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JPSC घोटाला: डॉ. दिलीप प्रसाद के बाद गिरफ्तार होने वाले जेपीएससी के दूसरे अध्यक्ष बने एल खियांग्ते

रांची : JPSC और अन्य नियुक्ति परीक्षाओं में कथित अनियमितता मामले में गिरफ्तार एल खियांग्ते आयोग के दूसरे ऐसे अध्यक्ष बन गए हैं जिन्हें जेल जाना पड़ा है। इससे पहले पहली और दूसरी संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा में गड़बड़ी के मामले में डॉ. दिलीप प्रसाद गिरफ्तार होकर जेल जा चुके हैं. झारखंड में राज्य गठन के बाद 25 वर्षों में जेपीएससी की अब तक 14 संयुक्त सिविल सेवा परीक्षाएं आयोजित हुई हैं और इनमें दो अध्यक्षों की गिरफ्तारी हो चुकी है.

एल खियांग्ते ने 27 फरवरी 2025 को जेपीएससी अध्यक्ष का पद संभाला था. उनका कार्यकाल लगभग 17 माह का ही रहा. 21 जुलाई 2026 को सीआइडी की छापेमारी के दौरान उन्होंने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था. सीआइडी ने उनसे पहले दो बार पूछताछ की और 10 अगस्त 2026 को नियुक्ति प्रक्रिया में कथित अनियमितता के मामले में गिरफ्तार कर लिया. इस मामले में उप परीक्षा नियंत्रक, टीडीपीएल के निदेशक सहित 19 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है.

विवाद से गिरफ्तारी तक

14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 19 अप्रैल 2026 को आयोजित हुई थी. परिणाम जारी होने के बाद अभ्यर्थियों ने बड़े पैमाने पर अनियमितता के आरोप लगाए और 3 जुलाई 2026 से विवाद तेज हो गया. आरोपों में ब्लैकलिस्टेड कंपनी से काम कराना, परीक्षा संचालन में गड़बड़ी, परिणाम प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और एक ही एजेंसी टीडीपीएल को बार-बार काम दिए जाने जैसे मुद्दे शामिल थे. सीआइडी ने 21 और 23 जुलाई 2026 को जेपीएससी कार्यालय, खियांग्ते के आवास और अन्य ठिकानों पर छापेमारी की. इस दौरान दस्तावेज, कंप्यूटर डेटा और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड जब्त किए गए. छापेमारी के दिन ही खियांग्ते ने पद से इस्तीफा दे दिया था.

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खियांग्ते का प्रशासनिक करियर

मिजोरम के रहने वाले एल खियांग्ते वरिष्ठ आइएएस अधिकारियों में रहे हैं. उन्होंने झारखंड प्रशासन में मुख्य सचिव, अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, सचिव, निदेशक और उपायुक्त सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया. दिसंबर 2023 में उन्हें झारखंड का 24वां मुख्य सचिव बनाया गया था. 31 अक्तूबर 2024 को 60 वर्ष की आयु पूरी होने पर वे सेवानिवृत्त हुए. जेपीएससी अध्यक्ष डॉ. मेरी नीलिमा केरकेट्टा के अगस्त 2024 में सेवानिवृत्त होने के बाद लगभग छह माह तक पद खाली रहा था, जिसके बाद राज्य प्रशासन की अनुशंसा पर राज्यपाल ने उनकी नियुक्ति को मंजूरी दी थी. नियमानुसार उन्हें 25 अक्तूबर 2026 तक पद पर रहना था, लेकिन उससे लगभग तीन माह पहले ही उन्हें पद छोड़ना पड़ा.

कार्यकाल के दौरान बढ़ती शिकायतें

खियांग्ते के कार्यकाल में जेपीएससी ने कई भर्ती परीक्षाओं और नियुक्ति प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाया, लेकिन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार शिकायतें सामने आती रहीं. 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के अलावा फॉरेस्ट रेंज अफसर और सहायक वन संरक्षक भर्ती परीक्षाओं को लेकर भी अभ्यर्थियों ने आपत्ति दर्ज कराई थी. आरोप लगाया गया कि परीक्षा संचालन और नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव रहा.

जेपीएससी के अब तक के अध्यक्ष

जेपीएससी के स्थायी अध्यक्षों में फटिक चंद्र हेंब्रम, डॉ. दिलीप प्रसाद, शिव बसंत, देवाशीष गुप्ता, डीके श्रीवास्तव, के. विद्यासागर, सुधीर त्रिपाठी, अमिताभ चौधरी, डॉ. मेरी नीलिमा केरकेट्टा और एल खियांग्ते शामिल रहे हैं. कार्यकारी अध्यक्षों में डॉ. दिलीप प्रसाद, आलोक जैन, डॉ. परवेज हसन और एके चट्टोराज शामिल रहे हैं.

राज्य गठन के बाद जेल गए सात आइएएस अधिकारी

झारखंड राज्य गठन के बाद अब तक सात आइएएस अधिकारियों को विभिन्न मामलों में गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है. इनमें सजल चक्रवर्ती, डॉ. प्रदीप कुमार, सियाराम प्रसाद सिन्हा, पूजा सिंघल, छवि रंजन, विनय कुमार चौबे और एल खियांग्ते शामिल हैं. एल खियांग्ते को 14वीं जेपीएससी परीक्षा में कथित गड़बड़ी के आरोप में सीआइडी ने गिरफ्तार किया है.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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