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क्या आपको भी लगता है पोस्ट ऑफिस की कमाई टैक्स-फ्री है? संभल जाइए, कहीं ये गलतफहमी नोटिस न भिजवा दे!

TDS on Post Office Schemes: अक्सर हमें लगता है कि पोस्ट ऑफिस की स्कीम्स में पैसा जमा कर दिया तो अब सब ‘टैक्स-फ्री’ है. लेकिन यह एक बड़ी गलतफहमी है. साल 2026 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरते समय आपको अपनी हर छोटी-बड़ी कमाई का हिसाब देना होगा, चाहे उस पर टैक्स की छूट ही क्यों न मिलती हो. अगर आप भी पोस्ट ऑफिस की बचत से ब्याज (Interest) कमा रहे हैं, तो यह समाचार आपके बड़े काम की है.

‘Income from Other Sources’ में क्या-क्या आता है?

इनकम टैक्स की भाषा में एक कैटेगरी होती है, वो है ‘अन्य स्रोतों से आय’. सरल शब्दों में कहें तो जो कमाई आपकी सैलरी, बिजनेस या घर के किराये से नहीं होती, वो यहां आती है. इसमें बैंक और पोस्ट ऑफिस का ब्याज, सिक्योरिटीज से मिलने वाला रिटर्न, फैमिली पेंशन, शेयर का डिविडेंड और लॉटरी या गेम शो से जीती गई रकम शामिल है. यहां तक कि अगर आपको किसी मुआवजे पर ब्याज मिला है या नौकरी छूटने पर कोई कंपनसेशन मिला है, तो उसे भी इसी कॉलम में दिखाना जरूरी है. 

टीडीएस (TDS) काटने के नए नियम क्या हैं?

इनकम टैक्स एक्ट, 2025 के तहत अब टीडीएस से जुड़े नियम सेक्शन 393(1) में बदल दिए गए हैं. नियम कहता है कि अगर आपकी कुल ब्याज आय एक तय सीमा से ज्यादा है, तभी बैंक या संस्थान टीडीएस काटेगा. आम नागरिकों के लिए यह लिमिट 50,000 रुपये है, जबकि सीनियर सिटीजंस के लिए 1 लाख रुपये तक की छूट दी गई है. याद रखें, टीडीएस नहीं कटने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि वह कमाई टैक्स-फ्री है. आपको उसे अपनी कुल आय में जोड़कर दिखाना ही होगा. 

किन पोस्ट ऑफिस स्कीम्स पर लगेगा टैक्स?

हर स्कीम पर टैक्स के नियम अलग हैं. अगर आपने पोस्ट ऑफिस में टाइम डिपॉजिट (FD), आरडी (RD), मंथली इनकम स्कीम (MIS) या सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) में पैसा लगाया है, तो इनसे मिलने वाले ब्याज पर टीडीएस कट सकता है और यह पूरी तरह टैक्स के दायरे में आते हैं. दूसरी तरफ, PPF, सुकन्या समृद्धि योजना (SSA) और सेविंग्स अकाउंट के ब्याज पर फिलहाल टीडीएस नहीं कटता. किसान विकास पत्र (KVP) का ब्याज भी मैच्योरिटी पर टैक्स के दायरे में आता है, भले ही उस पर टीडीएस न कटा हो. 

जानकारी छुपाई तो क्या होगा नुकसान?

आजकल इनकम टैक्स विभाग के पास आपके हर ट्रांजैक्शन की जानकारी AIS (Annual Information Statement) और Form 26AS के जरिए पहले ही पहुंच जाती है. अगर आपने अपने रिटर्न में ब्याज की कमाई नहीं दिखाई और वह आपके AIS में दर्ज है, तो विभाग आपको तुरंत नोटिस भेज सकता है. छोटी सी गलती या जानकारी छुपाना भारी जुर्माने का कारण बन सकता है. इसलिए समझदारी इसी में है कि अपनी बैलेंस शीट साफ रखें और हर निवेश का सही ब्यौरा दें. 

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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