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October 7, 2026

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पटना नीट छात्रा केस: अंडरगारमेंट पर स्पर्म, 30 का DNA टेस्ट, कोर्ट की फटकार पर पॉक्सो, 8 महीने जांच, फिर भी दोषी नहीं खोज पाई CBI

Patna Neet Student Death Case: पटना के चित्रगुप्त नगर थाना क्षेत्र स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में NEET की तैयारी कर रही जहानाबाद की छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला एक बार फिर चर्चा में है. इस चर्चित केस में सीबीआइ ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी है. जांच एजेंसी को किसी के खिलाफ ठोस साक्ष्य नहीं मिला. छात्रा की मौत की वजह भी सीबीआइ की जांच में स्पष्ट नहीं हो सकी. सीबीआइ ने पॉक्सो की विशेष अदालत में अंतिम रिपोर्ट दाखिल की है. इसमें किसी व्यक्ति के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिलने की बात कही गई है. इस मामले की करीब 8 महीने जांच चली. 30 संदिग्ध लोगों का DNA टेस्ट किया गया था. अब इस मामले में अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी. अदालत ने छात्रा के पिता को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है. 6 जनवरी 2026: बंद कमरे में मिली थी छात्रा 6 जनवरी को शंभू गर्ल्स हॉस्टल के एक बंद कमरे में छात्रा अचेत मिली थी. वह हॉस्टल में रहकर NEET की तैयारी कर रही थी. छात्रा की हालत गंभीर थी. उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया. इस घटना के बाद हॉस्टल और पुलिस की जांच शुरू हुई. 9 जनवरी: पिता के बयान पर दर्ज हुई FIR 9 जनवरी को छात्रा के पिता के बयान पर चित्रगुप्त नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज हुई. पिता ने छात्रा के शरीर पर चोट के निशान होने की बात कही थी. उन्होंने दुष्कर्म के प्रयास की आशंका भी जताई थी. इसके बाद मामले की जांच को लेकर सवाल उठने लगे. 11 जनवरी: इलाज के दौरान छात्रा की मौत 11 जनवरी को इलाज के दौरान छात्रा की मौत हो गई. इसके बाद परिजनों और छात्रों में आक्रोश बढ़ गया. शुरुआती पुलिस जांच में मामले को आत्महत्या से जोड़कर देखा गया था. इसे लेकर विवाद खड़ा हो गया. इसके बाद आईजी जितेंद्र राणा के नेतृत्व में एसआइटी का गठन किया गया. कोर्ट की फटकार के बाद जोड़ा POCSO, मां का बयान भी नहीं इस मामले की जांच पर शुरुआत से सवाल उठते रहे. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने से पहले ही पटना पुलिस ने छात्रा की मौत को नशीली दवा के ओवरडोज से जोड़ दिया था. हालांकि, 15 जनवरी की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में यौन हिंसा से इनकार नहीं किया जा सका. छात्रा के कपड़ों से स्पर्म मिलने की बात भी सामने आई. सीबीआई ने जांच संभाली तो शुरुआत में POCSO एक्ट नहीं जोड़ा गया. कोर्ट की फटकार के बाद POCSO की धाराएं जोड़ी गईं. इसके बावजूद छात्रा की मां का बयान तक दर्ज नहीं किया गया. पुलिस की जांच से आगे नहीं बढ़ी सीबीआई की पड़ताल शुरुआत में केस की जांच चित्रगुप्त नगर थाने की थानाध्यक्ष रोशनी कुमारी ने की. रेप की आशंका सामने आने के बाद सचिवालय SDPO-1 डॉ. अनु कुमारी को जांच की जिम्मेदारी दी गई. मामला पटना से जहानाबाद तक चर्चा में आया तो प्रशासन ने जांच सीबीआई को सौंप दी. 12 फरवरी को केस टेकओवर होने के बाद पवन कुमार IO बने. बाद में विभा कुमारी को जांच अधिकारी बनाया गया. जांच के दौरान करीब 30 लोगों के DNA सैंपल लिए गए. हालांकि, छात्रा के कपड़ों से मिले स्पर्म के DNA से किसी का मिलान नहीं हुआ. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, सीबीआई की जांच भी पुलिस की शुरुआती जांच से आगे कोई ठोस निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी. मेडिकल और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर उठे सवाल 15 से 30 जनवरी के बीच मेडिकल और पोस्टमार्टम से जुड़ी रिपोर्ट सामने आई. इसमें छात्रा के शरीर पर चोट के निशान मिलने की बात सामने आई. रिपोर्ट के आधार पर दुष्कर्म की आशंका भी जताई गई. छात्रा के अंडरगारमेंट पर स्पर्म मिलने की बात भी सामने आई थी. इसके बाद जांच का दायरा और बढ़ गया. फरवरी: सीबीआइ को सौंपी गई जांच मामले को लेकर बढ़ते सवालों के बीच राज्य प्रशासन की सिफारिश पर जांच सीबीआइ को सौंप दी गई. सीबीआइ ने जांच अपने हाथ में लेने के बाद हॉस्टल से लेकर जहानाबाद तक कई लोगों से पूछताछ की. जांच एजेंसी ने घटना से जुड़े लोगों और मामले के अलग-अलग पहलुओं को खंगाला. सीबीआइ ने हॉस्टल से जब्त की पांच बोरी सामग्री जांच अपने हाथ में लेने के बाद सीबीआइ टीम शंभू गर्ल्स हॉस्टल पहुंची. सील कमरे को खुलवाया गया. मृतका के कमरे से कॉपियां, किताबें, नोट्स, कपड़े और दस्तावेज समेत कई सामान जब्त किए गए. फॉरेंसिक जांच के लिए करीब पांच बोरी सामग्री ले जाई गई. सीबीआइ ने चित्रगुप्त नगर थाने की तत्कालीन दारोगा से भी पूछताछ की. इलाज से जुड़े तीनों अस्पतालों के डॉक्टरों से भी जानकारी ली गई. दो थानेदार भी हुए थे निलंबित शुरुआती जांच के दौरान पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठे थे. इसके बाद तत्कालीन थानाध्यक्ष रौशनी कुमारी और कदमकुआं थाना के अपर थानाध्यक्ष हेमंत झा को निलंबित किया गया था. हॉस्टल संचालक मनीष कुमार रंजन को भी गिरफ्तार किया गया था. पुलिस ने छात्रा के परिजनों और उसके करीबियों के डीएनए सैंपल लिए थे. इन सैंपलों का मिलान छात्रा के अंडरगारमेंट पर मिले स्पर्म से कराया गया. लेकिन किसी का सैंपल मैच नहीं हुआ. सीबीआइ को भी नहीं मिला ठोस सबूत लंबी जांच के बाद सीबीआइ किसी व्यक्ति के खिलाफ ठोस साक्ष्य नहीं जुटा सकी. जांच एजेंसी के मुताबिक, उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किसी को आरोपी बनाने की स्थिति नहीं बनी. छात्रा की मौत के कारण को लेकर भी जांच एजेंसी कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकाल सकी. इसके बाद सीबीआइ ने अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी. बिहार की ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें अब 13 अक्टूबर को होगी सुनवाई क्लोजर रिपोर्ट दाखिल होने के बाद अब अदालत में अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी.अदालत ने छात्रा के पिता को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है. यानी क्लोजर रिपोर्ट पर पीड़ित परिवार का पक्ष भी सुना जाएगा. क्लोजर रिपोर्ट दाखिल होने के बाद केस तुरंत खत्म नहीं होता. अदालत के पास आगे कई विकल्प मौजूद हैं. कोर्ट के पास अब क्या विकल्प हैं? क्लोजर रिपोर्ट पर सुनवाई के दौरान अदालत तीन तरह का फैसला ले सकती है. पहला विकल्प: अदालत सीबीआइ की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर सकती है. ऐसी स्थिति में केस बंद हो सकता है. दूसरा

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गुजरात CM से तीसरी बार प्रधानमंत्री तक, सरकार के मुखिया के तौर पर PM मोदी के 25 साल पूरे

PM Modi: 7 अक्टूबर 2001 नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली थी. तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि यही नेतृत्वक सफर अगले 25 साल तक बिना रुके चलता रहेगा. गुजरात की सत्ता से शुरू हुआ यह सफर दिल्ली की गद्दी तक पहुंचा और नरेंद्र मोदी अब लगातार तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री हैं. प्रशासन के मुखिया के तौर पर 25 साल पूरे होने के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को दिल्ली के सरोजिनी नगर स्थित श्री विनायक मंदिर पहुंचे. यहां उन्होंने पूजा-अर्चना की और देश की सेवा पूरी निष्ठा से करते रहने की प्रतिबद्धता दोहराई. 2014 में बदली भूमिका प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी. इसके बाद उन्होंने लंबे समय तक राज्य की कमान संभाली. गुजरात की नेतृत्व में मजबूत पकड़ बनाने के बाद उनका अगला बड़ा पड़ाव राष्ट्रीय नेतृत्व बना. 2014 का लोकसभा चुनाव नरेंद्र मोदी के नेतृत्वक सफर का बड़ा मोड़ साबित हुआ. बीजेपी ने उनके नेतृत्व में चुनाव लड़ा और इसके बाद नरेंद्र मोदी पहली बार देश के प्रधानमंत्री बने. गुजरात के मुख्यमंत्री की कुर्सी से निकलकर वह सीधे देश की प्रशासन के मुखिया बन गए. 2019 में दूसरी बार, 2024 में तीसरी बार PM 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद नरेंद्र मोदी ने दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. फिर 2024 में वह लगातार तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री बने. इस तरह गुजरात के मुख्यमंत्री से शुरू हुआ उनका सफर केंद्र की सत्ता में भी लगातार जारी रहा. प्रशासन प्रमुख के रूप में 25 साल पूरे होने के मौके पर पीएम मोदी ने दिल्ली के श्री विनायक मंदिर में पूजा की. कैबिनेट ने भी दी बधाई इस खास मौके से पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भी एक प्रस्ताव पारित कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई दी. प्रस्ताव में गुजरात से दिल्ली तक उनके नेतृत्वक और प्रशासनिक सफर का जिक्र किया गया. नेताओं की बधाइयों का सिलसिला पीएम मोदी के 25 साल पूरे होने पर कई नेताओं ने भी उन्हें शुभकामनाएं दीं. उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान समेत कई नेताओं ने उनके लंबे नेतृत्वक सफर का जिक्र किया और आगे के लिए शुभकामनाएं दीं. Also Read: PM मोदी-अमित शाह और मुख्य निर्वाचन आयुक्त के विरोध में इंडिया गठबंधन का प्रदर्शन, गया में 8 अक्टूबर को पुतले दहन का ऐलान The post गुजरात CM से तीसरी बार प्रधानमंत्री तक, प्रशासन के मुखिया के तौर पर PM मोदी के 25 साल पूरे appeared first on Naya Vichar.

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बिहार में 307 करोड़ की बायोमेडिकल वेस्ट खरीद पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब

Patna High Court : बिहार के प्रशासनी अस्पतालों में बायोमेडिकल वेस्ट के निबटारे के लिए खरीदे गये माइक्रोवेव डस्टबीन और बायोडिग्रेडेबल बैग की खरीद पर पटना हाईकोर्ट ने राज्य प्रशासन से जवाब मांगा है. जनहित याचिका में खरीद प्रक्रिया में कथित अनियमितता और वस्तुओं की कीमतों में भारी अंतर का आरोप लगाया गया है. कोर्ट ने प्रशासन को 19 नवंबर तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. 307 करोड़ की खरीद पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब पटना हाईकोर्ट ने प्रशासनी अस्पतालों में बायोमेडिकल वेस्ट के निबटारे के लिए खरीदे गये माइक्रोवेव डस्टबीन और बायोडिग्रेडेबल बैग की खरीद से जुड़े मामले में राज्य प्रशासन को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर को होगी. चीफ जस्टिस की पीठ ने की सुनवाई चीफ जस्टिस वी कामेश्वर राव और न्यायाधीश पार्थ सारथी की खंडपीठ ने कौशलेश कुमार की लोकहित याचिका पर सुनवाई की. याचिकाकर्ता की ओर से वरीय अधिवक्ता संजीव कुमार मिश्र ने कोर्ट के समक्ष खरीद प्रक्रिया से जुड़े आरोप रखे. आठ सितंबर को भी हुई थी सुनवाई याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में आठ सितंबर को भी सुनवाई हुई थी. उस समय भी अदालत ने राज्य प्रशासन को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था. अब कोर्ट ने प्रशासन को 19 नवंबर तक अपना जवाब दाखिल करने को कहा है. BMSICL ने निकाली थी निविदा याचिका में आरोप लगाया गया है कि बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड ने प्रशासनी अस्पतालों में बायोमेडिकल वेस्ट के निबटारे के लिए 75 और 45 लीटर क्षमता वाले माइक्रोवेव डस्टबीन और बायोडिग्रेडेबल बैग की आपूर्ति के लिए निविदा निकाली थी. यह निविदा लखनऊ की एसएस मेडिकल सिस्टम को दिये जाने का दावा किया गया है. 15 हजार के डस्टबीन की कीमत 1550 बतायी गयी याचिका में 75 लीटर के एक माइक्रोवेव डस्टबीन की खरीद कीमत 15,490 रुपये होने का आरोप लगाया गया है. याचिकाकर्ता के अनुसार इसकी बाजार कीमत करीब 1,550 रुपये बतायी गयी है. यानी दोनों कीमतों के बीच बड़ा अंतर होने का दावा किया गया है. 45 लीटर डस्टबीन पर भी उठे सवाल याचिका में 45 लीटर क्षमता वाले माइक्रोवेव डस्टबीन की खरीद 11,474 रुपये में किये जाने का आरोप है. वहीं इसकी बाजार कीमत करीब 1,162 रुपये बतायी गयी है. इन कीमतों के आधार पर खरीद प्रक्रिया पर सवाल उठाये गये हैं. बायोडिग्रेडेबल बैग की कीमत पर भी आरोप याचिका में 75 लीटर के बायोडिग्रेडेबल बैग की कीमत 98 रुपये और 45 लीटर के बैग की कीमत 69 रुपये होने का दावा किया गया है. इसके मुकाबले इनकी कीमत क्रमशः 8.50 रुपये और 5.75 रुपये बतायी गयी है. 57 ऑर्डर दिये जाने का दावा कोर्ट को बताया गया कि जून 2024 से 18 अप्रैल 2026 के बीच इन वस्तुओं की आपूर्ति के लिए 57 ऑर्डर दिये गये. याचिका के अनुसार निविदा प्रक्रिया में सात कंपनियों ने हिस्सा लिया था. चार वस्तुओं पर खर्च हुए 307 करोड़ याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि चारों वस्तुओं की खरीद 18 प्रतिशत GST सहित करीब 307 करोड़ रुपये में की गयी. याचिका में इस राशि और वस्तुओं की कथित बाजार कीमत को लेकर सवाल उठाये गये हैं. चार अन्य फर्मों के कोटेशन का भी हवाला याचिकाकर्ता के अनुसार चार अन्य आपूर्तिकर्ता फर्मों से कोटेशन लेने पर इन्हीं चार वस्तुओं की कुल कीमत करीब 29 करोड़ रुपये आती है. इस आधार पर खरीद प्रक्रिया में कीमतों के अंतर को लेकर अदालत का ध्यान आकर्षित किया गया. प्रशासन के जवाब के बाद तस्वीर होगी साफ फिलहाल ये सभी कीमतों और खरीद प्रक्रिया से जुड़े दावे जनहित याचिका में लगाये गये आरोपों का हिस्सा हैं. राज्य प्रशासन का जवाब आने के बाद खरीद प्रक्रिया, निविदा की शर्तों, कीमत निर्धारण और आपूर्ति से जुड़े तथ्यों पर स्थिति और स्पष्ट होगी. 19 नवंबर को फिर होगी सुनवाई पटना हाईकोर्ट ने राज्य प्रशासन को 19 नवंबर तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. इसी दिन मामले की अगली सुनवाई भी होगी. अब अदालत के सामने प्रशासन के जवाब के बाद मामले में आगे की दिशा तय होगी. Also Read : पटना : CBI नहीं खोज पाई कौन है नीट छात्रा की मौत का दोषी, कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट किया दाखिल The post बिहार में 307 करोड़ की बायोमेडिकल वेस्ट खरीद पर हाईकोर्ट सख्त, प्रशासन से मांगा जवाब appeared first on Naya Vichar.

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ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA ब्लॉक के बाद AAP ने खोला मोर्चा, केजरीवाल ने मांगा CEC क इस्तीफा

Aam Aadmi Party: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का विरोध तेज होता जा रहा है. INDIA ब्लॉक के प्रदर्शन के बाद अब आम आदमी पार्टी ने भी इस मुद्दे पर मोर्चा खोल दिया है. AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कथित वोट चोरी के खिलाफ चल रहे आंदोलन का समर्थन करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है. पूरा देश मांग रहा है ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा- केजरीवाल गोवा के तीन दिन के दौरे पर पहुंचे अरविंद केजरीवाल ने एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग अब राष्ट्रीय स्तर पर उठ रही है. उन्होंने दावा किया कि पूरा देश इस मांग को लेकर एकजुट हो रहा है. मैं अगले तीन दिनों के लिए गोवा में हूं और विभिन्न लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मेरी कई बैठकें निर्धारित हैं. लेकिन मैं कहना चाहता हूं कि सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग राष्ट्रीय स्तर पर है; पूरा देश अब इसके लिए एकजुट हो रहा है- अरविंद केजरीवाल, AAP के राष्ट्रीय संयोजक SIR को लेकर केजरीवाल ने लगाए आरोप अरविंद केजरीवाल ने चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ सालों में चुनावों के दौरान असली मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए और फर्जी मतदाताओं के नाम जोड़े गए. केजरीवाल ने दावा किया कि चुनाव इसी प्रक्रिया के जरिए जीते गए. उन्होंने इसे लोकतंत्र के खिलाफ बताते हुए कहा कि इससे चुनावी प्रक्रिया का मजाक बन गया है. पिछले कुछ वर्षों में यह बात सामने आ रही है कि प्रधानमंत्री मोदी ने जितने भी चुनाव जीते हैं, वे केवल असली मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटवाकर और फर्जी मतदाताओं के नाम एसआईआर के माध्यम से जुड़वाकर ही जीते हैं. यह सरासर गलत और लोकतंत्र के खिलाफ है. उन्होंने एक तरह से लोकतंत्र का मजाक उड़ाया है. इसलिए हम इस मांग का समर्थन करते हैं और ज्ञानेश कुमार को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए- अरविंद केजरीवाल, AAP के राष्ट्रीय संयोजक वोट चोरी के खिलाफ आंदोलन को AAP का समर्थन AAP प्रमुख ने साफ कहा कि उनकी पार्टी कथित वोट चोरी के खिलाफ चल रहे आंदोलन का समर्थन करती है. उन्होंने कहा कि अगर वोटर लिस्ट में इस तरह की गड़बड़ियां हो रही हैं तो यह गंभीर मामला है और मुख्य चुनाव आयुक्त को इसकी जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए. INDIA ब्लॉक ने भी किया था प्रदर्शन इससे पहले मंगलवार (6 अक्टूबर) को INDIA ब्लॉक के नेताओं ने भी चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया था. विपक्षी सांसदों ने निर्वाचन सदन की ओर मार्च करने की कोशिश की थी, जिसके बाद विपक्ष के नेताओं को पुलिस में हिरासत में ले लिया गया था. Also Read: चुनाव आयोग के खिलाफ CJP और INDIA गठबंधन का आंदोलन: मुद्दा एक, रास्ता अलग; जानिए दोनों में क्या है समानता और अंतर The post ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA ब्लॉक के बाद AAP ने खोला मोर्चा, केजरीवाल ने मांगा CEC क इस्तीफा appeared first on Naya Vichar.

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IND vs WI 2nd T20: रांची में टिकट के लिए चुकाने होंगे सबसे ज्यादा पैसे, लखनऊ से 4 गुना तो इंदौर से 1.6 गुना महंगा

IND vs WI T20 Ranchi Ticket Price: हिंदुस्तान और वेस्टइंडीज के बीच 9 अक्टूबर को रांची के जेएससीए स्टेडियम में होने वाले टी20 मुकाबले को लेकर क्रिकेट फैंस में उत्साह है. लेकिन मैच देखने के लिए रांची में दर्शकों को लखनऊ और इंदौर के मुकाबले काफी ज्यादा जेब ढीली करनी होगी. तीनों शहरों में होने वाले मुकाबलों के टिकट की कीमतों में बड़ा अंतर सामने आया है. रांची में सबसे सस्ता सामान्य टिकट 1600 रुपये का रखा गया है, जबकि लखनऊ में यही टिकट 399 रुपये और इंदौर में 1000 रुपये में उपलब्ध है. यानी रांची का सबसे सस्ता टिकट लखनऊ की तुलना में करीब चार गुना महंगा है. रांची में 1600 से शुरू है टिकट की कीमत जेएससीए स्टेडियम में होने वाले हिंदुस्तान-वेस्टइंडीज मुकाबले के लिए सामान्य टिकट की शुरुआती कीमत 1600 रुपये रखी गई है. वहीं, लखनऊ के इकाना स्टेडियम में हिंदुस्तान-वेस्टइंडीज के पहले टी20 मैच का सबसे सस्ता टिकट 399 रुपये था. इंदौर के होलकर स्टेडियम में 11 अक्टूबर को होने वाले तीसरे टी20 मुकाबले के लिए सबसे कम कीमत 1000 रुपये रखी गई है. श्रेणी के हिसाब से टिकट रांची में सामान्य टिकट की कीमत अलग-अलग श्रेणी के हिसाब से 1600 से 4500 रुपये तक है. इसके अलावा कॉरपोरेट बॉक्स के टिकट की कीमत 8000 रुपये, हॉस्पिटैलिटी बॉक्स की 9000 रुपये, एमएस धोनी पवेलियन की 10 हजार रुपये और कॉरपोरेट लाउंज की कीमत 15 हजार रुपये तक है. रांची में सबसे महंगा टिकट 18 हजार रुपये का बताया गया है. इसकी तुलना में लखनऊ में सबसे महंगा टिकट 13,500 रुपये और इंदौर में 12,500 रुपये तक है. ब्लैक में 3200 रुपये तक पहुंची कीमत रांची में टिकट की कीमत को लेकर एक और बात चर्चा में है. रिपोर्ट के मुताबिक, स्टेडियम के बाहर सबसे सस्ता टिकट भी 3200 रुपये तक में बिक रहा है. सोमवार को पुलिस ने टिकटों की कालाबाजारी करने वाले कुछ लोगों को हिरासत में लिया था. यानी जो टिकट आधिकारिक तौर पर 1600 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है, उसके लिए फैंस को बाहर दोगुनी कीमत तक चुकानी पड़ रही है. ये भी पढ़ें: ICC प्लेयर ऑफ द मंथ अवॉर्ड के लिए दो हिंदुस्तानीय ओपनर्स नॉमिनेट, लिस्ट में जिम्बाब्वे के कप्तान भी शामिल तीनों शहरों में टिकट की कीमत में कितना अंतर? टिकट श्रेणी रांची इंदौर लखनऊ सबसे सस्ता सामान्य टिकट ₹1,600 ₹1,000 ₹399 सबसे महंगा टिकट ₹18,000 ₹12,500 ₹13,500 सामान्य टिकट की रेंज ₹1,600–4,500 ₹1,000–8,500 ₹399–1,099 हिंदुस्तान-वेस्टइंडीज सीरीज के मुकाबलों के लिए तीनों शहरों में टिकट की कीमतों में यह अंतर अब क्रिकेट फैंस के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. खासकर रांची में सबसे सस्ता टिकट ही 1600 रुपये का होने से दर्शकों को लखनऊ के मुकाबले काफी ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है. 17 मिनट में बिक गए थे 4022 ऑनलाइन टिकट ऑनलाइन टिकट बिक्री को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. रिपोर्ट के अनुसार, ऑनलाइन बिक्री शुरू होने के महज 17 मिनट में 4022 टिकट बिक गए. इसके बाद टिकटों की उपलब्धता को लेकर क्रिकेट फैंस के बीच सवाल उठने लगे. इंडिया बनाम वेस्टइंडीज मैच का टिकट पिछले साल रांची में हिंदुस्तान और दक्षिण अफ्रीका के बीच मुकाबले के दौरान भी ऑनलाइन टिकट वितरण को लेकर शिकायतें सामने आई थीं. इस बार भी ऑनलाइन टिकट बिक्री शुरू होने के कुछ ही मिनटों में बड़ी संख्या में टिकट बिकने के बाद व्यवस्था पर चर्चा शुरू हो गई है. ये भी पढ़ें: भुवनेश्वर कुमार की टीम इंडिया में वापसी, पत्नी नूपुर का पोस्ट हुआ वायरल; एक शब्द ने खींचा फैंस का ध्यान 39 हजार टिकट छापे गए, 11 करोड़ से ज्यादा की कमाई का अनुमान जेएससीए स्टेडियम की दर्शक क्षमता करीब 39,500 बताई गई है. इस मुकाबले के लिए करीब 39 हजार टिकटों की छपाई का आदेश दिया गया है. सभी टिकट बिकने की स्थिति में इससे 11 करोड़ रुपये से अधिक की आय होने का अनुमान है. हालांकि, टिकटों की पूरी बिक्री के बाद ही वास्तविक कमाई का आंकड़ा सामने आएगा. 10 फीसदी तक कॉम्प्लिमेंट्री टिकट बांटने का दावा टिकटों के वितरण को लेकर कॉम्प्लिमेंट्री पास का मुद्दा भी सामने आया है. रिपोर्ट के मुताबिक, कुल टिकटों के करीब 10 फीसदी तक कॉम्प्लिमेंट्री टिकट दिए जाने का दावा किया जा रहा है. इसे लेकर मामला अदालत तक भी पहुंच चुका है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कॉम्प्लिमेंट्री टिकट वितरण पर निगरानी की बात कही गई है. प्रशासन, मीडिया और मैच संचालन से जुड़े लोगों के लिए दिए जाने वाले टिकटों का भी रिकॉर्ड रखने की बात कही गई है. ये भी पढ़ें: Richest Cricket Board: आखिर कौन है दुनिया का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड? देखें टॉप-10 की पूरी लिस्ट The post IND vs WI 2nd T20: रांची में टिकट के लिए चुकाने होंगे सबसे ज्यादा पैसे, लखनऊ से 4 गुना तो इंदौर से 1.6 गुना महंगा appeared first on Naya Vichar.

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वृंदावन में दर्दनाक हादसा: पानी की टंकी में जहरीली गैस से चार संस्कृत छात्रों की मौत, एक की हालत गंभीर

UP News: मथुरा-वृंदावन के चैतन्य विहार इलाके में मंगलवार की रात बड़ा हादसा हो गया. महर्षि पाणिनि संस्कृत गुरुकुल विद्यालय में पानी की अंडरग्राउंड टंकी की सफाई के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से चार छात्रों की मौत हो गई. हादसे में एक अन्य छात्र की हालत गंभीर बनी हुई है और उसका अस्पताल में उपचार चल रहा है. टंकी की सफाई के लिए उतरा छात्र, बचाने पहुंचे साथी भी फंसे जानकारी के अनुसार, गुरुकुल परिसर में करीब 12 से 14 फीट गहरी अंडरग्राउंड पानी की टंकी बनी है. पिछले कई दिनों से टंकी से दुर्गंध आ रही थी. मंगलवार रात करीब 10 बजे एक छात्र बदबू दूर करने के लिए टंकी की सफाई करने नीचे उतरा. टंकी के भीतर जहरीली गैस होने के कारण छात्र अचानक बेहोश हो गया. उसे बचाने के लिए उसके चार साथी भी बारी-बारी से टंकी में उतर गए. कुछ ही देर में जहरीली गैस ने सभी को अपनी चपेट में ले लिया और पांचों छात्र बेहोश होकर टंकी में गिर गए. चार छात्रों ने अस्पताल में तोड़ा दम, एक की हालत गंभीर हादसे की जानकारी मिलते ही पुलिस और स्थानीय लोगों ने राहत-बचाव अभियान शुरू किया. सभी पांचों छात्रों को टंकी से बाहर निकालकर तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया. अस्पताल में डॉक्टरों ने मनु कटारे, विशु, देवांश और आर्यन को मृत घोषित कर दिया. मृतकों की उम्र करीब 16 से 18 वर्ष के बीच बताई जा रही है. वहीं 15 वर्षीय रुद्र का उपचार जारी है और उसकी हालत गंभीर बताई गई है. तीन साल से संचालित हो रहा था गुरुकुल जानकारी के मुताबिक, महर्षि पाणिनि संस्कृत गुरुकुल विद्यालय पिछले करीब तीन वर्षों से संचालित हो रहा है. इसका संचालन मध्य प्रदेश निवासी आशीष कुमार शर्मा द्वारा किए जाने की बात सामने आई है. तीन मंजिला भवन में चल रहे गुरुकुल में करीब 200 छात्रों का पंजीकरण बताया गया है, जबकि लगभग 100 छात्र परिसर में रहकर पढ़ाई कर रहे थे. गुरुकुल के एक छात्र के मुताबिक, टंकी से लगातार बदबू आने के कारण उसकी सफाई कराने का निर्णय लिया गया था. इसी दौरान यह हादसा हो गया. डीएम ने माना, जहरीली गैस बनने से हुआ हादसा मथुरा के डीएम चंद्र प्रकाश सिंह ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि करीब 12 फीट गहरी पानी की टंकी लंबे समय से बंद थी और उसमें पानी भी भरा हुआ था. बंद टंकी के भीतर गैस बनने के कारण उसमें उतरे छात्र बेहोश हो गए. डीएम ने घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि पूरे मामले की विस्तृत जांच कराई जाएगी. गुरुकुल की मान्यता, संचालन व्यवस्था और छात्रों से टंकी की सफाई क्यों कराई गई, इसके साथ ही सुरक्षा इंतजामों में लापरवाही हुई या नहीं, इन सभी पहलुओं की जांच होगी. सीएम योगी ने लिया संज्ञान, सभी गुरुकुलों की होगी जांच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी घटना का संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को राहत और बचाव कार्य तेज करने तथा घायल छात्र को बेहतर से बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं. प्रशासन ने भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए जिले में संचालित गुरुकुलों की सुरक्षा व्यवस्था और अन्य जरूरी इंतजामों की जांच कराने की बात कही है. हादसे के बाद मृत छात्रों के परिवारों में कोहराम मचा हुआ है और पूरे इलाके में शोक का माहौल है. यह भी पढ़ें: कानपुर चिड़ियाघर में काले हिरण पर संक्रमण का कहर, 15 दिन में चार की मौत, पोस्टमार्टम रिपोर्ट सबको चौकाया The post वृंदावन में दर्दनाक हादसा: पानी की टंकी में जहरीली गैस से चार संस्कृत छात्रों की मौत, एक की हालत गंभीर appeared first on Naya Vichar.

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पटना : CBI नहीं खोज पाई कौन है नीट छात्रा की मौत का दोषी, कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट किया दाखिल

NEET Student Death Case : पटना में NEET की तैयारी कर रही जहानाबाद की छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में CBI को जांच के दौरान किसी आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले. एजेंसी ने 6 अक्टूबर 2026 को विशेष पॉक्सो कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी. मामले में अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी. कोर्ट ने छात्रा के परिजनों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है. CBI को नहीं मिला मौत का कारण या दोषी सीबीआइ ने मंगलवार को पॉक्सो के विशेष न्यायाधीश राजीव रंजन रमण की अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की. अपर लोक अभियोजक सुरेश प्रसाद के अनुसार, जांच एजेंसी ने रिपोर्ट में कहा है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ ऐसा साक्ष्य नहीं मिला, जिसके आधार पर उसे मामले में आरोपी बनाया जा सके. 13 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई क्लोजर रिपोर्ट दाखिल होने के बाद अब अदालत इस मामले पर आगे विचार करेगी. कोर्ट ने मामले के सूचक यानी छात्रा के पिता को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है. अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को निर्धारित की गयी है. हॉस्टल के कमरे में बेहोश मिली थी छात्रा मामला पटना के चित्रगुप्त नगर थाना क्षेत्र के मुन्ना चक स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल से जुड़ा है. यहां जहानाबाद की रहने वाली छात्रा NEET प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रही थी. 6 जनवरी 2026 को वह हॉस्टल के एक बंद कमरे में अचेत अवस्था में मिली थी. इलाज के दौरान छात्रा की हो गयी थी मौत बेहोशी की हालत में मिलने के बाद छात्रा को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था. 11 जनवरी 2026 को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी. छात्रा के पिता ने उसके शरीर पर चोट के निशान होने की बात कही थी और दुष्कर्म के प्रयास की आशंका भी जतायी थी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद बढ़ा था मामला छात्रा की मौत के बाद पोस्टमार्टम और मेडिकल जांच से जुड़े निष्कर्षों ने मामले को और गंभीर बना दिया था. जांच के दौरान शारीरिक चोट और दुष्कर्म की आशंका से जुड़े बिंदुओं की भी जांच की गयी. अंडरगारमेंट से स्पर्म मिलने की बात भी सामने आयी थी. DNA जांच में नहीं मिला मेल मामले की जांच के दौरान छात्रा के परिजनों और उसके करीबियों के DNA सैंपल लिये गये थे. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, किसी भी सैंपल का मिलान अंडरगारमेंट पर मिले स्पर्म से नहीं हुआ. इसके बाद भी पुलिस और जांच एजेंसियों ने मामले के अलग-अलग पहलुओं की जांच जारी रखी. दो पुलिस अधिकारियों पर हुई थी कार्रवाई मामले में जांच के शुरुआती स्तर पर लापरवाही के आरोप भी लगे थे. तत्कालीन चित्रगुप्त नगर थानाध्यक्ष रौशनी कुमारी और कदमकुआं थाना के अपर थानाध्यक्ष हेमंत झा को निलंबित किया गया था. हॉस्टल संचालक मनीष कुमार रंजन को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया था. प्रशासन ने CBI को सौंपी थी जांच छात्रा की मौत के बाद मामले को लेकर पुलिस की जांच पर सवाल उठे और विवाद बढ़ा. इसके बाद बिहार प्रशासन ने मामले की जांच CBI से कराने की सिफारिश की. फरवरी 2026 में CBI ने जांच शुरू की और पटना के हॉस्टल से लेकर जहानाबाद तक मामले से जुड़े लोगों से पूछताछ की. छह अक्टूबर को जांच पूरी कर दाखिल की रिपोर्ट कई महीनों की जांच के बाद CBI ने 6 अक्टूबर 2026 को अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी. एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक जांच में किसी व्यक्ति के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले. अब इस रिपोर्ट पर अंतिम निर्णय अदालत को करना है. क्या होती है क्लोजर रिपोर्ट क्लोजर रिपोर्ट को फाइनल रिपोर्ट या FR भी कहा जाता है. जांच एजेंसी तब ऐसी रिपोर्ट अदालत में दाखिल करती है, जब उसे FIR में लगाए गये आरोपों के संबंध में किसी आरोपी के खिलाफ पर्याप्त या ठोस साक्ष्य नहीं मिलते. हालांकि क्लोजर रिपोर्ट दाखिल होने भर से मामला अपने आप खत्म नहीं हो जाता. क्लोजर रिपोर्ट पर कोर्ट के पास क्या विकल्प अदालत जांच एजेंसी की रिपोर्ट को स्वीकार कर मामले को बंद कर सकती है. इसके अलावा कोर्ट जरूरत महसूस होने पर आगे या दोबारा जांच का आदेश भी दे सकती है. अदालत जांच एजेंसी की राय से असहमत होकर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई भी कर सकती है. परिजनों को मिल सकता है विरोध का अधिकार क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार करने से पहले शिकायतकर्ता या पीड़ित पक्ष को नोटिस दिया जाता है. छात्रा के पिता इस रिपोर्ट का विरोध करते हुए अदालत में प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल कर सकते हैं. इसके बाद अदालत उपलब्ध तथ्यों और दलीलों के आधार पर आगे का निर्णय लेगी. मामले की पूरी टाइमलाइन 6 जनवरी 2026: पटना के चित्रगुप्त नगर स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल के बंद कमरे में NEET की तैयारी कर रही छात्रा अचेत अवस्था में मिली. 9 जनवरी 2026: छात्रा के पिता ने दुष्कर्म की आशंका जताते हुए चित्रगुप्त नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी. 11 जनवरी 2026: इलाज के दौरान छात्रा की मौत हो गयी. इसके बाद मामले को लेकर छात्रों और परिजनों में आक्रोश बढ़ा. जनवरी 2026: मामले की जांच के लिए IG जितेंद्र राणा के नेतृत्व में SIT का गठन किया गया. मेडिकल और पोस्टमार्टम से जुड़े निष्कर्षों के बाद जांच का दायरा बढ़ा. फरवरी 2026: बिहार प्रशासन ने मामले की जांच CBI को सौंपने की सिफारिश की. इसके बाद CBI ने अपनी जांच शुरू की. 6 अक्टूबर 2026: CBI ने जांच पूरी करने के बाद विशेष पॉक्सो अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की. अब आगे क्या होगा फिलहाल इस मामले में CBI की क्लोजर रिपोर्ट के बाद गेंद अदालत के पाले में है. 13 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में कोर्ट रिपोर्ट पर आगे की कार्रवाई तय कर सकता है. छात्रा के परिजनों को नोटिस मिलने के बाद वे रिपोर्ट पर अपनी आपत्ति भी अदालत के सामने रख सकते हैं. Also Read : पटना में पिछले 6 महीने से जारी है आंदोलनों का सिलसिला, छात्र-शिक्षक से लेकर किसान तक सड़क पर, 1000 घंटे से अधिक बाधित रहा ट्रैफिक The post पटना : CBI नहीं खोज पाई कौन है नीट छात्रा की मौत का दोषी, कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट किया दाखिल appeared first on Naya Vichar.

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Magha Shraddha 2026: आज मघा श्राद्ध पर बना खास संयोग, 6 आसन उपाय दूर कर देंगे पितृ दोष

Magha Shraddha 2026: पितृ पक्ष के 12वें दिन (द्वादशी तिथि) मघा श्राद्ध के नाम से जाना जाता है. धार्मिक परंपरा के अनुसार, इस दिन मघा नक्षत्र में श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने से पूर्वज खुश होते हैं. पंचांग के अनुसार आज, 7 अक्टूबर 2026 को मघा श्राद्ध किया जाएगा. ऐसे में जानिए मघा नक्षत्र का ज्योतिष से संबध और आज किन 6 आसान उपायों को करने से पितृ दोष दूर हो सकता है. मघा नक्षत्र का ज्योतिष से क्या संबंध है वैदिक ज्योतिष शास्त्र में अश्विनी से लेकर रेवती तक 27 नक्षत्रों का उल्लेख किया गया है. इनमें 10वां स्थान मघा का है. इस नक्षत्र के देवता पितृ माने गए हैं. जबकि इस नक्षत्र का स्वामी केतु ग्रह है. इसलिए मघा को पूर्वज, कुल, वंश और पितृ देव से जुड़ा नक्षत्र माना जाता है. ज्योतिष शास्त्र के जानकार पं. धनंजय पांडेय ने बताया कि पितृ पक्ष में द्वादशी तिथि में मघा नक्षत्र का संयोग होने पर पितरों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने से पूर्वज प्रसन्न होकर वंशजों को खुशहाल रहने का आशीर्वाद देते हैं. मघा श्राद्ध पर पितृ दोष दूर करने के 6 आसान उपाय 1. पितरों के नाम से तर्पण ज्योतिषाचार्य पं. धनंजय पांडेय ने बताया कि पानी में काला तिल मिलाकर तर्पण (दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके) करना चाहिए. इस उपाय को मघा नक्षत्र में करने से पितरों के नाम से पूर्वज प्रसन्न होते हैं, जिससे पितृ दोष दूर होता है. 2. पितरों के लिए पिंडदान करें क्षमता के मुताबिक पितरों के नाम पिंडदान करने से पितृ दोष शांत होता है. अगर घर में ऐसा नहीं कर सकें, तो किसी तीर्थ स्थान या श्राद्ध के लिए उपयुक्त जगह पर पंडित जी से कराया जा सकता है. 3. तिल और अन्न का दान मघा नक्षत्र में पितरों को याद करते हुए काले तिल, चावल, आटा, दाल और कपड़े आदि का दान करने की परंपरा है. ऐसा करने से पितृ दोष दूर होता है. शास्त्रों के अनुसार, दान जरूरतमंद व्यक्ति को करना बेहतर है. 4. कौआ, गाय और कुत्ते को भोजन कराएं शास्त्रों में मघा श्राद्ध पंचबलि का उल्लेख मिलता है. इसमें कौआ, गाय, कुत्ते, चींटी और अतिथि (देवता) को भोजन कराने की परंपरा है. ऐसा करने से पितरों की विशेष कृपा मिलती है, जिससे पितृ दोष शांत होता है. 5. बड़े-बुजुर्गों का सम्मान करें वैसे तो पितृ पक्ष में हर दिन जीवित माता-पिता, दादा-दादी और परिवार के बुजुर्गों की सेवा और सम्मान करना चाहिए. लेकिन, मघा श्राद्ध के दिन परिवार के अलावा भी अन्य बड़े-बुजुर्गों का आदर करने से पूर्वज खुश होते हैं. इससे पितृ दोष दूर होता है. 6. पितरों के नाम से भोजन कराएं मघा श्राद्ध के दिन घर में सात्विक भोजन (बिना लहसुन-प्याज के) बनाकर ब्राह्मण या जरूरतमंद इंसान को भोजन कराने की परंपरा है. ऐसा करने से पूर्वजों की कृपा से पितृ दोष दूर होने की मान्यता है. मघा श्राद्ध पर ‘पंचबलि’ का महत्व पंचबलि जीव धार्मिक मान्यता और महत्व गौ (गाय) बलि सुख-समृद्धि और सात्विक ऊर्जा की प्राप्ति काक (कौआ) बलि पितरों तक संदेश पहुंचाने का माध्यम श्वान (कुत्ता) बलि यमदेव के मार्गरक्षक के रूप में तृप्ति पिपीलिकादि (चींटी) बलि सूक्ष्म जीवों को अन्न देकर ऋण मुक्ति देव या अतिथि बलि घर में अन्नपूर्णा और पितृ देव का आशीर्वाद मघा श्राद्ध पर पंचबलि की दर्शाती तस्वीर (फोटो- एआई) The post Magha Shraddha 2026: आज मघा श्राद्ध पर बना खास संयोग, 6 आसन उपाय दूर कर देंगे पितृ दोष appeared first on Naya Vichar.

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चुनाव आयोग के खिलाफ CJP और INDIA गठबंधन का आंदोलन: मुद्दा एक, रास्ता अलग; जानिए दोनों में क्या है समानता और अंतर

SIR के विरोध में देशभर में सियासत गर्म है. चुनाव आयोग के खिलाफ अलग-अलग जगहों पर प्रदर्शन हो रहे हैं. 2 अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया. इसके चार दिन बाद, 6 अक्टूबर को इंडिया गठबंधन के सांसद भी सड़क पर उतर आए और संसद से चुनाव आयोग के दफ्तर तक मार्च निकाला, लेकिन बीच में ही पुलिस ने उन्हें रोक दिया. 9 घंटे के विरोध-प्रदर्शन और धरना के बाद राहुल गांधी समेत 250 से अधिक लोगों को हिरासत में ले लिया गया. सवाल है कि अगर मुद्दा एक है, तो फिर CJP और इंडिया गठबंधन के आंदोलन में फर्क क्या है? दोनों की मांगें कितनी मिलती-जुलती हैं और दोनों का तरीका कितना अलग है? आइए, आसान भाषा में समझते हैं. CJP और INDIA गठबंधन क्यों आंदोलन कर रहे हैं चुनाव आयोग मतदाता सूची की जांच और अपडेट करने के लिए SIR करवा रही है. आयोग का कहना है कि इसका मकसद मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना है, ताकि मृत हो चुके, हमेशा के लिए दूसरी जगह जा चुके, डुप्लीकेट या सत्यापन के दौरान नहीं मिलने वाले लोगों की पहचान की जा सके और मतदाता सूची में वही लोग शामिल रहें जो योग्य नागरिक हैं. सड़क पर क्यों उतरा INDIA गठबंधन? 6 अक्टूबर का आंदोलन सीधे तौर पर विपक्षी दलों की नेतृत्वक लामबंदी था. इंडिया गठबंधन के सांसद संसद के मकर द्वार से चुनाव आयोग के मुख्यालय निर्वाचन सदन की ओर मार्च करने निकले. हालांकि इंडिया गठबंधन के इस मार्च को पुलिस ने संसद मार्ग के पास रोक दिया. जिसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई विपक्षी नेता आकाशवाणी भवन परिसर में धरने बैठ गए. इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी। हालांकि मंगलवार के आंदोलन में पूरा विपक्ष एक साथ नहीं था. आम आदमी पार्टी ने 6 अक्टूबर के इंडिया गठबंधन के मार्च में शामिल नहीं होने का फैसला किया और कहा कि वह अपना अलग अभियान चलाएगी. आम आदमी पार्टी ने 2 अक्टूबर को जंतर-मंतर प्रदर्शन किया था. दोनों आंदोलनों में समानता और अंतर 2 अक्टूबर को सीजेपी और 6 अक्टूबर को इंडिया गठबंधन के सांसदों के प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा एक ही था, SIR और चुनाव आयोग की जवाबदेही. दोनों ही आंदोलन में SIR के जरिए मतदाता सूची में हो रहे बदलावों पर सवाल उठाए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की. लेकिन दोनों आंदोलनों में बड़ा अंतर संगठन और नेतृत्वक स्वरूप का है. सीजेपी का आंदोलन अभिजीत दीपके के नेतृत्व में चल रहा स्वतंत्र नेतृत्वक अभियान है. उनका जोर युवाओं की लामबंदी पर है. इसके विपरीत, 6 अक्टूबर का इंडिया गठबंधन का प्रदर्शन स्थापित विपक्षी दलों और उनके सांसदों का नेतृत्वक आंदोलन था. यानी मुद्दा काफी हद तक समान है, लेकिन आंदोलन का मंच और तरीका अलग है. सीजेपी इसे युवा आंदोलन के रूप में आगे बढ़ा रही है, जबकि इंडिया गठबंधन ने इसे विपक्षी दलों की सामूहिक नेतृत्वक कार्रवाई के तौर पर उठाया है. The post चुनाव आयोग के खिलाफ CJP और INDIA गठबंधन का आंदोलन: मुद्दा एक, रास्ता अलग; जानिए दोनों में क्या है समानता और अंतर appeared first on Naya Vichar.

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पटना में पिछले 6 महीने से जारी है आंदोलनों का सिलसिला, छात्र-शिक्षक से लेकर किसान तक सड़क पर, 1000 घंटे से अधिक बाधित रहा ट्रैफिक

Patna Protest In last 6 months : बिहार की राजधानी पटना में पिछले छह महीनों के दौरान अलग-अलग मुद्दों को लेकर लगातार प्रदर्शन हुए. छात्र-अभ्यर्थियों से लेकर शिक्षक, किसान-मजदूर, कर्मचारी और नेतृत्वक दल तक सड़क पर उतरे. भर्ती परीक्षाओं से लेकर विश्वविद्यालय की फीस, जमीन अधिग्रहण, महंगाई, रोजगार और चुनावी मुद्दों तक अलग-अलग मांगों को लेकर मार्च निकाले गए. इन आंदोलनों से शहर की ट्रैफिक व्यवस्था भी प्रभावित हुई. प्रदर्शन के कारण 1000 घंटे से अधिक समय तक यातायात बाधित रहा, वहीं कारोबार पर भी असर पड़ा. भर्ती से चुनाव तक, अलग-अलग मुद्दों पर सड़क पर उतरे लोग मार्च से सितंबर के बीच पटना में हुए प्रदर्शनों के मुद्दे अलग-अलग रहे, लेकिन इनमें एक बड़ा हिस्सा रोजगार, भर्ती परीक्षा और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा रहा. शिक्षक अभ्यर्थियों, BPSC और BSSC अभ्यर्थियों, विश्वविद्यालय के छात्रों और स्वास्थ्य विज्ञान के विद्यार्थियों ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन किया. दूसरी ओर किसान-मजदूर संगठनों और नेतृत्वक दलों ने जमीन, महंगाई, रोजगार और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर प्रदर्शन किया. गांधी मैदान से निकलता है मार्च, जेपी गोलंबर पर पहला बड़ा पड़ाव पटना में होने वाले कई बड़े प्रदर्शनों की शुरुआत गांधी मैदान के आसपास से होती है. प्रदर्शनकारी अक्सर गेट नंबर 10 से निकलकर जेपी गोलंबर, डाकबंगला चौराहा और आयकर गोलंबर की ओर बढ़ते हैं. इसके बाद उनका लक्ष्य विधानसभा, मुख्यमंत्री आवास या राजभवन की ओर मार्च करना रहता है. प्रशासन आम तौर पर जेपी गोलंबर या डाकबंगला के आसपास ही बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश करता है. इन इलाकों में ही क्यों बार-बार पहुंचते हैं प्रदर्शनकारी गांधी मैदान, जेपी गोलंबर, डाकबंगला, आयकर गोलंबर, GPO गोलंबर, बेली रोड और गर्दनीबाग पटना के महत्वपूर्ण प्रशासनिक और यातायात क्षेत्र हैं. इन मार्गों से विधानसभा, राजभवन, मुख्यमंत्री आवास और दूसरे प्रशासनी कार्यालयों तक पहुंच बनाई जा सकती है. यही वजह है कि अपनी मांग प्रशासन और प्रशासन तक सीधे पहुंचाने के लिए प्रदर्शनकारी इन रास्तों को चुनते हैं. प्रदर्शन का असर सिर्फ जाम तक सीमित नहीं जब बड़ी संख्या में लोग इन प्रमुख सड़कों पर उतरते हैं तो पुलिस को कानून-व्यवस्था के साथ यातायात प्रबंधन की जिम्मेदारी भी संभालनी पड़ती है. जगह-जगह बैरिकेडिंग, अतिरिक्त पुलिस बल और रूट डायवर्जन की जरूरत पड़ती है. इससे सेंट्रल पटना के कई प्रमुख मार्गों पर आम यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है. बैरिकेडिंग से टकराव तक पहुंची कई बार स्थिति शांतिपूर्ण प्रदर्शन निर्धारित क्षेत्र तक सीमित रहे तो पुलिस व्यवस्था का दबाव अपेक्षाकृत कम रहता है. लेकिन जब प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग पार करने या आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं तो स्थिति तनावपूर्ण हो जाती है. पिछले महीनों में कुछ प्रदर्शनों के दौरान पानी की बौछार, आंसू गैस और लाठीचार्ज जैसी कार्रवाई की समाचारें सामने आईं. मई में TRE-4 अभ्यर्थियों के प्रदर्शन और जुलाई में AISA के आंदोलन के दौरान ऐसी स्थिति बनी. 29 मार्च को NEET छात्रा की मौत के मामले में प्रदर्शन 29 मार्च को गर्दनीबाग में NEET छात्रा की मौत के मामले में परिजनों और समर्थकों ने प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने मामले की जांच में तेजी और न्याय की मांग की. परिजनों की ओर से जांच की प्रगति पर सवाल उठाते हुए कार्रवाई की मांग की गई. 30 मार्च को पटना यूनिवर्सिटी में छात्रों का विरोध 30 मार्च को पटना यूनिवर्सिटी में नए भवन के उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने विरोध किया. उस समय मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री कार्यक्रम में मौजूद थे. प्रदर्शन के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बनी. 10 अप्रैल को FIR और छात्र अधिकारों को लेकर मार्च 10 अप्रैल को पटना यूनिवर्सिटी के छात्रों ने पहले के आंदोलन से जुड़े मामलों में FIR, गिरफ्तारी और छात्र अधिकारों के मुद्दे पर मार्च किया. यह विश्वविद्यालय परिसर से जुड़े छात्र आंदोलनों की अगली कड़ी के रूप में सामने आया. 8 मई को TRE-4 अभ्यर्थियों पर पुलिस कार्रवाई 8 मई को बड़ी संख्या में शिक्षक अभ्यर्थी BPSC शिक्षक भर्ती परीक्षा-4 का विज्ञापन जारी करने की मांग को लेकर सड़क पर उतरे. पटना कॉलेज से BPSC कार्यालय की ओर बढ़ रहे अभ्यर्थियों को जेपी गोलंबर के पास रोक दिया गया. बैरिकेडिंग के बाद स्थिति बिगड़ी और पुलिस लाठीचार्ज की समाचार सामने आई. कई अभ्यर्थियों के घायल होने की भी रिपोर्ट सामने आई. प्रदर्शन के बाद दर्ज हुआ मामला इस प्रदर्शन के बाद पुलिस की ओर से करीब 5,000 अज्ञात अभ्यर्थियों के खिलाफ मामला दर्ज किए जाने और चार लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई. पुलिस के अनुसार प्रदर्शन के दौरान यातायात प्रभावित हुआ और बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश की गई थी. 10 मई को शिक्षक अभ्यर्थियों के समर्थन में प्रदर्शन 8 मई की कार्रवाई के विरोध में 10 मई को छात्र संगठनों ने प्रदर्शन किया. GPO गोलंबर के आसपास हुए इस प्रदर्शन को देखते हुए राजधानी के प्रमुख यातायात मार्गों पर पुलिस व्यवस्था बढ़ाई गई. 24 मई को सीनेट बैठक के दौरान छात्र आंदोलन 24 मई को पटना यूनिवर्सिटी में सीनेट की बैठक के दौरान छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया. छात्र कल्याण से जुड़े प्रावधान और फीस बढ़ोतरी का विरोध उनकी प्रमुख मांगों में शामिल था. विश्वविद्यालय गेट के पास तनाव की स्थिति को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया. 28 मई को पेट्रोल-डीजल-CNG की कीमतों के खिलाफ प्रदर्शन 28 मई को परिवहन संगठनों ने पेट्रोल, डीजल और CNG की कीमतों में बढ़ोतरी तथा महंगाई के विरोध में प्रदर्शन किया. इस दौरान दो घंटे वाहन संचालन बंद रखने का आह्वान किया गया. इससे परिवहन व्यवस्था पर भी असर पड़ा. 17 जून को RJD का महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ प्रदर्शन 17 जून को RJD ने महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों को लेकर पटना में धरना दिया. यह प्रदर्शन पार्टी के राज्यव्यापी आंदोलन का हिस्सा था. 1 जुलाई को वेतन-पेंशन के लिए विश्वविद्यालय शिक्षकों का आंदोलन 1 जुलाई को विश्वविद्यालय और कॉलेजों के शिक्षकों ने वेतन और पेंशन भुगतान में देरी के विरोध में प्रदर्शन किया. आंदोलन का केंद्र शिक्षकों की सेवा शर्तों और लंबित भुगतान से जुड़े मुद्दे रहे. 22 जुलाई को AISA का लोकभवन मार्च 22 जुलाई को AISA ने कथित NEET पेपर लीक, परीक्षा व्यवस्था और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर लोकभवन मार्च निकाला. गांधी मैदान से आगे

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