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असम में बाढ़ से रेल यातायात प्रभावित: सिमालुगुड़ी रेलखंड पर जलभराव, राजधानी और अवध असम समेत 25 ट्रेनें डायवर्ट, 4 रद्द

असम में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और बाढ़ ने नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे (NFR) के तिनसुकिया मंडल में रेल परिचालन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है. सिमालुगुड़ी रेलखंड पर ट्रैक के आसपास भारी जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न होने के बाद रेलवे प्रशासन ने यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 25 प्रमुख ट्रेनों का रूट डायवर्ट (मार्ग परिवर्तित) कर दिया है, जबकि 4 पैसेंजर ट्रेनों को पूरी तरह रद्द कर दिया गया है. राजधानी और विवेक एक्सप्रेस समेत 25 ट्रेनें डायवर्ट रेलवे द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, पूर्वोत्तर हिंदुस्तान को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाली प्रमुख एक्सप्रेस और सुपरफास्ट ट्रेनों के मार्ग में बदलाव किया गया है: डायवर्ट की गई मुख्य ट्रेनें: वैकल्पिक मार्ग: प्रभावित ट्रेनों को नॉर्थ लखीमपुर, रंगापाड़ा नॉर्थ, रंगिया और न्यू बोंगाईगांव होकर चलाया जा रहा है, जिससे कई ट्रेनों के गंतव्य समय में बदलाव आया है. 4 पैसेंजर ट्रेनें पूरी तरह रद्द स्थानीय रेल सेवाएं प्रभावित होने से दैनिक यात्रियों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है. निम्नलिखित ट्रेनों को निर्धारित तिथियों के लिए रद्द किया गया है: 55914 तिनसुकिया – जोरहाट टाउन पैसेंजर 55913 जोरहाट टाउन – तिनसुकिया पैसेंजर 75602 तिनसुकिया – लुमडिंग डेमू (DEMU) 55909 सिमालुगुड़ी – डिब्रूगढ़ पैसेंजर रेलवे की अपील: NTES या हेल्पलाइन पर ट्रेन स्टेटस देखकर ही निकलें रेलवे अधिकारियों के अनुसार इंजीनियरिंग और ट्रैक मेंटेनेंस की टीमें लगातार जलभराव और पटरियों की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. पानी उतरते ही परिचालन सामान्य करने का काम युद्धस्तर पर जारी है. NFR प्रशासन की अपील: “यात्री अपनी यात्रा शुरू करने से पहले नेशनल ट्रेन इंक्वायरी सिस्टम (NTES) ऐप या रेलवे के आधिकारिक हेल्पलाइन नंबरों के माध्यम से अपनी ट्रेन की वर्तमान स्थिति अवश्य जांच लें. स्थिति के अनुसार आने वाले दिनों में भी समय-सारणी में फेरबदल संभव है.” The post असम में बाढ़ से रेल यातायात प्रभावित: सिमालुगुड़ी रेलखंड पर जलभराव, राजधानी और अवध असम समेत 25 ट्रेनें डायवर्ट, 4 रद्द appeared first on Naya Vichar.

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सूर्य ग्रहण 2026: भारत में सूतक नहीं, फिर भी इन जातकों को बरतनी होगी खास सतर्कता

Surya Grahan 2026: आने वाले बुधवार यानी 12 अगस्त 2026 को इस वर्ष का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है. ज्योतिषाचार्य डॉ. एन. के. बेरा के अनुसार यह पूर्ण सूर्य ग्रहण कर्क राशि और अश्लेषा नक्षत्र में होगा. हालांकि यह ग्रहण हिंदुस्तान में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा. इसके बावजूद ज्योतिषीय दृष्टि से यह ग्रहण महत्वपूर्ण माना जा रहा है. ग्रहण के प्रभाव से कुछ राशियों के जातकों को करियर, आर्थिक मामलों, स्वास्थ्य और यात्रा के दौरान विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी जाती है. मेष राशि: पारिवारिक मामलों में बरतें सतर्कता मेष राशि के लोगों के लिए यह समय पारिवारिक जिम्मेदारियों और घरेलू मामलों में सावधानी बरतने का संकेत देता है. परिवार के सदस्यों के साथ बातचीत में संयम रखें, क्योंकि छोटी-सी बात भी विवाद का कारण बन सकती है. संपत्ति या वाहन से जुड़े मामलों में जल्दबाजी से बचें और यात्रा के दौरान विशेष सावधानी रखें. कर्क राशि: मानसिक तनाव और निर्णय लेने में रखें सावधानी यह ग्रहण कर्क राशि में लग रहा है, इसलिए इसका सबसे अधिक प्रभाव इसी राशि के जातकों पर पड़ सकता है. इस दौरान मानसिक तनाव, भावनात्मक उतार-चढ़ाव और कार्यों में बाधाएं महसूस हो सकती हैं. नौकरी और व्यापार में जल्दबाजी में कोई बड़ा फैसला लेने से बचें. अनावश्यक यात्राओं को टालना बेहतर रहेगा और स्वास्थ्य को लेकर भी लापरवाही न करें. तुला राशि: करियर और कार्यक्षेत्र में रखें फोकस तुला राशि के जातकों को नौकरी और व्यवसाय में अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता होगी. कार्यस्थल पर दबाव बढ़ सकता है और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संवाद में सावधानी रखना जरूरी होगा. नए प्रोजेक्ट या बदलाव से जुड़े निर्णय सोच-समझकर लें. अनावश्यक विवादों से दूर रहना आपके लिए बेहतर रहेगा. मकर राशि: साझेदारी और रिश्तों में बढ़ सकती है चुनौती मकर राशि के जातकों को ग्रहण काल के प्रभाव से साझेदारी वाले कार्यों में सतर्क रहना चाहिए. जीवनसाथी या व्यावसायिक सहयोगियों के साथ मतभेद की स्थिति बन सकती है. किसी भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने या नया निवेश करने से पहले पूरी जांच-पड़ताल करना उचित रहेगा. धैर्य और संयम बनाए रखना लाभकारी होगा. इन बातों का रखें ध्यान चूंकि यह सूर्य ग्रहण हिंदुस्तान में दिखाई नहीं देगा, इसलिए धार्मिक दृष्टि से सूतक काल मान्य नहीं होगा और सामान्य पूजा-पाठ पर कोई रोक नहीं रहेगी. फिर भी ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार ग्रहण के दिन धैर्य, सकारात्मक सोच और संयम बनाए रखना लाभदायक माना जाता है. बड़े आर्थिक फैसले, अनावश्यक यात्राएं और आवेश में लिए गए निर्णय टालना बेहतर रहेगा. The post सूर्य ग्रहण 2026: हिंदुस्तान में सूतक नहीं, फिर भी इन जातकों को बरतनी होगी खास सतर्कता appeared first on Naya Vichar.

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JPSC Chairman Vacancy: JPSC अध्यक्ष नहीं रहने पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से पूछा- ‘बताएं कब तक होगी नियुक्ति?’

Jharkhand High Court, रांची : झारखंड हाईकोर्ट ने झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) में अध्यक्ष (Chairman) का पद खाली रहने पर कड़ा रुख अपनाया है. हाईकोर्ट ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि JPSC एक संवैधानिक संस्था है, इसलिए इसके अध्यक्ष का पद लंबे समय तक रिक्त नहीं रखा जा सकता. अदालत ने राज्य के महाधिवक्ता को निर्देश दिया है कि वे राज्य प्रशासन से वार्ता कर और निर्देश प्राप्त कर कोर्ट को बताएं कि आयोग में नए अध्यक्ष की नियुक्ति कब तक की जाएगी. वन विभाग में खाली पदों और ACF-रेंजर बहाली पर सुनवाई झारखंड के मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ (Bench) ने राज्य के वन विभाग में बड़े पैमाने पर अधिकारियों और कर्मचारियों के खाली पदों को लेकर स्वतः संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई की. मामले की अगली सुनवाई के लिए अदालत ने 20 अगस्त की तिथि निर्धारित की है. ये भी पढ़ें: JPSC Student Protest: प्रशासन से बात करेंगे 11 स्टूडेंट्स, बोले- बंद कमरे में नहीं, खुले आसमान में आइए JPSC के वकील ने कोर्ट में क्या रखी वजह सुनवाई के दौरान JPSC की ओर से पक्ष रखते हुए अधिवक्ता संजय पिपरावाल ने खंडपीठ को नियुक्ति प्रक्रिया में आ रही व्यावहारिक अड़चनों से अवगत कराया. उन्होंने सहायक वन संरक्षक (ACF) और वन क्षेत्र पदाधिकारी (रेंजर) की नियुक्ति परीक्षा ली जा चुकी है और इसका रिजल्ट भी प्रकाशित कर दिया गया है. इसके अलावा फिजिकल टेस्ट (शारीरिक दक्षता परीक्षा) की तिथि जारी हो चुकी है, लेकिन JPSC के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते के पद से इस्तीफा देने के बाद से अध्यक्ष का पद खाली पड़ा हुआ है. अधिवक्ता ने यह भी जानकारी दी कि परीक्षा सीआईडी (CID) जांच के दायरे में भी आ सकती है. आयोग में अध्यक्ष न होने के कारण आगे की नियुक्ति और साक्षात्कार/फिजिकल की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है. ये भी पढ़ें: भाई लोग! 16 अगस्त से पहले करा लें एलपीजी ई-केवाइसी, वर्ना कॉमर्शियल रेट पर मिलेगी घरेलू गैस The post JPSC Chairman Vacancy: JPSC अध्यक्ष नहीं रहने पर हाईकोर्ट सख्त, प्रशासन से पूछा- ‘बताएं कब तक होगी नियुक्ति?’ appeared first on Naya Vichar.

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JPSC Scam: स्टूडेंंट्स ने बनाई 11 लोगों की लिस्ट, प्रशासन बोला- ‘सिर्फ छात्रों से होगी बात’, राहुल गांधी ने किया फोन

JPSC JSSC Scam, रांची : जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं में गड़बड़ी के खिलाफ चल रहा छात्र आंदोलन गुरुवार को भी जारी रहा. दोपहर के बाद छात्रों ने प्रशासन से वातां के लिए 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की सूची जारी की. इसमें आठ छात्र, एक वकील और दो मीडिया प्रतिनिधि शामिल हैं. प्रतिनिधिमंडल की सूची एसडीओ को सौंपी गयी है. वहीं, इससे पहले प्रदर्शन स्थल पर दिनभर प्रशासन से वार्ता को लेकर चर्चा होती रही. देर शाम तक प्रशासन की ओर से छात्रों को वातों के लिए आमंत्रित नहीं किया गया था. प्रशासन ने छात्रों से वार्ता के लिए पांच लोगों ने नाम ही मांग थे. जिला प्रशासन ने इस मामले में कहा है कि बातचीत सिर्फ छात्रों से ही होगी. प्रतिनिधिमंडल में छात्र प्रतिनिधि के तौर पर पीयूष कुमार सिंह, रवींद्र पासवान, राजेश प्रसाद, नीतू कुजूर, कार्तिक सोरेन, रवींद्र कुमार रवि, अंकित कुमार और शालू सिंह शामिल किये गये हैं. वहीं, पत्रकार प्रतिनिधि के रूप में शंभूनाथ चौधरी और विकास वर्मा के साथ कानूनविद पूर्व महाधिवक्ता अजीत कुमार शामिल हैं. परीक्षा इन सबके बीच जेपीएससी-जेएसएससी गड़बड़ी पर सदन में राज्य प्रशासन के विभिन्न मंत्रियों ने कहा कि हेमंत सोरेन की प्रशासन का रुख गंभीर है. गड़बड़ी की शिकायत मिलते ही तत्काल कार्रवाई की गयी, केवल प्रशासन को दोष देने से समाधान नहीं निकलेगा. मंत्रीगण ने कहा कि प्रतियोगिता परीक्षा में चुने गये योग्य अभ्यर्थियों को कोई नुकसान नहीं होगा. इधर, झारखंड में चल रहे छात्र आंदोलन के बीच लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी का बड़ा बयान आया है. कांग्रेस के आला नेता राहुल गांधी ने वीडियो संदेश जारी कर कहा है कि झारखंड के छात्र अपने हक के लिए विरोध कर रहे हैं. कृपया उनका समर्थन करें. यह विरोध-प्रदर्शन देश भर में हो रहा है. गुरुवार को राहुल गांधी ने फोन पर आंदोलन कर रहे छात्रों में से पीयूष और रविंद्र से बात भी की. क्या कहते हैं हेमंत कैबिनेट में मंत्री सीएम ने मंत्रियों की समिति बनायी है सीएम हेमंत सोरेन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए मंत्रियों की समिति बनायी है. शिकायतें मिलते ही प्रशासन ने सीआईडी जांच, छापेमारी और गिरफ्तारियां शुरू कर दी थी भाजपा तो कार्रवाई शुरू होने के बाद केवल नेतृत्व करने सामने आयी है. सुदिव्य कुमार, नगर विकास मंत्री ये भी पढ़ें: बिना एफआईआर ट्रक जब्त करने पर हाईकोर्ट सख्त, तत्काल छोड़ने और 50 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश पेपर लीक पूरे देश के लिए गंभीर चुनौती पेपर लीक केवल झारखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश की गंभीर चुनौती बन चुका है. देशभर में फैला संगठित परीक्षा माफिया का नेटवर्क प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर हमला कर रहा है. प्रशासन को दोष देने से समाधान नहीं निकलेगा. चमरा लिंडा, कल्याण मंत्री बातचीत कर समाधान निकालेंगे प्रशासन युवाओं की समस्याओं को लेकर गभीर है. चार मंत्रियों की समिति बनायी जा चुकी है, जो छात्रों के प्रतिनिधिमंडल से बात कर समाधान निकालेगी. मामले में प्रशासन ने तत्काल एक्शन लेते हुए चेयरमैन का इस्तीफा लिया है और 12 लोग जेल में है. इरफान अंसारी, स्वास्थ्य मंत्री दोषी लोग छोड़े नहीं जायेंगे प्रशासन आदोलनरत छात्रों के साथ वार्ता कर समाधान निकालने का प्रयास कर रही है. ऐसा नही है कि सभी नियुक्तियां गलत हुई है. जिन अभ्यर्थियों ने योग्यता से सफलता पायी है, उनके हितों की रक्षा होगी. गड़बड़ी करने वालों को बख्शा नहीं जायेगा. दीपिका पांडेय सिंह, ग्रामीण विकास मंत्री छात्रों की प्रमुख मांगें टीडीपीएल की ओर से आयोजित जेपीएससी की सभी परीक्षाएं तत्काल रद्द हों, जिनमें 14वीं जेपीएससी, जेपीएससी बैकलॉग 2023 और एफआर ओ आदि परीक्षाएं शामिल हैं. जिन परीक्षाओं में अभय तिवारी सफल, नियुक्त या संलिप्त रहे हैं, उन सभी परीक्षाओं को रद्द किया जाए. जिनमें जेएसएससी सीजीएल और झारखंड पीजीटी भर्ती 2025 आदि शामिल हैं. पूरे मामले की सीबीआइ और इडी से जांच करायी जाये और दोषियों पर कड़ी कारवाई की जाये. परीक्षाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए कठोर कानून बने वार्ता को लेकर नहीं हुई कोई चर्चा देर शाम आंदोलन स्थल पर छात्रों से मिलने के लिए रांची सदर एसडीओ कुमार रजत और एडीएम लॉ एंड ऑर्डर धनंजय कुमार पहुंचे और प्रदर्शन पर बैठे छात्रों का हाल जाना. उन्होंने कहा कि अभी वार्ता को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई. अभी डेलिगेशन की फाइनल लिस्ट नहीं मिली है. दूसरी तरफ छात्रों का कहना है कि डेलिगेशन लिस्ट भेजी जा चुकी है. राहुल गांधी ने जाना छात्रों का हाल राहुल गांधी ने गुरुवार को आंदोलनस्थल पर छात्र पीयूष और रविंद्र से कांग्रेस नेता कुमार राजा के फोन पर बात की और उनकी मांगें जानीं. उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था बदलने के लिए एक्शन लेना चाहिए, चाहे कांग्रेस, केंद्र या झारखंड की प्रशासन हो. इसके अलावा कांग्रेस केंद्रीय नेतृत्व ने झारखंड के छात्र आंदोलन की जानकारी ली. ये भी पढ़ें: सरायकेला में 22 लाख के तीन इनामी नक्सली गिरफ्तार, पुलिस की बड़ी कामयाबी The post JPSC Scam: स्टूडेंंट्स ने बनाई 11 लोगों की लिस्ट, प्रशासन बोला- ‘सिर्फ छात्रों से होगी बात’, राहुल गांधी ने किया फोन appeared first on Naya Vichar.

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राजद नई टीम क्यों बना रही है? जानिए संगठन भंग करने के पीछे की वजह

RJD New Team: बिहार की नेतृत्व में बांकीपुर उपचुनाव का नतीजा सिर्फ एक सीट का फैसला नहीं था. इस चुनाव ने विपक्ष की नेतृत्व में भी नई बहस छेड़ दी है. भाजपा लगभग 30 साल बाद अपनी मजबूत सीट हार गई, लेकिन उससे ज्यादा चिंता अगर किसी दल को है तो वह है राष्ट्रीय जनता दल (RJD). वजह यह है कि विपक्ष का सबसे बड़ा चेहरा बनने की लड़ाई अब सिर्फ तेजस्वी यादव और NDA के बीच नहीं रह गई है. जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर अब सीधे उसी नेतृत्वक स्पेस में दस्तक दे चुके हैं, जिस पर अब तक RJD का दबदबा माना जाता था. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या इसी दबाव की वजह से तेजस्वी यादव ने पूरी पार्टी को नए सिरे से खड़ा करने का फैसला लिया है? बांकीपुर की हार ने क्यों बढ़ा दी RJD की टेंशन? बांकीपुर विधानसभा सीट 1995 से भाजपा का गढ़ रही थी. इसलिए भाजपा की हार बड़ी समाचार बनी. लेकिन इस चुनाव का दूसरा पहलू ज्यादा अहम है. जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर पहली बार विधानसभा पहुंच गए. इसका सीधा मतलब है कि अब उनके पास सिर्फ सड़क की नेतृत्व नहीं, बल्कि सदन का भी मंच होगा. दूसरी ओर RJD की उम्मीदवार रेखा गुप्ता तीसरे नंबर पर पहुंच गईं और जमानत तक नहीं बचा सकीं. यही वह संकेत है जिसने RJD की चिंता बढ़ा दी है. क्योंकि बिहार में अब तक खुद को सबसे मजबूत विपक्ष मानने वाली पार्टी पहली बार विपक्ष के भीतर ही चुनौती महसूस कर रही है. बांकीपुर में चुनाव प्रचार के दौरान तेजस्वी यादव, आरजेडी प्रत्याशी रेखा गुप्ता आखिर क्यों कहा जा रहा है कि विपक्ष का समीकरण बदल रहा है? 2025 विधानसभा चुनाव में जन सुराज का प्रदर्शन बेहद खराब रहा था. पार्टी ने 238 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, लेकिन एक भी सीट नहीं जीत सकी. अधिकांश उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई. इसके बावजूद पार्टी के भीतर भी सब कुछ ठीक नहीं हाल के दिनों में RJD के भीतर कई घटनाओं ने संगठन पर सवाल खड़े किए हैं. नेताओं के बीच बयानबाजी सामने आई. भाई वीरेंद्र और शक्ति सिंह के बीच सार्वजनिक तकरार चर्चा में रही. राज्यसभा चुनाव के दौरान पार्टी के एक विधायक के NDA के साथ जाने की चर्चा भी हुई. ऐसे घटनाक्रमों ने यह संकेत दिया कि संगठन के भीतर असंतोष मौजूद है. संभव है कि नई टीम के जरिए तेजस्वी यादव इन संदेशों को भी बदलना चाहते हों. क्या सिर्फ वोट शेयर के भरोसे चुनाव जीता जा सकता है? RJD लंबे समय से इस बात पर भरोसा करती रही है कि उसका सामाजिक समीकरण और वोट शेयर सबसे मजबूत है. लेकिन बदलती नेतृत्व में सिर्फ जातीय समीकरण काफी नहीं माने जा रहे. युवा मतदाता लगातार सक्रिय नेतृत्व, सड़क पर संघर्ष और लगातार मौजूदगी भी देख रहा है. यही वह क्षेत्र है जहां प्रशांत किशोर अपनी नेतृत्वक पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं. आगे की लड़ाई किसकी होगी? अगले विधानसभा चुनाव में अभी समय है. इसलिए किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी. RJD आज भी बिहार का सबसे बड़ा विपक्षी दल है. उसके पास सबसे बड़ा संगठन, सबसे ज्यादा विधायक और मजबूत सामाजिक आधार है. लेकिन बांकीपुर उपचुनाव ने यह जरूर बता दिया कि विपक्ष के भीतर अब एक नई प्रतिस्पर्धा शुरू हो चुकी है. अगर तेजस्वी यादव अपनी नई टीम के जरिए संगठन को फिर से सक्रिय नहीं कर पाए, जनता के बीच लगातार मौजूदगी नहीं बनाई और आंदोलनों की नेतृत्व में वापसी नहीं की, तो जन सुराज विपक्ष की नेतृत्व में अपनी जगह और मजबूत कर सकती है. यही वजह है कि नेतृत्वक गलियारों में RJD के संगठनात्मक पुनर्गठन को सिर्फ एक प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि जन सुराज की चुनौती का नेतृत्वक जवाब माना जा रहा है. Also Read: बिहार आरजेडी की सभी जिला और प्रखंड कमेटियां भंग, करारी हार के बाद एक्शन में तेजस्वी यादव The post राजद नई टीम क्यों बना रही है? जानिए संगठन भंग करने के पीछे की वजह appeared first on Naya Vichar.

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बोफोर्स मामला खत्म : सुप्रीम कोर्ट ने हिंदुजा बंधुओं के खिलाफ अपील ठुकराई

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (6 अगस्त) को बोफोर्स मामले में फैसला सुनाते हुए उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें 2005 के दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी. दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने फैसले में हिंदुजा बंधुओं और स्वीडन की हथियार बनाने वाली कंपनी एबी बोफोर्स के खिलाफ चल रही सभी आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी थी. अब सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद इस मामले को फिर से खोलने की संभावना लगभग खत्म हो गई है. जस्टिस जेबी पारदीवाला और के. विनोद चंद्रन की पीठ ने अधिवक्ता अजय के. अग्रवाल की ओर से दायर अपील पर सुनवाई से इनकार कर दिया. इसके साथ ही दशकों पुराने बोफोर्स मामले को फिर से शुरू करने की एक और कोशिश भी खत्म हो गई. मामले को अब और लंबा नहीं खींचा जा सकता : सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के दौरान वकील अजय के. अग्रवाल ने अदालत से चार सप्ताह का समय मांगा, ताकि याचिका से श्रीचंद पी. हिंदुजा और गोपीचंद पी. हिंदुजा के नाम हटाए जा सकें, क्योंकि दोनों का निधन हो चुका है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अतिरिक्त समय देने से इनकार कर दिया और साफ कहा कि इस मामले को अब और लंबा नहीं खींचा जा सकता. ये भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने के लिए प्रशासन ने कानून में संसोधन किया, लेकिन मनी बिल पर क्यों हो रहा विवाद सुनवाई के दौरान जस्टिस जेबी पारदीवाला ने सवाल उठाया कि जब 2005 में दिल्ली हाई कोर्ट इस मामले की कार्यवाही पहले ही रद्द कर चुका है. उस फैसले को चुनौती देने वाली सीबीआई की अपील भी खारिज हो चुकी है, तो अब इस मामले में फैसला करने के लिए आखिर बचा ही क्या है? अदालत ने इस टिप्पणी के साथ याचिका पर आगे सुनवाई की जरूरत नहीं मानी. बोफोर्स मामला क्या है? बोफोर्स मामला साल 1986 में शुरू हुआ, जब हिंदुस्तान प्रशासन ने स्वीडन की कंपनी एबी बोफोर्स से करीब 1,437 करोड़ रुपये में 400 हॉवित्जर तोपें खरीदने का समझौता किया. इसके एक साल बाद 1987 में स्वीडिश रेडियो ने दावा किया कि इस सौदे में कुछ हिंदुस्तानीय नेताओं और रक्षा अधिकारियों को रिश्वत (कमीशन) दी गई थी. इस खुलासे के बाद देश में बड़ा नेतृत्वक बवाल मच गया और यह मामला हिंदुस्तान के सबसे चर्चित भ्रष्टाचार मामलों में शामिल हो गया. The post बोफोर्स मामला खत्म : सुप्रीम कोर्ट ने हिंदुजा बंधुओं के खिलाफ अपील ठुकराई appeared first on Naya Vichar.

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झारखंड छात्र आंदोलन पर कंगना रनौत ने राहुल गांधी को घेरा, बोलीं- ‘जब बच्चों की हालत इतनी खराब है तो मिलने क्यों नहीं जा रहे?’

Jharkhand Student Protest: झारखंड में जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है. इसी बीच भाजपा सांसद और एक्ट्रेस कंगना रनौत ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा है. कंगना ने सवाल उठाया कि जब झारखंड के छात्र लंबे समय से न्याय की मांग कर रहे हैं, तब राहुल गांधी उनके बीच क्यों नहीं पहुंच रहे हैं. राहुल गांधी पर कंगना का हमला समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में कंगना रनौत ने कांग्रेस पर दोहरे रवैये का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, हमारी जेनरेशन Z, हमारे शिशु कई तरह की परेशानियां झेल रहे हैं. यह स्थिति आज की नहीं बल्कि कई दशकों से चली आ रही है. कांग्रेस पार्टी ने दिल्ली में इस मुद्दे को लेकर खूब हंगामा किया. उन्होंने संसद में भी बड़ा विरोध प्रदर्शन किया. लेकिन आज जब झारखंड के बच्चों की हालत इतनी खराब है, तब राहुल गांधी उनसे मिलने तक नहीं जा रहे हैं. लेकिन जब लोगों को भड़काना होता है, जब बच्चों को इस तरह उकसाना होता है कि देश की सुरक्षा तक खतरे में पड़ जाए, तब वे जरूर सामने आ जाते हैं. आखिर छात्र क्यों कर रहे हैं प्रदर्शन? झारखंड में छात्र 29 जुलाई से रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हुए हैं. प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि जेपीएससी और जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं. छात्रों का कहना है कि राज्य की जेएमएम प्रशासन इस मामले को केवल सीआईडी जांच के जरिए दबाने या व्हाइटवॉश करने की कोशिश कर रही है. प्रदर्शनकारी पहले ही इस पूरे मामले की जांच सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय से कराने की मांग कर चुके हैं. प्रधानमंत्री मोदी का वीडियो हटने पर भी बोलीं कंगना झारखंड छात्र आंदोलन पर बयान देने के अलावा कंगना रनौत ने मेटा के सीईओ मार्क ज़ुकरबर्ग द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो अस्थायी रूप से हटाए जाने की घटना पर मांगी गई माफी का भी स्वागत किया. इस पर कंगना ने कहा, हमें खुशी है कि इस गलती को स्वीकार किया गया है. हमें उम्मीद है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा नहीं होंगी, क्योंकि देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बढ़ते खतरे को लेकर गंभीर चिंता है. ये भी पढ़ें: ऋतिक रोशन के एक कमेंट के बाद फिर गरमाया पुराना विवाद, भड़कीं कंगना रनौत, बोलीं- ‘आग में घी डालना बंद कीजिए’ The post झारखंड छात्र आंदोलन पर कंगना रनौत ने राहुल गांधी को घेरा, बोलीं- ‘जब बच्चों की हालत इतनी खराब है तो मिलने क्यों नहीं जा रहे?’ appeared first on Naya Vichar.

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शुभेंदु सरकार ने पश्चिम बंगाल आवास योजना का नाम बदला, 10 लाख से अधिक लाभुकों को मिली दूसरी किस्त

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बृहस्पतिवार को घोषणा की कि राज्य मंत्रिमंडल ने आवास योजना ‘बांग्लार बाड़ी’ का नाम बदलकर ‘पश्चिम बंग आवास’ योजना कर दिया है. बृहस्पतिवार को 10 लाख से अधिक लाभार्थियों को वित्तीय सहायता की अंतिम किस्त जारी कर दी गयी. राज्य सचिवालय नबान्न में योजना के तहत राशि की दूसरी और अंतिम किस्त जारी करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि 10,20,379 लाभार्थियों को 60-60 हजार रुपए मिले हैं. इस योजना के तहत कुल 6,000 करोड़ रुपए से अधिक की राशि जारी की गयी है. आवास योजना के 1 लाख 20 हजार रुपए में वर्तमान समय में पूरा घर बनाना कठिन है. इसलिए लाभार्थियों को भी थोड़ा खर्च उठाना होगा. मकान बनकर तैयार होने पर ‘स्वच्छ हिंदुस्तान मिशन’ के तहत शौचालय निर्माण के लिए 12,000 रुपए की अतिरिक्त प्रशासनी सहायता मिलेगी. -शुभेंदु अधिकारी, मुख्यमंत्री, पश्चिम बंगाल दुर्गा पूजा के बाद नये लाभार्थियों को मिलेगी पहली किस्त मुख्यमंत्री ने कहा कि अक्टूबर में दुर्गा पूजा उत्सव के बाद कई लाख नये लाभार्थियों को योजना की पहली किस्त जारी की जायेगी. योजना के तहत लाभार्थियों को घर बनाने के लिए दो किस्तों में कुल 1.20 लाख रुपए की वित्तीय सहायता दी जाती है. उन्होंने कहा कि योजना के तहत करीब 20 लाख नये आवेदकों को पहले ही शामिल किया जा चुका है. आगे भी और नाम जोड़े जायेंगे. ये भी पढ़ें: पश्चिम बंग आवास योजना : 10 लाख परिवारों के खाते में आज आयेगी दूसरी किस्त, शुभेंदु अधिकारी का ऐलान राज्य के नाम से नहीं हटेगा ‘पश्चिम’ शब्द शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि पश्चिम बंग नाम के साथ एक बड़ा ऐतिहासिक महत्व जुड़ा है. वर्ष 1947 में देश के विभाजन के समय इसे पूर्वी पाकिस्तान का हिस्सा बनाने की साजिश रची गयी थी, जिसे श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नेतृत्व में विफल कर दिया गया. मुख्यमंत्री ने कहा कि मंत्रिमंडल ने यह भी फैसला किया है कि राज्य के नाम से ‘पश्चिम’ शब्द नहीं हटाया जायेगा. उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को इसके पीछे के ऐतिहासिक कारणों की जानकारी होनी चाहिए. अवैध लाभार्थियों से पैसा वसूलने की प्रक्रिया शुरू : दिलीप घोष बंगाल के पंचायत मंत्री दिलीप घोष ने कहा है कि जिन लोगों ने अवैध रूप से आवास योजना के पैसा हासिल किये हैं, उनसे राशि वसूलने की प्रक्रिया प्रशासन ने शुरू कर दी है. ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई भी की जायेगी. उन्होंने कहा कि पिछली प्रशासन के कार्यकाल में 30 लाख लोगों के नाम पंजीकृत हुए थे. सर्वे में पता चला कि पिछली प्रशासन ने 30 लाख में से 12 लाख लोगों को ही दोनों किस्तों का भुगतान किया. ये भी पढ़ें: बांग्ला आवास योजना की जांच के लिए एसएटी का होगा गठन 12500 लाभार्थियों से होगी वसूली दिलीप घोष ने बताया कि 12,500 ऐसे लाभार्थियों की पहचान की गयी है, जिन्होंने आंशिक या पूर्ण रूप से आवास योजना का पैसा प्राप्त कर लिया है. वे नियमों के तहत इसके हकदार नहीं थे. उन्हें नोटिस भेजकर प्रशासनी राशि वापस करने को कहा गया है. 1,000 लोगों से पैसा वापस लेने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. इतना ही नहीं, स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से बाहर किये गये 57 हजार लोग भी आवास योजना का पैसा ले चुके हैं, जो इस योजना के पात्र नहीं हैं. पिछली प्रशासन पर बरसे मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि पिछली प्रशासन के दौरान राज्य में आवास योजना के नाम पर भ्रष्टाचार हुआ. मुख्यमंत्री ने बताया कि भाजपा के केंद्र में सत्ता में आने से पहले राज्य को आवास योजना के तहत 4,664 करोड़ रुपए मिले थे. वर्ष 2014 से 2022 के बीच केंद्र प्रशासन ने 40 लाख घर बनाने के लिए 30,000 करोड़ रुपए दिये. फिर भी पिछली प्रशासन ने दुष्प्रचार किया कि केंद्र प्रशासन ने राज्य प्रशासन के पैसे रोक रखे हैं. The post शुभेंदु प्रशासन ने पश्चिम बंगाल आवास योजना का नाम बदला, 10 लाख से अधिक लाभुकों को मिली दूसरी किस्त appeared first on Naya Vichar.

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सुबह नंगे पैर घास पर चलने से क्यों मिलते हैं इतने फायदे? जानिए इसके पीछे की वजह

Walking Barefoot on Grass: सुबह की ठंडी हवा और हरी घास पर टहलने का अपना अलग ही मजा होता है। अगर आप रोज कुछ मिनट नंगे पैर घास पर चलते हैं, तो यह छोटी-सी आदत आपकी सेहत के लिए फायदेमंद हो सकती है। कई लोग मानते हैं कि इससे शरीर को आराम मिलता है, मन शांत रहता है और दिनभर ताजगी महसूस होती है। आयुर्वेद में भी इसे अच्छी आदत माना गया है। हालांकि, इसके कुछ फायदों पर अभी और रिसर्च की जरूरत है। आइए जानते हैं कि सुबह नंगे पैर घास पर चलने से शरीर और मन को क्या-क्या लाभ मिल सकते हैं. मन को मिलता है सुकून सुबह कुछ मिनट नंगे पैर घास पर चलने से मन को सुकून मिल सकता है. ताजी हवा और हरियाली के बीच समय बिताने से तनाव कम महसूस हो सकता है. इससे दिन की शुरुआत अच्छी होती है और पूरे दिन खुद को तरोताजा महसूस करने में मदद मिल सकती है. पैरों की मांसपेशियां होती हैं सक्रिय नंगे पैर घास पर चलने से पैरों की मांसपेशियां ज्यादा काम करती हैं. इससे पैर मजबूत बने रहने में मदद मिल सकती है। साथ ही, पैरों का संतुलन बेहतर हो सकता है और चलने-फिरने में भी आसानी महसूस होती है. यह भी पढ़ें: क्या आपका शरीर भी दे रहा है वॉर्निंग? इन 6 संकेतों को समझना है बेहद जरूरी हल्की एक्सरसाइज का फायदा सुबह नंगे पैर घास पर चलने से शरीर धीरे-धीरे एक्टिव होने लगता है. इससे दिनभर खुद को तरोताजा और ऊर्जावान महसूस करने में मदद मिल सकती है. PC: AI Image आंखों को मिलती है हरियाली की राहत अगर आप दिनभर मोबाइल या लैपटॉप स्क्रीन पर काम करते हैं, तो सुबह कुछ देर हरी घास के बीच टहलना आंखों को आराम देने में मदद कर सकता है। हालांकि, इससे आंखों की रोशनी बढ़ने के पक्के वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं. तनाव कम करने में मिल सकती है मदद हरी घास, ताजी हवा और शांत वातावरण का मेल तनाव को कम करने में सहायक हो सकता है. कई लोगों का अनुभव है कि नियमित रूप से सुबह टहलने से उनका मूड बेहतर रहता है और मन हल्का महसूस होता है. क्या वाकई नंगे पैर चलना हर किसी के लिए सही है? अगर आपको डायबिटीज, पैरों में घाव, इन्फेक्शन या त्वचा से जुड़ी कोई समस्या है, तो नंगे पैर चलने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर रहेगा. साथ ही यह भी जरूरी है कि घास साफ और सुरक्षित हो, ताकि कांच, पत्थर या किसी नुकीली चीज से चोट का खतरा न रहे. यह भी पढ़ें: क्या सिर्फ 1 शकरकंद से मिल सकता है विटामिन A का 400% तक? जानिए रिसर्च क्या कहती है The post सुबह नंगे पैर घास पर चलने से क्यों मिलते हैं इतने फायदे? जानिए इसके पीछे की वजह appeared first on Naya Vichar.

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अमिताभ-शाहरुख के साथ 40 साल तक किया डांस, आज लोकल ट्रेन में काम ढूंढती हैं रुबीना खान…

दोपहर का वक्त था. फिल्म सिटी के भव्य सेट पर ‘खलनायक’ के सुपरहिट गाने ‘चोली के पीछे क्या है..’ की शूटिंग चल रही थी. कैमरा रुका, डायरेक्टर ने “कट” कहा और बड़े सितारे अपनी-अपनी वैनिटी वैन में लौट गए. लेकिन एक चेहरा फिर भीड़ में खो गया. वह थीं रुबीना खान. वही रुबीना, जिन्होंने सितारों के साथ स्क्रीन शेयर की, मगर खुद हमेशा उन बैकग्राउंड डांसर्स में गिनी गईं, जिनकी मेहनत तो हर फ्रेम में दिखती है, लेकिन नाम फिल्म के आखिरी क्रेडिट्स में भी शायद ही कभी नजर आते हैं. चार दशक… यानी पूरे 40 साल बाद एक वीडियो आता है. उसमें अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, श्रीदेवी, माधुरी दीक्षित, ऋषि कपूर, करीना कपूर जैसे कई बड़े सितारों संग ताल से ताल मिलाती नजर आती हैं. इसी के बाद रूबीना, भीड़ से निकलकर रूबीना खान हो जाती हैं. 17 जून 2026 से पहले रूबीना को शायद ही कोई ठीक से पहचान भी पाता. और पहचानता भी कैसे, तालियां तो हमेशा सितारों के हिस्से आईं, रूबीना भीड़ का हिस्सा रहीं. 17 जून 2026 को कुछ नया हुआ, आपने देखा? 2 करोड़ से ज्यादा व्यूज आ चुके हैं किसी ने रूबीना से एक दिन कहा कि तुम डांस तो अच्छा करती ही हो, अपना वीडियो इंस्टा पर क्यों नहीं डालती. हमने उनकी प्रोफाइल देखी. कुछ 20 मिनट तक स्क्रॉल करते रहे. हम 22 जून 2022 तक पहुंचे. हमने देखा कि रूबीना ने यहां भी कम स्ट्रगल नहीं किया. वो हर तरह के वीडियोज डालती रहीं, लेकिन किसी पर 200, किसी पर 250 व्यूज आते रहे. फिर आया 17 जून 2026… रूबीना ने नए वीडियो बनाने की बजाए अपने वो वीडियोज ढूढ़े जिनमें कहीं दिव्या हिंदुस्तानी तो कभी रवीना टंडन के पीछे वो डांस कर रही थीं. उन्होंने अपने चेहरे पर गोला बनाया और पोस्ट कर दिया. लोगों ने लिखा, “अरे, ये तो हर दौर के गानों में दिखती थीं.” लेकिन वीडियो के पीछे छिपी उनकी असली जिंदगी ने व्यूवर्स को सोचने पर मजबूर कर दिया. View on Instagram अब रूबीना के पास इंटरव्यूज देने के लिए कॉल आने लगीं. रूबीना शायद ’एंफ्लूएंसर’ हो गई हैं. जब हम यह समाचार लिख रहे हैं तो उनके 13.9 हजार फॉलोवर भी हो चुके हैं. लेकिन 17 जून से पहले के 40 साल कैसे थे… बॉलीवुड को 40 साल देने वाली रुबीना आज जब मुंबई की लोकल ट्रेन से निकलती है तो मन में सिर्फ एक सवाल कि “शायद आज काम मिल जाए.” महीने में मुश्किल से एक या दो प्रोजेक्ट मिलते हैं. पूरी कमाई 20 से 25 हजार रुपये के बीच सिमट जाती है. वह कहती हैं, “मुंबई जैसे शहर में 20 हजार रुपये में घर कैसे चले? किराया, राशन, बिजली, दवाई… सबकुछ इसी में करना पड़ता है. मैं सिंगल मदर हूं. बेटी की पूरी जिम्मेदारी मेरे ऊपर है. इसलिए चाहे कितनी भी थक जाऊं, अगले दिन फिर लोकल ट्रेन पकड़कर निकलना ही पड़ता है.” बताते चलें वह मुंबई के नालासोपारा में किराए के 1RK घर में रहती हैं, जिसका किराया ही करीब 5 हजार रुपये है. सीमित काम और कम आमदनी के कारण रोजमर्रा के खर्चों का प्रबंधन भी उनके लिए आसान नहीं है. चार दशक तक इंडस्ट्री का हिस्सा रहने के बावजूद उनकी जिंदगी आज भी संघर्ष के साथ आगे बढ़ रही है. वो दिन, जब नाश्ता करने के पैसे नहीं थे… रुबीना की आवाज उस वक्त भर आती है, जब वह 2020 से 2023 को याद करती हैं. बताने की जरूरत नहीं है ये वही समय था जब कोविड के चलते फिल्में कम बनीं. वह कहती हैं कि चार साल तक काम लगभग पूरी तरह बंद हो गया था. जो थोड़ी-बहुत बचत थी, वह धीरे-धीरे खत्म हो गई. हालत ऐसी हो गई कि कई बार घर में राशन खरीदने तक के पैसे नहीं बचे. “ऐसे दिन भी आए, जब समझ नहीं आता था कि कल खाना कैसे बनेगा. कई रातें इसी चिंता में बीतीं. उस वक्त डांसर्स यूनियन ने कभी दो हजार रुपये दिए, तो कभी राशन का बैग पहुंचाया. अगर यूनियन साथ नहीं खड़ी होती, तो शायद हालात और भी खराब हो जाते.” यह कहते हुए रुबीना मानो उन दिनों में लौट जाती हैं, जब चमकती फिल्मी दुनिया से जुड़े होने के बावजूद उनके अपने घर का चूल्हा जलाना मुश्किल हो गया था. ‘मेहनत हमारी, पैसा कोई और ले जाता था’ संघर्ष सिर्फ काम मिलने का नहीं था. रुबीना बताती हैं कि शुरुआती दिनों में कई कॉन्ट्रैक्टर डांसर्स की मेहनत की कमाई का हिस्सा खुद रख लेते थे. कई बार पूरा मेहनताना भी नहीं मिलता था. “गुस्सा बहुत आता था, लेकिन बोल नहीं सकते थे. डर रहता था कि अगर आवाज उठाई तो अगली बार काम ही नहीं मिलेगा. इसलिए चुप रहकर सब सहना पड़ता था.” ‘पहले अपनापन था, अब सब बदल गया’ उनके मुताबिक, पुराने दौर के कई बड़े कलाकार बैकग्राउंड डांसर्स को भी सम्मान देते थे. उनसे बात करते थे, हालचाल पूछते थे और उन्हें अपनी टीम का हिस्सा मानते थे. हालांकि उनका अनुभव हर किसी के साथ ऐसा नहीं रहा. उन्होंने बताया कि दिव्या हिंदुस्तानी और ममता कुलकर्णी ने कभी उनसे ढंग से बात नहीं की. वहीं आज की पीढ़ी को लेकर वह कहती हैं कि इंडस्ट्री पहले जैसी नहीं रही. “अब सब अपने-अपने काम में व्यस्त रहते हैं. पहले जैसा अपनापन और सम्मान बहुत कम महसूस होता है.” हाल ही में उन्होंने शाहरुख खान की बेटी सुहाना खान के साथ एक विज्ञापन में काम किया और फिल्म आर्चीज में भी नजर आईं. पर्दे पर मुस्कान, असल जिंदगी में संघर्ष आज भी जब टीवी पर कोई पुराना सुपरहिट गाना चलता है, तो कहीं न कहीं उसी फ्रेम में रुबीना खान मुस्कुराती हुई नजर आ जाती हैं. दर्शक गाना देखते हैं, सितारों की तारीफ करते हैं, लेकिन शायद ही कोई सोचता होगा कि उसी गाने में नजर आने वाली यह कलाकार अगली सुबह लोकल ट्रेन में सीट मिलने की उम्मीद लेकर सफर करती है. कैमरे के सामने जिन कदमों ने करोड़ों लोगों का मनोरंजन किया, वही कदम आज भी स्टूडियो के बाहर काम का इंतजार करते हैं. जिन हाथों ने बॉलीवुड के सबसे बड़े गानों को यादगार बनाया, वही हाथ महीने के आखिर में घर का बजट जोड़ते

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