Hot News

कौन संभालेगा सुदिव्य सोनू की राजनीतिक विरासत, श्वेता या कोई और? गिरिडीह में उठने लगे सवाल

गिरिडीह से नवीन शर्मा की रिपोर्ट

Sudivya Sonu Political Legacy: सियासत में भावनाओं का कोई लंबा विराम होता है. नेता के जाने का गम अभी ताजा ही होता है कि नेतृत्व के अगले सवाल कुलबुलाने लगते हैं। कहते हैं कि वक्त बड़ा बेरहम होता है. कल तक जिस नाम के साथ चुनावी रणनीति बनती थी, कार्यकर्ताओं की बैठकें होती थीं और गिरिडीह के विकास की बातें होती थीं, आज वही नाम सिर्फ याद बन गया. यह नाम झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के कद्दावर नेता और सेकेंड टू सीएम सुदिव्य कुमार सोनू है. इस समय सुदिव्य सोनू की अंतिम विदाई के बाद पूरा शहर शोक में डूबा है, मगर सियासत के पन्ने तेजी से पलटने लगे हैं. शहर के फिजां में तैरने लगा है, ‘कौन होगा सुदिव्य सोनू की विरासत?’ उनकी नेतृत्वक विरासत का अगला उत्तराधिकारी कौन होगा? इन सवालों पर सवाल अब धीरे-धीरे चर्चा होने लगी है.

गिरिडीह में महसूस हो रहा है नेतृत्वक खालीपन

सुदिव्य कुमार सोनू का अचानक जाना सिर्फ एक परिवार, एक पार्टी या एक विधानसभा क्षेत्र के लिए बड़ा सदमा नहीं है, बल्कि गिरिडीह की नेतृत्व में एक ऐसा खालीपन पैदा हुआ है, जिसे भरना आसान नहीं होगा. करीब तीन दशक तक झामुमो से जुड़े रहे सुदिव्य ने संगठन की नेतृत्व से लेकर चुनावी मैदान और फिर प्रशासन के शीर्ष स्तर तक अपनी जगह बनाई थी. 2019 में पहली बार गिरिडीह से विधायक बने और 2024 में लगातार दूसरी बार जीत दर्ज कर अपनी नेतृत्वक पकड़ मजबूत की. इसके बाद हेमंत सोरेन प्रशासन में कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी तक पहुंचे.

सवाल सिर्फ सीट का नहीं, सियासी विरासत का भी

सुदिव्य के निधन के बाद सबसे बड़ा सवाल सिर्फ यह नहीं है कि गिरिडीह विधानसभा सीट पर अगला चेहरा कौन होगा? असली सवाल यह है कि गिरिडीह में सुदिव्य ने जो नेतृत्वक जमीन तैयार की, उसे आगे कौन संभालेगा? उनके समर्थकों और झामुमो कार्यकर्ताओं के बीच स्वाभाविक रूप से यह चर्चा है कि पार्टी अब किस चेहरे पर भरोसा करेगी? सुदिव्य की वर्षों की मेहनत से तैयार संगठन, कार्यकर्ताओं का नेटवर्क और जनता के बीच उनकी व्यक्तिगत पकड़ किसी एक दिन में किसी दूसरे नेता को नहीं मिल सकती.

क्या परिवार से निकलेगा नया चेहरा?

सियासी गलियारों में एक चर्चा यह भी है कि क्या सुदिव्य कुमार सोनू का परिवार उनकी नेतृत्वक विरासत को आगे बढ़ाएगा? उनकी पत्नी श्वेता शर्मा के नाम को लेकर भी चर्चाएं सामने आने लगी हैं. हालांकि, अभी इसे लेकर न तो कोई औपचारिक फैसला हुआ है और न ही परिवार की ओर से कोई स्पष्ट नेतृत्वक घोषणा सामने आई है. अगर ऐसा होता है, तो हिंदुस्तानीय नेतृत्व में यह कोई नया उदाहरण नहीं होगा. कई बार किसी लोकप्रिय नेता के निधन के बाद परिवार का कोई सदस्य नेतृत्व में उतरकर उनकी विरासत को आगे बढ़ाता रहा है. इसका ताजा उदाहरण महाराष्ट्र के दिवंगत डिप्टी सीएम अजित पवार थे. अचानक एक भयानक विमान हादसे में निधन के बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को नेतृत्वक विरासत सौंपी गई. लेकिन, गिरिडीह में यह फैसला भावनाओं से ज्यादा संगठन, चुनावी समीकरण और स्थानीय नेतृत्व को ध्यान में रखकर लेना होगा.

JMM के सामने भी बड़ी चुनौती

सुदिव्य कुमार सोनू सिर्फ गिरिडीह के विधायक नहीं थे. झामुमो संगठन में उनकी लंबी पारी रही थी. 1989 में पार्टी से जुड़ने के बाद उन्होंने संगठन में कई जिम्मेदारियां संभालीं और 2003 में गिरिडीह जिला अध्यक्ष भी बने. पार्टी के सामने चुनौती दोहरी है. पहला, गिरिडीह विधानसभा सीट के लिए मजबूत चेहरा तलाशना है. दूसरा, सुदिव्य के समर्थकों और संगठनात्मक नेटवर्क को एकजुट रखना है.

विपक्ष के लिए भी खुला मैदान

सुदिव्य के निधन से गिरिडीह की नेतृत्व में विपक्ष के लिए भी नए समीकरण बनने की संभावना है. 2024 में सुदिव्य ने भाजपा प्रत्याशी को करीब 3,838 मतों के अंतर से हराया था. इससे पहले 2019 में उनकी जीत का अंतर 15,884 वोट था. ऐसे में आने वाला चुनाव सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं होगा. यह सुदिव्य के प्रभाव, झामुमो की संगठनात्मक ताकत और विपक्ष की रणनीति तीनों की परीक्षा भी बन सकता है.

इसे भी पढ़ें: आधा हिंदुस्तान नहीं जानता 1991 में सुदिव्य सोनू ने जिस रेलवे लाइन को उड़ाया था, उसे किसने बनवाया? सच जानकर रह जाएंगे हैरान

कौन बनेगा ‘सोनू’ के बाद गिरिडीह का चेहरा?

फिलहाल, गिरिडीह शोक में डूबा है. सुदिव्य की अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़ ने उनके जनाधार की तस्वीर सामने रख दी. लेकिन, नेतृत्व में शोक के बाद संगठन को आगे बढ़ना होता है. चिता की आग ठंडी हो गई, लेकिन सुदिव्य सोनू के जाने से पैदा हुआ सियासी रिक्तता अभी भी खाली है. एक तरफ आंखों में आंसू हैं, तो दूसरी तरफ गिरिडीह की नेतृत्व में भविष्य को लेकर हलचल शुरू हो चुकी है. सवाल सीधा है, जिस गिरिडीह की सियासत को सुदिव्य सोनू ने अपनी पहचान दी, अब उस विरासत को कौन आगे बढ़ाएगा? एक बात तय है कि सुदिव्य कुमार सोनू का नेतृत्वक अध्याय भले ही अचानक खत्म हो गया हो, लेकिन उनकी बनाई सियासी कहानी अभी खत्म नहीं हुई है. असली सवाल अब यह है कि इस कहानी का अगला किरदार कौन होगा?

इसे भी पढ़ें: सुदिव्य सोनू को ‘गुरुजी’ ने लिया था ‘गोद’, बना दिया ‘नेतृत्व का धुरंधर’

The post कौन संभालेगा सुदिव्य सोनू की नेतृत्वक विरासत, श्वेता या कोई और? गिरिडीह में उठने लगे सवाल appeared first on Naya Vichar.

Spread the love

विनोद झा
संपादक नया विचार

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

About Us

नयाविचार एक आधुनिक न्यूज़ पोर्टल है, जो निष्पक्ष, सटीक और प्रासंगिक समाचारों को प्रस्तुत करने के लिए समर्पित है। यहां राजनीति, अर्थव्यवस्था, समाज, तकनीक, शिक्षा और मनोरंजन से जुड़ी हर महत्वपूर्ण खबर को विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया जाता है। नयाविचार का उद्देश्य पाठकों को विश्वसनीय और गहन जानकारी प्रदान करना है, जिससे वे सही निर्णय ले सकें और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकें।

Quick Links

Who Are We

Our Mission

Awards

Experience

Success Story

© 2025 Developed By Socify

Scroll to Top