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अखिलेश के राज्यसभा कैंडिडेट धनराज नाथवानी का क्या है झारखंड कनेक्शन? NDA समर्थित सांसद के बेटे को क्यों बनाया उम्मीदवार

उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए हो रहे चुनाव में समाजवादी पार्टी (सपा) ने दो उम्मीदवार उतारे हैं. प्रोफेसर रामगोपाल यादव को एक और कार्यकाल के लिए मौका देने के साथ ही सपा ने एक नए चेहरे पर भी दांव लगाया है. यह नया चेहरा हैं धनराज परिमल नाथवानी. युवा उद्योगपति धनराज परिमल नाथवानी का नाम इसलिए भी चौंकाने वाला है, क्योंकि वे रामगोपाल की तरह सपा के पारंपरिक नेतृत्वक चेहरे नहीं हैं. धनराज लंबे समय से कॉरपोरेट जगत से जुड़े हैं. सपा प्रमुख अखिलेश यादव का धनराज को चुनाव मैदान में उतारने का फैसला एक और वजह से चौंकाता है. धनराज के पिता हिंदुस्तानीय जनता पार्टी (बीजेपी) की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के समर्थन से राज्यसभा सांसद हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि अखिलेश यादव ने ऐसे समय में धनराज नाथवानी पर दांव क्यों लगाया, जब यूपी चुनाव करीब हैं. साथ ही जानेंगे कि गुजरात के औद्योगिक घराने से आने वाले नाथवानी का झारखंड कनेक्शन क्या है. कौन हैं धनराज नाथवानी? धनराज परिमल नाथवानी सिर्फ एक नेतृत्वक परिवार से नहीं आते. वे कॉरपोरेट और स्पोर्ट्स प्रशासन में भी सक्रिय रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, वह रिलायंस इंडस्ट्रीज में ग्रुप प्रेसिडेंट हैं और रिलायंस न्यू एनर्जी लिमिटेड समेत समूह की कुछ कंपनियों में डायरेक्टर (निदेशक) की भूमिका निभा चुके हैं. धनराज नाथवानी का करियर कॉरपोरेट सेक्टर के साथ-साथ स्पोर्ट्स प्रशासन से भी जुड़ा रहा है. वह गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन से जुड़े हैं और संगठन के AGM सदस्यों में उनका नाम दर्ज है. GCA की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक यह संस्था गुजरात में क्रिकेट के विकास और संचालन की जिम्मेदारी संभालती है और BCCI की स्थायी सदस्य है. झारखंड से क्या है धनराज का कनेक्शन? धनराज नाथवानी का सीधा नेतृत्वक प्रतिनिधित्व झारखंड से नहीं रहा है. उनका झारखंड कनेक्शन मुख्य रूप से उनके पिता परिमल नाथवानी के जरिए बनता है. उनके पिता परिमल नाथवानी इसी साल (18 जून 2026) झारखंड से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर राज्यसभा पहुंचे. राज्यसभा चुनाव में परिमल को एनडीए का समर्थन मिला था. राज्यसभा से जुड़े दस्तावेजों में भी नाथवानी ने झारखंड से अपने जुड़ाव और राज्य के विकास से जुड़े मुद्दों का उल्लेख किया है. अखिलेश ने धनराज नाथवानी को ही क्यों चुना? यूपी विधानसभा चुनाव की दहलीज पर खड़ा है. नेतृत्वक दलों की रणनीति ऐसे संभावित चेहरों को राज्यसभा भेजकर एडजस्ट करने की होती है, जिनके असंतुष्ट होने की आशंका ज्यादा रहती है. ऐसे नेताओं को साधने के लिए, संतुष्ट करने के लिए पार्टियां राज्यसभा और विधानपरिषद सीटों का इस्तेमाल करती हैं. लेकिन अखिलेश यादव ने अलग ही राह ले ली. अखिलेश ने सपा के टिकट पर नाथवानी को उतारा, जो सपा की सियासत में एक्टिव भी नहीं थे. सपा प्रमुख के इस दांव के पीछे क्या रणनीति है? इसे चार पॉइंट में समझा जा सकता है.1 1- क्रॉस वोटिंग से बचने की रणनीति सपा को पिछले राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के कारण एक सीट पर हार का सामना करना पड़ा था. पार्टी ने इसके पीछे खरीद-फरोख्त का आरोप लगाते हुए बीजेपी को कठघरे में खड़ा किया था. नाथवानी औद्योगिक जगत से आते हैं. अखिलेश यादव ने इस बार नाथवानी पर दांव लगाया है, तो सपा की एक रणनीति खरीद-फरोख्त की कोशिशों को विफल करने की भी हो सकती है. 2- नाथवानी को उतार बीजेपी को फंसाया अखिलेश यादव ने नाथवानी को उतारकर बीजेपी को फंसा दिया है. नाथवानी के पिता खुद बीजेपी के समर्थन से ही राज्यसभा में हैं. ऐसे में बीजेपी के लिए उनके खिलाफ आक्रामक प्रचार, सपा को घेर विधानसभा चुनाव के लिए माहौल बना पाना आसान नहीं होगा. 3- युवा चेहरा दिल्ली के जंतर-मंतर पर जेनजी प्रोटेस्ट के बाद हर दल का फोकस युवाओं पर हैं. संसद और विधानसभा में युवाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने की मांग भी जोर पकड़ रही है. ऐसे में 1986 में जन्में नाथवानी युवाओं को जोड़ने की रणनीति में भी सपा के लिए कारगर साबित हो सकते हैं. 4- फाइनेंशियल सपोर्ट सिस्टम और गुजरात कनेक्शन औद्योगिक घराने से आने वाले नाथवानी चुनावी मौसम में सपा के फाइनेंशियल सपोर्ट सिस्टम के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं. बीजेपी के चुनाव कैंपेन का राज्य दर राज्य गुजरात मॉडल आधार रहा है. नाथवानी कार्ड के जरिये अखिलेश की रणनीति इसे काउंटर करने की भी हो सकती है. The post अखिलेश के राज्यसभा कैंडिडेट धनराज नाथवानी का क्या है झारखंड कनेक्शन? NDA समर्थित सांसद के बेटे को क्यों बनाया उम्मीदवार appeared first on Naya Vichar.

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ट्रैफिक चालान न भरने पर कटेगी बिजली? जानिए सुप्रीम कोर्ट का क्या है प्लान

Traffic Challan: अगर आपका कोई ट्रैफिक चालान पेंडिंग है और आप उसे लंबे समय से टाल रहे हैं, तो अब संभल जाइए, देश में करीब 20,000 करोड़ रुपये के ट्रैफिक चालान बकाया पड़े हैं. इस भारी-भरकम रकम की वसूली के लिए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य प्रशासनों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक बेहद अनोखा सुझाव दिया है कि बकाया चालान की रकम को बिजली बिल में जोड़ दो. जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने सड़क सुरक्षा और इलेक्ट्रॉनिक चालान से जुड़ी सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की. कोर्ट का मानना है कि सिर्फ चालान काटने से काम नहीं चलेगा, जब तक कि जुर्माने की वसूली न हो. बिजली बिल से चालान जोड़ने की नौबत क्यों आई? अदालत को दी गई जानकारी के मुताबिक, देशभर में ट्रैफिक पुलिस ने अब तक करीब ₹45,000 करोड़ के ई-चालान जारी किए हैं. लेकिन इनमें से केवल ₹25,000 करोड़ की ही वसूली हो पाई है. आंकड़ा (चालान का हिसाब) रकम (करोड़ में) कुल जारी किए गए ई-चालान ₹45,000 करोड़ अब तक हुई वसूली ₹25,000 करोड़ कुल बकाया जुर्माना ₹20,000 करोड़ इतनी बड़ी रकम फंसी होने पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि बिजली का बिल हर महीने या नियमित समय पर आता है और न भरने पर बिजली काट दी जाती है. अगर ट्रैफिक जुर्माना इसमें जोड़ दिया जाएगा, तो लोग बिजली कटने के डर से चालान समय पर भरेंगे. चालान न भरने पर गाड़ियों और लाइसेंस पर क्या-क्या पाबंदियां लग सकती हैं? अगर बिजली बिल वाला विचार लागू नहीं भी होता है, तो भी लापरवाही भारी पड़ सकती है. सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को बकाया वसूलने के लिए कई कड़े प्रशासनिक कदम उठाने की सलाह दी है: RC और ट्रांसफर पर रोक: वाहन का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) रिन्यू नहीं होगा, डुप्लीकेट RC नहीं बनेगी और गाड़ी किसी दूसरे के नाम ट्रांसफर भी नहीं होगी. परिवहन पोर्टल पर ब्लैकलिस्ट: बकाया चालान वाली गाड़ियों को परिवहन पोर्टल पर ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा. PUC और फिटनेस सर्टिफिकेट अटकेगा: वाहन का फिटनेस और पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) सर्टिफिकेट जारी या रिन्यू नहीं किया जाएगा. ड्राइविंग लाइसेंस रद्द: चालान पेंडिंग रहने पर ड्राइविंग लाइसेंस का रिन्यूअल रोक दिया जाएगा और गंभीर मामलों में लाइसेंस सस्पेंड भी हो सकता है. गाड़ी हो सकती है ज़ब्त: सड़कों पर अचानक (रैंडम) चेकिंग की जाएगी और जिस गाड़ी का चालान बकाया मिलेगा, उसे मौके पर ही जब्त किया जा सकता है. क्या यह नियम आज से ही पूरे देश में लागू हो गया है? नहीं, यह सुप्रीम कोर्ट का एक केवल सुझाव (Suggestion) है, कोई अंतिम आदेश या पूरे देश के लिए लागू नियम नहीं. कोर्ट ने राज्यों को सिर्फ इस तरह के रास्ते तलाशने और नियम बनाने के लिए कहा है. हालांकि, कोर्ट की इस सख्त टिप्पणी से यह साफ है कि आने वाले दिनों में ई-चालान को नजरअंदाज करना आम जनता के लिए बहुत भारी पड़ सकता है.  ये भी पढ़ें: घर बनाना होगा और महंगा! अक्टूबर से ₹20 तक बढ़ सकते हैं सीमेंट के दाम The post ट्रैफिक चालान न भरने पर कटेगी बिजली? जानिए सुप्रीम कोर्ट का क्या है प्लान appeared first on Naya Vichar.

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Pitru Paksha 2026: पितृ पक्ष में घर के दरवाजे पर दिखें ये 4 जीव तो न भगाएं, माना जाता है पितरों का शुभ संकेत

Pitru Paksha 2026 Auspicious Signs: पितृ पक्ष पूर्वजों की आत्मा को तृप्त कर उनका आशीर्वाद पाने का खास अवसर होता है. गरुड़ पुराण के अनुसार, इस दौरान घर में या घर के बाहर कुछ जीवों का आना शुभ है. मान्यता है कि ये जीव पितृ देव की कृपा का संदेश पहुंचाते हैं. ऐसे में अगर पितृ पक्ष के दौरान ये चार जीव घर के दरवाजे पर अचानक पहुंच जाएं, तो अनदेखी नहीं करनी चाहिए. पितृ पक्ष के दौरान घर में किन जीवों का आना शुभ कौवे- गरुड़ पुराण के अनुसार, पितृ पक्ष की अवधि में घर की मुंडेर पर कौवे का आना शुभ माना गया है. कर्मकांड के जानकार (महापात्र) वरुण झा ने बताया कि पितृ पक्ष में कौवे के लिए भोजन का एक हिस्सा जरूर निकालकर रख देना चाहिए. उनके लिए भोजन का हिस्सा घर की छत पर रखना चाहिए. कौवे अगर घर में पकाए गए भोजन को ग्रहण करते हैं, तो पितर तृप्त होते हैं, ऐसा शास्त्रों में कहा गया है. गाय- सनातन धर्म में गाय को माता कहकर पुकारा जाता है. ऐसा इसलिए क्योंकि ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, गाय में सभी देवी-देवताओं का वास होता है. इसलिए अगर पितृ पक्ष के दौरान घर के बाहर गाय अचानक पहुंच जाए, तो उसे खाने के लिए रोटी या गुड़ जरूर देना चाहिए. पितृ पक्ष में गाय को भोजन देने से पूर्वजों की विशेष कृपा प्राप्त होने की मान्यता है. ये भी पढ़ें: Pitru Paksha 2026: घर में लगातार आ रही हैं परेशानियां? जानें पितृ दोष के संकेत और आसान उपाय कुत्ता- धर्मशास्त्रों में कुत्ते को क्षेत्रपाल कहा गया है. पितृ पक्ष के दौरान घर के दरवाजे पर अचानक कुत्ते का आना शुभ संकेत माना जाता है. पंडित बैद्यनाथ झा ने बताया कि पितृ पक्ष में अचानक कुत्ता पहुंच जाए, तो उसे खाने के लिए कुछ न कुछ जरूर देना चाहिए. पितृ पक्ष में कुत्ते को भोजन देने से पूर्वजों की कृपा प्राप्त होती है. चींटी – धर्मशास्त्र के जानकार पंडित धर्मनाथ झा ने बताया कि पितृ पक्ष में चींटियों को भोजन देने का विशेष विधान है. पितृ पक्ष के दौरान अगर घर में अचानक चींटी पहुंच जाए, तो इसे पूर्वजों की कृपा मानकर उसे खाने के लिए भोजन देना चाहिए. पितृ पक्ष में चींटियों को भोजन कराने से पितृ देव प्रसन्न होते हैं, ऐसा गरुड़ पुराण में कहा गया है. पितृ पक्ष में गाय, कुत्ता, कौआ और चींटी को भोजन करातीं स्त्री (फोटो- एआई) जीव (पंचबलि का भाग) धार्मिक प्रतीक/संबोधन क्या अर्पित करें कौआ (कागबलि) पितृ देव का संदेशवाहक पके हुए भोजन का भाग गाय (गोबलि) सर्वदेवमयी माता रोटी व गुड कुत्ता (श्वानबलि) क्षेत्रपाल / यम अनुचर रोटी या भोजन चींटी (पिपीलिका बलि) निरंतरता का प्रतीक शक्कर या आटा ये भी पढ़ें: Swapna Shastra: सपने में दिखें पितर तो न करें नजरअंदाज, ऐसे समझें शुभ और अशुभ इशारे The post Pitru Paksha 2026: पितृ पक्ष में घर के दरवाजे पर दिखें ये 4 जीव तो न भगाएं, माना जाता है पितरों का शुभ संकेत appeared first on Naya Vichar.

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JEE Main की तरह अब NEET भी CBT मोड में, शिक्षा मंत्रालय कर रहा तैयारी

NEET UG Exam: NEET UG को पेन-पेपर मोड से ऑनलाइन यानी कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) में बदलने की तैयारी चल रही है. शिक्षा मंत्रालय देशभर में परीक्षा केंद्रों के लिए एक नई CBT इंफ्रास्ट्रक्चर स्ट्रैटजी तैयार कर रहा है. इसका उद्देश्य NEET समेत अन्य एंट्रेंस एग्जाम को फ्यूचर में ऑनलाइन मोड में कराने के लिए जरूरी व्यवस्था तैयार करना है. देशभर में तैयार होंगे परीक्षा केंद्र शिक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, नेशनल लेवल पर परीक्षा के लिए जरूरी कंप्यूटर आधारित टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने पर काम चल रहा है. इसके तहत देशभर में परीक्षा केंद्रों की उपलब्धता बढ़ाने, केंद्रों पर एक जैसे परीक्षा मानक लागू करने और पेन-पेपर परीक्षाओं को CBT मोड में बदलने की व्यवस्था तैयार की जाएगी. इस स्ट्रैटजी पर अलग-अलग मॉडल के जरिए काम करने पर विचार किया जा रहा है. खास तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों, स्त्रीओं और कम इंटरनेट कनेक्टिविटी वाले जिलों के कैंडिडेट्स के लिए परीक्षा व्यवस्था को आसान बनाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है. NEET को ऑनलाइन कराने पर अभी अंतिम फैसला बाकी है NEET UG को CBT मोड में कराने की योजना पर काम जरूर चल रहा है, लेकिन अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है. NEET को ऑनलाइन कराने के तरीके, जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और अलग-अलग क्षेत्रों के कैंडिडेट्स पर इसके असर को लेकर विचार किया जा रहा है. इस मामले में स्वास्थ्य मंत्रालय और नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) से भी चर्चा की जानी है. साथ ही परीक्षा सुधारों के लिए बनाई गई हाई लेवल टास्क फोर्स की सिफारिश का इंतजार है. ये भी पढ़ें: NCERT Class 9 Social Science की नई किताब में महाराणा प्रताप से चैतन्य महाप्रभु तक का जिक्र, जानें क्या-क्या बदला Nandan Nilekani की अध्यक्षता वाली टास्क फोर्स देगी रिपोर्ट देश की परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए Nandan Nilekani की अध्यक्षता में एक हाई पावर टास्क फोर्स बनाई गई थी. इस कमेटी को परीक्षा व्यवस्था को ज्यादा सुरक्षित और पेपर लीक जैसी घटनाओं से बचाने के लिए सुझाव देने हैं. अभी तक इस टास्क फोर्स की रिपोर्ट सामने नहीं आई है. NEET UG 2026: पेपर लीक के बाद क्या हुआ? NEET UG में पेपर लीक की घटना के बाद परीक्षा व्यवस्था को लेकर देशभर में सवाल उठे थे. इसके बाद केंद्र प्रशासन ने परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव की दिशा में कदम उठाए. 3 मई 2026: NEET UG 2026 परीक्षा आयोजित होनी थी, लेकिन पेपर लीक की घटना सामने आने के बाद परीक्षा रद्द कर दी गई. 21 जून 2026: रद्द की गई NEET UG 2026 परीक्षा दोबारा आयोजित की गई. 16 जुलाई 2026: NTA ने NEET UG 2026 का रिजल्ट जारी किया. पेपर लीक की घटना के बाद परीक्षा व्यवस्था में बदलाव को लेकर केंद्र प्रशासन ने NEET UG को भविष्य में पेन-पेपर मोड से कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) में कराने की दिशा में तैयारी शुरू हुई. JEE Main और UGC NET पहले से CBT मोड में National Testing Agency (NTA) पहले से कई बड़ी परीक्षाएं कंप्यूटर आधारित मोड में आयोजित करती है. इनमें JEE Main, CUET UG, CUET PG, UGC NET और CSIR UGC NET जैसी परीक्षाएं शामिल हैं. शिक्षा मंत्रालय की नई रणनीति तैयार होने के बाद भविष्य में अन्य प्रवेश परीक्षाओं को भी CBT मोड में कराने का रास्ता साफ हो सकता है. करीब 25 लाख अभ्यर्थी देते हैं NEET UG NEET UG देश की सबसे बड़ी अंडरग्रेजुएट मेडिकल एंट्रेंस एग्जामिनेशन में से एक है. हर साल करीब 25 लाख कैंडिडेट्स इस परीक्षा में शामिल होते हैं. NTA की ओर से NEET UG आयोजित किया जाता है. इसके स्कोर के आधार पर MBBS के साथ-साथ BDS, आयुर्वेद, यूनानी और सिद्ध चिकित्सा कोर्सेज में भी एडमिशन दिया जाता है. देश में MBBS की करीब 1.08 लाख सीट्स हैं. इनमें लगभग 56 हजार सीट्स प्रशासनी मेडिकल कॉलेज में और करीब 52 हजार सीट्स प्राइवेट कॉलेज में हैं. ये भी पढ़ें: NEET PG 2026 Seat Matrix Released: 11% सीटें बढ़ी, इन ब्रांच में बढ़ा एडमिशन का मौका The post JEE Main की तरह अब NEET भी CBT मोड में, शिक्षा मंत्रालय कर रहा तैयारी appeared first on Naya Vichar.

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INDIA Alliance Meeting: 2 से 8 अक्टूबर तक सेव डेमोक्रेसी मार्च, चुनाव आयोग के खिलाफ 5 बड़ी रैली का ऐलान

INDIA Alliance Meeting: INDIA गठबंधन ने 2 से 8 अक्टूबर तक सेव डेमोक्रेसी मार्च का ऐलान कर दिया है. बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस किया और इसकी जानकारी दी. खरगे ने कहा, विपक्षी दल 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक देशभर में जिला स्तर पर ‘लोकतंत्र बचाओ’ मार्च निकालेंगे. इस दौरान जिला मजिस्ट्रेट के कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन किया जाएगा. खरगे ने कहा कि इस अभियान के जरिए लोगों को बताया जाएगा कि विपक्ष किन मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहा है. उन्होंने बताया कि 6 अक्टूबर को विपक्ष के सभी सांसद चुनाव आयोग के कार्यालय तक मार्च करेंगे. उन्होंने कहा कि इस मार्च में लोकसभा और राज्यसभा के सभी विपक्षी सांसदों के साथ लोकतंत्र की रक्षा के लिए आवाज उठाने वाले अन्य सांसदों को भी शामिल होने का आह्वान किया जाएगा. राष्ट्रपति से मुलाकात का भी कार्यक्रम खरगे ने कहा कि विपक्षी नेता अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में राष्ट्रपति से मिलने का समय मांगेंगे. इस दौरान राष्ट्रपति को एक ज्ञापन सौंपा जाएगा. इसमें विपक्ष की ओर से चुनावी प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं से जुड़ी चिंताओं को रखा जाएगा. अक्टूबर-नवंबर में 5 बड़ी रैली का ऐलान खरगे ने बताया, अक्टूबर-नवंबर में 5 बड़ी रैलियां भी आयोजित की जाएंगी. इन रैलियों की तारीख और स्थान जल्द तय किए जाएंगे. खरगे के मुताबिक, 1 नवंबर को दिल्ली में बड़ी रैली आयोजित करने का फैसला किया गया है. इंडिया गठबंधन का प्लान 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक जिला स्तर पर ‘लोकतंत्र बचाओ’ मार्च 6 अक्टूबर को विपक्षी पार्टियों के सांसद चुनाव आयोग तक मार्च करेंगे. विपक्षी पार्टियों के नेता अक्टूबर के दूसरे हफ्ते में हिंदुस्तान के राष्ट्रपति से मिलने का समय मांगेंगे. INDIA गठबंधन पांच बड़ी रैलियां आयोजित करेगा 1 नवंबर को दिल्ली में एक बड़ी रैली होगी, जिसमें हम ‘वोट की चोरी’ से जुड़े मुद्दे उठाएंगे. INDIA गठबंधन की मांग है कि – सुप्रीम कोर्ट में SIR से जुड़े सभी मामलों का जल्द से जल्द समाधान किया जाए. मतदाता सूची और SIR को लेकर खरगे के आरोप कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि देशभर में नागरिक और नेतृत्वक दल निर्वाचन आयोग के कामकाज को लेकर गंभीर सवाल उठा रहे हैं. उन्होंने कहा कि विपक्ष ने EVM और मतदाता सूची को लेकर आयोग से जवाब मांगा, लेकिन उसकी शिकायतों पर गौर नहीं किया गया. खरगे ने दावा किया कि विपक्ष की ओर से आंकड़े और सबूत सामने रखे जाने के बाद विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR का सहारा लिया गया. उन्होंने दावा किया कि 13.3 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं. खरगे ने कहा कि किसी भी पात्र नागरिक को अपारदर्शी या पर्याप्त निगरानी के बिना चलाए गए किसी अभ्यास के जरिए चुनावी प्रक्रिया से बाहर नहीं किया जाना चाहिए. खरगे का दावा, मोहरों की तरह काम कर रहे चुनाव आयोग के अधिकारी खरगे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में निर्वाचन आयोग के अधिकारियों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने दावा किया कि आयोग के अंदर दो-तीन लोग केवल ‘मोहरों’ की तरह काम कर रहे हैं और उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का उन पर प्रभाव है. राहुल गांधी ने CEC को लेकर पीएम मोदी पर लगाया आरोप INDIA गठबंधन की बैठक के बाद राहुल गांधी ने भी मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया. उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में 2023 के उस कानून का जिक्र किया, जिसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों को उनके आधिकारिक कार्यों के संबंध में कानूनी संरक्षण दिया गया है. राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी इस कानूनी व्यवस्था का इस्तेमाल ‘वोट चोरी’ के लिए करते हैं. यह उनका नेतृत्वक आरोप है. क्या कहता है 2023 का कानून? मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 की धारा 16 में निर्वाचन आयुक्तों को उनके आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान किए गए कार्य, बात या अभिव्यक्ति को लेकर अदालत में दीवानी या आपराधिक कार्यवाही से संरक्षण का प्रावधान है. The post INDIA Alliance Meeting: 2 से 8 अक्टूबर तक सेव डेमोक्रेसी मार्च, चुनाव आयोग के खिलाफ 5 बड़ी रैली का ऐलान appeared first on Naya Vichar.

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INDIA गठबंधन की बैठक से दूर रहे अखिलेश-उद्धव, जानिए, ज्ञानेश कुमार और SIR के मुद्दे पर क्यों हैं साथ?

दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में इंडिया गठबंधन की बैठक शुरू हो गई है. गौर करने वाली बात यह है कि इस बैठक में गठबंधन की सभी प्रमुख पार्टियां शामिल नहीं हो रही हैं. कांग्रेस की कोशिश है कि एसआईआर और ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर विपक्षी दलों की साझा रणनीति तैयार हो और संसद से सड़क तक एक संयुक्त अभियान चलाया जाए. लेकिन बैठक से पहले ही विपक्षी एकता को लेकर सवाल उठने लगे हैं जिसकी वजह से यह आशंका उत्पन्न हो रही है कि क्या विपक्ष एकजुट हो पाएगा? आइए जानते हैं कि बैठक में कौन नहीं पहुंचा और क्यों? इंडिया गठबंधन की बैठक में कौन नहीं पहुंचा? इंडिया गठबंधन की बैठक में समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव खुद शामिल नहीं हो रहे हैं. हालांकि, पार्टी ने बैठक का बहिष्कार नहीं किया है. पार्टी की ओर से सांसद हरेंद्र मलिक और रामपुर से सांसद मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी बैठक में शामिल हो रहे हैं. सपा की ओर से यह जानकारी दी गई है कि अखिलेश यादव पहले से तय कार्यक्रमों में व्यस्त हैं.जिनमें राज्यसभा चुनाव का कार्यक्रम प्रमुख है, साथ ही उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियां भी चल रही हैं. शिवसेना (UBT) के नेता भी बैठक में शामिल नहीं हो रहे हैं. हालांकि पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये बैठक में शामिल होंगे. इस संबंध में पार्टी के नेता संजय राउत ने बताया है कि मुंबई में आंदोलन की तैयारियों के कारण पार्टी के नेता दिल्ली नहीं जा रहे हैं. अखिलेश यादव का नहीं आना कोई मुद्दा नहीं इस संबंध में नेतृत्वक विश्लेषक रशीद किदवई का कहना है कि इंडिया गठबंधन की जो बैठक हो रही है, उसमें इन नेताओं का नहीं पहुंचना कोई मुद्दा नहीं है. इसकी वजह यह है कि इन्होंने पहले से यह सूचित कर रखा है कि उनके कुछ तय कार्यक्रम हैं इसलिए वे नहीं आ रहे हैं. ऐसा नहीं है कि इन नेताओं ने किसी तरह की नाराजगी जताई है और वे नहीं आए हैं. हिंदुस्तान में गठबंधन चुनाव आधारित होते हैं रशीद किदवई कहते हैं कि हिंदुस्तान में नेतृत्वक पार्टियों के गठबंधन चुनाव आधारित होते हैं. UPA, NDA जनता पार्टी जैसे गठबंधन इसके उदाहरण हैं. इस लिहाज से हमें यह समझना होगा कि अभी उत्तर प्रदेश में चुनाव होने वाले हैं, जहां योगी प्रशासन के खिलाफ सपा और कांग्रेस दोनों को एकजुट होकर लड़ाई लड़नी होगी. अगर वे अलग-अलग रहे तो नुकसान दोनों को होगा और इस बात को दोनों पार्टियां समझती हैं. जहां तक बात आम आदमी पार्टी की है, तो वे पंजाब में अकेले अपने दम पर प्रशासन में हैं. विधानसभा चुनाव में उनका सीधा मुकाबला कांग्रेस से है. ऐसे में वे किस तरह इंडिया गठबंधन के साथ आ सकते हैं. हां, जब 2029 में लोकसभा चुनाव होंगे तो वे इंडिया गठबंधन के साथ आ जाएंगे. इसकी वजह यह होगी कि उन्हें भी 10-12 सीटें चाहिए होंगी. संवेदनशील मुद्दों ने विपक्ष को दिया मौका इस वक्त देश में एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त के कामकाज का जो तरीका है, उसने विपक्ष को मौका दिया है कि वो अपनी आवाज बुलंद करें. इसी वजह से सभी विपक्षी दल नरेंद्र मोदी प्रशासन को घेरने की तैयारी में हैं. मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने के मसले पर भी सभी विपक्षी पार्टियां एकजुट हैं, चाहे वो आम आदमी पार्टी को हो या कांग्रेस. इसी वजह से विपक्ष अभी पूरी ऊर्जा के साथ नरेंद्र मोदी प्रशासन को चुनौती देने की तैयारी में है. ये भी पढ़ें: दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाइट बोइंग 737 मैक्स के हाईजैक होने की समाचार! बेंजामिन नेतन्याहू के ऑफिस ने किया इनकार The post INDIA गठबंधन की बैठक से दूर रहे अखिलेश-उद्धव, जानिए, ज्ञानेश कुमार और SIR के मुद्दे पर क्यों हैं साथ? appeared first on Naya Vichar.

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Exclusive: सहवाग के शो में जाने से पहले खेसारी से मिलीं काजल राघवानी! सीक्रेट मीटिंग के दौरान बंद करा दिए गए कैमरे…

काजल राघवानी इन दिनों Rise & Fall 2 को लेकर चर्चा में हैं, लेकिन शो में एंट्री से पहले ही उनकी जिंदगी की एक पुरानी कहानी फिर से सुर्खियों में आ गई है. मामला खेसारी लाल यादव से जुड़ा है. दोनों का रिश्ता भोजपुरी इंडस्ट्री के सबसे चर्चित रिश्तों में रहा है. प्यार, ब्रेकअप और उसके बाद हुई बयानबाजी ने इस कहानी को लंबे वक्त तक भोजपुरी का बड़ा बवाल बनाए रखा. अब समाचार है कि Rising Fall में जाने से ठीक पहले काजल और खेसारी के बीच एक सीक्रेट मुलाकात हुई. सूत्रों के मुताबिक, काजल ने अपने पुराने निर्माता-निर्देशक के जरिए खेसारी लाल से मुलाकात की थी. खास बात यह है कि यह मुलाकात बेहद सीक्रेट रखी गई. बताया जा रहा है कि स्टूडियो में मौजूद कैमरे तक बंद करा दिए गए थे, ताकि इस मुलाकात की भनक बाहर न लगे. अब सवाल उठ रहा है कि आखिर ऐसा क्या था, जिसे कैमरों से भी दूर रखना पड़ा? हालांकि सोर्स का कहना है कि खेसारी नहीं चाहते थे कि उनकी पत्नी मीनू को इस मुलाकात की कोई भी भनक लगे. यही वजह है उन्होंने मीटिंग होने से पहले ही कैमरे ऑफर करवा लिए थे. काजल और खेसारी की कहानी कोई नई नहीं है. दोनों के अफेयर की चर्चा ने एक वक्त भोजपुरी इंडस्ट्री में खूब सुर्खियां बटोरी थीं. बाद में रिश्ता टूटा तो मामला सिर्फ ब्रेकअप तक नहीं रहा. दोनों की तरफ से रिश्ते को लेकर अलग-अलग बातें सामने आईं और विवाद बढ़ता चला गया. काजल ने कई मौकों पर इस रिश्ते और उससे जुड़े अपने अनुभवों के बारे में बात की है. वहीं खेसारी ने भी उनके साथ किसी प्रेम संबंध की बात से इनकार किया था. इसी साल Bhojpuri Bawaal में काजल ने अपने पुराने रिश्ते को लेकर कई निजी बातें शेयर कीं. यहां तक कि करवाचौथ से जुड़ी उनकी बात ने भी खूब सुर्खियां बटोरीं. उनके पुराने रिश्ते को लेकर सोशल मीडिया पर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई थी. और अब, इसी पूरी कहानी के बीच Rising Fall की एंट्री. दिलचस्प बात यह है कि शो में आने के बाद भी काजल ने अपने पुराने प्यार को लेकर ऐसा बयान दिया, जिसने सबका ध्यान खींच लिया. उनसे जब पूछा गया कि जिस शख्स से उन्होंने धोखा खाया, क्या वह आज भी उनके दिल में है, तो काजल ने कहा कि शायद वह आज भी उनके दिल में हैं और वह चाहती हैं कि वह उनके पास वापस आएं. ऐसे में शो में एंट्री से पहले खेसारी से कथित मुलाकात की समाचार ने पुरानी कहानी में एक नया ट्विस्ट जोड़ दिया है. सोर्स के अनुसार, मुलाकात के दौरान Rise & Fall 2 में आने वाले विवादों और पुराने रिश्ते को लेकर भी बातचीत हुई. गॉसिप गलियारों में यह दावा भी है कि खेसारी की तरफ से काजल को कथित तौर पर यह संदेश दिया गया कि अगर शो में उनके खिलाफ कोई बयान नहीं दिया जाता है, तो उन्हें और उनके फैंस की तरफ से सपोर्ट मिल सकता है. हालांकि, इस बातचीत की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. इसी बीच काजल के स्टाफ बॉय कृष्णा की खेसारी लाल यादव के साथ एक तस्वीर की भी चर्चा है. तस्वीर और कथित मुलाकात को लोग जोड़कर देख रहे हैं. सवाल यह है कि क्या Rise & Fall2में जाने से पहले काजल ने अपने पुराने रिश्ते की कड़ियां फिर से जोड़ने की कोशिश की थी? खेसारी संग तस्वीर खिंचवाते काजल के स्टाफ कृष्णा क्योंकि एक तरफ Bhojpuri Bawaal में पुराने रिश्ते का दर्द सामने आया. दूसरी तरफ Rising Fall में काजल ने खुद कबूल किया कि वह शख्स आज भी उनके दिल में है. और अब शो में एंट्री से पहले खेसारी से कथित सीक्रेट मीटिंग की समाचार. संयोग है या कोई बड़ा गेम प्लान? फिलहाल इस कथित मुलाकात और बातचीत पर दोनों की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. लेकिन अगर सूत्रों की यह समाचार सही है, तो Rising Fall में काजल की एंट्री सिर्फ एक रियलिटी शो की एंट्री नहीं, बल्कि भोजपुरी की सबसे चर्चित love story के एक और नए chapter की शुरुआत जरूर बन सकती है. ये भी पढ़ें: act Check: ‘राइज एंड फॉल 2’ का खौफ या गेम प्लान? एक्स-बॉयफ्रेंड के फैंस के सामने गिड़गिड़ाईं काजल राघवानी, ‘खेसारी आर्मी’ के सामने रखी ये डिमांड The post Exclusive: सहवाग के शो में जाने से पहले खेसारी से मिलीं काजल राघवानी! सीक्रेट मीटिंग के दौरान बंद करा दिए गए कैमरे… appeared first on Naya Vichar.

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दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाइट बोइंग 737 मैक्स के हाईजैक होने की खबर! बेंजामिन नेतन्याहू के ऑफिस ने किया इनकार

दुबई से तेल अवीव जा रही एक फ्लाइट बोइंग 737 मैक्स ने बुधवार को इमरजेंसी घोषित की और उत्तरी सऊदी अरब के ऊपर से वापस लौट गई. फ्लाइट के वापस लौटने के बाद हड़कंप मच गया कि एक यात्री विमान का अपहरण हो गया है. यात्री विमान की हुई सुरक्षित लैंडिंग इस इमरजेंसी की घोषणा के बाद हिब्रू मीडिया ने बताया कि हाइजैकिंग की आशंका की वजह से इजराइली एयर फोर्स के फाइटर जेट प्लेन की ओर बढ़ाए गए थे. इन फाइटर जेट्‌स ने यात्री विमान की सुरक्षित लैंडिंग कराई. बाद में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के ऑफिस के एक प्रवक्ता ने कहा है कि हाईजैक का कोई डर नहीं था. इस तरह की कोई स्थिति उत्पन्न नहीं हुई थी. दो पायलटों के बीच झगड़ा बना इमरजेंसी की वजह इजरायली मीडिया ने सिक्योरिटी अधिकारियों के हवाले से कहा कि यह घटना प्लेन के दो पायलटों के बीच झगड़े की वजह से हुई और प्लेन में सवार सभी लोग सुरक्षित हैं. प्लेन किंगडम के सिविलियन और मिलिट्री बेस, तबुक में उतरा. ये भी पढ़ें : कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में जमा हो रहे हैं इंडिया गठबंधन के नेता, मोदी प्रशासन को चुनौती देने की है तैयारी The post दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाइट बोइंग 737 मैक्स के हाईजैक होने की समाचार! बेंजामिन नेतन्याहू के ऑफिस ने किया इनकार appeared first on Naya Vichar.

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750 करोड़ के जीएसटी घोटाले में कारोबारी ज्ञानचंद जायसवाल के ठिकानों पर ईडी की दबिश, दस्तावेज जब्त

जमशेदपुर : प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार सुबह स्क्रैप कारोबारी ज्ञानचंद जायसवाल उर्फ बबलू जायसवाल के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की. केंद्रीय जांच एजेंसी की अलग-अलग टीमों ने अहले सुबह आठ बजे बिष्टुपुर स्थित उनके आवासीय परिसर और आदित्यपुर व गम्हरिया औद्योगिक क्षेत्र स्थित प्लांट में एक साथ धावा बोला. इस कार्रवाई के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. जांच के दायरे में आए परिसरों में किसी भी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है, वहीं अंदर मौजूद लोगों को भी बाहर नहीं जाने दिया जा रहा है. कांट्रैक्टर्स एरिया से लेकर औद्योगिक क्षेत्र तक तलाशी ईडी की टीमें बिष्टुपुर के कांट्रैक्टर्स एरिया स्थित ज्ञानचंद जायसवाल के आवास, बर्मामाइंस, जुगसलाई और आदित्यपुर हथियाडीह स्थित शारदा एंडेवर्स फैक्ट्री में सघन तलाशी अभियान चला रही हैं. जांच दल में शामिल अधिकारी वित्तीय लेनदेन, खरीद-बिक्री से जुड़े अभिलेखों और कंप्यूटर हार्ड डिस्क सहित इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की गहन पड़ताल कर रहे हैं. कई महत्वपूर्ण कागजात जब्त किए जाने की सूचना है. छापेमारी के दौरान पुलिस बल की भी तैनाती की गई है. 750 करोड़ के जीएसटी घोटाले में कारोबारी ज्ञानचंद जायसवाल के ठिकानों पर ईडी की दबिश. 750 करोड़ के फर्जीवाड़े और टैक्स चोरी की जांच प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई लगभग 750 करोड़ रुपए के बड़े जीएसटी घोटाले और अवैध वित्तीय लेनदेन से जुड़ी है. कारोबारी बबलू जायसवाल पर बोगस कंपनियों के जरिए फर्जी बिलिंग करने, अवैध रूप से इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) प्राप्त करने और बड़े पैमाने पर राजस्व को नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोप हैं. हालांकि, जांच की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने अभी आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है. पहले 55.66 करोड़ के मामले में जा चुके हैं जेल ज्ञानचंद जायसवाल इससे पूर्व भी उन पर 55.66 करोड़ रुपए के जीएसटी घोटाले का आरोप लगा था, जिसमें उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था. उस मामले में मेसर्स जय भोलानाथ कंपनी, मेसर्स मां शारदा एंडेवर और मेसर्स मेकर्स कास्टिंग प्राइवेट लिमिटेड से 22.31 करोड़ रुपए तथा मेसर्स केदारनाथ ट्रैक्सीन, ज्ञानदीप आयरन प्राइवेट लिमिटेड व मेसर्स विभ्रान स्क्रैप कंपनी से 33.35 करोड़ रुपए का गलत तरीके से आईटीसी लेने की बात सामने आई थी. पूर्व में 7 अगस्त 2025 को भी इनके ठिकानों पर कार्रवाई हुई थी, जिसके बाद अब नए सिरे से जांच का दायरा बढ़ाया गया है. The post 750 करोड़ के जीएसटी घोटाले में कारोबारी ज्ञानचंद जायसवाल के ठिकानों पर ईडी की दबिश, दस्तावेज जब्त appeared first on Naya Vichar.

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iPhone से Apple Pay पेमेंट कैसे करें? जानिए कार्ड जोड़ने से लेकर भुगतान तक का पूरा आसान तरीका

हिंदुस्तान में डिजिटल भुगतानों के बढ़ते दायरे के बीच ऐपल (Apple) ने आखिरकार हिंदुस्तानीय यूजर्स के लिए अपनी लोकप्रिय पेमेंट सेवा Apple Pay को आधिकारिक तौर पर पेश कर दिया है. 30 सितंबर 2026 से लाइव हुई इस सुविधा के बाद अब आईफोन यूजर्स को बार-बार अपना कार्ड निकालने या ऑनलाइन चेकआउट के दौरान कार्ड क्रेडेंशियल्स भरने की झंझट से मुक्ति मिल जाएगी. अगर आपके पास सपोर्टेड डिवाइस और बैंक कार्ड है, तो आप दुकानों पर केवल फोन टैप करके और ऑनलाइन ऐप्स पर सिंगल क्लिक में सुरक्षित पेमेंट कर सकते हैं. आइए जानते हैं कि हिंदुस्तान में Apple Pay की मदद से अपने iPhone से पेमेंट कैसे करें और इसके लिए क्या-क्या सेटिंग्स करनी होंगी. iPhone में Apple Pay सेटअप करने और कार्ड जोड़ने की प्रक्रिया अगर आप पहली बार अपने आईफोन में ऐपल पे शुरू कर रहे हैं, तो इसके लिए Apple Wallet ऐप का इस्तेमाल करना होगा. सेटअप करने का स्टेप-बाय-स्टेप तरीका बेहद आसान है: अपने आईफोन में इन-बिल्ट Wallet ऐप खोलें. सबसे ऊपर दाईं ओर दिख रहे ‘+’ (प्लस) आइकॉन पर टैप करें. ‘Debit or Credit Card’ का विकल्प चुनें और Continue पर क्लिक करें. अपने योग्य Axis Bank Visa या Mastercard क्रेडिट कार्ड को कैमरे से स्कैन करें या डिटेल्स मैनुअली दर्ज करें. बैंक की ओर से मिलने वाले ओटीपी (OTP) को दर्ज कर कार्ड वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूरी करें. नोट: आप चाहें तो सीधे Axis Bank के मोबाइल ऐप में जाकर भी ‘Add to Apple Wallet’ विकल्प पर टैप करके अपने कार्ड को सीधे लिंक कर सकते हैं. Apple Pay से Stores में iPhone द्वारा पेमेंट कैसे करें? स्टोर्स, रिटेल आउटलेट्स, रेस्टोरेंट्स या पेट्रोल पंप पर जहां भी NFC/कॉन्टैक्टलेस मशीन उपलब्ध हो, वहां अपने iPhone से भुगतान करने के लिए इन स्टेप्स का पालन करें: साइड बटन दबाएं: अपने आईफोन का साइड बटन (Home Button वाले फोन में होम बटन) दो बार (Double Click) लगातार दबाएं. ऑथेंटिकेट करें: स्क्रीन पर आपका कार्ड दिखते ही अपने Face ID, Touch ID या फोन का पासकोड दर्ज कर पहचान सत्यापित करें. टैप एंड पे करें: अपने आईफोन के ऊपरी हिस्से को मर्चेंट की कॉन्टैक्टलेस पेमेंट मशीन (NFC Reader) के पास कुछ सेकंड के लिए ले जाएं. पेमेंट पूरा: जैसे ही स्क्रीन पर ‘Done’ लिखा हुआ टिक-मार्क आएगा, आपका भुगतान सफलतापूर्वक पूरा हो जाएगा. Apps और Websites पर Apple Pay से ऑनलाइन भुगतान करने का तरीका Zomato, Blinkit, Croma, Tata 1mg, Ixigo और Reliance जैसे प्लेटफॉर्म्स पर ऑनलाइन शॉपिंग करते समय अब आपको कार्ड नंबर, एक्सपायरी डेट या CVV डालने की जरूरत नहीं पड़ेगी: खरीदारी करते समय चेकआउट पेज पर ‘Apple Pay’ का बटन चुनें. अपनी बिलिंग और डिलीवरी एड्रेस चेक करें. आईफोन के साइड बटन को डबल-क्लिक करें और Face ID या Touch ID से ऑथेंटिकेट करें. आपका ट्रांजैक्शन सेकंडों में पूरा हो जाएगा. Apple Pay सपोर्ट करने वाले iPhones और Apple Watches की लिस्ट हिंदुस्तान में Apple Pay का इस्तेमाल करने के लिए आपके पास सही हार्डवेयर और अपडेटेड सॉफ्टवेयर होना जरूरी है: iPhone Models: यह सुविधा कम से कम iPhone XR और उसके बाद के सभी नए मॉडल्स पर काम करेगी, जिसके लिए iOS 18 या उससे नया सॉफ्टवेयर वर्जन होना अनिवार्य है. Apple Watch Models: स्मार्टवॉच से पेमेंट करने के लिए Apple Watch Series 6 या उससे नया मॉडल होना चाहिए, जो watchOS 11 या नए अपडेट पर चल रहा हो और iPhone XR या नए मॉडल से पेयर हो. Apple Pay और iPhone पेमेंट से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) 1. iPhone से Apple Pay के जरिए पेमेंट करने के लिए कौन से कार्ड काम करेंगे? शुरुआती चरण में हिंदुस्तान में केवल Axis Bank द्वारा जारी किए गए Visa और Mastercard क्रेडिट कार्ड ही Apple Pay पर समर्थित हैं. जल्द ही अन्य बैंकों को जोड़ा जाएगा. 2. क्या iPhone से Apple Pay पेमेंट करते समय PIN या OTP डालना पड़ता है? नहीं, दुकानों पर टैप-टू-पे करते समय आपको कोई पिन या ओटीपी दर्ज नहीं करना पड़ता. भुगतान को आपके Face ID, Touch ID या डिवाइस पासकोड से सुरक्षित रूप से ऑथेंटिकेट किया जाता है. 3. क्या Apple Pay से पेमेंट करने पर कार्ड के रिवॉर्ड पॉइंट्स मिलेंगे? जहां, जब आप Apple Pay के माध्यम से अपने क्रेडिट कार्ड से पेमेंट करते हैं, तो आपको अपने कार्ड पर मिलने वाले सभी कैशबैक, रिवॉर्ड पॉइंट्स और ऑफर्स पहले की तरह ही मिलते रहते हैं. ये भी पढ़ें: Apple Pay India Launch: iPhone में कैसे करें इस्तेमाल, कौन से Bank और Cards हैं Supported? The post iPhone से Apple Pay पेमेंट कैसे करें? जानिए कार्ड जोड़ने से लेकर भुगतान तक का पूरा आसान तरीका appeared first on Naya Vichar.

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