बांग्लादेश की राजधानी ढाका में 18 सितंबर की शाम तक क्रूड बम धमाकों की आवाज कई इलाकों में सुनाई दी. मलीबाग, मोहाखली, अगरगांव और जात्राबाड़ी समेत कई जगहों पर विस्फोट की समाचारें आईं. जात्राबाड़ी में एक ऑटो-रिक्शा चालक घायल हुआ. इसके बाद ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने राजधानी में करीब 200 चेकपॉइंट स्थापित किए और निगरानी बढ़ा दी.
सवाल सिर्फ यह नहीं है कि बम किसने फेंके. बड़ा सवाल यह है कि इन छोटे धमाकों का नेतृत्वक और मनोवैज्ञानिक संदेश क्या है?
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शुक्रवार: छोटे धमाके, बड़ा डर
18 सितंबर को करीब तीन बजे मलीबाग रेल गेट के पास फ्लाईओवर से दो क्रूड बम सड़क पर फेंके जाने की पुलिस ने जानकारी दी. शाम करीब छह बजे मोहाखली में भी फ्लाईओवर से एक क्रूड बम फेंके जाने की बात सामने आई. इसके बाद जात्राबाड़ी पुलिस स्टेशन के मुख्य गेट के पास कई धमाके हुए. वहां एक ऑटो-रिक्शा चालक घायल हुआ.
अगरगांव में भी विस्फोट की आवाज सुनाई दी, हालांकि पुलिस ने तत्काल यह स्पष्ट नहीं किया कि वहां विस्फोट क्रूड बम से हुआ या किसी अन्य वजह से. बाद की रिपोर्टों में ढाका के दूसरे इलाकों से भी धमाकों की समाचारें सामने आईं.
यानी तस्वीर किसी बड़े विस्फोट की नहीं, बल्कि छोटे-छोटे धमाकों के जरिए लगातार असुरक्षा पैदा करने की है.
असली सवाल अभी बाकी है
18 सितंबर के धमाकों के पीछे कौन था, यह जांच का विषय है. अभी तक किसी एक संगठन की जिम्मेदारी सार्वजनिक रूप से स्थापित नहीं हुई है.
लेकिन घटनाओं की टाइमलाइन एक महत्वपूर्ण सवाल जरूर खड़ा करती है—क्या ढाका में नेतृत्वक तनाव अब अदालतों और सड़कों के बीच एक नए हिंसक चक्र में बदल रहा है?
छोटे क्रूड बम शायद सैन्य शक्ति का प्रदर्शन नहीं हैं. लेकिन सही जगह और सही समय पर किया गया एक छोटा धमाका भी राजधानी को यह याद दिला सकता है कि डर पैदा करने के लिए हमेशा बड़ा बम जरूरी नहीं होता.
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