संवाददाता, कोलकाता
व्यवसायी के खिलाफ एफआइआर दर्ज नहीं होने के बावजूद उसे थाने में बुलाकर परेशान करने और धमकी देने के मामले में कलकत्ता हाइकोर्ट ने कोलकाता पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी जतायी है. इस मामले की सुनवाई करते हुए न्यायाधीश तीर्थंकर घोष ने पूछा कि जब उक्त व्यवसायी के खिलाफ एफआइआर दर्ज नहीं की गयी है, तो पुलिस किस आधार पर उसे तलब कर रही है? कोर्ट ने कहा कि व्यवसायी जांच में पुलिस को बिल्कुल सहयोग करेंगे, लेकिन पुलिस उनके खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं कर सकती है. गिरफ्तारी तो दूर की बात है.
बता दें कि पिछले साल दिसंबर में मयनागुड़ी के एक होटल व्यवसायी का बैंक खाता हैक हो गया था. इस घटना के तीन दिनों के बाद एक दूसरे खाते से उनके खाते में 88 लाख रुपये जमा हो गये. उन्होंने मयनागुड़ी थाने में शिकायत दर्ज करायी. इस बीच, कोलकाता पुलिस के साइबर थाने ने उन्हें व्हाट्सएप पर मैसेज भेजकर तलब किया. कोलकाता पुलिस ने व्यवसायी से कहा कि उनके खाते में जो रकम दूसरे खाते से जमा हुई है, वह उसे लौटा दें. रुपया लौटा देने से मामले को सुलझा लिया जायेगा. आरोप है कि कोलकाता पुलिस ने उन्हें धमकी भी दी. आखिरकार, परेशान होकर उन्होंने कोलकाता पुलिस के खिलाफ हाइकोर्ट में याचिका दायर की.
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