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राहुल गांधी ने वीडियो कॉल कर छात्रों से की बात, कहा- झारखंड के छात्र अपने हक के लिए कर रहे हैं विरोध

ब्यूरो प्रमुख, रांची झारखंड में चल रहे छात्र आंदोलन के बीच लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी का बड़ा बयान आया है. कांग्रेस के आला नेता श्री गांधी ने वीडियो संदेश जारी कर कहा है कि झारखंड के छात्र अपने हक के लिए विरोध कर रहे हैं. कृपया उनका समर्थन करें. यह विरोध-प्रदर्शन देश भर में हो रहा है. गुरुवार को राहुल गांधी ने वीडियो कॉल पर आंदोलन कर रहे छात्रों से बात भी की. ये भी पढ़ें… धनबाद में चोर को पकड़ने के बाद पुलिस टीम पर हमला, भूली ओपी के SI हरिप्रकाश मिश्रा घायल हमारी शिक्षा व्यवस्था दमनकारी : राहुल राहुल गांधी ने कहा कि हमारी शिक्षा व्यवस्था ध्वस्त है. यह महंगी है और दमनकारी है. छात्रों की बात सुननी चाहिए. इस शिक्षा व्यवस्था को बदलने के लिए एक्शन लेना चाहिए. चाहे कांग्रेस और केंद्र की प्रशासन हो या झारखंड की. उन्होंने कहा कि इस शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ मैंने साफ कहा है. देहरादून में कहा है, कोटा में कहा है और अब अब इलाहाबाद जाकर कहने वाला हूं. ये भी पढ़ें… झरिया में 9 दिनों से जलापूर्ति ठप, झमाडा के खिलाफ भूख हड़ताल पर बैठे लोग दिल्ली में प्रदेश नेताओं की हुई बैठक लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी झारखंड आयेंगे. श्री गांधी के दौरे को लेकर संगठन को तैयारी करने के लिए कहा गया है. गुरुवार को दिल्ली में कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल के साथ प्रदेश के नेताओं की बैठक हुई. इसमें संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने पर चर्चा हुई. राष्ट्रीय महासचिव श्री वेणुगोपाल ने प्रदेश से लेकर पंचायत स्तर तक सांगठनिक ढांचे और काम-काज की समीक्षा की. झारखंड में चल रहे छात्र आंदोलन को लेकर भी केंद्रीय नेतृत्व ने रिपोर्ट ली. बैठक में प्रदेश प्रभारी के राजू, सह-प्रभारी श्रीबेला प्रसाद, सह-प्रभारी भूपेंद्र मरावी, प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश और विधायक दल के नेता प्रदीप यादव शामिल हुए. The post राहुल गांधी ने वीडियो कॉल कर छात्रों से की बात, कहा- झारखंड के छात्र अपने हक के लिए कर रहे हैं विरोध appeared first on Naya Vichar.

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क्या है FCRA बिल? 12 अगस्त हो सकता है संसद में पेश, बदल जाएंगे विदेशी फंडिंग पाने वाले NGO के नियम

FCRA Bill : विदेशी फंडिंग बिल को लेकर चल रही खींचतान के बीच, मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने गुरुवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की. उन्होंने गृह मंत्री से मुलाकात कर बिल को लेकर सिफारिशें पेश की हैं और क्षेत्रीय चिंताओं को सामने रखा है. न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट में बताया गया कि FCRA (फॉरेन कंट्रिब्यूशन रेगुलेशन एक्ट) 12 अगस्त को संसद में पेश हो सकता है. क्या है FCRA बिल? FCRA विधेयक हिंदुस्तान में गैर-प्रशासनी संगठनों (NGOs) और धार्मिक संस्थाओं को मिलने वाले विदेशी चंदे की निगरानी का कानून है. इसके 2026 के नए संशोधनों का मुख्य उद्देश्य विदेशी धन के उपयोग में पारदर्शिता लाना और राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत करना है. नए नियमों के तहत, यदि किसी NGO का लाइसेंस रद्द या सरेंडर होता है, तो विदेशी फंड से बनी उसकी सभी संपत्तियां प्रशासन अपने नियंत्रण में ले सकेगी. साथ ही, संस्थाओं के शीर्ष पदों पर विदेशी नागरिकों की नियुक्ति और विदेशी धन से होने वाले धार्मिक धर्मांतरण पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है. FCRA के आने से क्या होगा असर? इसके कानून बन जाने के बाद विदेशों से फंडिंग प्राप्त करने वाले गैर-प्रशासनी संगठनों, ट्रस्टों और धार्मिक संस्थाओं के नियमों में कई बदलाव कर दिए जाएंगे. रिपोर्ट में बताया गया कि इसके पीछे प्रशासन का उद्देश्य विदेशी धन के उपयोग में पारदर्शिता लाना, धर्मांतरण पर रोक लगाना और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना है. फंड और संपत्ति जब्त होने का जोखिम अगर किसी NGO का FCRA लाइसेंस रिन्यू नहीं होता या रद्द हो जाता है, तो विदेशी फंड से बनाई गई उसकी सभी संपत्तियां (जैसे स्कूल, अस्पताल, या इमारतें) प्रशासन के कब्जे में चली जाएंगी. संस्थाएं अपनी संपत्ति खोने के डर से आसानी से इस फ्रेमवर्क से बाहर नहीं निकल पाएंगी. Also read : CJP ने की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की घोषणा, अभिजीत दीपके की टीम में 3 स्त्रीओं को भी मिली जगह छोटे और जमीनी स्तर के संगठनों का अस्तित्व खतरे में नए कड़े नियमों के तहत विदेशी फंड को एक NGO से दूसरे NGO में ट्रांसफर करने पर पूरी तरह रोक लगा दी जाएगी. इससे हिंदुस्तान के बड़े NGOs अब ग्रामीण या छोटे संगठनों को पैसा देकर काम नहीं करवा पाएंगे, जिससे छोटे संगठनों का कामकाज ठप हो सकता है. प्रशासनिक खर्चों पर पाबंदी प्रशासनिक खर्च (जैसे स्टाफ की सैलरी और ऑफिस का किराया) की सीमा पहले ही घटाकर 20% की जा चुकी है. FCRA के आने के बाद NGOs को अपनी हर छोटी-बड़ी गतिविधि का पल-पल का हिसाब देना होगा. धार्मिक और अल्पसंख्यक संस्थाओं पर असर इसका सीधा असर उन विदेशी-फंडेड धार्मिक संस्थाओं पर पड़ेगा जो समाज सेवा की आड़ में धार्मिक परिवर्तन या प्रचार से जुड़ी रही हैं. पूजा स्थलों का संरक्षण यदि प्रशासन किसी विवादित धार्मिक संस्था की संपत्ति को जब्त करती है, तो कानूनन उसे उस पूजा स्थल का धार्मिक स्वरूप बनाए रखना होगा. लेकिन प्रबंधन पूरी तरह प्रशासनी तंत्र के हाथ में होगा. आम जनता और सामाजिक विकास पर असर शिक्षा, स्वास्थ्य, स्त्री सशक्तिकरण और आपदा राहत जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले जेन्युइन NGOs का कानूनी और कागजी काम बढ़ जाएगा. इसके चलते जमीनी स्तर पर जरूरतमंद लोगों तक मदद पहुंचने में देरी हो सकती है. पारदर्शिता और जवाबदेही में सुधार सकारात्मक पक्ष यह है कि इस कानून से उन फर्जी या संदिग्ध संस्थाओं पर पूरी तरह लगाम लगेगी जो विदेशी धन का उपयोग राष्ट्रविरोधी गतिविधियों, दंगे भड़काने या देश की संप्रभुता को नुकसान पहुंचाने के लिए करती थीं. चंदे का वास्तविक उपयोग सही जगह हो सकेगा. ईसाई संगठनों ने जताई आपत्ति अमित शाह से मुलाकात के बाद काउंसिल ऑफ चर्चेज इन मिजोरम (CCM) के महासचिव रेवरेंड लालहमांगाइहा ने कहा कि नए FCRA संशोधन विधेयक के कुछ प्रावधान ईसाई संगठनों के लिए स्वीकार करना मुश्किल हैं. उनका कहना है कि अगर किसी संस्था का FCRA लाइसेंस रद्द हो जाता है या वह उसे स्वेच्छा से सरेंडर कर देती है, तो पहले से विदेशी फंड से बनाई गई संपत्तियों के जब्त होने की आशंका है. इसी चिंता को लेकर ईसाई प्रतिनिधिमंडल ने गृह मंत्री को संयुक्त ज्ञापन सौंपा है. विपक्ष ने विधेयक को बताया कठोर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने प्रस्तावित FCRA संशोधन विधेयक का विरोध किया है. कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने इसे बेहद कठोर बताते हुए कहा कि ऐसा महत्वपूर्ण विधेयक मौजूदा नेतृत्वक माहौल में नहीं लाया जाना चाहिए. वहीं कांग्रेस सांसद हिबी ईडन ने आरोप लगाया कि इस संशोधन से विदेशी फंड पर निर्भर NGO और विशेष रूप से ईसाई व अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक संस्थाएं प्रभावित होंगी. उन्होंने कहा कि कई सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने भी इस विधेयक पर अपनी चिंता जताई है. Also read : हिंदुस्तान ने बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-4 का किया टेस्ट: 4000 KM रेंज, अचूक निशाना; जानिए खासियत The post क्या है FCRA बिल? 12 अगस्त हो सकता है संसद में पेश, बदल जाएंगे विदेशी फंडिंग पाने वाले NGO के नियम appeared first on Naya Vichar.

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5 सितंबर को होगा भारत-पाकिस्तान महामुकाबला, महिला एशिया कप 2026 का शेड्यूल जारी

Women’s Asia Cup 2026: एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) ने स्त्री एशिया कप 2026 के कार्यक्रम का आधिकारिक ऐलान कर दिया है. 28 अगस्त से 13 सितंबर तक संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में स्पोर्ट्से जाने वाले इस टूर्नामेंट का सबसे बड़ा मुकाबला 5 सितंबर को हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच होगा. सभी मैच फ्लडलाइट्स में हिंदुस्तानीय समयानुसार रात के मुकाबलों के रूप में स्पोर्ट्से जाएंगे. दो ग्रुप में स्पोर्ट्सेंगी 8 टीमें इस बार आठ टीमें खिताब के लिए चुनौती पेश करेंगी. हिंदुस्तान को ग्रुप-ए में पाकिस्तान, थाईलैंड और हांगकांग-चीन के साथ रखा गया है, जबकि ग्रुप-बी में मौजूदा चैंपियन श्रीलंका, बांग्लादेश, यूएई और इंडोनेशिया शामिल हैं. दोनों ग्रुप से शीर्ष दो टीमें सेमीफाइनल में पहुंचेंगी. सेमीफाइनल 10 और 11 सितंबर को, जबकि फाइनल 13 सितंबर को स्पोर्ट्सा जाएगा. 30 अगस्त को थाईलैंड से पहला मैच टीम इंडिया अपने अभियान की शुरुआत 30 अगस्त को थाईलैंड के खिलाफ करेगी. इसके बाद 3 सितंबर को हांगकांग-चीन से भिड़ेगी और 5 सितंबर को चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के खिलाफ मैदान में उतरेगी. हिंदुस्तानीय टीम इस टूर्नामेंट में 2024 के फाइनल की हार का हिसाब चुकता करने के इरादे से उतरेगी, जब श्रीलंका ने पहली बार स्त्री एशिया कप का खिताब अपने नाम किया था. स्त्री एशिया कप 2026 का कार्यक्रम तारीख मुकाबला 28 अगस्त थाईलैंड vs हांगकांग-चीन 29 अगस्त श्रीलंका vs यूएई 30 अगस्त हिंदुस्तान vs थाईलैंड 31 अगस्त बांग्लादेश vs इंडोनेशिया 1 सितंबर पाकिस्तान vs थाईलैंड 2 सितंबर श्रीलंका vs इंडोनेशिया 3 सितंबर हिंदुस्तान vs हांगकांग-चीन 4 सितंबर यूएई vs इंडोनेशिया 5 सितंबर हिंदुस्तान vs पाकिस्तान 6 सितंबर श्रीलंका vs बांग्लादेश 7 सितंबर पाकिस्तान vs हांगकांग-चीन 8 सितंबर बांग्लादेश vs यूएई 10 सितंबर सेमीफाइनल-1 11 सितंबर सेमीफाइनल-2 13 सितंबर फाइनल Also Read: ‘वैभव सूर्यवंशी तोड़ेगा मेरा रिकॉर्ड’, टी20 में सबसे ज्यादा रन बनाने के बाद बोले जोस बटलर दोनों टीमों के लिए अहम मुकाबला हिंदुस्तान स्त्री एशिया कप के इतिहास की सबसे सफल टीम है और अब तक तीन बार टी20 प्रारूप में खिताब जीत चुकी है. वहीं, पाकिस्तान अब भी अपने पहले एशिया कप खिताब की तलाश में है. ऐसे में पांच सितंबर का हिंदुस्तान-पाकिस्तान मुकाबला दोनों टीमों के लिए टूर्नामेंट का सबसे अहम मैच माना जा रहा है. संभावित हिंदुस्तानीय टीम: हरमनप्रीत कौर (कप्तान), स्मृति मंधाना (उपकप्तान), शेफाली वर्मा, जेमिमा रोड्रिग्स, हिंदुस्तानी फुलमाली, ऋचा घोष, जी कमलिनी, दीप्ति शर्मा, राधा यादव, प्रेमा रावत, अरुंधति रेड्डी, क्रांति गौड़, रेणुका सिंह, एन श्री चरणी और नंदनी शर्मा. रिजर्व खिलाड़ी: प्रतिका रावल, उमा छेत्री, वैष्णवी शर्मा, सयाली सातघरे और मिन्नू मणि. Also Read: आखिर क्यों अर्जेंटीना 15 जुलाई को ही मनाएगा ‘नेशनल फुटबॉल टीम्स डे’? जानिए इसके पीछे की वजह The post 5 सितंबर को होगा हिंदुस्तान-पाकिस्तान महामुकाबला, स्त्री एशिया कप 2026 का शेड्यूल जारी appeared first on Naya Vichar.

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भारत ने बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-4 का किया टेस्ट: 4000 KM रेंज, अचूक निशाना; जानिए खासियत

रक्षा मंत्रालय ने बताया, यह टेस्ट स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमांड (SFC) की ओर से किया गया. हिंदुस्तान ने इस साल की शुरुआत में ‘अग्नि-प्राइम’ और ‘अग्नि-3’ मिसाइलों का भी सफल परीक्षण किया था. क्या हैं ‘अग्नि-4’ मिसाइल की मुख्य खासियतें? लंबी मारक क्षमता: अग्नि-4 मिसाइल 4,000 किलोमीटर तक की दूरी पर स्थित दुश्मनों के ठिकानों को सटीक रूप से ध्वस्त कर सकती है. यह मिसाइल दो चरणों वाली सतह-से-सतह पर मार करने वाली मिसाइल है, जो सॉलिड-फ्यूल (ठोस ईंधन) रॉकेट मोटर से ऑपरेट होती है. इसमें अत्याधुनिक एवियोनिक्स और डिजिटल कंट्रोल सिस्टम लगे हैं, जो इसे उच्च सटीकता के साथ लक्ष्य पर प्रहार करने में सक्षम बनाते हैं. यह हिंदुस्तान के परमाणु निरोध क्षमता का एक महत्वपूर्ण पिलर है और देश की वायु सुरक्षा को अभेद्य बनाती है. The post हिंदुस्तान ने बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-4 का किया टेस्ट: 4000 KM रेंज, अचूक निशाना; जानिए खासियत appeared first on Naya Vichar.

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RSS चीफ मोहन भागवत बोले- Gen Z देश विरोधी नहीं, सबसे ईमानदार पीढ़ी है; भरोसा करना हो तो मैं युवाओं पर करूंगा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में Gen Z और Gen Alpha से जुड़े कई अहम मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी. पीटीआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक, उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी देश का भविष्य है और उसके विचारों को गंभीरता से सुनने की जरूरत है. भागवत ने विरोध-प्रदर्शन, शिक्षा व्यवस्था और युवाओं की भूमिका जैसे विषयों पर विस्तार से अपने विचार साझा किए. Gen Z को देशविरोधी कहना गलत युवाओं के आंदोलनों को कई बार “देशविरोधी” बताए जाने के सवाल पर RSS प्रमुख मोहन भागवत ने साफ कहा कि यदि Gen Z किसी आंदोलन में हिस्सा लेती है तो उसे देशविरोधी नहीं कहा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि यह हमारी अपनी अगली पीढ़ी है और उनके साथ अपनापन व सम्मान का रिश्ता होना चाहिए. संवाद तभी सफल होगा जब दोनों पक्ष एक-दूसरे की बात समझने और सुनने के लिए तैयार हों. उन्होंने कहा कि उनके अनुसार आज की Gen Z और Gen Alpha मौजूदा पीढ़ी से अधिक ईमानदार है. इस पीढ़ी में राष्ट्र के प्रति निष्ठा, देशभक्ति और सेवा की भावना मजबूत होनी चाहिए. विरोध करें, लेकिन लोकतांत्रिक तरीके से सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि मैं यह नहीं कहता कि Gen Z को विरोध-प्रदर्शन नहीं करना चाहिए. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात रखने और फैसले लेने के तय तरीके होते हैं. उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे संविधान के निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर के भाषणों को पढ़ें. उनके मुताबिक, आंबेडकर के विचारों में यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतभेदों और समस्याओं का समाधान किस तरह किया जाना चाहिए. RSS चीफ मोहन भागवत ने शिक्षा व्यवस्था पर बोलते हुए कहा कि शिक्षा को कभी भी व्यावसायिक कारोबार नहीं बनाया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि शिक्षा जीवन की मूल आवश्यकता है, इसलिए यह सभी लोगों के लिए सुलभ और किफायती होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि फीस, शिक्षा की गुणवत्ता और व्यवस्था से जुड़े अन्य मुद्दों पर व्यापक चर्चा और गंभीर विचार-विमर्श की जरूरत है ताकि हर वर्ग के बच्चों को समान अवसर मिल सके. विरोध करें, लेकिन लोकतांत्रिक तरीके से मोहन भागवत ने कहा कि वह यह नहीं कहते कि Gen Z को विरोध-प्रदर्शन नहीं करना चाहिए. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात रखने और फैसले लेने के तय तरीके होते हैं. उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे संविधान के निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर के भाषणों को पढ़ें. उनके मुताबिक, आंबेडकर के विचारों में यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतभेदों और समस्याओं का समाधान किस तरह किया जाना चाहिए. लाठीचार्ज और पैलेट गन पर क्या बोले भागवत? प्रदर्शनों के दौरान युवाओं पर कथित लाठीचार्ज और पैलेट गन के इस्तेमाल के सवाल पर RSS प्रमुख ने कहा कि किसी भी घटना पर राय बनाने से पहले उसके सभी तथ्यों को समझना जरूरी है. उन्होंने कहा कि उनके पास पूरी जानकारी नहीं है, इसलिए यह कहना उचित नहीं होगा कि कौन सही था और कौन गलत. भागवत ने यह भी कहा कि केवल समाचारों के आधार पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता. हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा कि यदि उन्हें किसी एक पक्ष पर भरोसा करना हो तो वह Gen Z पर भरोसा करेंगे. ये भी पढ़ें: उत्तराखंड में बारिश का कहर! घरों में घुसा पानी… टूटा पुल, SDRF ने रस्सी के सहारे बचाई स्त्री की जान The post RSS चीफ मोहन भागवत बोले- Gen Z देश विरोधी नहीं, सबसे ईमानदार पीढ़ी है; भरोसा करना हो तो मैं युवाओं पर करूंगा appeared first on Naya Vichar.

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पीएम मोदी ने 6 महीने में किए 13 देशों के दौरे: 75 करोड़ रुपये हुए खर्च, नॉर्वे यात्रा रही सबसे महंगी

केंद्र प्रशासन ने संसद में बताया, 2021 से अब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश यात्राओं पर कुल 557 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. AAP सांसद संजय सिंह और CPI सांसद ने प्रशासन से मांगा जवाब आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद संजय सिंह और सीपीआई (CPI) के सांसद वी शिवदासन ने राज्यसभा में पीएम मोदी की यात्रा पर हुए खर्च की जानकारी मांगी थी. जिसके जवाब में विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा ने डेटा सामने रखे. इस साल अब तक 13 देशों की यात्रा कर चुके हैं पीएम मोदी मंत्रालय ने बताया कि इस साल जुलाई तक प्रधानमंत्री के विदेश यात्राओं पर कुल 74,58,93,797 रुपये (लगभग 74.59 करोड़ रुपये) खर्च हुए हैं. इस दौरान उन्होंने मलेशिया, इजरायल, यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे, इटली, फ्रांस, स्लोवाकिया, सेशेल्स, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड सहित 13 देशों की यात्राएं कीं. नॉर्वे और इजराइल दौरे पर हुआ सबसे ज्यादा खर्च विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इस साल सबसे अधिक 17.46 करोड़ रुपये प्रधानमंत्री के नॉर्वे दौरे पर खर्च हुई. इसके बाद दूसरा सबसे बड़ा खर्च फरवरी में उनके इजरायल दौरे पर आया, जिस पर 11.92 करोड़ रुपये खर्च हुए. 2021 से लेकर जुलाई 2026 तक पीएम मोदी की यात्राओं में खर्च हुए 557.51 करोड़ रुपये विदेश मंत्रालय ने बताया, 2021 से लेकर जुलाई 2026 तक पीएम मोदी की विदेश यात्राओं पर कुल मिलाकर 5,57,51,34,018.56 रुपये (लगभग 557.51 करोड़ रुपये) खर्च किए गए हैं. पिछले साल सबसे ज्यादा 25.59 करोड़ रुपये फ्रांस दौरे पर खर्च हुई थी. यूपीए प्रशासन के दौरों से भी की गई तुलना मंत्रालय ने UPA प्रशासन के दौरान हुए विदेश दौरों के आंकड़े भी शेयर किए. अमेरिका (2011): 10.74 करोड़ रुपये रूस (2013): 9.95 करोड़ रुपये फ्रांस (2011): 8.33 करोड़ रुपये जर्मनी (2013): 6.02 करोड़ रुपये विदेश यात्राओं में पीएम मोदी का शेड्यूल प्रधानमंत्री मोदी के विदेश दौरों के मुख्य कार्यक्रमों में द्विपक्षीय बैठकें, हिंदुस्तानीय समुदाय (डायस्पोरा) के साथ बात, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में भागीदारी, स्मारक दौरे और स्टेट बैंक्वेट शामिल होते हैं. पीएम मोदी विशेष विमान ‘एयर इंडिया वन’ (बोइंग 777-300ER) से यात्रा करते हैं. उनकी यात्राओं में पीएमओ, विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) का सुरक्षा दस्ता साथ रहता है. ये भी पढ़ें: राहुल गांधी ने पीएम मोदी और अमित शाह को बताया डरपोक, कहा-गुंडे भेजकर छात्रों से मंगवा रहे हैं माफी The post पीएम मोदी ने 6 महीने में किए 13 देशों के दौरे: 75 करोड़ रुपये हुए खर्च, नॉर्वे यात्रा रही सबसे महंगी appeared first on Naya Vichar.

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CJP ने की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की घोषणा, अभिजीत दीपके की टीम में 3 महिलाओं को भी मिली जगह

CJP National Committee : नई नेतृत्वक पहल के तौर पर सामने आई कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अपनी पहली राष्ट्रीय कार्यकारिणी की घोषणा कर दी है. पार्टी ने 12 सदस्यीय राष्ट्रीय नेतृत्व टीम बनाई है, जिसमें तीन स्त्रीओं को जगह दी गई है. कार्यकारिणी में आफरीन नवाज को राष्ट्रीय सचिव और वैष्णवी गौर को रिसर्च एवं पॉलिसी प्रमुख बनाया गया है. वहीं रत्ना सिंह को लीगल अफेयर्स की जिम्मेदारी सौंपी गई है. पार्टी ने साथ ही आने वाले छह महीनों में देशभर में संगठन विस्तार का रोडमैप भी जारी किया है. बीते महीने 37 दिन के आंदोलन के दौरान देश भर के अलावा विदेशों में भी सीजेपी चर्चा का विषय बनी हुई थी. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ आंदोलन को सफलता भी मिली. जिसके बाद सीजेपी नेतृत्व को देश भर में लोग जानने लग गए. संस्थापक से लेकर राष्ट्रीय पदाधिकारियों तक जिम्मेदारियां तय पार्टी की ओर से जारी दस्तावेज के अनुसार, अभिजीत दिपके (30) को संस्थापक और राष्ट्रीय संयोजक नियुक्त किया गया है. आशुतोष रंका (30) और सौरव दास (27) को सह-संयोजक बनाया गया है. वहीं अजिंक्य शिंदे को राष्ट्रीय संगठन प्रभारी, दीपक बलियान को संगठन सह-प्रभारी, विजय रेड्डी मल्लांगी को मीडिया प्रमुख, रत्ना सिंह को लीगल अफेयर्स प्रमुख, रोहन देशपांडे को टेक्नोलॉजी प्रमुख और योगेश इंगले को फाइनेंस प्रमुख की जिम्मेदारी सौंपी गई है. CJP कार्यकारिणी में सदस्यों की लिस्ट स्त्रीओं को सीमित प्रतिनिधित्व, दो को मिली अहम जिम्मेदारी राष्ट्रीय कार्यकारिणी में स्त्रीओं की भागीदारी सीमित रही है. 12 सदस्यीय टीम में केवल तीन स्त्री पदाधिकारी शामिल हैं. इनमें आफरीन नवाज संगठन की राष्ट्रीय सचिव होंगी, वैष्णवी गौर रिसर्च एवं पॉलिसी से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी संभालेंगी और रत्ना सिंह लीगल मामले संभाला करेंगी. बाकी सभी प्रमुख पद पुरुषों को दिए गए हैं. चार जोन में संगठन, छह महीने में विस्तार का लक्ष्य पार्टी ने देश को चार जोन में बांटते हुए जोनल नेतृत्व की भी घोषणा की है. उत्तर जोन की जिम्मेदारी दीपक बलियान, दक्षिण जोन की विजय रेड्डी मल्लांगी, पूर्व एवं उत्तर-पूर्व जोन की अंकित भारद्वाज और पश्चिम जोन की योगेश इंगले को सौंपी गई है. दस्तावेज में कहा गया है कि अगले छह महीनों में सभी राज्यों, लोकसभा क्षेत्रों और शहर स्तर पर संगठन का विस्तार किया जाएगा. साथ ही स्पष्ट किया गया है कि फिलहाल केवल घोषित पदाधिकारी ही पार्टी के अधिकृत प्रतिनिधि माने जाएंगे. Also read : कोच्चि जा रही फ्लाइट में यात्री ने की इमरजेंसी डोर खोलने की कोशिश, अन्य यात्रियों को भी धमकाया The post CJP ने की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की घोषणा, अभिजीत दीपके की टीम में 3 स्त्रीओं को भी मिली जगह appeared first on Naya Vichar.

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बंगाल बकाया DA मामला : सुप्रीम कोर्ट ने मॉनिटरिंग कमेटी से 2 दिन में मांगी विस्तृत रिपोर्ट

पश्चिम बंगाल के प्रशासनी कर्मचारियों के बकाया महंगाई भत्ते (Dearness Allowance) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्देश दिया है. शीर्ष अदालत द्वारा गठित मॉनिटरिंग कमेटी (Monitoring Committee) को अगले 2 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट मामले से जुड़े सभी पक्षों को सौंपने का आदेश दिया गया है. सुप्रीम कोर्ट में इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी, जहां राज्य प्रशासन के रुख और डीए समस्या के समाधान पर अंतिम रूप से विचार किया जायेगा. सुप्रीम कोर्ट ने बनायी थी मॉनिटरिंग कमेटी पश्चिम बंगाल डीए मामले के मूल फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि राज्य प्रशासन को कर्मचारियों का पूरा बकाया डीए चुकता करना होगा. अदालत ने बकाया डीए का 25 प्रतिशत हिस्सा तुरंत भुगतान करने का निर्देश दिया था. साथ ही कहा था कि शेष 75 प्रतिशत बकाया राशि का भुगतान किश्तों में किस प्रकार किया जाये, ताकि राज्य के खजाने पर अचानक अत्यधिक वित्तीय बोझ न पड़े, इसका खाका तैयार करने के लिए एक मॉनिटरिंग कमेटी गठित की थी. ये भी पढ़ें: बंगाल के प्रशासनी कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले, शुभेंदु अधिकारी का ऐलान- केंद्र के बराबर मिलेगा महंगाई भत्ता सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल फॉर्मेट में मांगी रिपोर्ट न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की खंडपीठ ने निर्देश दिया है कि कमेटी अपनी रिपोर्ट को डिजिटल प्रारूप (Digital Format) में 2 दिन के भीतर सभी पक्षों को उपलब्ध कराये. इस रिपोर्ट में जो जानकारी देने के लिए कहा गया है, वे इस प्रकार हैं. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का कितना पालन हुआ है. डीए भुगतान की प्रक्रिया कहां तक पहुंची है. अब तक कितना बकाया चुकाया गया है और कितना बाकी है. शेष राशि चुकाने के लिए राज्य प्रशासन की क्या योजना है. 85 फीसदी डीए देने को तैयार बंगाल प्रशासन पश्चिम बंगाल की शुभेंदु अधिकारी प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में एक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर उसे अपनी वित्तीय स्थिति से अवगत कराया है. राज्य का तर्क है कि भारी वित्तीय बोझ के कारण 100 प्रतिशत डीए का एकमुश्त भुगतान संभव नहीं है. प्रशासन ने अदालत से 85 प्रतिशत बकाया डीए चुकाने की अनुमति मांगी है और बाकी 15 प्रतिशत की छूट की प्रार्थना की है. ये भी पढ़ें: बंगाल में बकाया डीए देने की प्रक्रिया शुरू, इस पोर्टल पर मिलेगी राशि की जानकारी 11 साल का 11,983 करोड़ रुपए का होना है भुगतान पश्चिम बंगाल की शुभेंदु अधिकारी प्रशासन ने बताया है कि वर्ष 2008 से 2019 तक के कर्मचारियों के बकाया डीए के रूप में कुल 11,983 करोड़ रुपए का भुगतान किया जाना है. प्रशासन ने पहली किस्त जारी कर दी है. इसमें कर्मचारियों को 7,771 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया है. किस्तों का टाइमलाइन पहली किस्त के रूप में 7,771 करोड़ रुपए जारी किये जा चुके हैं. दूसरी किस्त जनवरी 2027 में दी जायेगी. तीसरी किस्त जुलाई 2027 में दी जायेगी. चौथी किस्त जनवरी 2028 में देकर पूरा भुगतान समाप्त करने की योजना है. ये भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल का बजट : प्रशासनी कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 4 प्रतिशत बढ़ाने का ऐलान कर्मचारी संगठन का दावा- अभी तक नहीं मिला एक पैसा गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कर्मचारी संगठन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने पीठ के समक्ष दावा किया कि प्रशासन द्वारा डीए भुगतान की बातें किये जाने के बावजूद उनके मुवक्किलों को अब तक एक भी रुपया प्राप्त नहीं हुआ है. ये भी पढ़ें: बकाया डीए पर सुप्रीम कोर्ट में राज्य प्रशासन ने दी अर्जी केंद्रीय डीए से अभी भी 22 प्रतिशत का अंतर वर्तमान में केंद्रीय कर्मचारियों को 60 प्रतिशत की दर से डीए मिल रहा है. पश्चिम बंगाल प्रशासन ने हालिया बजट में डीए की दर में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है, जिससे अगस्त महीने से राज्य के कर्मचारियों को 38 प्रतिशत की दर से डीए मिल रहा है. हालांकि, इस बढ़ोतरी के बावजूद राज्य और केंद्र के डीए में अभी भी 22 प्रतिशत का अंतर बना हुआ है. The post बंगाल बकाया DA मामला : सुप्रीम कोर्ट ने मॉनिटरिंग कमेटी से 2 दिन में मांगी विस्तृत रिपोर्ट appeared first on Naya Vichar.

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Deepak Prakash MLC Oath: दीपक प्रकाश ने ली MLC पद की शपथ, मंत्री पद अब पूरी तरह सुरक्षित

Deepak Prakash MLC Oath: बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश अब विधान परिषद के सदस्य (MLC) बन गए हैं. एमएलसी पद की शपथ लेने के बाद उन्होंने अपने पिता और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के पैर छूकर आशीर्वाद लिया. दीपक प्रकाश को बीजेपी नेता देवेश कुमार के इस्तीफे से खाली हुई सीट पर मनोनीत किया गया है. वे अब तक बिहार विधानसभा या विधान परिषद में से किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे और बिना चुनाव जीते ही सम्राट चौधरी प्रशासन में मंत्री पद संभाल रहे थे. राज्यपाल से मंजूरी के बाद राजभवन से जारी हुआ फैसला बीजेपी नेता देवेश कुमार के इस्तीफा देने के बाद खाली हुई सीट पर दीपक प्रकाश को मनोनीत करने का प्रस्ताव सम्राट चौधरी प्रशासन ने राजभवन भेजा था. राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने इस प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी. इसके बाद आधिकारिक प्रक्रिया पूरी करते हुए उन्हें विधान परिषद के सदस्य के रूप में शपथ दिलाई गई. एमएलसी बनते ही लंबे समय से चला आ रहा सस्पेंस अब पूरी तरह खत्म हो गया है. सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद लिया गया फैसला दीपक प्रकाश को एमएलसी बनाने के पीछे सुप्रीम कोर्ट का दबाव मुख्य कारण माना जा रहा है. दरअसल, बिना सदन का सदस्य बने मंत्री पद पर रहने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी. पिछले हफ्ते कोर्ट ने बिहार प्रशासन से सवाल पूछते हुए पूछा था कि कोई व्यक्ति बिना विधायक या एमएलसी बने इतने लंबे समय तक मंत्री पद पर कैसे रह सकता है? बिहार की ताजा समाचारों के लिए क्लिक करें 27 अगस्त की अगली सुनवाई से पहले सुरक्षित हुई कुर्सी इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 27 अगस्त को होनी तय है. लेकिन अदालत की अगली तारीख से पहले ही राज्य प्रशासन ने उन्हें एमएलसी बनाकर उनके मंत्री पद पर मंडरा रहे कानूनी संकट को खत्म कर दिया है. अब वे कानूनी रूप से सदन के सदस्य बन चुके हैं. इससे उनका मंत्री पद सुरक्षित हो गया है. इसे भी पढ़ें: पटना से गया तक चली तबादला एक्सप्रेस, बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में 20 अफसरों का ट्रांसफर पहले नीतीश और फिर सम्राट प्रशासन में बने मंत्री उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश सबसे पहले नवंबर 2025 में तत्कालीन नीतीश कुमार की प्रशासन में मंत्री बनाए गए थे. वे एनडीए प्रशासन में अपनी पार्टी (RLM) के कोटे से अकेले मंत्री थे. उस समय भी वे किसी सदन के सदस्य नहीं थे और अप्रैल 2026 तक मंत्री रहे. इसके बाद 7 मई 2026 को जब सम्राट चौधरी बिहार के मुख्यमंत्री बने और नई कैबिनेट का विस्तार हुआ, तो दीपक प्रकाश को दोबारा मंत्री बनाया गया और वे लगातार बिना चुनाव जीते मंत्री पद पर बने हुए थे. इसे भी पढ़ें:  बिहार में इस उद्योग के लिए प्रशासन देगी 70 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी, एक क्लिक में होगा आवेदन The post Deepak Prakash MLC Oath: दीपक प्रकाश ने ली MLC पद की शपथ, मंत्री पद अब पूरी तरह सुरक्षित appeared first on Naya Vichar.

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गोबरधन योजना को कैबिनेट की हरी झंडी: 10 गुना बढ़ेगा CBG उत्पादन, 1.5 लाख को रोजगार

सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया, इस योजना के तहत कृषि अपशिष्ट, पशुओं के गोबर, गन्ने की खोई और शहरी जैविक कचरे का उपयोग करके स्वच्छ ईंधन व जैविक खाद तैयार की जाएगी. इससे ग्रामीण आय बढ़ाने के साथ-साथ राष्ट्रीय आर्थिक मूल्य में भी इजाफा होगा. प्रशासन का अनुमान है कि इस पहल से अगले एक दशक में सीबीजी उत्पादन में 10 गुना बढ़ोतरी होगी, जिससे राष्ट्रीय जीडीपी में लगभग 75,000 करोड़ रुपये का योगदान मिलेगा और करीब 1.5 लाख नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे. योजना के छह पिलर पक्का ऑफटेक: उत्पादित सीबीजी की बिक्री की गारंटी दी जाएगी. मूल्य स्थिरता: वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव से बायोगैस क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए एक स्थिर मूल्य प्रणाली बनाई गई है. कैपेक्स सहायता: बायोगैस प्लांट लगाने के लिए आवश्यक पूंजीगत खर्च में वित्तीय मदद दी जाएगी. पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर: उत्पादित बायोगैस को प्लांट से ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए पाइपलाइन नेटवर्क का विकास किया जाएगा. इसे सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) और पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) नेटवर्क से जोड़ा जाएगा. क्रेडिट गारंटी: एमएसएमई (MSME) और विशेष रूप से स्त्रीओं के नेतृत्व वाले उद्यमों को आसान ऋण सहायता उपलब्ध कराई जाएगी. इनोवेशन: बायोगैस क्षेत्र में नई तकनीक और नवाचार को बढ़ावा दिया जाएगा. ये भी पढ़ें: पीएम मोदी का फेसबुक पोस्ट हटाने पर मेटा ने मांगी माफी, पैसा लेकर कंटेंट बूस्ट करने का खुलासा ये भी पढ़ें: 30 करोड़ से बदलेगा राजखरसावां रेलवे स्टेशन का स्वरूप, मिलेगी लिफ्ट-एस्केलेटर समेत आधुनिक सुविधाएं The post गोबरधन योजना को कैबिनेट की हरी झंडी: 10 गुना बढ़ेगा CBG उत्पादन, 1.5 लाख को रोजगार appeared first on Naya Vichar.

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