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August 27, 2026

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Nepal Flash Flood: नेपाल की बाढ़ और कैलाश मानसरोवर यात्रा का क्या है कनेक्शन? जानें पूरा मामला

Nepal flash flood Kailash Mansarovar Yatra: नेपाल के रसुवा जिले में बुधवार सुबह आई भीषण फ्लैश फ्लड का असर कैलाश मानसरोवर यात्रा पर भी पड़ा है. तिब्बत जा रहे सैकड़ों तीर्थयात्रियों से संपर्क टूटने की समाचार है, जिनमें बड़ी संख्या हिंदुस्तानीय श्रद्धालुओं की बताई जा रही है. अचानक आई बाढ़ से बढ़ी मुश्किल बताया जा रहा है कि रसुवा जिले में बुधवार सुबह अचानक फ्लैश फ्लड की स्थिति बनी. तेज बहाव और भारी मलबे के कारण कई इलाकों में संपर्क व्यवस्था प्रभावित हुई. कैलाश मानसरोवर जाने वाले तीर्थयात्री भी इसी क्षेत्र से होकर आगे बढ़ रहे थे. ऐसे में अचानक आई बाढ़ ने उनकी यात्रा को मुश्किल में डाल दिया. ये भी पढ़ें: Nepal Flood Live: नेपाल बाढ़ में 162 लोगों की मौत, 750 से ज्यादा लापता, UP-बिहार में अलर्ट करीब  750 से ज्यादा लापता नेपाल फ्लैश फ्लड के बाद लगभग  750 से ज्यादा लापता होने से उनके परिवारों की चिंता बढ़ा दी है. इन यात्रियों में अधिकांश हिंदुस्तानीय बताए जा रहे हैं. इसके अलावा करीब 93 नेपाली तीर्थयात्री भी प्रभावित बताए गए हैं. फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता यात्रियों का पता लगाना और उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना है. कैलाश मानसरोवर यात्रा से क्यों जुड़ा है मामला? कैलाश मानसरोवर यात्रा धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. हिंदुस्तान समेत कई देशों से श्रद्धालु हर साल कैलाश पर्वत और मानसरोवर के दर्शन के लिए यात्रा करते हैं. नेपाल का रसुवा क्षेत्र तिब्बत की सीमा से जुड़ा होने के कारण इस यात्रा के मार्ग में महत्वपूर्ण स्थान रखता है. यही वजह है कि रसुवा में आई बाढ़ का सीधा असर तीर्थयात्रियों की आवाजाही पर पड़ा है. परिवारों की बढ़ी चिंता तीर्थयात्रियों से संपर्क टूटने की समाचार सामने आने के बाद उनके परिजनों में चिंता का माहौल है. प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की ओर से प्रभावित लोगों की जानकारी जुटाने तथा राहत एवं बचाव प्रयासों पर ध्यान दिया जा रहा है. हालांकि, यात्रियों की वास्तविक स्थिति को लेकर आधिकारिक और विस्तृत जानकारी का इंतजार किया जा रहा है. ऐसे में नेपाल की फ्लैश फ्लड सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा नहीं रही, बल्कि इसने कैलाश मानसरोवर यात्रा पर भी बड़ा असर डाला है. यात्रियों की सुरक्षित वापसी अब सबसे अहम चिंता बनी हुई है. The post Nepal Flash Flood: नेपाल की बाढ़ और कैलाश मानसरोवर यात्रा का क्या है कनेक्शन? जानें पूरा मामला appeared first on Naya Vichar.

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Nepal Flood Live: नेपाल फ्लैश फ्लड में 160 मौत, 750 से ज्यादा लापता, UP-बिहार में अलर्ट

Nepal Flood Live: नेपाल में भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ में कई लोगों की जान चली गई है. तेज जलप्रवाह और बाढ़ के बाद यूपी-बिहार में भी अलर्ट जारी किया गया है. बाढ़ के कारण 160 लोग मारे गए हैं और 133 हिंदुस्तानीय नागरिकों समेत 750 से ज्यादा लोग लापता हैं. बाढ़ से बुनियादी ढांचे को भी बहुत नुकसान पहुंचा है. काठमांडू पोस्ट के मुताबिक नौ जलविद्युत परियोजनाएं और कमर्शियल बैंकों के नौ ब्रांच तबाह हो गए हैं. जबकि 19 पुल और करीब 40 किलोमीटर राजमार्ग बह गए हैं. The post Nepal Flood Live: नेपाल फ्लैश फ्लड में 160 मौत, 750 से ज्यादा लापता, UP-बिहार में अलर्ट appeared first on Naya Vichar.

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हिमालय में भूकंप से कैसे आती है फ्लैश फ्लड, जानिए डेंजर जोन में क्यों रहता है नेपाल

नेपाल और तिब्बत की सीमा पर बुधवार को आई अचानक बाढ़ ने हिमालयी इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें एक बार फिर सामने ला दी है. हालांकि इस घटना ने कई सवाल भी छोड़े हैं कि फ्लैश फ्लड यानी अचानक आने वाली बाढ़ इतनी खतरनाक क्यों होती है? क्या भूकंप से भी बाढ़ आ सकती है? और नेपाल की पहाड़ी जमीन इस खतरे को क्यों बढ़ा देती है? आइए आसान भाषा में समझते हैं. फ्लैश फ्लड क्या होती है? फ्लैश फ्लड का मतलब होता है बहुत कम समय में अचानक से आने वाली तेज बाढ़. इसमें नदी या नाले का पानी अचानक इतना बढ़ जाता है कि लोगों को संभलने या सुरक्षित जगह जाने का ज्यादा समय नहीं मिलता. फ्लैश फ्लड यानी बहुत कम समय में अचानक और तेज रफ्तार से आने वाली बाढ़ पहाड़ों में इसका खतरा और ज्यादा होता है. यहां जमीन पर ढलान ज्यादा होती है. इसलिए ऊपर से आने वाला पानी तेजी से नीचे की तरफ जाता है. इस दौरान पानी अपने साथ मिट्टी, पत्थर, पेड़ और दूसरे मलबे को भी बहाकर लाता है. इस वजह से फ्लैश फ्लड सिर्फ पानी की बाढ़ नहीं रहती, बल्कि एक खतरनाक धारा बन जाती है. ये भी पढ़ें: Nepal Flood Video: जल प्रलय का खौफनाक मंजर, वायरल वीडियो में देखिए कैसे हैं नेपाल के हालात भूकंप से बाढ़ कैसे आती है? भूकंप सीधे तौर पर बाढ़ नहीं लाता. लेकिन वह ऐसी घटनाओं को जन्म दे सकता है, जो बाद में अचानक बाढ़ की वजह बन जाएं. हिमालय के ऊंचे पहाड़ों पर बड़ी मात्रा में बर्फ, ग्लेशियर और चट्टान मौजूद हैं. इनमें से कुछ हिस्से काफी अस्थिर होते हैं. जब भूकंप के तेज झटके आते हैं तो पहाड़ की ये अस्थिर चट्टानें और बर्फ खिसक सकती हैं. अगर बड़ी मात्रा में बर्फ, पत्थर और मिट्टी अचानक नीचे गिरने लगे तो इसे हिमस्खलन या चट्टानी मलबे का बहाव कहा जाता है. और अगर यह मलबा किसी नदी या झील में गिर जाए तो इसके बाद एक और खतरनाक स्थिति बन सकती है. नदी में मलबा गिरने के बाद क्या होता है? पहाड़ से आया भारी मलबा नदी और झील के दबाव को बढ़ाने का काम करता है और कभी कभी यह उसके पानी के बहाव को भी रोक देता है. रास्ता रूक जाने पर पानी उसके पीछे जमा होने लगता है. इससे वहां कुछ समय के लिए एक छोटी झील जैसी स्थिति बन सकती है. लेकिन यह कोई पक्का बांध नहीं होता. यह मिट्टी, पत्थर और बर्फ से बना अस्थायी बांध होता है. पानी लगातार जमा होने से उस पर दबाव बढ़ता रहता है. और जब यह अवरोध टूटता है तो पीछे जमा पानी अचानक बहुत तेज रफ्तार से नीचे की ओर बहता है. पानी के साथ पहले से जमा पत्थर और मलबा भी बहने लगता है. यह स्थिति फ्लैश फ्लड को बेहद खतरनाक बना सकती है. हालांकि किसी खास घटना में वास्तव में यही हुआ था या नहीं, इसकी पुष्टि आधिकारिक जांच के बाद की जाती है. ये भी पढ़ें: Nepal flood explained : बर्फ के चट्टान, ग्लेशियर झील या बारिश, नेपाल में बाढ़ की क्या है वजह नेपाल में बाढ़ का खतरा ज्यादा क्यों है? नेपाल की भौगोलिक स्थिति इस खतरे को बढ़ाती है. नेपाल का बड़ा हिस्सा पहाड़ों और हिमालयी क्षेत्र में है. यहां ऊंचे पहाड़ों के बीच कई जगह नदियां बहुत संकरी और गहरी घाटियों से होकर गुजरती हैं. जब अचानक बहुत ज्यादा पानी आता है तो उसे फैलने के लिए ज्यादा जगह नहीं मिलती और पानी संकरी घाटी में तेजी से आगे बढ़ता है. इसके अलावा पहाड़ों की ढलान भी काफी तेज होती है. ऊंचाई से नीचे आते समय पानी की रफ्तार बढ़ती जाती है. पहाड़ों के बाढ़ में सिर्फ पानी का ही खतरा नहीं रहता पहाड़ों में बाढ़ के दौरान सबसे बड़ा खतरा सिर्फ पानी नहीं होता. तेज बहाव नदी के किनारे की मिट्टी और चट्टानों को भी काट देता है. इसके कारण पानी के साथ बड़ी मात्रा में मलबा नीचे आने लगता है. यही मलबा सड़कें बंद कर सकता है, पुलों को नुकसान पहुंचा सकता है और बिजली तथा संचार व्यवस्था को तोड़ सकता है. बचाव दलों के लिए भी ऐसी स्थिति काफी मुश्किल होती है. सड़कें बंद होने पर राहत सामग्री और बचावकर्मी प्रभावित इलाकों तक नहीं पहुंच पाते. खराब मौसम और पहाड़ी इलाकों में हेलीकॉप्टर उतारने की मुश्किल भी चुनौती बढ़ा देती है. ग्लेशियर झील भी बन सकती है खतरे की वजह हिमालय में अचानक बाढ़ का एक और कारण ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड, यानी ग्लेशियर झील का अचानक टूटना हो सकता है. ग्लेशियर के पास बर्फ और पत्थरों के बीच पानी जमा होकर झील बना सकता है. अगर इस झील को रोकने वाला प्राकृतिक बांध टूट जाए तो बड़ी मात्रा में पानी अचानक नीचे की ओर बह सकता है. ऐसी बाढ़ काफी दूर तक असर डाल सकती है और रास्ते में आने वाले गांवों, सड़कों और बिजली परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा सकती है. ये भी पढ़ें: ग्लेशियर झील के कारण नेपाल में तबाही! हिंदुस्तान के लिए क्यों है चिंता का संकेत नेपाल की बाढ़ का असर हिंदुस्तान तक क्यों पहुंचता है? नेपाल की कई बड़ी नदियां आगे चलकर हिंदुस्तान में प्रवेश करती हैं. इसलिए नेपाल के पहाड़ी इलाकों में आई बड़ी बाढ़ का असर हिंदुस्तान के मैदानी इलाकों में भी पड़ सकता है. बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में इन नदियों का पानी पहुंचता है. अगर ऊपर पहाड़ों में नदी का जलस्तर अचानक बढ़ता है तो नीचे के इलाकों में भी बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है. यही वजह है कि हिमालय में होने वाली ऐसी घटनाओं पर सिर्फ नेपाल में ही नहीं, बल्कि हिंदुस्तान के निचले इलाकों में भी नजर रखी जाती है. हालांकि हिमालय में आने वाली फ्लैश फ्लड की हर घटना की वजह भूकंप और उसके बाद होने वाली प्रक्रिया हो, यह जरूरी नहीं है. फ्लैश फ्लड की वजह कभी-कभी भारी बारिश, बादल फटने, ग्लेशियल झील टूटने या दूसरे कारण भी हो सकती है. The post हिमालय में भूकंप से कैसे आती है फ्लैश फ्लड, जानिए डेंजर जोन में क्यों रहता है नेपाल appeared first on Naya Vichar.

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