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राजस्थान स्कूल विवाद: CJP के आरोप को बीजेपी ने किया खारिज, ग्रामीणों ने कहा-वे स्कूल तोड़ने आए थे तो बहस हुई

Jaipur CJP Clash: राजस्थान के जयपुर जिले के रामपुरा-कंवरपुरा गांव में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की टीम और स्थानीय लोगों के बीच हुए विवाद ने नेतृत्वक रंग ले लिया है. CJP का आरोप है कि प्रशासनी स्कूल की स्थिति देखने पहुंची उनकी टीम पर हमला किया गया, पत्थरबाजी हुई और गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई. वहीं गांव वालों ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि मौके पर सिर्फ तीखी बहस हुई थी. BJP विधायक ने क्या कहा? विवाद के बीच BJP विधायक गोपाल शर्मा ने कहा- CJP क्या है? घर के अंदर Cockroach का क्या काम? घर में शिशु और युवा होते हैं. उनके इस बयान के बाद नेतृत्वक बयानबाजी और तेज हो गई. कांग्रेस ने प्रशासन को घेरा मामले पर राजस्थान के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने हिंसा की निंदा की. उन्होंने कहा कि किसी भी स्थिति में हिंसा सही नहीं है और प्रशासनी स्कूलों की वास्तविक स्थिति लोगों के सामने आनी चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन प्रशासनी स्कूलों की खराब हालत को छिपाने की कोशिश कर रही है. राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भी CJP टीम पर कथित हमले की निंदा की. उन्होंने आरोप लगाया कि टीम का विरोध करने वाले लोग BJP से जुड़े थे और किसी को स्कूल की स्थिति देखने से रोकना गलत है. स्कूल की स्थिति देखने पहुंची थी CJP टीम CJP कार्यकर्ता आशुतोष रांका के मुताबिक उनकी टीम रामपुरा-कंवरपुरा में एक प्रशासनी स्कूल की स्थिति देखने पहुंची थी. उनका दावा है कि यह स्कूल लंबे समय से एक अस्थायी ढांचे में चल रहा है और टीम यह जानना चाहती थी कि पिछले एक साल में यहां क्या सुधार हुआ है. रांका ने आरोप लगाया कि टीम के पहुंचने से पहले ही वहां कुछ लोग मौजूद थे और बाद में उन पर हमला कर दिया गया. रांका का आरोप- पत्थर फेंके, गाड़ियों में तोड़फोड़ हुई आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि CJP कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की गई, पत्थर फेंके गए और उनकी गाड़ियों को नुकसान पहुंचाया गया. उन्होंने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए. रांका ने मांग की कि कथित हमलावरों को 48 घंटे के भीतर गिरफ्तार किया जाए. साथ ही उन्होंने शिक्षा विभाग के उस आदेश को वापस लेने की मांग की, जिसमें प्रशासनी स्कूलों में बाहरी लोगों की एंट्री, मीडिया कवरेज और वीडियो रिकॉर्डिंग को लेकर पाबंदियां लगाई गई हैं. CJP की स्त्री सदस्य ने भी लगाए मारपीट के आरोप CJP टीम की सदस्य संजू ने भी आरोप लगाया कि उनके साथ धक्का-मुक्की की गई और लाठी से हमला किया गया. उनके मुताबिक, टीम यह देखने पहुंची थी कि जिस स्कूल की खराब स्थिति को लेकर पहले सवाल उठे थे, उसमें अब कोई सुधार हुआ है या नहीं. उन्होंने दावा किया कि मौके पर मौजूद लोगों ने उनकी टीम के सदस्यों के साथ मारपीट की और पत्थर भी फेंके. ग्रामीणों ने कहा- कोई हमला नहीं हुआ दूसरी ओर, गांव के लोगों ने CJP के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है. ग्रामीण जुगल किशोर शर्मा का दावा है कि CJP की टीम करीब 200 से 250 लोगों के साथ गांव पहुंची थी. उन्होंने कहा कि गांव वालों ने किसी के साथ मारपीट नहीं की. उनके मुताबिक दोनों पक्षों के बीच बातचीत के दौरान विवाद जरूर हुआ, लेकिन हमला नहीं किया गया. जुगल किशोर ने यह भी दावा किया कि स्कूल की मरम्मत के लिए स्थानीय विधायक की ओर से 12 लाख रुपये की राशि पहले ही मंजूर की जा चुकी है. ग्रामीणों को स्कूल का ढांचा हटाने का था डर ग्रामीण अनु शर्मा ने कहा कि इस स्कूल में करीब 20 से 25 शिशु पढ़ते हैं. उनका दावा है कि स्थानीय लोगों को आशंका थी कि CJP की टीम स्कूल के मौजूदा ढांचे को हटाने की कोशिश कर सकती है. उन्होंने कहा कि इसी बात को लेकर विरोध हुआ और दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई. ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल की मरम्मत के लिए फंड मंजूर हो चुका है. दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग फिलहाल CJP और स्थानीय ग्रामीणों की ओर से घटना को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं. CJP जहां मारपीट, पत्थरबाजी और तोड़फोड़ का आरोप लगा रही है, वहीं ग्रामीणों का कहना है कि मौके पर केवल बहस हुई थी. The post राजस्थान स्कूल विवाद: CJP के आरोप को बीजेपी ने किया खारिज, ग्रामीणों ने कहा-वे स्कूल तोड़ने आए थे तो बहस हुई appeared first on Naya Vichar.

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सूखे होंठों से हैं परेशान? ट्राई करें प्रियंका चोपड़ा का ये आसान DIY लिप स्क्रब

DIY Lip Scrub: लिप्स की केयर के लिए हर बार महंगे प्रोडक्ट खरीदना जरूरी नहीं है. घर पर रखी कुछ आसान चीजों से भी होंठों को नरम और साफ रखने की कोशिश की जा सकती है. प्रियंका चोपड़ा का DIY लिप स्क्रब भी इन दिनों चर्चा में है, जिसमें सी सॉल्ट यानी समुद्री नमक, ग्लिसरीन और गुलाब जल का इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि, इसे इस्तेमाल करने को लेकर स्किन एक्सपर्ट क्या कहती हैं और इसे कितनी बार लगाना सही है, यह जानना भी जरूरी है. प्रियंका चोपड़ा का लिप स्क्रब बनाने के लिए चाहिए ये चीजें इस लिप स्क्रब को बनाने के लिए आपको तीन चीजों की जरूरत होगी. सी सॉल्ट यानी समुद्री नमक ग्लिसरीन गुलाब जल इन चीजों को बहुत कम मात्रा में लेना है, ताकि होंठों पर ज्यादा रगड़ न पड़े. ऐसे तैयार करें लिप स्क्रब सबसे पहले एक छोटी कटोरी लें. इसमें थोड़ा सा सी सॉल्ट यानी समुद्री नमक डालें. अब इसमें कुछ बूंदें ग्लिसरीन और थोड़ा सा गुलाब जल मिलाएं. तीनों चीजों को अच्छी तरह मिलाकर हल्का सा मिश्रण तैयार कर लें. होंठों पर ऐसे लगाएं तैयार मिश्रण को होंठों पर बहुत हल्के हाथ से लगाएं. इसे जोर से रगड़ने की जरूरत नहीं है. कुछ देर हल्के हाथ से लगाने के बाद होंठों को साफ पानी से धो लें. इसके बाद होंठों पर लिप बाम जरूर लगाएं. इस स्क्रब से क्या फायदा हो सकता है? सी सॉल्ट यानी समुद्री नमक होंठों पर जमा सूखी त्वचा को हटाने में मदद कर सकता है. ग्लिसरीन होंठों में नमी बनाए रखने में मदद करती है. वहीं, गुलाब जल होंठों को ठंडक और ताजगी देने में मदद कर सकता है. इससे होंठ कुछ समय के लिए ज्यादा मुलायम और साफ नजर आ सकते हैं. स्किन एक्सपर्ट क्या कहते हैं? View on Instagram स्किन एक्सपर्ट डॉ. रुचि अग्रवाल ने बताया कि सी सॉल्ट होंठों की ऊपर की सूखी त्वचा हटाने में मदद करता है, ग्लिसरीन नमी बनाए रखने में मदद करती है और गुलाब जल होंठों को आराम और नमी देने में मदद कर सकता है. डॉ. रुचि के मुताबिक, इस स्क्रब से होंठ कुछ समय के लिए मुलायम और चमकदार लग सकते हैं. लेकिन यह होंठों का प्राकृतिक रंग नहीं बदलता. लिप स्क्रब सिर्फ ऊपर की सूखी त्वचा को हटाने में मदद करता है. अगर होंठों का रंग गहरा है, तो इसकी वजह धूप, जेनेटिक्स या किसी चीज से बार-बार होने वाली जलन हो सकती है. ऐसे में सिर्फ स्क्रब करने से होंठों का रंग हल्का नहीं होगा. ज्यादा स्क्रब करने से जलन बढ़ सकती है और होंठों का रंग भी और गहरा हो सकता है. इसलिए डॉ. रुचि के मुताबिक, इसे हर दो हफ्ते में सिर्फ एक बार इस्तेमाल करना बेहतर है. इस्तेमाल करते समय इन बातों का रखें ध्यान स्क्रब को बहुत हल्के हाथों से लगाएं. इसे बार-बार इस्तेमाल न करें. स्क्रब के बाद लिप बाम जरूर लगाएं. अगर होंठ कटे या फटे हुए हैं, तो स्क्रब न करें. होंठों पर जलन या परेशानी हो तो इसका इस्तेमाल बंद कर दें. यह भी पढ़ें: अमरूद के पत्तों में छिपे हैं सेहत और ब्यूटी के राज, इन 4 तरीकों से करें इस्तेमाल The post सूखे होंठों से हैं परेशान? ट्राई करें प्रियंका चोपड़ा का ये आसान DIY लिप स्क्रब appeared first on Naya Vichar.

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‘मेरी नौकरी जाएगी या बचेगी?’ — JPSC/JSSC विवाद में सबसे बड़े 7 सवाल

TDPL से जुड़ी परीक्षाओं पर उठे सवालों और JPSC-JSSC भर्ती विवाद के बीच प्रशासन ने JSSC-CGL 2024 समेत TDPL द्वारा कराई गई परीक्षाओं, उनके परिणामों और चयन प्रक्रियाओं को रद्द करने का फैसला किया है. प्रशासन ने 2014 से हुई परीक्षाओं की व्यापक जांच की बात भी कही है. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती. अब असली लड़ाई अदालत, प्रशासन और अभ्यर्थियों के बीच अगले कदम को लेकर है. 1. परीक्षा रद्द हुई तो नौकरी का क्या होगा? यह सबसे बड़ा सवाल है. अगर किसी परीक्षा की पूरी प्रक्रिया ही रद्द कर दी जाती है, तो उससे हुई नियुक्तियों पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर नियुक्त कर्मचारी की नौकरी अपने-आप खत्म हो जाएगी. अदालत यह देख सकती है कि गड़बड़ी पूरी परीक्षा में थी या कुछ उम्मीदवारों/केंद्रों तक सीमित थी. यही वजह है कि अभ्यर्थियों के लिए आगे की कानूनी प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण होगी. JPSC-JSSC आंदोलन 2. पहले से नौकरी कर रहे उम्मीदवारों का क्या? मान लीजिए किसी उम्मीदवार ने परीक्षा पास की, नियुक्ति मिली और वह कई महीनों या वर्षों से नौकरी कर रहा है. अब यदि उस परीक्षा की प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं, तो दो अलग-अलग हित सामने आते हैं- एक तरफ: निष्पक्ष भर्ती और परीक्षा की विश्वसनीयता. दूसरी तरफ: उस उम्मीदवार का अधिकार, जिसने संभवतः अपनी मेहनत से परीक्षा पास की है. इसीलिए अदालतें आम तौर पर यह भी देखती हैं कि क्या पूरी चयन प्रक्रिया दूषित थी या केवल कुछ मामलों में गड़बड़ी हुई. यह सवाल इसलिए और महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रशासन ने TDPL से जुड़ी परीक्षाओं के परिणाम और चयन प्रक्रियाओं को भी जांच के दायरे में रखा है. 3. क्या दोबारा परीक्षा होगी? अगर परीक्षा रद्द होती है, तो सबसे संभावित विकल्पों में से एक री-एग्जाम हो सकता है. लेकिन यहां भी कई सवाल हैं- क्या सभी उम्मीदवार दोबारा परीक्षा देंगे? क्या उम्र सीमा में छूट मिलेगी? क्या आवेदन शुल्क फिर लिया जाएगा? क्या पुराने उम्मीदवारों को सीधे मौका मिलेगा? क्या नया सिलेबस या नई परीक्षा एजेंसी होगी? इन सवालों का जवाब प्रशासन और संबंधित आयोगों की अगली अधिसूचना से ही स्पष्ट होगा. यानी अभ्यर्थियों के लिए ‘परीक्षा रद्द’ होना कहानी का अंत नहीं, बल्कि एक नई परीक्षा प्रक्रिया की शुरुआत हो सकती है. Read more: TDPL की कहानी: Data Processing Company से JPSC-JSSC विवाद तक 4. क्या पुरानी कटऑफ और मेरिट लिस्ट बच सकती है? यह सवाल भी बेहद महत्वपूर्ण है. अगर परीक्षा की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितता साबित होती है, तो पुरानी मेरिट लिस्ट को बनाए रखना मुश्किल हो सकता है. लेकिन यदि जांच में यह सामने आता है कि गड़बड़ी सीमित थी और अधिकांश प्रक्रिया निष्पक्ष रही, तो उम्मीदवार अदालत में पुराने परिणाम को बचाने की मांग कर सकते हैं. यानी फैसला केवल इस बात पर निर्भर नहीं करेगा कि ‘गड़बड़ी हुई या नहीं’, बल्कि इस पर भी कि गड़बड़ी कितनी व्यापक थी और उसका चयन पर कितना असर पड़ा. 5. कोर्ट ने अब तक क्या कहा है? यह मामला यहीं सबसे ज्यादा पेचीदा हो जाता है. राज्य प्रशासन के परीक्षा रद्द करने के फैसलों के बीच झारखंड हाईकोर्ट ने JPSC की 11वीं और 13वीं सिविल सेवा परीक्षाओं और उनसे जुड़ी नियुक्तियों को रद्द करने के प्रशासनी फैसले पर रोक लगाई है. इससे उन सफल अभ्यर्थियों को तत्काल राहत मिली है. इसका सीधा मतलब है: प्रशासन का फैसला अंतिम नहीं है. अदालत यह तय कर सकती है कि किसी परीक्षा को पूरी तरह रद्द करना उचित है या फिर केवल दोषी व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई करके चयन प्रक्रिया को बचाया जा सकता है. 6. TDPL वाली परीक्षाओं का क्या होगा? यही वह सवाल है जिसने पूरे विवाद को बड़ा बना दिया है. TDPL यानी TSR Data Processing Private Limited झारखंड की कई प्रतियोगी परीक्षाओं के संचालन से जुड़ी रही है. अब एजेंसी की भूमिका जांच के केंद्र में है. एजेंसी को लेकर पहले भी कार्रवाई और ब्लैकलिस्टिंग के सवाल उठे थे. इसके बावजूद बाद में उसे परीक्षा संबंधी काम मिला. प्रशासन ने अब TDPL द्वारा कराई गई परीक्षाओं को व्यापक जांच के दायरे में रखा है और उनसे जुड़े परिणाम तथा चयन प्रक्रियाओं को रद्द करने का फैसला किया है. इसका मतलब है कि विवाद अब केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं रहा. 7. प्रशासन बनाम कोर्ट, अगला कदम क्या? अब सबसे दिलचस्प लड़ाई यहीं होगी. प्रशासन का तर्क है कि भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता बहाल करने के लिए कठोर कदम जरूरी हैं. दूसरी तरफ, सफल उम्मीदवारों का तर्क है कि अगर उनकी कोई गलती नहीं है तो उन्हें सामूहिक रूप से दंडित क्यों किया जाए? यही वह जगह है जहां ‘परीक्षा की शुचिता’ और ‘उम्मीदवारों के अधिकार’ आमने-सामने आते हैं. प्रशासन ने भर्ती प्रक्रिया में सुधार के लिए एक उच्चस्तरीय समिति बनाने और 2014 से हुई परीक्षाओं की जांच की बात कही है. वहीं, छात्रों की मांग जांच को CBI जैसी केंद्रीय एजेंसी को सौंपने की भी रही है. असली सवाल: गलती सिस्टम की थी, तो सजा किसे? झारखंड का मौजूदा परीक्षा विवाद आखिरकार इसी सवाल पर आकर टिकता है. अगर सिस्टम में गड़बड़ी थी, तो उसका नुकसान उन युवाओं को कितना उठाना चाहिए जिन्होंने वर्षों तक तैयारी की? और दूसरी तरफ- अगर परीक्षा प्रक्रिया ही संदिग्ध हो गई है, तो केवल नियुक्तियां बचाने के लिए उसे वैध कैसे माना जा सकता है? यही कारण है कि यह मामला सिर्फ JPSC या JSSC का नहीं है. यह उस पूरे भर्ती मॉडल की परीक्षा है जिसमें प्रशासन, आयोग, निजी परीक्षा एजेंसी और लाखों अभ्यर्थियों के बीच भरोसा सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है. एक परीक्षा रद्द करना आसान हो सकता है, लेकिन उसके बाद पैदा हुए भरोसे के संकट को ठीक करना कहीं ज्यादा मुश्किल है. The post ‘मेरी नौकरी जाएगी या बचेगी?’ — JPSC/JSSC विवाद में सबसे बड़े 7 सवाल appeared first on Naya Vichar.

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DU में पढ़ने से अब कोई रोक नहीं सकता, इन 11 कॉलेज में मिलेगा 12वीं के आधार पर एडमिशन

DU UG Admission 2026: दिल्ली यूनिवर्सिटी में अब CUET UG नहीं बल्कि 12वीं के आधार पर एडमिशन दिया जाएगा. यूनिवर्सिटी से जुड़े 11 कॉलेज में 12वीं के मार्क्स पर एडमिशन दिया जाएगा. खुद यूनिवर्सिटी ने खाली सीटों को भरने के लिए ये फैसला लिया है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कई राउंड की काउंसलिंग के बाद भी जब यूनिवर्सिटी में सीटें खाली रह गई हैं तो यह फैसला लिया गया है. ये व्यवस्था स्थाई नहीं है. केवल छात्रों को एक और मौका देने के लिए लिया गया है. खाली सीटों को भरने के लिए लिया गया फैसला DU के सभी मुख्य कोर्सेज में एडमिशन CUET UG के आधार पर होता है. हालांकि, कई राउंड की काउंसलिंग के बाद भी कई कॉलेज में बड़ी संख्या में सीटें खाली रह गई हैं. भगिनी निवेदिता कॉलेज और अदिति महाविद्यालय में इससे पहले से ही 12वीं के आधार पर एडमिशन का ऐलान कर दिया था. इन कॉलेजों के कैंपस में कम सुविधा होने के कारण यहां की सीट्स खाली रह गई हैं. वहीं अब 12वीं के आधार पर एडमिशन देने वाले कॉलेज की संख्या कुल मिलाकर 11 हो गई है. DU के किन 11 कॉलेज में मिलेगा 12वीं के आधार पर एडमिशन अदिति महाविद्यालय भगिनी निवेदिता कॉलेज श्याम लाल कॉलेज जाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज (सांध्य) राजधानी कॉलेज कालिंदी कॉलेज विवेकानंद कॉलेज पीजीडीएवी कॉलेज (सांध्य) शहीद राजगुरु कॉलेज ऑफ एप्लाइड साइंसेज फॉर विमेन डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज DU Notice.pdf किन छात्रों को मिलेगा फायदा? यह फैसला उन छात्रों के लिए राहत लेकर आया है जिन्होंने CUET-UG नहीं दिया या अच्छा स्कोर हासिल नहीं कर पाए. अब वे संबंधित कॉलेजों में उपलब्ध सीटों के लिए अपने 12वीं बोर्ड परीक्षा के मार्क्स के आधार पर अप्लाई कर सकते हैं. हालांकि, प्रवेश पूरी तरह कॉलेजों द्वारा जारी मेरिट सूची और सीटों की उपलब्धता पर निर्भर करेगा. छात्रों को क्या करना चाहिए? इच्छुक उम्मीदवारों को संबंधित कॉलेजों की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन प्रक्रिया, पात्रता, सीटों की संख्या और महत्वपूर्ण तिथियों की जानकारी लेनी चाहिए. क्योंकि प्रत्येक कॉलेज अपनी अलग मेरिट सूची और प्रवेश कार्यक्रम जारी कर सकता है. DU एडमिशन से जुड़ी मुख्य बातें DU ने 11 कॉलेजों को 12वीं के मार्क्स पर एडमिशन की अनुमति दी. CUET के कई राउंड के बाद भी सीटें खाली रहने पर फैसला लिया गया. BA, BCom, BSc Physical Science समेत कई कोर्स शामिल. प्रवेश केवल खाली सीटों पर होगा. मेरिट 12वीं बोर्ड के मार्क्स के आधार पर तैयार की जाएगी. संबंधित कॉलेज अलग-अलग प्रवेश कार्यक्रम जारी करेंगे. ये भी पढ़ें: WhatsApp पर पहुंचा BSc एग्रीकल्चर का प्रश्नपत्र, छत्तीसगढ़ कृषि विश्वविद्यालय ने रद्द की परीक्षा The post DU में पढ़ने से अब कोई रोक नहीं सकता, इन 11 कॉलेज में मिलेगा 12वीं के आधार पर एडमिशन appeared first on Naya Vichar.

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झारखंड हाईकोर्ट का फैसला: JSSC-CGL और CDPO परीक्षा रद्द करने के आदेश पर रोक

राणा प्रताप की रिपोर्ट JSSC CGL Exam: झारखंड प्रशासन द्वारा परीक्षाओं और नियुक्तियों को रद्द करने संबंधी जारी अधिसूचना को चुनौती देने वाली चार अलग-अलग याचिकाओं पर शुक्रवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. JSSC-CGL समेत CDPO, FRO और FSO परीक्षाओं को रद्द करने के राज्य प्रशासन के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने प्रशासन के परीक्षा रद्द करने के आदेश पर रोक लगा दी है. न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने JSSC-CGL और CDPO परीक्षा का विज्ञापन रद्द करने के राज्य प्रशासन के आदेश पर रोक लगा दी है. मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी. CDPO और JSSC-CGL से जुड़ी याचिकाओं पर हुई सुनवाई  याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अमृतांश वत्स और पीएएस पति ने अदालत में पक्ष रखा. याचिकाओं के जरिए राज्य प्रशासन द्वारा CDPO (बाल विकास परियोजना पदाधिकारी) परीक्षा का विज्ञापन रद्द किए जाने के फैसले को चुनौती दी गई है. इसके साथ ही JSSC-CGL परीक्षा और उससे संबंधित नियुक्तियों को रद्द करने के आदेश के खिलाफ भी याचिका दाखिल की गई है. ये भी पढ़ें- झारखंड में ट्रांसमिशन नेटवर्क को और मजबूत करेगा JUSNL, खरीदेगा 4.25 करोड़ के बिजली उपकरण JPSC परीक्षाओं पर प्रशासन से जवाब कुछ याचिकाकर्ताओं ने JPSC की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा तथा फूड सेफ्टी ऑफिसर की नियुक्तियों को रद्द करने के प्रशासन के फैसले को भी चुनौती दी है. सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने CDPO और JSSC की 11वीं से 13वीं परीक्षा को रद्द करने के मामले में राज्य प्रशासन और JPSC से जवाब मांगा है. CID जांच के बाद परीक्षाएं रद्द, अनियमितताओं की जांच  दरअसल, CID जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर राज्य प्रशासन ने 18 अगस्त की देर रात उन परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया था, जिनमें TDPL की भूमिका सामने आई थी. साथ ही वर्ष 2014 के बाद आयोजित सभी नियुक्ति परीक्षाओं में संभावित अनियमितताओं की जांच कराने की घोषणा भी की गई थी. 22 परीक्षाएं रद्द, 6 स्थगित और 17 जांच के दायरे में  इसके बाद कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग की ओर से परीक्षा रद्द करने, कुछ परीक्षाओं की प्रक्रिया स्थगित करने और अन्य परीक्षाओं को जांच के दायरे में लाने से संबंधित अधिसूचना जारी की गई.अधिसूचना के अनुसार 22 परीक्षाएं रद्द की गई हैं, जबकि 6 परीक्षाओं की प्रक्रिया स्थगित की गई है. वहीं 17 परीक्षाओं को जांच के दायरे में रखा गया है. ये भी पढ़ें- त्योहारों से पहले महंगी हुई मिठास, महीने भर में चीनी 14 रुपये और गुड़ 15 रुपये चढ़े The post झारखंड हाईकोर्ट का फैसला: JSSC-CGL और CDPO परीक्षा रद्द करने के आदेश पर रोक appeared first on Naya Vichar.

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Video : पुलिस स्टेशन पहुंचे राहुल गांधी, पेलेट गन पीड़ित भी साथ, धरने पर बैठे

Video : शुक्रवार को दिल्ली में उस समय सियासी हलचल बढ़ गई, जब कांग्रेस सांसद राहुल गांधी संसद मार्ग थाने पहुंचे. उनके साथ वह युवक भी था, जिसे 20 जुलाई के Gen Z प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर पेलेट गन से चोट लगी थी. राहुल गांधी ने युवक के साथ थाने पहुंचकर मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग की और पुलिस से कार्रवाई की अपील की. न्यूज एजेंसी एएनआई ने एक वीडियो जारी किया है. इस वीडियो में राहुल जमीन पर बैठे नजर आ रहे हैं. कांग्रेस ने दावा किया है कि 20 जुलाई के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवानों ने प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन का इस्तेमाल किया था. यह दावा प्रदर्शन के बाद कुछ लोगों के घायल होने की समाचार सामने आने के बाद किया गया. हालांकि, दिल्ली पुलिस कई बार पेलेट गन के इस्तेमाल से इनकार कर चुकी है. वहीं, CRPF ने इस मामले पर अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. ये भी पढ़ें: Video: प्रदर्शनकारी छात्रों से मिले राहुल गांधी, बोले- हिंसक शासन के सामने डटे युवा, लड़कियों पर गर्व FIR दर्ज करने की मांग पर अड़े राहुल गांधी राहुल गांधी संसद मार्ग थाने के डीसीपी कार्यालय पहुंचे. कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, जंतर-मंतर प्रदर्शन में घायल साहिल लोचव ने 14 अगस्त को वकीलों के साथ दिल्ली पुलिस को लिखित शिकायत दी थी, लेकिन पुलिस ने न तो शिकायत का I/O नंबर दिया और न ही उसकी रसीद दी. 17 अगस्त को ईमेल और फोन के जरिए भी शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. अब राहुल गांधी घायल युवक के साथ थाने पहुंचे और FIR दर्ज करने तथा जांच अधिकारी का नंबर देने की मांग की. The post Video : पुलिस स्टेशन पहुंचे राहुल गांधी, पेलेट गन पीड़ित भी साथ, धरने पर बैठे appeared first on Naya Vichar.

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झारखंड हाईकोर्ट का फैसला: JSSC-CGL और CDPO परीक्षा रद्द करने के आदेश पर रोक

राणा प्रताप की रिपोर्ट JSSC CGL Exam: झारखंड प्रशासन द्वारा परीक्षाओं और नियुक्तियों को रद्द करने संबंधी जारी अधिसूचना को चुनौती देने वाली चार अलग-अलग याचिकाओं पर शुक्रवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. JSSC-CGL समेत CDPO, FRO और FSO परीक्षाओं को रद्द करने के राज्य प्रशासन के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने प्रशासन के परीक्षा रद्द करने के आदेश पर रोक लगा दी है. न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने JSSC-CGL और CDPO परीक्षा का विज्ञापन रद्द करने के राज्य प्रशासन के आदेश पर रोक लगा दी है. मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी. CDPO और JSSC-CGL से जुड़ी याचिकाओं पर हुई सुनवाई  याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अमृतांश वत्स और पीएएस पति ने अदालत में पक्ष रखा. याचिकाओं के जरिए राज्य प्रशासन द्वारा CDPO (बाल विकास परियोजना पदाधिकारी) परीक्षा का विज्ञापन रद्द किए जाने के फैसले को चुनौती दी गई है. इसके साथ ही JSSC-CGL परीक्षा और उससे संबंधित नियुक्तियों को रद्द करने के आदेश के खिलाफ भी याचिका दाखिल की गई है. ये भी पढ़ें- झारखंड में ट्रांसमिशन नेटवर्क को और मजबूत करेगा JUSNL, खरीदेगा 4.25 करोड़ के बिजली उपकरण JPSC परीक्षाओं पर प्रशासन से जवाब कुछ याचिकाकर्ताओं ने JPSC की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा तथा फूड सेफ्टी ऑफिसर की नियुक्तियों को रद्द करने के प्रशासन के फैसले को भी चुनौती दी है. सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने CDPO और JSSC की 11वीं से 13वीं परीक्षा को रद्द करने के मामले में राज्य प्रशासन और JPSC से जवाब मांगा है. CID जांच के बाद परीक्षाएं रद्द, अनियमितताओं की जांच  दरअसल, CID जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर राज्य प्रशासन ने 18 अगस्त की देर रात उन परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया था, जिनमें TDPL की भूमिका सामने आई थी. साथ ही वर्ष 2014 के बाद आयोजित सभी नियुक्ति परीक्षाओं में संभावित अनियमितताओं की जांच कराने की घोषणा भी की गई थी. 22 परीक्षाएं रद्द, 6 स्थगित और 17 जांच के दायरे में  इसके बाद कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग की ओर से परीक्षा रद्द करने, कुछ परीक्षाओं की प्रक्रिया स्थगित करने और अन्य परीक्षाओं को जांच के दायरे में लाने से संबंधित अधिसूचना जारी की गई.अधिसूचना के अनुसार 22 परीक्षाएं रद्द की गई हैं, जबकि 6 परीक्षाओं की प्रक्रिया स्थगित की गई है. वहीं 17 परीक्षाओं को जांच के दायरे में रखा गया है. ये भी पढ़ें- त्योहारों से पहले महंगी हुई मिठास, महीने भर में चीनी 14 रुपये और गुड़ 15 रुपये चढ़े The post झारखंड हाईकोर्ट का फैसला: JSSC-CGL और CDPO परीक्षा रद्द करने के आदेश पर रोक appeared first on Naya Vichar.

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जयपुर में CJP कार्यकर्ताओं से मारपीट पर आशुतोष रांका की चेतावनी- 48 घंटे में कार्रवाई नहीं हुई तो शिक्षा मंत्री के खिलाफ होगा आंदोलन

जयपुर के प्रशासनी स्कूल की बदहाल स्थिति को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है. CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने आरोप लगाया है कि स्कूल की स्थिति देखने पहुंचे उनके कार्यकर्ताओं पर पथराव किया गया, उनके वाहनों में तोड़फोड़ की गई और टीम के सदस्यों के साथ मारपीट की गई. बड़ा आंदोलन करने की चेतावनी आशुतोष रांका ने कहा, “आज पूरे देश ने भाजपा की गुंडागर्दी लाइव देखी. पुलिस को पता था कि वहां पत्थरबाजी पहले से हो रही थी, फिर भी पुलिस ने हाथ खड़े कर दिए. पुलिस ने बोला कि हम कुछ नहीं करेंगे, ये आपका मैटर है. ये सब कुछ मदन दिलावर के कहने पर हुआ है…. 48 घंटे का समय दे रहे हैं या तो इन गुंडों को अरेस्ट कीजिए और ऑर्डर विड्रॉ कीजिए वरना ये आंदोलन स्कूलों से बढ़कर मदन दिलावर के इस्तीफे तक जाएगा.” प्रशासन पर कार्रवाई नहीं करने का लगाया आरोप आशुतोष रांका का दावा है कि इस हमले के दौरान उनकी टीम के कुछ कार्यकर्ताओं को चोटें भी आईं और स्त्रीओं के फोन तोड़े गए. रांका ने इसे राजस्थान के लोकतंत्र के लिए “काला दिन” बताते हुए प्रशासन पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया है. ये भी पढ़ें: यूपी में शहीद परिवार की बेटियों को योगी प्रशासन का तोहफा, 10% कम अंक पर भी मिलेगी स्कूटी लंबे समय से तबेले में स्कूल संचालित होने का दावा CJP नेता का दावा है कि जयपुर के बगरू स्थित रामपुरा-कंवरपुरा प्रशासनी प्राथमिक स्कूल की हालत बेहद खराब है और स्कूल लंबे समय से भैंसों के तबेले में चल रहा है. उनका कहना है कि उनकी टीम इसी बदहाल स्थिति को देखने और स्कूल की मरम्मत की मांग को लेकर वहां पहुंची थी. The post जयपुर में CJP कार्यकर्ताओं से मारपीट पर आशुतोष रांका की चेतावनी- 48 घंटे में कार्रवाई नहीं हुई तो शिक्षा मंत्री के खिलाफ होगा आंदोलन appeared first on Naya Vichar.

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Video : पुलिस स्टेशन पहुंचे राहुल गांधी, पेलेट गन पीड़ित भी साथ, धरने पर बैठे

Video : शुक्रवार को दिल्ली में उस समय सियासी हलचल बढ़ गई, जब कांग्रेस सांसद राहुल गांधी संसद मार्ग थाने पहुंचे. उनके साथ वह युवक भी था, जिसे 20 जुलाई के Gen Z प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर पेलेट गन से चोट लगी थी. राहुल गांधी ने युवक के साथ थाने पहुंचकर मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग की और पुलिस से कार्रवाई की अपील की. न्यूज एजेंसी एएनआई ने एक वीडियो जारी किया है. इस वीडियो में राहुल जमीन पर बैठे नजर आ रहे हैं. कांग्रेस ने दावा किया है कि 20 जुलाई के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवानों ने प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन का इस्तेमाल किया था. यह दावा प्रदर्शन के बाद कुछ लोगों के घायल होने की समाचार सामने आने के बाद किया गया. हालांकि, दिल्ली पुलिस कई बार पेलेट गन के इस्तेमाल से इनकार कर चुकी है. वहीं, CRPF ने इस मामले पर अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. ये भी पढ़ें: Video: प्रदर्शनकारी छात्रों से मिले राहुल गांधी, बोले- हिंसक शासन के सामने डटे युवा, लड़कियों पर गर्व FIR दर्ज करने की मांग पर अड़े राहुल गांधी राहुल गांधी संसद मार्ग थाने के डीसीपी कार्यालय पहुंचे. कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, जंतर-मंतर प्रदर्शन में घायल साहिल लोचव ने 14 अगस्त को वकीलों के साथ दिल्ली पुलिस को लिखित शिकायत दी थी, लेकिन पुलिस ने न तो शिकायत का I/O नंबर दिया और न ही उसकी रसीद दी. 17 अगस्त को ईमेल और फोन के जरिए भी शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. अब राहुल गांधी घायल युवक के साथ थाने पहुंचे और FIR दर्ज करने तथा जांच अधिकारी का नंबर देने की मांग की. The post Video : पुलिस स्टेशन पहुंचे राहुल गांधी, पेलेट गन पीड़ित भी साथ, धरने पर बैठे appeared first on Naya Vichar.

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ऑपरेशन सिंदूर: महिला पायलट ने उड़ाया था लश्कर का आतंकी ठिकाना, मुरीदके पर Su-30MKI से किया था हमला

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर हिंदुस्तानीय सेना की कार्रवाई से जुड़ी एक अहम जानकारी सामने आई है. लश्कर-ए-तैयबा के मुरीदके स्थित मुख्यालय पर हमला करने वाले हिंदुस्तानीय वायुसेना के स्ट्राइक पैकेज में एक स्त्री फाइटर पायलट भी शामिल थीं. यह वही ठिकाना था जिसे हिंदुस्तान के मोस्ट वांटेड आतंकियों में शामिल हाफिज सईद के नेतृत्व वाले आतंकी संगठन का मुख्यालय माना जाता है. उनकी भूमिका अब डिस्कवरी चैनल की डॉक्यूमेंट्री सीरीज ‘डिक्लासिफाइड: ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए सामने आई है, हालांकि सुरक्षा कारणों से उनकी पहचान गुप्त रखी गई है. मुरीदके स्ट्राइक में शामिल थीं स्त्री पायलट द प्रिंट की रिपोर्ट के अनुसार, रक्षा सूत्रों ने बताया कि स्त्री अधिकारी फ्लाइट लेफ्टिनेंट के पद पर थीं और उस मिशन का हिस्सा थीं, जिसने मुरिदके में लश्कर-ए-तैयबा के मुख्यालय को निशाना बनाया. रिपोर्ट के मुताबिक, वह Su-30MKI उड़ा रही थीं.  यह दो इंजन वाला मल्टीरोल फाइटर विमान लंबी दूरी के कई तरह के हथियार ले जाने में सक्षम है. यह लड़ाकू विमान रैम्पेज और ब्रह्मोस एयर-टू-ग्राउंड मिसाइल जैसे हथियारों को इस्तेमाल करने में सक्षम है.  ऑपरेशन सिंदूर के दौरान करीब 87 घंटे तक चले सैन्य संघर्ष में इन हथियार प्रणालियों का इस्तेमाल किया गया था. हालांकि, सूत्रों ने यह बताने से इनकार किया कि मुरिदके पर हमले के लिए इनमें से किस मिसाइल का इस्तेमाल किया गया था. उनका कहना था कि हमले में इस्तेमाल किए गए हथियारों से जुड़ी जानकारी अभी गोपनीय है. सिर्फ एक नहीं, कई स्त्री पायलट थीं मिशन का हिस्सा रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि ऑपरेशन सिंदूर में एक से अधिक स्त्री फाइटर पायलटों ने हिस्सा लिया था.  87 से 88 घंटे चले इस भीषण सैन्य संघर्ष में कुछ स्त्री पायलटों ने Su-30MKI, जबकि कुछ ने राफेल लड़ाकू विमानों को उड़ाया. कुछ अभियानों में स्त्री अधिकारी पायलट की भूमिका में थीं, जबकि कुछ मामलों में उन्होंने वेपन सिस्टम ऑपरेटर (WSO) की जिम्मेदारी संभाली. एक सूत्र ने स्त्री और पुरुष पायलटों के बीच भूमिका को लेकर कहा, ‘एक बार जब वे फाइटर स्ट्रीम में शामिल हो जाते हैं, तो उन्हें सिर्फ फाइटर पायलट के तौर पर देखा जाता है, पुरुष या स्त्री के रूप में नहीं. दोनों को समान प्रशिक्षण मिलता है और उनकी ऑपरेशनल भूमिकाएं भी समान होती हैं.’ ये भी पढ़ें:- इमरान खान को फिर अदियाला जेल भेजा गया, 6 घंटे में खत्म हुई अस्पताल की ‘राहत’ पहले दिन नौ ठिकानों पर हुआ था हमला ऑपरेशन सिंदूर 7 मई 2025 को शुरू हुआ था. 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुआ आतंकी हमले में 26 नागरिकों की मौत हुई थी. इसके जवाब में हिंदुस्तानीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया, जिसके पहले दिन सेना ने कुल नौ ठिकानों को निशाना बनाया था.  इनमें से दो महत्वपूर्ण लक्ष्य मुरिदके में लश्कर-ए-तैयबा का मुख्यालय और बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद का मुख्यालय थे. इन दोनों ठिकानों पर हिंदुस्तानीय वायुसेना ने कार्रवाई की थी. बाकी सात स्थानों को हिंदुस्तानीय सेना ने लोइटरिंग म्यूनिशन और लंबी दूरी की तोपों के जरिए निशाना बनाया था. View on Instagram IAF में स्त्री फाइटर पायलटों की बढ़ती भूमिका ऑपरेशन सिंदूर ने हिंदुस्तानीय वायुसेना में स्त्रीओं की भागीदारी भी साफ की. 2015-16 में स्त्रीओं को फाइटर एविएशन में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू हुई थी. आज स्त्री अधिकारी एसयू-30एमकेआई, राफेल, मिग-29 और तेजस जैसे अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमानों को ऑपरेट कर रही हैं. डिस्कवरी की डॉक्यूमेंट्री में सैन्य अभियान से जुड़े अधिकारियों के अनुभव भी शामिल हैं. हालांकि मुरिदके मिशन में शामिल पायलटों की पहचान अभी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन उनकी भागीदारी यह दिखाती है कि हिंदुस्तानीय वायुसेना में स्त्री फाइटर पायलट अब वास्तविक युद्ध अभियानों का भी हिस्सा बन चुकी हैं. ये भी पढ़ें:- पोलैंड बोला: आतंकी चाहे जहां छिपे हों, हिंदुस्तान को पीछा करने का हक, ऑपरेशन सिंदूर और 1971 की जंग में हमने साथ दिया The post ऑपरेशन सिंदूर: स्त्री पायलट ने उड़ाया था लश्कर का आतंकी ठिकाना, मुरीदके पर Su-30MKI से किया था हमला appeared first on Naya Vichar.

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