Stock Market : हिंदुस्तानीय शेयर बाजार में मंगलवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली. कारोबार के आखिरी घंटे में बिकवाली इतनी तेज हुई कि सेंसेक्स 1,600 अंक से ज्यादा और निफ्टी 500 अंक से अधिक टूटकर बंद हुए. इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ईरान को लेकर दिया गया बयान और पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-नेतृत्वक तनाव माना जा रहा है. इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और निवेशकों की बढ़ती चिंता ने बाजार पर दबाव बढ़ा दिया.
शेयर बाजार में आज इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई?
हिंदुस्तानीय शेयर बाजार में गिरावट की शुरुआत सामान्य रही, लेकिन कारोबार के अंतिम घंटे में बिकवाली तेज हो गई. निवेशकों ने जोखिम वाले एसेट्स से पैसा निकालना शुरू कर दिया.
मुख्य वजह अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ईरान को लेकर सख्त बयान रहा. उनके बयान के बाद निवेशकों को आशंका हुई कि पश्चिम एशिया में तनाव फिर बढ़ सकता है. इसका सीधा असर वैश्विक बाजारों के साथ हिंदुस्तानीय बाजार पर भी पड़ा.
बाजार बंद होने पर क्या रहा हाल?
| इंडेक्स | बंद स्तर | गिरावट |
| Sensex | 76,555 | 1,600+ अंक |
| Nifty 50 | 23,887.45 | 500+ अंक |
| India VIX | 28% से ज्यादा उछाल | अस्थिरता बढ़ी |
India VIX में 28% से अधिक की तेजी यह संकेत देती है कि निवेशकों में डर और अनिश्चितता काफी बढ़ गई है.
ट्रंप के बयान का बाजार पर क्या असर पड़ा?
NATO सम्मेलन के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान और पश्चिम एशिया को लेकर कई सख्त बयान दिए. इन बयानों के बाद बाजार को आशंका हुई कि क्षेत्र में तनाव लंबे समय तक बना रह सकता है.
यदि पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ता है तो.
- कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है.
- शिपिंग लागत बढ़ सकती है.
- वैश्विक महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है.
- निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर जा सकते हैं.
इसी कारण दुनियाभर के शेयर बाजारों में जोखिम लेने की इच्छा कमजोर हुई.
कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से हिंदुस्तान क्यों चिंतित है?
हिंदुस्तान अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है. इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का असर सीधे हिंदुस्तानीय वित्तीय स्थिति पर पड़ता है.
ब्रेंट क्रूड लगभग 4% बढ़कर 76.71 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया.
इससे.
- तेल आयात बिल बढ़ सकता है.
- पेट्रोल-डीजल महंगा होने की आशंका बढ़ती है.
- महंगाई पर दबाव आता है.
- प्रशासन के वित्तीय संतुलन पर असर पड़ सकता है.
- कंपनियों की लागत बढ़ सकती है.
किन सेक्टरों में सबसे ज्यादा गिरावट रही?
बाजार में लगभग सभी सेक्टरों में बिकवाली देखने को मिली, लेकिन सबसे ज्यादा दबाव इन सेक्टरों पर रहा.
- Financial Services
- PSU Bank
- Banking
- बड़े लार्जकैप शेयर
बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में गिरावट की वजह निवेशकों की जोखिम से दूरी और वैश्विक अनिश्चितता रही.
विशेषज्ञ क्या मान रहे हैं?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि फिलहाल निवेशक भू-नेतृत्वक घटनाओं पर नजर बनाए हुए हैं.
यदि.
- अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होता है.
- कच्चे तेल की कीमतें स्थिर रहती हैं.
- वैश्विक बाजारों में भरोसा लौटता है.
तो हिंदुस्तानीय बाजार में रिकवरी देखने को मिल सकती है.
लेकिन यदि तनाव बढ़ता है तो आने वाले दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है.
छोटे निवेशकों को क्या करना चाहिए?
ऐसे समय में घबराकर निवेश संबंधी फैसले लेना नुकसानदायक हो सकता है.
विशेषज्ञ आमतौर पर सलाह देते हैं.
- घबराकर शेयर बेचने से बचें.
- लंबी अवधि की निवेश रणनीति बनाए रखें.
- पोर्टफोलियो में विविधता रखें.
- केवल मजबूत कंपनियों में निवेश करें.
- बाजार में गिरावट को अवसर के रूप में भी देखें.
हिंदुस्तान पर इसका आगे क्या असर हो सकता है?
यदि पश्चिम एशिया का संकट लंबा चलता है तो.
- तेल आयात महंगा हो सकता है.
- रुपये पर दबाव बढ़ सकता है.
- महंगाई दोबारा बढ़ सकती है.
- RBI की नीतियों पर असर पड़ सकता है.
- शेयर बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है.
हालांकि यदि तनाव जल्द कम हो जाता है तो बाजार भी तेजी से संभल सकता है.
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