गुमला से जगरनाथ पासवान की रिपोर्ट
Gumla News: गुमला प्रखंड के आंजन पंचायत में हरिनाखाड़ गांव है. इस गांव में कोरवा जनजाति के लोग निवास करते हैं. गांव चारों तरफ से पहाड़ और जंगल से घिरा हुआ है. आज से पांच साल पहले तक यह पूरा इलाका नक्सल प्रभावित था. इसी गांव में नक्सलियों का डेरा रहता था. लेकिन पुलिस की दबिश के बाद इस क्षेत्र से नक्सलमुक्त हो गया. पहले नक्सली थे तो अधिकारी और कर्मचारी गांव नहीं जाते थे और गांव के विकास से मुंह मोड़े हुए थे. अब गांव नक्सलमुक्त हुआ तो गांव के लोग विकास के लिए छटपटा रहे हैं.
तीन पुल बने, लेकिन सड़क नहीं बनी
हालांकि, नक्सल खत्म होने के बाद इस गांव तक जाने के लिए तीन पुल का निर्माण हुआ है. लेकिन, सड़क का निर्माण नहीं किया गया. जिस कारण आज भी बरसात में इस गांव के लोगों को आने जाने में दिक्कत होती है. वहीं गांव में जलमीनार लगाया गया था, जो भ्रष्टाचार की भेट चढ़ गया. जलमीनार बनने के कुछ दिनों बाद ही खराब हो गया. जिसकी अबतक मरम्मत नहीं हुई. पक्का आवास का सपना भी अधूरा है. जबकि प्रशासन द्वारा आदिम जनजातियों के विकास और संरक्षण के लिए कई योजना चला रही है. इसके बाद भी इस गांव में रहने वाले कोरवा जनजाति के लोग प्रशासनी योजनाओं से महरूम हैं. आजादी के 77 साल बाद भी लोग दूषित पानी पी रहे हैं. गांव में बिजली तक नहीं है. जिस कारण अक्सर गांव में हाथियों और अन्य जंगली जानवरों के घुसने का डर बना रहता है.
पूर्व डीसी की पहल से बना पुल
गुमला के पूर्व डीसी शशि रंजन बाइक से गांव तक गये थे. इसके बाद उनकी पहल से नदियों में तीन पुल बना. सड़क की भी स्वीकृति दी थी. लेकिन सड़क नहीं बनी. डीसी की पहल से जलमीनार भी लगा था. लेकिन पीएचइडी विभाग के जलमीनार भ्रष्टाचार की भेट चढ़ गई.
ग्रामीणों का दर्द
ग्रामीण सोमरा कोरवा ने कहा कि हरिनाखाड़ में कोरवा जनजाति के लोग रहते हैं. प्रशासन हमारे लिए कई योजना चला रही है. लेकिन यह सब कागजों में है. इसलिए इसबार जब भी चुनाव होगा. गांव में नेताओं को घुसने नहीं देंगे. वोट का भी बहिष्कार करेंगे. अधिकारियों की भी नो इंट्री करेंगे.
ग्रामीण रामू कोरवा ने कहा कि हमारे गांव तक आने के लिए सड़क नहीं है. गर्मी के दिनों में तो किसी प्रकार आते जाते हैं. लेकिन बरसात के मौसम में सड़क फिसलन हो जाता है. क्योंकि, मिटटी की सड़क है. प्रशासन और प्रशासन से मांग है कि हमारे गांव की सड़क को बनवा दिया जाए. जिससे गांव का विकास हो.
पानी की समस्या को लेकर ग्रामीण मंगनी कोरवा ने कहा कि हमारे गांव में शुद्ध पानी की समस्या है. जलमीनार बना था. लेकिन वह बेकार है. चापानल है तो उससे दूषित पानी निकलता है. मजबूरी में गांव के लोग इधर-उधर से पानी जुगाड़ कर प्यास बुझाते हैं. गांव के पास से बहने वाली नदी के पानी का उपयोग करते हैं.
ग्रामीण जवंती कोरवा ने कहा कि हमारा गांव गरीबी और लाचारी में जी रहा है. गांव के दो शिशु जो अनाथ हैं. इनके माता पिता नहीं है. इसलिए प्रशासन और प्रशासन से मांग है कि अनाथ बच्चों की बेहतर शिक्षा और परवरिश की व्यवस्था की जाए नहीं तो ये शिशु मानव तस्करी का शिकार हो सकते हैं.
ग्रामीण मंगरी कोरवा ने कहा कि गांव में इलाज की कोई व्यवस्था नहीं है. बीमार पड़ने पर झाड़फूंक कराना पड़ता है या तो ग्रामीण चिकित्सक से इलाज कराते हैं. जिससे जान जाने का डर बना रहता है. कम से कम सप्ताह में एक दिन कोई नर्स या चिकित्सक गांव आये और लोगों की स्वास्थ्य जांच करे.
संजय कुमार भगत, संरक्षक, न्यू आछासं ने कहा कि हरिनाखाड़ गांव में दो अनाथ शिशु हैं. उनका हालचाल लेने गांव गये तो गांव की भयावह समस्या सामने आया है. प्रशासन क्या कर रहा है. यहां के विधायक कहां हैं जो गांव की मामूली समस्याओं को भी दूर नहीं कर पा रहे हैं. गुमला डीसी गांव के विकास के लिए दौरा करें.
ये भी पढ़ें: धनबाद में ताइवान के पीले तरबूज की खेती बनी आकर्षण का केंद्र, प्रदीप पांडेय बने किसानों के लिए मिसाल
ये भी पढ़ें: गढ़वा में सरस्वतिया नदी पुनर्जीवन मुहिम को मिला नया बल, मेदिनीनगर से बढ़े सहयोग के हाथ
The post गुमला: नक्सलमुक्त होने के बाद भी अटका विकास, हरिनाखाड़ गांव की कोरवा जनजाति आज भी सुविधाओं से दूर appeared first on Naya Vichar.

