कहानी शुरू होती है एक चेतावनी से. 18 सितंबर को अफगानिस्तान के तालिबान प्रशासन के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी दी.
उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान अफगानिस्तान की जमीन पर सैन्य कार्रवाई करता है या उसकी संप्रभुता का उल्लंघन करता है, तो अफगानिस्तान इसका ‘क्रशिंग रिस्पॉन्स’ देगा.
मुजाहिद ने पाकिस्तान के उस आरोप को भी खारिज किया कि अफगान जमीन का इस्तेमाल पाकिस्तान में हमले करने वाले आतंकियों को ट्रेनिंग, हथियार या पनाह देने के लिए हो रहा है.
सवाल यह है कि तालिबान को अचानक इतनी कड़ी चेतावनी देने की जरूरत क्यों महसूस हुई?
क्या उसे अंदाजा था कि पाकिस्तान अफगानिस्तान के अंदर कुछ करने की तैयारी में है?
या फिर यह सिर्फ दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव की सामान्य प्रतिक्रिया थी?
यहीं से कहानी दिलचस्प होती है.
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