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Good Story: मरीजों के बीच मसीहा बनने की प्रेरक कहानी, मां की इच्छा पर 10 रुपये की फीस लेकर Dr Ejaz Ali कर रहे हैं इलाज..

Good Story: ऐसे युग में जहां इलाज का खर्च आसमान छू रहा है, तब पटना में एक ऐसे डॉक्टर हैं, जो गरीबों और वंचितों के लिए आशा की किरण बन गये हैं. तंग गली में एक छोटा-सा क्लिनिक है, जहां रोज सुबह से ही बड़ी संख्या में मरीजों की कतार लग जाती है. किसी के हाथ में एक्स-रे है, तो कोई दवाई के पर्चे को पकड़े हुए है. स्त्री, पुरुष और शिशु सभी की आंखों में बस एक ही उम्मीद है, इस उम्मीद का नाम है डॉ एजाज अली. इनकी उम्र 70 वर्ष है. प्रशासनी अस्पतालों से भी कम फीस, महंगे प्राइवेट डॉक्टरों से बेहतर इलाज और मरीजों के साथ घुल मिलकर इलाज करने का तरीका इनको सबसे अलग बनाता है.

आशियाना-दीघा रोड पर डॉ एजाज अली (Dr Ejaz Ali) मात्र 10 रुपये में मरीजों का इलाज करते हैं. यही कारण है कि उनके पास न केवल पटना से, बल्कि पूरे बिहार और अन्य राज्यों से भी मरीज आते हैं. सुबह आठ बजते ही उनके क्लीनिक में लोगों की भीड़ जुटने लगती है. डॉ साहब मरीजों के बीच बैठकर लोगों का इलाज करते हैं. वह रोजाना लगभग 200 से 250 मरीजों को देखते हैं और दर्जनों सर्जरी भी करते हैं. उनकी सर्जरी की फीस प्रशासनी और प्राइवेट अस्पतालों की तुलना में बेहद कम है.

1984 से कर रहे प्रैक्टिस, मां की इच्छा को बनाया सपना

डॉ एजाज अली ने बताया कि साल 1984 से वह प्रैक्टिस कर रहे हैं. पीएमसीएच से उन्होंने एमबीबीएस किया और इसके बाद यहीं से सर्जरी में मास्टर्स किया. इसके बाद उन्हें प्रशासनी अस्पताल में नौकरी भी लगी, लेकिन उन्होंने प्रशासनी नौकरी ज्वाइन नहीं की. उन्होंने पटना के भिखना पहाड़ी क्षेत्र में प्राइवेट प्रैक्टिस के लिए क्लिनिक शुरू किया और 10 रुपये फीस रखी. उस वक्त भी 10 रुपये फीस कम ही थी, लेकिन मां शहजादी बेगम ने कहा कि कभी भी जीवन में 10 रुपये से फीस अधिक मत रखना. उन्होंने अपनी मां की इच्छा का मान रखते हुए कभी भी अपनी फीस 10 रुपये से अधिक करने की नहीं सोची.

गरीब मरीजों की सेवा करना उद्देश्य

डॉ एजाज बताते हैं कि ज्यादा आबादी गरीबों की है. उन्हें डॉक्टर की फीस, जांच और दवाई सभी कुछ करना है. डॉक्टर की फीस एक ऐसी चीज है, जिस पर डॉक्टर कंट्रोल कर सकता है. इसी नजरिये को लेकर आज तक चला आ रहा हूं. मैं दवाई बहुत कम लिखता हूं और कोशिश रहती है मरीज जल्द से जल्द स्वस्थ हो जाये. डॉ एजाज मरीजों को देखने के साथ उनकी सर्जरी भी करते हैं. कई लोगों ने सलाह दी कि पॉश इलाके में क्लिनिक खोलें लेकिन उनका उद्देश्य गरीबों की सेवा करना है और इसी के साथ पिछले 40-45 सालों से यह सेवा समाज के लिए कर रहे हैं. प्रैक्टिस जब शुरू की तो लोग कम आते थे, जो आते थे वह गरीब होते थे. जब उनकी बीमारी का इलाज होना शुरु हुआ, तो धीरे-धीरे गांव के लोग आने लगे.

मेडिकल के स्टूडेंट्स से की अपील

डॉ एजाज अली ने बताया कि एक डॉक्टर के लिए जरूरी है कि वह मरीज को देखकर और उसकी नब्ज टटोल कर बीमारी का अंदाजा लगा ले. उनके समय के शिक्षक क्लिनिकल प्रैक्टिस बेहतर तरीके से सिखाते थे. आज डॉक्टर मरीज को दूर से देखते हैं और शिकायत के आधार पर जांच लिख देते हैं. फिर जांच रिपोर्ट के आधार पर इलाज करते हैं. जो मेडिकल के स्टूडेंट हैं और डॉक्टरी की पढ़ाई सीख रहे हैं, उनसे वह यही अपील करेंगे कि क्लिनिकल स्टडी पर ध्यान दें. लक्षणों के आधार पर नब्ज को टटोलने का हुनर हासिल करें और कोशिश करें कि मरीज को अच्छे से डायग्नोज कर इसका सटीक ट्रीटमेंट करें.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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