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पटना नीट छात्रा केस: अंडरगारमेंट पर स्पर्म, 30 का DNA टेस्ट, कोर्ट की फटकार पर पॉक्सो, 8 महीने जांच, फिर भी दोषी नहीं खोज पाई CBI

Patna Neet Student Death Case: पटना के चित्रगुप्त नगर थाना क्षेत्र स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में NEET की तैयारी कर रही जहानाबाद की छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला एक बार फिर चर्चा में है. इस चर्चित केस में सीबीआइ ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी है. जांच एजेंसी को किसी के खिलाफ ठोस साक्ष्य नहीं मिला. छात्रा की मौत की वजह भी सीबीआइ की जांच में स्पष्ट नहीं हो सकी.

सीबीआइ ने पॉक्सो की विशेष अदालत में अंतिम रिपोर्ट दाखिल की है. इसमें किसी व्यक्ति के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिलने की बात कही गई है. इस मामले की करीब 8 महीने जांच चली. 30 संदिग्ध लोगों का DNA टेस्ट किया गया था. अब इस मामले में अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी. अदालत ने छात्रा के पिता को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है.

6 जनवरी 2026: बंद कमरे में मिली थी छात्रा

6 जनवरी को शंभू गर्ल्स हॉस्टल के एक बंद कमरे में छात्रा अचेत मिली थी. वह हॉस्टल में रहकर NEET की तैयारी कर रही थी. छात्रा की हालत गंभीर थी. उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया. इस घटना के बाद हॉस्टल और पुलिस की जांच शुरू हुई.

9 जनवरी: पिता के बयान पर दर्ज हुई FIR

9 जनवरी को छात्रा के पिता के बयान पर चित्रगुप्त नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज हुई. पिता ने छात्रा के शरीर पर चोट के निशान होने की बात कही थी. उन्होंने दुष्कर्म के प्रयास की आशंका भी जताई थी. इसके बाद मामले की जांच को लेकर सवाल उठने लगे.

11 जनवरी: इलाज के दौरान छात्रा की मौत

11 जनवरी को इलाज के दौरान छात्रा की मौत हो गई. इसके बाद परिजनों और छात्रों में आक्रोश बढ़ गया. शुरुआती पुलिस जांच में मामले को आत्महत्या से जोड़कर देखा गया था. इसे लेकर विवाद खड़ा हो गया. इसके बाद आईजी जितेंद्र राणा के नेतृत्व में एसआइटी का गठन किया गया.

कोर्ट की फटकार के बाद जोड़ा POCSO, मां का बयान भी नहीं

इस मामले की जांच पर शुरुआत से सवाल उठते रहे. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने से पहले ही पटना पुलिस ने छात्रा की मौत को नशीली दवा के ओवरडोज से जोड़ दिया था. हालांकि, 15 जनवरी की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में यौन हिंसा से इनकार नहीं किया जा सका. छात्रा के कपड़ों से स्पर्म मिलने की बात भी सामने आई. सीबीआई ने जांच संभाली तो शुरुआत में POCSO एक्ट नहीं जोड़ा गया. कोर्ट की फटकार के बाद POCSO की धाराएं जोड़ी गईं. इसके बावजूद छात्रा की मां का बयान तक दर्ज नहीं किया गया.

पुलिस की जांच से आगे नहीं बढ़ी सीबीआई की पड़ताल

शुरुआत में केस की जांच चित्रगुप्त नगर थाने की थानाध्यक्ष रोशनी कुमारी ने की. रेप की आशंका सामने आने के बाद सचिवालय SDPO-1 डॉ. अनु कुमारी को जांच की जिम्मेदारी दी गई. मामला पटना से जहानाबाद तक चर्चा में आया तो प्रशासन ने जांच सीबीआई को सौंप दी.

12 फरवरी को केस टेकओवर होने के बाद पवन कुमार IO बने. बाद में विभा कुमारी को जांच अधिकारी बनाया गया. जांच के दौरान करीब 30 लोगों के DNA सैंपल लिए गए. हालांकि, छात्रा के कपड़ों से मिले स्पर्म के DNA से किसी का मिलान नहीं हुआ. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, सीबीआई की जांच भी पुलिस की शुरुआती जांच से आगे कोई ठोस निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी.

मेडिकल और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर उठे सवाल

15 से 30 जनवरी के बीच मेडिकल और पोस्टमार्टम से जुड़ी रिपोर्ट सामने आई. इसमें छात्रा के शरीर पर चोट के निशान मिलने की बात सामने आई. रिपोर्ट के आधार पर दुष्कर्म की आशंका भी जताई गई. छात्रा के अंडरगारमेंट पर स्पर्म मिलने की बात भी सामने आई थी. इसके बाद जांच का दायरा और बढ़ गया.

फरवरी: सीबीआइ को सौंपी गई जांच

मामले को लेकर बढ़ते सवालों के बीच राज्य प्रशासन की सिफारिश पर जांच सीबीआइ को सौंप दी गई. सीबीआइ ने जांच अपने हाथ में लेने के बाद हॉस्टल से लेकर जहानाबाद तक कई लोगों से पूछताछ की. जांच एजेंसी ने घटना से जुड़े लोगों और मामले के अलग-अलग पहलुओं को खंगाला.

सीबीआइ ने हॉस्टल से जब्त की पांच बोरी सामग्री

जांच अपने हाथ में लेने के बाद सीबीआइ टीम शंभू गर्ल्स हॉस्टल पहुंची. सील कमरे को खुलवाया गया. मृतका के कमरे से कॉपियां, किताबें, नोट्स, कपड़े और दस्तावेज समेत कई सामान जब्त किए गए. फॉरेंसिक जांच के लिए करीब पांच बोरी सामग्री ले जाई गई.

सीबीआइ ने चित्रगुप्त नगर थाने की तत्कालीन दारोगा से भी पूछताछ की. इलाज से जुड़े तीनों अस्पतालों के डॉक्टरों से भी जानकारी ली गई.

दो थानेदार भी हुए थे निलंबित

शुरुआती जांच के दौरान पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठे थे. इसके बाद तत्कालीन थानाध्यक्ष रौशनी कुमारी और कदमकुआं थाना के अपर थानाध्यक्ष हेमंत झा को निलंबित किया गया था. हॉस्टल संचालक मनीष कुमार रंजन को भी गिरफ्तार किया गया था.

पुलिस ने छात्रा के परिजनों और उसके करीबियों के डीएनए सैंपल लिए थे. इन सैंपलों का मिलान छात्रा के अंडरगारमेंट पर मिले स्पर्म से कराया गया. लेकिन किसी का सैंपल मैच नहीं हुआ.

सीबीआइ को भी नहीं मिला ठोस सबूत

लंबी जांच के बाद सीबीआइ किसी व्यक्ति के खिलाफ ठोस साक्ष्य नहीं जुटा सकी. जांच एजेंसी के मुताबिक, उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किसी को आरोपी बनाने की स्थिति नहीं बनी. छात्रा की मौत के कारण को लेकर भी जांच एजेंसी कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकाल सकी. इसके बाद सीबीआइ ने अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी.

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अब 13 अक्टूबर को होगी सुनवाई

क्लोजर रिपोर्ट दाखिल होने के बाद अब अदालत में अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी.अदालत ने छात्रा के पिता को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है. यानी क्लोजर रिपोर्ट पर पीड़ित परिवार का पक्ष भी सुना जाएगा.

क्लोजर रिपोर्ट दाखिल होने के बाद केस तुरंत खत्म नहीं होता. अदालत के पास आगे कई विकल्प मौजूद हैं.

कोर्ट के पास अब क्या विकल्प हैं?

क्लोजर रिपोर्ट पर सुनवाई के दौरान अदालत तीन तरह का फैसला ले सकती है.

पहला विकल्प: अदालत सीबीआइ की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर सकती है. ऐसी स्थिति में केस बंद हो सकता है.

दूसरा विकल्प: अदालत आगे की जांच या दोबारा जांच का आदेश दे सकती है.

तीसरा विकल्प: अदालत सीबीआइ की राय से असहमत हो सकती है. उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत खुद संज्ञान भी ले सकती है.

यानी सीबीआइ की क्लोजर रिपोर्ट अंतिम फैसला नहीं है. अंतिम निर्णय अदालत का होगा.

पीड़ित परिवार के पास भी है कानूनी विकल्प

क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार करने से पहले शिकायतकर्ता को नोटिस दिया जाता है. इस मामले में छात्रा के पिता को भी नोटिस जारी किया गया है. पीड़ित परिवार सीबीआइ की क्लोजर रिपोर्ट का विरोध कर सकता है. इसके लिए अदालत में प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल की जा सकती है.

इसमें परिवार जांच के निष्कर्षों पर अपनी आपत्ति दर्ज करा सकता है. साथ ही उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की मांग कर सकता है.

आखिर क्लोजर रिपोर्ट क्या होती है?

क्लोजर रिपोर्ट को फाइनल रिपोर्ट भी कहा जाता है. पुलिस या जांच एजेंसी किसी केस की जांच पूरी करने के बाद अदालत में यह रिपोर्ट दाखिल करती है. इसमें बताया जाता है कि आरोपी के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिले. या जांच में लगाए गए आरोप साबित नहीं हो सके.

लेकिन क्लोजर रिपोर्ट दाखिल होने का मतलब यह नहीं है कि केस अपने आप खत्म हो गया. अंतिम फैसला अदालत का होता है. अदालत रिपोर्ट स्वीकार कर सकती है. आगे की जांच का आदेश दे सकती है. या उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अलग रुख अपना सकती है.

अब सबकी नजर 13 अक्टूबर की सुनवाई पर

शंभू गर्ल्स हॉस्टल केस में सीबीआइ की जांच के बाद अब गेंद अदालत के पाले में है. जांच एजेंसी ने किसी के खिलाफ ठोस साक्ष्य नहीं मिलने की बात कही है. अब 13 अक्टूबर की सुनवाई में अदालत क्लोजर रिपोर्ट पर सुनवाई करेगी. छात्रा के पिता का पक्ष भी सामने आएगा. इसके बाद तय होगा कि यह मामला यहीं खत्म होगा या इसकी जांच और आगे बढ़ेगी.

Also Read: पटना : CBI नहीं खोज पाई कौन है नीट छात्रा की मौत का दोषी, कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट किया दाखिल

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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