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संसद में बोले गौरव गोगोई, 21 छात्रों की मौत के लिए जिम्मेदार है सरकार

Congress MP Gaurav Gogoi : कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा की. उन्होंने NEET पेपर लीक 21 छात्रों के सुसाइड का जिम्मेदार केंद्र प्रशासन को ठहराया. एएनआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक, गोगोई ने कहा कि प्रशासन शिक्षा क्षेत्र में सुधार को लेकर गंभीर पहल नहीं है. उन्होंने कहा कि 2 साल पहले भी इसी तरह का कानून लाया गया था, लेकिन उससे कोई बदलाव नहीं हुआ. उन्होंने NEET-UG 2024 पेपर लीक मामले का हवाला देते हुए कहा कि आरोपपत्र में शामिल 45 आरोपियों में से 44 को जमानत मिल चुकी है, जो प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल खड़े करता है, ’21 छात्रों की मौत पर भी जवाबदेही नहीं’ सांसद गौरव गोगोई ने दावा किया कि परीक्षा व्यवस्था की खामियों के कारण 21 छात्रों ने आत्महत्या कर ली. उन्होंने कहा कि जिस मंत्री के कार्यकाल में यह सब हुआ, उनके इस्तीफे के बाद सदन में लौटने पर उनका स्वागत ऐसे किया गया, मानो उन्होंने कोई बड़ी जीत हासिल की हो. उन्होंने इसे केंद्र प्रशासन की संवेदनहीनता का उदाहरण बताया. पीएम मोदी के इंट्राग्राम पर ध्यान देने वाले बयान को लेकर कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई संसद में हमलावर दिखे. उन्होंने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री कैबिनेट मिटिंग में पेपर लीक माफिया को कैसे रोका जाए, पेपर साल्वर को कैसे पकड़ा जाए और परीक्षा प्रणाली में सुधार करने की चर्चा के बजाय. यह कहते हैं कि इंट्राग्राम पर ध्यान दो. यह कितनी शर्मनाक बात है. ‘ असम के लिए विशेष पैकेज की मांग कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने लोकसभा में असम में आई भीषण बाढ़ का मुद्दा उठाते हुए केंद्र प्रशासन से राज्य के लिए विशेष राहत पैकेज देने की मांग की. उन्होंने कहा कि बाढ़ के कारण लगभग 70 लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों परिवार प्रभावित हुए हैं. गोगोई ने कहा कि भारी मन से वह केंद्र प्रशासन से अपील करते हैं कि असम के लोगों की मदद के लिए तत्काल विशेष आर्थिक सहायता दी जाए. इंस्टाग्राम पर फोकस, शिक्षा सुधार पर नहीं कांग्रेस सांसद गोगोई ने आरोप लगाया कि प्रशासन शिक्षा माफिया, पेपर लीक गिरोह और परीक्षा केंद्रों में फैले भ्रष्टाचार पर प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रही है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शिक्षा सुधार पर व्यापक चर्चा करनी चाहिए थी, लेकिन प्रशासन का ज्यादा ध्यान सोशल मीडिया और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर दिखाई देता है. गोगोई ने कहा कि मौजूदा संशोधन विधेयक भी पहले की तरह केवल दिखावा साबित होगा और शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों का समाधान नहीं कर पाएगा. यह भी पढ़ें- संसद में पेपर लीक पर बहस: जितेंद्र सिंह ने कहा, कांग्रेस राज में लीक होते रहे पेपर, हमने बनाया फुलप्रूफ सिस्टम The post संसद में बोले गौरव गोगोई, 21 छात्रों की मौत के लिए जिम्मेदार है प्रशासन appeared first on Naya Vichar.

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बिहार सचिवालय के कर्मचारियों के लिए नई गाइडलाइन जारी, जींस-टीशर्ट पहनकर आने पर रोक, छुट्टी के भी नियम बदले

Bihar Secretariat New Guidelines: बिहार सचिवालय में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए सामान्य प्रशासन विभाग ने नई गाइडलाइन जारी की है. इसमें कार्यालय में उपस्थिति, ड्रेस कोड, अवकाश और कार्यशैली को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं. सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. बी. राजेंद्र की ओर से जारी इस गाइडलाइन का उद्देश्य सचिवालय में अनुशासन और वर्किंग कल्चर को और बेहतर बनाना है. जींस-टीशर्ट पहनकर ऑफिस आने पर रोक नई गाइडलाइन के अनुसार, कोई भी अधिकारी या कर्मचारी कैजुअल ड्रेस, जींस या टी-शर्ट पहनकर कार्यालय नहीं आएगा. सभी कर्मचारियों को साफ-सुथरे, व्यवस्थित और निर्धारित ड्रेस कोड के अनुरूप परिधान पहनने होंगे. साथ ही कार्यालय समय के दौरान सभी के लिए पहचान पत्र (आईडी कार्ड) पहनना भी अनिवार्य होगा. देर से आने पर होगी अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रशासन ने समय पालन को लेकर भी सख्त निर्देश दिए हैं. सभी कर्मचारियों को तय समय पर कार्यालय पहुंचना होगा और निर्धारित समय तक कार्यालय में रहना होगा. बायोमेट्रिक उपस्थिति के आधार पर देर से आने, समय से पहले कार्यालय छोड़ने या बिना अनुमति अनुपस्थित रहने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा. जरूरत पड़ने पर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाएगी. देर होने पर पहले लेनी होगी अनुमति अगर किसी कर्मचारी को किसी विशेष कारण से देर से आना है या समय से पहले कार्यालय छोड़ना है, तो उसे पहले सक्षम अधिकारी से अनुमति लेनी होगी. आपात स्थिति में यह अनुमति फोन या व्हाट्सएप के माध्यम से भी ली जा सकती है. हालांकि सामान्य परिस्थितियों में बिना अनुमति कार्यालय छोड़ने की अनुमति नहीं होगी. बिना स्वीकृति के छुट्टी नहीं मिलेगी गाइडलाइन में अवकाश को लेकर भी स्पष्ट नियम तय किए गए हैं. किसी भी कर्मचारी को बिना अवकाश स्वीकृत कराए कार्यालय से नहीं जाना होगा. अगर कोई आकस्मिक स्थिति आती है, तो कर्मचारी को पहले संबंधित अधिकारी को फोन या व्हाट्सएप के जरिए जानकारी देनी होगी. इसके बाद ही अवकाश लिया जा सकेगा. बिहार की ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें सेवा संवर्ग के अनुसार तय किए गए दायित्व सामान्य प्रशासन विभाग ने बताया कि हाल के वर्षों में कई सेवा संवर्गों की संरचना और पदनाम में बदलाव हुआ है. इसी वजह से नई कार्य प्रणाली और जिम्मेदारियों को स्पष्ट करने के लिए यह विस्तृत गाइडलाइन जारी की गई है. इसमें आशुलिपिक, सचिवालय सहायक, वरीय सचिवालय सहायक, सहायक प्रशाखा पदाधिकारी और प्रशाखा पदाधिकारी समेत विभिन्न पदों के दायित्व और कार्यप्रणाली का भी उल्लेख किया गया है. अनुशासन और जवाबदेही पर प्रशासन का जोर प्रशासन का कहना है कि नई गाइडलाइन का उद्देश्य सचिवालय में अनुशासन, जवाबदेही और बेहतर कार्य संस्कृति विकसित करना है. अब सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को इन निर्देशों का पालन अनिवार्य रूप से करना होगा. Also Read: BPSC TRE-3 पेपर लीक केस में कार्रवाई, EOU ने MBBS डॉक्टर को किया गिरफ्तार, 30 अभ्यर्थियों को हजारीबाग ले जाने का आरोप The post बिहार सचिवालय के कर्मचारियों के लिए नई गाइडलाइन जारी, जींस-टीशर्ट पहनकर आने पर रोक, छुट्टी के भी नियम बदले appeared first on Naya Vichar.

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दिल्ली में आफत की बारिश: जलभराव से सड़कें बनीं तालाब, IMD ने जारी किया ऑरेंज अलर्ट

मौसम विभाग (IMD) ने दिल्ली-एनसीआर के लिए बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. आईएमडी के वरिष्ठ वैज्ञानिक नरेश कुमार के अनुसार, स्थिति को देखते हुए सुबह येलो अलर्ट को बदलकर ऑरेंज अलर्ट कर दिया गया है, क्योंकि आगे भी तेज बारिश की संभावना है. सुबह से रुक-रुक कर हो रही बारिश मौसम के मिजाज की बात करें तो सुबह से ही दिल्ली में काले बादल छाए हुए हैं और रुक-रुक कर तेज बारिश हो रही है. सुबह 8:30 बजे तक दर्ज आंकड़ों के मुताबिक रिज: 37.6 मिमी लोधी रोड: 36.7 मिमी सफदरजंग: 32.4 मिमी आया नगर: 4.0 मिमी पालम: 0.8 मिमी The post दिल्ली में आफत की बारिश: जलभराव से सड़कें बनीं तालाब, IMD ने जारी किया ऑरेंज अलर्ट appeared first on Naya Vichar.

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Batwara 1947 ट्रेलर लॉन्च से आमिर खान क्यों रहे गायब? Sonam Wangchuk Controversy से जोड़ रहे लोग

Batwara 1947 Trailer Launch: ‘बंटवारा 1947’ का ट्रेलर रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर फिल्म को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया. लेकिन ट्रेलर से ज्यादा चर्चा आमिर खान की होने लगी, वजह थी उनकी गैरमौजूदगी. अपनी ही प्रोडक्शन फिल्म के ट्रेलर लॉन्च में जब आमिर नजर नहीं आए, तो सोशल मीडिया पर तरह-तरह के कयास लगने शुरू हो गए. कई लोगों ने इसे हाल ही में हुए सोनम वांगचुक कंट्रोवर्सी से जोड़ दिया. दरअसल, कुछ दिन पहले आमिर ने ‘3 इडियट्स’ के अपने आइकॉनिक किरदार रैंचो को लेकर कहा था कि यह सोनम वांगचुक पर आधारित नहीं था. उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर जमकर बहस हुई और आमिर ट्रोलर्स के निशाने पर भी आ गए. ऐसे में कई लोगों को उम्मीद थी कि ‘बंटवारा 1947’ के ट्रेलर लॉन्च में वह इस पूरे विवाद पर अपनी चुप्पी तोड़ेंगे. लेकिन जब आमिर इवेंट में नजर ही नहीं आए, तो कुछ यूजर्स ने कयास लगाने शुरू कर दिए कि शायद वह इस विवाद से जुड़े सवालों से बचना चाहते हैं. हालांकि, यह सस्पेंस ज्यादा देर तक नहीं रहा. Aamir Khan Productions की नई CEO अपर्णा पुरोहित ने स्टेज से ही उनकी गैरमौजूदगी की असली वजह बता दी. Aparna Purohit Statement: आखिर क्यों नहीं पहुंचे आमिर खान? ट्रेलर लॉन्च के दौरान जब आमिर खान की गैरमौजूदगी को लेकर सवाल उठने लगे, तब आमिर खान प्रोडक्शंस की नई CEO अपर्णा पुरोहित ने इस पर सफाई दी. उन्होंने बताया कि आमिर खान बीती रात लंदन से हिंदुस्तान आने वाले थे, लेकिन उनकी फ्लाइट कैंसिल हो गई. इसी वजह से वह ट्रेलर लॉन्च का हिस्सा नहीं बन पाए. अपर्णा ने कहा कि अगर फ्लाइट कैंसिल नहीं होती, तो आमिर इस इवेंट में जरूर मौजूद रहते. NEET Protest: यहीं से शुरू हुआ पूरा बवाल पूरे विवाद की शुरुआत जुलाई 2026 में हुई, जब सोनम वांगचुक शिक्षा व्यवस्था और NEET पेपर लीक के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठ गए. जैसे-जैसे उनकी तबीयत बिगड़ने लगी, सोशल मीडिया पर ‘3 इडियट्स’ की टीम से उनके समर्थन में सामने आने की मांग तेज हो गई. इसी बीच फिल्म में ‘चतुर रामलिंगम’ का किरदार निभाने वाले ओमी वैद्य ने एक वीडियो शेयर कर दिया, जिसने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया. वीडियो में उन्होंने दावा किया कि फुनसुख वांगड़ू (रैंचो) का किरदार असल में सोनम वांगचुक से प्रेरित था. बस फिर क्या था, वीडियो देखते ही देखते वायरल हो गया और सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई. इसके बाद लोगों ने आमिर खान से भी जवाब मांगना शुरू कर दिया कि आखिर सच क्या है. Sonam Wangchuk Controversy: आमिर खान ने क्या कहा था? बढ़ते विवाद के बीच लंदन इंडियन फिल्म फेस्टिवल में आमिर खान से इस मुद्दे पर सवाल पूछा गया. इस दौरान उन्होंने साफ कहा कि ‘3 इडियट्स’ बनते समय न वह, न निर्देशक राजकुमार हिरानी और न ही लेखक अभिजात जोशी सोनम वांगचुक को जानते थे. आमिर ने यह भी कहा कि ओमी वैद्य ने वीडियो में जो दावा किया, वह सही नहीं है. हालांकि उन्होंने सोनम वांगचुक के काम की तारीफ करते हुए कहा कि उन्हें सम्मान देने के लिए किसी फिल्म के किरदार से जोड़ना जरूरी नहीं है. साथ ही उन्होंने उनकी बिगड़ती सेहत पर चिंता जताई और अनशन खत्म करने की अपील भी की. 17 साल बाद बयान देने पर क्यों उठे सवाल? आमिर खान का यह बयान सामने आते ही सोशल मीडिया पर नई बहस शुरू हो गई. लोगों का कहना था कि अगर फुनसुख वांगड़ू का किरदार सोनम वांगचुक से प्रेरित नहीं था, तो यह बात 17 साल बाद क्यों बताई गई? कई यूजर्स ने आमिर पर सवाल उठाए, जबकि कुछ ने कहा कि यह बयान ऐसे समय में आया, जब सोनम वांगचुक अनशन पर बैठे थे. सोशल मीडिया पर आमिर को लेकर कई पोस्ट वायरल होने लगे. वहीं, कुछ नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी आमिर के बयान के समय पर सवाल उठाए. कुछ लोगों ने सोनम वांगचुक के पुराने इंटरव्यू का भी हवाला दिया, जिसमें उन्होंने बताया था कि ‘3 इडियट्स’ की टीम लद्दाख में उनके स्कूल देखने पहुंची थी. यही वजह रही कि ‘बंटवारा 1947’ के ट्रेलर लॉन्च में जब आमिर नजर नहीं आए, तो सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने उनकी गैरमौजूदगी को इसी विवाद से जोड़कर देखना शुरू कर दिया. ये भी पढ़ें: Batwara 1947 Trailer: जलते घर, चीखते लोग और बिछड़ते रिश्ते… सनी देओल की फिल्म ने दिखाया 1947 के बंटवारे का दर्द The post Batwara 1947 ट्रेलर लॉन्च से आमिर खान क्यों रहे गायब? Sonam Wangchuk Controversy से जोड़ रहे लोग appeared first on Naya Vichar.

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बेड के अंदर छिपाई लाश, बदबू दबाने को परफ्यूम छिड़कते रहे कातिल, यूपी के ब्लाइंड मर्डर की कहानी सुनकर रह जाएंगे हैरान

UP News: उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के हरदुआगंज थाना क्षेत्र में सामने आए ब्लाइंड मर्डर केस का पुलिस ने खुलासा कर दिया है. पुलिस के अनुसार, प्रेम प्रसंग के विवाद में एक युवक की हत्या कर उसका शव करीब 24 घंटे तक घर के बेड के नीचे बोरे में छिपाकर रखा गया. बदबू रोकने के लिए आरोपी पूरे दिन परफ्यूम छिड़कते रहे और अगले दिन देर रात शव को बाइक से ले जाकर नहर किनारे फेंक दिया. मामले में स्त्री, उसके पति और उसके दूसरे प्रेमी को गिरफ्तार किया गया है. प्रेम प्रसंग बना हत्या की वजह पुलिस जांच में सामने आया कि मृतक अमित का स्त्री कल्पना से प्रेम संबंध था. घटना वाली रात अमित स्त्री के घर पहुंचा, जहां पहले से स्त्री का दूसरा प्रेमी लोकेश मौजूद था. इसी दौरान विवाद बढ़ गया. पुलिस के मुताबिक, स्त्री ने लोकेश के साथ मिलकर पीछे से फूंकनी से अमित के सिर पर हमला किया. बेहोश होने के बाद उसकी लात-घूंसों से पिटाई की गई, जिससे उसकी मौत हो गई. स्त्री का पति संजू भी वारदात में शामिल था. 24 घंटे तक बेड के नीचे रखा शव, फिर नहर किनारे फेंका हत्या के बाद आरोपियों ने शव को बोरे में बांधकर सिंगल बेड के नीचे छिपा दिया. बदबू न फैले, इसके लिए कमरे में लगातार परफ्यूम छिड़कते रहे. अगले दिन देर रात शव को बाइक पर ले जाकर माछुआ नहर के पास फेंक दिया. पुलिस के अनुसार, घटना 30 अप्रैल की रात हुई थी, जबकि 2 मई को शव बरामद हुआ था. ढाई महीने बाद ऐसे खुला ब्लाइंड मर्डर केस शुरुआत में शव की पहचान नहीं हो सकी, जिससे मामला पूरी तरह ब्लाइंड मर्डर बना रहा. करीब ढाई महीने बाद मृतक अमित की पहचान होने पर पुलिस ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई. पूछताछ में स्त्री कल्पना ने अपना जुर्म कबूल कर लिया, जिसके बाद पुलिस ने हत्या की पूरी साजिश का खुलासा करते हुए तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. Also Read: बैराज से बढ़ा पानी का डिस्चार्ज, प्रयागराज में DM ने तटवर्ती इलाकों को किया अलर्ट The post बेड के अंदर छिपाई लाश, बदबू दबाने को परफ्यूम छिड़कते रहे कातिल, यूपी के ब्लाइंड मर्डर की कहानी सुनकर रह जाएंगे हैरान appeared first on Naya Vichar.

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Maruti Brezza खरीदने जा रहे हैं? जानिए कौन-सी ऑफिशियल एक्सेसरीज हैं सबसे ज्यादा काम की

नई कार खरीदते समय ज्यादातर लोग केवल वेरिएंट और फीचर्स पर ध्यान देते हैं, लेकिन सही एक्सेसरीज चुनना भी उतना ही जरूरी होता है. Maruti Suzuki ने 2026 Brezza के लिए अपनी ऑफिशियल जेन्युइन एक्सेसरीज रेंज को अपडेट किया है, जिससे ग्राहक अपनी SUV को अपनी जरूरत और पसंद के हिसाब से कस्टमाइज कर सकते हैं. अच्छी बात यह है कि ये सभी एक्सेसरीज Brezza के लिए खास तौर पर डिजाइन की गई हैं और डिलीवरी से पहले ही ऑथराइज्ड डीलरशिप पर फिट करवाई जा सकती हैं. लेकिन सवाल यह है कि कौन-सी एक्सेसरीज वाकई पैसे वसूल हैं और किन पर अतिरिक्त खर्च करने की जरूरत नहीं है. एक्सटीरियर को मिलेगा स्टाइलिश और प्रीमियम लुक अगर आप अपनी मारुति सुजुकी ब्रेजा (Maruti Suzuki Brezza) को बिना किसी बड़े मॉडिफिकेशन के अलग पहचान देना चाहते हैं तो कंपनी कई स्टाइलिंग एक्सेसरीज देती है. इसमें फ्रंट ग्रिल, हेडलैंप, टेललैंप और टेलगेट के लिए क्रोम गार्निश किट शामिल हैं. इसके अलावा बॉडी साइड मोल्डिंग, डोर वाइजर, बंपर प्रोटेक्टर और व्हील आर्च क्लैडिंग जैसे विकल्प भी उपलब्ध हैं. एलॉय व्हील स्टाइलिंग एक्सेसरीज, इल्यूमिनेटेड डोर सिल गार्ड और प्रीमियम ग्राफिक्स पैकेज SUV के लुक को और आकर्षक बना सकते हैं. वहीं मड फ्लैप और बंपर प्रोटेक्टर जैसी एक्सेसरीज रोजमर्रा की ड्राइविंग में छोटे-मोटे स्क्रैच, पत्थरों और पार्किंग के दौरान होने वाले नुकसान से बचाने में मदद करती हैं. अगर आपकी कार अक्सर खुले में पार्क रहती है तो बॉडी कवर और डोर एज प्रोटेक्टर लंबे समय तक कार की बाहरी फिनिश को बेहतर बनाए रखने में उपयोगी साबित हो सकते हैं. कैबिन को ज्यादा आरामदायक और प्रैक्टिकल बनाती हैं ये एक्सेसरीज Brezza के इंटीरियर के लिए भी कंपनी ने कई उपयोगी एक्सेसरीज पेश की हैं. अलग-अलग डिजाइन वाले सीट कवर, ऑल-वेदर फ्लोर मैट, 3D मैट, बूट मैट और लगेज ट्रे कैबिन की सफाई आसान बनाने के साथ इंटीरियर को भी सुरक्षित रखते हैं. इसके अलावा वायरलेस चार्जर, एम्बिएंट लाइटिंग किट, सनशेड, एयर प्यूरिफायर, परफ्यूम डिफ्यूजर, कैबिन ऑर्गेनाइजर और नेक कुशन जैसी एक्सेसरीज लंबी यात्राओं को ज्यादा आरामदायक बना सकती हैं. जो लोग अक्सर परिवार के साथ ट्रैवल करते हैं, उनके लिए ये विकल्प काफी उपयोगी साबित हो सकते हैं. अगर सफर के दौरान अतिरिक्त सामान ले जाना पड़ता है तो कंपनी रूफ कैरियर और कार्गो ऑर्गेनाइजर जैसे विकल्प भी देती है. हर एक्सेसरी खरीदना जरूरी नहीं, समझदारी से करें चुनाव नई कार बुक करते समय कई बार ग्राहक उत्साह में जरूरत से ज्यादा एक्सेसरीज जोड़ लेते हैं. लेकिन हर एक्सेसरी उतनी उपयोगी नहीं होती. अगर आपका मकसद कार को सुरक्षित रखना है तो सबसे पहले फ्लोर मैट, मड फ्लैप, रियर बंपर प्रोटेक्टर और बूट लाइनर जैसी जरूरी एक्सेसरीज चुनना बेहतर रहेगा. अगर आप SUV को ज्यादा प्रीमियम लुक देना चाहते हैं तो क्रोम गार्निश पैकेज, इल्यूमिनेटेड सिल गार्ड और एलॉय व्हील एक्सेसरीज सबसे ज्यादा विजुअल बदलाव लाती हैं, जबकि कार का ओरिजिनल डिजाइन भी बरकरार रहता है. जेन्युइन एक्सेसरीज क्यों हैं बेहतर विकल्प? ऑफिशियल Maruti Suzuki जेन्युइन एक्सेसरीज का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इन्हें Brezza के लिए ही तैयार किया गया है. इसलिए इनकी फिटिंग बेहतर होती है और इन्हें डिलीवरी से पहले ही डीलरशिप पर इंस्टॉल कराया जा सकता है. आफ्टरमार्केट एक्सेसरीज की तुलना में ये बेहतर फिनिश और भरोसेमंद फिटमेंट देती हैं. ऐसे में सभी एक्सेसरीज खरीदने की बजाय अपनी जरूरत के हिसाब से सही विकल्प चुनना ज्यादा समझदारी वाला फैसला हो सकता है. ये भी पढ़ें: Maruti Brezza Facelift खरीदने का प्लान है? जान लीजिए इसके टॉप मॉडल ZXI Plus में क्या-क्या मिलता है The post Maruti Brezza खरीदने जा रहे हैं? जानिए कौन-सी ऑफिशियल एक्सेसरीज हैं सबसे ज्यादा काम की appeared first on Naya Vichar.

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संसद में पेपर लीक पर बहस: जितेंद्र सिंह ने कहा, कांग्रेस राज में लीक होते रहे पेपर, हमने बनाया फुलप्रूफ सिस्टम

केंद्रीय मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि अलग-अलग राज्यों और विभिन्न परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं काफी समय से होती रही हैं. यह समस्या किसी एक राज्य तक सीमित नहीं थी, लेकिन अतीत में इसके खिलाफ वैसी कठोर कार्रवाई नहीं की गई जैसी अब मोदी प्रशासन कर रही है. जितेंद्र सिंह ने पूर्ववर्ती कांग्रेस और यूपीए प्रशासनों के कार्यकाल में हुए पेपर लीक का जिक्र करते हुए कहा कि 2009 के रेलवे भर्ती पेपर लीक से लेकर 2012 के एम्स प्रवेश परीक्षा लीक तक कई मामले सामने आए. 1992 और 2010 में गठित कमेटियों ने केंद्रीय परीक्षा कमेटी बनाने के सुझाव दिए थे, जिन्हें तत्कालीन प्रशासनों ने खारिज कर दिया. केंद्रीय मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने गिनाए कांग्रेस काल के पेपर लीक मामले डॉ जितेंद्र सिंह कांग्रेस काल के पेपर लीक मामलों को गिनाते हुए कहा, 2009 में रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड, 2011 में एआईईईई (AIEEE), 2012 में एम्स (AIIMS) नई दिल्ली, और 2013 में महाराष्ट्र सेकेंडरी सर्टिफिकेट परीक्षा का पेपर लीक होना. यदि मैं ऐसी घटनाओं की गिनती कराने बैठूं, तो इस बिल पर चर्चा ही नहीं हो पाएगी. 2010 का उत्तर प्रदेश B.Ed. एंट्रेंस, 2012 का तमिलनाडु लोक सेवा आयोग, और 2009 का पश्चिम बंगाल जॉइंट एंट्रेंस, ये सभी इसके उदाहरण हैं. आज केंद्र प्रशासन के अधीन चार प्रमुख भर्ती एजेंसियां कार्यरत हैं : जितेंद्र सिंह जितेंद्र सिंह ने कहा, “आज केंद्र प्रशासन के अधीन चार प्रमुख भर्ती एजेंसियां कार्यरत हैं—UPSC, SSC, RRB, और IBPS. इसी प्रकार, उच्च शिक्षा में प्रवेश के लिए 2017 में इसी प्रशासन द्वारा नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) का गठन किया गया. एंटी पेपर लीक बिल मील का पत्थर साबित होगा : जितेंद्र सिंह “हमारी प्रशासन ने परीक्षाओं में पारदर्शिता और शुचिता सुनिश्चित करने के लिए ‘नेशनल टेस्टिंग एजेंसी’ (NTA) का गठन किया. जून 2024 में हम कानून लेकर आए और अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर इसे और अधिक मजबूत बनाने के लिए 2026 का संशोधन बिल लाया गया है. यह कानून देश के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा.” – मंत्री जितेंद्र सिंह विपक्ष को चर्चा के लिए जितना वक्त चाहिए, प्रशासन तैयार: किरेन रिजिजू विधेयक की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने संसद में चर्चा का दायरा और समय बढ़ाने की घोषणा की है. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि उन्होंने इस संबंध में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके और एनसीपी समेत तमाम प्रमुख विपक्षी दलों के चीफ व्हिप और नेताओं से बातचीत की है. “शुरुआत में इस बिल पर 6 घंटे की चर्चा तय की गई थी, जिसे बढ़ाकर 8 घंटे करने पर सहमति बनी है. यदि विपक्ष को और अधिक समय चाहिए, तो प्रशासन को कोई आपत्ति नहीं है. हम इस पर 10 घंटे तक भी चर्चा कराने के लिए पूरी तरह तैयार हैं, ताकि एक मजबूत और असरदार कानून सामने आ सके.” – संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू 2024 कानून के मुकाबले 2026 संशोधन बिल में क्या-क्या बदला? केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में बताया, प्रतियोगी परीक्षाओं की पवित्रता और विश्वसनीयता को बहाल करने के उद्देश्य से ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026’ लाया गया है. इस नए संशोधन के जरिए अपराधियों और सर्विस प्रोवाइडरों पर आर्थिक व जेल की सजा के प्रावधानों को दोगुना तक कड़ा कर दिया गया है. व्यक्तिगत दोषियों पर कार्रवाई सजा: पहले 3-5 साल की जेल, अब 5-10 साल की जेल जुर्माना: पहले 10 लाख रुपये तक, अब 50 लाख रुपये तक सर्विस प्रोवाइडर (एजेंसियों) के खिलाफ कड़ाई जुर्माना: पहले 1 करोड़ रुपये तक, अब 5 करोड़ रुपये तक ब्लैकलिस्टिंग : पहले 4 साल तक बैन, अब 8 साल के लिए बैन पेपर लीक माफिया पर शिकंजा सजा: पहले 5-10 साल की जेल, अब 7-10 साल की जेल जुर्माना: पहले 1 करोड़ रुपये तक, अब 10 करोड़ रुपये तक फास्ट-ट्रैक कोर्ट और सख्त समय-सीमा मामलों के त्वरित निपटारे के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतें बनाई जाएंगी. केंद्रीय एजेंसी या स्पेशल टास्क फोर्स को जांच 2 महीने के भीतर अनिवार्य रूप से पूरी करनी होगी. ये भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- 20 जुलाई के CJP प्रोटेस्ट के दौरान जिसने भी ज्यादती की उसे सजा मिलनी चाहिए The post संसद में पेपर लीक पर बहस: जितेंद्र सिंह ने कहा, कांग्रेस राज में लीक होते रहे पेपर, हमने बनाया फुलप्रूफ सिस्टम appeared first on Naya Vichar.

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उद्धव ठाकरे ने अभिजीत दीपके को बताया ‘विष्णु का अवतार’, बोले- एक कॉकरोच ने सिखाया सरकार को सबक

Uddhav Thackeray on Abhijeet Dipke : मुंबई में शिवसेना (UBT) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना की ओर से आयोजित तिरंगा विजय सभा में उद्धव ठाकरे ने सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके को लेकर बड़ा बयान दिया. छत्रपति शिवाजी महाराज पार्क में आयोजित सभा में उन्होंने कहा, “एक कॉकरोच जिसने प्रशासन को सबक सिखाया, वह असली विष्णु का अवतार है. यह अंधभक्तों पर देशभक्तों की जीत है.” उनके इस बयान के बाद सभा में मौजूद समर्थकों ने जोरदार नारेबाजी की. धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रशासन को घेरा उद्धव ठाकरे ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का भी जिक्र किया. उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के उस बयान पर तंज कसा, जिसमें कहा गया था कि एनडीए में इस्तीफे नहीं होते. उद्धव ने कहा, “रक्षा मंत्री ने कहा था कि एनडीए में इस्तीफे नहीं होते, लेकिन धर्मेंद्र प्रधान की रक्षा तो कर नहीं पाए.” उन्होंने इसे छात्रों के आंदोलन की बड़ी जीत बताया. राज ठाकरे ने नहीं की नेतृत्वक टिप्पणी सभा में मनसे प्रमुख राज ठाकरे भी मौजूद रहे, लेकिन उन्होंने कोई बड़ा नेतृत्वक भाषण नहीं दिया. उन्होंने सिर्फ मुंबई पुलिस और दिल्ली पुलिस के कामकाज की तुलना की और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर बात की. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवाओं की मौजूदगी रही. संभावित भीड़ को देखते हुए शिवाजी पार्क और आसपास के इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था. कई रास्तों पर यातायात भी बंद रखा गया. रैली में छात्रों और नेताओं ने क्या कहा धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार ने कहा कि छात्रों पर हुए अन्याय ने पूरे देश के युवाओं को एकजुट कर दिया और यही एकता आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत बनी. वहीं, सभा में शामिल एक समर्थक ने कहा कि प्रशासन सवालों से बच रही थी, लेकिन इस आंदोलन ने उसे जवाबदेह बनने के लिए मजबूर कर दिया. एक छात्रा ने कहा कि लंबे समय तक चले संघर्ष के बाद छात्रों की एक बड़ी मांग पूरी हुई है, इसलिए वे इस जीत का जश्न मनाने पहुंचे हैं. ये भी पढ़ें : भारी बारिश और भूस्खलन से चार धाम यात्रा पर ब्रेक, दो दिन तक नहीं जा सकेंगे श्रद्धालु The post उद्धव ठाकरे ने अभिजीत दीपके को बताया ‘विष्णु का अवतार’, बोले- एक कॉकरोच ने सिखाया प्रशासन को सबक appeared first on Naya Vichar.

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जापान के दक्षिणी कुमामोटो इलाके में 7.1 तीव्रता का भूकंप

जापान के दक्षिणी कुमामोटो इलाके में मंगलवार को 7.1 तीव्रता का भूकंप आया है. यह जानकारी जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने दी है. भूकंप से जानमाल को हानि हुई है या नहीं इसके बारे में अभी कोई सूचना उपलब्ध नहीं है. समाचार अपडेट की जा रही है- The post जापान के दक्षिणी कुमामोटो इलाके में 7.1 तीव्रता का भूकंप appeared first on Naya Vichar.

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Electric Car से बेहतर क्यों हो सकती है Hybrid Car? ये वजहें बदल देंगी आपका फैसला

हिंदुस्तान में इलेक्ट्रिक कारों की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर खरीदार के लिए वही सबसे सही विकल्प है. कई ऐसे लोग हैं जिनकी जरूरतों के हिसाब से Hybrid कार ज्यादा व्यावहारिक साबित होती है. Hybrid तकनीक में पेट्रोल इंजन और इलेक्ट्रिक मोटर दोनों मिलकर काम करते हैं, जिससे ईंधन की बचत भी होती है और चार्जिंग की चिंता भी नहीं रहती. अगर आप नई कार खरीदने की तैयारी कर रहे हैं और हाइब्रिड (Hybrid) तथा इलेक्ट्रिक कार (Electric Car) के बीच उलझन में हैं, तो Hybrid कार के ये बड़े फायदे आपका फैसला आसान बना सकते हैं. चार्जिंग की जरूरत नहीं, सफर रहता है आसान Hybrid कार का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे अलग से चार्ज करने की जरूरत नहीं होती. इसकी बैटरी ब्रेक लगाने के दौरान बनने वाली ऊर्जा और पेट्रोल इंजन की मदद से खुद चार्ज होती रहती है. ऐसे में अपार्टमेंट में रहने वाले या सड़क किनारे पार्किंग करने वाले लोगों को चार्जिंग स्टेशन खोजने की परेशानी नहीं होती. यही वजह है कि Hybrid कार उन लोगों के लिए ज्यादा सुविधाजनक मानी जाती है, जिनके पास घर पर चार्जिंग की व्यवस्था नहीं है. लंबी दूरी और हाईवे पर ज्यादा भरोसेमंद अगर आप अक्सर लंबी दूरी तय करते हैं, तो Hybrid कार ज्यादा सुविधाजनक साबित हो सकती है. पेट्रोल भरवाने में सिर्फ कुछ मिनट लगते हैं, जबकि इलेक्ट्रिक कार को चार्ज होने में ज्यादा समय लग सकता है. इसके अलावा हाईवे या दूर-दराज के इलाकों में चार्जिंग स्टेशन की उपलब्धता हर जगह समान नहीं होती. Hybrid कार में यह चिंता नहीं रहती क्योंकि जरूरत पड़ने पर किसी भी पेट्रोल पंप से ईंधन भरवाकर सफर जारी रखा जा सकता है. हर मौसम में बेहतर भरोसा सर्द मौसम में इलेक्ट्रिक कारों की बैटरी की क्षमता और ड्राइविंग रेंज प्रभावित हो सकती है. वहीं Hybrid कार में पेट्रोल इंजन मौजूद होने के कारण ऐसी स्थिति में भी यात्रा आसानी से जारी रखी जा सकती है. यही वजह है कि अलग-अलग मौसम और लंबी यात्राओं के दौरान Hybrid तकनीक कई लोगों को ज्यादा भरोसेमंद विकल्प लगती है. रोजमर्रा की जिंदगी में नहीं बदलनी पड़ती आदतें Hybrid कार चलाने का तरीका लगभग पारंपरिक पेट्रोल कार जैसा ही होता है. पेट्रोल पंप पर ईंधन भरवाना, लंबी यात्रा की योजना बनाना और रोजाना इस्तेमाल का तरीका पहले जैसा ही रहता है. इसके साथ ही इसमें रीजनरेटिव ब्रेकिंग जैसी तकनीक भी मिलती है, जो ब्रेक लगाने के दौरान बनने वाली ऊर्जा को बैटरी में स्टोर कर ईंधन की बचत में मदद करती है. शहर की ट्रैफिक में यह तकनीक काफी उपयोगी साबित होती है. ग्रामीण इलाकों और आपात स्थिति में भी मिलता है फायदा जहां चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुआ है, वहां Hybrid कार ज्यादा व्यावहारिक साबित होती है. ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को चार्जिंग स्टेशन खोजने की चिंता नहीं करनी पड़ती. अगर किसी वजह से ईंधन खत्म भी हो जाए, तो पेट्रोल की व्यवस्था करना अपेक्षाकृत आसान होता है. वहीं पूरी तरह डिस्चार्ज हुई इलेक्ट्रिक कार के लिए चार्जिंग या टोइंग की जरूरत पड़ सकती है. क्या Hybrid कार आपके लिए सही विकल्प है? अगर आपके पास घर पर चार्जिंग की सुविधा नहीं है, आप अक्सर लंबी दूरी तय करते हैं, हाईवे पर ज्यादा सफर करते हैं या एक ऐसी कार चाहते हैं जो हर परिस्थिति में बिना किसी अतिरिक्त योजना के इस्तेमाल की जा सके, तो Hybrid कार आपके लिए बेहतर विकल्प बन सकती है. हालांकि, अगर आपकी ज्यादातर ड्राइविंग शहर के भीतर होती है और चार्जिंग की सुविधा आसानी से उपलब्ध है, तो इलेक्ट्रिक कार भी एक मजबूत विकल्प हो सकती है. इसलिए कार खरीदने से पहले अपनी जरूरत, ड्राइविंग पैटर्न और भविष्य के खर्च को ध्यान में रखकर ही फैसला लेना चाहिए. ये भी पढ़ें: पलक झपकते ही 0-100 kmph की रफ्तार, ये हैं 5 सबसे फास्टेस्ट इलेक्ट्रिक कारें The post Electric Car से बेहतर क्यों हो सकती है Hybrid Car? ये वजहें बदल देंगी आपका फैसला appeared first on Naya Vichar.

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