदलाव का अध्ययन किया गया. इन दोनों के बीच सीधा संबंध अभी स्थापित नहीं हुआ है. फिर भी, यह तुलना एक दिलचस्प सवाल जरूर उठाती है. क्या यह महज संयोग है, या शनि और समय को समझने की दो अलग-अलग परंपराओं में कोई वैचारिक समानता दिखाई देती है? फिलहाल इसका कोई वैज्ञानिक उत्तर नहीं है. इसलिए इसे “प्राचीन ज्योतिष का वैज्ञानिक प्रमाण” कहना जल्दबाजी होगी. लेकिन गुलिक-मांडी और शनि की बदलती रेडियो तरंगों की यह कहानी निश्चित रूप से विज्ञान और प्राचीन ज्ञान परंपरा के बीच एक दिलचस्प चर्चा शुरू करती है. ये भी पढ़ें: Astro Special: क्या होता है ज्योतिष का संधि काल गंडांत? शुभ कार्यों के लिए अशुभ क्यों काशी से पंडित प्रशांत The post Astrology Special: प्राचीन ज्योतिष से आधुनिक विज्ञान तक, शनि के दो पुत्र गुलिक और मांडी का क्या है रहस्य appeared first on Naya Vichar.

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SSC CGL से IBPS Clerk तक, अक्टूबर में परीक्षाओं की भरमार, यहां देखें पूरा कैलेंडर

October Exam Calendar 2026: अक्टूबर की सबसे बड़ी परीक्षा SSC CGL है. Tier 1 परीक्षा 30 सितंबर से 30 अक्टूबर 2026 तक कंप्यूटर बेस्ड मोड में होगी. ध्यान रखिए कि 30 सितंबर सिर्फ शुरुआत की तारीख है. जरूरी नहीं कि सबका एग्जाम उसी दिन हो. आपकी अपनी डेट और शिफ्ट सिटी स्लिप और एडमिट कार्ड में लिखी होगी. October Exam Calendar एक नजर में परीक्षा का नाम परीक्षा की तारीख SSC CGL Tier 1 30 सितंबर से 30 अक्टूबर IBPS PO Mains 4 अक्टूबर IBPS Clerk Prelims 10 और 11 अक्टूबर RRB Section Controller CBT 12 और 13 अक्टूबर SSC JE अक्टूबर/नवंबर, तारीख घोषित नहीं RRB ALP CBT 1 3 से 5 नवंबर SSC CGL Tier 1 एडमिट कार्ड जारी SSC CGL Tier 1 के लिए एडमिट कार्ड जारी हो गया है. इसके लिए सिटी इंटिमेशन स्लिप 21 सितंबर को जारी कर दी गई थी. एडमिट कार्ड की बात करें तो वह एग्जाम से लगभग 4 दिन पहले आता है. इस बार एक नया बदलाव भी है. Tier 1 में सेक्शनल टाइमिंग लागू की गई है. मतलब हर सेक्शन का समय अलग होगा, और एक सेक्शन में बचा हुआ समय दूसरे में इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे. इसलिए घड़ी लगाकर सेक्शन के हिसाब से मॉक टेस्ट दीजिए. SSC CGL Tier 1: पूरे महीने चलेगी परीक्षा अक्टूबर की प्रमुख परीक्षाओं में SSC CGL Tier 1 भी शामिल है. यह परीक्षा 30 सितंबर से 30 अक्टूबर 2026 तक कंप्यूटर बेस्ड मोड में आयोजित की जाएगी. यानी परीक्षा पूरे एक महीने चलेगी और सभी अभ्यर्थियों की परीक्षा एक ही दिन नहीं होगी. SSC CGL की सिटी इंटिमेशन स्लिप 21 सितंबर को जारी की जा चुकी है. वहीं एडमिट कार्ड परीक्षा से लगभग चार दिन पहले जारी किया जाता है. अभ्यर्थियों को अपनी परीक्षा की सही तारीख और शिफ्ट एडमिट कार्ड में चेक करनी होगी. इस बार Tier 1 परीक्षा में सेक्शनल टाइमिंग लागू की गई है. इसका मतलब है कि हर सेक्शन के लिए अलग समय निर्धारित होगा. एक सेक्शन में बचा हुआ समय दूसरे सेक्शन में इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा. बैंकिंग की दो परीक्षाएं बैंकिंग सेक्टर में नौकरी की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों के लिए अक्टूबर का महीना खास रहने वाला है. IBPS PO Mains और IBPS Clerk Prelims की परीक्षाएं इसी महीने आयोजित होंगी. परीक्षा तारीख जरूरी जानकारी IBPS PO Mains 4 अक्टूबर 2026 Personality Test अनिवार्य IBPS Clerk Prelims 10-11 अक्टूबर 2026 कुल 11,663 वैकेंसी Clerk Admit Card संभावित 5 अक्टूबर तक आधिकारिक पुष्टि का इंतजार IBPS PO Mains 2026: 4 अक्टूबर को परीक्षा IBPS PO की मेन्स परीक्षा 4 अक्टूबर 2026 को आयोजित की जाएगी. इस बार भर्ती प्रक्रिया में Personality Test को अनिवार्य किया गया है. हालांकि, इसके अंक फाइनल स्कोर में नहीं जोड़े जाएंगे. अभ्यर्थियों के लिए इसमें शामिल होना जरूरी होगा. ये भी पढ़ें: IBPS PO Prelims 2026: 21-22 अगस्त की परीक्षा से पहले अपनाएं ये लास्ट मिनट टिप्स IBPS Clerk Prelims: 10 और 11 अक्टूबर को एग्जाम IBPS Clerk Prelims की परीक्षा 10 और 11 अक्टूबर 2026 को होगी. परीक्षा दोनों दिन चार-चार शिफ्ट में आयोजित की जाएगी. इस भर्ती में वैकेंसी बढ़ाकर 11,663 कर दी गई है. एडमिट कार्ड 5 अक्टूबर तक जारी होने की उम्मीद है, हालांकि इसकी आधिकारिक तारीख की पुष्टि नहीं हुई है. एक जरूरी बात यह भी है कि IBPS Clerk का PET कॉल लेटर 28 सितंबर को जारी हो चुका है. PET कॉल लेटर को प्रीलिम्स का एडमिट कार्ड समझने की गलती न करें. दोनों अलग-अलग दस्तावेज हैं. UPSC की तैयारी के लिए मिलेगा मौका UPSC की बड़ी परीक्षाओं के लिहाज से अक्टूबर का महीना अपेक्षाकृत खाली रहने वाला है. सिविल सेवा मुख्य परीक्षा अगस्त में आयोजित हो चुकी है. ऐसे में अभ्यर्थी इस समय का इस्तेमाल रिवीजन, मॉक टेस्ट और अगले चरण की तैयारी के लिए कर सकते हैं. ये भी पढ़ें: IBPS Clerk के 11 हजार से ज्यादा पदों के लिए PET एडमिट कार्ड जारी, ऐसे करें डाउनलोड The post SSC CGL से IBPS Clerk तक, अक्टूबर में परीक्षाओं की भरमार, यहां देखें पूरा कैलेंडर appeared first on Naya Vichar.

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सर्किट हाउस विवाद : महुआ मोइत्रा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई कल, ‘सीधे SC आने’ पर आपत्ति

तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा से जुड़े नदिया सर्किट हाउस विवाद में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टल गयी. अब बृहस्पतिवार को मामले की सुनवाई होगी. महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया है कि कमरा आवंटित होने के बावजूद पश्चिम बंगाल के नदिया जिला प्रशासन ने उन्हें सर्किट हाउस खाली करने के लिए कहा था. महुआ की याचिका पर क्यों टली सुनवाई? महुआ का मामला प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ के सामने आया. मोइत्रा की ओर से पेश होने वाले वकील गोपाल शंकरनारायणन के किसी अन्य अदालत में व्यस्त होने का हवाला देते हुए मामले को कुछ देर के लिए टालने का आग्रह किया गया. पीठ ने दिन में बाद में सुनवाई करने की बजाय मामले को गुरुवार को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया. सुनवाई से पहले ‘सीधे सुप्रीम कोर्ट’ आने पर सवाल संक्षिप्त सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने महुआ मोइत्रा के सीधे सुप्रीम कोर्ट का रुख करने पर आपत्ति जतायी. उन्होंने कहा कि सांसदों के व्यक्तिगत मुद्दे सीधे शीर्ष अदालत के सामने लाये जा रहे हैं और मामले के कुछ तथ्यात्मक बयान भी गलत हैं. महुआ मोइत्रा के वकील ने बताया संवैधानिक मुद्दा महुआ मोइत्रा के वकील ने कहा कि इस मामले में स्वतंत्र जांच की जरूरत है. उन्होंने तत्काल कोई विस्तृत विवरण नहीं दिया, बल्कि जल्द सुनवाई के लिए मामले को सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया. उन्होंने कहा कि इसमें महत्वपूर्ण संवैधानिक मुद्दा शामिल है. 14 अगस्त की रात से शुरू हुआ था विवाद विवाद 14 अगस्त की रात का है. महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया था कि नदिया के सर्किट हाउस के बाहर बड़ी संख्या में लोग जमा हुए थे. उनके परिसर से बाहर जाने से इनकार करने के बाद ‘जय श्री राम’ के नारे लगाये गये थे. उनके आरोपों के अनुसार, प्रशासन की ओर से उन्हें सर्किट हाउस खाली करने के लिए कहा गया था. पहले से आवंटित कमरे को लेकर उठाया सवाल कृष्णनगर की सांसद ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर नदिया जिला प्रशासन की कथित कार्रवाई में हस्तक्षेप की मांग की थी. उनका कहना था कि उन्हें राज्य प्रशासन के स्वामित्व वाले सर्किट हाउस में पहले कमरा आवंटित किया गया था. The post सर्किट हाउस विवाद : महुआ मोइत्रा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई कल, ‘सीधे SC आने’ पर आपत्ति appeared first on Naya Vichar.

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नवरात्रि व्रत में दोपहर होते-होते खत्म हो जाती है एनर्जी और आने लगते हैं चक्कर? पूरे दिन एनर्जेटिक रहने के लिए अपनाएं ये आसान तरीके

Navratri Fasting Tips: नवरात्रि के दौरान बहुत सारे लोग बड़े ही प्यार और भक्ति भावना के साथ व्रत रखना पसंद करते हैं. व्रत के दौरान मन को एक अलग तरह की शांति मिलती है और कई लोगों को यह अपनी दिनचर्या में थोड़ा बदलाव करने का अच्छा मौका भी लगता है. लेकिन कई बार सही तरीके से खाना-पीना न हो पाने की वजह से व्रत के दौरान अचानक से कमजोरी, सुस्ती या फिर चक्कर आने जैसी परेशानियां भी होने लग जाती हैं. शायद आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ हो कि सुबह तक तो आप बिल्कुल ठीक थे, लेकिन दोपहर होते-होते शरीर में बिल्कुल एनर्जी नहीं बची. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि काफी देर तक खाली पेट रहने, कम पानी पीने और सही डाइट न लेने की वजह से शरीर की एनर्जी अचानक से ही कम हो जाती है. अगर आप भी इस नवरात्रि व्रत रखने की सोच रहे हैं, लेकिन चाहते हैं कि आपको पूरे दिन थकावट और कमजोरी महसूस न हो, तो आपको इस आर्टिकल को लास्ट तक जरूर पढ़ना चाहिए. आज हम आपको कुछ ऐसे आसान और सिंपल तरीके बताने जा रहे हैं, जिन्हें अपनाकर आप व्रत के दौरान अपनी एनर्जी को बनाए रख सकते हैं और दिनभर खुद को बेहतर महसूस कर सकते हैं. तो चलिए इनके बारे में विस्तार से जानते हैं. कमजोरी महसूस होने पर तुरंत करें ये काम व्रत के दौरान अगर आपको अचानक काफी ज्यादा थका-थका लगे या फिर ऐसा लगे कि चक्कर आ रहा है, तो सबसे पहले अपने सभी कामों को छोड़कर एक जगह पर बिल्कुल आराम से बैठ जाएं या लेट जाएं. ऐसी हालत में एक गिलास पानी में आधा नींबू, एक चम्मच चीनी और थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाकर पीना सबसे बेस्ट होता है. यह सिंपल सा ड्रिंक आपके शरीर को एनर्जी भी देता है और आपको डिहाइड्रेशन से भी बचाकर रखता है. इसके अलावा एक गिलास फ्रेश नारियल पानी या फिर मौसंबी का जूस पीने से भी आपके शरीर को तुरंत एनर्जी मिल जाती है. लंबे समय तक एनर्जी के लिए खाएं ये चीजें अगर आपको खाली पेट होने की वजह से चक्कर आ रहे हैं, तो ऐसे में तुरंत भुने हुए मखाने, 4 से 5 आल्मंड्स, अखरोट या फिर मुनक्का खा लें. ये छोटी-छोटी चीजें आपके शरीर को लंबे समय तक ऊर्जावान बनाए रखने की ताकत देती हैं. इसके अलावा व्रत के दौरान आप उबला या भुना हुआ आलू और स्वीट पोटैटो भी बिना किसी टेंशन के खा सकते हैं. इन चीजों को खाने से आपका पेट भी भर जाता है और साथ ही आपके शरीर को इंस्टेंट एनर्जी भी मिल जाती है. कई बार एक ही जगह काफी देर तक बैठे रहने या बंद कमरे में रहने से भी सिर भारी होने लगता है, इसलिए थोड़ी देर खुली हवा में जाकर गहरी सांसें लें. ये भी पढ़ें: इस दुर्गा पूजा घर पर बनाएं बंगाल की ये 5 मशहूर मिठाइयां, स्वाद ऐसा कि बार-बार बनाने का करेगा मन व्रत के दौरान इन इशारों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज भगवान की भक्ति के बीच आपको कभी भी अपनी सेहत को नजरअंदाज करने की गलती नहीं करनी चाहिए. व्रत के दौरान अगर खड़े होते ही या फिर चलते-चलते आपको अचानक से आंखों के आगे अंधेरा जैसा महसूस हो या फिर चक्कर आने लग जाए, तो समझ जाएं कि शरीर में ब्लड प्रेशर या फिर शुगर लेवल डाउन हो गया है. ऐसे हालात में बिना देरी किये तुरंत बैठ जाएं और कुछ मीठा या फिर नमकीन पी लें. इसी तरह अगर बिना किसी मेहनत या गर्मी के शरीर से ठंडा पसीना निकलने लगे और हाथ-पैर कांपने लगें, तो इसे हल्की थकान समझकर छोड़ने की गलती न करें. यह ब्लड शुगर लेवल बहुत ज्यादा गिरने का लक्षण होता है. तेज सिरदर्द होना, उल्टी जैसी फीलिंग आना पेट में एसिडिटी और पानी की भारी कमी की वजह से होता है. अगर बार-बार गला सूख रहा हो और पेशाब का रंग गहरा पीला हो जाए, तो समझ लें कि शरीर में पानी बहुत कम बचा है. इन सभी लक्षणों में तुरंत पानी, जूस या फल खा लेना चाहिए. व्रत में कमजोरी से बचने के लिए जरूरी बातें अगर आप व्रत के दौरान बिना कुछ खाए-पीए भी पूरे दिन एनर्जेटिक रहना चाहते हैं, तो अपने खाने-पीने का तरीका सही रखना और भी ज्यादा जरूरी हो जाता है. व्रत के दौरान जब भी आप सुबह सोकर उठें, तो कभी भी खाली पेट चाय या फिर कॉफी पीने की गलती न करें. अगर आप ऐसा करते हैं, तो आपको पेट में जलन और एसिडिटी जैसी प्रॉब्लम्स हो सकती हैं. व्रत के दौरान अपने दिन की शुरुआत हमेशा भीगे हुए आल्मंड्स, नारियल पानी या फिर कोई फल खाकर करें. इसके अलावा बहुत ज्यादा तला-भुना खाना, जैसे कि कुट्टू की पूरी या फिर पकौड़े खाने से बचना चाहिए. इस तरह के खाने को डाइजेस्ट करने के लिए आपके शरीर को ज्यादा एनर्जी खर्च करनी पड़ती है और इसकी वजह से आपको ज्यादा आलस और सुस्ती का अहसास होने लगता है. अपनी सेहत का ख्याल रखने के लिए करें ये काम व्रत के दौरान अगर आप नहीं चाहते कि आपकी तबियत बिगड़े, तो इसके लिए पूरे दिन में थोड़ा-थोड़ा करके कम से कम 8 से 10 गिलास पानी, छाछ या फिर नींबू पानी जरूर पीते रहें. इसके अलावा बीच-बीच में मखाने, फल या फिर ड्राई फ्रूट्स को भी अपनी डाइट में शामिल कर लें. जब आप इन चीजों को खाते हैं, तो आपके शरीर का शुगर लेवल नॉर्मल रहता है और आपको चक्कर भी नहीं आते. अगर आपको पहले से डायबिटीज, बीपी या कोई अन्य बीमारी है, तो डॉक्टर से पूछे बिना कड़ा व्रत न रखें. हमेशा याद रखें कि अपने शरीर का ख्याल रखना भी पूजा का ही एक हिस्सा है, क्योंकि जब आपकी सेहत अच्छी रहेगी, तभी आप नवरात्रि के त्योहार को पूरी खुशी से मना पाएंगे. ये भी पढ़ें: साबूदाने की खिचड़ी और वड़े से ऊब चुका है मन? इस नवरात्रि घर पर बनाएं ये 5 टेस्टी व्रत वाली रेसिपीज The post नवरात्रि व्रत में दोपहर होते-होते खत्म हो जाती है एनर्जी और आने लगते हैं चक्कर? पूरे दिन एनर्जेटिक रहने के लिए

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Big Breaking: झारखंड के मतदाताओं को बड़ी राहत, चुनाव आयोग ने SIR के फॉर्म-6 से हटाया माता-पिता की जानकारी वाला कॉलम

Jharlhand SIR: विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया के आखिरी दिन बुधवार यानी 30 सितंबर 2026 को झारखंड के लाखों मतदाताओं को बड़ी राहत मिली है. निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया पूरी कर चुके राज्यों में ऑनलाइन मतदाता नामांकन फॉर्म-6 से SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा को हटा दिया है. इसके बाद नए मतदाताओं को फॉर्म-6 भरते समय अपने माता-पिता या दादा-दादी के पुराने मतदाता रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी देने की जरूरत नहीं होगी. यह बदलाव उन राज्यों में लागू किया गया है जहां SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. अब नहीं देनी होगी माता-पिता की पुरानी जानकारी SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा में नए आवेदकों से यह जानकारी मांगी जा रही थी कि वे या उनके माता-पिता अथवा दादा-दादी पहले के किसी गहन पुनरीक्षण के दौरान तैयार मतदाता सूची में दर्ज थे या नहीं. यदि परिवार का कोई सदस्य पुरानी मतदाता सूची में दर्ज था, तो उससे जुड़ी जानकारी भी उपलब्ध कराने का विकल्प था. फॉर्म-6 से यह हिस्सा हटने के बाद सामान्य मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया में ऐसी जानकारी नहीं मांगी जाएगी. गैर-SIR अवधि में सिर्फ वैधानिक फॉर्म-6 निर्वाचन आयोग के अनुसार, SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा केवल पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान लागू रहने वाली आवश्यकता थी. SIR पूरा होने के बाद गैर-SIR अवधि में मतदाता पंजीकरण के लिए निर्वाचन पंजीकरण नियम, 1960 के तहत निर्धारित सामान्य फॉर्म-6 का इस्तेमाल किया जाएगा. यानी नए मतदाता अब निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया के तहत आवेदन कर सकेंगे. ईसीआईनेट और CEO पोर्टल से भी हटाया गया विकल्प SIR पूरी कर चुके राज्यों में ईसीआईनेट ऐप और पोर्टल के अलावा संबंधित मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पोर्टल से भी अतिरिक्त घोषणा वाला हिस्सा हटा दिया गया है. वहीं जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया अभी जारी है, वहां यह घोषणा ईसीआईनेट पोर्टल पर उपलब्ध रहेगी. इसका मतलब है कि यह बदलाव सभी राज्यों में एक साथ लागू नहीं हुआ है, बल्कि SIR की स्थिति के आधार पर व्यवस्था अलग रखी गई है. 26 सितंबर की बैठक के बाद आया फैसला फॉर्म-6 से अतिरिक्त घोषणा हटाने का फैसला मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी की सदस्यता वाले पूर्ण निर्वाचन आयोग की 26 सितंबर की बैठक के बाद आया. बैठक के बाद आयोग ने स्पष्ट किया था कि फॉर्म-6 के साथ जोड़ी गई घोषणा SIR के लिए थी. गैर-SIR अवधि में नियमों के अनुसार निर्धारित फॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा. फॉर्म-6 में बदलाव को लेकर उठे थे सवाल फॉर्म-6 में SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा जोड़े जाने का मुद्दा विवाद में रहा था. निर्वाचन आयुक्त विवेक जोशी ने इस बदलाव पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि निर्वाचन पंजीकरण नियम, 1960 के तहत निर्धारित वैधानिक फॉर्म में नियमों में संशोधन किए बिना बदलाव नहीं किया जा सकता. निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने भी इस आपत्ति से सहमति जताई थी. संधू ने घोषणा को बताया था अनधिकृत ईसीआईनेट पर ऑनलाइन फॉर्म-6 की प्रक्रिया में SIR से जुड़ी घोषणा जोड़े जाने के बाद संधू ने भी आपत्ति दर्ज कराई थी. उन्होंने इसे अनधिकृत और अवैध बताते हुए हटाने की मांग की थी. हालांकि निर्वाचन आयोग ने अपने सार्वजनिक बयानों में कहा कि फॉर्म-6 में कोई संशोधन नहीं किया गया था, बल्कि SIR के दौरान एक अतिरिक्त आवश्यकता जोड़ी गई थी. आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया था हवाला निर्वाचन आयोग ने यह भी कहा था कि बिहार में SIR से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इस अतिरिक्त घोषणा को बरकरार रखा था. आयोग के मुताबिक, इसलिए इसे SIR की प्रक्रिया से जुड़ी आवश्यकता के रूप में लागू किया गया था. अब SIR पूरी कर चुके राज्यों में इसे हटाने के फैसले से सामान्य मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया और SIR प्रक्रिया के बीच अंतर स्पष्ट किया गया है. चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को लेकर भी चर्चा यह फैसला ऐसे समय आया है जब ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीने की अवधि में कम से कम 14 मौकों पर आयोग के फैसलों और आदेशों पर आपत्तियां दर्ज कराई थीं. रिपोर्ट के अनुसार, दोनों ने कुछ फैसले उनकी जानकारी के बिना लिए जाने की बात भी कही थी. इसे भी पढ़ें: मतदाता सूची संशोधन का आज अंतिम दिन: धनबाद में 1.07 लाख समेत 4.45 लाख नोटिस, 19 अक्तूबर को आएगी नई सूची आयोग ने कहा, SIR के आदेश सर्वसम्मत थे हालांकि 26 सितंबर के अपने बयान में निर्वाचन आयोग ने कहा था कि SIR से जुड़े आदेशों को तीनों निर्वाचन आयुक्तों की सर्वसम्मत मंजूरी प्राप्त थी. ऐसे में फॉर्म-6 से SIR की अतिरिक्त घोषणा हटाने का ताजा फैसला आयोग की 26 सितंबर की बैठक के बाद लागू व्यवस्था के रूप में सामने आया है. SIR पूरी कर चुके राज्यों में अब मतदाता नामांकन के लिए सामान्य वैधानिक फॉर्म-6 ही इस्तेमाल किया जाएगा. इसे भी पढ़ें: जामताड़ा – SIR में फॉर्म-6, 6A, 7 व 8 भरने की अंतिम तिथि 30 सितम्बर The post Big Breaking: झारखंड के मतदाताओं को बड़ी राहत, चुनाव आयोग ने SIR के फॉर्म-6 से हटाया माता-पिता की जानकारी वाला कॉलम appeared first on Naya Vichar.

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श्रेया घोषाल के सामने हाथ जोड़कर खड़ी रहीं इंटरनेशनल स्टार Lilly Singh, बैकस्टेज का ये नजारा देख इंटरनेट पर मचा बवाल

मशहूर यूट्यूबर और इंटरनेशनल कॉमेडियन लिली सिंह हाल ही में लॉस एंजिल्स में आयोजित श्रेया घोषाल के लाइव कंसर्ट ‘द अनस्टॉपेबल’ में पहुंचीं. वहां श्रेया घोषाल की जादुई आवाज और सादगी देखकर लिली सिंह पूरी तरह दीवानी हो गईं और उनका फैनगर्ल मोमेंट देखने लायक था. कंसर्ट के कई वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं, जिसमें लिली सिंह श्रेया घोषाल के आगे हाथ जोड़े खड़ी नजर आ रही हैं. स्टेज से श्रेया ने लिया नाम, फिर गाया ‘लग जा गले’ कंसर्ट के दौरान जब श्रेया घोषाल को पता चला कि लिली सिंह भी ऑडियंस में मौजूद हैं, तो उन्होंने तुरंत स्टेज से उनका स्वागत किया. श्रेया ने माइक पर कहा कि लिली का आना उनके लिए सौभाग्य की बात है. इसके बाद श्रेया ने सदाबहार गाना ‘लग जा गले’ गाना शुरू किया और लिली सिंह टकटकी लगाए उन्हें देखती ही रह गईं. पूरे स्टेडियम में जब हजारों लोग एक साथ श्रेया के साथ ‘ओम शांति ओम’ गा रहे थे, तो लिली सिंह खुशी से झूम उठीं. View on Instagram 3 घंटे तक लगातार गाया, लगा जैसे कोई इंसान नहीं परी गा रही हो श्रेया घोषाल की तारीफ में कसीदे पढ़ते हुए लिली सिंह ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह उनके जीवन का सबसे जादुई पल था. लिली ने कहा कि इस स्त्री ने लगातार तीन घंटे तक बिना रुके गाया और हर एक सुर इतना परफेक्ट था जैसे कोई इंसान नहीं बल्कि सीधे स्वर्ग से कोई परी गा रही हो. लिली ने आगे बताया कि जब श्रेया ने कहा कि वह लिली के यूट्यूब रीलॉन्च के लिए काफी एक्साइटेड हैं, तो खुशी के मारे उनका दिल ही बैठ गया. इसी दिन के लिए हम रात-दिन मेहनत करते हैं अपनी बचपन की यादों को साझा करते हुए लिली सिंह ने कहा कि हिंदी सिनेमा और गानों का उनकी परवरिश में बहुत बड़ा हाथ रहा है. उन्होंने लिखा कि हम अपनी जिंदगी में दिन-रात कड़ी मेहनत और भागदौड़ इसीलिए करते हैं ताकि बचपन का वो छोटा सा सपना ऐसे जादुई पलों में पूरा हो सके. श्रेया घोषाल से मिला यह प्यार और सम्मान वह जिंदगी भर कभी नहीं भूलेंगी ये भी पढ़ें: प्यार, जुदाई और बेहिसाब दर्द, चांदनी सिंह की याद में तड़पे पवन सिंह, ‘दिल के दरदिया’ सॉन्ग ने काटा गदर ये भी पढ़ें: 10 लाख से शुरुआत और फिर 300 करोड़ की भयंकर तबाही, ‘हनुमान अंश’ के तूफान में उड़े बॉलीवुड के कई नामचीन धुरंधर The post श्रेया घोषाल के सामने हाथ जोड़कर खड़ी रहीं इंटरनेशनल स्टार Lilly Singh, बैकस्टेज का ये नजारा देख इंटरनेट पर मचा बवाल appeared first on Naya Vichar.

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अखिलेश के राज्यसभा कैंडिडेट धनराज नाथवानी का क्या है झारखंड कनेक्शन? NDA समर्थित सांसद के बेटे को क्यों बनाया उम्मीदवार

उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए हो रहे चुनाव में समाजवादी पार्टी (सपा) ने दो उम्मीदवार उतारे हैं. प्रोफेसर रामगोपाल यादव को एक और कार्यकाल के लिए मौका देने के साथ ही सपा ने एक नए चेहरे पर भी दांव लगाया है. यह नया चेहरा हैं धनराज परिमल नाथवानी. युवा उद्योगपति धनराज परिमल नाथवानी का नाम इसलिए भी चौंकाने वाला है, क्योंकि वे रामगोपाल की तरह सपा के पारंपरिक नेतृत्वक चेहरे नहीं हैं. धनराज लंबे समय से कॉरपोरेट जगत से जुड़े हैं. सपा प्रमुख अखिलेश यादव का धनराज को चुनाव मैदान में उतारने का फैसला एक और वजह से चौंकाता है. धनराज के पिता हिंदुस्तानीय जनता पार्टी (बीजेपी) की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के समर्थन से राज्यसभा सांसद हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि अखिलेश यादव ने ऐसे समय में धनराज नाथवानी पर दांव क्यों लगाया, जब यूपी चुनाव करीब हैं. साथ ही जानेंगे कि गुजरात के औद्योगिक घराने से आने वाले नाथवानी का झारखंड कनेक्शन क्या है. कौन हैं धनराज नाथवानी? धनराज परिमल नाथवानी सिर्फ एक नेतृत्वक परिवार से नहीं आते. वे कॉरपोरेट और स्पोर्ट्स प्रशासन में भी सक्रिय रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, वह रिलायंस इंडस्ट्रीज में ग्रुप प्रेसिडेंट हैं और रिलायंस न्यू एनर्जी लिमिटेड समेत समूह की कुछ कंपनियों में डायरेक्टर (निदेशक) की भूमिका निभा चुके हैं. धनराज नाथवानी का करियर कॉरपोरेट सेक्टर के साथ-साथ स्पोर्ट्स प्रशासन से भी जुड़ा रहा है. वह गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन से जुड़े हैं और संगठन के AGM सदस्यों में उनका नाम दर्ज है. GCA की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक यह संस्था गुजरात में क्रिकेट के विकास और संचालन की जिम्मेदारी संभालती है और BCCI की स्थायी सदस्य है. झारखंड से क्या है धनराज का कनेक्शन? धनराज नाथवानी का सीधा नेतृत्वक प्रतिनिधित्व झारखंड से नहीं रहा है. उनका झारखंड कनेक्शन मुख्य रूप से उनके पिता परिमल नाथवानी के जरिए बनता है. उनके पिता परिमल नाथवानी इसी साल (18 जून 2026) झारखंड से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर राज्यसभा पहुंचे. राज्यसभा चुनाव में परिमल को एनडीए का समर्थन मिला था. राज्यसभा से जुड़े दस्तावेजों में भी नाथवानी ने झारखंड से अपने जुड़ाव और राज्य के विकास से जुड़े मुद्दों का उल्लेख किया है. अखिलेश ने धनराज नाथवानी को ही क्यों चुना? यूपी विधानसभा चुनाव की दहलीज पर खड़ा है. नेतृत्वक दलों की रणनीति ऐसे संभावित चेहरों को राज्यसभा भेजकर एडजस्ट करने की होती है, जिनके असंतुष्ट होने की आशंका ज्यादा रहती है. ऐसे नेताओं को साधने के लिए, संतुष्ट करने के लिए पार्टियां राज्यसभा और विधानपरिषद सीटों का इस्तेमाल करती हैं. लेकिन अखिलेश यादव ने अलग ही राह ले ली. अखिलेश ने सपा के टिकट पर नाथवानी को उतारा, जो सपा की सियासत में एक्टिव भी नहीं थे. सपा प्रमुख के इस दांव के पीछे क्या रणनीति है? इसे चार पॉइंट में समझा जा सकता है.1 1- क्रॉस वोटिंग से बचने की रणनीति सपा को पिछले राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के कारण एक सीट पर हार का सामना करना पड़ा था. पार्टी ने इसके पीछे खरीद-फरोख्त का आरोप लगाते हुए बीजेपी को कठघरे में खड़ा किया था. नाथवानी औद्योगिक जगत से आते हैं. अखिलेश यादव ने इस बार नाथवानी पर दांव लगाया है, तो सपा की एक रणनीति खरीद-फरोख्त की कोशिशों को विफल करने की भी हो सकती है. 2- नाथवानी को उतार बीजेपी को फंसाया अखिलेश यादव ने नाथवानी को उतारकर बीजेपी को फंसा दिया है. नाथवानी के पिता खुद बीजेपी के समर्थन से ही राज्यसभा में हैं. ऐसे में बीजेपी के लिए उनके खिलाफ आक्रामक प्रचार, सपा को घेर विधानसभा चुनाव के लिए माहौल बना पाना आसान नहीं होगा. 3- युवा चेहरा दिल्ली के जंतर-मंतर पर जेनजी प्रोटेस्ट के बाद हर दल का फोकस युवाओं पर हैं. संसद और विधानसभा में युवाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने की मांग भी जोर पकड़ रही है. ऐसे में 1986 में जन्में नाथवानी युवाओं को जोड़ने की रणनीति में भी सपा के लिए कारगर साबित हो सकते हैं. 4- फाइनेंशियल सपोर्ट सिस्टम और गुजरात कनेक्शन औद्योगिक घराने से आने वाले नाथवानी चुनावी मौसम में सपा के फाइनेंशियल सपोर्ट सिस्टम के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं. बीजेपी के चुनाव कैंपेन का राज्य दर राज्य गुजरात मॉडल आधार रहा है. नाथवानी कार्ड के जरिये अखिलेश की रणनीति इसे काउंटर करने की भी हो सकती है. The post अखिलेश के राज्यसभा कैंडिडेट धनराज नाथवानी का क्या है झारखंड कनेक्शन? NDA समर्थित सांसद के बेटे को क्यों बनाया उम्मीदवार appeared first on Naya Vichar.

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