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May 4, 2026

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‘तारक मेहता’ में बार-बार बदला चेहरा, 20 से ज्यादा रोल निभाने वाला ये कलाकार कौन है?

Taarak Mehta Ka Ooltah Chashmah: पिछले 17 सालों से दर्शकों का एंटरटेन कर रहा शो ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ आज भी लोगों का पसंदीदा सिटकॉम बना हुआ है. इस शो ने कई कलाकारों को घर-घर में पहचान दिलाई है. जहां जेठालाल और दया जैसे किरदार आइकॉनिक बन चुके हैं. वहीं कुछ कलाकार ऐसे भी हैं जिन्होंने अलग-अलग भूमिकाओं के जरिए दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई है. ऐसे ही एक एक्टर हैं निलेश भट्ट, जिन्होंने 20 से ज्यादा रोल शो में निभाए हैं. निलेश भट्ट ने निभाए ये किरदार ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ में जहां ज्यादातर कलाकार एक ही किरदार में नजर आते हैं, वहीं निलेश भट्ट ने इस ट्रेंड को तोड़ा है. उन्होंने इस शो में अब तक 20 से ज्यादा अलग-अलग किरदार निभाए हैं. हर बार नए अंदाज और नई पहचान के साथ स्क्रीन पर आना उनकी खासियत है. निलेश ने भिड़े के रिश्तेदार से लेकर बाबू चिपके, चंदू चिल्लर, राजू भाई खाऊ गली और सुंदर के दोस्त जैसे रोल निभाए हैं. इनमें बाबू चिपके का किरदार खास तौर पर पसंद किया गया, जो अक्सर जेठालाल और गड़ा परिवार के साथ नजर आता है. इसके अलावा इंसान सिंह नाम का मजाकिया शराबी किरदार और हरियाली होटल के मैनेजर की भूमिका भी निभाई है. उन्होंने आत्माराम तुकाराम भिड़े के कई रिश्तेदारों का रोल भी निभाया है. थिएटर से टीवी तक का सफर एक्टिंग में आने से पहले निलेश भट्ट एक कपड़ों का बिजनेस भी चलाते थे. बाद में उन्होंने एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में करियर बनाने का फैसला लिया. टीवी पर पहचान बनाने से पहले निलेश भट्ट ने करीब 12 साल तक गुजराती थिएटर में काम किया है. वह ‘क्राइम पेट्रोल’ और ‘सावधान इंडिया’ जैसे क्राइम शोज में नजर आ चुके हैं. वह अक्षय कुमार और परेश रावल की फिल्म ‘ओएमजी: ओह माय गॉड!’ और अभिषेक बच्चन और ऋषि कपूर की फिल्म ‘ऑल इज वेल’ में भी काम कर चुके हैं. यह भी पढ़ें– ‘राजा शिवाजी’ ने दो दिनों में किया कितना बिजनेस? सामने आए आंकड़े The post ‘तारक मेहता’ में बार-बार बदला चेहरा, 20 से ज्यादा रोल निभाने वाला ये कलाकार कौन है? appeared first on Naya Vichar.

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30 साल बाद विधानसभा के रण में, श्मशान में काटी थी रातें, मछली भूनकर खाया, जानें मुर्शिदाबाद के ‘रॉबिनहुड’ की अनसुनी दास्तां

खास बातें 1996 में पहली बार नबग्राम से जीते थे अधीर जब अधीर की आवाज ने जिताया था चुनाव सांसद से फिर विधायक तक का सफर जेल में जिसने इलाज किया, वही बना चुनावी विरोधी अधीर का श्मशान वाला सीक्रेट सिगरेट छोड़ी, अब च्युइंग गम से भी तौबा Adhir Ranjan Chowdhury Election 2026: पश्चिम बंगाल की नेतृत्व में ‘मुर्शिदाबाद के सुल्तान’ कहे जाने वाले अधीर रंजन चौधरी एक बार फिर इतिहास दोहराने की राह पर हैं. ठीक 30 साल पहले उन्होंने पहली बार विधानसभा की दहलीज लांघी थी. अब तीन दशक बाद वह फिर से विधायक बनने की जंग में हैं. 1996 में पहली बार नबग्राम से जीते थे अधीर 1996 में जब वह नबग्राम से जीते थे. तब वह पुलिस से बचने के लिए जिले से बाहर थे. आज समय बदल गया है, लेकिन 70 वर्षीय अधीर का जज्बा और चुनौतियां आज भी वैसी ही हैं. लोकसभा चुनाव में यूसुफ पठान से मिली शिकस्त के बाद, उन्होंने हार नहीं मानी है. अब बहरमपुर की अपनी घरेलू पिच पर नयी पारी स्पोर्ट्सने को तैयार हैं. जब अधीर की आवाज ने जिताया था चुनाव अधीर रंजन चौधरी का नेतृत्वक सफर किसी फिल्मी कहानी जैसा रोमांचक है. 1996 में वामपंथी शासन के दौरान पुलिस उन्हें तलाश रही थी. कांग्रेस नेता सोमेन मित्रा ने उन्हें सुरक्षित ठिकाने पर छिपाया था. अधीर खुद प्रचार करने नहीं जा सके, लेकिन उनके भाषणों की रिकॉर्डिंग गांवों में सुनायी गयी और लोगों ने उन्हें अपना प्रतिनिधि चुन लिया. इसे भी पढ़ें : शुभेंदु अधिकारी भवानीपुर में दोहरायेंगे इतिहास? नंदीग्राम के ‘नायक’ से ममता बनर्जी का सबसे बड़ा ‘दुश्मन’ बनने की पूरी कहानी सांसद से फिर विधायक तक का सफर 1999 में उन्होंने बहरमपुर लोकसभा सीट पर कब्जा किया और लगातार जीतते रहे. 2024 में उन्होंने उन्होंने कहा था कि अगर चुनाव हार गये, तो हारे नेतृत्व छोड़कर बादाम बेचेंगे, लेकिन जनता के प्यार ने उन्हें फिर से चुनावी मैदान में खींच लिया. बंगाल की समाचारें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें जेल में जिसने इलाज किया, वही बना चुनावी विरोधी अधीर रंजन चौधरी के जीवन में विडंबनाओं की कमी नहीं है. 1994 में एक हत्या के मामले में अधीर को बहरमपुर जेल में रहना पड़ा था. जेल में वह बीमार पड़ गये. तब डॉक्टर निर्मल चंद्र साहा ने उनका इलाज किया था. दिलचस्प बात यह है कि पिछले लोकसभा चुनाव में वही डॉक्टर साहा बीजेपी के टिकट पर अधीर के खिलाफ चुनाव लड़ रहे थे. इसे भी पढ़ें : बंगाल चुनाव : 4 मई को खत्म होगा वामपंथ का वनवास या ढह जायेगा अस्तित्व? क्या कहते हैं सियासी समीकरण Adhir Ranjan Chowdhury Election 2026: अधीर का श्मशान वाला सीक्रेट अधीर रंजन के संघर्ष के दिनों की एक ऐसी सच्चाई है, जिसे सुनकर हर कोई दंग रह जाता है. 1994 में एक सीपीआईएम कार्यकर्ता की हत्या के आरोप में जब उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ, तो वह पुलिस से बचने के लिए तारापीठ श्मशान में छिप गये. पेट भरने के लिए मछली भूनकर खाते थे. वह दौर उनके जीवन का सबसे कठिन समय था, जिसने उन्हें और मजबूत बना दिया. इसे भी पढ़ें : बंगाल में 5 मई के बाद देख लेंगे… वाली धमकी से सहमे ग्रामीण, फालता में सड़क पर उतरी सैकड़ों स्त्रीएं सिगरेट छोड़ी, अब च्युइंग गम से भी तौबा 70 की उम्र में भी अधीर रंजन खुद को बेहद फिट रखते हैं. डेढ़ दशक पहले तक धूम्रपान करते थे. एक बार जब सिगरेट छोड़ी, तो फिर कभी कभी स्मोकिंग नहीं की. वह च्युइंग गम चबाने लगे. अब उन्होंने उसे भी पूरी तरह बंद कर दिया है. मुर्शिदाबाद की नेतृत्व में अधीर का कद ऐसा है कि उन्हें चाहने वाले आज भी उन्हें अपना ‘रॉबिनहुड’ मानते हैं. इसे भी पढ़ें बंगाल चुनाव में वोटिंग माइग्रेशन का स्पोर्ट्स, क्या खास प्लान के तहत बदली इलेक्टोरल डेमोग्राफी? लाठी चलाने में माहिर और ड्रैगन फ्रूट की खेती का विचार, जानें बीजेपी के ‘गेमचेंजर’ दिलीप घोष की अनसुनी दास्तां ममता बनर्जी को लड़ाई, लड़ाई, लड़ाई चाई : नंदीग्राम की हार के बाद भवानीपुर में ‘फाटाफाटी स्पोर्ट्सा’, 60 हजार का टार्गेट मौसम की तरह बदली सियासत, विधानसभा, लोकसभा और राज्यसभा जाने वाली इकलौती नेता, कांग्रेस में वापसी का क्या है स्पोर्ट्स? The post 30 साल बाद विधानसभा के रण में, श्मशान में काटी थी रातें, मछली भूनकर खाया, जानें मुर्शिदाबाद के ‘रॉबिनहुड’ की अनसुनी दास्तां appeared first on Naya Vichar.

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GK Question: राजा, महराजा और सम्राट में क्या है अंतर? नहीं जानते होंगे आप

GK Question: कई बार बहुत सारे शब्द एक जैसे लगते हैं, लेकिन उनका मतलब अलग-अलग होता है. आम बोलचाल में आप किसी भी तरह इन शब्दों को यूज करें चलता है. लेकिन अगर आप भाषा के प्रोफेशनल हैं या फिर लोगों के बीच बोलना आपका काम है तो फिर एक-एक शब्द का सही मतलब पता होना चाहिए. राजा (King), महराजा (Emperor) और सम्राट (Monarch) ये तीनों ही शब्द का मतलब एक-सा लगता है. लेकिन आज हम आपको तीनों के बीच का अंतर बताएंगे. क्या है Monarch का मतलब? प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए इनका सही अंतर समझना बेहद जरूरी है. सबसे पहले बात करें Monarch की, तो यह एक व्यापक (general) शब्द है. Monarch का मतलब होता है ऐसा शासक, जिसके पास किसी देश या राज्य की सर्वोच्च सत्ता होती है. इसमें King, Queen, Emperor या Empress सभी शामिल हो सकते हैं. यानी Monarch कोई विशेष पद नहीं, बल्कि एक श्रेणी (category) है. King का मतलब भी जान लीजिए अब बात करें King की. King आमतौर पर किसी एक देश या राज्य का शासक होता है. यह पद वंशानुगत (hereditary) होता है, यानी राजा का पद परिवार में आगे बढ़ता है. इतिहास में कई प्रसिद्ध King हुए हैं, जिन्होंने अपने-अपने राज्यों पर शासन किया. Emperor का मतलब वहीं Emperor का पद King से बड़ा माना जाता है. Emperor आमतौर पर एक साम्राज्य (Empire) का शासक होता है, जिसमें कई राज्य या क्षेत्र शामिल होते हैं. दूसरे शब्दों में, Emperor के अधीन कई King भी हो सकते हैं. यही वजह है कि Emperor की शक्ति और अधिकार King की तुलना में अधिक व्यापक होते हैं. अगर आसान तरीके से समझें तो Monarch एक छतरी शब्द है, King एक राज्य का शासक और Emperor कई राज्यों के समूह यानी साम्राज्य का शासक होता है.प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे UPSC, SSC और अन्य प्रशासनी एग्जाम में इस तरह के जनरल नॉलेज के सवाल अक्सर पूछे जाते हैं. इसलिए इन बेसिक लेकिन महत्वपूर्ण शब्दों को समझना जरूरी है. यह भी पढ़ें- हिंदुस्तान का सबसे गर्म शहर कौन सा? जानिए कहां पड़ती है सबसे ज्यादा गर्मी The post GK Question: राजा, महराजा और सम्राट में क्या है अंतर? नहीं जानते होंगे आप appeared first on Naya Vichar.

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विधानसभा चुनाव रिजल्ट: कौन जीतेगा केरल? त्रिकोणीय है मुकाबला

Kerala Assembly Elections Result : मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के मुताबिक मतगणना की पूरी तैयारी हो चुकी है. सोमवार (4 मई) सुबह 8 बजे से काउंटिंग शुरू होगी. इसके लिए 43 जगहों पर 140 काउंटिंग सेंटर बनाए गए हैं. कुल 15,464 कर्मचारियों को तैनात किया गया है, जिनमें 140 निर्वाचन अधिकारी, 1,340 अतिरिक्त अधिकारी, 4,208 माइक्रो ऑब्जर्वर, 4,208 सुपरवाइजर और 5,563 काउंटिंग असिस्टेंट शामिल हैं. सबसे पहले डाक मतपत्रों की होगी गिनती मतगणना के दौरान स्ट्रॉन्ग रूम को अधिकारियों, सुरक्षाकर्मियों और उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में खोला जाएगा. सबसे पहले डाक मतपत्रों की गिनती होगी, जो कुल वोटों का करीब 1.36% हिस्सा हैं. मतगणना के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम मतगणना के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. काउंटिंग सेंटरों पर राज्य पुलिस के साथ केंद्रीय बलों की 25 कंपनियां तैनात हैं. अधिकारियों के मुताबिक, चुनाव के बाद किसी भी तरह की हिंसा रोकने के लिए पूरे राज्य में निगरानी बढ़ा दी गई है और पुलिस हर गतिविधि पर नजर रख रही है. यह भी पढ़ें : West Bengal Election Result 2026 LIVE: बंगाल में TMC vs BJP, सीटों की गिनती आज, कौन बना रहा प्रशासन, देखें हर अपडेट केरल में करीब 79.63% लोगों ने वोट डाला केरल में बदलते नेतृत्वक माहौल के बीच तीनों गठबंधनों (एलडीएफ,यूडीएफ और एनडीए) के लिए ये नतीजे काफी अहम हैं. यहां कुल 2.71 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें से करीब 79.63% लोगों ने 9 अप्रैल को 140 सीटों पर वोट डाला. इन सभी सीटों के लिए कुल 883 उम्मीदवार मैदान में थे, जिससे मुकाबला काफी दिलचस्प बन गया है. The post विधानसभा चुनाव रिजल्ट: कौन जीतेगा केरल? त्रिकोणीय है मुकाबला appeared first on Naya Vichar.

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