US Iran War: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान के खिलाफ कड़ी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है. बुधवार को उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान पर एक और हवाई हमला करने की तैयारी कर रहा है. इससे पहले ट्रंप ने दावा किया था कि युद्धविराम अब प्रभावी नहीं रहा. एक अमेरिकी न्यूज चैनल के इंटरव्यू के दौरान ईरान के खिलाफ दोबारा सैन्य कार्रवाई की संभावना पर पूछे गए सवाल के जवाब में ट्रंप ने कहा- हमने कल रात उन पर जोरदार हमला किया था. संभव है कि आज रात भी हम उन पर फिर से भीषण हमला करें. ट्रंप ने यह बयान तुर्किये की राजधानी अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन से इतर दिया.
होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हमले का लगाया आरोप
ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल जहाजों पर हुए कथित हमलों के जवाब में की जा रही है. ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरान ने ड्रोन और मिसाइल से व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया है और उसका व्यवहार लगातार आक्रामक बना हुआ है. उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि ईरान अपनी गतिविधियां नहीं रोकता, तो अमेरिका उसके नागरिक बुनियादी ढांचे पर भी हमला कर सकता है और खार्ग द्वीप पर कब्जा कर कर सकता है.
ट्रंप ने कहा ईरान के साथ सीजफायर अब खत्म
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इससे पहले घोषणा की थी कि ईरान के साथ हुआ युद्धविराम (सीजफायर) अब खत्म हो चुका है. तुर्की की राजधानी अंकारा में आयोजित नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन 2026 के दौरान ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत जारी रखना अब किसी काम का नहीं है. उन्होंने कहा कि उनके लिए सीजफायर खत्म हो चुका है और अब वह ईरान के साथ किसी तरह का समझौता नहीं करना चाहते. मीडिया के एक सवाल पर उन्होंने कहा- मेरे हिसाब से सीजफायर खत्म हो गया है. मैं ईरानियों के साथ कोई डील नहीं करना चाहता. वहां ऐसे लोग सत्ता में हैं जो बेहद खतरनाक और हिंसक हैं.
अमेरिकी हमलों के बाद फिर बढ़ा तनाव
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका ने मंगलवार देर रात ईरान के कई ठिकानों पर नए हवाई हमले किए. इन हमलों के बाद पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान पर बेहद सटीक हमला किया है. ट्रंप ने कहा- अमेरिका ने पहले ईरान को स्थिति संभालने का मौका दिया था, लेकिन इसके बावजूद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे कमर्शियल जहाजों पर रॉकेट हमले शुरू कर दिए. इसी के जवाब में अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई की. अमेरिका का दावा है कि ईरान ने मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाले एमटी अल रेकयात, सऊदी अरब के एमटी वेडियन और लाइबेरिया के एमटी साइप्रस प्रॉस्पेरिटी नामक तीन वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाया था. वॉशिंगटन का कहना है कि इन्हीं हमलों के जवाब में ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान चलाया गया.
नाटो प्रमुख ने अमेरिकी हमलों का किया समर्थन
नाटो महासचिव मार्क रुट्टे ने ईरान पर अमेरिकी हमलों को बिल्कुल जरूरी बताया है. उन्होंने कहा कि यदि युद्धविराम लागू है तो उसका पालन होना चाहिए और ईरान पर आरोप है कि उसने इसका उल्लंघन किया है. रुट्टे के अनुसार, जहाजों पर हुए हमलों के बाद अमेरिका की जवाबी कार्रवाई उचित थी. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार- 7 जुलाई को ईरान के खिलाफ नए सैन्य अभियान में 80 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया गया. इनमें ईरान की वायु रक्षा प्रणाली, कमांड एवं कंट्रोल नेटवर्क, तटीय रडार, जहाज-रोधी मिसाइल सिस्टम और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की 60 से ज्यादा नौकाएं शामिल थीं.
ईरान का पलटवार, अमेरिकी ठिकानों को बनाया निशाना
ईरान की प्रशासनी समाचार एजेंसी फ़ार्स के मुताबिक, अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरानी सेना और आईआरजीसी ने बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए. एजेंसी का दावा है कि बहरीन के शेख ईसा एयर बेस और कुवैत के अली अल सलेम एयर बेस समेत 85 अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया. साथ ही ईरान ने यह भी दावा किया कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने बुशहर प्रांत के ऊपर एक अमेरिकी एमक्यू-9 ड्रोन को मार गिराया.
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