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Mahakumbh Mela 2025 : ट्रेन से जा रहे हैं महाकुंभ तो इस नये नियम के बारे में जान लें, नहीं तो फंस जाएंगे

Mahakumbh Mela 2025 : महाकुंभ 2025 में अमृत स्नान पर्वों के बाद भी संगम स्नान करने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ भारी मात्रा में प्रयागराज पहुंच रही है. महाकुंभ की शुरूआत हुए 26 दिन हो चुके हैं, अब तक इसमें 42 करोड़ से अधिक श्रद्धालु पवित्र संगम में स्नान कर चुके हैं. इसके बाद भी प्रतिदिन महाकुंभ में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती ही जा रही है. महाकुंभ में भीड़ की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रयागराज रेलवे ने वन डायरेक्शन प्लान को अगले आदेश तक लागू रखने की योजना बनाई है. सुगम और सुरक्षित रेल यात्रा के लिए प्रयागराज रेलवे ने तीर्थयात्रियों के स्टेशन परिसर में एंट्री और एग्जिट के लिए अलग-अलग रूट बनाया है. सुरक्षित रेल यात्रा के लिए लागू रहेगा वन डायरेक्शन प्लान महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रयागराज रेल मंडल ने अगले आदेश तक वन डायरेक्शन प्लान लागू रखने का ऐलान किया है. रेल मंडल के पीआरओ अमित सिंह ने बताया कि प्रयागराज रेलवे ने तीर्थयात्रियों की सुगम और सुक्षित यात्रा को ध्यान में रखते हुए ये निर्णय लिया है. मुख्य स्नान पर्वों की तरह विशेष तौर पर प्रयागराज जंक्शन स्टेशन परिसर में यात्रियों का प्रवेश केवल सिटी साईड प्लेटफार्म नं. 1 से ही कराया जाएगा. जबकि निकास स्टेशन के सिविल लाइंस साइड, प्लेटफार्म नं. 6 और 10 की ओर से ही होगा. ये भी पढ़ें : महाकुंभ स्नान के लिए जाना चाहते हैं तो 17 से 28 फरवरी तक रांची से उड़ान भरेगी विमान, यहां देखें टाइम टेबल स्टेशन परिसर में प्रवेश के लिए खास प्लान पीआरओ अमित सिंह ने बताया कि स्टेशन परिसर में तीर्थयात्रियों को प्लेटफार्म तक कलर कोडेड टिकट और आश्रय स्लथों के माध्यम से ही पहुंचाया जाएगा. कलर कोडेड आश्रय स्थल दिशावार यात्रियों के गंतव्य स्टेशनों के मुताबिक बनाये गये हैं. इनमें अस्थाई टिकट घर, शौचालय व यात्रियों के ठहरने की भी व्यवस्था की गई है. उन्होंने बताया कि आरक्षित यात्रियों को स्टेशन में प्रवेश गेट संख्या 5 से दिया जाएगा, साथ ही प्रयागराज रेलवे ने तीर्थयात्रियों से सुगम और सुरक्षित रेल यात्रा के लिये ट्रेनों के निर्धारित समय से अतिरिक्त समय लेकर आने का अनुरोध किया है. इसके अलावा सिविल पुलिस के सहयोग से शहर में चलने वाले टैक्सी, आटो और ई-रिक्शा चालकों से अनुरोध किया है कि वे भी तीर्थयात्रियों को रेलवे स्टेशन वन डायरेक्शन प्लान के मुताबिक ही लाएं. ताकि शहर में जाम और स्टेशन परिसर में भगदड़ की स्थिति से बचा जा सके. The post Mahakumbh Mela 2025 : ट्रेन से जा रहे हैं महाकुंभ तो इस नये नियम के बारे में जान लें, नहीं तो फंस जाएंगे appeared first on Naya Vichar.

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Telanga Kharia Jayanti: तेलंगा खड़िया के वंशज बेरोजगारी की वजह से कर गये पलायन, विकास की योजनाएं भी ठप

गुमला, दुर्जय पासवान : नौ फरवरी को शहीद तेलंगा खड़िया की जयंती है. देश की आजादी के लिए अंग्रेजों से लड़ने व जमींदारी प्रथा के खिलाफ आवाज उठाने वाले वीर शहीद तेलंगा खड़िया के वंशज गरीबी व बेरोजगारी में दूसरे राज्य पलायन कर गये हैं. अभी एक माह पहले शहीद के 20 वंशज काम करने के लिए गोवा, मुंबई और बिहार चले गये हैं. ये लोग होटल में वेटर, कपड़ा दुकान, पत्थर चीरने व ईंट भटठा में ईंट बनाने का काम कर रहे हैं. शहीद के गांव के अन्य दो दर्जन से अधिक युवक-युवती भी पलायन कर गये हैं. सिसई प्रखंड के नागफेनी में तेलंगा खड़िया के रहते हैं 16 परिवार गुमला से 25 किलोमीटर दूर सिसई प्रखंड के नागफेनी घाघरा गांव में शहीद तेलंगा खड़िया के 16 परिवार रहते हैं. इस गांव में रोजगार का कोई साधन नहीं है. विकास की योजनाएं ठप है. गरीबी में लोग जी रहे हैं. घर का कोई सदस्य बीमार होने पर इलाज कराने के लिए खेती योग्य जमीन गिरवी रखनी पड़ती है. इसलिए शहीद के वंशज पैसा कमाने के लिए दूसरे राज्य चले गये. अधिकांश युवक-युवती पढ़ने-लिखने वाले हैं. कॉलेज और स्कूल की पढ़ाई छोड़कर मजदूरी करने गये हैं. शहीद के परपोता की जमीन गिरवी शहीद के परपोता स्व जोगिया खड़िया के पुत्र विकास खड़िया आइटीआई करने के बाद मजदूरी करने के लिए मुंबई चला गया. जानकारी के मुताबिक वह अपने माता पिता द्वारा गिरवी रखी गयी डेढ़ एकड़ जमीन को मुक्त कराने के लिए पैसा कमाने गया है. वंशजों ने बताया कि वर्ष 2023 में जोगिया खड़िया और उसकी पत्नी पुनी खड़ियाइन जब जीवित थे तो इन लोगों ने अपनी बीमारी के इलाज कराने के लिए डेढ़ एकड़ जमीन गिरवी रखी थी. गुमला की हर छोटी बड़ी समाचारें यहां पढ़ें प्रशासन ने तेलंगा खड़िया के विकास खड़िया को नहीं दिया रोजगार जमीन गिरवी रखने के बाद इलाज हुआ. लेकिन, कुछ माह के अंतराल में दोनों पति पत्नी की मौत हो गयी. इसके बाद प्रशासन ने स्व जोगिया के बेटे विकास खड़िया को आइटीआई कराया. लेकिन, गिरवी जमीन मुक्त नहीं हो सका. आइटीआइ करने के बाद प्रशासन ने विकास खड़िया को रोजगार नहीं दिया. इसलिए वह पैसा कमाने मुंबई चला गया. क्या कहते हैं तेलंगा खड़िया के वंशज गांव में सरना, खड़िया और उरांव मसना घेराबंदी, सोलर जलमीनार, डीप बोरिंग, शहीद के वंशजों की पहचान के लिए पहचान पत्र बने. प्रतिमा स्थल जहां नौ फरवरी को मेला लगता है, वहां पर सुंदरीकरण और पेयजल की व्यवस्था हो. संतोष खड़िया, वंशज मैं शहीद तेलंगा खड़िया का वंशज हूं. मेरे बड़े भाई जोगिया खड़िया और भाभी पुनी खड़ियाइन की बीमार के कारण दो साल पहले निधन हो गया. जमीन गिरवी है. मेरा भतीजा, मेरे दो बेटे सहित गांव के 20 से 25 लोग पलायन कर गये. किनू खड़िया, परपोता Also Read: Jharkhand News: धनबाद के मैन्युफैक्चरिंग कंपनी में लगी आग, मची अफरी तफरी The post Telanga Kharia Jayanti: तेलंगा खड़िया के वंशज बेरोजगारी की वजह से कर गये पलायन, विकास की योजनाएं भी ठप appeared first on Naya Vichar.

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दिल्ली की हार में ‘कांग्रेस’ और ‘आप’ के विवाद पर क्या है राजद की राय? मनोज झा ने इशारे ही इशारे में कह दी बड़ी बात

दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 का परिणाम भाजपा के पक्ष में आया है. बीजेपी को 48 सीटों पर जीत मिली जबकि आम आदमी पार्टी इसबार 22 सीटों पर ही सिमट गयी. वहीं कांग्रेस का खाता भी नहीं खुला. कांग्रेस के कई उम्मीदवारों की जमानत जब्त तक हो गयी. दिल्ली चुनाव परिणाम सामने आने पर यह चर्चा भी छिड़ी है कि कांग्रेस ने ‘आप’ से बदला लिया और कई सीटों पर अरविंद केजरीवाल समेत उनके उम्मीदवारों की हार की वजह बनी. राजद ने इसपर प्रतिक्रिया दी है. राज्यसभा सांसद मनोज झा ने इंडी गठबंधन(I-N-D-I-A) पर बयान दिया है. राजद सांसद मनोज झा ने भाजपा को दी बधाई दिल्ली में भाजपा की प्रचंड जीत पर राजद सांसद मनोज झा ने कहा कि जीत जनता के कारण होता है. 27 साल बहुत बड़ी अवधि होती है. किसी चुनाव में समान कारण वजह नहीं बनता. कई वजह होते हैं जिसके कारण परिणाम बदलता है. भाजपा को जीत की शुभकामना देते हुए मनोज झा ने कहा कि अब भाजपा के पास बहाना नहीं होगा. डबल इंजन की प्रशासन दिल्ली में होगी. अब एलजी साहेब भी थोड़े हल्के हो जाएंगे. उन्हें डबल भूमिका नहीं निभानी होगी. ALSO READ: दिल्ली की दो दर्जन सीटों पर बिहार-पूर्वांचल के वोटरों ने दिखाया दम, नयी प्रशासन चुनने में रहा बड़ा रोल क्या कांग्रेस से आप को हुआ नुकसान? मनोज झा ने कांग्रेस को आम आदमी पार्टी की हार की वजह मानने से लगभग इनकार करते हुए कहा कि इंडिया गठबंधन इसलिए बना था कि केंद्र में एक वैकल्पिक प्रशासन बनाएंगे. लेकिन तब भी सबको यह मालूम था कि राज्यों में हम एक-दूसरे के खिलाफ भी कई बार जा सकते हैं. केरल, पश्चिम-बंगाल उदाहरण है. #WATCH दिल्ली: RJD सांसद मनोज झा ने कहा, “27 साल बहुत लंबा समय होता है… 27 साल बाद भाजपा दिल्ली की सत्ता में लौटी है, मैं उन्हें शुभकामनाएं देता हूं। अब उनके पास वह बहाना भी नहीं रहेगा कि डबल इंजन प्रशासन नहीं है… INDIA गठबंधन एक केंद्रीय विचार था, हमने इसे केंद्र में वैकल्पिक… pic.twitter.com/d8Y47f8QFc — ANI_HindiNews (@AHindinews) February 9, 2025 विपक्षी दलों के तालमेल पर बोले… मनोज झा ने कहा कि लोकसभा में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस का समझौता हुआ था लेकिन पंजाब और दिल्ली में नहीं हुआ. इस तरह की विसंगतियां होती हैं. यह कहना कि अगर दिल्ली की 13 सीटों पर कांग्रेस नहीं होती तो ये होता वो होता, ये सब बहस के लिए सही है लेकिन कांग्रेस भी फिर अन्य राज्यों के चुनाव का उदाहरण दे सकती है. विपक्षी दलों को क्या दी सलाह… मनोज झा ने कहा कि इस तरह तो कांग्रेस भी गोवा, गुजरात, हरियाणा का तर्क दे सकती है. सांसद ने कहा कि अगर दलों को बेहतर समन्यवय की उम्मीद लगती है तो इसका फैसला चुनाव नजदीक देखकर नहीं बल्कि पहले से ही करना होगा. काउंटिंग के दिन इसपर चर्चा करना गलत है. The post दिल्ली की हार में ‘कांग्रेस’ और ‘आप’ के विवाद पर क्या है राजद की राय? मनोज झा ने इशारे ही इशारे में कह दी बड़ी बात appeared first on Naya Vichar.

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कांग्रेस के हैट्रिक से गदगद बीजेपी, खत्म हुआ 27 सालों का इंतज़ार

Delhi Election 2025: दिल्ली के नतीजों से बीजेपी कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर है. कांग्रेस को फिर एक बार बिना सीटों के लिए संतुष्ट रहना पड़ा है.दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के नेतृत्व में 15 साल तक प्रशासन चलाने के बाद सत्ता से जो बाहर हुई, अबतक वापसी नहीं हो पाई है. हालांकि पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले इस बार कांग्रेस की वोट हिस्सेदारी में दो प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई है. कांग्रेस को करीब 6.4 प्रतिशत वोट हासिल हुई. जबकि 2020 के विधानसभा चुनाव में उसे 4.26 प्रतिशत वोट मिले थे. कांग्रेस ने लगाई हार की हैट्रिक दिल्ली में कांग्रेस को बहुत कुछ हासिल नहीं हुआ है. पार्टी का प्रदर्शन पिछले बार के लगभग स्थिर रहा. दिल्ली 2020 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 4% के करीब वोट मिला था और इस बार 6% से ही संतुष्ट रहना पड़ा है. इस चुनाव में 12 सीटें ऐसी हैं जहां आम आदमी पार्टी को भाजपा से जितने मतों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा उससे अधिक मत कांग्रेस को मिले हैं. यह भी पढ़ें.. प्रवेश वर्मा के सीएम बनने के क्यों लग रहे कयास? क्या है इसके पीछे का कारण बीजेपी ने खत्म किया 27 सालों का नेतृत्वक सूखा दिल्ली में बीजेपी को आखिरी बार साल 1993 में कीट हासिल हुई थी. साल 1998 में आखिरी बार सुषमा स्वराज के हाथों में दिल्ली की कमान थी. बीजेपी लगातार उसके बाद दिल्ली में चुनाव हारते रही है. बीजेपी का सबसे बुरा दौर साल 2015 में आया जब पार्टी को महज 3 सीटें ही मिली. इस बार बीजेपी ने 27 सालों बाद चुनाव जीत कर बड़ा करिश्मा की है. सबकी निगाहें अब दिल्ली में बीजेपी किसे सीएम चेहरा बनाएगी इसपर टिकी हुई है. यह भी पढ़ें.. 2% के स्पोर्ट्स से कैसे केजरीवाल हुए फेल? बीजेपी ने जीती 48 सीटें यह भी पढ़ें.. Delhi Result : दिल्ली के बाद पंजाब में भी आप को हिला सकती है बीजेपी, मिलने लगे संकेत The post कांग्रेस के हैट्रिक से गदगद बीजेपी, खत्म हुआ 27 सालों का इंतज़ार appeared first on Naya Vichar.

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Bihar Politics: क्या इस सीट से चुनाव लड़ेंगे सीएम नीतीश के बेटे निशांत? होली के बाद थाम सकते हैं पार्टी का दामन

Bihar Politics: बिहार में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं. इसको लेकर तमाम नेतृत्वक पार्टियां अपने-अपने हिस्से की तैयारी में जुट गई हैं. चुनाव से पहले सीएम नीतीश कुमार भी हरकत में हैं. इन दिनों वह प्रगति यात्रा कर रहे है, जिसके तहत वह बिहार के अलग-अलग जिलों का दौरा कर रहे हैं. इसी बीच सीएम नीतीश के बेटे निशांत की जदयू में शामिल होने की चर्चा नेतृत्वक गलियारों में तेज हो गई है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बात के कयास लगाए जा रहे हैं कि होली के बाद निशांत अपने पिता की पार्टी जदयू में शामिल हो सकते हैं.  इस सीट से चुनाव लड़ सकते हैं निशांत रिपोर्ट्स के अनुसार, सीएम नीतीश की उम्र और कार्यकर्ताओं की मांग को देखते हुए निशांत कुमार को भी इस बार के विधानसभा चुनाव में मैदान में उतारा जा सकता है. संभावना है कि उन्हें उनके पिता नीतीश कुमार के विधानसभा क्षेत्र हरनौत से चुनावी मैदान में उतारा जा सकता है. यदि निशांत कुमार हरनौत से चुनाव लड़ते हैं तो 1985 के बाद यह पहली बार होगा जब इस सीट पर नीतीश कुमार के परिवार का कोई उम्मीदवार चुनावी मैदान में होगा. वर्तमान में हरनौत से जदयू के हरि नारायण सिंह विधायक हैं. बता दें, सीएम नीतीश कुमार 1985 में पहली बार नालंदा के हरनौत से जीतकर विधानसभा पहुंचे थे. हालांकि, निशांत कुमार ने कई बार खुद कहा है कि वो नेतृत्व में नहीं आएंगे.  बिहार की ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें पिता को वोट करने की अपील सीएम नीतीश के बेटे निशांत कुमार के जदयू में शामिल होने की चर्चा पिछले साल से ही हो रही है. पार्टी सूत्रों के अनुसार, कुछ नेता का भी मानना है कि वे सक्रिय नेतृत्व में आएं. हालांकि, पार्टी के कई बड़े नेता इस बात को नकारते आए हैं. निशांत कुमार हमेशा से नेतृत्वक कार्यक्रमों से दूरी बनाते आए हैं. लेकिन, बीते 17 जनवरी को अचानक बख्तियारपुर में हुए स्वतंत्रता सेनानियों के श्रद्धांजलि सभा में निशांत शामिल हुए. इस दौरान उन्होंने अपने पिता के समर्थन में बिहार की जनता से वोट करने की अपील की थी. इसके बाद से ही बिहार की नेतृत्व में हलचल मच गई. कयास लगने शुरू हो गए. इस दौरान उन्होंने अपने पिता के काम की सराहना भी की थी. ALSO READ: Bihar Crime: लग्जरी कार से 9 लाख का गांजा जब्त, नेपाल से लाकर सप्लाई करने का था प्लान The post Bihar Politics: क्या इस सीट से चुनाव लड़ेंगे सीएम नीतीश के बेटे निशांत? होली के बाद थाम सकते हैं पार्टी का दामन appeared first on Naya Vichar.

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प्रवेश वर्मा के सीएम बनने के क्यों लग रहे कयास? क्या है इसके पीछे का कारण

Delhi BJP CM: दिल्ली के चुनावी नतीजे आ चुके हैं. बीजेपी ने इस बार बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए आम आदमी पार्टी के सबसे मजबूत किले को ध्वस्त कर दिया है. प्रवेश वर्मा ने दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल को इस बार नई दिल्ली सीट पर हरा दिया है. नई दिल्ली सीट को सीएम की सीट माना जाता है और इसी सीट से शीला दीक्षित और अरविन्द केजरीवाल विधायक भी रहे थे. क्या है प्रवेश लाल वर्मा के सीएम रेस की वजह दिल्ली में आम आदमी पार्टी का मजबूत जनाधार रहा है. प्रवेश वर्मा लगातार दिल्ली बीजेपी के चुनिंदा चेहरों में शामिल थे जिन्होंने केजरीवाल का अकसर विरोध करते आए हैं. प्रवेश वर्मा को अच्छा नेतृत्वक अनुभव भी है. दिल्ली में पहले वियाध्ययक भी रह चुके हैं साथ ही दिल्ली के सांसद भी रहे हैं. प्रवेश वर्मा के पिता दिल्ली के लकप्रिय मुख्यमंत्री भी रहे हैं और जाट नेता भी रहे हैं. सीएम बनने की रेस में की चेहरे शामिल दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने इस चुनाव में काफी मेहनत की. उनका नाम भी दिल्ली बीजेपी के बड़े नामों में शामिल है. इसके अलावा मनोज तिवारी भी दिल्ली और खास कर पूर्वांचली वॉटर्स में अच्छा प्रभाव रखते हैं. पार्टी इनपर भी भरोसा जता सकती है. वहीं दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता विजेंदर गुप्ता पर भी पार्टी की नजर है विजेंदर गुप्ता की गिनती दिल्ली में धाकड़ नेता के रूप में होती है. आम आदमी पार्टी के खिलाफ लगातार विपक्ष की भूमिका उन्होंने बखूबी निभाई है. गुप्ता की पकड़ पार्टी के कैडर और संगठन में भी मजबूत बताई जाती है. हालाकि बीजेपी अकसर चौकने वाला नाम सामने लाती है और इस बार भी दिल्ली को कोई नया चेहरा मिल सकता है. यह भी पढ़ें.. Delhi New CM : दिल्ली का नया सीएम कौन? बीजेपी से इन 3 नामों की हो रही चर्चा The post प्रवेश वर्मा के सीएम बनने के क्यों लग रहे कयास? क्या है इसके पीछे का कारण appeared first on Naya Vichar.

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क्रिकेट के लिए छोड़ दी अपनी शादी, दक्षिण अफ्रीका के इस खिलाड़ी ने गजब ही कर दिया

David Bedingham: दक्षिण अफ्रीका में SA20 टूर्नामेंट का 8 फरवरी की बीती रात को समापन हो गया. फाइनल मैच में एमआई केपटाउन ने सनराइजर्स ईस्टर्न केप को हराकर इतिहास रच दिया. लेकिन इसी समापन के दौरान एक दिलचस्प वाकया सामने आया, जब यह पता चला कि सनराइजर्स ईस्टर्न केप (SEC) और प्रोटियाज के बल्लेबाज डेविड बेडिंघम ने अपनी जिंदगा के दो सबसे अहम मौकों में से एक को ही चुना. बेडिंघम के लिए यह हफ्ता शानदार था. एक तरफ क्रिकेट का सबसे बड़ा मुकाबला, तो दूसरी ओर उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण दिन. हालांकि खिताब जीतने का सपना पूरा नहीं हुआ, लेकिन वह अपनी शादी को लेकर उत्साहित थे, जो फाइनल के अगले दिन होने वाली थी. दक्षिण अफ्रीकी क्रिकेट पत्रकार फिरदौस मूनडा के अनुसार, बेडिंघम की शादी उनकी मंगेतर जेना वैन नीकेर्क से इसी रविवार को होनी थी, लेकिन SEC के फाइनल में पहुंचने के कारण उन्हें अपनी योजनाओं में बदलाव करना पड़ा. मूंडा ने बताया, “शादी की बुकिंग पहले ही हो चुकी थी, लेकिन SEC के फाइनल में पहुंचने के कारण उन्होंने इसे एक दिन आगे बढ़ाने का फैसला किया.” 30 वर्षीय बेडिंघम ने सुपरस्पोर्ट को दिए एक इंटरव्यू में इस चुनौतीपूर्ण वीकेंड की योजना का जिक्र किया था. उन्होंने कहा, “मेरी पत्नी मजाक में कह रही थी कि उसे उम्मीद है कि हम हार जाएंगे, ताकि मैं शादी में शामिल हो सकूं. लेकिन जब हम जीतकर फाइनल में पहुंचे, तो हमने इसे प्राथमिकता दी और फिर शादी में जाने का फैसला किया.” इस दौरान, बेडिंघम अपनी बैचलर पार्टी से भी चूक गए, क्योंकि SEC को क्वालीफायर में पार्ल रॉयल्स के खिलाफ स्पोर्ट्सना था. उनकी जगह उनके पिता ने बैचलर पार्टी में हिस्सा लिया. उन्होंने मजाक में कहा, “मेरे भाई और सबसे अच्छे दोस्त मेरी पत्नी से वादा कर चुके हैं कि वे सुनिश्चित करेंगे कि मैं शादी के लिए सही समय पर पहुंचूं.” Believe it or not, David Bedingham had other plans today 💍#SA20 pic.twitter.com/IpJN6Hruoa — ESPNcricinfo (@ESPNcricinfo) February 8, 2025 हालांकि, सनराइजर्स खिताब जीतने में नाकाम रही. MI केप टाउन (MICT) ने उन्हें फाइनल में करारी शिकस्त दी और SA20 के तीसरे संस्करण का खिताब अपने नाम कर लिया. बेडिंघम को कैगिसो रबाडा ने जल्दी आउट कर दिया, और SEC के किसी भी बल्लेबाज ने खास प्रदर्शन नहीं किया. फाइनल मुकाबले में, MICT ने शानदार प्रदर्शन किया। पहले रयान रिकलेटन और डेवाल्ड ब्रेविस की शानदार बल्लेबाजी से टीम ने 181 रन बनाए, फिर ट्रेंट बोल्ट, कैगिसो रबाडा और राशिद खान की घातक गेंदबाजी के दम पर SEC को 105 रन पर आलआउट कर मुकाबले को 76 रन से हराकर खिताब अपने नाम कर लिया. ICC विश्वकप लीग में अनोखा ट्विस्ट, मैदान नहीं सड़कों पर फंसी टीमें, ट्रैफिक से क्रिकेट में चक्का जाम पाकिस्तान में बीच मैदान बहा खून, न्यूजीलैंड के रचिन रविंद्र को चेहरे पर लगी गंभीर चोट The post क्रिकेट के लिए छोड़ दी अपनी शादी, दक्षिण अफ्रीका के इस खिलाड़ी ने गजब ही कर दिया appeared first on Naya Vichar.

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Delhi Result : दिल्ली के बाद पंजाब में भी आप को हिला सकती है बीजेपी, मिलने लगे संकेत

Delhi Result : दिल्ली में 26 साल से अधिक समय बाद सत्ता में लौटी बीजेपी अब प्रशासन बनाएगी. इसमें बीजेपी का साथ पंजाबी मतदाताओं ने भी दिया है. बीजेपी 10 प्रतिशत से अधिक सिख मतदाताओं वाली चार सीट में से तीन सीट जीतने में कामयाब रही. 10 प्रतिशत से अधिक पंजाबी मतदाताओं वाली हरि नगर, जनकपुरी और राजौरी में बीजेपी उम्मीदवार जीते. आइए जानते हैं अन्य सीटों पर बीजेपी का प्रदर्शन कैसा रहा? चुनाव परिणाम की कुछ खास बातें बीजेपी ने हरियाणा की सीमा से लगे इलाकों में प्रभावशाली प्रदर्शन किया. इन इलाकों के 11 में से नौ सीट पर बीजेपी ने जीत दर्ज की. ये नतीजे ऐसे समय में आए हैं जब ‘आप’ संयोजक अरविंद केजरीवाल ने हरियाणा प्रशासन पर यमुना नदी में जहर मिलाने का आरोप लगाया था. यहां बीजेपी की प्रशासन है. बीजेपी ने लक्ष्मी नगर, संगम विहार और करावल नगर जैसे उन इलाकों में भी शानदार प्रदर्शन किया, जहां 15 प्रतिशत से अधिक पूर्वांचली वोटर हैं. पार्टी ने ऐसी 35 में से 25 सीट पर जीत हासिल की. नजफगढ़, नरेला और बिजवासन सहित ऐसे 13 विधानसभा क्षेत्रों में से 12 में बीजेपी ने जीत दर्ज की, जहां 5 प्रतिशत हरियाणवी वोटर हैं. बीजेपी ने झुग्गीवासियों के प्रभुत्व वाली 7 में से चार सीट जीतीं. इसके अलावा, बीजेपी 12 आरक्षित सीटों में से मंगोलपुरी समेत चार सीट जीतने में सफल रही. बीजेपी ने 10 प्रतिशत से अधिक जाट मतदाताओं वाले इलाकों में भी बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है. इस तरह की 13 में से 11 सीट पर जीत हासिल की है. बीजेपी ने 10 प्रतिशत से अधिक वाल्मीकि मतदाताओं वाली 9 में से 4 सीट जीतीं. बीजेपी की 10 प्रतिशत से अधिक जाटव वोटरों वाली 12 में से छह सीट पर जीत हासिल की. बीजेपी ने छह पूर्वांचली उम्मीदवार मैदान में उतारे थे, जिनमें से चार जीत गए. वहीं, दिल्ली चुनाव में उसके 14 में से 12 हरियाणवी उम्मीदवार विजयी हुए. हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सीमा से लगी कुल 22 सीट में से पार्टी ने 16 सीट जीतीं. ये भी पढ़ें : Delhi New CM : दिल्ली से पंजाब साधेगी बीजेपी! ये 5 नाम सीएम की रेस में सबसे आगे पूर्वांचलियों, सिखों, जाटों और झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वालों सहित विभिन्न क्षेत्रीय एवं सामाजिक-आर्थिक वर्गों के वोटरों के वर्चस्व वाले चुनावी क्षेत्रों में पैठ बनाने में बीजेपी सफल रही. दिल्ली की 70 सदस्यीय विधानसभा के लिए हुए चुनाव में बीजेपी ने 48 सीट पर जीत दर्ज की. वहीं आम आदमी पार्टी (आप) को 22 सीट मिली, जबकि कांग्रेस 2015 और 2020 के बाद एक बार फिर अपना खाता नहीं खोल पाई. The post Delhi Result : दिल्ली के बाद पंजाब में भी आप को हिला सकती है बीजेपी, मिलने लगे संकेत appeared first on Naya Vichar.

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Avoid these 3 colors in spring and autumn: बसंत और पतझड़ में भूलकर भी न पहनें ये 3 रंग, वरना मक्खी-मच्छर कर देंगे परेशान

Avoid these 3 colors in spring and autumn: क्या आप जानते हैं कि बसंत और पतझड़ के मौसम में कुछ खास रंग पहनने से आप मच्छरों, मक्खियों और छोटे कीड़ों का निशाना बन सकते हैं? जी हां, ये मौसम बदलाव का संकेत लेकर आते हैं, लेकिन कुछ रंग ऐसे होते हैं जो इन कीड़ों को तेजी से आकर्षित करते हैं. अगर आप अनजाने में इन रंगों को पहनते हैं, तो मच्छर और मक्खियां आपको बार-बार परेशान कर सकती हैं. आइए जानते हैं कौन से तीन रंग इस मौसम में पहनने से बचना चाहिए और इसके पीछे क्या कारण हैं. 1. पीला (Yellow) रंग Avoid these 3 colors in spring and autumn पीला रंग सूरज की रोशनी की तरह चमकदार होता है, जो कई कीड़ों को आकर्षित करता है. मक्खियां और कुछ पराग खाने वाले कीड़े इस रंग की ओर तेजी से खिंचते हैं. बसंत और पतझड़ में यह रंग खासतौर पर खतरनाक हो सकता है, क्योंकि इस मौसम में फूलों की अधिकता होती है और कीड़े स्वाभाविक रूप से इस रंग की ओर आकर्षित होते हैं. अगर आप इस परेशानी से बचना चाहते हैं तो हल्के पीले की बजाय गहरे रंगों को प्राथमिकता दें. Also Read: Tips and tricks for shiny nail: सर्दियों में ऐसे रखें अपने नाखूनों को वेल शेप्ड और खूबसूरत 2. नीला (Blue) रंग Avoid these 3 colors in spring and autumn गहरा नीला या हल्का आसमानी रंग भी कीड़ों को काफी आकर्षित करता है. खासतौर पर मच्छर इस रंग को दूर से ही भांप लेते हैं और आपकी ओर चले आते हैं. बसंत के समय जब हवा में नमी अधिक होती है, तो नीले कपड़े पहनना मच्छरों को न्योता देने जैसा होता है. इसलिए इस मौसम में हल्के या डार्क ब्लू शेड्स पहनने से बचें. Also Read: Travel Tip For Monsoon: इस मानसून छोटे कीटों से खुद को बचायें, अपनायें ये टिप्स 3. सफेद (White) रंग Avoid these 3 colors in spring and autumn हालांकि सफेद रंग शांत और क्लासी दिखता है, लेकिन यह मच्छरों के लिए काफी आकर्षक हो सकता है. पतझड़ के मौसम में विशेष रूप से सफेद कपड़े पहनने से बचें, क्योंकि यह मच्छरों के लिए संकेत भेजता है कि वे आपके पास आ सकते हैं. सफेद कपड़ों की वजह से रात के समय मच्छर आसानी से आपके आसपास मंडराने लगते हैं. कैसे करें बचाव? अगर आप कीड़ों की परेशानी से बचना चाहते हैं, तो इन रंगों की बजाय गहरे हरे, भूरे या ग्रे रंग के कपड़े पहनें. ये रंग मच्छरों और मक्खियों को कम आकर्षित करते हैं. इसके अलावा, घर से बाहर जाते समय मच्छर भगाने वाली क्रीम या स्प्रे का उपयोग करें. खासतौर पर सुबह और शाम के समय जब कीड़ों की सक्रियता अधिक होती है, तब इन बातों का ध्यान जरूर रखें. बसंत और पतझड़ का मौसम खुशनुमा होता है, लेकिन मच्छर और मक्खियों की समस्या से बचने के लिए कपड़ों के रंगों का सही चुनाव बेहद जरूरी है. पीला, सफेद और नीला रंग इस मौसम में कीड़ों को सबसे ज्यादा आकर्षित करता है, इसलिए इनसे बचना ही बेहतर है. अगर आप इन टिप्स को अपनाते हैं, तो अनचाही परेशानियों से दूर रह सकते हैं और अपने मौसम का आनंद ले सकते हैं. Also Read: Janhvi Kapoor Traditional Outfit of the year: जाह्नवी कपूर के ट्रेडिशनल आउटफिट सालभर छाए रहे, देखें उनकी शानदार लहंगा डिजाइन्स Also Read:Rashmika Saree Look For Wedding: श्रीवल्ली के ये साड़ी लुक्स करें ट्राय, दिखें बिल्कुल परफेक्ट The post Avoid these 3 colors in spring and autumn: बसंत और पतझड़ में भूलकर भी न पहनें ये 3 रंग, वरना मक्खी-मच्छर कर देंगे परेशान appeared first on Naya Vichar.

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Yeh Rishta Kya Kehlata Hai: शिवानी की सास है कावेरी, अतीत के पन्नों से हटेगा पर्दा, खुलेगा बड़ा राज

Yeh Rishta Kya Kehlata Hai: ये रिश्ता क्या कहलाता है के अपकमिंग एपिसोड में दिखाया जाएगा कि अभीर और चारु के शादी के फंक्शन में शिवानी को देखकर कावेरी शॉक्ड हो जाती है. उसे चिंता होती है कि कहीं उसने जो अतीत में गलतियां की है, उसकी सच्चाई पूरे परिवार के सामने ना आ जाए. उसे डर लगता है कि उसके परिवार की खुशियां बर्बाद ना हो जाए. वह सोचती है कि उसे कुछ करना ही होगा. कावेरी इस आश्रम में जाती है, जहां कई सालों से शिवानी रह रही थी. शिवानी की सास है कावेरी सीरियल में दिखाया जाएगा कि आश्रम में वह स्टाफ से शिवानी को ले जाने वाले शख्स के बारे में पूछती है. वह उनसे जानकारी मांगती है, लेकिन उसे कुछ पता नहीं चलता. तभी कावेरी कहती है कि वह उसकी सास है और इस नाते उसे पता होना चाहिए कि शिवानी कहां गई है. वह डिटेल्स मांगती है. स्टाफ बताता है कि शिवानी को लेकर रूप कुमार गया है. कावेरी को घबराहट होने लगती है. कावेरी के सामने आया आरके का सच ये रिश्ता क्या कहलाता है में दिखाया जाएगा कि कावेरी को लगता है कि शिवानी अब आजाद है और वह एक बार फिर से माधव की लाइफ में वापस आ सकती है. हालांकि उसे इस बातकी जानकारी नहीं है कि कि रूप कुमार ही आरके है और वह अभीरा का बिजनेस पार्टनर है. कावेरी फाइल को देखती है और तभी उसके सामने आरके का सच आता है. कावेरी के होश उड़ जाते हैं. उसे डर लगता है कि अभीरा के सामने अब सबकुछ आ जाएगा. वह शिवानी से मिलने का फैसला करती है और दूर करने का मन बनाती है, ताकि पुरानी बातें सामने ना आ सकें. यह भी पढ़ें-  Yeh Rishta Kya Kehlata Hai: घर से भाग जाएंगे चारु-अभीर, अरमान की असली मां की सच्चाई आएगी सामने, होगा फुल ऑन ड्रामा यह भी पढ़ें- Yeh Rishta Kya Kehlata Hai: कावेरी की काली करतूत आएगी इस शख्स के सामने, आरके के सामने खुला अरमान का असली सच The post Yeh Rishta Kya Kehlata Hai: शिवानी की सास है कावेरी, अतीत के पन्नों से हटेगा पर्दा, खुलेगा बड़ा राज appeared first on Naya Vichar.

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