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May 4, 2026

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बंगाल में काउटिंग के बीच सीएम सम्राट का एक्स पोस्ट, ‘जहां पैदा हुए श्यामा प्रसाद, वो बंगाल हमारा’

Bihar Politics: पश्चिम बंगाल में काउंटिंग जारी है. लेकिन रुझानों में बीजेपी लगातार आगे बढ़ रही है. इस बीच बिहार में जश्न का माहौल है. बीजेपी के नेताओं की ओर से प्रतिक्रिया सामने आ रही है और इसके साथ ही जश्न की तैयारी भी की जा रही है. इस बीच सीएम सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स के जरिए पोस्ट शेयर खुशी जताई. सीएम सम्राट चौधरी ने एक्स पर क्या लिखा? काउंटिंग के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक्स पर लिखा, ‘जहां पैदा हुए श्यामा प्रसाद मुखर्जी, वो बंगाल हमारा है. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हिंदुस्तानीय जनता पार्टी को ऐतिहासिक जनादेश देने के लिए बंगाल की जागरूक और राष्ट्रनिष्ठ जनता का हृदय से कोटि-कोटि अभिनंदन. हिंदुस्तान माता की जय’. इस तरह से सीएम सम्राट चौधरी ने पहले ही बधाई दी. बीजेपी बिहार ने भी किया पोस्ट बीजेपी बिहार की ओर से भी एक्स अकाउंट के जरिए पोस्ट शेयर किया गया. इस पोस्ट में ममता बनर्जी के अलावा अन्य राज्यों के सीएम के साथ तेजस्वी यादव की तस्वीरों को शेयर कर तंज कसा. एक्स पर लिखा, ‘मंजिल की तलाश में निकले थे हमसफर बनकर, मगर जहां-जहां गए, वहां की कश्ती ही डुबो आए. खुद की जमीन खिसकी हुई है और चले थे दूसरों का सहारा बनने.’ इस तरह से नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को निशाने पर लिया गया. कार्यकर्ताओं के बीच जश्न का माहौल बीजेपी की जीत को लेकर पटना में बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच खुशी का माहौल है. जीत की खुशी में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने पटना में झालमुड़ी बनाकर बांटा. पटना ऑफिस में भी खास जश्न की तैयारी की जा रही है. इसके अलावा बीजेपी ऑफिस में पार्टी के स्त्री कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर जश्न मनाया. झालमुड़ी खाते दिखे जीतन राम मांझी केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने भी एक्स पर पोस्ट शेयर किया. साथ ही उन्होंने तस्वीरें भी शेयर की जिसमें वह झालमुड़ी खाते दिखे. उन्होंने लिखा, ‘पश्चिम बंगाल की जीत पर जलेबी नहीं झालमुड़ी ही चलेगी. आज झालमुड़ी का दिन है जमकर झालमुड़ी खा रहा हूं. किसी को झाल लगे तो बुरा मत मानिएगा. बंगाल जीत की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी. ये जीत आपके मार्गदर्शन और अमित शाह जी के बेजोड़ मेहनत की जीत है. बंगाल के हर NDA कार्यकर्ताओं को जीत की विशेष शुभकामनाएं’. Also Read: स्वच्छता सर्वेक्षण 2025-26: फाइव स्टार की रेस में पटना, पोर्टल के जरिए लोग दे रहे फीडबैक The post बंगाल में काउटिंग के बीच सीएम सम्राट का एक्स पोस्ट, ‘जहां पैदा हुए श्यामा प्रसाद, वो बंगाल हमारा’ appeared first on Naya Vichar.

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करूर भगदड़ में 41 लोगों की मौत, तृशा कृष्णन से अफेयर; चुनाव तक विवादों में रहे विजय थलापति अब बनेंगे सीएम

Vijay and Controversy : तमिलनाडु की नेतृत्व में आम आदमी के मुद्दों पर फोकस करके एक्टर विजय ने बदलाव की जो आंधी लाई है, उसके बाद उनकी चर्चा पूरे देश में हो रही है. एक्टर विजय की छवि एक ऐसे एक्टर की है, जिसका मास कनेक्ट है. वह आम आदमी के जीवन, उसके संघर्ष और उसके इमोशन को पर्दे पर दिखाते हैं. वह जब पर्दे पर आते हैं, तो पूरा सिनेमा हाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठता है. ऐसे मास कनेक्ट वाले एक्टर विजय के जीवन में भी कुछ ऐसे मसले हैं, जो कई बार विवाद का कारण बने हैं. पत्नी संगीता सोरनालिंगम से तलाक की समाचारें होती रहती हैं वायरल? विजय अभी 51 साल के है. उन्होंने महज 25 साल की उम्र में संगीता सोरनालिंगम से शादी कर ली थी. संगीता श्रीलंकाई तमिल मूल की हैं और यूके में रहती थीं. वो विजय की बहुत बड़ी फैन थीं. इन दोनों की मुलाकात एक फिल्म की शूटिंग के दौरान हुई और फिर इन्होंने परिवार की मर्जी से शादी कर ली. संगीता अमूमन लाइम लाइट से दूर रहती हैं. इनके दो शिशु हैं एक बेटा और एक बेटी. बेटा 26 साल का है और बेटी 21 साल की है. मीडिया में कई बार इनके बीच तलाक की समाचारें आती रहती हैं, लेकिन इसकी पुष्टि ना तो विजय ने की है और ना ही उनकी पत्नी संगीता सोरनालिंगम ने की है. तृशा कृष्णन से अफेयर की समाचारें तृशा कृष्णन विजय की को-स्टार हैं. इन दोनों की कई फिल्में एक साथ बनी हैं, जिनमें उनकी कमेस्ट्री देखने लायक थी. तृशा और विजय ने साथ में कई फिल्में की है, जिनमें लियो, घिल्ली, तिरुपाची और आधी जैसी फिल्में शामिल हैं. तृशा हाल ही में बालाजी के दर्शन के लिए गई थीं, उस वक्त यह कहा गया कि वो चुनाव में विजय की जीत के लिए प्रार्थना करने मंदिर गई थीं. हालांकि अपने रिश्ते को लेकर तृशा और विजय ने अबतक कोई टिप्पणी नहीं की है. करूर रैली भगदड़ में 41 की मौत विजय एक बड़े स्टार हैं. जब उन्होंने नेतृत्व में एंट्री ली, तो उनकी रैलियों में भीड़ जरूरत से ज्यादा उमड़ने लगी. ऐसे ही एक रैली 27 सितंबर करूर में आयोजित की गई थी, जहां भीड़ बहुत ज्यादा थी. प्रवेश और निकास द्वार पर बोझ बहुत ज्यादा था. सभी विजय को देखने के लिए उत्सकु थे, उसी दौरान भगदड़ मच गई और कई लोगों की मौत दम घुटने से हो गई. जानकारी के अनुसार कुल 41 लोगों की मौत इस भगदड़ में हुई थी. इस मसले को लेकर मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने विजय को निशाने पर लिया था और कहा था उनकी वजह से इतने लोगों की मौत हुई है. विजय रैली में सात घंटे विलंब से पहुंचे थे, जिसकी वजह से वहां अफरा-तफरी मच गई थी. उन्होंने टीवीके के आयोजन को बेकार बताया था. घटना के बाद विजय ने वीडियो जारी कर शोक व्यक्त किया था और कहा था कि लोग उनसे प्रेम करते हैं, इसलिए बहुत बड़ी संख्या में आ गए थे. इस घटना के लिए मुझे दोष दिया जाना चाहिए, टीवीके के कार्यकर्ताओं को नहीं. विजय की गाड़ी के नीचे आया युवक, लेकिन विजय ने नहीं रोका रोड शो विजय के रोड शो के दौरान शिवगंगा जिले में एक बाइक सवार विजय की गाड़ी के नीचे आ गया था. दरअसल वह युवक तेज रफ्तार से बाइक चलाकर विजय की गाड़ी के पीछे आया था और उनके साथ सेल्फी लेने की कोशिश में था. उसी दौरान युवक का संतुलन बिगड़ा और वह गिर पड़ा. वह विजय की कार के नीचे आ गया था, लेकिन विजय ने अपने काफिले को रोका नहीं. इस वीडियो के सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद विजय को बहुत ट्रोल किया गया था. ये भी पढ़ें : विजय थलापति का व्हिसलपोडु, तमिलनाडु की नेतृत्व में हड़कंप; सबसे बड़ी पार्टी बन सकती है TVK विजय थलापति ने तमिलनाडु की नेतृत्व का बदला रंग, द्रविड़ पहचान पर हावी हुआ विकास का सपना The post करूर भगदड़ में 41 लोगों की मौत, तृशा कृष्णन से अफेयर; चुनाव तक विवादों में रहे विजय थलापति अब बनेंगे सीएम appeared first on Naya Vichar.

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बंगाल में क्यों ढहा ‘दीदी’ का किला? बेरोजगारी और आरजी कर कांड समेत इन मुद्दों ने पलटी ममता की सत्ता

West Bengal Election Result 2026, कोलकाता : पश्चिम बंगाल की नेतृत्व में ममता बनर्जी का किला आखिरकार ढह गया है. 2026 के विधानसभा चुनाव के नतीजों ने साफ कर दिया है कि बंगाल की जनता ने बदलाव का मन बना लिया था. ताजा आंकड़ों के मुताबिक बीजेपी 177 सीट पर आगे चल रही है तो टीएमसी केवल 94 सीटों पर ही बढ़त बनाए हुए है. ऐसे में सवाल ये है कि कभी बंगाल की नेतृत्व में अपनी दबदबा रखने वाली दीदी कैसे हार गई. क्या इसके पीछे केवल बीजेपी का मजबूती से चुनाव लड़ना और अच्छी रणनीति बनना भर रहा? नहीं. बल्कि इसके पीछे कुछ ऐसे भी बुनयादी मुद्दे रहे जिसे आम आदमी बीते कई सालों से जूझ रहा था. आइए जानते हैं वे 4 बड़ी वजहें, जिन्होंने ‘दीदी’ को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाया. रोजगार के दावों और हकीकत में जमीन-आसमान का अंतर ममता बनर्जी ने चुनाव प्रचार के दौरान बार-बार दावा किया कि उनकी प्रशासन ने 2 करोड़ लोगों को रोजगार दिया है. लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां कर रही थी. जब प्रशासन ने ‘युवा साथी योजना’ शुरू की, तो उसके लिए 85 लाख युवाओं ने आवेदन कर दिए. यह आंकड़ा खुद-ब-खुद चीख-चीख कर कह रहा था कि बंगाल में बेरोजगारी की स्थिति कितनी भयानक है. दावों और हकीकत के इसी अंतर ने युवाओं को तृणमूल से दूर कर दिया. प्रवासी श्रमिकों की अनसुनी चीखें एक तरफ प्रशासन बंगाल के विकास का मॉडल पेश कर रही थी, वहीं दूसरी तरफ चुनावों से ठीक पहले विभिन्न राज्यों से बंगाल के प्रवासी श्रमिकों की मौत की दुखद समाचारें आती रहीं. इन घटनाओं ने ममता प्रशासन के विकास के दावों की कलई खोल दी. जनता के बीच यह संदेश गया कि अगर राज्य में विकास और रोजगार होता, तो राज्य के लोगों को दूसरे राज्यों में जाकर जान नहीं गंवानी पड़ती. Also Read: मानिकतला सीट पर विरासत की लड़ाई, ममता बनर्जी की ‘शेरनी’ उम्मीदवार श्रेया पांडे का क्या है हाल? नेतृत्वक हिंसा और शीतलकुची का जख्म बंगाल में पिछले कुछ चुनावों से जारी नेतृत्वक हिंसा ने आम लोगों के मन में डर और गुस्सा दोनों भर दिया था. 2021 के चुनाव के दौरान शीतलकुची में हुई गोलीबारी में जान गंवाने वालों के परिजनों को प्रशासन ने अब तक कोई ठोस राहत नहीं दी. अपनों को खोने का यह गम और न्याय न मिलने का गुस्सा इस बार मतदान केंद्रों पर साफ दिखा. कानून-व्यवस्था की बदहाली ममता बनर्जी के खिलाफ बीजेपी का सबसे बड़ा हथियार बनी. आरजी कर कांड: जब गुस्से ने लिया जनाक्रोश का रूप बंगाल चुनाव में ‘दीदी’ के किले को गिराने वाली आखिरी और सबसे बड़ी चोट आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना थी. एक स्त्री ट्रेनी डॉक्टर के साथ हुई उस बर्बरता ने पूरे देश को हिला दिया था. बंगाल की सड़कों पर उतरे छात्र, डॉक्टर और आम नागरिकों के गुस्से को प्रशासन भांप नहीं पाई. स्त्री सुरक्षा के मुद्दे पर ममता बनर्जी का गिरता ग्राफ चुनाव परिणामों में उनकी हार की सबसे बड़ी वजह बनी. Also Read: काउंटिंग के बीच ममता बनर्जी की पहली प्रतिक्रिया- काउंटिंग सेंटर में हमारे लोगों को रोका गया, घर के बाहर लगे जय श्रीराम के नारे The post बंगाल में क्यों ढहा ‘दीदी’ का किला? बेरोजगारी और आरजी कर कांड समेत इन मुद्दों ने पलटी ममता की सत्ता appeared first on Naya Vichar.

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बंगाल में कौन बनेगा मुख्यमंत्री? शुभेंदु अधिकारी का पलड़ा क्यों है सबसे भारी?

West Bengal Next CM 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना के रुझानों में हिंदुस्तानीय जनता पार्टी (भाजपा) की बढ़त ने राज्य की सियासत में एक नई बहस छेड़ दी है. अगर भाजपा प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता पर काबिज होती है, तो बंगाल का अगला ‘चीफ मिनिस्टर’ कौन होगा? सियासी गलियारों में सबसे ऊपर जिस नाम की चर्चा है, वह है शुभेंदु अधिकारी. कभी ममता बनर्जी के सबसे खास सिपहसालार रहे शुभेंदु अब उनके सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभरे हैं. आखिर क्यों शुभेंदु अधिकारी का पलड़ा मुख्यमंत्री की रेस में सबसे भारी नजर आ रहा है? आइए जानते हैं इसके पीछे के 5 बड़े समीकरण. हिंदुत्व और सनातन का सबसे बड़ा चेहरा शुभेंदु अधिकारी ने पिछले कुछ वर्षों में खुद को भाजपा के कट्टर हिंदुत्व के चेहरे के रूप में स्थापित किया है. वे खुलकर सनातन धर्म की रक्षा की बात करते हैं और तुष्टीकरण की नेतृत्व पर ममता प्रशासन को घेरते रहे हैं. भाजपा के कैडर और कोर वोटर के बीच उनकी यह छवि उन्हें बाकी नेताओं से मीलों आगे ले जाती है. ममता बनर्जी और अभिषेक पर सीधा प्रहार शुभेंदु अधिकारी इकलौते ऐसे नेता हैं, जो ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी पर सबसे तीखे और सीधे हमले करते हैं. भ्रष्टाचार, सिंडिकेट राज और भाई-भतीजावाद के खिलाफ उनकी आवाज ने जमीन पर भाजपा कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने का काम किया है. बंगाल की समाचारें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें West Bengal Next CM 2026: अमित शाह के साथ निकटता चुनाव प्रचार 2026 के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और शुभेंदु अधिकारी की केमिस्ट्री ने बहुत कुछ साफ कर दिया है. शुभेंदु ने कभी ममता बनर्जी को अपना गुरु माना था, लेकिन अब उनके नेतृत्वक मार्गदर्शक अमित शाह बन चुके हैं. शाह के साथ मंच साझा करने से लेकर रणनीति बनाने तक, शुभेंदु हर जगह फ्रंट फुट पर नजर आये. इसे भी पढ़ें : काउंटिंग के बीच ममता बनर्जी की पहली प्रतिक्रिया- काउंटिंग सेंटर में हमारे लोगों को रोका गया, घर के बाहर लगे जय श्रीराम के नारे धरती पुत्र वाला दांव और बंगाल की अस्मिता अमित शाह ने चुनाव के दौरान बार-बार एक ही बात दोहरायी- बंगाल का मुख्यमंत्री बंगाल का कोई धरती पुत्र ही बनेगा. शुभेंदु अधिकारी खुद को पूर्व मेदिनीपुर का ‘धरती पुत्र’ बताते हैं और उन्होंने ममता बनर्जी के ‘बाहरी’ वाले नारे की हवा निकालने के लिए खुद को बंगाली अस्मिता का रक्षक बताया. इसे भी पढ़ें : क्या खत्म हो जायेगा अभिषेक बनर्जी का नेतृत्वक करियर? पढ़ें पूरा विश्लेषण जमीन पर मजबूत पकड़ और संगठन पर नियंत्रण शुभेंदु अधिकारी न केवल एक फायरब्रांड नेता हैं, बल्कि वे एक कुशल संगठनकर्ता भी हैं. मेदिनीपुर से लेकर उत्तर बंगाल तक, पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने में उनकी भूमिका अहम रही है. हालांकि, भाजपा आलाकमान ने अभी तक आधिकारिक तौर पर किसी नाम का ऐलान नहीं किया है. पार्टी के भीतर दिलीप घोष जैसे अन्य दिग्गज भी हैं, लेकिन मौजूदा माहौल और अमित शाह के संकेतों को देखें, तो शुभेंदु अधिकारी का पलड़ा सबसे भारी दिख रहा है. अब देखना यह है कि क्या दिल्ली दरबार उनके नाम पर अंतिम मुहर लगाता है? इसे भी पढ़ें Bengal Election Result LIVE: बंगाल में भाजपा को 186 सीटों पर बढ़त, ममता बोली- अभी कई राउंड बाकी Bhabanipur Result LIVE: भवानीपुर में ममता बनर्जी की लंबी छलांग, पांचवें राउंड में 16 हजार की बढ़त मतगणना से पहले बदला कालीघाट का थाना प्रभारी, 48 घंटे में दूसरा तबादला, चमेली की छुट्टी, बलाई को कमान बंगाल चुनाव 2026: काउंटिंग से पहले भवानीपुर में हाई-वोल्टेज ड्रामा, ममता बनर्जी ने खुद संभाला मोर्चा, पढ़ें बवाल की इनसाइड स्टोरी The post बंगाल में कौन बनेगा मुख्यमंत्री? शुभेंदु अधिकारी का पलड़ा क्यों है सबसे भारी? appeared first on Naya Vichar.

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ममता बनर्जी की पहली प्रतिक्रिया- काउंटिंग सेंटर में हमारे लोगों को रोका गया, घर के बाहर लगे जय श्रीराम के नारे

खास बातें ममता बनर्जी ने जारी किया वीडियो संदेश उम्मीदवारों और पोलिंग एजेंट्स के साथ की थी मीटिंग Mamata Banerjee: ममता बनर्जी ने किया था 226 सीटें जीतने का दावा Mamata Banerjee First Statement Bengal Result: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना में हिंदुस्तानीय जनता पार्टी से पिछड़ने के बाद ममता बनर्जी का पहला बयान सामने आ गया है. ममता बनर्जी ने कहा है कि काउंटिंग सेंटर में तृणमूल कांग्रेस के लोगों को जाने से रोका जा रहा है. उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके घर के बाहर भाजपा कार्यकर्ताओं ने जय श्रीराम के नारे लगाये हैं. ममता बनर्जी ने जारी किया वीडियो संदेश ममता बनर्जी ने काउंटिंग के बीच एक वीडियो संदेश जारी कर कहा- हम कई विधानसभा क्षेत्रों में अब भी आगे हैं. निर्वाचन आयोग और हिंदुस्तानीय जनता पार्टी (भाजपा) उन सीटों पर रुझान नहीं दिखा रहे, जहां हम आगे हैं. ममता दीदी ने अपने कार्यकर्ताओं से अपील भी की है. उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के सभी उम्मीदवारों से अपील की है कि वे मतगणना केंद्रों को छोड़कर नहीं जायें. उम्मीदवारों और पोलिंग एजेंट्स के साथ की थी मीटिंग मतगणना से एक दिन पहले ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी के साथ सभी 291 उम्मीदवारों और पोलिंग एजेंट्स के साथ वर्चुअल मीटिंग की थी. मीटिंग में सभी एजेंट्स को यही निर्देश दिये गये थे कि वे तब तक मतगणना केंद्र से बाहर न जायें, जब तक विजेता उम्मीदवार को सर्टिफिकेट नहीं मिल जाता. बंगाल की समाचारें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें Mamata Banerjee: ममता बनर्जी ने किया था 226 सीटें जीतने का दावा टीएमसी कल तक दावे कर रह थी कि इस बार उसे 226 सीटों पर जीत मिलेगी. इस बार की जीत 2021 के चुनाव से भी प्रचंड जीत होगी. लेकिन, चुनाव के नतीजे इसके विपरीत आये. भाजपा 190 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाये हुए और टीएमसी 215 से घटकर 96 सीटों पर आ गयी है. इसे भी पढ़ें बंगाल चुनाव 2026: काउंटिंग से पहले भवानीपुर में हाई-वोल्टेज ड्रामा, ममता बनर्जी ने खुद संभाला मोर्चा, पढ़ें बवाल की इनसाइड स्टोरी बंगाल में कौन बनेगा मुख्यमंत्री? शुभेंदु अधिकारी का पलड़ा क्यों है सबसे भारी? क्या खत्म हो जायेगा अभिषेक बनर्जी का नेतृत्वक करियर? पढ़ें पूरा विश्लेषण बंगाल में क्यों ढहा ‘दीदी’ का किला? बेरोजगारी और आरजी कर कांड समेत इन मुद्दों ने पलटी ममता की सत्ता The post ममता बनर्जी की पहली प्रतिक्रिया- काउंटिंग सेंटर में हमारे लोगों को रोका गया, घर के बाहर लगे जय श्रीराम के नारे appeared first on Naya Vichar.

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मिलिए साउथ सुपरस्टार थलापति विजय की फैमिली से, खो दी थी छोटी बहन

थलापति विजय की पर्सनल लाइफ अक्सर सुर्खियों में रहती है. अब जब सबकी निगाहें उनके नेतृत्वक करियर पर टिकी हैं, तो आइए जानते हैं उनकी पर्सनल लाइफ के बारे में. उनकी फैमिली में कौन कौन है. थलापति, जिनका जन्म जोसेफ विजय चन्द्रशेखर के रूप में हुआ था, एक प्रसिद्ध फिल्म निर्माता एस ए चन्द्रशेखर के पुत्र हैं. उन्होंने अपने निर्देशन की शुरुआत अवल ओरु पचाई कुझानथाई (1978) से की और उनकी सफल फिल्म सत्तम ओरु इरुट्टाराई (1981) थी. शोभा चन्द्रशेखर विजय की मां शोबा चन्द्रशेखर एक प्लेबैक सिंगर हैं. उनकी पहली फिल्मी गाने का नाम महाराजा ओरु महारानी था, जो फिल्म इरु मालार्गल से था. विद्या चंद्रशेखर विजय की एक छोटी बहन थी जिसका नाम विद्या था. अज्ञात चिकित्सा कारणों से दो वर्ष की आयु में ही उसका निधन हो गया. बताया जाता है कि उसकी मृत्यु का विजय पर गहरा प्रभाव पड़ा. संगीता सोरनलिंगम श्रीलंका में जन्मीं संगीता सोरनलिंगम ने 1999 में विजय से शादी की. श्रीलंका के एक तमिल व्यापारी परिवार से ताल्लुक रखने वाली संगीता अभिनेता की बहुत बड़ी फैन थीं और उनसे मिलने के लिए लंदन से चेन्नई आईं. दोनों अक्सर मिलते रहे और उन्हें प्यार हो गया. जेसन संजय विजय और संगीता ने 2000 में अपने पहले शिशु, बेटे जेसन संजय का स्वागत किया. जेसन ने फिल्म G.O.A.T में अपने पिता के साथ काम किया था. वह एक उभरते हुए निर्देशक भी हैं. दिव्या साशा विजय और संगीता की दूसरी संतान दिव्या साशा हैं. अपने भाई के विपरीत, वह मीडिया से दूर रहती हैं और फिलहाल अपनी पढ़ाई पर फोकस कर रही हैं. तृषा कृष्णन संग डेटिंग रूमर्स फिलहाल विजय को लेकर अफवाहें है कि वह तृषा कृष्णन को डेट कर रहे हैं. हाल ही के दिनों में दोनों की डेटिंग को लेकर कई अफवाहें सामने आई थी. हालांकि स्टार्स ने अभी तक कुछ रिएक्ट नहीं किया है. यह भी पढ़ें- ‘राजा शिवाजी’ का जलवा, ‘पैट्रियट’ की कमाई में गिरावट, ‘एक दिन’ रही कमजोर The post मिलिए साउथ सुपरस्टार थलापति विजय की फैमिली से, खो दी थी छोटी बहन appeared first on Naya Vichar.

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क्या खत्म हो जायेगा अभिषेक बनर्जी का राजनीतिक करियर? पढ़ें पूरा विश्लेषण

Abhishek Banerjee Political Future: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 हिंदुस्तानीय जनता पार्टी और तृणमूल कांग्रेस दोनों के लिए अहम था. सबसे अहम था बंगाल की चीफ मिनिस्टर ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के लिए. अभिषेक के लिए यह अग्निपरीक्षा थी, जिसमें वह फेल होते नजर आ रहे हैं. बंगाल चुनाव 2026 के रुझान बता रहे हैं कि बीजेपी आ रही है, टीएमसी जा रही है. इस बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि अभिषेक बनर्जी का अब क्या होगा? उनका पॉलिटिकल करियर क्या खत्म हो जायेगा? नेतृत्वक विश्लेषकों की मानें, तो ये नतीजे केवल यह तय नहीं करेंगे कि राज्य में किसकी प्रशासन बनेगी, यह तृणमूल कांग्रेस (TMC) के ‘युवराज’ के नेतृत्वक जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट भी साबित होगा. बुआ ममता बनर्जी की विरासत को पूरी तरह से संभालने के लिए तैयार अभिषेक के लिए यह चुनाव लिटमस टेस्ट था. नेतृत्वक विश्लेषकों की मानें, अभिषेक बनर्जी पार्टी के सबसे बड़े रणनीतिकार माने जाते थे. उन्हें इस चुनाव में बड़ी जिम्मेदारी मिली थी और माना जा रहा था कि अगर टीएमसी लगातार चौथी बार जीती, तो दीदी की जगह ‘भाईपो’ चीफ मिनिस्टर बन सकते हैं, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. अभिषेक ने पार्टी के कई पुराने दिग्गजों की छुट्टी करके युवा चेहरों को टिकट देकर बड़ा जोखिम लिया था. हालांकि, उनका यह फैसला पार्टी पर भारी पड़ गया. दक्षिण बंगाल (TMC का गढ़) की पूरी जिम्मेदारी अभिषेक के कंधों पर थी. यहां भाजपा और वामपंथ के बढ़ते प्रभाव को रोकना उनकी साख का सवाल था. वह अपनी साख नहीं बचा पाये. खुद को बेहद आक्रामक नेता के तौर पर पेश करने वाले अभिषेक बनर्जी ने SIR और मतदाता सूची विवाद पर न केवल बीजेपी, बल्कि चुनाव आयोग और केंद्र प्रशासन पर जमकर हमला बोला था. उनके आक्रामक रुख ने भाजपा के ‘हिंदुत्व’ कार्ड की काट खोजने की कोशिश की, लेकिन मतदाताओं को उनका यह रवैया पसंद नहीं आया. अभिषेक बनर्जी के लिए सबसे बड़ी चुनौती भाजपा के शुभेंदु अधिकारी हैं. संदेशखाली जैसी घटनाओं के बाद मचे बवाल को शांत करने और स्त्री सुरक्षा के मुद्दे पर डैमेज कंट्रोल की कमान अभिषेक ने खुद संभाली थी. भवानीपुर में ममता बनर्जी ने शुभेंदु अधिकारी पर बढ़त बना ली है, लेकिन नंदीग्राम में टीएमसी शुभेंदु को रोकने में नाकाम दिख रही है. कुल मिलाकर अब तक के परिणाम यह बताते हैं कि अभिषेक ने खुद को जिस तरह से पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के रूप में पेश करने की कोशिश की, उसमें वह फेल रहे. उम्मीद की जा रही थी कि वह ममता बनर्जी की जगह लेंगे और बंगाल के नये ‘किंग’ बनकर उभरेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. The post क्या खत्म हो जायेगा अभिषेक बनर्जी का नेतृत्वक करियर? पढ़ें पूरा विश्लेषण appeared first on Naya Vichar.

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असम में ‘तीर-धनुष’ की गूंज: मजबात में JMM को 26 हजार से ज्यादा वोट, जानें अन्य सीटों का हाल

Assam Election Result 2026, गुवाहाटी/रांची: असम विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना के ताजा आंकड़ों ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के लिए उत्साहजनक संकेत दिए हैं. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ‘एकला चलो’ रणनीति रंग लाती दिख रही है. ताजा रुझानों के अनुसार, JMM न केवल अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है, बल्कि मजबात और डिगबोई जैसी सीटों पर दूसरे स्थान पर बरकरार रहकर मुकाबले को रोचक बना दिया है. मजबात और डिगबोई सीट से झामुमो का अच्छा प्रदर्शन मजबात और डिगबोई से झामुमो के लिए अच्छी समाचार सामने आ रही है. जहां पार्टी के उम्मीदवार दूसरे स्थान पर हैं. इन सीटों पर ये अच्छे वोट हासिल करते दिखाई पड़ रहे हैं. मजबात सीट से प्रीति रेखा बारला ने 26,252 वोट हासिल किए हैं और डिगबोई से हिंदुस्तान नायक ने भी सबको चौंकाते हुए 6,433 वोट पाकर दूसरे स्थान पर बने हुए हैं. Also Read: असम चुनाव में ‘तीर-धनुष’ की दहाड़: दो सीटों पर दूसरे नंबर पर JMM, जानें बाकी सीटों का हाल अन्य सीटों पर JMM उम्मीदवारों का स्कोरकार्ड भेरगांव: प्रभात दास पानिका – 10,997 वोट मारगेरिटा: जरनैल मिंज – 6,846 वोट रंगापाड़ा: मैथ्यू टोपनो – 4,810 वोट चबुआ: भूपेन सिंह मुरारी – 4,190 वोट बरचला: अबुल माजन – 3,748 वोट बिस्वनाथ: तेहारु गौर – 3,581 वोट सोनारी: बलदेव तेली – 3,432 वोट खुमटाई: अमित नाग – 3,039 वोट नहरकटिया: संजय बाघ – 2,754 वोट तिंगखोंग: महाबीर बास्के – 2,619 वोट डुलियाजान: पीटर मिंज – 1,919 वोट Also Read: Assam Election 2026 Results Live: असम में BJP बंपर जीत की ओर, दो तिहाई बहुमत पक्का, हिमंता का जादू बरकरार, जोरहाट में गोगोई पीछे The post असम में ‘तीर-धनुष’ की गूंज: मजबात में JMM को 26 हजार से ज्यादा वोट, जानें अन्य सीटों का हाल appeared first on Naya Vichar.

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असम चुनाव में कैसा है ‘Gen-Z’ स्वैग, देखें गुवाहाटी सीट पर कुनकी चौधरी का हाल

Assam Election Result 2026: सोशल मीडिया पर छाए रहने वाली कुनकी चौधरी और अनुभव के दम पर स्पोर्ट्स रहे BJP उम्मीदवार विजय कुमार गुप्ता के बीच मुकाबला अब दिलचस्प मोड़ पर पहुंच चुका है.ताजा रुझानों के मुताबिक दो राउंड की गिनती के बाद विजय कुमार गुप्ता करीब 10582 वोट के साथ आगे चल रहे हैं, जबकि कुनकी चौधरी लगभग 7603 वोट पर पीछे हैं. यानी करीब 2979 वोट का अंतर बन चुका है. Assam Election Result 2026: कौन हैं कुनकी चौधरी? कुनकी चौधरी असम चुनाव में एक युवा नेता के तौर पर सामने आई हैं. वो महज 27 साल की हैं. वो असम विधानसभा चुनाव 2026 में गुवाहाटी सेंट्रल सीट से मैदान में उतरी हैं. कुनकी असम जातीय परिषद (AJP) की उम्मीदवार हैं. कम उम्र होने की वजह से वो इस चुनाव की सबसे युवा उम्मीदवारों में गिनी जा रही हैं. खास बात ये है कि उनका मुकाबला एक ऐसे नेता से है जो नेतृत्व में काफी अनुभवी हैं. Assam Election Result 2026 Live Updates यहां चेक करें चुवान प्रचार के दौरान कुनकी चौधरी View this post on Instagram A post shared by Kunki Chowdhury (@kunkichowdhuryofficial) कुनकी चौधरी ने इस चुनाव को पूरी तरह डिजिटल बना दिया था. उनकी रील्स, क्रिएटिव वीडियो और युवाओं से कनेक्ट करने का तरीका काफी चर्चा में रहा. लेकिन अब सवाल उठ रहा है कि क्या सोशल मीडिया का ये क्रेज वोट में तब्दील नहीं हो पाया? Gen Z उम्मीदवार पर नजर युवा वोटर्स कुनकी के साथ नजर आए. चुनाव प्रचार के दौरान वो फ्लड, ट्रैफिक, पार्किंग और रोजगार जैसे मुद्दे कुनकी ने अच्छे से उठाए. कुनकी के साथ चुनाव प्रचार में कई दिग्गज नेता नजर आए. विजय गुप्ता पुराने खिलाड़ी गुवाहाटी सेंट्रल सीट पर BJP उम्मीदवार विजय कुमार गुप्ता ने एकदम क्लासिक पॉलिटिकल स्टाइल अपनाया. कम शोर, ज्यादा ग्राउंड वर्क. लोकल नेटवर्क और पुराने वोटर्स पर मजबूत पकड़ ने उन्हें शुरुआती बढ़त दिला दी. यही अनुभव अब उनके काम आता दिख रहा है. यह भी पढ़ें: असम चुनाव में ‘तीर-धनुष’ की दहाड़: दो सीटों पर दूसरे नंबर पर JMM, जानें बाकी सीटों का हाल The post असम चुनाव में कैसा है ‘Gen-Z’ स्वैग, देखें गुवाहाटी सीट पर कुनकी चौधरी का हाल appeared first on Naya Vichar.

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विजय थलापति ने तमिलनाडु की राजनीति का बदला रंग, द्रविड़ पहचान पर हावी हुआ विकास का सपना

Tamil Nadu Election Results : तमिलनाडु विधानसभा चुनाव का परिणाम बहुत ही चौंकाने वाला है. एक्टर विजय की पार्टी टीवीके ने जिस तरह रूझानों में बढ़त बनाई है और डीएमके का जो हाल हुआ है, उसकी उम्मीद नहीं थी. हालांकि एग्जिट पोल ने टीवीके की उपस्थिति को भांप लिया था और एक्सिस माई इंडिया ने तो यहां तक कहा था कि टीवीके तमिलनाडु में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरेगी. तमिलनाडु की नेतृत्व में डीएमके ने किया था बड़ा बदलाव तमिलनाडु की नेतृत्व एक बार फिर बड़े बदलाव की ओर जाती दिख रही है. तमिलनाडु की नेतृत्व में बड़ा बदलाव 1967 में हुआ था जब पहली बार डीएमके ने कांग्रेस को हराया था और सीएन अन्नादुरई के नेतृत्व में प्रशासन बनाई थी. उस वक्त डीएमके को 138 सीटें मिलीं थी. यह दौर था एक क्षेत्रीय पार्टी के उभार का. डीएमके के उभार के साथ ही तमिलनाडु में द्रविड़ पहचान की नेतृत्व शुरू हुई थी. द्रविड़ पहचान, भाषा और संस्कृति से कनेक्ट का एक नया दौर शुरू हुआ था. हिंदी का विरोध हुआ था और यह कहा गया था कि हिंदी तमिलों पर थोपी जा रही है. उस वक्त ओबीसी और दलितों की नेतृत्व भी प्रदेश में शुरू हुई थी. टीवीके ने आम जनता के मुद्दों से चलाई परिवर्तन की हवा एक्टर विजय ने जब टीवीके (Tamilaga Vettri Kazhagam) की स्थापना की और आम जनता के मुद्दों को लेकर विधानसभा चुनाव में एंट्री मारी, तो सबको यही लगा कि तमिलनाडु की नेतृत्व में यह सबकुछ नहीं चलता है. यहां तो द्रविड़ पहचान और उनकी भाषा से जुड़े मुद्दों को उठाने वाली पार्टी की चुनाव जीतती है, लेकिन विजय इस पहचान से अलग नेतृत्व कर रहे थे. विजय ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बात की और DMK–AIADMK पर अप्रत्यक्ष हमला करते हुए सिस्टम बदलने की बात की. उन्होंने युवाओं की शिक्षा, रोजगार की बात की. वे नेतृत्व में युवाओं की भागीदारी की बात करते हैं. साथ ही वे हिंदी विरोध पर उतना जोर नहीं देते हैं. वे सुशासन पर फोकस करते हैं, जो भ्रष्टाचार से मुक्त हो. सामाजिक समानता की बात करते हैं. विजय भविष्य की नेतृत्व कर रहे हैं, जो विकास पर आधारित है. विजय, बीजेपी विरोध की बात नहीं करते. ये भी पढ़ें : विजय थलापति का व्हिसलपोडु, तमिलनाडु की नेतृत्व में हड़कंप; सबसे बड़ी पार्टी बन सकती है TVK Tamil Nadu Puducherry Election Results LIVE : थलापति विजय की तमिलनाडु में जय-जय सबको पछाड़ कर रुझानों में बने नंबर वन The post विजय थलापति ने तमिलनाडु की नेतृत्व का बदला रंग, द्रविड़ पहचान पर हावी हुआ विकास का सपना appeared first on Naya Vichar.

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