हिंदुस्तान के लोगों के नाम लिखे खुले पत्र के जरिए 42 पूर्व न्यायाधीशों ने निर्वाचन आयोग, न्यायपालिका और अन्य संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिशों पर गंभीर चिंता जताई है. पूर्व न्यायाधीशों ने बिना ठोस सबूत के लगाए जा रहे ‘‘वोट चोरी’’ के आरोपों पर भी सवाल उठाए हैं.
‘वोट चोरी’ के आरोपों पर उठाए सवाल
खुले पत्र में पूर्व न्यायाधीशों ने कहा कि बिना पर्याप्त साक्ष्य के संवैधानिक संस्थाओं पर गंभीर आरोप लगाना उचित नहीं है. उन्होंने चेतावनी दी कि निर्वाचन आयोग और अन्य संवैधानिक प्राधिकारियों को बार-बार ‘‘चोर’’ या ‘‘समझौता कर चुके’’ बताने से लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का भरोसा कमजोर हो सकता है.
इन पूर्व जजों ने लिखा खुला पत्र
| क्र.सं. | पदवी | नाम | पद/विवरण |
| 1 | जस्टिस | हेमंत गुप्ता | पूर्व न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय |
| 2 | जस्टिस | पंकज मित्तल | पूर्व न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय |
| 3 | जस्टिस | बी.सी. पटेल | पूर्व मुख्य न्यायाधीश, जम्मू और कश्मीर तथा दिल्ली उच्च न्यायालय |
| 4 | जस्टिस | सुभ्रो कमल मुखर्जी | पूर्व मुख्य न्यायाधीश, कर्नाटक उच्च न्यायालय |
| 5 | जस्टिस | परमोद कोहली | पूर्व मुख्य न्यायाधीश, सिक्किम उच्च न्यायालय |
| 6 | जस्टिस | एस.एम. सोनी | पूर्व न्यायाधीश, गुजरात उच्च न्यायालय एवं लोकायुक्त, गुजरात राज्य |
| 7 | जस्टिस | एस.एन. ढींगरा | पूर्व न्यायाधीश, दिल्ली उच्च न्यायालय |
| 8 | जस्टिस | कृष्णा एस. दीक्षित | पूर्व न्यायाधीश, कर्नाटक एवं उड़ीसा उच्च न्यायालय |
| 9 | जस्टिस | श्रीधर राव | पूर्व न्यायाधीश, कर्नाटक उच्च न्यायालय |
| 10 | जस्टिस | आर.एस. राठौड़ | पूर्व न्यायाधीश, राजस्थान उच्च न्यायालय |
| 11 | जस्टिस | प्रशांत कुमार अग्रवाल | पूर्व न्यायाधीश, राजस्थान उच्च न्यायालय |
| 12 | जस्टिस | के.के. त्रिवेदी | पूर्व न्यायाधीश, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय |
| 13 | जस्टिस | डी.के. पालीवाल | पूर्व न्यायाधीश, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय |
| 14 | जस्टिस | राकेश सक्सेना | पूर्व न्यायाधीश, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय |
| 15 | जस्टिस | राजेंद्र कुमार | पूर्व न्यायाधीश, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय |
| 16 | जस्टिस | सुभाष संवत्सर | पूर्व न्यायाधीश, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय |
| 17 | जस्टिस | वेद प्रकाश शर्मा | पूर्व न्यायाधीश, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय |
| 18 | जस्टिस | आलोक वर्मा | पूर्व न्यायाधीश, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय |
| 19 | जस्टिस | आई.एस. श्रीवास्तव | पूर्व न्यायाधीश, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय |
| 20 | जस्टिस | सुभाष साकरीकर | पूर्व न्यायाधीश, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय |
| 21 | जस्टिस | एस.पी. खरे | पूर्व न्यायाधीश, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय |
| 22 | जस्टिस | पी.एन. सिंह | पूर्व न्यायाधीश, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय |
| 23 | जस्टिस | देवेंद्र कुमार अरोड़ा | पूर्व न्यायाधीश, इलाहाबाद उच्च न्यायालय |
| 24 | जस्टिस | सुरेंद्र विक्रम सिंह राठौड़ | पूर्व न्यायाधीश, इलाहाबाद उच्च न्यायालय |
| 25 | जस्टिस | एस.एन. श्रीवास्तव | पूर्व न्यायाधीश, इलाहाबाद उच्च न्यायालय एवं लोकायुक्त, छत्तीसगढ़ राज्य |
| 26 | जस्टिस | रमेश कुमार मेराठिया | पूर्व न्यायाधीश, झारखंड उच्च न्यायालय |
| 27 | जस्टिस | करम चंद पुरी | पूर्व न्यायाधीश, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय |
| 28 | जस्टिस | (श्रीमती) राज राहुल गर्ग | पूर्व न्यायाधीश, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय |
| 29 | जस्टिस | सी.वी. नागार्जुन रेड्डी | पूर्व न्यायाधीश, आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय |
| 30 | जस्टिस | विनोद गोयल | पूर्व न्यायाधीश, दिल्ली उच्च न्यायालय |
| 31 | जस्टिस | जी.पी. मित्तल | पूर्व न्यायाधीश, दिल्ली उच्च न्यायालय |
| 32 | जस्टिस | वी.बी. गुप्ता | पूर्व न्यायाधीश, दिल्ली उच्च न्यायालय |
| 33 | जस्टिस | दीपा शर्मा | पूर्व न्यायाधीश, दिल्ली उच्च न्यायालय |
| 34 | जस्टिस | पी.एन. रवींद्रन | पूर्व न्यायाधीश, केरल उच्च न्यायालय |
| 35 | जस्टिस | ज्योतिंद्रनाथ | पूर्व न्यायाधीश, केरल उच्च न्यायालय |
| 36 | जस्टिस | लोकपाल सिंह | पूर्व न्यायाधीश, उत्तराखंड उच्च न्यायालय |
| 37 | जस्टिस | सुभाष चंद्र | पूर्व न्यायाधीश, उत्तराखंड उच्च न्यायालय |
| 38 | जस्टिस | विवेक हिंदुस्तानी शर्मा | पूर्व न्यायाधीश, उत्तराखंड उच्च न्यायालय |
| 39 | जस्टिस | नरिंदर कुमार | संस्थाएं (Institutions) |
| 40 | जस्टिस | राजेंद्र कुमार | पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं निर्णायक अधिकारी, गुरुग्राम रेरा प्राधिकरण (RERA) |
| 41 | जस्टिस | सुभाष बत्रा | पूर्व सदस्य (विधि/कानूनी), पीएनजीआरबी (PNGRB) |
| 42 | जस्टिस | जे.ए.पी. श्रीवास्तव | पूर्व न्यायाधीश, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय |
‘संस्थाओं की आलोचना लोकतांत्रिक अधिकार’
पूर्व न्यायाधीशों ने कहा कि लोकतंत्र में संवैधानिक संस्थाओं की आलोचना करना हर नागरिक का अधिकार है. हालांकि, संस्थाओं को बदनाम करना अलग बात है. पत्र में कहा गया, ‘‘संस्थाओं की आलोचना लोकतांत्रिक अधिकार है. बदनाम करना नहीं.’’
संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर जोर
पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले 42 पूर्व न्यायाधीशों ने निर्वाचन आयोग, न्यायपालिका और अन्य संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और विश्वसनीयता बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संस्थाओं के प्रति जनता का विश्वास महत्वपूर्ण है और ऐसे आरोपों से बचना चाहिए, जो बिना प्रमाण के उनकी विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाते हों.
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