Noida Bus Accident: यमुना एक्सप्रेसवे पर बुधवार देर रात चलती स्लीपर बस में लगी आग ने 9 यात्रियों की जान ले ली. दिल्ली के कश्मीरी गेट से महोबा जा रही राज कल्पना ट्रैवल्स की बस BR32PA8647 में करीब 30-35 यात्री सवार थे. शुरुआती जांच में AC में स्पार्क या ब्लास्ट के बाद इंजन के लुब्रिकेंट ऑयल में आग लगने की आशंका जताई गई है. हादसे के बाद अब सिर्फ यह सवाल नहीं है कि बस में आग कैसे लगी. बस सड़क पर किस तरह दौड़ रही थी, उसके दस्तावेज कितने राज्यों से जुड़े थे और पुराने नियम उल्लंघनों के बावजूद उस पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई, यह भी जांच का बड़ा हिस्सा बन गया है.
बिहार में रजिस्ट्रेशन, हादसा यूपी में और रिकॉर्ड कई राज्यों से जुड़े
वाहन रिकॉर्ड के मुताबिक BR32PA8647 का रजिस्ट्रेशन 5 अप्रैल 2023 को बिहार के मधुबनी RTO में हुआ था. यह नवंबर 2022 में निर्मित Eicher Pro 6019 S CWC BS-VI मॉडल की बस बताई गई है. रिकॉर्ड में बस का रंग काला दर्ज है. हादसे के बाद सामने आए परिवहन रिकॉर्ड में परमिट की शर्तों के उल्लंघन, वाहन में नियमों के विपरीत मॉडिफिकेशन और अन्य यातायात नियमों से जुड़े मामले भी दर्ज बताए गए हैं.
राजस्थान का फिटनेस, हरियाणा का PUC
हादसे के बाद बस के दस्तावेजों को लेकर सामने आई जानकारी के अनुसार, बस का मूल रजिस्ट्रेशन बिहार का है, जबकि उसके फिटनेस प्रमाणपत्र का रिकॉर्ड राजस्थान और पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल यानी PUC का रिकॉर्ड हरियाणा से जुड़ा बताया जा रहा है. अगर ये रिकॉर्ड परिवहन विभाग की जांच में भी सही पाए जाते हैं तो यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि बस की फिटनेस जांच राजस्थान में कब, किस प्राधिकरण या अधिकृत केंद्र पर हुई और हरियाणा में PUC किस तारीख को किस सेंटर से जारी हुआ था.
सवाल सिर्फ यह नहीं कि फिटनेस कहां का था, जांच कैसी हुई?
जानकारों के अनुसार, किसी व्यावसायिक वाहन का फिटनेस प्रमाणपत्र सड़क पर उसके संचालन की तकनीकी योग्यता से जुड़ा होता है. ऐसे में हादसे के बाद जांच का अहम बिंदु यह होगा कि जिस तारीख को बस का फिटनेस किया गया, उस समय AC सिस्टम, इंजन, वायरिंग, फायर सेफ्टी उपकरण, इमरजेंसी एग्जिट और वाहन की बॉडी की स्थिति कैसी थी. अगर फिटनेस के दौरान कोई तकनीकी खामी नहीं मिली थी तो हादसे से पहले बस की वास्तविक स्थिति क्या थी, इसका जवाब मेंटेनेंस और फिटनेस रिकॉर्ड से मिलेगा.
PUC हरियाणा का था तो जांच का रिकॉर्ड भी अहम
मीडिया रिपोर्टों में हरियाणा से जुड़े PUC रिकॉर्ड का उल्लेख सामने आया है. ऐसे में जांच का अगला सवाल यह होगा कि PUC कब हुआ, किस सेंटर पर हुआ और परीक्षण के दौरान वाहन से जुड़े कौन-कौन से मानक दर्ज किए गए. PUC मुख्य रूप से वाहन के प्रदूषण उत्सर्जन से संबंधित प्रमाणपत्र है, इसलिए इसे बस की यांत्रिक सुरक्षा या फिटनेस का विकल्प नहीं माना जा सकता है.
19 चालान का रिकॉर्ड भी सामने आया
हादसे के बाद बस के पुराने ट्रैफिक रिकॉर्ड ने भी सवाल खड़े किए हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक बस पर कुल 19 लंबित चालान और करीब 1.75 लाख रुपये की देनदारी बताई गई है, इनमें परमिट संबंधी उल्लंघन, रेट्रोफिटिंग और फ्यूल से जुड़े नियमों के उल्लंघन समेत कई मामले शामिल बताए गए हैं. दूसरी रिपोर्ट में बिना परमिट, ओवरस्पीडिंग और बिना ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़े चालानों का भी उल्लेख है. अलग-अलग रिपोर्टों में लंबित चालानों की रकम में अंतर है, इसलिए अंतिम आंकड़ा परिवहन विभाग के प्रमाणित वाहन रिकॉर्ड से मिलान के बाद ही तय किया जाना चाहिए.
कम उम्र के चालक से बस चलाने का भी चालान
परिवहन रिकॉर्ड पर आधारित रिपोर्ट में जनवरी 2026 में कम उम्र के चालक से बस चलवाने से जुड़ा चालान होने की बात सामने आई है. जून 2025 में फ्यूल चेंज और रेट्रोफिटिंग से जुड़े नियमों के उल्लंघन का भी चालान बताया गया है. इसके अलावा परमिट संबंधी उल्लंघनों का रिकॉर्ड भी सामने आया है. यह पूरा रिकॉर्ड अब जांच एजेंसियों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि हादसे के बाद यह पता लगाना जरूरी है कि बस के खिलाफ पहले दर्ज कार्रवाई केवल चालान तक सीमित रही या वाहन की तकनीकी और संचालन संबंधी स्थिति की भी जांच की गई थी.
हादसे से पहले यात्रियों ने दी थी खतरे की चेतावनी
हादसे की FIR में इससे भी गंभीर बात सामने आई है. शिकायत के अनुसार, बस में बैठे यात्रियों को ड्राइवर केबिन की तरफ से जलने की बदबू महसूस हुई. यात्रियों ने चालक और परिचालक को बस रोककर जांच करने के लिए कहा था. FIR में आरोप है कि उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया और कुछ देर बाद चालक की सीट के पास से आग की लपटें निकलने लगीं. FIR में चालक और परिचालक के व्यवहार को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं.
AC से शुरू हुई आग ने कुछ ही देर में लिया विकराल रूप
मुख्य अग्निशमन अधिकारी प्रदीप कुमार के अनुसार प्रारंभिक जांच में बस के AC में स्पार्क, शॉर्ट सर्किट या ब्लास्ट की आशंका सामने आई है, इसके बाद इंजन में मौजूद लुब्रिकेंट ऑयल ने आग पकड़ ली और आग तेजी से पूरी बस में फैल गई. यह अभी प्रारंभिक जांच का निष्कर्ष है. अंतिम कारण फॉरेंसिक और तकनीकी जांच के बाद स्पष्ट होगा. आग इतनी तेजी से फैली कि कई यात्रियों को बस से निकलने का पर्याप्त समय नहीं मिला. कुछ यात्रियों ने खिड़कियां तोड़कर बाहर निकलकर अपनी जान बचाई. दमकल और पुलिस टीमों ने मौके पर पहुंचकर 20 से अधिक यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला.
अब जांच के घेरे में सिर्फ ड्राइवर नहीं, पूरा रिकॉर्ड
हादसे के बाद चालक और परिचालक को हिरासत में लिया गया है तथा मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है. FIR में बस के चालक और परिचालक के खिलाफ हिंदुस्तानीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज होने की जानकारी सामने आई है. लेकिन हादसे की पूरी तस्वीर समझने के लिए जांच को कई स्तरों पर आगे बढ़ाना होगा. बस का फिटनेस प्रमाणपत्र, PUC, परमिट, पुराने चालान, रेट्रोफिटिंग का रिकॉर्ड, AC और इंजन की तकनीकी स्थिति तथा हादसे से ठीक पहले चालक को यात्रियों की ओर से दी गई चेतावनी.
9 मौतों के बाद सबसे बड़ा सवाल-कागजों से आगे बस की असली जांच हुई थी?
BR32PA8647 का बिहार में रजिस्ट्रेशन, अलग-अलग नियम उल्लंघनों के चालान और मीडिया रिपोर्टों में सामने आए राजस्थान के फिटनेस तथा हरियाणा के PUC रिकॉर्ड ने इस हादसे को सिर्फ एक बस में लगी आग का मामला नहीं रहने दिया है. अब जांच का अहम सवाल यह है कि कागजों में बस सड़क पर चलने योग्य थी या वास्तव में भी उसकी तकनीकी सुरक्षा उतनी ही सुनिश्चित थी. राजस्थान के फिटनेस और हरियाणा के PUC रिकॉर्ड की मूल प्रविष्टियां सामने आने के बाद यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि प्रमाणपत्र कब जारी हुए, किस केंद्र ने जारी किए और उनकी वैधता हादसे की तारीख तक थी या नहीं. यही रिकॉर्ड इस हादसे की कागजी व्यवस्था और वास्तविक सड़क सुरक्षा के बीच की पूरी तस्वीर सामने ला सकते हैं.
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