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August 27, 2026

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Kiara Advani Net Worth: एक फिल्म के 3 करोड़, आलीशान घर-लग्जरी कारें… इतनी है Toxic एक्ट्रेस की नेटवर्थ

Kiara Advani Net Worth: कियारा आडवाणी की लेटेस्ट फिल्म टॉक्सिक – ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स’ बॉक्स ऑफिस पर गदर मचा रही है. फिल्म ने इतिहास रचते हुए 101 करोड़ का कलेक्शन कर कई रिकॉर्ड तोड़ दिए. इसमें यश संग उनके रोमांटिक सीन्स सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहे हैं. Kiara Advani Net Worth: कितने करोड़ की मालकिन हैं कियारा आडवाणी 2024 की फाइनेंशियल एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कियारा आडवाणी करीब 40 करोड़ रुपये की मालकिन है. उनकी कमाई में फिल्मों से मिलने वाली फीस, ब्रांड एंडोर्समेंट और दूसरी प्रोपर्टी शामिल है. रिपोर्ट के अनुसार, एक फिल्म के लिए एक्ट्रेस करीब 3 करोड़ रुपये फीस चार्ज करती हैं, जबकि एक ब्रांड एंडोर्समेंट से उनकी कमाई लगभग 1.5 करोड़ रुपये लेती हैं. View on Instagram ये भी पढ़ें: Yash Net Worth: कभी 50 रुपया रोज कमाते थे यश, आज करोड़ों की दौलत के मालिक, देखें टॉक्सिक स्टार का स्वैग Kiara Advani Properties: कियारा आडवाणी का आलीशान घर टॉक्सिक स्टार कियारा आडवाणी के पास मुंबई के महालक्ष्मी इलाके में करीब 3,500 स्क्वायर फीट का आलीशान घर है. मैजिकब्रिक्स की एक रिपोर्ट में इस प्रॉपर्टी की कीमत करीब 15 करोड़ रुपये बताई गई है. अभिनेत्री के पास बांद्रा के पॉश पाली हिल इलाके में भी एक सी-फेसिंग अपार्टमेंट है, जहां वह अपने पति सिद्धार्थ मल्होत्रा के साथ रहती हैं. View on Instagram View on Instagram Kiara Advani Car Collection: लग्जरी गाड़ियों की मालकिन हैं कियारा आडवाणी GQ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, उनके कार कलेक्शन में Audi A8L, जिसकी कीमत करीब 1.58 करोड़ रुपये है, Mercedes-Benz E220D करीब 71.79 लाख रुपये, BMW X5 लगभग 77.90 लाख रुपये और BMW 530D करीब 74.50 लाख रुपये की कारें शामिल हैं. वहीं पर्सनल लाइफ की बात करें तो कियारा ने एक्टर सिद्धार्थ मल्होत्रा के साथ 7 फरवरी 2023 को शादी की थी. दोनों ने राजस्थान के जैसलमेर में ग्रैंड वेडिंग की थी. शादी के करीब दो साल बाद 2025 में कियारा और सिद्धार्थ एक प्यारी सी बेटी के पैरेंट्स बने, जिसका नाम सारायाह रखा गया है. यश की टॉक्सिक में उन्होंने नादिया का किरदार निभाया है. View on Instagram The post Kiara Advani Net Worth: एक फिल्म के 3 करोड़, आलीशान घर-लग्जरी कारें… इतनी है Toxic एक्ट्रेस की नेटवर्थ appeared first on Naya Vichar.

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RRB NTPC CBT 2 Result 2026 हुआ जारी, 5,810 पदों पर होगी भर्ती, ऐसे चेक करें अपना रोल नंबर

RRB NTPC Graduate CBT 2 Result 2026: रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) ने आरआरबी NTPC ग्रेजुएट लेवल CBT 2 परीक्षा का रिजल्ट 27 अगस्त 2026 को जारी कर दिया है. जिन कैंडिडेट्स ने 10 जुलाई 2026 को आयोजित RRB NTPC Graduate Stage 2 परीक्षा में भाग लिया था, वे अब RRB की ऑफिशियल वेबसाइट rrbcdg.gov.in पर जाकर अपना रिजल्ट और जोन वाइज मेरिट लिस्ट चेक या डाउनलोड कर सकते हैं. आइए इस बारे में और डिटेल में जानते हैं. RRB NTPC Graduate CBT 2 Result 2026 Important Dates: जानिए इंपोर्टेंट डेट्स RRB NTPC Graduate भर्ती प्रक्रिया के लिए ऑनलाइन आवेदन 21 अक्टूबर 2025 से शुरू हुए थे, जो 27 नवंबर 2025 तक जारी थी. इसके बाद फॉर्म में सुधार के लिए करेक्शन विंडो 30 नवंबर से 9 दिसंबर 2025 तक खोली गई थी. इस भर्ती के तहत प्रथम चरण की CBT-1 परीक्षा 16 मार्च से 27 मार्च 2026 तक आयोजित की गई थी. CBT-1 की आंसर की 6 अप्रैल 2026 को जारी हुई और इसका रिजल्ट 11 जून 2026 को घोषित किया गया. CBT-1 में सफल कैंडिडेट्स के लिए CBT-2 परीक्षा 10 जुलाई 2026 को आयोजित की गई थी. इसके बाद CBT-2 की आंसर की 15 जुलाई 2026 को जारी की गई. अब रेलवे भर्ती बोर्ड ने 27 अगस्त 2026 को CBT-2 परीक्षा का रिजल्ट जारी कर दिया है. RRB NTPC Graduate CBT 2 Result 2026 Ranchi Official Notification Check Here RRB NTPC Recruitment Vacancy and Age Limit: कितने पोस्ट पर है वैकेंसी और क्या है एज लिमिट? RRB NTPC ग्रेजुएट लेवल भर्ती 2026 के माध्यम से कुल 5,810 पदों पर होनी है. इन पदों के लिए आवेदन करने वाले कैंडिडेट्स की उम्र कम से कम 18 वर्ष और अधिकतम एज 33 वर्ष निर्धारित की गई थी. हालांकि, रिजर्व कैटेगरी के कैंडिडेट्स को रेलवे भर्ती बोर्ड के नियमों के अनुसार एज लिमिट में छूट दी जाएगी. Check RRB Zone Wise Vacancy Details Official Notification Check Here RRB NTPC Recruitment Education Qualification: इस भर्ती के लिए क्या है एजुकेशन क्वालिफिकेशन? एजुकेशन क्वालिफिकेशन की बात करें, तो कैंडिडेट्स के पास हिंदुस्तान में किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की डिग्री या उसके समकक्ष एलिजिबिलिटी होना जरूरी है. वहीं, कुछ पदों के लिए कंप्यूटर पर हिंदी या अंग्रेजी टाइपिंग की एक्सपीरिएंस भी हाेना जरूरी है. इस बारे में और अधिक डिटेल्स आप RRB की ऑफिशियल वेबसाइट rrbcdg.gov.in पर जाकर देख सकते हैं. ये भी पढ़ें: BSFC Bharti 2026: बिहार स्टेट फूड कॉर्पोरेशन में निकली भर्ती, असिस्टेंट मैनेजर और क्लर्क के लिए आवेदन शुरू, जानें सैलरी और जरूरी नियम RRB NTPC Recruitment Selection Process: क्या है सिलेक्शन प्रोसेस? कैंडिडेट्स का सिलेक्शन कई चरणों की परीक्षा प्रक्रिया के आधार पर किया जाता है. सिलेक्शन प्रोसेस में सबसे पहले कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT-1) और इसके बाद (CBT-2) शामिल है. संबंधित पद के अनुसार कैंडिडेट्स को स्किल टेस्ट, टाइपिंग टेस्ट या एप्टीट्यूड टेस्ट के लिए भी बुलाया जा सकता है. इसके बाद सफल कैंडिडेट्स का डाॅक्यूमेंट वेरिफिकेशन और मेडिकल परीक्षा आयोजित की जाएगी. ये भी पढ़ें: RRB NTPC UG रिजल्ट के बाद अब जारी हुआ Scorecard, ऐसे चेक करें अपना नंबर How to Check Result: कैसे चेक करें अपना रिजल्ट? RRB (अपने संबंधित क्षेत्रीय RRB) की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं. होमपेज पर, “Result / CEN Notifications” सेक्शन पर क्लिक करें. “NTPC Graduate Level CBT-II Result 2026” रिजल्ट PDF खुल जाएगी. इसमें आपको अपना राॅल नंबर चेक करना होगा. आपका इसमें आपका भी राॅल नंबर दिखाई देता है, तो आप क्वालिफाइड हैं. रिजल्ट PDF डाउनलोड करें और उसका प्रिंटआउट लें. ये भी पढ़ें: 10वीं पास के लिए रेलवे में नौकरी का मौका, ITI वालों को भी मौका, यहां देखें पूरी डिटेल The post RRB NTPC CBT 2 Result 2026 हुआ जारी, 5,810 पदों पर होगी भर्ती, ऐसे चेक करें अपना रोल नंबर appeared first on Naya Vichar.

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चीनी हुई महंगी तो खरीदने पर भी ब्रेक, Blinkit से DMart तक लगी लिमिट

चीनी की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ना शुरू कर दिया है. सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंता और त्योहारों से पहले बढ़ती मांग के बीच अब कई क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और बड़े रिटेल स्टोर चीनी की खरीद पर लिमिट लगा रहे हैं. BigBasket, Blinkit, Zepto और Swiggy Instamart जैसे प्लेटफॉर्म ने कुछ इलाकों में तय मात्रा से ज्यादा चीनी खरीदने पर रोक लगाई है. वहीं, DMart और Reliance Retail जैसे बड़े रिटेलर्स ने भी कुछ मामलों में खरीद की सीमा तय की है. 26 अगस्त को देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत ₹65.05 प्रति किलो पहुंच गई, जो करीब एक महीने पहले ₹48 प्रति किलो थी. आखिर कितनी महंगी हुई चीनी? चीनी के दामों में हाल के हफ्तों में तेज बढ़ोतरी हुई है. प्रशासनी आंकड़ों के मुताबिक, 20 जुलाई 2026 को चीनी की औसत कीमत ₹48.18 प्रति किलो थी, जो 20 अगस्त तक बढ़कर ₹55.70 प्रति किलो हो गई. यानी एक महीने में करीब 16% की तेजी. वहीं, 26 अगस्त तक ऑल-इंडिया औसत खुदरा कीमत ₹65.05 प्रति किलो पहुंच गई. थोक बाजार में भी चीनी करीब ₹60.36 प्रति किलो बिक रही है, जबकि एक महीने पहले इसका भाव करीब ₹45 प्रति किलो था. BigBasket-Blinkit पर कितनी खरीद सकते हैं? खरीद की लिमिट हर प्लेटफॉर्म और इलाके में अलग-अलग है. कई जगह ग्राहकों को किसी खास पैक की सिर्फ एक या दो यूनिट ही खरीदने का विकल्प मिल रहा है. Blinkit: दिल्ली-NCR में कुछ ब्रांड के 5 किलो वाले पैक की खरीद एक पैक प्रति ट्रांजैक्शन तक सीमित है. BigBasket: कुछ ब्रांड की खरीद अधिकतम छह 1 किलो पैक तक सीमित बताई गई है. Swiggy Instamart: दिल्ली-NCR के कुछ इलाकों में एक ब्रांड के सिर्फ दो 1 किलो पैक खरीदे जा सकते हैं, जबकि दूसरे ब्रांड के चार 5 किलो पैक तक की सीमा है. Zepto: कुछ इलाकों में स्टॉक संभालने के लिए इसी तरह की खरीद सीमा लागू की गई है. ये भी पढ़ें: अंडा भी हुआ महंगा, सालभर में 40% बढ़े दाम, सर्दियों में और बढ़ सकती है टेंशन DMart और Reliance ने क्यों लगाई सीमा? रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ मामलों में DMart और Reliance जैसे रिटेलर्स ने प्रति ग्राहक करीब 2-3 किलो चीनी की खरीद सीमा तय की है. इसका मकसद उपलब्ध स्टॉक को संभालना और एक साथ ज्यादा खरीदारी की वजह से कमी जैसी स्थिति से बचना है. हालांकि, एक बड़े चीनी ब्रांड के अधिकारी के मुताबिक, फिलहाल बाजार में स्टॉक खत्म होने जैसी स्थिति नहीं है. त्योहारों से पहले क्यों बढ़ा दबाव? चीनी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ने की एक बड़ी वजह उत्पादन और खपत का अंतर है. ISMA के अनुमान के मुताबिक, 2025-26 मार्केटिंग ईयर में एथेनॉल के लिए डायवर्जन के बाद देश में नेट चीनी उत्पादन करीब 279 लाख टन रह सकता है. सीजन की शुरुआत में करीब 50 लाख टन ओपनिंग स्टॉक था, जबकि सालाना घरेलू खपत करीब 280-285 लाख टन आंकी गई है. सितंबर के आखिर तक क्लोजिंग स्टॉक करीब 35 लाख टन रहने का अनुमान है. अब त्योहारों के दौरान मिठाइयों और दूसरी चीजों की मांग बढ़ने से कीमतों पर और दबाव पड़ सकता है. ऐसे में फिलहाल खरीदारों के लिए सलाह यही है कि जरूरत के हिसाब से खरीदारी करें, क्योंकि अलग-अलग इलाकों और प्लेटफॉर्म पर खरीद की सीमा अलग हो सकती है. ये भी पढ़ें: Sugar Price: 7 दिन में ₹11 महंगी हुई चीनी, जानें आपके राज्य में क्या है ताजा भाव The post चीनी हुई महंगी तो खरीदने पर भी ब्रेक, Blinkit से DMart तक लगी लिमिट appeared first on Naya Vichar.

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पिता दूसरों के खेतों में करते हैं मजदूरी, बेटी ने 4 गोल्ड मेडल किए अपने नाम, 10 साल पहले छोड़ा था गांव

UP Success Story : मंजिल हासिल करने के लिए हालात चाहे कितने भी मुश्किल क्यों न हों, मेहनत और हौसले के आगे हर चुनौती छोटी पड़ जाती है. सीतापुर की प्रभा चंद्रा ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है. दूसरों के खेत बंटाई पर लेकर खेती करने वाले पिता की बेटी प्रभा ने बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में अपनी प्रतिभा का परचम लहराया है. 29 अगस्त को होने वाले विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह से पहले प्रभा ने चार गोल्ड मेडल अपने नाम किए हैं. पढ़ाई के लिए 10 साल पहले छोड़ा गांव सीतापुर की सिधौली तहसील के भेड़ड्या गांव की रहने वाली प्रभा चंद्रा पांच भाई-बहनों में चौथे नंबर पर हैं. करीब 10 साल पहले उन्होंने अपने भाई-बहनों के साथ बेहतर पढ़ाई के लिए गांव छोड़ दिया था. परिवार लखनऊ में किराये के मकान में रहने लगा, जहां रहकर प्रभा ने अपनी पढ़ाई जारी रखी. पिता निर्मल चंद्रा दूसरों के खेत बंटाई पर लेकर खेती करते हैं. सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने बच्चों की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी. मां रेनू ने भी पति का साथ दिया और बच्चों की शिक्षा के लिए लगातार संघर्ष किया. बीए और एमए में टॉप कर रचा इतिहास प्रभा ने बीबीएयू के सेटेलाइट सेंटर अमेठी से वर्ष 2024 में बीए में टॉप किया था. इसके बाद वर्ष 2026 में उन्होंने एमए इतिहास में भी शानदार प्रदर्शन किया. खास बात यह है कि प्रभा ने एमए इतिहास में एससी श्रेणी के साथ-साथ ओपन कैटेगरी में भी टॉप किया. उनकी इस उपलब्धि के लिए उन्हें दीक्षांत समारोह में गोल्ड मेडल से सम्मानित किया जाएगा. चार गोल्ड मेडल के साथ आरडी सोनकर अवॉर्ड प्रभा की उपलब्धि सिर्फ तीन गोल्ड मेडल तक सीमित नहीं है. उन्हें विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित आरडी सोनकर अवॉर्ड के लिए भी चुना गया है. यह पुरस्कार सोशल साइंस स्कूल में पढ़ाए जाने वाले पांचों विषयों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी विद्यार्थी को दिया जाता है. प्रभा ने इन सभी विषयों में टॉप करके यह उपलब्धि भी अपने नाम कर ली. भाई-बहनों ने भी पढ़ाई में बनाई पहचान प्रभा के परिवार में शिक्षा को लेकर खास माहौल रहा है. उनके बड़े भाई ने आईटीआई पूरी करने के बाद ट्रेनिंग शुरू कर दी है. बड़ी बहन फूड टेक्नोलॉजी में एमएससी करने के बाद नौकरी कर रही हैं. दूसरी बड़ी बहन ने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया है. वहीं, छोटे भाई ने लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की है. पांचों भाई-बहनों ने अपनी-अपनी पढ़ाई में आगे बढ़ने की कोशिश की है. अब पीएचडी के बाद IAS बनने का सपना चार गोल्ड मेडल हासिल करने वाली प्रभा अब आगे की पढ़ाई जारी रखना चाहती हैं. उनका लक्ष्य पीएचडी करने के बाद सिविल सेवा परीक्षा में शामिल होना है. इसके लिए उन्होंने अभी से तैयारी शुरू कर दी है. प्रभा का कहना है कि उनका सपना आईएएस अधिकारी बनकर माता-पिता का नाम रोशन करना है. वह अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता के संघर्ष और त्याग को देती हैं. पिता की मेहनत और मां के सहयोग ने दिखाई राह प्रभा बताती हैं कि बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए उनके पिता ने दूसरों के खेतों में मेहनत की. मां ने भी हर कदम पर उनका साथ दिया. परिवार की आर्थिक स्थिति सीमित होने के बावजूद माता-पिता ने बच्चों की पढ़ाई को प्राथमिकता दी. प्रभा की कहानी उन हजारों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के कारण अपने सपनों को छोटा समझने लगते हैं. उनका संदेश भी यही है कि मुश्किल दौर हमेशा नहीं रहता. मेहनत और धैर्य के साथ आगे बढ़ने पर हालात बदले जा सकते हैं. सोशल मीडिया पर लिखा- कुछ दिनों की बात है अपनी उपलब्धि और संघर्ष के बीच प्रभा का सोशल मीडिया स्टेटस भी काफी कुछ कहता है. उन्होंने लिखा था बस कुछ दिनों की बात है यह वक्त भी गुजर जाएगा. उनकी सफलता बताती है कि कठिन परिस्थितियों के बीच भी उम्मीद और मेहनत का साथ नहीं छोड़ना चाहिए. गांव से निकलकर विश्वविद्यालय में चार गोल्ड मेडल तक का सफर प्रभा की लगन और परिवार के त्याग की कहानी है. Also read : अमेरिका में गर्लफ्रेंड की हत्या कर हिंदुस्तान भाग आया सॉफ्टवेयर इंजीनियर, आगरा में पकड़ा गया, जाने पूरा मामला The post पिता दूसरों के खेतों में करते हैं मजदूरी, बेटी ने 4 गोल्ड मेडल किए अपने नाम, 10 साल पहले छोड़ा था गांव appeared first on Naya Vichar.

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Mahindra Thar 3-Door Facelift हुई स्पॉट, नए अलॉय व्हील्स और LED लाइट्स के साथ बदला-बदला दिखा लुक

Mahindra Automotive देश की बड़ी SUV कंपनियों में से एक है. कंपनी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कुछ नए मॉडल लॉन्च किए थे. अब दिवाली के मौके पर भी Mahindra कुछ नया लाने की तैयारी कर रही है. इसी बीच, नई Thar 3-डोर फेसलिफ्ट की टेस्टिंग के दौरान दो गाड़ियां एक साथ नजर आई हैं. इन्हें देखकर लगता है कि नई Thar लगभग तैयार हो चुकी है. खास बात यह है कि नई Thar 3-डोर का लुक अब 5-डोर वाली Thar ROXX जैसा ही दिखाई दे सकता है. कैमरे में कैद हुई Thar 3-डोर फेसलिफ्ट Mahindra Thar 3-डोर फेसलिफ्ट का स्पाई वीडियो The Path Finder ने अपने इंस्टाग्राम पेज पर शेयर किया है. वीडियो में सड़क किनारे दो टेस्ट म्यूल खड़े नजर आ रहे हैं. दोनों SUV के फ्रंट और रियर हिस्से पर कैमोफ्लाज किया गया था, जबकि नई डिजाइन वाले अलॉय व्हील्स भी देखने को मिले. खास बात यह रही कि इनके बॉडी के बाकी हिस्से को बिना किसी कवर के रखा गया था, जिससे SUV के डिजाइन में होने वाले बदलावों की हल्की झलक मिलती है. View on Instagram नई LED हेडलाइट्स और बदली ग्रिल आएगी नजर नई Thar facelift में सबसे बड़ा बदलाव इसके फ्रंट डिजाइन में देखने को मिल सकता है. टेस्टिंग के दौरान नजर आई SUV में सर्कुलर LED हेडलाइट्स के साथ LED DRLs दिखाई दिए हैं. इसका डिजाइन काफी हद तक Thar ROXX जैसा लगता है. इससे पहले सामने आए टेस्ट म्यूल्स में Thar ROXX जैसी ग्रिल भी देखने को मिली थी. हालांकि, हाल ही में स्पॉट किए गए टेस्टिंग म्यूल्स में कंपनी ने कुछ अलग डिजाइन वाली ग्रिल यूज की है. इसमें चार मोटी और सिंपल स्लैट्स नजर आ रही हैं. वहीं, फ्रंट बंपर पूरी तरह से कवर होने की वजह से अभी यह साफ नहीं है कि इसके डिजाइन में कोई बदलाव किया गया है या नहीं. एक और खास बात फ्रंट बंपर पर देखने को मिली है. इस बार इसमें पार्किंग सेंसर दिए जाएंगे. नए अलॉय व्हील्स से ज्यादा प्रीमियम हुआ लुक साइड प्रोफाइल की बात करें तो यहां सबसे बड़ा बदलाव नए 18-इंच के 10-स्पोक अलॉय व्हील्स के रूप में देखने को मिलता है. इनका डिजाइन पहले के मुकाबले ज्यादा मॉडर्न है. हालांकि, साइड का बाकी डिजाइन मौजूदा मॉडल जैसा ही रखा गया है. इसमें पहले की तरह चंकी साइड क्लैडिंग, वही दरवाजे, ORVMs और ब्लैक ग्रैब हैंडल मिलते हैं. रूफ डिजाइन में भी कोई बदलाव देखने को नहीं मिला. नई टेललाइट्स के साथ बदलेगा रियर लुक इस स्पॉटिंग में Thar के तीन-दरवाजे वाले फेसलिफ्ट का रियर हिस्सा नजर नहीं आया है. हालांकि, इससे पहले सामने आई स्पाई शॉट्स से इसके रियर डिजाइन में होने वाले बदलावों का अंदाजा लग चुका है. SUV में नई LED टेललाइट्स मिलने की उम्मीद है. इसके अलावा, नया रियर बंपर भी दिया जाएगा, जिसमें रिवर्स पार्किंग सेंसर मिलेंगे. इन बदलावों के अलावा रियर का बाकी डिजाइन मौजूदा मॉडल जैसा ही रहने वाला है. ये भी पढ़ें: Alto की साइज जितनी Suzuki ने पेश की 310km रेंज वाली इलेक्ट्रिक कार, फीचर्स भी हैं खास The post Mahindra Thar 3-Door Facelift हुई स्पॉट, नए अलॉय व्हील्स और LED लाइट्स के साथ बदला-बदला दिखा लुक appeared first on Naya Vichar.

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IND vs SL 2nd Test Day 5 Live: पांचवें दिन के आखिरी सेशन का खेल शुरू, सोनल दिनुशा ने जड़ा शतक

कोलंबो टेस्ट के आखिरी दिन श्रीलंका दूसरी पारी में 378/8 के स्कोर पर है और हिंदुस्तान से 165 रन आगे है. सोनल दिनूशा शतक के काफी करीब है. The post IND vs SL 2nd Test Day 5 Live: पांचवें दिन के आखिरी सेशन का स्पोर्ट्स शुरू, सोनल दिनुशा ने जड़ा शतक appeared first on Naya Vichar.

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Nepal Flood Live: नेपाल बाढ़ में 165 शव बरामद, 800 से ज्यादा लापता, UP-बिहार में अलर्ट

Nepal Flood Live: नेपाल में भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ में कई लोगों की जान चली गई है. तेज जलप्रवाह और बाढ़ के बाद यूपी-बिहार में भी अलर्ट जारी किया गया है. अब तक करीब 165 शव बरामद हुए हैं, जबकि 800 से ज्यादा लोग लापता हैं. बाढ़ से बुनियादी ढांचे को भी बहुत नुकसान पहुंचा है. काठमांडू पोस्ट के मुताबिक नौ जलविद्युत परियोजनाएं और कमर्शियल बैंकों के नौ ब्रांच तबाह हो गए हैं. जबकि 19 पुल और करीब 40 किलोमीटर राजमार्ग बह गए हैं. The post Nepal Flood Live: नेपाल बाढ़ में 165 शव बरामद, 800 से ज्यादा लापता, UP-बिहार में अलर्ट appeared first on Naya Vichar.

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IND vs SL 2nd Test Day 5 Live: श्रीलंका का स्कोर 276/6, ऑलआउट करने के लिए भारत को चाहिए 4 विकेट

कोलंबो टेस्ट के आखिरी दिन श्रीलंका दूसरी पारी में 276/6 के स्कोर पर है और हिंदुस्तान से 63 रन आगे है. टीम इंडिया जीत की स्थिति में है, लेकिन बारिश उसकी राह में बाधा बन सकती है. The post IND vs SL 2nd Test Day 5 Live: श्रीलंका का स्कोर 276/6, ऑलआउट करने के लिए हिंदुस्तान को चाहिए 4 विकेट appeared first on Naya Vichar.

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JPSC घोटाला: कोचिंग संस्थान भी CBI की रडार पर, छापेमारी में मिले साक्ष्यों से खुलेंगे ‘सिंडिकेट’ के राज

रांची : JPSC नियुक्ति घोटाले की जांच में अब CBI की रडार पर कोचिंग संस्थान भी आ गये हैं. सीबीआई अब जेपीएससी की 11वीं-13वीं सिविल सेवा परीक्षा में उनकी भूमिका की भी जांच करने में जुट गयी है. ऐसा रांची और हजारीबाग के दो कोचिंग संचालकों के परिसरों में छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेज और साक्ष्यों के आधार पर किया जा रहा है. जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि क्या इन संस्थानों के माध्यम से किसी अभ्यर्थी को गलत तरीके से परीक्षा में सफल कराया गया था. साथ ही कोचिंग संस्थानों से जुड़े किन लोगों के संपर्क जेपीएससी या टीडीपीएल के निदेशक और मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी के कथित सिंडिकेट से थे, इसकी भी पड़ताल की जा रही है. साक्षात्कार में सफलता के लिए 15 लाख की डील ज्ञात हो कि अभय तिवारी ने पूछताछ में सीबीआई को बताया था कि जेपीएससी की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा में साक्षात्कार में सफल कराने के लिए प्रति अभ्यर्थी 15 लाख रुपये लिये गये थे. जांच में यह बात भी सामने आयी है कि कथित सिंडिकेट की पहुंच जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते और पूर्व सदस्य डॉ अजीता भट्टाचार्य और डॉ जमाल अहमद तक थी. कोचिंग संचालकों और आरोपियों के कनेक्शन की जांच कोचिंग संचालकों के अभय तिवारी या अन्य आरोपियों से संबंध की हो रही जांच पतंजलि कोचिंग के रवि कुमार, टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह और कोचिंग संचालक आदित्य पांडेय के नाम भी प्रकरण में सामने आये हैं. सीबीआई के अनुसार जांच में यह आरोप भी सामने आया है कि जेपीएससी की पूर्व सदस्य डॉ अजीता भट्टाचार्य साक्षात्कार में अभ्यर्थियों को सफल कराने के लिए अपने पीए ब्रजराम के माध्यम से पैसे लेती थीं. दस्तावेजों से कड़ियां जोड़ रही CBI वहीं जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते द्वारा मुख्य सचिव के आवासीय कार्यालय के कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेंद्र के माध्यम से पैसे लिये जाने की बात सामने आयी है. हालांकि इन आरोपों की सत्यता की अभी जांच की जा रही है. छापेमारी में मिले दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर सीबीआई अब इन कड़ियों को जोड़ने में जुटी है. The post JPSC घोटाला: कोचिंग संस्थान भी CBI की रडार पर, छापेमारी में मिले साक्ष्यों से खुलेंगे ‘सिंडिकेट’ के राज appeared first on Naya Vichar.

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Smash the Patriarchy 2 : जब गाली बनी Gen Z की स्लैंग, तो लड़कियों के लिए क्यों बदल जाता है पैमाना?

ऐसे में जब Gen Z लड़कियों की जुबान से बिना कॉमा-फुलस्टॉप के गालियां निकलती हैं, तो कई लोगों को यह किसी कल्चरल शॉक से कम नहीं लगता. सड़क पर कोई लड़की गाली दे दे तो बात सिर्फ उसकी भाषा तक नहीं रहती, उसके चरित्र से होते हुए परिवार की परवरिश और संस्कार तक पहुंच जाती है. वहीं यही काम कोई लड़का करे तो अक्सर उसे लड़कों की आदत, दोस्तों की भाषा या मस्ती कहकर टाल दिया जाता है. सवाल यह है कि गाली गलत है या उसका जेंडर तय करता है कि उसे कितना गलत माना जाएगा? क्या लड़कियों की जुबान पर लगाई गयी पाबंदियां उन्हें विद्रोही बना रही हैं? या फिर सोशल मीडिया और Gen Z की स्लैंग कल्चर ने भाषा की उन सीमाओं को ही बदल दिया है, जिन्हें पिछली पीढ़ियां मर्यादा मानती थीं? इस कहानी को समझने के लिए हमने अलग-अलग शहरों की Gen Z लड़कियों से बात की. उनकी बातें बताती हैं कि वे गाली को सही नहीं ठहरातीं, लेकिन यह सवाल जरूर उठाती हैं कि भाषा और चरित्र का पैमाना लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग क्यों हो? पहले Gen Z को समझें लखनऊ की शाम्भवी मुखर्जी जो पेशे से एक टीचर हैं कहती हैं कि इस विषय को समझने के लिए पहले आपको जेन जी को समझना होगा. जेन जी दो तरह के हैं-एक जो मेट्रो सिटी में रहते हैं और दूसरे वो जो स्माॅल टाउन में रहते हैं. आप देखेंगे कि जो स्माॅल टाउन के जेन जी हैं, उनके लैंग्वेज में अभद्र शब्द कम होते हैं, जबकि मेट्रो सिटी के जेन जी में ज्यादा होते हैं. यहां यह गौर करने वाली बात भी है कि दोनों के ब्रिंग अप में भी काफी फर्क होता है. किसी को अपने पैरेंट्‌स के साथ ज्यादा समय बिताने का मौका मिलता है और किसी को कम. ऐसे में वे सोशल मीडिया की ओर जाते हैं, जहां अभद्र भाषा और गालियों की भरमार है. अगर बात सिर्फ गाली देने की है, तो इसे ऐसे समझना चाहिए कि हमारे समाज में यह बहुत आम है. शहरी स्त्रीएं भले ही पब्लिक प्लेस में उस तरह से गालियां ना बकती हों, लेकिन गांव की स्त्रीएं, छोटे शहरों की स्त्रीएं काफी पुराने समय से गालियां देती रही हैं. जेंडर बायसनेस ने स्त्रीओं को बनाया rebellious शाम्भवी मुखर्जी कहती हैं कि हमारे समाज में जेंडर बायनेस तो आज भी है, चाहे उसकी वजह कुछ भी हो. मैं इस बात को मानती हूं कि मां-बाप अपनी सुरक्षा के लिए लड़कियों पर बंदिश लगाते हैं, लेकिन कहीं ना कहीं इन्हीं बंदिशों ने लड़कियों को रिबेलियस यानी विद्रोही बना दिया. अगर गाली देना बुरी बात है तो इसके लिए लड़कों को भी रोका जाना चाहिए. सिगरेट पीने से अगर कैंसर होता है, तो यह ज्ञान सिर्फ लड़कियों को नहीं लड़कों को भी देना चाहिए. बस इसी वजह से लड़कियों ने उन मर्यादाओं को तोड़ा, जो उनपर बंदिशें लगा रही थीं. आईआईटी दिल्ली की मुस्कान झा कहती हैं कि गाली देना बुरी बात है यह सबको पता है, लेकिन अगर आप इसे केवल लड़कियों से जोड़ते हैं तो वह सही नहीं लगता है. इसकी वजह यह कि आप इससे स्त्रीओं का कैरेक्टर डिफाइन करने लगते हैं. इसमें लड़का और लड़की का फर्क नहीं किया जाना चाहिए. गाली देना किसी की पर्सनालिटी डिफाइन नहीं करता आईआईटी दिल्ली की मुस्कान कहती हैं कि यहां आने से पहले मैं बहुत संकोची स्वभाव की थी और मुझे ऐसा लगता था कि गाली देने वाला व्यक्ति खराब होता है. आईआईटी दिल्ली आकर मैंने यह जाना कि ऐसा नहीं है, गाली देना अलग बात है और अच्छा इंसान होना अलग. कई लोग ऐसे हैं जो अपनी भाषा में गालियों का प्रयोग नहीं करते, लेकिन उनकी सोच छोटी होती है. लड़कियां जब अपने घरों में रहती हैं ग्रुपिंग के लिए गाली-गलौच की भाषा में बात करते हैं जेन जी मुस्कान कहती हैं कि जेन जी को यह पता है कि भाषा की मर्यादा क्या होती है. हमलोग अपने दोस्तों के साथ बातचीत में दोस्ताना माहौल के लिए गाली-गलौज की भाषा में जरूर बात करते हैं, लेकिन किसी पब्लिक प्लेस में या अपने पैरेंट्‌स के सामने ऐसे बात नहीं करते हैं. हमें पता है कि भाषा की मर्यादा क्या होती है. मुंबई की आरुषि अभी ग्रेजुएशन कर रही हैं वे कहती हैं कि गाली अब बोलचाल का हिस्सा हो गया है. जेन जी जिस माहौल में जिस तरह से पल पढ़ रहे हैं, उन्हें इस तरह की भाषा का प्रयोग करना पड़ता है क्योंकि सब कर रहे हैं. अगर नहीं करेंगे तो उनका मजाक बनेगा. रांची की प्राची भी इस बात को कहती हैं कि अगर आप जेन जी के स्लैंग का प्रयोग नहीं करेंगे तो आप उनके ग्रुप से बाहर हो जाएंगे और आपका मजाक बनेगा. बस इसी चक्कर में वे गालियां देते हैं. सोशल मीडिया ने बिगाड़ी भाषा जंतर मंतर पर प्रदर्शन की तस्वीर (Photo- PTI) आरुषि कहती हैं कि Gen Z के जीवन का बड़ा हिस्सा सोशल मीडिया पर गुजरता है. रील्स, मीम्स, कमेंट्स और चैटिंग में जिस तरह की स्लैंग और बेझिझक भाषा का इस्तेमाल होता है, वह धीरे-धीरे उनकी रोजमर्रा की बातचीत का हिस्सा बन जाती है. शुरुआत में जो शब्द सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित होते हैं, वही दोस्तों के बीच बातचीत में आने लगते हैं और फिर आदत का हिस्सा बन जाते हैं. कई बार ऐसी भाषा को ‘कूल’, बेबाक और ग्रुप में घुलने-मिलने का तरीका भी माना जाता है. यही वजह है कि Gen Z के लिए कुछ ऐसे शब्द, जिन्हें पिछली पीढ़ियां अभद्र मानती थीं, अब सामान्य बोलचाल और स्लैंग का हिस्सा बन चुके हैं. जंतर-मंतर पर जो हुआ वह गलत इस स्टोरी के दौरान नया विचार ने अलग-अलग शहरों की कई Gen Z लड़कियों से बात की. दिलचस्प बात यह रही कि एक भी लड़की ने जंतर-मंतर पर प्रधानमंत्री के प्रति इस्तेमाल की गयी आपत्तिजनक भाषा को सही नहीं ठहराया. उनका साफ कहना था कि असहमति जताने और किसी के लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने के बीच फर्क होना चाहिए. देश के प्रधानमंत्री के खिलाफ इस तरह की टिप्पणी उचित नहीं है-चाहे वह कोई लड़का करे या लड़की. हालांकि, इन लड़कियों ने एक

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