10 अक्टूबर को अभिजीत दीपके जंतर-मंतर पर होने वाले विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए मुंबई से दिल्ली रवाना हुए. लेकिन जैसे ही एयर इंडिया की फ्लाइट इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर लैंड हुई, दिल्ली पुलिस की करीब आधा दर्जन स्त्री पुलिसकर्मी विमान में दाखिल हुईं और फ्लाइट में सवार CJP नेताओं अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में ले लिया. इस दौरान सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की रही कि नेताओं को हिरासत में लेने के लिए पुरुष पुलिसकर्मियों के बजाय स्त्री पुलिसकर्मियों को आगे किया गया.
क्या स्त्री पुलिसकर्मी पुरुष को हिरासत में ले सकती है?
हिंदुस्तानीय कानून के तहत स्त्री पुलिसकर्मी पुरुष को गिरफ्तार या हिरासत में ले सकती है. हिंदुस्तानीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 43 में ऐसा कोई सामान्य प्रतिबंध नहीं है, जो स्त्री पुलिसकर्मी को पुरुष की गिरफ्तारी से रोकता हो. पुरुष आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए पुरुष पुलिसकर्मी की मौजूदगी भी अनिवार्य नहीं है. हालांकि, गिरफ्तारी के लिए वैधानिक आधार होना और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है. BNSS की धारा 35 बिना वारंट गिरफ्तारी की परिस्थितियां निर्धारित करती है. इसलिए केवल पुलिसकर्मी का स्त्री होना गिरफ्तारी को गैरकानूनी नहीं बनाता.
स्त्री पुलिसकर्मियों को आगे करने के पीछे क्या थी रणनीति?
दिल्ली पुलिस ने स्त्री अधिकारियों को ही हिरासत की कार्रवाई के लिए क्यों चुना, इसकी आधिकारिक वजह सामने नहीं आई है. हालांकि, माना जा रहा है कि विमान के भीतर संभावित टकराव और हंगामे को रोकना पुलिस की प्राथमिकता रही होगी. विमान के अंदर संकरी गलियां और सीमित जगह होने के कारण मामूली धक्का-मुक्की भी बड़े विवाद का रूप ले सकती थी. ऐसे में स्त्री पुलिसकर्मियों की तैनाती से स्थिति को नियंत्रित रखने की कोशिश की गई हो सकती है.
20 जुलाई की हिंसा के बाद पुलिस नहीं लेना चाहती थी कोई जोखिम?
CJP के 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और पुलिस कार्रवाई को लेकर विवाद अभी भी चर्चा में है. संगठन ने आरोप लगाया था कि पुरुष पुलिसकर्मियों ने युवा स्त्री प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट की. CJP ने दावा किया था कि कम उम्र की लड़कियों को चोटें आईं और उनके कपड़े तक फाड़े गए. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि यहां उपलब्ध नहीं है.
ऐसे में पुलिस को आशंका रही होगी कि यदि विमान के भीतर पुरुष पुलिसकर्मियों और CJP नेताओं के बीच धक्का-मुक्की होती, तो इसे लेकर एक नया विवाद खड़ा हो सकता था. स्त्री पुलिसकर्मियों की मौजूदगी से कार्रवाई के दौरान टकराव की आशंका और उसके बाद बनने वाले नेतृत्वक नैरेटिव को सीमित रखने की कोशिश की गई हो सकती है.
फ्लाइट के अंदर क्या हुआ? दीपके ने शुरू कर दी रिकॉर्डिंग
विमान में पुलिसकर्मियों के पहुंचते ही अभिजीत दीपके ने अपनी सीट से वीडियो रिकॉर्ड करना शुरू कर दिया. सौरव दास बीच की सीट पर बैठे थे, जबकि आशुतोष रांका उनके बगल में थे. पुलिसकर्मियों को देखकर CJP नेताओं ने ‘इंकलाब जिंदाबाद’ और ‘हिंदुस्तान माता की जय’ के नारे लगाने शुरू कर दिए.
विमान के अंदर सामने आए दृश्यों में करीब एक दर्जन स्त्री पुलिसकर्मी नेताओं को घेरे दिखाई दीं. इस दौरान दीपके ने हिरासत में लेने के तरीके पर सवाल उठाया और कहा कि पुलिस उन्हें विमान से उतरने के बाद भी हिरासत में ले सकती थी.
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान, CJP ने बताया ‘तानाशाही कार्रवाई’
CJP ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर ‘जंतर-मंतर 2.0’ प्रदर्शन का आह्वान किया था. दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी, लेकिन अभिजीत दीपके ने आंदोलन आगे बढ़ाने का फैसला किया. इसके बाद राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई.
संगठन ने अपने नेताओं की हिरासत को ‘तानाशाही कार्रवाई’ बताते हुए पुलिस की आलोचना की. इस कार्रवाई ने एक बार फिर प्रदर्शन की अनुमति, विरोध के अधिकार और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के तरीकों को लेकर बहस छेड़ दी है.
ध्रुव राठी और रत्ना सिंह भी हिरासत में, 400 से ज्यादा लोग पकड़े गए
प्रदर्शन में शामिल होने से रोकने के लिए यूट्यूबर ध्रुव राठी और CJP की कानूनी इकाई की प्रमुख रत्ना सिंह को भी उनके घरों से हिरासत में लिए जाने की समाचार है. रत्ना सिंह ने दावा किया कि जब वह अपनी कार में बैठीं, तो कई पुलिस वाहन उनके आसपास आ गए.
रिपोर्ट के मुताबिक, राजधानी के अलग-अलग हिस्सों से अब तक 400 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है. प्रदर्शन को रोकने के लिए दिल्ली में बड़े पैमाने पर सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं और मध्य दिल्ली से लेकर पड़ोसी राज्यों की सीमाओं तक निगरानी बढ़ा दी गई है.
दिल्ली में 23 हजार से अधिक CAPF जवान तैनात
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के 23 हजार से अधिक जवान तैनात किए गए हैं. यह तैनाती CJP के जुलाई में हुए आंदोलन और 2020-21 के किसान आंदोलन के दौरान देखी गई व्यवस्था से भी बड़ी बताई जा रही है.
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