Sachin Tendulkar play for Pakistan: क्रिकेट की दुनिया में सचिन तेंदुलकर को भगवान का दर्जा दिया जाता है. हिंदुस्तान के लिए स्पोर्ट्सते हुए उन्होंने बल्ले से ऐसे रिकॉर्ड बनाए, जो आज भी क्रिकेट प्रेमियों के लिए किसी सपने से कम नहीं हैं. लेकिन सचिन के करियर से जुड़ा एक ऐसा दिलचस्प किस्सा है, जिसे सुनकर शायद कई क्रिकेट फैंस हैरान रह जाएं. हिंदुस्तान की जर्सी पहनने से पहले ही सचिन एक बार पाकिस्तान टीम का हिस्सा बन चुके थे. हालांकि, यह कोई आधिकारिक मुकाबला नहीं था और न ही सचिन ने पाकिस्तान के लिए बल्लेबाजी की थी. महज 13 साल की उम्र में उन्होंने पाकिस्तान टीम के लिए बतौर सब्स्टीट्यूट फील्डर मैदान संभाला था.
1987 में ब्रेबोर्न स्टेडियम में हुआ था यह खास वाकया
साल 1987 में पाकिस्तान की टीम हिंदुस्तान दौरे पर थी। मुंबई के ब्रेबोर्न स्टेडियम में हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच एक प्रदर्शनी मुकाबला स्पोर्ट्सा जा रहा था. यह मैच 40-40 ओवर का था और इसमें दोनों देशों के कई दिग्गज खिलाड़ी मैदान पर मौजूद थे. उस समय सचिन तेंदुलकर सिर्फ 13 साल के थे और क्रिकेट की दुनिया में अपनी पहचान बनाने की राह पर थे. वह मुंबई क्रिकेट से जुड़े हुए थे और बड़े खिलाड़ियों के बीच स्पोर्ट्स को करीब से देख रहे थे.
इमरान खान की टीम में अचानक मिली जगह
मैच के दौरान लंच ब्रेक में पाकिस्तान के दो खिलाड़ी जावेद मियांदाद और अब्दुल कादिर मैदान से बाहर चले गए. पाकिस्तान टीम को कुछ समय के लिए सब्स्टीट्यूट फील्डरों की जरूरत थी. उस समय पाकिस्तान के कप्तान इमरान खान ने क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया के कप्तान हेमंत केनकरे से मदद मांगी. उनसे स्थानीय युवा खिलाड़ियों को फील्डिंग के लिए भेजने को कहा गया. लेकिन इससे पहले कि कोई फैसला होता, युवा सचिन खुद मैदान पर उतरने के लिए तैयार हो गए. उन्हें पाकिस्तान की हरी जर्सी पहनाई गई और वह इमरान खान की टीम के लिए फील्डिंग करने लगे.
सामने थे कपिल देव, हाथ में नहीं आया कैच
इस मैच में सचिन के लिए सबसे यादगार पल तब आया, जब हिंदुस्तानीय कप्तान कपिल देव ने उनकी तरफ शॉट स्पोर्ट्सा. सचिन उस समय आउटफील्ड में फील्डिंग कर रहे थे. हालांकि वह गेंद कैच के लिए नहीं थी और बाउंड्री की ओर चली गई. लेकिन 13 साल के सचिन के लिए बड़े अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के बीच मैदान पर खड़ा होना ही किसी सपने जैसा था. सचिन ने अपनी आत्मकथा प्लेइंग इट माई वे में इस घटना को याद करते हुए लिखा था कि उन्हें नहीं पता कि इमरान खान को आज भी यह बात याद है या नहीं कि उन्होंने कभी उनकी पाकिस्तान टीम के लिए फील्डिंग की थी.
बाउंड्री पर खड़े किए जाने से थोड़े निराश थे सचिन
सचिन के बचपन के दोस्त मार्कस कौटो ने भी इस घटना का जिक्र किया था. उनके अनुसार, सचिन को उम्मीद थी कि उन्हें कोई शानदार मौका मिलेगा, लेकिन जब उन्हें बाउंड्री लाइन पर खड़ा किया गया तो वह थोड़े निराश हो गए. सचिन ने उनसे पूछा था कि क्या कोई बड़ा शॉट उनकी तरफ कैच के लिए आ सकता था. जवाब में उन्हें बताया गया कि बल्लेबाजों के शॉट तो स्टेडियम के पहले टियर तक पहुंच रहे थे.
छह विकेट से जीता हिंदुस्तान
इस प्रदर्शनी मुकाबले में हिंदुस्तान ने पाकिस्तान को छह विकेट से मात दी थी. लेकिन इस मैच के करीब दो साल बाद क्रिकेट की तस्वीर बदल चुकी थी. 1989 में सचिन तेंदुलकर ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा. अब वह पाकिस्तान टीम के लिए फील्डिंग करने वाला 13 साल का बच्चा नहीं, बल्कि हिंदुस्तान की कैप पहनने वाला युवा बल्लेबाज था. उनका सामना एक बार फिर इमरान खान, वसीम अकरम और वकार यूनिस जैसे दिग्गजों से हुआ. फर्क सिर्फ इतना था कि इस बार सचिन मैदान पर हिंदुस्तान के लिए उतरे थे.
इतिहास में दर्ज हो गया सचिन का नाम
आगे चलकर सचिन तेंदुलकर ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 100 शतक लगाने वाले पहले बल्लेबाज बनने से लेकर कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल कीं. 13 साल की उम्र में पाकिस्तान की जर्सी पहनकर फील्डिंग करने वाला वह छोटा सा पल आज उनके महान क्रिकेट सफर की सबसे अनोखी कहानियों में शामिल है.
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