कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने इस विधेयक को चर्चा और विचार के लिए राज्यसभा में पेश किया. इस दौरान कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सदस्य राम मंदिर चढ़ावा चोरी और दिल्ली में छात्रों पर पुलिस कार्रवाई जैसे मुद्दों पर नारेबाजी कर रहे थे. उपसभापति हरिवंश के आग्रह के बावजूद हंगामा जारी रहा, जिसके बीच चर्चा शुरू कराई गई.
विपक्ष ने सदन से किया वॉकआउट
विपक्ष के कई दलों ने शुरुआत में सदन से वॉकआउट (बहिर्गमन) किया, हालांकि बाद में तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक, आप, राजद, माकपा और झामुमो के सदस्य चर्चा में शामिल होने के लिए वापस लौट आए.
न्यायिक सुधार और मामलों के तेजी से निपटारे पर जोर
चर्चा का जवाब देते हुए कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि यह विधेयक न्यायिक क्षेत्र में सुधार की एक महत्वपूर्ण कड़ी है. जजों की संख्या बढ़ने से सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आएगी. उन्होंने बताया कि 1950 में सुप्रीम कोर्ट की स्थापना के समय जजों की कुल संख्या (CJI समेत) मात्र आठ थी, जो इस संशोधन के बाद अब 38 हो जाएगी.
मई में आया था अध्यादेश, 2019 में हुई थी आखिरी वृद्धि
कानून मंत्री ने बताया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसी साल मई में जजों की संख्या बढ़ाने वाले विधेयक के मसौदे को मंजूरी दी थी, जिसके बाद प्रशासन अध्यादेश लेकर आई थी. इस अध्यादेश के आधार पर ही सुप्रीम कोर्ट में पांच नए न्यायाधीशों की नियुक्ति भी की जा चुकी है. इसके बाद 20 जुलाई को मानसून सत्र के पहले दिन इसे संसद में पेश किया गया था. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या 2019 में बढ़ाई गई थी, जब CJI को छोड़कर जजों की स्वीकृत संख्या 30 से बढ़ाकर 33 (कुल 34) की गई थी.
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