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April 15, 2026

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जनगणना के नाम पर साइबर ठगी से बचें, एक गलती और आपका खजाना खाली

देशभर में जनगणना की प्रक्रिया शुरू होते ही साइबर अपराधियों की सक्रियता भी बढ़ गई है. आम लोगों की जानकारी जुटाने के इस प्रशासनी अभियान को अब ठग अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं. कई ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जहां जनगणना के नाम पर लोगों को फर्जी कॉल, लिंक और वेबसाइट के जरिए निशाना बनाया जा रहा है. ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही आपको बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है. नकली वेबसाइट और फर्जी पोर्टल का जाल साइबर ठग सबसे पहले प्रशासनी वेबसाइट जैसे दिखने वाले नकली पोर्टल तैयार करते हैं. इन वेबसाइट्स का डिजाइन इतना असली लगता है कि आम यूजर आसानी से धोखा खा जाता है. जैसे ही आप इसमें अपनी निजी जानकारी भरते हैं, आपकी डिटेल्स सीधे ठगों के पास पहुंच जाती हैं, जिससे बैंकिंग फ्रॉड का खतरा बढ़ जाता है. OTP और कॉल के जरिये ठगी कई लोगों को कॉल करके बताया जा रहा है कि जनगणना के लिए वेरिफिकेशन जरूरी है और इसके लिए OTP शेयर करना होगा. ध्यान रखें, जनगणना प्रक्रिया में कभी भी OTP की जरूरत नहीं होती. अगर कोई ऐसा दावा करता है, तो समझ जाएं कि यह ठगी का तरीका है. बैंक डिटेल और QR कोड स्कैम जनगणना सिर्फ परिवार और जनसंख्या से जुड़ी जानकारी के लिए होती है, इसका बैंकिंग डिटेल से कोई संबंध नहीं है. अगर कोई व्यक्ति आपसे अकाउंट नंबर, कार्ड डिटेल या QR कोड स्कैन करने को कहे, तो तुरंत मना कर दें. ऐसे मामलों में आपकी पूरी जमा पूंजी खतरे में पड़ सकती है. खतरनाक लिंक से रहें दूर फोन पर SMS या WhatsApp के जरिये जनगणना फॉर्म भरने के नाम पर लिंक भेजे जा सकते हैं. इन लिंक पर क्लिक करते ही आपका फोन हैक हो सकता है या आपकी जानकारी चोरी हो सकती है. हमेशा ऐसे लिंक से दूरी बनाकर रखें और किसी भी अनजान URL पर भरोसा न करें. खुद को कैसे रखें सुरक्षित? प्रशासन की ओर से साफ किया गया है कि जनगणना के दौरान कोई भी अधिकारी आपसे OTP, पैसे या बैंक डिटेल नहीं मांगता. साथ ही, किसी भी वेबसाइट की विश्वसनीयता जांचने के लिए उसका डोमेन “.gov.in” होना जरूरी है. थोड़ी सतर्कता और सही जानकारी आपको इस तरह के साइबर जाल से बचा सकती है. यह भी पढें: WhatsApp – Telegram पर फैल रहे फर्जी mParivahan ऐप और RAT मैलवेयर, सेकेंडों में हो जाएगी आपकी पहचान और कमाई की चोरी The post जनगणना के नाम पर साइबर ठगी से बचें, एक गलती और आपका खजाना खाली appeared first on Naya Vichar.

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Samrat Choudhary : 46 साल का लंबा इंतजार खत्म, CM बनते ही सम्राट ने रचा इतिहास, BJP हुई ‘धन्य’

Samrat Choudhary First BJP Cm: बिहार की नेतृत्व में 15 अप्रैल 2026 की तारीख इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई. और इसी के साथ BJP के लिए भी यह तारीख स्‍वर्णिम अक्षरों से लिख दिया गया. अब आप ये सोच रहे होंगे ऐसा क्‍या हो गया! जिसे लिए इतने कसीदे गढ़े जा रहे हैं. दरअसल, सम्राट चौधरी ने बीजेपी को धन्‍य कर दिया है. आजादी के बाद बिहार में पहली बार भाजपा अपना मुख्‍यमंत्री बनाने में सफल हुई है. इसी के साथ मगध पर बीजेपी का भगवा लहरा गया है. BJP ने बनाया रिकॉर्ड सम्राट चौधरी ने जैसे ही मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, वैसे ही एक ऐसा रिकॉर्ड बन गया, जिसका इंतजार हिंदुस्तानीय जनता पार्टी आजादी के बाद से कर रही थी. बीजेपी को बिहार में अपना मुख्‍यमंत्री बनाने के लिए दशकों का इंतजार करना पड़ा है. और यह पहली बार हो रहा है जब हिंदुस्तानीय जनता पार्टी का कोई नेता बिहार के मुख्यमंत्री के पद पर पहुंचा है. 46 साल का इंतजार क्यों? अगर बीजेपी के इतिहास को देखें, तो इसकी स्थापना 1980 में हुई थी। यानी करीब 46 साल बाद हिंदुस्तानीय जनता पार्टी को बिहार में CM की कुर्सी मिली है. ये अगल बात है कि अब तक पार्टी सत्ता में साझेदार रही, लेकिन मुख्यमंत्री की कुर्सी तक कभी नहीं पहुंच सकी थी. ऐसे में सम्राट चौधरी का शपथ लेना सिर्फ एक नेतृत्वक घटना नहीं, बल्कि एक ‘स्ट्रैटेजिक ब्रेकथ्रू’ माना जा रहा है’ PRABHAT KHABAR SPECIAL: CM बनने के बाद पहली बार BJP ऑफिस में सम्राट चौधरी ने कहा, “आज बड़ा दिन है. बिहार के विकास के लिए काम करना है. BJP और NDA कार्यकर्ताओं के बल पर बनी है. उनसे मिलने आया हूं, उनका सम्मान आगे भी जारी रहेगा.#BiharPolitics #SamratChoudhary #BJP #prabhatkhabar… pic.twitter.com/9fsIGxkN2Q — Naya Vichar (@prabhatkhabar) April 15, 2026 ये होगी Samrat के सामने नेतृत्वक चुनौती सम्राट चौधरी के इस शपथ ग्रहण को बिहार की नेतृत्वक दिशा बदलने वाला क्षण माना जा रहा है. अब बीजेपी सामने सबसे बड़ी चुनौती बिहार की नेतृत्वक दिशा बीजेपी और आरएसएस के पक्ष में बदलने की होगी. यानी अब जो नेतृत्व नीतीश और जेडीयू के चारों ओर घूमती थी, अब उसे बीजेपी और सम्राट की ओर घुमाने का प्रयास करना होगा. साथ ही उन्‍हें नीतीश कुमार से बड़ी लकीर भी खींचनी होगी.  कई दौर से गुजरी बिहार की नेतृत्व आजादी के बाद से लेकर अब तक बिहार की नेतृत्व कई दौरों से गुजरी. 1946 से अब तक कुल 23 नेता मुख्यमंत्री बने. सम्राट चौधरी 24वें मुख्यमंत्री हैं. आजादी के बाद शुरुआती दौर में पूरे देश में कांग्रेस का दबदबा था. बिहार के पहले मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह बने. जिन्होंने 1946 से 1961 तक लंबा कार्यकाल संभाला. इस दौर में लगभग पूरी नेतृत्व हिंदुस्तानीय राष्ट्रीय कांग्रेस के इर्द-गिर्द ही घूमती रही. 1967 के बाद अस्थिरता  साल 1967 के बाद बिहार में नेतृत्वक अस्थिरता और प्रयोग का दौर शुरू हो गया था. बिहार में कई छोटे कार्यकाल वाले मुख्यमंत्री भी बने. गठबंधन और दल-बदल की नेतृत्व भी हुई. बिहार उस दौर से भी गुजरा जब कुछ मुख्यमंत्री तो कुछ दिन या महीनों के लिए ही पद पर रहे. बिहार की नेतृत्व में इस फेस को ‘ट्रांजिशन’ कहा गया.  1990 से 2005 तक मंडल और MY समीकरण का दौर यह दौर लालू प्रसाद और उनकी पत्‍नी राबड़ी देवी का था. बिहार की नेतृत्व के लिए यह दौर बेहद खास था. इस दौरान आरजेडी का दबदबा रहा. लगभग 15 साल तक इस पार्टी ने बिहार की नेतृत्व को अगले 20 साल के लिए तैयार किया.  2005–2026: ‘सुशासन बाबू’ का युग लालू के बाद बिहार में आया वो युग जिसे बिहार की नेतृत्व में सबसे स्‍वर्णिम काल कहा जा सकता है. इसे सुशासन बाबू का युग भी कहा जाता है. यह दौर नीतीश का था. इसे बिहार निर्माण का वो दौर कहा जा सकता है, जिसे नीतीश ने संघारों, सेनाओं और अव्‍यवस्थित बिहार को 20 सालों तक गढ़ा. जिससे ‘विकासशील बिहार’ तैयार हो सका. पटना: मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद सम्राट चौधरी पहुंचे BJP ऑफिस. एक- एक कार्यकर्त्ता से मिले. #BiharPolitics #SamratChoudhary #BJP #prabhatkhabar @samrat4bjp @BJP4India pic.twitter.com/XJLu3QRrHy — Naya Vichar (@prabhatkhabar) April 15, 2026 बिहार के सभी मुख्यमंत्री और उनका कार्यकाल 1. श्रीकृष्ण सिंह — 29 अप्रैल 1952 से 31 जनवरी 19612. बिनोदानंद झा — 18 फरवरी 1961 से 02 अक्टूबर 19633. कृष्ण बल्लभ सहाय — 02 अक्टूबर 1963 से 05 मार्च 19674. महामाया प्रसाद सिन्हा — 05 मार्च 1967 से 28 जनवरी 19685. बिंदेश्वरी प्रसाद मंडल — 01 फरवरी 1968 से 22 मार्च 19686. भोला पासवान शास्त्री — 22 मार्च 1968 से 29 जून 19687. सरदार हरिहर सिंह — 26 फरवरी 1969 से 22 जून 19698. भोला पासवान शास्त्री — 22 जून 1969 से 04 जुलाई 19699. दरोगा प्रसाद राय — 16 फरवरी 1970 से 22 दिसंबर 197010. कर्पूरी ठाकुर — 22 दिसंबर 1970 से 02 जून 197111. भोला पासवान शास्त्री — 02 जून 1971 से 09 जनवरी 197212. केदार पांडेय — 19 मार्च 1972 से 02 जुलाई 197313. अब्दुल गफूर — 02 जुलाई 1973 से 11 अप्रैल 197514. जगन्नाथ मिश्रा — 11 अप्रैल 1975 से 30 अप्रैल 197715. कर्पूरी ठाकुर — 24 जून 1977 से 21 अप्रैल 197916. राम सुंदर दास — 21 अप्रैल 1979 से 17 फरवरी 198017. जगन्नाथ मिश्रा — 08 जून 1980 से 14 अगस्त 198318. चंद्रशेखर सिंह — 14 अगस्त 1983 से 12 मार्च 198519. बिंदेश्वरी दुबे — 12 मार्च 1985 से 13 फरवरी 198820. भागवत झा आजाद — 14 फरवरी 1988 से 10 मार्च 198921. सत्येंद्र नारायण सिंह — 11 मार्च 1989 से 06 दिसंबर 198922. जगन्नाथ मिश्रा — 06 दिसंबर 1989 से 10 मार्च 199023. लालू प्रसाद यादव — 10 मार्च 1990 से 03 अप्रैल 199524. लालू प्रसाद यादव — 04 अप्रैल 1995 से 25 जुलाई 199725. राबड़ी देवी — 25 जुलाई 1997 से 11 फरवरी 199926. राबड़ी देवी — 09 मार्च 1999 से 02 मार्च 200027. नीतीश कुमार — 03 मार्च 2000 से 10 मार्च 200028. राबड़ी देवी — 11 मार्च 2000 से 06 मार्च 200529. नीतीश कुमार — 24 नवंबर 2005 से 25 नवंबर 201030. नीतीश कुमार — 26 नवंबर 2010 से 19 मई 201431. जीतन राम मांझी — 20 मई

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सारंडा के जंगलों में मिसिर बेसरा के दस्ते और सुरक्षा बलों में मुठभेड़, रुक-रुक हो रही गोलीबारी

सारंडा से संदीप गुप्ता की रिपोर्ट Naxal Encounter: झारखंड के सारंडा जंगल में बुधवार को एक बार फिर सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच भीषण मुठभेड़ शुरू हो गई. यह मुठभेड़ कुख्यात इनामी माओवादी नेता मिसिर बेसरा के दस्ते के साथ हो रही है. जानकारी के अनुसार, सुरक्षा बल इलाके में लंबे समय से चल रहे सर्च ऑपरेशन के तहत जंगल में तलाशी अभियान चला रहे थे. इसी दौरान नक्सली अचानक सामने आ गए और उन्होंने सुरक्षाबलों पर फायरिंग शुरू कर दी. अचानक हुई इस गोलीबारी के बाद सुरक्षाबलों ने भी मोर्चा संभालते हुए जवाबी कार्रवाई की. कोबरा बटालियन और झारखंड जगुआर की संयुक्त कार्रवाई मौके पर सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन, झारखंड जगुआर और जिला पुलिस बल के जवान मौजूद हैं. ये सभी यूनिट्स नक्सल विरोधी ऑपरेशन में विशेष रूप से प्रशिक्षित हैं. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, सुरक्षाबलों को खुफिया सूचना मिली थी कि कुख्यात नक्सली कमांडर मिसिर बेसरा अपने दस्ते के साथ सारंडा के जंगलों में सक्रिय है. इसी सूचना के आधार पर सर्च ऑपरेशन तेज किया गया था. कैंप शिफ्ट कर रहे नक्सलियों से टकराव बताया जा रहा है कि मुठभेड़ उस समय शुरू हुई जब नक्सली जंगल के अंदर अपने ठिकाने को बदल रहे थे. इसी दौरान सुरक्षाबलों की टीम वहां पहुंच गई और दोनों का आमना-सामना हो गया. पुलिस को देखते ही नक्सलियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी. इसके बाद जवानों ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए उन्हें घेरने की कोशिश की. कई नक्सलियों के मारे जाने की आशंका, पुष्टि नहीं सूत्रों के अनुसार, इस मुठभेड़ में कई नक्सलियों के मारे जाने की संभावना जताई जा रही है. हालांकि, अभी तक किसी भी नक्सली का शव बरामद नहीं हुआ है और न ही सर्च ऑपरेशन में जुटे सुरक्षा बलों के अधिकारियों की ओर से इसकी पुष्टि ही की गई है. जंगल का घना इलाका और लगातार फायरिंग के कारण सुरक्षाबलों को सटीक स्थिति का आकलन करने में समय लग रहा है. इलाके में हाई अलर्ट, ऑपरेशन जारी फिलहाल पूरे इलाके को घेर लिया गया है और अतिरिक्त बलों को भी तैनात कर दिया गया है. सुरक्षाबल लगातार सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं, ताकि नक्सलियों को पूरी तरह से खत्म किया जा सके. अधिकारियों का कहना है कि ऑपरेशन तब तक जारी रहेगा जब तक इलाके को पूरी तरह सुरक्षित घोषित नहीं कर दिया जाता. बीच-बीच में फायरिंग कर रहे नक्सली: एसपी जिले के एसपी अमित रेणू ने बताया कि कोबरा जवानों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ जारी है. नक्सलियों की ओर से बीच-बीच में फायरिंग हो रही है, जिसका सुरक्षा बल सतर्कता के साथ जवाब दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि स्थिति नियंत्रण में है और ऑपरेशन खत्म होने के बाद ही विस्तृत जानकारी सामने आ पाएगी. फिलहाल पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है और सुरक्षा बलों द्वारा सघन सर्च अभियान जारी है. इसे भी पढ़ें: सारंडा के बीहड़ में खुल गई विकास की पोल, कोल्हान रक्षा संघ की बैठक में लगी समस्याओं की झड़ी नक्सल गतिविधियों का गढ़ है सारंडा सारंडा का घना जंगल लंबे समय से नक्सलियों के लिए सुरक्षित ठिकाना माना जाता रहा है. हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षाबलों की लगातार कार्रवाई से नक्सल गतिविधियों में कमी आई है, लेकिन बीच-बीच में इस तरह की मुठभेड़ की घटनाएं सामने आती रहती हैं. इसे भी पढ़ें: गढ़वा का ‘मॉडल’ बना रंका सीएचसी, जिला अस्पताल जैसी सुविधाओं से लैस The post सारंडा के जंगलों में मिसिर बेसरा के दस्ते और सुरक्षा बलों में मुठभेड़, रुक-रुक हो रही गोलीबारी appeared first on Naya Vichar.

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प्रेग्नेंसी स्ट्रेच मार्क्स से परेशान? अपनाएं ये घरेलू उपाय, जल्द दिखेगा असर

How To Remove Pregnancy Stretch Marks Naturally: गर्भावस्था के दौरान स्त्रीओं के शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं, जिनमें स्ट्रेच मार्क्स एक आम समस्या है. पेट, जांघों, कमर और स्तनों के आसपास त्वचा खिंचने के कारण ये हल्के या गहरे निशान दिखाई देने लगते हैं. ये भले ही दर्दनाक न हों, लेकिन कई स्त्रीओं के लिए यह आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकते हैं. हार्मोनल बदलाव और त्वचा की लोच कम होने के कारण ये ज्यादा उभरते हैं. हालांकि, घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि सही देखभाल और कुछ आसान घरेलू उपायों की मदद से इन्हें काफी हद तक कम किया जा सकता है और त्वचा को स्वस्थ रखा जा सकता है. स्ट्रेच मार्क्स हटाने का 5 आसान घरेलू उपाय 1. एलोवेरा जेल एलोवेरा जेल त्वचा को गहराई से नमी प्रदान करता है और उसे रिपेयर करने में मदद करता है. यह स्ट्रेच मार्क्स को हल्का करने के साथ-साथ त्वचा को ठंडक भी देता है. रोजाना प्रभावित हिस्से पर हल्के हाथों से मसाज करें, इससे धीरे-धीरे फर्क दिखने लगता है. 2. नारियल तेल  हल्का गुनगुना नारियल तेल त्वचा की गहराई तक जाकर उसे पोषण देता है. नियमित मसाज करने से त्वचा की इलास्टिसिटी बढ़ती है और स्ट्रेच मार्क्स कम दिखाई देने लगते हैं. इसे दिन में कम से कम एक बार जरूर लगाएं. 3. बादाम का तेल बादाम तेल विटामिन E से भरपूर होता है, जो त्वचा को रिपेयर करने में मदद करता है. यह त्वचा की कोशिकाओं को पोषण देकर स्ट्रेच मार्क्स को धीरे-धीरे हल्का करता है. रोजाना रात में सोने से पहले इसका उपयोग करें. 4. शहद  शहद एक प्राकृतिक मॉइश्चराइजर की तरह काम करता है. इसे प्रभावित जगह पर हल्के हाथों से लगाकर 10–15 मिनट तक छोड़ दें, फिर गुनगुने पानी से धो लें. यह त्वचा को मुलायम और चमकदार बनाता है. 5. नींबू का रस नींबू में प्राकृतिक ब्लीचिंग गुण होते हैं जो दाग-धब्बों को हल्का करने में मदद करते हैं. इसे हल्के हाथों से स्ट्रेच मार्क्स पर लगाकर कुछ देर बाद साफ कर लें. नियमित उपयोग से त्वचा टोन बेहतर होता है. यह भी पढ़ें: प्रेगनेंसी के पहले तीन महीनों में करें ये 4 आसान एक्सरसाइज, रहें फिट और सुरक्षित  यह भी पढ़ें: पीरियड से पहले क्यों बदल जाता है मूड? डॉ. प्रियंका त्रिवेदी ने बताई वजह  The post प्रेग्नेंसी स्ट्रेच मार्क्स से परेशान? अपनाएं ये घरेलू उपाय, जल्द दिखेगा असर appeared first on Naya Vichar.

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डिप्टी सीएम विजय चौधरी बोले- नीतीश कुमार जैसा कोई दूसरा नहीं हो सकता, उन्हीं की नीतियों पर चलेगी सरकार

Bihar Politics: पटना के लोकभवन में आयोजित भव्य समारोह में राज्यपाल ने सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई. उनके साथ दो उपमुख्यमंत्रियों को भी शपथ दिलाई गई. इस मौके पर कई बड़े नेता और अधिकारी मौजूद रहे. जनता दल (यूनाइटेड) के वरिष्ठ नेता बिजेंद्र प्रसाद यादव और विजय चौधरी को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है. दोनों नेताओं का लंबे समय से बिहार की नेतृत्व में बड़ा अनुभव रहा है. विजय चौधरी ने जताया नीतीश कुमार पर भरोसा शपथ लेने के बाद विजय चौधरी ने कहा कि यह जिम्मेदारी उन्हें नीतीश कुमार के भरोसे की वजह से मिली है. उन्होंने साफ कहा कि नीतीश कुमार जैसा कोई दूसरा नेता नहीं हो सकता. उन्होंने कहा कि बिहार के विकास के लिए जो रास्ता, नीतियां और कार्यक्रम नीतीश कुमार ने बनाए हैं, उसी पर आगे काम किया जाएगा. उनके मुताबिक, प्रशासन में किसी तरह का भ्रम नहीं है और सभी दल मिलकर आगे बढ़ेंगे. ‘नीतीश मॉडल’ पर ही चलेगी प्रशासन विजय चौधरी ने कहा कि बिहार का विकास मॉडल वही रहेगा, जिसमें नीतीश कुमार की सोच और भाजपा दोनों शामिल हैं. उन्होंने कहा कि उन्होंने नीतीश कुमार से बहुत कुछ सीखा है और उसी अनुभव के आधार पर प्रशासन काम करेगी. बिजेंद्र यादव का बयान भी चर्चा में डिप्टी सीएम बने बिजेंद्र प्रसाद यादव ने भी कई मुद्दों पर प्रतिक्रिया दी. जेडीयू नेता निशांत कुमार के शपथ समारोह में शामिल नहीं होने पर उन्होंने कहा कि यह उनका निजी फैसला है कि वे नेतृत्व में आएंगे या नहीं. वहीं, राजद नेता तेजस्वी यादव के बयान पर उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि पहले यह देखना चाहिए कि वे खुद किस पृष्ठभूमि से आए हैं. सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही बिहार में एक नए नेतृत्वक अध्याय की शुरुआत हो गई है. पहली बार भाजपा के नेतृत्व में राज्य की कमान संभाली गई है, जिससे लोगों की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं. Also Read: सुशील मोदी ने सम्राट को दिलाई थी BJP में एंट्री, 9 साल में ऐसे तय किया मुख्यमंत्री पद तक का सफर The post डिप्टी सीएम विजय चौधरी बोले- नीतीश कुमार जैसा कोई दूसरा नहीं हो सकता, उन्हीं की नीतियों पर चलेगी प्रशासन appeared first on Naya Vichar.

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‘फोर्स 3’ की शूटिंग शुरू, जॉन अब्राहम का एक्शन अवतार फिर आया सामने

Force 3: बॉलीवुड एक्टर जॉन अब्राहम एक बार फिर अपने दमदार एक्शन अवतार के साथ बड़े पर्दे पर लौटने की तैयारी में हैं. उनकी मच अवेटेड फिल्म ‘फोर्स 3’ की शूटिंग शुरू हो चुकी है. मेकर्स ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर इस बात की जानकारी दी, जिसमें जॉन के साथ हर्षवर्धन राणे की झलक भी देखने को मिली है. वीडियो में दिखा एक्शन का दम जारी किए गए वीडियो में जॉन अब्राहम अपने पुराने अंदाज में नजर आ रहे हैं. हाथ में बंदूक लिए उनका इंटेंस लुक फैंस को काफी पसंद आ रहा है. वहीं, हर्षवर्धन राणे के साथ उनका आमना-सामना कहानी में जबरदस्त टकराव की ओर इशारा करता है. दोनों सितारे शानदार फिजिक और दमदार स्क्रीन प्रेजेंस के साथ एक्शन सीन्स के लिए पूरी तरह तैयार दिख रहे हैं. View this post on Instagram A post shared by John Abraham (@thejohnabraham) वीडियो के कैप्शन में लिखा गया है कि जब एक अडिग शख्स का सामना एक अडिग ताकत से होता है, तो एक बड़ा तूफान खड़ा होता है. इसी के साथ फिल्म की रिलीज डेट भी सामने आई है. ‘फोर्स 3’ 19 मार्च 2027 को सिनेमाघरों में दस्तक देगी. फ्रेंचाइजी का रहा है शानदार रिकॉर्ड गौरतलब है कि ‘फोर्स’ फ्रेंचाइजी की शुरुआत साल 2011 में हुई थी. पहली फिल्म Force को दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला था. इसके बाद 2016 में रिलीज हुई Force 2 ने भी बॉक्स ऑफिस पर ठीक-ठाक प्रदर्शन किया और एक्शन प्रेमियों को खूब पसंद आई. दमदार टीम के साथ लौट रही फिल्म ‘फोर्स 3’ को खुद जॉन अब्राहम प्रोड्यूस कर रहे हैं, जबकि निर्देशन की कमान भाव धूलिया संभाल रहे हैं. फिल्म की कहानी सीमाब हाशमी ने लिखी है. मेकर्स का दावा है कि इस बार फिल्म पहले से ज्यादा बड़े स्केल और हाई-ऑक्टेन एक्शन के साथ दर्शकों के सामने आएगी. फैंस को अब इस फिल्म के अगले अपडेट का बेसब्री से इंतजार है, क्योंकि वीडियो ने पहले ही एक्साइटमेंट बढ़ा दी है. यह भी पढ़ें: 27वें दिन भी नहीं थमी ‘धुरंधर 2’ की रफ्तार, 1100 करोड़ क्लब से बस एक कदम दूर The post ‘फोर्स 3’ की शूटिंग शुरू, जॉन अब्राहम का एक्शन अवतार फिर आया सामने appeared first on Naya Vichar.

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सऊदी-पाकिस्तान के ‘सीक्रेट वॉर पैक्ट’ का खुलासा: क्या ईरान से युद्ध में कूदेगा इस्लामाबाद?

Saudi-Pakistan Secret Defense Pact: ‘ड्रॉप साइट न्यूज’ के हाथ लगे दस्तावेजों के मुताबिक, इस समझौते में एक ‘कलेक्टिव डिफेंस क्लॉज’ जोड़ा गया है. इसका मतलब है कि अगर सऊदी अरब पर कोई हमला होता है, तो पाकिस्तान उसे अपने ऊपर हमला मानेगा. रिपोर्ट बताती है कि पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने भी सार्वजनिक रूप से ईरान को चेतावनी देते हुए कहा था कि वह सऊदी के साथ हमारे इस समझौते का ध्यान रखे. यह समझौता 1982 के पुराने सैन्य सहयोग का एक बहुत बड़ा और गंभीर विस्तार है. यह 1982 का ‘प्रोटोकॉल ऑन डिफेंस कोऑपरेशन’ समझौता है, जो सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हुआ था. इस समझौते के तहत पाकिस्तान ने सऊदी अरब की आंतरिक सुरक्षा और रक्षा के लिए अपने लगभग 10,000 सैनिकों को वहां तैनात किया था, जिसका मुख्य उद्देश्य सऊदी राजघराने और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था. पाकिस्तान की मजबूरी   हैरानी की बात यह है कि इस समझौते में पाकिस्तान की तरफ से तो सऊदी की रक्षा करने की पूरी गारंटी दी गई है, लेकिन सऊदी अरब पर ऐसी कोई सैन्य मजबूरी नहीं है. रिपोर्ट के अनुसार, यह डील पूरी तरह एकतरफा है. पाकिस्तान अपनी खराब आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए सऊदी से मिलने वाली आर्थिक मदद के बदले अपनी सेना देने को तैयार हुआ है. पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने इसी वजह से इस समझौते पर हस्ताक्षर करने से परहेज किया था, लेकिन 2025 में क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के बीच यह डील फाइनल हो गई. शांति वार्ता के बीच सेना की तैनाती जिस वक्त पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध रोकने के लिए हाई-लेवल बातचीत चल रही थी, ठीक उसी समय सऊदी अरब ने किंग अब्दुलअजीज एयर बेस पर पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों और सैनिकों के पहुंचने का ऐलान कर दिया. इस समाचार ने पाकिस्तान की ‘न्यूट्रल’ छवि को भारी नुकसान पहुंचाया, जिसके तुरंत बाद वाशिंगटन और तेहरान के बीच हो रही बातचीत बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई और अमेरिकी दल वापस लौट गया. इस्लामाबाद में फिर हो सकती है बातचीत एबीसी न्यूज से बातचीत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह मौजूदा दो हफ्ते के युद्धविराम को आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं क्योंकि इसकी जरूरत नहीं पड़ेगी. ट्रंप ने संकेत दिया है कि अगले दो दिनों में कुछ बड़ा हो सकता है. ‘न्यूयॉर्क पोस्ट’ और ‘सीएनएन’ की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की बातचीत के लिए ‘इस्लामाबाद’ को सबसे मुफीद जगह माना जा रहा है. इस वार्ता का नेतृत्व अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर सकते हैं, जिसमें स्टीव विटकॉफ और जारेड कुशनर भी शामिल हो सकते हैं. ये भी पढ़ें: 49 साल बाद अमेरिका-ईरान के बीच जमी बर्फ पिघलेगी? इस्लामाबाद में दोबारा मिल सकते हैं दोनों देश पाकिस्तान के लिए घरेलू खतरा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पाकिस्तान इस जंग में सीधे शामिल होता है, तो उसे देश के अंदर भारी विरोध झेलना पड़ सकता है. पाकिस्तान की जनता में ईरान के प्रति सहानुभूति है, ऐसे में अमेरिका और इजरायल के ब्लॉक के साथ खड़े होना पाकिस्तान के लिए आंतरिक संकट पैदा कर सकता है. हालांकि, ‘ड्रॉप साइट न्यूज’ का कहना है कि फिलहाल यह तैनाती प्रतीकात्मक है, लेकिन समझौते की शर्तों ने पाकिस्तान के हाथ बांध दिए हैं. ये भी पढ़ें: ईरान युद्ध पर ट्रंप का बड़ा बयान: जंग अब खत्म होने की कगार पर, जल्द समझौता करना चाहता है तेहरान The post सऊदी-पाकिस्तान के ‘सीक्रेट वॉर पैक्ट’ का खुलासा: क्या ईरान से युद्ध में कूदेगा इस्लामाबाद? appeared first on Naya Vichar.

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AC बंद होते ही कमरा हो जाता है गर्म? अपनाएं ये 5 आसान टिप्स और पाएं लंबी ठंडक

How To Keep Room Cool After AC Is Off: गर्मियों के मौसम में एयर कंडीशनर हमारे लिए राहत का सबसे बड़ा साधन बन जाता है, लेकिन अक्सर देखा जाता है कि जैसे ही एयर कंडीशनर बंद किया जाता है, कमरा कुछ ही मिनटों में फिर से गर्म हो जाता है. इसका मुख्य कारण बाहर की गर्म हवा, धूप और कमरे के अंदर मौजूद गर्मी पैदा करने वाले उपकरण होते हैं. सही उपाय अपनाकर इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है. यदि हम कुछ आसान और असरदार टिप्स अपनाएं, तो एयर कंडीशनर बंद होने के बाद भी कमरे में ठंडक लंबे समय तक बनाए रखी जा सकती है और बिजली की बचत भी की जा सकती है. 1. खिड़की-दरवाजे तुरंत बंद करें एयर कंडीशनर बंद करने के बाद सबसे जरूरी काम है कमरे की खिड़कियां और दरवाजे तुरंत बंद करना. अगर इन्हें खुला छोड़ दिया जाए, तो बाहर की गर्म हवा तेजी से अंदर आती है और कुछ ही मिनटों में कमरे का तापमान बढ़ जाता है. इसलिए ठंडक बनाए रखने के लिए कमरे को अच्छी तरह से सील करके रखें. 2. पर्दे या ब्लैकआउट का इस्तेमाल करें धूप कमरे को गर्म करने का सबसे बड़ा कारण होती है. ऐसे में मोटे पर्दे या ब्लैकआउट कर्टेन का इस्तेमाल करना बहुत फायदेमंद होता है. ये सूरज की सीधी किरणों को अंदर आने से रोकते हैं और कमरे को लंबे समय तक ठंडा बनाए रखने में मदद करते हैं, खासकर दोपहर के समय. 3. पंखा चालू रखें एयर कंडीशनर बंद करने के बाद पंखा जरूर चलाएं. इससे कमरे में मौजूद ठंडी हवा लगातार घूमती रहती है और आपको ज्यादा देर तक ठंडक महसूस होती है. पंखा हवा को सर्कुलेट करता है, जिससे घुटन भी कम होती है और कमरे का तापमान धीरे-धीरे बढ़ता है. 4. इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बंद करें घर के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे टीवी, लैपटॉप, कंप्यूटर और यहां तक कि बल्ब भी गर्मी पैदा करते हैं. जब ये लगातार चलते रहते हैं, तो कमरे का तापमान बढ़ने लगता है. इसलिए जब इनकी जरूरत न हो, तो इन्हें बंद कर दें ताकि अतिरिक्त गर्मी पैदा न हो. 5. दिन में वेंटिलेशन कंट्रोल करें दिन के समय बाहर की हवा ज्यादा गर्म होती है, इसलिए इस दौरान खिड़कियां बंद रखना बेहतर होता है. वहीं, सुबह जल्दी या रात में जब मौसम थोड़ा ठंडा होता है, तब खिड़कियां खोलकर ताजी हवा अंदर आने दें. इससे कमरे में नेचुरल ठंडक बनी रहती है. यह भी पढ़ें: Fragrant Flowers For Garden: फूलों की खुशबू से महकाएं अपना गार्डन, लगाएं ये पौधे यह भी पढ़ें: गर्मियों में बाइकिंग के लिए चुनें क्रिएटर शशांक के बताए ये चीजें  The post AC बंद होते ही कमरा हो जाता है गर्म? अपनाएं ये 5 आसान टिप्स और पाएं लंबी ठंडक appeared first on Naya Vichar.

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पश्चिम बंगाल में विधानसभा की 57 सीट पर कांटे का मुकाबला, जो जीता वही सिकंदर

मुख्य बातें 57 सीटों पर महज 8,000 वोटों से हुई हार-जीत कम अंतर वाली 57 सीटों में से 47 दक्षिण बंगाल में कूचबिहार में केवल 57 वोटों से हुई थी जीत ममता बनर्जी की बढ़ेंगी मुश्किलें Bengal Election: कोलकाता : पश्चिम बंगाल में विधानसभा की 57 सीटों कड़ा मुकाबला है. पिछले चुनावों में भी इन सीटों पर जीत हार का फासला बेहद कम था. राज्य में हुए SIR के बाद यहां समीकरण बदल सकते हैं और परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं. इसके अलावा, इस बार का चुनाव बड़े मुद्दों और नारों के साथ-साथ बूथ मैनेजमेंट पर भी टिका है. 2021 के विधानसभा चुनावों में तृणमूल ने 213 और भाजपा 77 सीटों पर जीत हासिल की थी. ऐसे में भाजपा और तृणमूल दोनों पार्टियां अपने-अपने वोटरों को बूथ तक ले जाने की जी भर कोशिश कर रही हैं. दोनों पार्टियां एक-एक वोट के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं. 57 सीटों पर महज 8,000 वोटों से हुई हार-जीत 2021 के चुनावों की बात करें तो 57 सीटों पर महज 8,000 वोटों से हार-जीत का फैसला हुआ था. इस बार भी इन्हीं सीटों पर सभी की नजरें टिकी हैं. इन सीटों पर वोट प्रतिशत का थोड़ा बदलाव जीत हार में बड़ा अंतर पैदा कर सकता है. पिछली बार इन 57 में से 29 सीटें ममता बनर्जी और 28 सीटें नरेंद्र मोदी के पाले में गई थीं. इनमें से 19 सीटें ऐसी थीं, जहां प्रत्याशियों की हार-जीत का अंतर 3,000 से भी कम वोटों का रहा था. उन 19 में से 12 भाजपा और 7 सीट तृणमूल के खाते में गई. यानी पिछले मुकाबले में भाजपा का प्रदर्शन बढ़िया रहा. कम अंतर वाली 57 सीटों में से 47 दक्षिण बंगाल में कम अंतर से जीतने वाली 57 सीटों में से 47 दक्षिण बंगाल में हैं. उत्तरी बंगाल में ऐसी केवल 10 सीटें हैं. दक्षिण को तृणमूल कांग्रेस का गढ़ है. भाजपा इस बार दक्षिण में थोड़ी ज्यादा मेहनत कर रही है. SIR के तहत जिन तीन जिलों में सबसे अधिक नाम काटे गये हैं, वो जिले भी दक्षिण बंगाल में ही आते हैं. ममता बनर्जी के सामने कम मार्जिन वाली सीटों पर बढ़त बरकरार रखने की चुनौती है. सत्ता बचाने के लिए इन सीटों को हर हाल में जीतना होगा. असल परीक्षा इन्हीं सीटों पर होगी और जो इन सीटों को जीत लेगा वही बंगाल की सत्ता का सिकंदर बनेगा. कूचबिहार में केवल 57 वोटों से हुई थी जीत पश्चिम बंगाल में पिछले विधानसभा चुनाव में कई ऐसी सीटें थीं, जहां प्रत्याशियों के जीत-हार का अंतर हजार वोटों का ही रहा. बांकुड़ा सीट से भाजपा प्रत्याशी ने 1,468 वोटों से जीत हासिल की थी. कुल्टी में मुकाबला बेहद दिलचस्प रहा और अंत में भाजपा के उम्मीदवार 679 वोटों से विजयी हुए. तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए शुभेंदु अधिकारी ने अपनी पूर्व प्रमुख ममता बनर्जी को 1,956 वोटों से हराया था. कूचबिहार में रोमांचक मुकाबला हुआ था. भाजपा के निशीथ प्रमाणिक ने सिर्फ 57 वोटों से जीत दर्ज की थी. पश्चिम बंगाल की अन्य महत्वपूर्ण समाचारों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें ममता बनर्जी की बढ़ेंगी मुश्किलें विधानसभा के इन सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय या बहुकोणीय मुकाबलों से अलग है, लेकिन कांग्रेस भी कुछ गैर-भाजपा वोटों में सेंधमारी कर सकती है. इससे ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ेंगी. हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी अब बेसर हो चुकी है, लेकिन असदुद्दीन ओवैसी का असर देखना होगा. कुछ हजार वोटों से जीत-हार तय होने वाली सीटों पर ये छोटे-छोटे फैक्टर बड़ा असर दिखा सकते हैं. खास कर तब जब वोटर लिस्ट में बड़ी संख्या में वोटरों के नाम काटे गये हों. Also Read: दिल्ली और बिहार में वोट देनेवाले को बंगाल में नहीं डालने देंगे वोट, अभिषेक बनर्जी की आयोग को खुली चेतावनी The post पश्चिम बंगाल में विधानसभा की 57 सीट पर कांटे का मुकाबला, जो जीता वही सिकंदर appeared first on Naya Vichar.

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कार की छत पर लगा ये छोटा सा पार्ट क्या करता है? जानिए इसका असली काम

Shark Fin Antenna: आजकल गाड़ियां सिर्फ चलाने के लिए नहीं, बल्कि स्मार्ट फीचर्स से भरपूर बनाने पर जोर दिया जा रहा है. कार के अंदर ही नहीं, बाहरी हिस्सों में भी कई ऐसे एलिमेंट्स होते हैं जो दिखने में छोटे लगते हैं, लेकिन काम बड़े करते हैं. इनमें से एक है रूफ पर लगा शार्क फिन एंटीना. अक्सर लोग इसे सिर्फ स्टाइल बढ़ाने वाला हिस्सा मान लेते हैं. लेकिन इसका रोल इससे कहीं ज्यादा जरूरी होता है. आइए आपको डिटेल में बताते हैं कि ये शार्क फिन एंटीना किस-किस काम आता है. क्यों इस एंटीना का डिजाइन शार्क फिन जैसा है? कारों में एंटीना को शार्क फिन जैसा डिजाइन यूं ही नहीं दिया जाता. इसका लुक भले स्टाइलिश लगता हो, लेकिन इसके पीछे काम की वजह छुपी होती है. ये डिजाइन काफी स्लीक और एयरोडायनामिक होता है. इससे तेज स्पीड पर भी ये मजबूती से टिका रहता है. इंस्टॉल करना आसान होता है और IP67 रेटिंग के साथ पानी-धूल से भी ये सेफ रहता है. किस काम आता है ये एंटीना? रेडियो सिग्नल पकड़ता है गाड़ी में लगा एंटीना बाहर से आने वाले FM और AM रेडियो सिग्नल को पकड़ता है, ताकि सफर के दौरान आपके पसंदीदा गाने और शो बिना रुकावट चलते रहें. GPS नेविगेशन आजकल की मॉडर्न कारों में GPS नेविगेशन एक बेहद काम का फीचर बन चुका है. दरअसल, कार में लगा एंटीना सैटेलाइट से सिग्नल लेकर आपकी सटीक लोकेशन और दिशा तय करता है. इससे सफर और भी आसान हो जाता है. की-लेस एंट्री और स्टार्ट आजकल कई कारों में की-लेस एंट्री और स्टार्ट का फीचर मिल जाता है. इसमें आपकी कार की चाबी से सिग्नल ऑटोमैटिक तरीके से कनेक्ट हो जाता है, जिससे आपको चाबी निकालने की जरूरत ही नहीं पड़ती. इससे आप बिना चाबी डाले ही दरवाजे खोल सकते हैं और गाड़ी स्टार्ट कर सकते हैं. टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम कार में लगा यह एंटेना TPMS यानी टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम का अहम हिस्सा होता है. यह हर टायर में लगे सेंसर से सिग्नल लेकर आपको रियल-टाइम में टायर का प्रेशर दिखाता रहता है. इससे आप समय रहते हवा कम होने जैसी समस्या पकड़ सकते हैं. ब्लूटूथ  आजकल कारों में ब्लूटूथ कनेक्टिविटी होती है. इससे आप अपने फोन को कनेक्ट कर सकते हैं. कार का सिस्टम खुद ही सिग्नल पकड़कर आपको एक स्मूद और हैंड्स-फ्री एक्सपीरियंस देता है. यह भी पढ़ें: आपकी ऑटोमैटिक कार में ये छोटा सा बटन आखिर इतना जरूरी क्यों है? जानें इसके फायदे The post कार की छत पर लगा ये छोटा सा पार्ट क्या करता है? जानिए इसका असली काम appeared first on Naya Vichar.

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