Patna Protest In last 6 months : बिहार की राजधानी पटना में पिछले छह महीनों के दौरान अलग-अलग मुद्दों को लेकर लगातार प्रदर्शन हुए. छात्र-अभ्यर्थियों से लेकर शिक्षक, किसान-मजदूर, कर्मचारी और नेतृत्वक दल तक सड़क पर उतरे. भर्ती परीक्षाओं से लेकर विश्वविद्यालय की फीस, जमीन अधिग्रहण, महंगाई, रोजगार और चुनावी मुद्दों तक अलग-अलग मांगों को लेकर मार्च निकाले गए. इन आंदोलनों से शहर की ट्रैफिक व्यवस्था भी प्रभावित हुई. प्रदर्शन के कारण 1000 घंटे से अधिक समय तक यातायात बाधित रहा, वहीं कारोबार पर भी असर पड़ा.
भर्ती से चुनाव तक, अलग-अलग मुद्दों पर सड़क पर उतरे लोग
मार्च से सितंबर के बीच पटना में हुए प्रदर्शनों के मुद्दे अलग-अलग रहे, लेकिन इनमें एक बड़ा हिस्सा रोजगार, भर्ती परीक्षा और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा रहा. शिक्षक अभ्यर्थियों, BPSC और BSSC अभ्यर्थियों, विश्वविद्यालय के छात्रों और स्वास्थ्य विज्ञान के विद्यार्थियों ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन किया. दूसरी ओर किसान-मजदूर संगठनों और नेतृत्वक दलों ने जमीन, महंगाई, रोजगार और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर प्रदर्शन किया.
गांधी मैदान से निकलता है मार्च, जेपी गोलंबर पर पहला बड़ा पड़ाव
पटना में होने वाले कई बड़े प्रदर्शनों की शुरुआत गांधी मैदान के आसपास से होती है. प्रदर्शनकारी अक्सर गेट नंबर 10 से निकलकर जेपी गोलंबर, डाकबंगला चौराहा और आयकर गोलंबर की ओर बढ़ते हैं. इसके बाद उनका लक्ष्य विधानसभा, मुख्यमंत्री आवास या राजभवन की ओर मार्च करना रहता है. प्रशासन आम तौर पर जेपी गोलंबर या डाकबंगला के आसपास ही बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश करता है.
इन इलाकों में ही क्यों बार-बार पहुंचते हैं प्रदर्शनकारी
गांधी मैदान, जेपी गोलंबर, डाकबंगला, आयकर गोलंबर, GPO गोलंबर, बेली रोड और गर्दनीबाग पटना के महत्वपूर्ण प्रशासनिक और यातायात क्षेत्र हैं. इन मार्गों से विधानसभा, राजभवन, मुख्यमंत्री आवास और दूसरे प्रशासनी कार्यालयों तक पहुंच बनाई जा सकती है. यही वजह है कि अपनी मांग प्रशासन और प्रशासन तक सीधे पहुंचाने के लिए प्रदर्शनकारी इन रास्तों को चुनते हैं.
प्रदर्शन का असर सिर्फ जाम तक सीमित नहीं
जब बड़ी संख्या में लोग इन प्रमुख सड़कों पर उतरते हैं तो पुलिस को कानून-व्यवस्था के साथ यातायात प्रबंधन की जिम्मेदारी भी संभालनी पड़ती है. जगह-जगह बैरिकेडिंग, अतिरिक्त पुलिस बल और रूट डायवर्जन की जरूरत पड़ती है. इससे सेंट्रल पटना के कई प्रमुख मार्गों पर आम यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है.
बैरिकेडिंग से टकराव तक पहुंची कई बार स्थिति
शांतिपूर्ण प्रदर्शन निर्धारित क्षेत्र तक सीमित रहे तो पुलिस व्यवस्था का दबाव अपेक्षाकृत कम रहता है. लेकिन जब प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग पार करने या आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं तो स्थिति तनावपूर्ण हो जाती है. पिछले महीनों में कुछ प्रदर्शनों के दौरान पानी की बौछार, आंसू गैस और लाठीचार्ज जैसी कार्रवाई की समाचारें सामने आईं. मई में TRE-4 अभ्यर्थियों के प्रदर्शन और जुलाई में AISA के आंदोलन के दौरान ऐसी स्थिति बनी.
29 मार्च को NEET छात्रा की मौत के मामले में प्रदर्शन
29 मार्च को गर्दनीबाग में NEET छात्रा की मौत के मामले में परिजनों और समर्थकों ने प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने मामले की जांच में तेजी और न्याय की मांग की. परिजनों की ओर से जांच की प्रगति पर सवाल उठाते हुए कार्रवाई की मांग की गई.
30 मार्च को पटना यूनिवर्सिटी में छात्रों का विरोध
30 मार्च को पटना यूनिवर्सिटी में नए भवन के उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने विरोध किया. उस समय मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री कार्यक्रम में मौजूद थे. प्रदर्शन के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बनी.
10 अप्रैल को FIR और छात्र अधिकारों को लेकर मार्च
10 अप्रैल को पटना यूनिवर्सिटी के छात्रों ने पहले के आंदोलन से जुड़े मामलों में FIR, गिरफ्तारी और छात्र अधिकारों के मुद्दे पर मार्च किया. यह विश्वविद्यालय परिसर से जुड़े छात्र आंदोलनों की अगली कड़ी के रूप में सामने आया.
8 मई को TRE-4 अभ्यर्थियों पर पुलिस कार्रवाई
8 मई को बड़ी संख्या में शिक्षक अभ्यर्थी BPSC शिक्षक भर्ती परीक्षा-4 का विज्ञापन जारी करने की मांग को लेकर सड़क पर उतरे. पटना कॉलेज से BPSC कार्यालय की ओर बढ़ रहे अभ्यर्थियों को जेपी गोलंबर के पास रोक दिया गया. बैरिकेडिंग के बाद स्थिति बिगड़ी और पुलिस लाठीचार्ज की समाचार सामने आई. कई अभ्यर्थियों के घायल होने की भी रिपोर्ट सामने आई.
प्रदर्शन के बाद दर्ज हुआ मामला
इस प्रदर्शन के बाद पुलिस की ओर से करीब 5,000 अज्ञात अभ्यर्थियों के खिलाफ मामला दर्ज किए जाने और चार लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई. पुलिस के अनुसार प्रदर्शन के दौरान यातायात प्रभावित हुआ और बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश की गई थी.
10 मई को शिक्षक अभ्यर्थियों के समर्थन में प्रदर्शन
8 मई की कार्रवाई के विरोध में 10 मई को छात्र संगठनों ने प्रदर्शन किया. GPO गोलंबर के आसपास हुए इस प्रदर्शन को देखते हुए राजधानी के प्रमुख यातायात मार्गों पर पुलिस व्यवस्था बढ़ाई गई.
24 मई को सीनेट बैठक के दौरान छात्र आंदोलन
24 मई को पटना यूनिवर्सिटी में सीनेट की बैठक के दौरान छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया. छात्र कल्याण से जुड़े प्रावधान और फीस बढ़ोतरी का विरोध उनकी प्रमुख मांगों में शामिल था. विश्वविद्यालय गेट के पास तनाव की स्थिति को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया.
28 मई को पेट्रोल-डीजल-CNG की कीमतों के खिलाफ प्रदर्शन
28 मई को परिवहन संगठनों ने पेट्रोल, डीजल और CNG की कीमतों में बढ़ोतरी तथा महंगाई के विरोध में प्रदर्शन किया. इस दौरान दो घंटे वाहन संचालन बंद रखने का आह्वान किया गया. इससे परिवहन व्यवस्था पर भी असर पड़ा.
17 जून को RJD का महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ प्रदर्शन
17 जून को RJD ने महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों को लेकर पटना में धरना दिया. यह प्रदर्शन पार्टी के राज्यव्यापी आंदोलन का हिस्सा था.
1 जुलाई को वेतन-पेंशन के लिए विश्वविद्यालय शिक्षकों का आंदोलन
1 जुलाई को विश्वविद्यालय और कॉलेजों के शिक्षकों ने वेतन और पेंशन भुगतान में देरी के विरोध में प्रदर्शन किया. आंदोलन का केंद्र शिक्षकों की सेवा शर्तों और लंबित भुगतान से जुड़े मुद्दे रहे.
22 जुलाई को AISA का लोकभवन मार्च
22 जुलाई को AISA ने कथित NEET पेपर लीक, परीक्षा व्यवस्था और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर लोकभवन मार्च निकाला. गांधी मैदान से आगे बढ़े प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने बैरिकेडिंग कर रोकने की कोशिश की. स्थिति बिगड़ने पर पानी की बौछार, आंसू गैस और लाठीचार्ज के इस्तेमाल की समाचार सामने आई.
25 जुलाई का बिहार बंद बना बड़ा छात्र आंदोलन
25 जुलाई को NEET-UG में कथित पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े विवाद को लेकर छात्र संगठनों ने बिहार बंद और प्रदर्शन का आह्वान किया. NTA को भंग करने, केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और परीक्षा व्यवस्था में सुधार जैसी मांगें उठाई गईं. पटना में गांधी मैदान, डाकबंगला और एक्जीबिशन रोड समेत कई इलाकों में प्रदर्शन का असर देखने को मिला.
डाकबंगला पर टकराव, वॉटर कैनन का इस्तेमाल
25 जुलाई को प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने की कोशिश की. पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोकने का प्रयास किया. डाकबंगला चौराहे पर स्थिति तनावपूर्ण होने के बाद पुलिस की ओर से लाठीचार्ज और वॉटर कैनन के इस्तेमाल की समाचार सामने आई. कुछ स्थानों पर पथराव और वाहनों को नुकसान पहुंचने की भी जानकारी सामने आई.
694 लोगों पर कार्रवाई और फिर मुकदमे वापस लेने का फैसला
प्रदर्शन के बाद पुलिस ने बिहार के अलग-अलग हिस्सों में 694 लोगों को हिरासत में लेने या गिरफ्तार करने की जानकारी दी. इनमें 339 नाबालिग छात्र भी शामिल बताए गए. बाद में 27 जुलाई को बिहार प्रशासन के गृह विभाग की ओर से 25 और 26 जुलाई के प्रदर्शनों से जुड़े मामलों को वापस लेने का फैसला किए जाने की जानकारी सामने आई.
4 अगस्त को NSUI का पेपर लीक और बेरोजगारी के खिलाफ प्रदर्शन
4 अगस्त को NSUI और छात्र संगठनों ने कथित पेपर लीक, बेरोजगारी, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितता और शिक्षा व्यवस्था के मुद्दे पर प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने की कोशिश की, लेकिन आयकर गोलंबर के पास पुलिस ने उन्हें बैरिकेडिंग कर रोक दिया. इसके बाद पानी की बौछार का इस्तेमाल किया गया.
25 अगस्त को जमीन अधिग्रहण के खिलाफ किसान-मजदूरों का मार्च
25 अगस्त को प्रस्तावित सैटेलाइट टाउनशिप के लिए भूमि अधिग्रहण के विरोध में किसान और मजदूर संगठनों ने मार्च निकाला. प्रदर्शनकारी डाकबंगला की ओर बढ़े. आंदोलन का मुख्य मुद्दा जमीन अधिग्रहण और उससे प्रभावित होने वाले लोगों की मांगों से जुड़ा था.
उसी दिन 70वीं BPSC को लेकर छात्रों का महाआंदोलन
25 अगस्त को ही छात्रों ने 70वीं BPSC परीक्षा रद्द करने समेत कई मांगों को लेकर गांधी मैदान से राजभवन और मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च किया. जेपी गोलंबर के पास बैरिकेडिंग तोड़ने की स्थिति बनी. पुलिस ने पानी की बौछार और बल प्रयोग के जरिए भीड़ को नियंत्रित किया. इस दौरान पुलिसकर्मियों के घायल होने और कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई.
10 सितंबर को पटना यूनिवर्सिटी में AISF का आंदोलन
10 सितंबर को AISF ने LLB प्रवेश परीक्षा में कथित पेपर लीक, पीजी फीस बढ़ोतरी और MFA कोर्स शुरू करने समेत कई मांगों को लेकर पटना यूनिवर्सिटी में आंदोलन किया. छात्रों ने विश्वविद्यालय बंद कराने की कोशिश की, जिससे परिसर की शैक्षणिक और प्रशासनिक गतिविधियां प्रभावित हुईं.
15 सितंबर को BSSC अभ्यर्थियों का आंदोलन
15 सितंबर को BSSC परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन तेज हुआ. अभ्यर्थियों का कहना था कि फॉर्म भरने के करीब तीन साल बाद भी परीक्षा नहीं हुई. जेपी गोलंबर पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका. इसके बाद कई छात्र गांधी मैदान गेट नंबर 10 के सामने फ्लाईओवर की ओर बढ़ गए.
फ्लाईओवर पर पुलिस ने की बैरिकेडिंग
प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए फ्लाईओवर पर भी पुलिस ने बैरिकेडिंग की और रास्ते को रस्सी से घेर दिया. मौके पर पुलिस और छात्रों के बीच गतिरोध की स्थिति बनी. कई प्रदर्शनकारी गर्दनीबाग स्थित रेलवे ट्रैक के पास तक पहुंचने की कोशिश करते दिखे.
23 सितंबर को SIR के मुद्दे पर कांग्रेस का प्रदर्शन
23 सितंबर को कांग्रेस ने SIR और निर्वाचन आयोग से जुड़े मुद्दों को लेकर आयकर गोलंबर के पास प्रदर्शन किया. यह आंदोलन चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर केंद्रित था. इसके बाद 25 सितंबर को RJD ने भी चुनाव संबंधी मुद्दों को लेकर पटना में मार्च किया.
25 सितंबर को RJD का चुनावी मुद्दों पर मार्च
25 सितंबर को RJD ने निर्वाचन आयोग और चुनाव से जुड़े मुद्दों को लेकर पटना में प्रदर्शन किया. लगातार नेतृत्वक प्रदर्शनों के कारण राजधानी के प्रमुख चौराहों पर पुलिस बंदोबस्त और यातायात प्रबंधन का दबाव बढ़ा.
28 सितंबर को किसान-मजदूर और वाम दलों का संयुक्त प्रदर्शन
28 सितंबर को किसान-मजदूर संगठनों के साथ CPI, CPI(ML) और AISF से जुड़े कार्यकर्ताओं ने संयुक्त प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे, SIR रद्द करने, महंगाई और रोजगार से जुड़े मुद्दे शामिल थे. गांधी मैदान से लोकभवन मार्च के दौरान पुलिस के साथ झड़प और बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश की स्थिति बनी. बाद में डाकबंगला चौराहे पर पुलिस की ओर से वॉटर कैनन के इस्तेमाल की जानकारी सामने आई.
उसी दिन BUHS के नर्सिंग छात्रों का प्रदर्शन
28 सितंबर को बिहार यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के नर्सिंग छात्रों ने भी प्रदर्शन किया. छात्रों ने परीक्षा परिणामों में गड़बड़ी और बड़ी संख्या में छात्रों को फेल किए जाने का आरोप लगाया. छात्रों ने कॉपियों के दोबारा मूल्यांकन की मांग की.
29 सितंबर को परिचारी अभ्यर्थियों ने मांगी नियुक्ति
29 सितंबर को पटना के गांधी मैदान में परिचारी संघ के अभ्यर्थियों ने नियुक्ति की मांग को लेकर प्रदर्शन किया. हाथों में तिरंगा लेकर पहुंचे अभ्यर्थियों ने लंबित नियुक्ति प्रक्रिया जल्द पूरी करने की मांग की. मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने की कोशिश के दौरान पुलिस ने जेपी गोलंबर के पास बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया.
9,799 पदों पर नियुक्ति का मामला लंबित होने का दावा
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का कहना था कि उन्होंने वर्ष 2023 में परिचारी पद के लिए आवेदन किया था और 2024 में परीक्षा दी थी. इसके बावजूद नियुक्ति नहीं हुई. परिचारी संघ की ओर से करीब 9,799 पदों पर नियुक्ति का मामला लंबित होने का दावा किया गया. अभ्यर्थियों ने जल्द नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने की मांग की.
छह महीने के आंदोलनों ने क्या दिखाया
पटना में हुए इन प्रदर्शनों को देखें तो रोजगार, भर्ती परीक्षा और शिक्षा से जुड़े मुद्दे सबसे प्रमुख रहे. इसके अलावा महंगाई, जमीन अधिग्रहण, सेवा शर्तों और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों ने भी लोगों को सड़क पर उतारा. यानी प्रदर्शन का मुद्दा भले अलग रहा हो, लेकिन प्रशासन और प्रशासन तक अपनी मांग सीधे पहुंचाने के लिए गांधी मैदान से प्रमुख प्रशासनिक मार्गों तक मार्च करने का तरीका लगातार दिखाई दिया.
आम लोगों पर पड़ा सीधा असर
प्रदर्शनों के कारण पटना के प्रमुख मार्गों पर कई बार यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई. बैरिकेडिंग और रूट डायवर्जन के चलते आम वाहन चालकों को वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ा. खासकर गांधी मैदान, जेपी गोलंबर, डाकबंगला, आयकर गोलंबर और बेली रोड जैसे इलाकों में प्रदर्शन के दौरान यातायात दबाव बढ़ा.
प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती
बड़े प्रदर्शनों के दौरान पुलिस के सामने एक साथ दो चुनौतियां रहती हैं. एक तरफ प्रदर्शनकारियों को अपनी बात रखने की जगह देना और दूसरी तरफ संवेदनशील प्रशासनी इलाकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना. इसके साथ ही यातायात को सामान्य बनाए रखना भी प्रशासन की जिम्मेदारी होती है. ऐसे में प्रदर्शन का शांतिपूर्ण और निर्धारित दायरे में रहना पुलिस तथा आम लोगों दोनों के लिए राहत की स्थिति बनाता है.
प्रदर्शन से ट्रैफिक और कारोबार पर असर
बता दें कि, लगातार धरना-प्रदर्शन का असर सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शहर के कारोबार पर भी पड़ा. प्रदर्शन और मार्च के कारण 1000 घंटे से अधिक समय तक ट्रैफिक बाधित रहा, वहीं कई प्रमुख इलाकों में दुकानों के शटर तक गिराने पड़े. पटना के हॉट कहे जाने वाले कई इलाकों में बार-बार सड़क जाम और आवाजाही प्रभावित होने से करोड़ों रुपये के कारोबार पर असर पड़ा है.
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