आज YouTube दुनिया के सबसे बड़े वीडियो प्लेटफॉर्म में से एक है. करोड़ों लोग हर दिन इस प्लेटफॉर्म पर वीडियो देखते हैं और लाखों लोग इसी के जरिए अपना करियर बना रहे हैं. लेकिन इस पूरी दुनिया को संभालने वाले शख्स की कहानी थोड़ी अलग है. YouTube के CEO नील मोहन का जन्म अमेरिका में हुआ, बचपन का एक हिस्सा वहां बीता और फिर अचानक परिवार के साथ लखनऊ आ गए. उस समय नील को हिंदी बोलना तो दूर, पढ़ना-लिखना भी ठीक से नहीं आता था. नई जगह, नया स्कूल और बिल्कुल अलग माहौल. लेकिन शायद यही बदलाव आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बना.
‘टेक टाइकून्स की कहानी’ की इस कड़ी में आइए जानते हैं नील मोहन के बारे में, उनके बचपन से लेकर YouTube के CEO बनने तक के सफर में छिपे उन किस्सों के बारे में, जिन्हें शायद बहुत कम लोग जानते हैं. आइए जानते हैं.
पिता के पास अमेरिका जाने के लिए थे सिर्फ 25 डॉलर
नील का टेक्नोलॉजी से रिश्ता YouTube से शुरू नहीं हुआ था. वह स्कूल के दिनों से ही टेक्नोलॉजी में दिलचस्पी रखते थे. Stanford के इंटरव्यू में नील मोहन ने खुद बताया कि हाईस्कूल में ही उन्होंने एक छोटा सा सॉफ्टवेयर कंपनी शुरू किया था. यानी जब ज्यादातर शिशु स्कूल, स्पोर्ट्स और दोस्तों में व्यस्त रहते हैं, तब नील टेक्नोलॉजी से कुछ बनाने की कोशिश कर रहे थे.
इसके बाद उन्होंने Stanford University से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. 1996 में ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद उन्होंने टेक और इंटरनेट से जुड़ी कंपनियों में काम शुरू किया. बाद में Stanford से MBA भी किया और वहां Arjay Miller Scholar बने.
Google से पहले इंटरनेट की दुनिया में कर चुके थे बड़ा काम
नील ने अपने करियर की शुरुआत Accenture से की. इसके बाद वह NetGravity और DoubleClick जैसी कंपनियों से जुड़े. DoubleClick इंटरनेट पर ऐड्स दिखाने की टेक्नोलॉजी पर काम करती थी.
2007 में Google ने DoubleClick को करीब 3.1 अरब डॉलर में खरीदा. इस डील में नील की अहम भूमिका थी और DoubleClick के Google में शामिल होने के बाद वह भी Google का हिस्सा बन गए. यही वह दौर था, जब नील इंटरनेट की तेजी से बदलती दुनिया को बहुत करीब से देख रहे थे.
एक समय Google छोड़कर Twitter जाने वाले थे
नील के करियर का एक दिलचस्प मोड़ 2011 में आया. Twitter उन्हें अपने साथ जोड़ना चाहता था. टाइम मैगजीन की समाचार के मुताबिक, Google ने उन्हें रोकने के लिए करीब 100 मिलियन डॉलर के स्टॉक ग्रांट का पैकेज दिया था. नील ने आखिरकार Google के साथ बने रहने का फैसला किया. बाद में उन्होंने YouTube में बड़ी जिम्मेदारियां संभालीं और 2023 में Susan Wojcicki के बाद YouTube के CEO बने.
नील की सबसे बड़ी सीख, बदलाव से मत भागो
नील की पूरी कहानी में एक चीज बार-बार नजर आती है, बदलाव. अमेरिका से हिंदुस्तान आना, नई भाषा सीखना, इंटरनेट के शुरुआती दौर में काम करना, ऐड्स टेक्नोलॉजी में जाना और फिर YouTube जैसे प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी संभालना, हर पड़ाव पर उन्हें कुछ नया सीखना पड़ा.
Stanford में उन्होंने कहा था कि लखनऊ आने का एक्सपीरियंस उनके लिए बहुत बड़ा झटका था, लेकिन इसी ने उन्हें जिंदगी में बदलाव को अपनाना सिखाया. वह इसे अपनी जिंदगी और करियर की सबसे अहम सीखों में से एक मानते हैं.
नोट: यह लेख नया विचार की ‘टेक टायकून्स की कहानी’ सीरीज का हिस्सा है. इस सीरीज के जरिए हम टेक जगत की अलग-अलग दिग्गज हस्तियों की कहानी आपके सामने ला रहे हैं. जानेंगे कि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत कैसे की, किन चुनौतियों का सामना किया और किस तरह अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचे. इस सीरीज की अगली कड़ी में हम 18 सितंबर को टेक इंडस्ट्री के एक और बड़े नाम की कहानी आपके सामने लेकर आएंगे. तब तक जुड़े रहिए हमारे साथ.
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