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April 15, 2026

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IMF रिपोर्ट: ग्लोबल सुस्ती के बीच चमक रहा भारत; FY27 के लिए विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 6.5% किया

IMF रिपोर्ट: दुनियाभर में आर्थिक सुस्ती की आशंकाओं के बीच IMF (International Monetary Fund) ने हिंदुस्तान की इकोनॉमी पर अपना भरोसा जताया है. संस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए हिंदुस्तान की जीडीपी ग्रोथ (GDP Growth) के अनुमान को 6.4% से बढ़ाकर 6.5% कर दिया है. जहां एक ओर ग्लोबल विकास दर के अनुमान को घटाकर 3.1% कर दिया गया है, वहीं हिंदुस्तान की यह मजबूती इसे दुनिया की सबसे तेज बढ़ती प्रमुख वित्तीय स्थिति बनाए रखेगी. ग्रोथ बढ़ने के दो मुख्य कारण IMF ने हिंदुस्तान की विकास दर में इस बढ़ोतरी के पीछे दो प्रमुख ‘पॉजिटिव ट्रिगर्स’ बताए हैं. 2025 का शानदार प्रदर्शन: हिंदुस्तानीय वित्तीय स्थिति ने पिछले साल उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया, जिससे आने वाले साल के लिए एक मजबूत आधार (Base) तैयार हुआ है. अमेरिकी टैरिफ में भारी कटौती: अमेरिका द्वारा हिंदुस्तानीय सामानों पर एडिशनल टैरिफ को 50% से घटाकर 10% करना एक गेम-चेंजर साबित हुआ है. इससे हिंदुस्तानीय कपड़े, ज्वेलरी और आईटी सेवाओं का निर्यात अमेरिका में सस्ता होगा, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार और एक्सपोर्ट सेक्टर को मजबूती मिलेगी. महंगाई का ‘अलर्ट’: 4.7% तक पहुंच सकती है दर ग्रोथ की अच्छी समाचार के साथ IMF ने महंगाई को लेकर सतर्क रहने की भी सलाह दी है. रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में 2.1% रहने वाली महंगाई, अगले वित्त वर्ष (2026-27) में उछलकर 4.7% पर पहुंच सकती है. हालांकि, राहत की बात यह है कि 2027-28 तक इसके वापस RBI के तय लक्ष्य (4%) के करीब आने की उम्मीद है. चीन में भी महंगाई निचले स्तरों से बढ़ना शुरू होगी, लेकिन हिंदुस्तान में यह उतार-चढ़ाव फूड प्राइसेज और ग्लोबल सप्लाई चेन पर निर्भर करेगा. यूरोप संकट में, हिंदुस्तान-अमेरिका सुरक्षित IMF ने ग्लोबल आर्थिक स्थिति को लेकर चिंता जताई है. यूरोप के देशों और ब्रिटेन की वित्तीय स्थिति में गिरावट का अनुमान है, जहां ब्रिटेन की ग्रोथ रेट में 0.5% की बड़ी कटौती की गई है. इसके विपरीत, हिंदुस्तान, अमेरिका और चीन इस ग्लोबल सुस्ती से काफी हद तक सुरक्षित दिखाई दे रहे हैं. Also Read: LPG, CNG, PNG के नए रेट जारी, जानें आपके शहर में आज क्या है कीमत The post IMF रिपोर्ट: ग्लोबल सुस्ती के बीच चमक रहा हिंदुस्तान; FY27 के लिए विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 6.5% किया appeared first on Naya Vichar.

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कांटों का ताज या सुनहरा मौका? जानें CM सम्राट चौधरी के सामने क्या-क्या हैं चुनौतियां

Samrat Choudhary: बिहार की नेतृत्व में एक नए युग का सूत्रपात हो चुका है. सम्राट चौधरी अब सूबे के मुख्यमंत्री की कमान संभाल चुके हैं, लेकिन सत्ता के इस शीर्ष तक पहुंचने का रास्ता जितना रोमांचक था, आगे का सफर उतना ही पथरीला नजर आता है. नीतीश कुमार ने भले ही उन्हें अपना उत्तराधिकारी मानकर एनडीए की कमान सौंप दी हो, लेकिन 20 साल तक सुशासन बाबू की छवि के साथ राज करने वाले नीतीश की जगह लेना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है. भ्रष्टाचार का दीमक बिहार में भ्रष्टाचार एक ऐसी समस्या रही है जो प्रशासनें बदलने के बावजूद जड़ें जमाए बैठी है. हाल के दिनों में बड़े अधिकारियों पर हुई छापेमारी इसका प्रमाण है. सम्राट चौधरी के लिए चुनौती यह है कि वे भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति को केवल कागजों तक सीमित न रखें.   सम्राट चौधरी ट्रांसपेरेंसी और CSR फंड के सही इस्तेमाल पर जोर देते हैं.  उन्हें एक ऐसा नया मैकेनिज्म तैयार करना होगा जिससे प्रशासनी दफ्तरों में आम आदमी का काम बिना सुविधा शुल्क के हो सके.   कानून-व्यवस्था नीतीश ने 2005 में सुशासन के नाम पर अपराध कम किया था, लेकिन आखिरी 5-6 साल में क्राइम ग्राफ फिर बढ़ गया. चिराग पासवान ने भी कहा था कि कानून-व्यवस्था पूरी तरह ढह गई है. हत्या, लूट, स्त्री अपराध की घटनाएं बढ़ीं. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार में 2025 में 2,556 हत्याएं हुईं, जो 2024 की तुलना में 8.3% कम थीं. जबकि स्त्री अपराध 2025 में 2,025 बलात्कार के मामले दर्ज किए गए. अब तक सम्राट चौधरी होम मिनिस्टर थे, पुलिस और आंतरिक सुरक्षा संभाल रहे थे. BJP शासन में जीरो टॉलरेंस नीति लाने की संभावना ज्यादा है. अगर सुधरा तो स्त्रीओं और आम आदमी को राहत मिलेगी और निवेश आएगा. नहीं सुधरा तो NDA की ‘विकास’ वाली छवि खराब होगी और विपक्ष (RJD) हमला करेगा. शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की खराब गुणवत्ता बिहार में स्कूल-कॉलेज और अस्पताल भवन तो बने, लेकिन टीचर-डॉक्टर की कमी और यूनिवर्सिटीज खस्ताहाल रहीं. पटना मेडिकल कॉलेज जैसी पुरानी संस्थाएं टॉप पर नहीं रहीं. लड़कियों की साइकिल योजना सफल रही, लेकिन उच्च शिक्षा और अच्छे डॉक्टर नहीं मिले. NDA में केंद्र से फंड और नीति सपोर्ट मिलेगा. वे बड़े प्रोजेक्ट्स की मॉनिटरिंग करते रहे हैं. गुणवत्ता सुधरी तो बिहार का ह्यूमन कैपिटल मजबूत होगा और युवा बाहर नहीं जाएंगे. नहीं सुधरा तो अगले चुनाव में झूठे वादे का आरोप लगेगा. विवादों का साया सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनते ही उनके अतीत के विवाद एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं. लालू-राबड़ी प्रशासन के दौरान कम उम्र में मंत्री बनने का मामला हो या उनकी शैक्षणिक डिग्रियों पर उठते सवाल, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने उनके खिलाफ घेराबंदी तेज कर दी है.   तेजस्वी यादव के पास यह एक ऐसा अस्त्र है जिसे वे सदन से लेकर सड़क तक इस्तेमाल करेंगे. सम्राट के लिए सबसे बड़ी चुनौती इन व्यक्तिगत हमलों का ठोस जवाब अपने काम के जरिए देना होगा, ताकि जनता का ध्यान विवादों से हटकर विकास पर केंद्रित हो सके. नीतीश की बड़ी लकीर और सुशासन का बोझ नीतीश कुमार ने दो दशकों में बिहार में सुशासन की एक ऐसी लंबी लकीर खींची है, जिसे पार करना तो दूर, उसके बराबर पहुंचना भी बड़ी बात है.  नीतीश के कार्यकाल में भ्रष्टाचार के व्यक्तिगत आरोपों का न होना उनकी सबसे बड़ी ताकत रही. सम्राट चौधरी को न केवल अपराध नियंत्रण में अपनी धाक जमानी होगी, बल्कि पुलिस और प्रशासन की छवि को भी बेदाग रखना होगा.  अगर उनके राज में क्राइम ग्राफ जरा भी ऊपर जाता है, तो सीधे तौर पर उनकी नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठेंगे. यदि सम्राट चौधरी इन चुनौतियों को पार कर लेते हैं, तो उनका नाम बिहार के नेतृत्वक इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो सकता है. लेकिन अगर वे इसमें चूकते हैं, तो बीजेपी के लिए पहली बार मिली यह सत्ता का अवसर हाथ से फिसलने का खतरा भी बना रहेगा Also Read: सम्राट चौधरी बने बिहार के 24वें मुख्यमंत्री, विजय-बीजेंद्र को भी राज्यपाल ने दिलाई डिप्टी सीएम की शपथ The post कांटों का ताज या सुनहरा मौका? जानें CM सम्राट चौधरी के सामने क्या-क्या हैं चुनौतियां appeared first on Naya Vichar.

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सुशील मोदी ने सम्राट को दिलाई थी BJP में एंट्री, 9 साल में ऐसे तय किया मुख्यमंत्री पद तक का सफर

Samrat Choudhary: बिहार के वरिष्ठ समाजवादी नेता शकुनी चौधरी के बेटे सम्राट चौधरी ने अपनी नेतृत्व की शुरुआत राष्ट्रीय जनता दल से की थी. वे राबड़ी देवी की प्रशासन में सबसे कम उम्र के मंत्री बने थे, जो उनके शुरुआती नेतृत्वक कौशल का प्रमाण था. इसके बाद उन्होंने जनता दल यूनाइटेड और फिर हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा में भी अपनी भूमिका निभाई. सुशील मोदी ने दिलाई भाजपा में एंट्री साल 2017 में सम्राट चौधरी ने हिंदुस्तानीय जनता पार्टी का दामन थामा. उन्हें भाजपा में लाने का श्रेय पार्टी के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी को जाता है. उस समय प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय थे और सम्राट चौधरी को प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई. यहीं से उनका भाजपा में तेज उभार शुरू हुआ. संगठन और प्रशासन में लगातार बढ़ती जिम्मेदारी साल 2020 में एनडीए प्रशासन बनने के बाद सम्राट चौधरी को पंचायती राज मंत्री बनाया गया. इसके बाद जब गठबंधन टूटा, तो उन्हें विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी मिली. इस भूमिका में उन्होंने प्रशासन को कई मुद्दों पर घेरा और अपनी मजबूत छवि बनाई. मार्च 2023 में उन्हें बिहार भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया. इस पद पर रहते हुए उन्होंने संगठन को मजबूत किया और विपक्ष पर आक्रामक रणनीति अपनाई. सुशील मोदी के बाद नेतृत्व का खालीपन भरा भाजपा में सुशील कुमार मोदी के बाद जो नेतृत्व का अभाव दिख रहा था, उसे सम्राट चौधरी ने काफी हद तक भर दिया. उनके नेतृत्व में पार्टी ने नई ऊर्जा के साथ काम किया. यही वजह रही कि जनवरी 2024 में एनडीए प्रशासन बनने पर उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया गया. वित्त मंत्री के रूप में बड़ी घोषणाएं उपमुख्यमंत्री के साथ-साथ सम्राट चौधरी को वित्त और वाणिज्य कर विभाग की जिम्मेदारी मिली. उन्होंने अपने बजट भाषण में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं, जिससे उनकी प्रशासनिक पकड़ साफ नजर आई. लोकसभा चुनाव के दौरान भी वे भाजपा के प्रमुख चेहरा बने रहे. गृह मंत्री बनकर बढ़ा कद नवंबर 2025 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन किया और सबसे बड़े दल के रूप में उभरी. इसके बाद सम्राट चौधरी को दोबारा उपमुख्यमंत्री बनाया गया और साथ ही गृह विभाग की जिम्मेदारी भी दी गई. यह पहली बार था जब गृह विभाग मुख्यमंत्री के पास न होकर किसी और के पास गया. गृह मंत्री के रूप में उन्होंने कानून-व्यवस्था को लेकर कड़े संदेश दिए. अपराधियों को लेकर उनके सख्त बयान भी चर्चा में रहे. बेबाक और आक्रामक अंदाज के लिए जाने जाते हैं सम्राट सम्राट चौधरी अपने बेबाक और आक्रामक अंदाज के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने एक समय नीतीश कुमार को सत्ता से हटाने के लिए प्रतीकात्मक तौर पर मुरेठा बांध लिया था. बाद में एनडीए प्रशासन बनने के बाद अयोध्या में मुंडन कर उन्होंने इसे उतार दिया, जो उनके नेतृत्वक संदेश का हिस्सा बना. अब मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे लगातार मेहनत, संगठन में पकड़ और नेतृत्व क्षमता के दम पर सम्राट चौधरी आज बिहार के मुख्यमंत्री बन गए हैं. भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और हर भूमिका को मजबूती से निभाया. Also Read: सम्राट चौधरी बने बिहार के 24वें मुख्यमंत्री, विजय-बीजेंद्र को भी राज्यपाल ने दिलाई डिप्टी सीएम की शपथ The post सुशील मोदी ने सम्राट को दिलाई थी BJP में एंट्री, 9 साल में ऐसे तय किया मुख्यमंत्री पद तक का सफर appeared first on Naya Vichar.

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बीजेपी की हाइब्रिड पॉलिटिक्स, नीतीश फैक्टर और जातीय समीकरण को साधा; जदयू कोटे से दो डिप्टी सीएम बनाए गए

samrat Choudhary : बिहार की नेतृत्व में यह सत्ता परिवर्तन एक सोची-समझी रणनीति का परिणाम है. इस सत्ता परिवर्तन के जरिए बिहार की नेतृत्व में बीजेपी अपनी पैठ और बढ़ाना तो चाहती है,लेकिन वह नीतीश कुमार के अनुभवों और उनकी रणनीति का भी पूरा फायदा उठाना चाहती है. बीजेपी ने जिस तरह सम्राट चौधरी को सीएम और विजेंद्र यादव और विजय कुमार चौधरी को डिप्टी सीएम बनाया है, उसके पीछे की रणनीति को इस तरह डिकोड किया जा सकता है. बिहार की नेतृत्व में जातीय समीकरण को साधा अति पिछड़ा वर्ग कुशवाहा जाति के सम्राट चौधरी को सीएम बनाकर बीजेपी ने बड़ा सामाजिक संदेश दिया है कि वह पिछड़ों की हितैषी है.बिहार में अति पिछड़ा वर्ग की आबादी बहुत ज्यादा है और नीतीश कुमार ने हमेशा उन्हें साथ रखा. बीजेपी ने नीतीश कुमार की इस रणनीति से सीख ली और अति पिछड़ों को अपने गुडविल में रखने की कोशिश की है. विजय कुमार चौधरी को डिप्टी सीएम बनाकर अगड़ी जातियों को भी खुश करने की कोशिश की गई है, विजय कुमार चौधरी भूमिहार जाति के हैं. विजेंद्र यादव पिछड़ा वर्ग से आते हैं यानी बिहार की सामाजिक संरचना का पूरा ध्यान रखा गया है. नीतीश के करीबियों को डिप्टी सीएम बनाकर बीजेपी ने दिया सुशासन जारी रखने का संदेश विजय कुमार चौधरी और विजेंद्र यादव दोनों बहुत अनुभवी और नीतीश के राइटहैंड माने जाने वाले नेता हैं. इन दोनों को साथ रखकर बीजेपी ने यह साबित करने की कोशिश की है कि वे नीतीश की विदाई के बाद भी प्रदेश में सुशासन कायम रखना चाहते हैं. बीजेपी एक तरह से यह मैसेज देना चाहती है कि शासन का चेहरा बदला है, पूरा ढांचा नहीं. ट्रांजिशन मॉडल की नेतृत्व कर रही है बीजेपी बिहार में सत्ता परिवर्तन जिस तरह से किया गया है, उसे नेतृत्व का ट्रांजिशन मॉडल कहा जाता सकता है. बीजेपी ने नेतृत्व संभाल लिया है, लेकिन बिहार के नेता जिस नीतीश कुमार पर इतना भरोसा करते थे, उन्हें दरकिनार नहीं किया गया है. उनके नेटवर्क और अनुभवों को साथ रखकर बीजेपी धीरे-धीरे परिवर्तन करना चाहती है. जनता के भरोसे को तोड़ने या उन्हें किसी तरह का झटका देने के मूड में पार्टी नहीं है. बीजेपी भविष्य की नेतृत्व कर रही है, लेकिन वह वर्तमान में कोई ऐसी गलती नहीं करना चाहती है, जो उसके लिए नुकसानदेह हो. बिहार में जूनियर पार्टनर अब सीनियर बन चुका है, लेकिन वह सीनियर के अनुभवों को दरकिनार करके जनता के 21 साल के भरोसे को खोना नहीं चाहती है. विभिन्न विषयों पर एक्सप्लेनर और विशेष आलेख पढ़ने के लिए क्लिक करें विपक्ष को गंभीर संदेश देने के मूड में है बीजेपी बीजेपी ने बिहार में जो सत्ता परिवर्तन किया है, उसके जरिए वह अपने सबसे कट्टर विरोधी राजद को मजबूत संदेश देना चाहती है. बीजेपी राजद को यह बताना चाहती है कि वह प्रदेश में अब इस स्थिति में है कि वह सामाजिक समीकरणों को साध सकती है. अब बिहार में जो डबल इंजन की प्रशासन है, उसमें केंद्र और राज्य का नेतृत्व बीजेपी के पास है, लेकिन नीतीश कुमार और जदयू की भागीदारी भी उसमें बहुत अहम है. यह एक मिश्रित नेतृत्व (Hybrid Politics) है, जिसमें परिणाम बेहतर आने की पूरी उम्मीद है. बीजेपी बिहार में अपनी शक्ति और बढ़ाना चाहती है, जिसमें वह नीतीश फैक्टर का बखूबी इस्तेमाल कर रही है. ये भी पढ़ें : बिहार के सीएम पद पर पहली बार बीजेपी का राज, बदलेगी बिहार की नेतृत्व? The post बीजेपी की हाइब्रिड पॉलिटिक्स, नीतीश फैक्टर और जातीय समीकरण को साधा; जदयू कोटे से दो डिप्टी सीएम बनाए गए appeared first on Naya Vichar.

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गढ़वा: विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी के पैतृक घर में चोरी, घर का ताला तोड़कर घुसे चोर

गढ़वा से अविनाश की रिपोर्ट Garhwa News: झारखंड के गढ़वा जिले से चोरी की घटना सामने आई है. गढ़वा के विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी के बेलहारा गांव स्थित पैतृक आवास को अज्ञात चोरों ने निशाना बनाया है. मंगलवार की रात चोरों ने घर का ताला तोड़कर अंदर घुसे और जमकर उत्पात मचाया. सुबह जब स्थानीय लोगों को घटना की भनक लगी, तो पूरे इलाके में सनसनी फैल गई.  खाली घर का उठाया फायदा मिली जानकारी के अनुसार, घटना के वक्त घर में कोई भी सदस्य मौजूद नहीं था. घर खाली होने का फायदा उठाते हुए अज्ञात चोरों ने ताला तोड़ा और भीतर घुस गए. चोरों ने घर के कमरों में रखे सामान को पूरी तरह तितर-बितर कर दिया है. फिलहाल नुकसान के सटीक आकलन की प्रक्रिया जारी है घटनास्थल पर पहुंची पुलिस घटना की सूचना मिलते ही गढ़वा सदर थाना पुलिस दलबल के साथ मौके पर पहुंची. पुलिस टीम ने घटनास्थल का मुआयना किया और साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.  क्या कहते हैं एसपी  एसपी अमन कुमार ने घटना की पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि विधायक के पैतृक आवास में चोरी की सूचना मिलते ही एसडीपीओ के नेतृत्व में एक विशेष टीम को मौके पर भेजा गया है. प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, घर में कोई सदस्य नहीं रहता था, जिसका फायदा चोरों ने उठाया. घर का ताला टूटा पाया गया है और सामान बिखरा हुआ है. पुलिस हर पहलू की जांच कर रही है और जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा. बताया गया कि पुलिस अब आसपास के इलाकों में संदिग्धों की धरपकड़ के लिए छापेमारी कर रही है.  सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश देखा जा रहा है. क्षेत्र के लोगों ने इस घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस गश्ती पर भी सवाल उठाए हैं. यह भी पढ़ें: गुमला में ‘ब्लैक मंडे’: 2 घंटे के भीतर तीन सड़क हादसों में चार की मौत, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल यह भी पढ़ें: झारखंड 11वीं बोर्ड में 99.12% छात्र सफल, छात्राओं ने फिर मारी बाजी, गुमला और गिरिडीह जिला रहा टॉपर The post गढ़वा: विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी के पैतृक घर में चोरी, घर का ताला तोड़कर घुसे चोर appeared first on Naya Vichar.

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बुढ़ापे की लाठी बनेगी ये सरकारी स्कीम, इनवेस्टमेंट पर मिलेगा 20% तक का  रिटर्न

NPS Benefits: नौकरी से रिटायर होने के बाद भी आपकी लाइफस्टाइल और खर्चों में कोई कमी न आए, इसके लिए नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) एक भरोसेमंद साथी बनकर उभरी है. हाल ही में पेंशन फंड रेगुलेटर (PFRDA) ने इसके नियमों में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, जिससे अब यह योजना और भी अधिक लचीली और फायदेमंद हो गई है. क्या है NPS और कौन इसमें इन्वेस्ट कर सकता है? NPS एक प्रशासनी इनवेस्टमेंट स्कीम है जिसे अब 18 से 85 साल तक का कोई भी हिंदुस्तानीय नागरिक लाभ उठा सकता है. इसमें आप अपनी मर्जी से पैसा जमा करते हैं, जो मार्केट के अनुसार बढ़ता है. रिटायरमेंट पर आपको एक बड़ी रकम (Lump Sum) एक साथ मिलती है और बाकी हिस्सा ‘एन्युटी’ के रूप में हर महीने पेंशन के तौर पर मिलता है. इसमें दो तरह के अकाउंट होते हैं: Tier-I (रिटायरमेंट के लिए अनिवार्य) और Tier-II (एक सेविंग अकाउंट की तरह, जिससे कभी भी पैसा निकाल सकते हैं). निकासी (Withdrawal) के नए नियम क्या हैं? नए नियमों के अनुसार, अगर आप रिटायरमेंट या 60 साल की उम्र पर पैसा निकालते हैं और आपका कुल फंड 8 लाख रुपये तक है, तो आप पूरा पैसा एक साथ निकाल सकते हैं. 8 लाख से ज्यादा होने पर प्रशासनी कर्मचारियों को 60% और गैर-प्रशासनी लोगों को 80% तक एक साथ निकालने की छूट है, बाकी बची रकम की पेंशन बन जाएगी. वहीं, अगर कोई बीच में स्कीम छोड़ना चाहता है और फंड 5 लाख से कम है, तो भी पूरा पैसा निकाला जा सकता है.  क्या बच्चों के लिए भी है कोई खास स्कीम? जी हां, प्रशासन ने ‘NPS वात्सल्य’ की शुरुआत की है. इसमें माता-पिता अपने नाबालिग बच्चों के नाम पर अकाउंट खोल सकते हैं. जब बच्चा 18 साल का हो जाएगा, तो यह अकाउंट सामान्य NPS में बदल जाएगा. बजट 2025 के अनुसार, NPS वात्सल्य में भी वही टैक्स छूट मिलेगी जो सामान्य NPS में मिलती है. यह बच्चों के भविष्य के लिए एक मजबूत फंड बनाने का बेहतरीन तरीका है.  टैक्स की बचत और बेहतर रिटर्न कैसे मिलेगा? NPS में इन्वेस्ट करने पर आपको इनकम टैक्स की धारा 80C के अलावा 80CCD(1B) के तहत 50,000 रुपये की अतिरिक्त छूट मिलती है. यानी कुल 2 लाख रुपये तक का इनवेस्टमेंट टैक्स फ्री हो सकता है. खास बात यह है कि NPS ने पिछले कुछ वर्षों में औसतन 11% से 20% तक का सालाना रिटर्न दिया है, जो कई अन्य बचत योजनाओं से काफी बेहतर है.  ये भी पढ़ें: NPS या म्यूचुअल फंड, रिटायरमेंट के लिए कौन सा ऑप्शन है बेहतर? The post बुढ़ापे की लाठी बनेगी ये प्रशासनी स्कीम, इनवेस्टमेंट पर मिलेगा 20% तक का  रिटर्न appeared first on Naya Vichar.

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कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से झटका, तेलंगाना हाई कोर्ट के फैसले पर लगाई गई रोक

सुप्रीम कोर्ट ने एक सप्ताह की अग्रिम जमानत देने के तेलंगाना हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली असम प्रशासन की याचिका पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को नोटिस जारी किया है. खेड़ा द्वारा हाई कोर्ट में जमानत के लिए याचिका दायर करने पर असम प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि यह प्रक्रिया का पूर्ण दुरुपयोग है. यह मामला एक FIR से जुड़ा है, जिसमें आरोप है कि उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी पर कई पासपोर्ट रखने का बयान दिया था. The Supreme Court stays the one-week transit-bail granted to Congress leader Pawan Khera in connection with an FIR registered against him for allegedly making allegations against the wife of Assam CM Himanta Biswa Sarma that she holds multiple passports. A bench of Justices… pic.twitter.com/dKNe8yEbrZ — ANI (@ANI) April 15, 2026 न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और अतुल एस. चंदुरकर की बेंच ने असम प्रशासन की याचिका पर नोटिस जारी किया और खेड़ा से तीन हफ्ते में जवाब मांगा है. असम प्रशासन ने तेलंगाना हाईकोर्ट द्वारा दी गई ट्रांजिट बेल को चुनौती दी थी. हालांकि कोर्ट ने यह भी साफ किया कि अगर खेड़ा असम में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करते हैं, तो यह आदेश उनके रास्ते में बाधा नहीं बनेगा. कोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई तीन हफ्ते बाद होगी. पवन खेड़ा ने क्या आरोप लगाया था सरमा की पत्नी पर कांग्रेस नेता खेड़ा ने 5 अप्रैल को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके आरोप लगाया था कि असम के मुख्यमंत्री की पत्नी रिंकी भुइयां शर्मा के पास कई पासपोर्ट और विदेशी संपत्ति है, जिसे राज्य में नौ अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए मुख्यमंत्री के चुनावी हलफनामे में घोषित नहीं किया गया है. शर्मा दंपति ने इन आरोपों को खारिज किया था और इसे झूठा एवं मनगढंत बताया था. यह भी पढ़ें : कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के घर पुलिस की दस्तक, असम सीएम की पत्नी पर लगाए थे गंभीर आरोप इन आरोपों को लेकर कांग्रेस नेता के खिलाफ गुवाहाटी अपराध शाखा थाने में मामला दर्ज किया गया था. इसके बाद असम पुलिस पूरी तरह से एक्शन में नजर आई. पुलिस मामले की जांच के लिए दिल्ली भी गई थी. The post कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से झटका, तेलंगाना हाई कोर्ट के फैसले पर लगाई गई रोक appeared first on Naya Vichar.

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MP Board 10th Toppers List 2026: एमपी बोर्ड 10वीं में पन्ना जिले की प्रतिभा को रैंक 1, देखें टॉपर्स लिस्ट

MP Board 10th Toppers List 2026: मध्य प्रदेश बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (MPBSE) ने MP Board 10th Result 2026 जारी कर दिया है. रिजल्ट के साथ बोर्ड ने हाईस्कूल टॉपर्स लिस्ट भी घोषित की है. इस वर्ष पन्ना जिले की रहने वाली प्रतिभा सिंह सोलंकी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है. प्रतिभा को 500 में से 499 मार्क्स मिले हैं. इस साल एमपी बोर्ड 10वीं में लड़कियों का रिजल्ट अच्छा रहा है. प्रशासनी स्कूलों का रिजल्ट प्राइवेट से 8 फीसदी अच्छा रहा है. 10वीं में शासकीय स्कूलों का रिजल्ट 76.80 फीसदी और प्राइवेट स्कूलों का रिजल्ट 68.64 फीसदी रहा है. MP Board 10th Toppers: प्रतिभा सिंह सोलंकी को 500 में से 499 मार्क्स प्रतिभा सिंह सोलंकी ने 500 में से 499 अंक प्राप्त कर एमपी बोर्ड 10वीं परीक्षा में टॉप किया है. वह पन्ना स्थित सरस्वति विद्या मंदिर की छात्रा हैं. उनके इस बेहतरीन प्रदर्शन से परिवार, स्कूल और जिले में खुशी का माहौल है. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादन ने रिजल्ट की घोषणा की. उन्होंने बताया कि इस साल फिर से लड़कियों का प्रदर्शन शानदार रहा है. सीएम मोहन यादव ने टॉप करने वाली प्रतिभा सिंह को बधाई दी है. MP Board 10th Result 2026 Check Here MP Board 10th Toppers List रैंक प्राप्तांक नाम स्कूल / जिला 1 499/500 प्रतिमा सिंह सोलंकी सरस्वती ज्ञान मंदिर हाईस्कूल गुनौर, पन्ना 2 498/500 अक्षरा घोड़ेस्वर शा. उ.मा.वि., छटेरा, बालाघाट 2 498/500 अमय गुप्ता शा. उ.मा. उत्कृष्ट विद्यालय क्र.-1, सीधी 3 497/500 योगेन्द्र सिंह परमार शा. बालक उ.मा.वि., ब्यौहारी, शहडोल 3 497/500 अनन्या वर्मा सरस्वती उ.मा.वि., सीधी 3 497/500 शिवम बोपचे शा. उ.मा.वि., परसवाड़ा घाट, बालाघाट 3 497/500 अर्जुन सिंह राजपूत सरस्वती ज्ञान मंदिर हाईस्कूल गुनौर, पन्ना 3 497/500 अवनीश कुमार नाई सरस्वती शिशु मंदिर हाईस्कूल नंदविहार, सिंगरौली 3 497/500 हिमांशी धाकड़ ब्रिलिएंट कान्वेंट उ.मा.वि., बरखेड़ी मेन रोड, भोपाल 3 497/500 निकिता फरकासे शा. सांदीपनि बालक उ.मा.वि., सौंसर, छिन्दवाड़ा 4 496/500 श्रेया जैन सहित 12 विद्यार्थी जबलपुर, विदिशा, ग्वालियर, छतरपुर आदि 5 495/500 श्रेया पांडे, आयुष द्विवेदी, नितिन जाट सहित 16 विद्यार्थी रीवा, सीधी, गुना आदि प्राइवेट स्कूलो से आगे निकले प्रशासनी स्कूल एमपी बोर्ड 10वीं के रिजल्ट में इस बार प्रशासनी स्कूलों ने निजी स्कूलों से बेहतर प्रदर्शन किया है. शासकीय स्कूलों का पास प्रतिशत 76.80% रहा, जबकि अशासकीय यानी प्राइवेट स्कूलों का रिजल्ट 68.64% दर्ज किया गया. यानी प्रशासनी स्कूलों का प्रदर्शन करीब 8 फीसदी ज्यादा बेहतर रहा. MP Board पिछले साल के टॉपर्स की लिस्ट रैंक नाम शहर प्राप्तांक 1 प्रज्ञा जायसवाल सिंगरौली 500 2 आयुष द्विवेदी रीवा 459 3 शेज़ाह फातिमा जबलपुर 458 यह भी पढ़ें: एमपी बोर्ड 12वीं तीनों स्ट्रीम का रिजल्ट सीधे फोन पर पाएं, यहां करें रजिस्ट्रेशन  The post MP Board 10th Toppers List 2026: एमपी बोर्ड 10वीं में पन्ना जिले की प्रतिभा को रैंक 1, देखें टॉपर्स लिस्ट appeared first on Naya Vichar.

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कोसी के विश्वकर्मा बने Deputy CM, 1990 से रहा अजेय सफर, अब सत्ता के शिखर पर बिजेंद्र प्रसाद यादव

Bihar Deputy CM Oath: बिहार की सियासत में चेहरे बदलते हैं, गठबंधन बदलते हैं, लेकिन एक नाम जो पिछले साढ़े तीन दशकों से अडिग खड़ा है, वह है बिजेंद्र प्रसाद यादव. सूबे में नई प्रशासन के गठन के साथ ही जेडीयू के इस कद्दावर नेता को उपमुख्यमंत्री की कमान सौंपी गई है. सुपौल की धरती से लगातार आठ बार विधानसभा पहुंचने वाले बिजेंद्र यादव का डिप्टी सीएम बनना केवल एक पद की प्राप्ति नहीं, बल्कि उनके उस अजेय सफर का सम्मान है जिसने कोसी अंचल की नेतृत्व की दिशा तय की है. जेपी आंदोलन की उपज बिजेंद्र प्रसाद यादव की नेतृत्वक जड़ें 1974 के जेपी आंदोलन में समाहित हैं. छात्र नेतृत्व से मुख्यधारा में आए बिजेंद्र यादव ने 1990 में पहली बार चुनावी मैदान में कदम रखा और तब से पीछे मुड़कर नहीं देखा. उन्होंने लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की प्रशासनों में ऊर्जा राज्य मंत्री के रूप में अपनी प्रशासनिक क्षमता का लोहा मनवाया. 2005 में जब नीतीश कुमार ने बिहार की सत्ता संभाली, तब बिजेंद्र यादव जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष थे. उनके संगठनात्मक कौशल और नीतीश कुमार के प्रति अटूट वफादारी ने उन्हें मुख्यमंत्री का सबसे करीबी सलाहकार बना दिया. चुनावी रिकॉर्ड ऐसा कि दिग्गज भी रह गए हैरान बिजेंद्र यादव को नेतृत्व का वह खिलाड़ी माना जाता है जो हर पिच पर छक्का मारना जानता है. 1990 से लेकर 2025 तक, उन्होंने न केवल कांग्रेस और राजद के दिग्गजों को धूल चटाई, बल्कि बीजेपी के साथ गठबंधन न होने पर उनके प्रत्याशियों को भी भारी मतों से पराजित किया. कोसी की जनता का उन पर भरोसा आज भी कायम है. यही कारण है कि उन्हें प्यार से कोसी का विश्वकर्मा कहा जाता है, जिन्होंने इलाके में बिजली और बुनियादी ढांचे का जाल बिछाने में अहम भूमिका निभाई. ऊर्जा पुरुष से उप-मुख्यमंत्री की नई भूमिका बिजेंद्र प्रसाद यादव को बिहार का ऊर्जा पुरुष कहा जाता है. नीतीश प्रशासन में बिजली के क्षेत्र में जो क्रांतिकारी बदलाव आए, उसके पीछे उनकी दूरदर्शिता रही है. अब बतौर डिप्टी सीएम, उनके कंधों पर न केवल ऊर्जा विभाग बल्कि राज्य के विकास का बड़ा रोडमैप तैयार करने की जिम्मेदारी होगी. अनुभव की इस पाठशाला से निकले बिजेंद्र यादव का नया अवतार बिहार एनडीए प्रशासन के लिए एक मजबूत स्तंभ साबित होगा. उनके शपथ ग्रहण के साथ ही कोसी क्षेत्र में जश्न का माहौल है और लोगों को उम्मीद है कि विश्वकर्मा अब पूरे बिहार के विकास को नई ऊंचाई देंगे. Also Read: बिहार में नई प्रशासन का फॉर्मूला तैयार, सम्राट चौधरी के साथ दो उपमुख्यमंत्री लेंगे शपथ The post कोसी के विश्वकर्मा बने Deputy CM, 1990 से रहा अजेय सफर, अब सत्ता के शिखर पर बिजेंद्र प्रसाद यादव appeared first on Naya Vichar.

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विजय चौधरी बने डिप्टी CM, बदलते सियासी समीकरणों में निभाएंगे बड़ी भूमिका

Bihar Deputy CM Oath: बिहार की नेतृत्व में आज एक नया सूरज उग रहा है. एक तरफ हिंदुस्तानीय जनता पार्टी के सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर इतिहास रच रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद सिपहसालार विजय कुमार चौधरी ने डिप्टी सीएम के रूप में अपनी नई पारी की शुरुआत की है. पटना के सियासी गलियारों में यह चर्चा आम है कि नीतीश कुमार ने भले ही सत्ता की कमान बीजेपी को सौंपी हो, लेकिन प्रशासन की स्थिरता और प्रशासनिक संतुलन बनाए रखने के लिए उन्होंने अपने सबसे अनुभवी योद्धा को मैदान में उतारा है. नीतीश के संकटमोचक को मिली बड़ी जिम्मेदारी विजय कुमार चौधरी का डिप्टी सीएम बनना केवल एक पद की प्राप्ति नहीं, बल्कि उनके दशकों के नेतृत्वक धैर्य का ईनाम माना जा रहा है. शपथ ग्रहण समारोह से पहले मीडिया से मुखातिब होते हुए चौधरी भावुक नजर आए. उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि उनकी पूरी नेतृत्व नीतीश कुमार के इर्द-गिर्द रही है और आज उन्हें जो भी जिम्मेदारी मिली है, वह उनके नेता के अटूट विश्वास का नतीजा है. बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष और कई महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री रह चुके विजय चौधरी को प्रशासन का मैजिशियन कहा जाता है, जो जटिल से जटिल फाइलों और विवादों को सुलझाने में माहिर हैं. अनुभव की ढाल और विकास की नई रफ्तार नई प्रशासन में विजय कुमार चौधरी की भूमिका एक सेतु की तरह होगी, जो बीजेपी के आक्रामक नेतृत्व और जेडीयू के जमीनी विकास कार्यों के बीच तालमेल बिठाएंगे. नेतृत्वक विश्लेषकों का मानना है कि सम्राट चौधरी के पास ऊर्जा है, तो विजय चौधरी के पास अनुभव का खजाना. उनके डिप्टी सीएम बनने से यह साफ संदेश गया है कि एनडीए प्रशासन में शिक्षा, वित्त और बुनियादी ढांचे जैसे अहम क्षेत्रों में कोई समझौता नहीं किया जाएगा. चौधरी ने साफ किया कि प्रशासन भले ही नए स्वरूप में है, लेकिन प्राथमिकताएं वही पुरानी न्याय के साथ विकास ही रहेंगी. सत्ता के शीर्ष पर वफादारी की जीत इस शपथ ग्रहण के साथ ही बिहार में डबल इंजन की प्रशासन का एक नया वर्जन देखने को मिल रहा है. विजय कुमार चौधरी ने उन कयासों पर भी विराम लगा दिया जिसमें कहा जा रहा था कि जेडीयू अब बैकफुट पर है. उन्होंने स्पष्ट किया कि नीतीश कुमार का मार्गदर्शन ही इस प्रशासन की असली शक्ति है. अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विजय चौधरी अपने विशाल अनुभव के दम पर बिहार के विकास को कितनी नई ऊंचाइयों पर ले जाते हैं और विपक्ष के तीखे हमलों के बीच प्रशासन के लिए कितने मजबूत सुरक्षा कवच साबित होते हैं. बिहार की सियासत में यह बदलाव केवल पदों का फेरबदल नहीं, बल्कि भरोसे, अनुभव और रणनीति का संगम है जहां विजय कुमार चौधरी एक अहम कड़ी के रूप में उभर रहे हैं. Also Read: बिहार में नई प्रशासन का फॉर्मूला तैयार, सम्राट चौधरी के साथ दो उपमुख्यमंत्री लेंगे शपथ The post विजय चौधरी बने डिप्टी CM, बदलते सियासी समीकरणों में निभाएंगे बड़ी भूमिका appeared first on Naya Vichar.

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