Hot News

मुख्य खबर

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

Asian Games 2026 Day 2 Live: मेडल की संख्या बढ़ाने उतरेगा भारत, दूसरे दिन इन खेलों पर रहेगी नजरें

एशियन गेम्स 2026 के दूसरे दिन का स्वागत है. हिंदुस्तान मेडल की संख्या बढ़ाने के इरादे से उतरेगा. 21 सितंबर को एशियन गेम्स में दूसरे दिन के स्पोर्ट्सों से जुड़े अपडेट्स के लिए इस पेज को अपडेट करते रहिए. The post Asian Games 2026 Day 2 Live: मेडल की संख्या बढ़ाने उतरेगा हिंदुस्तान, दूसरे दिन इन स्पोर्ट्सों पर रहेगी नजरें appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

Karma Puja Rules: करमा पूजा के दिन भूलकर भी न करें ये गलतियां, जानें क्या करें और क्या नहीं

Karma Puja Rules: करमा पूजा आदिवासी समुदाय का प्रमुख लोकपर्व है. इस साल यह पर्व 22 सितंबर, मंगलवार को है. परंपरानुसार, इस दिन करमा देवता की पूजा की जाती है. साथ ही, घर-परिवार में सुख-समृद्धि और अच्छी फसल की कामना की जाती है. परंपरानुसार, करमा पूजा के दिन जहां कुछ कार्यों को करना शुभ माना गया है वहीं, इस दिन कुछ कामों को करने से बचना चाहिए. आइए, जानते हैं कि करमा पूजा के दिन क्या करें और क्या नहीं. करमा पूजा के दिन क्या करें घर की साफ-सफाई और लेपन-धार्मिक परंपरा के अनुसार करमा पूजा के दिन घर, आंगन और पूजा स्थान की अच्छी तरह साफ-सफाई करें. साथ ही पूजा वाले स्थान को पवित्र करने के लिए गोबर या मिट्टी से लीपें या गंगाजल शुद्ध करें. संभव हो तो व्रत रखें- परंपरा के अनुसार, करमा पूजा के दिन बहन अपने भाई की लंबी आयु, अच्छी सेहत और सुख-समृद्धि के लिए निर्जल (बिना पानी के) व्रत रखती हैं. ऐसे में अगर संभव हो, तो निर्जल व्रत रखें. डाल की स्थापना करें- करमा पूजा के दिन घर के आंगन में करम पेड़ की एक डाली लगाना शुभ माना जाता है. सुनें करमा-धरमा की कथा- करमा पूजा पर शाम के वक्त करमा देवता की पूजा करें. इसके बाद करमा-धरमा की कथा पढें या सुनें. परंपरिक नृत्य के साथ गीत- करमा पूजा के दिन नृत्य करने और गीत गाने की परंपरा है. इसलिए इस दिन ढोल-नगाड़े के साथ पारंपरिक नृत्य करें और गीत गाएं. देवी-देवता को चढ़ाएं नया अन्न- करमा पूजा के अगले दिन देवी-देवताओं को नया अन्न (नवान्न) चढ़ाएं. इसके बाद प्रसाद लें. ये भी पढ़ें: Karma Puja 2026: इस साल किस दिन होगी करमा पूजा, जानें करम देवता की पूजा और व्रत विधि करमा पूजा पर क्या न करें? अपवित्रता (अशुद्धि) न रखें- मान्यतानुसार करमा पूजा के दिन मन, वचन और शरीर से पवित्र रहना चाहिए. गंदे कपड़े पहनकर या अशुद्ध अवस्था में पूजा करने से बचें. तामसिक चीजों का सेवन ना करें- करमा पूजा के दिन व्रत के दौरान मांस, मछली, लहसुन-प्याज और शराब इत्यादि तामसिक चीजों का सेवन न करें. डाल का अपमान न करें- करमा पूजा के दिन भूल से भी ‘करम डाल’ का अपमान न करें. इसके अलावा करम पेड़ की डालियों न तोड़ें और न ही उसे अपमानजनक तरीके जमीन पर रखें. गुस्सा करने और अपशब्द बोलने से बचें- करमा पूजा के दिन किसी को भी अपशब्द न कहें. साथ ही इस दिन किसी पर गुस्सा न करें. व्रत-पूजा के दौरान सोने से बचें- करमा व्रत पूजा नियम के अनुसार, व्रत करने वाली स्त्रीएं कथा और पूजा खत्म होने तक जागती हैं. ऐसे में इस दौरान सोने से बचना चाहिए. करमा पूजा के दिन क्या करें और क्या ना करें को दर्शाती इंफोग्राफिक्स (Image- AI Generated) ये भी पढ़ें: Pitru Paksha 2026: 26 सितंबर से शुरू हो रहा पितृ पक्ष, नोट करें पूर्णिमा से सर्वपितृ अमावस्या की सही तिथियां The post Karma Puja Rules: करमा पूजा के दिन भूलकर भी न करें ये गलतियां, जानें क्या करें और क्या नहीं appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

Explainer: भारत से बांग्लादेश जा रही हिलसा मछली, क्यों बदली दशकों पुरानी ट्रेड की दिशा?

Bangladesh Hilsa Import: बांग्लादेश की हिलसा मछली की मांग हिंदुस्तान में बहुत अधिक है. खासकर दुर्गा पूजा के समय मछली की मांग और बढ़ जाती है. लेकिन इस बार मामला कुछ उल्टा पड़ गया. बांग्लादेश से हिंदुस्तान आने वाली हिलसा अब हिंदुस्तान से बांग्लादेश भेजी जा रही है. यह सुनकर आपको शायद यकीन न हो, लेकिन ICAR-CIFRIके मुताबिक, पिछले दो महीनों में हिंदुस्तान ने बांग्लादेश को करीब 500 टन हिलसा का निर्यात किया है. तो आइए जानते हैं, आखिर ऐसा क्या हो गया कि हिलसा मछली के बड़े निर्यातक देश बांग्लादेश को अब हिंदुस्तान से हिलसा क्यों मंगानी पड़ रही है. ICAR के अनुसार, हिंदुस्तान ने पिछले दो महीनों में बांग्लादेश को लगभग 500 टन हिलसा मछली का निर्यात किया है. खेप का एक बड़ा हिस्सा गुजरात, विशेषकर भरूच क्षेत्र से आया है, जबकि कुछ आपूर्ति पश्चिम बंगाल के हावड़ा थोक मछली बाजार के माध्यम से भी हुई है. चटगांव और सिलहट में अधिक अंडे वाली हिलसा मछली की काफी मांग है, जबकि अंडों को फिर से निर्यात के लिए प्रसंस्कृत भी किया जा रहा है. कुछ मछलियों का उपयोग सूखे और नमकीन उत्पादों के लिए भी किया जा रहा है. बांग्लादेश हिंदुस्तान से क्यों खरीद रहा है हिलसा मछली? बांग्लादेश में पद्मा और मेघना की हिलसा को सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है, लेकिन घरेलू उत्पादन में कमी और बढ़ती कीमतों के बीच गुजरात की हिलसा वहां एक सस्ता विकल्प बन रही है. India Today ने बांग्लादेशी अकादमिक और कार्यकर्ता रेजाउर रहमान लेनिन के हवाले से बताया है कि गुजरात की हिलसा का इस्तेमाल स्थानीय आपूर्ति की कमी को पूरा करने के साथ-साथ औद्योगिक प्रोसेसिंग के लिए भी किया जाता है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 के शुरुआती साढ़े नौ महीनों में हिंदुस्तान से करीब 4.27 लाख किलो हिलसा बांग्लादेश पहुंची. इसमें बड़ी मात्रा गुजरात के भरूच और नर्मदा क्षेत्र की मछली की बताई गई है. कीमत में भी बड़ा अंतर बांग्लादेश में नदी से मिलने वाली प्रीमियम हिलसा की कीमत काफी ज्यादा है. रिपोर्ट में बताया गया है कि पद्मा और मेघना की करीब एक किलो हिलसा की कीमत 2,200 से 2,800 टका तक हो सकती है. इसके मुकाबले गुजरात से आने वाली हिलसा बांग्लादेश के लैंड पोर्ट पर करीब 500 से 700 टका प्रति किलो की कीमत पर पहुंच सकती है. रिपोर्ट के अनुसार, खुदरा बाजार में इसकी कीमत करीब 1,500 से 1,800 टका प्रति किलो तक हो सकती है. हिंदुस्तान से बांग्लादेश तक कैसे पहुंचती है गुजरात की हिलसा? गुजरात के नर्मदा और भरूच क्षेत्र से आने वाली हिलसा पश्चिम बंगाल के रास्ते बांग्लादेश पहुंचती है. रिपोर्ट के मुताबिक, बड़ी मात्रा में यह मछली पेट्रापोल सीमा के जरिए बांग्लादेश जाती है. पेट्रापोल इस व्यापार में ट्रांजिट और कोल्ड-स्टोरेज हब के रूप में काम करता है. बांग्लादेश से भी आती है हिलसा हावड़ा होलसेल फिश मार्केट एसोसिएशन के सचिव सैयद अनवर मकसूद ने कहा कि हर वर्ष दुर्गा पूजा से पहले हिंदुस्तान में बांग्लादेश और म्यांमार से बड़ी मात्रा में हिलसा आती है. बांग्लादेश प्रशासन की ओर से भी कोलकाता के लोगों के लिए पूजा के उपहार के तौर पर हिलसा भेजी जाती है. हालांकि, इस वर्ष बांग्लादेश से पद्मा नदी की हिलसा मछली हिंदुस्तान कब पहुंचेगी, इसे लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है. उन्होंने बताया कि राज्य के मछली व्यवसायियों ने बांग्लादेश के मत्स्य विभाग से हिलसा भेजने के लिए आवेदन किया है. अब व्यवसायियों की नजर इस बात पर है कि बांग्लादेश प्रशासन इस संबंध में क्या फैसला लेती है. पश्चिम बंगाल के लिए बड़ा बाजार अवसर ICAR के अनुसार, पश्चिम बंगाल इस उभरते व्यापार से लाभ उठा सकता है. राज्य में हिलसा से जुड़ा मजबूत मछली बाजार, नदी और मुहाना आधारित पारिस्थितिकी तंत्र तथा कोलकाता-हावड़ा का स्थापित मछली व्यापार नेटवर्क मौजूद है. संस्थान का कहना है कि मौजूदा व्यापार से उत्पादन, कोल्ड चेन, प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन, ब्रांडिंग और निर्यात आधारित मत्स्य कारोबार को मजबूत करने का अवसर मिल सकता है. ICAR-CIFRI के निदेशक डॉ. प्रदीप डे ने कहा कि बांग्लादेश को हिंदुस्तानीय हिलसा का निर्यात केवल व्यापार की घटना नहीं है, बल्कि यह इस मछली की क्षेत्रीय मांग और आर्थिक मूल्य का संकेत देता है. उनके मुताबिक, पश्चिम बंगाल के लिए यह उपभोग आधारित मत्स्य कारोबार से आगे बढ़कर ज्ञान आधारित, टिकाऊ और मूल्यवर्धित हिलसा वित्तीय स्थिति विकसित करने का अवसर है. निर्यात के साथ संरक्षण की चुनौती ICAR ने साफ किया है कि बढ़ती मांग के साथ हिलसा के प्राकृतिक भंडार पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ना चाहिए. इसलिए व्यापार बढ़ाने के साथ संरक्षण और टिकाऊ उत्पादन पर भी ध्यान देना जरूरी है. संस्थान के मुताबिक, किशोर हिलसा को पकड़ने से रोकना और वयस्क तथा प्रजनन करने वाली मछलियों की सुरक्षा महत्वपूर्ण है. पश्चिम बंगाल प्रशासन की ओर से निर्धारित संरक्षण उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने पर भी जोर दिया गया है. 90 मिमी से छोटे जाल पर रोक क्यों जरूरी? ICAR-CIFRI के अनुसार, हुगली नदी में मार्च से मई के दौरान मछली पकड़ने के नियमों को सख्ती से लागू करने की जरूरत है. हिलसा पकड़ने वाले जाल का आकार 90 मिमी से अधिक रखने की सलाह दी गई है, ताकि करीब 500 ग्राम से कम वजन वाली छोटी मछलियां जाल में न फंसें. इसका उद्देश्य छोटी हिलसा को पकड़ने से बचाना है, ताकि उन्हें बड़े होने और प्रजनन करने का मौका मिल सके. प्रजनन के समय हिलसा की सुरक्षा पर जोर ICAR ने हिलसा के प्रजनन और प्रवास के दौरान संरक्षण को भी महत्वपूर्ण बताया है. संस्थान के मुताबिक, महालया से काली पूजा के आसपास हिलसा का प्रमुख अपस्ट्रीम प्रवास होता है, जबकि होली के आसपास एक अन्य महत्वपूर्ण प्रवास देखा जाता है. इन अवधियों में उचित मौसमी प्रतिबंध लगाने से हिलसा के प्राकृतिक प्रजनन और भविष्य के स्टॉक को मजबूत करने में मदद मिल सकती है. स्वस्थ नदियां ही हिलसा कारोबार का आधार ICAR-CIFRI के मुताबिक, हिलसा के लिए उपयुक्त मीठे पानी और खारे पानी का संतुलन, गहरे पानी के प्रवास मार्ग और अबाधित प्रजनन मार्ग जरूरी हैं. संस्थान के विभागाध्यक्ष डॉ. रंजन कुमार मन्ना ने कहा कि हिलसा संरक्षण को मत्स्य क्षेत्र के भविष्य में निवेश के तौर पर देखना चाहिए. उनके मुताबिक, हिलसा के सुरक्षित प्रवास के लिए महत्वपूर्ण

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

Kareena Kapoor Birthday Special: बैकलेस पोस्टर से ‘काली बिल्ली’ तक, करीना के इन विवादों ने मचाया था खूब बवाल

बॉलीवुड की ‘बेबो’ यानी करीना कपूर खान की जिंदगी में ग्लैमर, शोहरत और शानदार फिल्मों के साथ विवादों का भी कम कनेक्शन नहीं रहा है. कभी ‘कुर्बान’ के बैकलेस पोस्टर ने बवाल मचाया, तो कभी बिपाशा बसु के साथ ‘काली बिल्ली’ वाला विवाद सुर्खियों में छा गया. इतना ही नहीं, ‘प्रेग्नेंसी बाइबल’ नाम को लेकर भी करीना को कानूनी नोटिस का सामना करना पड़ा. जन्मदिन के मौके पर नजर डालते हैं बेबो से जुड़े उन विवादों पर, जिन्होंने उस दौर में खूब चर्चा बटोरी. ‘कुर्बान’ के बैकलेस पोस्टर पर मचा था बवाल साल 2009 में करीना कपूर और सैफ अली खान की फिल्म ‘कुर्बान’ रिलीज से पहले ही अपने पोस्टर को लेकर विवादों में आ गई थी. इंडिया टुडे की नवंबर 2009 की रिपोर्ट के मुताबिक, फिल्म के एक पोस्टर में करीना कपूर की पीठ दिख रही थी और वह सैफ अली खान के साथ नजर आ रही थीं. इस पोस्टर पर शिवसेना कार्यकर्ताओं ने आपत्ति जताई थी. करीना कपूर खान बैकलेस पोस्टर बिपाशा बसु के साथ ‘काली बिल्ली’ वाला किस्सा फिल्म ‘अजनबी’ की शूटिंग के दौरान करीना कपूर और बिपाशा बसु के कथित विवाद ने उस दौर में खूब सुर्खियां बटोरी थीं. इंडिया टुडे की 2017 की रिपोर्ट के मुताबिक, कॉस्ट्यूम को लेकर दोनों के बीच विवाद की समाचारें सामने आई थीं. रिपोर्ट में बताया गया कि बिपाशा को करीना के डिजाइनर विक्रम फडनिस ने मदद की थी, जिसके बाद दोनों के बीच कथित बहस हुई. इसी दौरान करीना द्वारा बिपाशा को ‘काली बिल्ली’ कहे जाने और उन्हें थप्पड़ मारने की बात भी रिपोर्ट्स के हवाले से सामने आई थी. हालांकि, दोनों अभिनेत्रियों के इस मामले पर अलग-अलग बयान भी रहे. रिपोर्ट के अनुसार, बिपाशा ने 2001 में फिल्मफेयर से कहा था कि असल समस्या उनके और करीना के बीच नहीं, बल्कि करीना और डिजाइनर के बीच थी, जबकि करीना ने 2002 में बिपाशा के इस दावे को खारिज किया था. View on Instagram ‘प्रेग्नेंसी बाइबल’ नाम ने खड़ा किया कानूनी विवाद करीना कपूर ने अपनी प्रेग्नेंसी जर्नी पर अदिति शाह भीमजानी के साथ किताब लिखी थी, जिसका नाम ‘करीना कपूर खान्स प्रेग्नेंसी बाइबल’ था. किताब के नाम में ‘बाइबल’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर आपत्ति जताई गई थी. साल 2024 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले में करीना कपूर को नोटिस जारी किया था. याचिका में आरोप लगाया गया था कि किताब के नाम से ईसाई समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं. बाद में करीना ने कानूनी नोटिस का जवाब देते हुए कहा था कि किताब के जरिए किसी धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने का उनका इरादा नहीं था. सैफ अली खान के होटल विवाद ने भी खींचा था ध्यान साल 2012 में सैफ अली खान के मुंबई के एक होटल में एक एनआरआई शख्स से विवाद की समाचार सामने आई थी. उस दौरान करीना कपूर भी वहां मौजूद थीं. उस समय की रिपोर्टों में एनआरआई शख्स की ओर से सैफ पर मारपीट और धमकी देने के आरोप लगाए गए थे. वहीं, विवाद की वजह को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए थे. इसलिए इस मामले को आरोपों और रिपोर्टों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए. View on Instagram विवादों से अलग किरदारों ने बनाई करीना की पहचान करीना कपूर का फिल्मी सफर सिर्फ विवादों तक सीमित नहीं रहा. ‘कभी खुशी कभी गम’ की ‘पू’, ‘जब वी मेट’ की ‘गीत’ और ‘चमेली’ जैसे किरदारों ने उन्हें दर्शकों के बीच अलग पहचान दिलाई. करीना ने अपने करियर में ग्लैमरस भूमिकाओं के साथ कई चुनौतीपूर्ण किरदार भी निभाए. यही वजह है कि उनके फिल्मी सफर से जुड़े पुराने विवादों के अलावा उनकी फिल्मों और अभिनय की भी लगातार चर्चा होती रही. ये भी पढ़ें: Bigg Boss 20 PROMO: काजी का सिग्नेचर स्टेप देख बेकाबू हुए सलमान खान, छाती पकड़कर सीधे जमीन पर ढेर ये भी पढ़ें: आज जो कपड़े-घड़ी पहनता हूं वो विजय की वजह से है… Atlee ने थलापति को दिया अपनी कामयाबी का क्रेडिट, फिर सुनाया ‘जवान’ का किस्सा The post Kareena Kapoor Birthday Special: बैकलेस पोस्टर से ‘काली बिल्ली’ तक, करीना के इन विवादों ने मचाया था खूब बवाल appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

आलू काटकर रखती हैं तो जरूर जानें ये टिप्स, नहीं पड़ेंगे जल्दी काले

How to Keep Cut Potatoes From Turning Black: काम की बात सीरीज में हम रोजमर्रा से जुड़ी ऐसी छोटी-छोटी परेशानियों के आसान तरीके बताते हैं, जो घर के काम को थोड़ा आसान बना सकते हैं. आज बात करेंगे कटे हुए आलू के काले पड़ने की. अक्सर आलू काटकर कुछ देर के लिए रख दें तो उनका रंग भूरा या काला नजर आने लगता है. इसकी वजह हवा के संपर्क में आने से होने वाला ऑक्सीडेशन है. हालांकि, सिर्फ रंग बदलने से आलू खराब नहीं हो जाते. अगर आप भी आलू पहले से काटकर रखते हैं, तो कुछ आसान तरीकों की मदद से उन्हें ज्यादा देर तक ताजा रखा जा सकता है. आइए, आपको इस काम की बात में बताते हैं कि कटे हुए आलू को काला पड़ने से कैसे बचाएं. आलू को काटकर ज्यादा देर खुला न रखें कटे हुए आलू को लंबे समय तक खुला छोड़ने से उनका रंग जल्दी बदल सकता है. इसलिए कोशिश करें कि आलू को खाना बनाने के ज्यादा देर पहले न काटें. अगर आपको पहले से तैयारी करनी है, तो काटने के बाद आलू को खुला रखने के बजाय किसी ऐसे तरीके से रखें, जिससे उनका हवा के साथ संपर्क कम हो. इससे रंग बदलने की प्रक्रिया धीमी हो सकती है. कटे हुए आलू को ठंडे पानी में रखें कटे हुए आलू को काला होने से बचाने के लिए उन्हें ठंडे पानी में रखना आसान तरीका है. इसके लिए एक साफ बर्तन में ठंडा पानी लें और उसमें कटे हुए आलू डाल दें. पानी में रखने से आलू सीधे हवा के संपर्क में नहीं आते और उनका रंग जल्दी बदलने से बच सकता है. यह तरीका तब खास काम आता है, जब खाना बनाने में अभी थोड़ा समय बाकी हो. जिपलॉक बैग का कर सकते हैं इस्तेमाल अगर आपके पास जिपलॉक बैग है, तो उसमें कटे हुए आलू रख सकते हैं. आलू डालने के बाद बैग को अच्छी तरह बंद कर दें और कोशिश करें कि उसके अंदर ज्यादा हवा न रहे. इससे आलू का हवा के संपर्क में आना कम होगा और उनका रंग जल्दी बदलने की संभावना भी कम हो सकती है. हालांकि, उन्हें बहुत लंबे समय तक रखने के बजाय जल्द इस्तेमाल करना बेहतर है. फ्रिज में रखना भी है आसान तरीका कटे हुए आलू को कुछ समय के लिए फ्रिज में भी रखा जा सकता है. ठंडा तापमान ऑक्सीडेशन की रफ्तार को धीमा करने में मदद करता है. आलू को एक साफ और अच्छी तरह बंद होने वाले कंटेनर में रखें. आप चाहें तो कटे हुए आलू को ठंडे पानी में डालकर कंटेनर को फ्रिज में रख सकते हैं. इससे उन्हें खाना बनाने तक बेहतर तरीके से रखने में मदद मिल सकती है. सबसे आसान तरीका क्या है? अगर संभव हो तो आलू को जरूरत से बहुत पहले काटकर न रखें. खाना बनाने के करीब ही उन्हें छीलकर काटना सबसे आसान तरीका है. अगर पहले से काटना जरूरी हो, तो कटे हुए आलू को खुला न छोड़ें. उन्हें ठंडे पानी में रखें या किसी अच्छी तरह बंद कंटेनर में स्टोर करें. इस तरह आलू के रंग को ज्यादा देर तक बदलने से रोकने में मदद मिल सकती है. यह भी पढ़ें: कमरा साफ करना लगता है बड़ा काम? इन आसान टिप्स से मिनटों में करें सफाई The post आलू काटकर रखती हैं तो जरूर जानें ये टिप्स, नहीं पड़ेंगे जल्दी काले appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

21 सितंबर की टॉप 20 खबरें: SIR में आडवाणी समेत कई लोगों को नोटिस, टाटा संस में चेयरमैन पद को लेकर घमासान

1. SIR में चुनाव आयुक्त एसएस संधू समेत कई बड़े अधिकारियों को नोटिस, रिकॉर्ड में गड़बड़ी का मामला SIR प्रक्रिया के तहत कई बड़े अधिकारियों और पूर्व अधिकारियों को नोटिस भेजे गए हैं. इनमें नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया, सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे, विदेश सचिव विक्रम मिस्री और JNU के पूर्व कुलपति एम जगदीश कुमार शामिल हैं.यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 2. Delhi SIR : नोटिस की लिस्ट में लालकृष्ण आडवाणी का भी नाम Delhi SIR : SIR यानी वोटर लिस्ट की विशेष गहन जांच के दौरान कई बड़े नामों को नोटिस भेजे जाने का मामला सामने आया है. पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया भी उन मतदाताओं में शामिल हैं, जिनकी दी गई जानकारी में कथित गड़बड़ी मिलने के बाद नोटिस जारी किए गए हैं. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 3. टाटा संस में चेयरमैन की कुर्सी पर फिर घमासान! चंद्रशेखरन की नियुक्ति को ट्रस्ट्स ने बताया गैरकानूनी टाटा संस में एन चंद्रशेखरन की चेयरमैन पद पर दोबारा नियुक्ति को लेकर विवाद गहरा गया है. टाटा ट्रस्ट्स ने कंपनी के नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए इस फैसले की वैधता पर सवाल उठाए हैं. ट्रस्ट्स का कहना है कि चेयरमैन की नियुक्ति के लिए आवश्यक बहुमत समर्थन नहीं मिला. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 4. मुख्तार अब्बास नकवी का हामिद अंसारी को जवाब- हिंदुस्तान में हिंदू बहुसंख्यक इसलिए देश सेक्यूलर, भ्रम फैलाने की कोशिश गलत Mukhtar Abbas Naqvi on Hamid Ansari: पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के बयान पर अब नेतृत्व तेज हो गयी है. भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने हिंदुस्तान की धर्मनिरपेक्ष पहचान का हवाला देते हुए कहा कि अलग-अलग धर्मों के लोग यहां साथ रहते हैं और समाज में फर्क या बंटवारा पैदा करने की कोशिश सफल नहीं होगी. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 5. झारखंड में एमएमडीआर एक्ट पर क्यों शुरू हुआ नेतृत्वक घमासान? बाबूलाल मरांडी ने प्रशासन से मांगे ये 3 बड़े जवाब झारखंड में एमएमडीआर एक्ट में संशोधन को लेकर सियासी घमासान जारी है. नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य प्रशासन पर संसद में चुप्पी साधने और अब विज्ञापनों से जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया है. उन्होंने प्रशासन से एक्ट के असल प्रभावों पर श्वेत पत्र की मांग की है. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 6. पटना स्नातक सीट पर घमासान: नीरज के खिलाफ अनंत का अनुज दांव, पीके की चुप्पी ने बढ़ाया सियासी सस्पेंस बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज है. जन सुराज ने पांच सीटों पर प्रत्याशियों के नाम घोषित किए, लेकिन पटना स्नातक सीट को होल्ड पर रखा है. इस सीट पर जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार को मोकामा विधायक अनंत सिंह से चुनौती मिल रही है. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 7. Bihar Road Project: बिहार के इस बाजार में बनेगा 2 KM का फोरलेन फ्लाईओवर, NHAI ने निकाला टेंडर, खर्च होंगे 148.90 करोड़ Bihar Road Project: बिहार के सिमराही बाजार में यातायात को बेहतर करने के लिए 2.04 किलोमीटर लंबा फोरलेन फ्लाईओवर बनाया जाएगा. एनएचएआई ने इसके लिए टेंडर जारी कर दिया है. परियोजना में फ्लाईओवर के साथ पहुंच मार्ग और सर्विस रोड भी बनाई जाएगी. काम पूरा करने के लिए दो साल का समय रखा गया है. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 8. अयोध्या में फिर जीवंत होंगी रामलला के संघर्षकाल की यादें: टेंट से अस्थायी मंदिर तक की वो पूरी कहानी, अब श्रद्धालु देख सकेंगे… अयोध्या में रामलला की उस यात्रा को संजोया जा रहा है, जब वे टेंट में विराजमान थे. अस्थायी मंदिर को स्मृति स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहाँ तस्वीरों और डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से भक्तों को संघर्षकाल की कहानी दिखाई जाएगी. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 9. Russia Ukraine War: मॉस्को पर यूक्रेनी ड्रोन की बौछार, रूसी ऑयल रिफाइनरी भी निशाने पर, दो की मौत Russia Ukraine War: रूस-यूक्रेन जंग के बीच मॉस्को बड़े ड्रोन हमले की चपेट में आया. रूसी अधिकारियों के मुताबिक सैकड़ों ड्रोन राजधानी की ओर बढ़े और मॉस्को की ऑयल रिफाइनरी को भी नुकसान पहुंचा. हमले में दो लोगों की मौत हुई. चुनाव के आखिरी दिन हुए इस हमले ने तनाव और बढ़ा दिया. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 10. हरमनप्रीत कौर और निगर सुल्ताना ने मिलाया हाथ, क्या हिंदुस्तान-बांग्लादेश स्त्री क्रिकेट में खत्म हुआ हैंडशेक विवाद? एशियन गेम्स 2026 में हिंदुस्तानीय कप्तान हरमनप्रीत कौर और बांग्लादेश की निगर सुल्ताना ने हाथ मिलाया. एशिया कप के विवाद के बाद यह पल खास था. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 11. Asian Games 2026: जापान में बिहार के 11 सितारे दिखाएंगे दम, ईशान-वैभव समेत इन खिलाड़ियों पर रहेगी नजर एशियन गेम्स 2026 में बिहार का दबदबा दिखेगा, जहां 11 खिलाड़ी हिंदुस्तानीय दल का हिस्सा होंगे. क्रिकेट के ईशान किशन, पैरा खिलाड़ियों और रग्बी स्टार्स पर रहेगी खास नजर. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 12. कार के डिवाइडर से टकराते ही लगी आग, जिंदा जले प्राइवेट हॉस्पिटल के न्यूरोसर्जन तेलंगाना के सूर्यापेट जिले में रविवार सुबह एक भयंकर सड़क हादसे में एक डॉक्टर ( न्यूरोसर्जन) जिंदा जल गए जिससे उनकी मौत हो गई. टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी समाचार के अनुसार डॉक्टर खम्मम जिले के रहने वाले थे और उनका नाम जगदीश बाबू था. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 13. नंबर-1 की कुर्सी पर अब भी कायम है यह स्कूटर, अगस्त में सबसे ज्यादा खरीदे गए ये 10 स्कूटर्स, देखें लिस्ट अगस्त 2026 में हिंदुस्तानीय टू-व्हीलर मार्केट में स्कूटर्स की भारी डिमांड रही. Honda Activa ने नंबर 1 का ताज बरकरार रखा है, जबकि Bajaj Chetak की बिक्री में 272% का शानदार उछाल आया है. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 14. बिना कैमरे के सामने आए डिजिटल पहचान से लाखों की कमाई: चीन में शुरू हुआ AI फेस लाइसेंसिंग का अनोखा ट्रेंड चीन में AI वीडियो के लिए इंसानी चेहरे किराए पर देने का नया ट्रेंड शुरू हो चुका है. जानिए कैसे लोग बिना शूटिंग किए अपनी डिजिटल पहचान से ₹14 लाख तक की मोटी रकम कमा रहे हैं. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 15. मुंबई में कोस्टल रोड फ्लाईओवर से नीचे गिरी BMW, जानिए इतनी सेफ होने के बावजूद कैसे हो गया ये हादसा? वीडियो देख कर उड़ जाएंगे होश मुंबई के कोस्टल रोड पर एक दर्दनाक हादसे में एक तेज रफ्तार

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

बार-बार भूल रहे हैं बातें तो सावधान! डॉक्टर ने बताए अल्जाइमर के 5 शुरुआती संकेत

World Alzheimer’s Day: उम्र बढ़ने के साथ याददाश्त थोड़ी कमजोर होना सामान्य हो सकता है. कभी-कभार किसी का नाम याद न आना, किसी बात को याद करने में थोड़ा समय लगना या कभी-कभी कोई सामान रखकर भूल जाना उम्रदराज लोगों में हो सकता है. लेकिन जब इस तरह के बदलाव बार-बार होने लगें या व्यक्ति की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगे, तो इन्हें केवल बढ़ती उम्र का सामान्य असर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. अल्जाइमर रोग धीरे-धीरे याददाश्त, सोचने-समझने की क्षमता और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है. इसके शुरुआती संकेतों को समय पर पहचानना चिकित्सकीय जांच और उचित देखभाल के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है. नया विचार से बातचीच में भगवान महावीर मणिपाल हॉस्पिटल्स, रांची के कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट, डॉ. दीपक चंद्र प्रकाश बताते हैं कि याददाश्त और व्यवहार में होने वाले बदलावों को शुरुआती स्तर पर पहचानना महत्वपूर्ण है. इससे समय पर चिकित्सकीय मूल्यांकन और उचित देखभाल में मदद मिल सकती है. याददाश्त में होने वाले इन बदलावों को न करें नजरअंदाज हाल ही में कही या सीखी गई बातें बार-बार भूलना हाल में हुई बातचीत, जरूरी अपॉइंटमेंट या हाल ही में बताई गई जानकारी को बार-बार भूलना सामान्य भूलने की आदत से अलग हो सकता है. एक ही सवाल को बार-बार पूछना भी ध्यान देने योग्य संकेत हो सकता है. रोजाना किए जाने वाले परिचित कामों में परेशानी होना यदि कोई व्यक्ति वर्षों से किए जा रहे सामान्य कामों को करने में अचानक कठिनाई महसूस करने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. उदाहरण के लिए, परिचित रेसिपी के अनुसार खाना बनाने, घर के नियमित काम करने या रोजमर्रा के दूसरे कामों को पूरा करने में परेशानी होना एक बदलाव का संकेत हो सकता है. परिचित जगहों या रास्तों को लेकर भ्रमित होना परिचित जगह पर होने के बावजूद यह समझने में परेशानी होना कि व्यक्ति कहां है या किसी जाने-पहचाने रास्ते को भूल जाना चिंता का विषय हो सकता है. तारीख, समय या आसपास के माहौल को लेकर बार-बार भ्रमित होना भी चिकित्सकीय जांच की जरूरत का संकेत हो सकता है. सही शब्द याद करने में बार-बार परेशानी होना कभी-कभार कोई शब्द याद न आना सामान्य है. लेकिन यदि व्यक्ति बार-बार सही शब्द खोजने में संघर्ष करे, बातचीत के दौरान अपनी बात का क्रम भूल जाए या सामने वाले की बातचीत समझने में परेशानी महसूस करे, तो यह सोचने-समझने की क्षमता में बदलाव का संकेत हो सकता है. सामान को बार-बार असामान्य जगह पर रख देना चाबी, चश्मा या अन्य सामान को कभी-कभार गलत जगह रख देना सामान्य हो सकता है. लेकिन यदि कोई व्यक्ति बार-बार सामान को ऐसी जगह रखने लगे जहां उसे सामान्यतः नहीं रखा जाता और बाद में यह भी याद न रहे कि सामान कहां रखा है, तो इसकी चिकित्सकीय जांच कराना उचित है. हर भूलने की आदत उम्र का सामान्य असर नहीं उम्र बढ़ने के साथ कभी-कभार भूलने की समस्या होना सामान्य हो सकता है, लेकिन आमतौर पर इससे व्यक्ति की रोजमर्रा की जिंदगी और अपने सामान्य कामकाज को संभालने की क्षमता पर गंभीर असर नहीं पड़ता. दूसरी ओर, अल्ज़ाइमर रोग धीरे-धीरे याददाश्त और सोचने-समझने की अन्य क्षमताओं को प्रभावित कर सकता है. अक्सर इसके लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं. इसलिए शुरुआत में परिवार के सदस्य इन बदलावों को उम्र का सामान्य प्रभाव मानकर नजरअंदाज कर सकते हैं. ऐसे में केवल किसी एक घटना को देखने के बजाय यह समझना महत्वपूर्ण है कि भूलने की समस्या कितनी बार हो रही है, क्या यह समय के साथ बढ़ रही है और क्या इसका असर व्यक्ति की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है. एक बार कुछ भूल जाना अपने आप में अल्जाइमर रोग का संकेत नहीं है, लेकिन यदि ऐसे बदलाव बार-बार होने लगें और धीरे-धीरे अधिक स्पष्ट होते जाएं, तो उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. अल्जाइमर की जांच कैसे होती है? अल्जाइमर की पुष्टि के लिए हर मरीज में कोई एक निश्चित जांच पर्याप्त नहीं होती. डॉक्टर आमतौर पर व्यक्ति की मेडिकल हिस्ट्री, याददाश्त और व्यवहार में आए बदलावों तथा इन बदलावों का रोजमर्रा की गतिविधियों पर पड़ने वाले प्रभाव को समझते हैं. इसके अलावा याददाश्त, सोचने-समझने, भाषा और अन्य संज्ञानात्मक क्षमताओं का आकलन किया जा सकता है. लक्षणों के आधार पर अन्य कारणों की पहचान करने और जांच में सहायता के लिए कुछ अतिरिक्त जांच या ब्रेन इमेजिंग की सलाह भी दी जा सकती है. समय पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी याददाश्त में लगातार समस्या, बढ़ता हुआ भ्रम या रोजमर्रा के परिचित काम करने में परेशानी होने पर डॉक्टर से सलाह लेना महत्वपूर्ण है. याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता में बदलाव केवल अल्जाइमर के कारण ही नहीं होते. कुछ पोषण संबंधी कमियां, दवाओं का प्रभाव, नींद से जुड़ी समस्याएं और अन्य स्वास्थ्य संबंधी स्थितियां भी इन क्षमताओं को प्रभावित कर सकती हैं. समय पर चिकित्सकीय जांच से समस्या के संभावित कारण को समझने और व्यक्ति व परिवार के लिए उचित देखभाल एवं सहयोग की योजना बनाने में मदद मिल सकती है. उम्र बढ़ने के साथ याददाश्त का कमजोर होना हमेशा सामान्य बात नहीं है. याददाश्त, बातचीत और रोजमर्रा के कामों में बार-बार होने वाले बदलावों पर ध्यान देकर समस्या की शुरुआती पहचान की जा सकती है और व्यक्ति को समय पर उचित चिकित्सकीय मार्गदर्शन मिल सकता है. यह भी पढ़ें: बिस्तर में लेटे-लेटे बीतता है वीकेंड? सेहत को लेकर अभी जान लें ये बात The post बार-बार भूल रहे हैं बातें तो सावधान! डॉक्टर ने बताए अल्जाइमर के 5 शुरुआती संकेत appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

MNNIT के 816 स्टूडेंट्स को मिली जॉब, 96 लाख का हाईएस्ट प्लेसमेंट

Best BTech College: मोतीलाल नेहरू नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MNNIT) इलाहाबाद के ताजा प्लेसमेंट आंकड़ों ने संस्थान की साख को फिर मजबूत किया है. BTech के 814 स्टूडेंट्स को कैंपस प्लेसमेंट में नौकरी मिली है. इस साल प्लेसमेंट प्रतिशत 88.1 रहा. आइए MNNIT के प्लेसमेंट को करीब से देखते हैं. MNNIT Allahabad प्लेसमेंट एक नजर में ब्रांच पात्र स्टूडेंट्स प्लेस्ड औसत पैकेज (लाख) सबसे बड़ा पैकेज (लाख) बायोटेक्नोलॉजी 32 19 9.95 12 केमिकल 54 49 9.99 23 सिविल 60 57 8.25 20.45 कंप्यूटर साइंस 355 323 27.01 96 इलेक्ट्रिकल 85 78 15.37 63.78 ECE 155 134 21.24 63.78 मैकेनिकल 136 121 9.93 23 प्रोडक्शन एंड इंडस्ट्रियल 47 33 10.46 17.03 बीटेक में शानदार प्लेसमेंट बीटेक के सभी ब्रांच को मिलाकर 1094 ऑफर आए, जो प्लेसमेंट पाने वाले छात्रों की संख्या से कहीं ज्यादा हैं. इसका मतलब है कि कई छात्रों को एक से अधिक कंपनियों से प्रस्ताव मिले. न्यूनतम पैकेज 5 लाख और मीडियन पैकेज 12 लाख रुपये रहा. MNNIT Allahabad Placement 2026 Check Record 96 लाख का सर्वाधिक पैकेज इस सत्र का सबसे बड़ा पैकेज 96 लाख रुपये रहा, जो कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग शाखा में दर्ज हुआ. यह आंकड़ा बताता है कि देश की शीर्ष टेक कंपनियां संस्थान के छात्रों की प्रतिभा पर भरोसा करती हैं. ये भी पढ़ें: Computer Science का क्रेज डाउन, IIIT रांची में इस BTech ब्रांच को मिला 60 लाख का पैकेज कंप्यूटर साइंस का दबदबा कंप्यूटर साइंस में 355 पात्र छात्रों में से 323 को नौकरी मिली, प्लेसमेंट प्रतिशत 91 रहा. इस शाखा को सबसे ज्यादा 464 ऑफर मिले और औसत पैकेज 27.01 लाख रुपये के साथ यह सभी ब्रांच में सबसे ऊपर रही. इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स का प्रदर्शन इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में 91.76 प्रतिशत प्लेसमेंट रहा और औसत पैकेज 15.37 लाख रुपये रहा. इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन में 155 में से 134 छात्र चयनित हुए और औसत पैकेज 21.24 लाख रुपये रहा. दोनों शाखाओं में अधिकतम पैकेज 63.78 लाख रुपये दर्ज हुआ. ये भी पढ़ें: BTech Computer Science को मिला 59 LPA, Google में प्लेसमेंट देकर छा गया ये कॉलेज अन्य ब्रांच की स्थिति सिविल इंजीनियरिंग में सबसे ज्यादा 95 प्रतिशत छात्रों को नौकरी मिली. केमिकल में यह आंकड़ा 90.74 और मैकेनिकल में 88.97 प्रतिशत रहा. दोनों का अधिकतम पैकेज 23 लाख रुपये रहा. बायोटेक्नोलॉजी में 59.3 और प्रोडक्शन एंड इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग में 70.21 प्रतिशत प्लेसमेंट हुआ. एमटेक में 243 में से 133 छात्रों को नौकरी मिली और प्लेसमेंट 54.73 प्रतिशत रहा. एमसीए में 71.43 प्रतिशत प्लेसमेंट हुआ और औसत पैकेज 15.49 लाख रुपये रहा, जिसका अधिकतम पैकेज 39 लाख रुपये रहा. एमबीए में 88.33 प्रतिशत और एमएससी में 68.42 प्रतिशत छात्र प्लेस हुए. ये भी पढ़ें: NIT Durgapur Placement 2026: 80 लाख रुपए हाईएस्ट पैकेज, 77.69% रहा ओवरऑल प्लेसमेंट रेट The post MNNIT के 816 स्टूडेंट्स को मिली जॉब, 96 लाख का हाईएस्ट प्लेसमेंट appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

झारखंड की सबसे बड़ी कोयला खदानों में अब CISF का पहरा, 1700 जवानों तक बढ़ेगी तैनाती; लागू हुआ ‘जीरो कोल लीकेज’ प्लान

रांची. झारखंड में सीसीएल की सबसे बड़ी कोयला खदान मगध और आम्रपाली में सुरक्षा की कमान सीआईएसएफ ने संभाल ली है. यह पहल 2000 करोड़ के करीब होने वाला कोयला चोरी पर रोक लगाने के लिए की गयी है. अभी तक यह व्यवस्था राज्य पुलिस, सीसीएल और होमगार्ड के अधीन थी. सीआईएसएफ के डीजी प्रवीर रंजन ने 19 सितंबर को औपचारिक कार्यक्रम कर इसकी शुरुआत की. सीआईएसएफ डीजी ने अधिकारियों को कोयला की चोरी रोकने के लिए हर संभव प्रयास करने का निर्देश दिया. कहा कि अवैध कोयले की जब्ती हर जगह से करें, चाहे वह गांव या जंगल का कोई गुप्त ठिकाना हो या फिर स्टेट और नेशनल हाईवे. डीजी ने सख्त लहजे में कहा कि तस्करों पर लगाम लगाने में कोई हिचकिचाहट नहीं दिखाएं. चतरा जिले में स्थित सीसीएल की मगध और आम्रपाली परियोजनाएं उत्पादन और आर्थिक दृष्टि से देश के सबसे बड़े ओपन कास्ट ब्लॉक्स में शामिल हैं. अकेले आम्रपाली से रोज लगभग 70 हजार टन कोयले का उत्पादन होता है. करोड़ों रुपये की कोयला चोरी को रोकने के लिए जीरो कोल लीकेज प्लान लाया गया है. आम्रपाली में शुरुआत में सीआईएसएफ के 200 जवान तैनात किये गये हैं, जिनकी संख्या बढ़ाकर 1700 तक की जायेगी. इस पूरे सुरक्षा घेरे की कमान और निगरानी के लिए डीआईजी स्तर के पद का आवंटन किया गया है. डीजी ने बैठक में एमएमडीआर एक्ट के प्रभावी पालन पर विशेष जोर दिया. हाई-टेक सर्विलांस से होगी निगरानी खनन क्षेत्रों में अब ड्रोन सर्विलांस, वाहनों की जीपीएस ट्रैकिंग और वेइंग ब्रिज मॉनिटरिंग को इंटीग्रेटेड कमांड सेंटर से जोड़ा गया है. डीजी प्रवीर रंजन ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि स्थानीय जिला प्रशासन, पुलिस और सीसीएल प्रबंधन के साथ बेहतर तालमेल बनाकर काम करें. राष्ट्रीय महत्व के इस ऊर्जा संसाधन की सुरक्षा में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी. The post झारखंड की सबसे बड़ी कोयला खदानों में अब CISF का पहरा, 1700 जवानों तक बढ़ेगी तैनाती; लागू हुआ ‘जीरो कोल लीकेज’ प्लान appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

Somwar Shiv Puja: शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय न करें यह गलती, जानें शिव जी की पूजा के 5 नियम

Somwar Shiv Puja: भगवान शिव की कृपा पाने के लिए सोमवार विशेष माना गया है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से उनकी कृपा प्राप्त होती है. शास्त्र-पुराणों में भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए कई उपाय बताए गए हैं. आइए, जानते हैं कि सोमवार को कौन-से 5 काम करने से शिव जी की कृपा प्राप्त होगी. साथ ही, शिवलिंग पर जल चढ़ाते वक्त किन गलतियों से बचना चाहिए. शिवलिंग पर जल चढ़ाएं सोमवार सुबह स्नान के बाद किसी शिव मंदिर में स्थित शिवलिंग पर एक लोटा जल अर्पित करें. जल में सफेद फूल और कुछ अक्षत मिलाएं और शिवलिंग पर चढ़ाएं. शिव पुराण के अनुसार, भगवान को सिर्फ एक लोटा जल चढ़ाने से उनकी कृपा प्राप्त हो सकती है. शिवलिंग पर जल चढ़ाते वक्त ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करें. करें पंचामृत अभिषेक शिवलिंग पर दूध, दही, घी, शक्कर और शहद को मिलाकर तैयार किया हुआ पंचामृत चढ़ाएं. मान्यतानुसार, सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत का अभिषेक करने से मन शांत और प्रसन्न रहता है. सोमवार को इस उपाय को करने से जीवन समृद्ध और खुशहाल रहता है. शिवलिंग पर चढ़ाएं बेलपत्र शिवपुराण के अनुसार, सोमवार को शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने से भगवान शिव प्रसन्न होकर मनोकामना पूरी करते हैं. शिवलिंग पर सिर्फ एक बेलपत्र चढ़ाने से तीन जन्म के पापों का नाश होता है. बिल्वाष्टक स्तोत्र में कहा गया है- ‘त्रिजन्मपाप संहारं एक बिल्वं शिवार्पणम्’. बेलपत्र खंडित न हो, इसका ध्यान रखना चाहिए. शिव चालीसा का पाठ करना है शुभ सोमवार को शिव चालीसा का पाठ बेहद फलदायी माना गया है. इस दिन किसी शिव मंदिर में बैठकर कम से कम एक बार शिव चालीसा का पाठ करें. कहा जाता है कि ऐसा करने से शिव जी प्रसन्न होते हैं. धार्मिक मान्यता है कि इससे कार्यक्षेत्र में सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. ये भी पढ़ें: Pitru Paksha 2026: 26 सितंबर से शुरू हो रहा पितृ पक्ष, नोट करें पूर्णिमा से सर्वपितृ अमावस्या की सही तिथियां सफेद चीजों का करें दान मान्यतानुसार, सोमवार को दूध, चावल, दही, चीनी और सफेद वस्त्र (कपड़ा) का दान करने से कुंडली का चंद्र ग्रह मजबूत होता है. साथ ही, भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है. इस दिन जरूरतमंद लोगों को खाने-पीने की सफेद चीजों का दान भी किया जा सकता है. शिवलिंग पर जल चढ़ाते वक्त न करें 5 गलतियां दक्षिण या पूरब दिशा की ओर मुंह करके शिवलिंग पर जल नहीं चढ़ाना चाहिए, ऐसा शास्त्रों में कहा गया है. भगवान शिव को शंख से जल अर्पित नहीं करना चाहिए. पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव ने शंखचूर्ण नामक असुर का वध किया था. मान्यतानुसार, बहुत तेज धार के साथ शिवलिंग पर जल अर्पित नहीं करना चाहिए. कहा जाता है कि इससे मनोकामना पूरी नहीं होती. चूंकि भगवान शिव को शांत प्रिय माना जाता है, ऐसे में हमेशा पतली और शांत धारा के साथ शिवलिंग पर जल चढ़ाना चाहिए. भगवान शिव की पूजा में तुलसी का प्रयोग नहीं किया जाता है. इसलिए सोमवार या किसी भी दिन शिवलिंग पर तुलसी का पत्ता चढ़ाने से बचना चाहिए. शास्त्रों के अनुसार, खड़े होकर शिवलिंग पर जल अर्पित नहीं करना चाहिए. शिवलिंग पर हमेशा बैठकर ही जल चढ़ाना चाहिए. ये भी पढ़ें: Shani Gochar 2027: साल 2027 में शनि बदलेंगे चाल, जानें किन लोगों को मिलेगी साढ़ेसाती से मुक्ति और किन्हें रहना होगा सतर्क The post Somwar Shiv Puja: शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय न करें यह गलती, जानें शिव जी की पूजा के 5 नियम appeared first on Naya Vichar.

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

About Us

नयाविचार एक आधुनिक न्यूज़ पोर्टल है, जो निष्पक्ष, सटीक और प्रासंगिक समाचारों को प्रस्तुत करने के लिए समर्पित है। यहां राजनीति, अर्थव्यवस्था, समाज, तकनीक, शिक्षा और मनोरंजन से जुड़ी हर महत्वपूर्ण खबर को विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया जाता है। नयाविचार का उद्देश्य पाठकों को विश्वसनीय और गहन जानकारी प्रदान करना है, जिससे वे सही निर्णय ले सकें और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकें।

Quick Links

Who Are We

Our Mission

Awards

Experience

Success Story

© 2025 Developed By Socify

Scroll to Top