All Party Meeting Walkout : संसद के बेहद महत्वपूर्ण मानसून सत्र के शुरू होने से ठीक एक दिन पहले रविवार को सभी दलों की एक बैठक (ऑल पार्टी मीटिंग) बुलाई गई थी. केंद्र प्रशासन की ओर से बुलाई गई इस बैठक के शुरू होते ही विपक्ष ने एकजुट होकर मीटिंग से वॉकआउट कर दिया. विपक्ष द्वारा मीटिंग का बहिष्कार करने के बाद प्रशासन और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ गया है.
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प्रशासन द्वारा बुलाई गई इस बैठक में भाग लेने के लिए कई प्रमुख विपक्षी दलों के बड़े नेता पहुंचे थे. लेकिन जैसे ही बैठक की कार्यवाही शुरू हुई, प्रशासन और विपक्ष के बीच कुछ जरूरी मुद्दों को लेकर गंभीर मतभेद सामने आ गए. इन मतभेदों के चलते बातचीत आगे बढ़ने से पहले ही विपक्षी नेताओं ने एक साथ बैठक से बाहर निकलने (वॉकआउट करने) का सामूहिक फैसला ले लिया. इस अचानक उठाए गए कदम ने प्रशासन के साथ विपक्ष के कड़े नेतृत्वक मुकाबले को और ज्यादा तेज कर दिया है.
एनसीपीआई को बुलाने पर विपक्ष ने जताई आपत्ति
सर्वदलीय बैठक में NCPI को बुलाए जाने पर विपक्ष ने कड़ा विरोध जताया. इससे कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, जेएमएम, आम आदमी पार्टी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, वाम दलों और शिवसेना (यूबीटी) समेत पूरे विपक्ष ने बैठक का बहिष्कार कर वॉकआउट किया. टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि जिन 20 सांसदों को एनसीपीआई के नाम पर बैठक में बुलाया गया, उनके विलय को अब तक लोकसभा अध्यक्ष की मंजूरी नहीं मिली है और उनकी अयोग्यता से जुड़ी याचिकाएं भी लंबित हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में संसदीय कार्य मंत्री ने उन्हें किस आधार पर बैठक का निमंत्रण दिया. महुआ ने कहा कि विपक्ष ने इस पर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है और इसी के प्रतीक के तौर पर सर्वदलीय बैठक से वॉकआउट किया.
टीएमसी सांसद काकोली घोष का दावा
लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तिदार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों का एनसीपीआई में विलय हो चुका है. उन्होंने दावा किया कि लोकसभा अध्यक्ष ने इस विलय को स्वीकार कर लिया है और सदन में एनसीपीआई के सांसदों के लिए अलग बैठने की व्यवस्था भी की जाएगी. उनके इस बयान से सर्वदलीय बैठक में एनसीपीआई की मौजूदगी को लेकर जारी विवाद और तेज हो गया है.
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क्या था मीटिंग का एजेंडा?
केंद्र प्रशासन ने संसद सत्र के दौरान होने वाले संसद के कामकाज और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई थी. हालांकि, बैठक शुरू होने के कुछ ही मिनटों बाद विपक्षी दलों के वॉकआउट करने से बैठक का मूल एजेंडा पीछे छूट गया और एनसीपीआई को आमंत्रित किए जाने का विवाद चर्चा का केंद्र बन गया.
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