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August 31, 2026

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IPL 2027 Impact Player Rule: IPL 2027 से खत्म होगा Impact Player Rule? BCCI ने 10 टीमों से मांगा जवाब

IPL 2027 Impact Player Rule: IPL 2027 शुरू होने से पहले ‘इम्पैक्ट प्लेयर नियम को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. हिंदुस्तानीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने लीग की सभी 10 फ्रेंचाइजियों से इस नियम पर उनकी राय मांगी है. टीमों को अपना फीडबैक देने के लिए 31 अगस्त तक का समय दिया गया है. हालांकि, अभी यह तय नहीं हुआ है कि नियम खत्म होगा या जारी रहेगा. अचानक ‘इम्पैक्ट प्लेयर रूल पर क्यों मांगी राय? IPL में फ्रेंचाइजियों से हर सीजन के बाद क्रिकेट ऑपरेशंस से जुड़े मामलों पर फीडबैक लेना सामान्य है. लेकिन इस बार ‘इम्पैक्ट प्लेयर रूल को खास तौर पर शामिल किया गया है. यही वजह है कि IPL 2027 में इस नियम के भविष्य को लेकर चर्चा तेज हो गई है. BCCI ने अपने कम्युनिकेशन में IPL 2026 कैप्टन मीटिंग का भी हवाला दिया है. इसे भी पढ़े- Dwayne Bravo Jersey Number 47 Retired: ड्वेन ब्रावो की No. 47 जर्सी हुई रिटायर, CPL में पहली बार हुआ ऐसा रोहित और अक्षर समेत कई खिलाड़ी कर चुके हैं विरोध रोहित शर्मा, हार्दिक पंड्या और अक्षर पटेल ने नियम पर उठाए सवाल ऑलराउंडर्स की भूमिका घटने को लेकर बढ़ी चिंता नियम से ऑलराउंडर्स के महत्व पर असर पड़ने की बात अक्षर पटेल ने 2026 सीजन से पहले कहा था कि वह इस नियम के पक्ष में नहीं हैं अब सवाल कि क्या इम्पैक्ट प्लेयर नियम स्पोर्ट्स का संतुलन बिगाड़ रहा है? बल्लेबाजों को फायदा, गेंदबाजों पर दबाव? इस नियम की वजह से टीमों को मैच के दौरान अपनी रणनीति बदलने का अतिरिक्त मौका मिलता है. आलोचकों का कहना है कि इससे बल्लेबाजी को फायदा और गेंदबाजों पर दबाव बढ़ सकता है. IPL 2026 में भी कई बड़े स्कोर देखने के बाद बैट और बॉल के बीच संतुलन पर बहस हुई. इसे भी पढ़े- Sri Lanka Women’s Champions Trophy 2027: श्रीलंका से छिनी विमेंस चैंपियंस ट्रॉफी 2027 की मेजबानी, क्या टीम भी होगी बाहर? IPL 2027 में क्या बदलेगा? फिलहाल ‘इम्पैक्ट प्लेयर रूल खत्म होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. BCCI अब फ्रेंचाइजियों की राय इकट्ठा करेगा और उसके बाद अगले सीजन के लिए जरूरी बदलावों पर फैसला लिया जा सकता है. यानी IPL 2027 में यह नियम पहले जैसा रहेगा, बदलेगा या खत्म होगा कि इसका जवाब अभी बाकी है. The post IPL 2027 Impact Player Rule: IPL 2027 से खत्म होगा Impact Player Rule? BCCI ने 10 टीमों से मांगा जवाब appeared first on Naya Vichar.

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Nepal Flood : जिस तरह की झील से नेपाल में आई तबाही, वैसी ही 200 ग्लेशियर लेक भारतीय सीमा में

Nepal Flood : नेपाल-तिब्बत सीमा पर ग्लेशियर टूटने के बाद भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में आयी प्रलयंकारी बाढ़ ने मध्य नेपाल में भीषण तबाही मचाई है. प्रभावित आठ जिलों से अब तक 768 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 2,500 से अधिक लोग अब भी लापता हैं. रुक-रुक कर हो रही भारी बारिश और तिब्बत में नदी के उद्गम के पास नयी अस्थायी झील के उभरने से भोटेकोशी का जलस्तर दोबारा बढ़ने लगा है, जिससे निचले इलाकों में हाइ अलर्ट जारी किया गया है. नेपाल में हुई इस त्रासदी ने हिंदुस्तानीय हिमालयी क्षेत्र में मौजूद प्राकृतिक ‘वाटर बमों’ को लेकर गंभीर खतरे की घंटी बजा दी है. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के वरिष्ठ सलाहकार डॉ भूपेंद्र मिली ने बताया कि हिंदुस्तानीय हिमालयी क्षेत्र में 11 नदी घाटियों में 28,000 ग्लेशियर झीलों में से लगभग 7,500 हिंदुस्तान में हैं. जिनमें से अकेले गंगा बेसिन में 4,700 से अधिक झीलें स्थित हैं. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने इनमें से 195 से 200 झीलों को उच्च जोखिम (ए-श्रेणी) में चिह्नित किया है. समय रहते इनका प्रबंधन नहीं किया गया, तो पहाड़ों के साथ-साथ उत्तर बिहार और उत्तर बंगाल के मैदानी क्षेत्रों में भी अभूतपूर्व जलप्रलय आ सकता है. नेपाल में क्यों हुई इतनी भीषण तबाही? – तिब्बत और नेपाल के बेहद संवेदनशील इलाकों में पर्यावरण और भौगोलिक परिस्थितियों की अनदेखी कर अनियंत्रित निर्माण हुआ. – नदियों के प्राकृतिक बहाव क्षेत्र में बस्तियां बसने और अर्ली वार्निंग सिस्टम (इडब्ल्यूएस) के समय पर काम न करने से पानी व मलबे को निकलने की जगह नहीं मिली, जिससे जान-माल का नुकसान कई गुना बढ़ गया. हिंदुस्तान में कितना है खतरा? – हिंदुस्तानीय हिमालयी क्षेत्र की 11 नदी घाटियों में मौजूद 7,500 ग्लेशियल झीलों में से 195 से 200 झीलों को एनडीएमए ने अति-संवेदनशील (उच्च जोखिम) श्रेणी में चिह्नित किया है. – ये झीलें प्राकृतिक ‘वाटर बम’ की तरह हैं, जहां अत्यधिक बारिश या भूस्खलन होने पर अचानक ग्लेशियल झील विस्फोट बाढ़ (ग्लोफ) आने का गंभीर जोखिम बना रहता है. ये भी पढ़ें: नया विचार की ग्राउंड जीरो रिपोर्ट: ‘पिता नहीं, मां नहीं… बिलख रहे शिशु’; नेपाल कांग्रेस के नेता ने चीन पर लगे आरोपों को किया खारिज हिंदुस्तान के कौन-कौन से इलाके हो सकते हैं प्रभावित? पहाड़ी राज्य : हिमाचल प्रदेश (48 झीलें), सिक्किम (40), लद्दाख (35), अरुणाचल प्रदेश (28), जम्मू एवं कश्मीर (26) और उत्तराखंड (13 झीलें). मैदानी इलाके : नेपाल या सिक्किम की झीलें फटने पर कोसी, गंडक और तीस्ता जैसी नदियों के जरिए उत्तर बिहार (सुपौल, सहरसा, मधुबनी, चंपारण) और उत्तर बंगाल (जलपाईगुड़ी, सिलीगुड़ी, दार्जिलिंग तराई) में लाखों क्यूसेक पानी व गाद आने से तटबंध टूटने का खतरा रहता है. बचाव के लिए क्या प्रबंध किए जा रहे हैं? हैजार्ड जोनिंग मैपिंग : सभी 200 संवेदनशील झीलों के खतरे का दायरा तय किया जा रहा है, ताकि असुरक्षित क्षेत्रों में निर्माण व बसावट रोकी जा सके. इंजीनियरिंग रोकथाम : झीलों के मुहाने पर चेक डैम, ड्रेनेज सिस्टम और पानी को सुरक्षित दिशा में मोड़ने के लिए डिफ्लेक्शन स्ट्रक्चर तैयार किए जा रहे हैं. दो साल में सेंसर नेटवर्क : सैटेलाइट से 24×7 निगरानी के साथ-साथ अगले दो वर्षों में सभी उच्च जोखिम वाली झीलों पर ऑटोमैटिक अर्ली वार्निंग सेंसर लगाने का लक्ष्य है. ये भी पढ़ें: नया विचार ग्राउंड रिपोर्ट: नेपाल में दो जिलों को जोड़ने वाला पुल नदी की तेज धार में बहा, उफान पर त्रिशूली नदी डेटा ग्राफिक्स : किन राज्यो में कितनी झीलों का संकट राज्य / केंद्र शासित प्रदेश उच्च जोखिम वाली झीलें प्रमुख संवेदनशील नदी बेसिन प्रमुख संवेदनशील नदी बेसिन 48 सतलुज, ब्यास, चिनाब सिक्किम 40 तीस्ता बेसिन (साउथ ल्होनक सहित) लद्दाख 35 सिंधु व ज़ांस्कर घाटी अरुणाचल प्रदेश 28 दिबांग व सुबनसिरी जम्मू एवं कश्मीर 26 झेलम व चिनाब बेसिन उत्तराखंड 13 अलकनंदा व भागीरथी बेसिन कुल चिह्नित उच्च जोखिम 195 – 200 गंगा बेसिन में अकेले 4,700 झीलें नेपाल की पनबिजली सुरंगों में 500 से अधिक लापताभोटेकोशी और त्रिशूली में आई बाढ़ से नेपाल के 14 पनबिजली संयंत्र क्षतिग्रस्त हो गये हैं, जिससे नेपाल की 431 मेगावाट (12% से अधिक) बिजली उत्पादन क्षमता ठप हो गयी है. रसुवा और त्रिशूली की भूमिगत सुरंगों में कीचड़ भरने से 500 से अधिक जलविद्युत कर्मचारी व श्रमिक लापता हैं. हिंदुस्तान से पहुंची 11 सदस्यीय विशेषज्ञ टीम त्रिशूली-3ए में रेस्क्यू अभियान चला रही है. कितने मिले, कितने लापता नेपाल में कुल मौतें : 768 तिब्बत (जिरोंग) में मौतें : 07 कुल लापता : 2,500 से अधिक (कम से कम 320 विदेशी नागरिक) लापता हिंदुस्तानीय : 287 हिंदुस्तानीय व 128 हिंदुस्तानीय मूल के लोग सुरक्षित निकाले गये: 4,400 लोग (167 सुरक्षित हिंदुस्तानीय शामिल) 4.5 अरब डॉलर के नुकसान से नेपाल की 10% वित्तीय स्थिति प्रभावित बाढ़ और भूस्खलन से नेपाल को भारी आर्थिक झटका लगा है. बुनियादी ढांचे, जलविद्युत संयंत्रों, सड़कों और रिहायशी इलाकों के तबाह होने से पुनर्निर्माण पर करीब 4.5 अरब डॉलर (लगभग 37,500 करोड़ रुपये) का खर्च आने का अनुमान है, जो देश की वित्तीय स्थिति (जीडीपी) के लगभग 10वें हिस्से के बराबर है. प्रशासन ने संकट से उबरने और पुनर्निर्माण के लिए हिंदुस्तान सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बड़े आर्थिक सहयोग की अपील की है. The post Nepal Flood : जिस तरह की झील से नेपाल में आई तबाही, वैसी ही 200 ग्लेशियर लेक हिंदुस्तानीय सीमा में appeared first on Naya Vichar.

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Janmashtami 2026 Rare Planetary Yog: जन्माष्टमी पर त्रिगुणी महासंयोग, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और भाग्यशाली राशियां

Janmashtami 2026 Rare Planetary Yog: भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि को मनाई जाने वाली जन्माष्टमी का पर्व इस वर्ष बेहद खास माना जा रहा है. 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को देशभर में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा. इस बार अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के संयोग के साथ ग्रहों की अनुकूल स्थिति भी बन रही है, जिसे ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष बताया जा रहा है. अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण अष्टमी, रोहिणी नक्षत्र और मध्यरात्रि के निशीथ काल में हुआ था. वर्ष 2026 में अष्टमी तिथि 4 सितंबर की रात 2:25 बजे से शुरू होकर 5 सितंबर की रात 12:13 बजे तक रहने की बात कही गई है. वहीं, रोहिणी नक्षत्र 4 सितंबर की रात 12:29 बजे से रात 11:04 बजे तक रहेगा. ऐसे में जन्माष्टमी पर तिथि और नक्षत्र का संयोग इसे धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण बना रहा है. निशीथ काल में होगी विशेष पूजा जन्माष्टमी की रात लड्डू गोपाल का अभिषेक कर भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाने की परंपरा है. दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार, 4 सितंबर की रात 11:56 बजे से 5 सितंबर की रात 12:41 बजे तक निशीथ पूजा का मुहूर्त रहेगा. इसकी कुल अवधि करीब 46 मिनट बताई गई है. मध्यरात्रि करीब 12:18 बजे श्रीकृष्ण जन्म का मुख्य क्षण माना गया है. व्रत रखने वाले श्रद्धालु परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार 5 सितंबर को सूर्योदय के बाद पारण कर सकते हैं. ग्रहों की स्थिति भी रहेगी खास ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस जन्माष्टमी पर कई ग्रह अनुकूल स्थिति में रहने वाले हैं. चंद्रमा वृषभ राशि में, गुरु कर्क राशि में और सूर्य सिंह राशि में स्थित बताए जा रहे हैं. शुक्र तुला राशि में रहने की बात कही गई है. मंगल और शुक्र की स्थिति से नवपंचम योग बनने का भी उल्लेख किया गया है. ये भी पढ़ें: Krishna Janmashtami 2026 Date: 4 या 5 सितंबर? जन्माष्टमी की सही तारीख को लेकर न हों कंफ्यूज! जानें मध्यरात्रि पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त मथुरा-वृंदावन में जन्मोत्सव की धूम भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा में मध्यरात्रि के समय भव्य जन्मोत्सव आयोजित किया जाएगा. वृंदावन के प्रमुख मंदिरों में भी महाभिषेक, विशेष पूजा और दर्शन का आयोजन होगा. 5 सितंबर को नंदोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिलेगा. इन 4 राशियों को मिल सकता है विशेष लाभ वृषभ: मानसिक शांति के साथ धन-धान्य में वृद्धि और स्वास्थ्य में सकारात्मक बदलाव के संकेत हैं. कर्क: करियर में प्रगति, आत्मविश्वास में वृद्धि और अचानक धन लाभ के अवसर बन सकते हैं. कन्या: कारोबार में बड़ी डील मिलने की संभावना है. रुके कार्य पूरे होने से आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है. धनु: धार्मिक यात्रा के योग बनेंगे. वैवाहिक जीवन में मधुरता और संतान पक्ष से शुभ समाचार मिल सकता है. ज्योतिषीय भविष्यवाणियां धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं. इन्हें निश्चित भविष्यवाणी के रूप में नहीं लेना चाहिए. The post Janmashtami 2026 Rare Planetary Yog: जन्माष्टमी पर त्रिगुणी महासंयोग, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और भाग्यशाली राशियां appeared first on Naya Vichar.

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रांची में 3 नए फ्लाइओवर का रास्ता साफ, इसी साल शुरू होगा निर्माण

रांची : राजधानी के तीन फ्लाइओवर निर्माण के लिए L&T, HCC, दिनेश चंद्र आर अग्रवाल (डीआरए) इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड, शिवालिया कंस्ट्रक्शन सहित अन्य कंपनियां पहुंची हैं, इन कंपनियों ने टेंडर में भाग लिया है. डीआरए ने राजधानी में दो फ्लाइओवर का काम लिया है. अभी टेंडर का तकनीकी मूल्यांकन हो रहा है, इसके बाद फाइनेंशियल बिड खोली जायेगी. तब तय होगा कि किस कंपनी को कौन सा काम मिला है. इस तरह अब तीनों फ्लाइओवर का टेंडर जल्द फाइनल होगा और इसी साल इन परियोजनाओं पर काम शुरू होगा. राजधानी में एलएंडटी ने सिरमटोली-मेकन फ्लाइओवर का निर्माण कराया है और अब हरमू फ्लाइओवर के टेंडर में भाग लिया है. इस कंपनी ने सिरमटोली-मेकन फ्लाइओवर में ही रेलवे लाइन के ऊपर केबल स्टे ब्रिज का निर्माण कराया था. वहीं DRA ने कांटाटोली फ्लाइओवर का निर्माण कराया है. अक्तूबर 2024 में इसका उद्घाटन कराया गया था. अब डीआरए कंपनी सिरमटोली कनेक्टिंग फ्लाइओवर का भी निर्माण करा रही है. अरगोड़ा, क्रमटोली-चिरौंदी और हरमू फ्लाइओवर का होना है इंजीनियरों का मानना है कि तीनों फ्लाइओवर का निर्माण कठिन है, क्योंकि इसके लिए भूमि सीमित है. साथ ही इन रूट पर ट्रैफिक भी बहुत ज्यादा है. इन सारे मामलों को देखते हुए इसके निर्माण में डिजाइन का खास ध्यान दिया जाना है. करमटोली-चिरौदी फ्लाइओवर निर्माण के लिए ट्रैफिक की बड़ी समस्या झेलनी होगी. खासकर अंतु चौक के आसपास की सड़क संकरी है और पूरा इलाका मार्केट का है. ऐसे में यहां पर काम कराना मुश्किल होगा. वहीं अरोड़ा चौक से चापुटोली के बीच ओल्ड अरगोड़ा चौक के आगे सड़क संकरी है. यहां सड़क पर पाइलिंग व पियर तैयार करना चुनौती होगी. उसी तरह हरमू रोड में अत्यधिक ट्रैफिक है. इस रूट से होकर राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मुख्य न्यायाधीश सहित वीवीआइपी का आवागमन होता है. ऐसे में यहां फ्लाइओवर का काम कराना संकट भरा होगा. पूर्व में रद्द करना पड़ा था फ्लाइओवर का टेंडर हरमू फ्लाइओवर के लिए पूर्व में भी टेंडर हुआ था, लेकिन इसमें एक ही कंपनी ने भाग लिया था. ऐसे में टेंडर को रद्द कर दिया गया था. बाद में फ्लाइओवर के डिजाइन में बदलाव किया गया. मुख्यमंत्री ने इसे अधिक उपयोगी बनाने का निर्देश दिया था. इसके तहत संशोधन कर दो माह पूर्व टेंडर जारी किया गया था, जो अब फाइनल होने की स्थिति में है. ये भी पढ़ें: वेतन गांव के नाम, ड्यूटी शहर में: प्रतिनियुक्ति के स्पोर्ट्स में गांव के स्कूल हुए शिक्षकविहीन The post रांची में 3 नए फ्लाइओवर का रास्ता साफ, इसी साल शुरू होगा निर्माण appeared first on Naya Vichar.

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Nepal Flood: सुरंग में जिंदगी की तलाश, 500 से ज्यादा मजदूर लापता, 275 भारतीयों का भी नहीं मिला सुराग

Nepal Flood: नेपाल में आई भयावह जलप्रलय के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों तक पहुंचने की है. रसुवा और नुवाकोट जिलों की जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले 500 से ज्यादा कर्मचारी और मजदूर अब भी लापता हैं. कई लोगों के परियोजनाओं की सुरंगों के अंदर फंसे होने की आशंका है. वहीं बाढ़ के बाद 275 से ज्यादा हिंदुस्तानीयों का भी अब तक पता नहीं चल पाया है. त्रिशूली-3ए की सुरंग में फंसे लोगों की तलाश तेज बाढ़ प्रभावित नुवाकोट में अपर त्रिशूली-3ए हाइट्रो प्रोजेक्ट की सुरंग में फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए नेपाली सेना ने बचाव अभियान तेज कर दिया है. सेना के इंजीनियर भारी मशीनों और विस्फोट की मदद से मलबे में दबे सुरंग के रास्ते को चौड़ा करने में जुटे हैं. नेपाल विद्युत प्राधिकरण (Nepal Electricity Authority) का अनुमान है कि 60 मेगावाट क्षमता वाली इस परियोजना में करीब 42 तकनीकी कर्मचारी भूमिगत बिजलीघर में मेंटेनेंस का काम कर रहे थे. इसी दौरान बाढ़ आने के बाद उनसे संपर्क टूट गया. सुरंग में बनाया छोटा रास्ता, लेकिन नहीं मिला जवाब नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक 90 सदस्यों वाली संयुक्त बचाव टीम घटनास्थल पर तैनात है. इसमें नेपाली सेना के 66 जवान, सशस्त्र पुलिस बल के 18 कर्मी और नेपाल पुलिस के छह जवान शामिल हैं. रविवार दोपहर तक बचावकर्मी सुरंग के मुख्य हिस्से तक पहुंचे और करीब दो गुणा तीन फुट का रास्ता बनाया. इसके बाद जवान रस्सियों के सहारे अंदर उतरे और फंसे लोगों को आवाज लगाई, लेकिन दूसरी ओर से कोई जवाब नहीं मिला. अब रास्ते को और चौड़ा करने की कोशिश की जा रही है. 9 परियोजनाओं के 537 कर्मचारी अब भी लापता नेपाल के इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के मुताबिक रसुवा और नुवाकोट की नौ जलविद्युत परियोजनाओं के 537 कर्मचारी और मजदूर अब भी लापता हैं. 26 अगस्त को आई बाढ़ के बाद इन परियोजनाओं से कुल 898 लोगों के संपर्क से बाहर होने की जानकारी सामने आई थी. इनमें से 361 लोगों को अब तक बचा लिया गया है. एक सुरंग में करीब 300 लोगों के फंसे होने की आशंका सबसे गंभीर स्थिति रसुवा में स्थित 216 मेगावाट की अपर त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना में बताई जा रही है. यहां करीब 300 लोगों के परियोजना की सुरंग के अंदर फंसे होने की आशंका है. वहीं 22 मेगावाट की चिलिमे हाइड्रो प्रोजेक्ट में आठ लोगों से संपर्क नहीं हो पाया है. परियोजना अधिकारियों को आशंका है कि इनमें से छह कर्मचारी सुरंग के अंदर फंसे हो सकते हैं. इसे भी पढ़ेंः Nepal Flash Floods: बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 788 हुई, भोटेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ने से खतरा मंडराया 275 से ज्यादा हिंदुस्तानीय भी लापता नेपाल में बाढ़ के बाद हजारों लोगों से संपर्क नहीं हो पाया है. अधिकारियों के मुताबिक देश में 591 विदेशियों समेत कुल 2,502 लोग अब भी लापता हैं. हिंदुस्तान के विदेश मंत्रालय ने बताया कि 275 से ज्यादा हिंदुस्तानीय और हिंदुस्तानीय मूल के 128 लोग लापता हैं या उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है. हिंदुस्तानीय और चीनी विशेषज्ञ भी बचाव अभियान में शामिल सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के अभियान में हिंदुस्तान भी नेपाल की मदद कर रहा है. डॉक्टरों, पैरामेडिकल कर्मचारियों और सुरंग विशेषज्ञ इंजीनियरों वाली 11 सदस्यीय हिंदुस्तानीय तकनीकी टीम ने प्रभावित जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों का निरीक्षण किया है. हिंदुस्तानीय विशेषज्ञ नेपाली सेना के साथ मिलकर चिलिमे और लांगटांग क्षेत्रों में काम कर रहे हैं. इसके अलावा चीन के छह सुरंग विशेषज्ञ भी नेपाल पहुंचे हैं और नेपाली सेना की तकनीकी टीम के साथ बचाव की संभावनाओं का आकलन कर रहे हैं. बाढ़ में अब तक 788 लोगों की मौत नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ में मृतकों की संख्या बढ़कर 788 हो गई है. करीब 9,500 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है. नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हिमनद टूटने के बाद पानी, कीचड़ और मलबे का तेज बहाव नीचे की ओर आया था, जिसने कई गांवों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया. Also Read: Nepal Floods: स्कूल की ओर बढ़ रहा था सैलाब, प्रिंसिपल ने ऐसे बचाई 1,643 बच्चों की जान The post Nepal Flood: सुरंग में जिंदगी की तलाश, 500 से ज्यादा मजदूर लापता, 275 हिंदुस्तानीयों का भी नहीं मिला सुराग appeared first on Naya Vichar.

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Bajaj Pulsar N160 खरीदने का बना रहे हैं प्लान? पहले जान लें 3 फायदे और 2 नुकसान

बजाज पल्सर N160 4V SS अपडेटेड N160 रेंज का टॉप वेरिएंट है. इसमें नया 4-वाल्व इंजन, राइड-बाय-वायर टेक्नोलॉजी, 37mm का नया USD फोर्क, 5-इंच का TFT डिस्प्ले और गूगल मैप्स कास्टिंग जैसे फीचर्स दिए गए हैं. यह बाइक पुराने 2-वाल्व N160 मॉडल को बंद करने के बजाय उसके साथ ही बेची जाएगी. आइए जानते हैं कि इस बाइक में क्या खास है और किन वजहों से यह हर किसी के लिए सही नहीं हो सकती है. बजाज पल्सर N160 4V SS खरीदने के कारण Bajaj Pulsar N160 4V: स्मूथ, कंट्रोल करने में आसान और फास्टेस्ट इसका नया 4-वाल्व इंजन सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह परफॉर्मेंस में एक बदलाव लाता है. 165cc क्षमता के साथ यह 9,500rpm पर 18.5hp की पावर देता है. ज्यादा पावर के बावजूद यह इंजन पुराने 2-वाल्व मॉडल की तरह ही काफी स्मूथ है और तेज स्पीड पर भी इसमें हल्का वाइब्रेशन ही महसूस होता है. इसका क्लच भी काफी हल्का है. शहर के ट्रैफिक में कम स्पीड पर इसे चलाना बेहद आरामदायक है, वहीं हाई स्पीड में यह TVS अपाचे RTR 160 4V को कड़ी टक्कर देती है. Bajaj Pulsar N160 4V: TFT डिस्प्ले और बेहतरीन फीचर्स SS मॉडल में 5-इंच का TFT डिस्प्ले मिलता है जो इस सेगमेंट में सबसे ज्यादा फीचर्स देने वाला कंसोल है. इसमें ब्लूटूथ म्यूजिक कंट्रोल, डॉक्यूमेंट स्टोरेज और गूगल मैप्स कास्टिंग जैसी सुविधाएं मिलती हैं. एंड्रॉयड फोन पर गूगल मैप्स कास्टिंग फोन की स्क्रीन ऑफ रहने पर भी आराम से काम करती है. राइड-बाय-वायर टेक्नोलॉजी की वजह से इसमें चार राइडिंग मोड्स मिलते हैं, जो 160cc सेगमेंट में पहली बार दिए गए हैं. सुरक्षा के लिए इसमें डुअल-चैनल ABS और बड़ा 300mm का फ्रंट डिस्क ब्रेक दिया गया है. Bajaj Pulsar N160 4V: किफायती और सही कीमत 1.43 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) की कीमत पर N160 4V SS TVS अपाचे RTR 160 4V के टॉप वेरिएंट से थोड़ी महंगी जरूर है, लेकिन बदले में यह ज्यादा फीचर्स पेश करती है. 4-वाल्व इंजन, राइड-बाय-वायर, USD फोर्क, डुअल-चैनल ABS और एडवांस्ड TFT डिस्प्ले को देखते हुए यह इस सेगमेंट में पैसे की पूरी कीमत वसूल कराती है. ये भी पढ़ें: Bajaj Pulsar 150 vs Suzuki Gixxer 150: इंजन, फीचर्स और कीमत के मामले में कौन-सी बाइक सबसे बेहतर? बजाज पल्सर N160 4V SS खरीदने के नुकसान Bajaj Pulsar N160 4V: थोड़ा हार्ड सस्पेंशन बड़े 37mm USD फोर्क के बावजूद इसका ओवरऑल सस्पेंशन सेटअप पुराने N160 मॉडल की तरह थोड़ा हार्ड ही रखा गया है. यह खराब सडकों को अच्छे से संभाल लेता है और मोड़ पर भी बेहतरीन स्टेबिलिटी देता है, लेकिन TVS अपाचे RTR 160 4V जितना सॉफ्ट और आरामदायक महसूस नहीं होता. जो लोग रोज लंबे सफर पर जाते हैं या बहुत खराब सड़कों पर बाइक चलाते हैं, उन्हें यह सस्पेंशन थोड़ा सख्त लग सकता है. ये भी पढ़ें: नई Bajaj Pulsar 125 अपने पुराने मॉडल से कितनी अलग है? जानें क्या-क्या हुए बदलाव Bajaj Pulsar N160 4V: ज्यादा वजन और मुड़ने में थोड़ी दिक्कत 151 किलोग्राम वजन के साथ N160 4V SS अपनी कैटेगरी की सबसे हल्की बाइक नहीं है. कम स्पीड पर शहर के ट्रैफिक में यह वजन साफ महसूस होता है. इसका टर्निंग रेडियस (मुड़ने का दायरा) भी थोड़ा कम है, जिसकी वजह से तंग गलियों या ट्रैफिक में बाइक को मोडना थोड़ा मुश्किल हो जाता है. यह कमी रोजमर्रा के इस्तेमाल में महसूस हो सकती है. The post Bajaj Pulsar N160 खरीदने का बना रहे हैं प्लान? पहले जान लें 3 फायदे और 2 नुकसान appeared first on Naya Vichar.

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Bihar-Delhi Bus: दशहरा-दीपावली-छठ पर दिल्ली से बिहार आना होगा आसान, 120+ स्पेशल बसें चलेंगी, जानें किराया और रूट

Bihar-Delhi Bus Service: दशहरा, दीपावली और छठ पूजा में बिहार आने-जाने वाले यात्रियों के लिए राहत मिलने वाली है. त्योहारों में ट्रेनों की बढ़ती भीड़ और लंबी वेटिंग को देखते हुए दिल्ली, यूपी और बिहार के बीच 120 से ज्यादा स्पेशल और रेगुलर बसें चलाने की तैयारी है. परिवहन विभाग की योजना के मुताबिक बसों का परिचालन अक्टूबर से शुरू किया जा सकता है. दशहरा स्पेशल बसों की एडवांस बुकिंग अक्टूबर के पहले सप्ताह से शुरू होने की उम्मीद है. वहीं, बुकिंग की प्रक्रिया सितंबर से शुरू हो सकती है. 60 स्पेशल डीजल और CNG बसें चलेंगी त्योहारी सीजन में यात्रियों की संख्या काफी बढ़ जाती है. इसे देखते हुए करीब 60 स्पेशल डीजल और CNG बसें चलाने की तैयारी है. खास बात यह है कि इन बसों का संचालन केवल दशहरा, दिवाली और छठ तक सीमित नहीं रहेगा. योजना के अनुसार सेवा को पूरे साल रोजाना जारी रखा जाएगा. इससे दिल्ली और बिहार के बीच सफर करने वाले यात्रियों को नियमित बस सेवा का भी विकल्प मिलेगा. दिल्ली-बिहार के बीच 432 बसों का परमिट कोटा दिल्ली और बिहार के बीच बसों के संचालन के लिए 432 बसों का परमिट कोटा तय किया गया है. रेगुलर बसों की संख्या बढ़ाने के लिए परमिट की प्रक्रिया चल रही है. स्पेशल बसों के संचालन का प्रस्ताव करीब 10 दिनों के भीतर प्रशासन को भेजे जाने की तैयारी है. मंजूरी मिलने के बाद बसों की संख्या और रूट को अंतिम रूप दिया जाएगा. पटना से दिल्ली के लिए शुरू होंगी 4 लग्जरी बसें बिहार मोटर ट्रांसपोर्ट फेडरेशन के अधिकारियों के मुताबिक, अगले महीने पटना से दिल्ली के लिए चार लग्जरी बसें शुरू की जाएंगी. इसके अलावा त्योहारी सीजन में निजी बस संचालक भी करीब 30 अतिरिक्त बसें चलाएंगे. इससे यात्रियों के पास दिल्ली से बिहार आने का एक और विकल्प होगा. सीटिंग के साथ स्लीपर की भी सुविधा लंबी दूरी को देखते हुए बसों में यात्रियों की सुविधा का खास ध्यान रखा जाएगा. 42 से 56 सीटर बसों का संचालन किया जाएगा. यात्रियों को सीटिंग के साथ स्लीपर का विकल्प भी मिलेगा. इसके अलावा सेमी-स्लीपर डीलक्स, AC और नॉन-AC बसों से भी सफर करने की सुविधा उपलब्ध होगी. दिल्ली से बिहार तक 8 से 16 घंटे का सफर सड़क मार्ग से दिल्ली से बिहार पहुंचने में दूरी के हिसाब से करीब 8 से 16 घंटे का समय लग सकता है. बसों का रूट यूपी के रास्ते होगा. इससे दिल्ली से पटना, गया, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, पूर्णिया और भागलपुर जैसे प्रमुख शहरों तक सीधे पहुंचने का विकल्प मिलेगा. बिहार की ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें अलग-अलग शहरों के लिए इतना हो सकता है किराया बसों के संभावित किराये की जानकारी भी सामने आई है. बस की श्रेणी, सीट और स्लीपर सुविधा के हिसाब से किराये में बदलाव हो सकता है. शहर संभावित किराया पटना 1500-2,100 बिहारशरीफ 1800-2500 भागलपुर 2800-3500 बक्सर 1800-2500 दरभंगा 1600-2600 पूर्वी चंपारण 1600-2200 गया 1500-2300 किशनगंज 2500-3200 मधुबनी 1800-2500 मुजफ्फरपुर 1500-2500 नवादा 1800-2500 पूर्णिया 2000-2800 यात्रियों को क्या होगा फायदा? ट्रेनों की भीड़ से मिलेगी राहत दशहरा, दीपावली और छठ के दौरान बिहार आने वाली ट्रेनों में भारी भीड़ रहती है. कई ट्रेनों में टिकट मिलना भी मुश्किल हो जाता है. ऐसे में अतिरिक्त बसें यात्रियों को बेहतर विकल्प देंगी. लंबी वेटिंग से परेशान लोगों को सड़क मार्ग से सफर करने का मौका मिलेगा. कई शहरों तक सीधी बस सेवा दिल्ली से बिहार के प्रमुख शहरों तक सीधे बस से जाने की सुविधा मिलेगी. पटना, गया, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, पूर्णिया और भागलपुर जैसे शहर इसमें शामिल हैं. इससे यात्रियों को बीच में वाहन बदलने की परेशानी कम होगी. सालभर मिलती रहेगी सेवा स्पेशल बसों की सबसे खास बात यह है कि इनका संचालन सिर्फ त्योहारों तक सीमित नहीं रहने की योजना है. पूरे साल रोजाना बस सेवा जारी रहने से दिल्ली-बिहार के बीच नियमित यात्रा करने वालों को भी फायदा मिलेगा. आरामदायक सफर का विकल्प यात्रियों को अलग-अलग श्रेणी की बसों में सफर करने का विकल्प मिलेगा. सेमी-स्लीपर डीलक्स के साथ AC और नॉन-AC बसें भी चलेंगी. लंबी दूरी के यात्रियों के लिए स्लीपर बसों का विकल्प भी उपलब्ध रहेगा. सितंबर से शुरू हो सकती है बुकिंग त्योहारों की भीड़ को देखते हुए बसों की बुकिंग सितंबर से शुरू करने की तैयारी है. दशहरा स्पेशल बसों की एडवांस बुकिंग अक्टूबर के पहले सप्ताह से शुरू हो सकती है. दिवाली और छठ के दौरान बिहार आने वाले प्रवासियों की संख्या काफी बढ़ जाती है. ऐसे में पहले से टिकट बुक करने पर यात्रियों को आखिरी समय की परेशानी से राहत मिल सकती है. बसों की संख्या बढ़ाने की तैयारी प्रशासन का फोकस सिर्फ त्योहारों की भीड़ संभालने पर नहीं है. दिल्ली-बिहार रूट पर नियमित बस सेवा को भी मजबूत करने की तैयारी है. 432 बसों के परमिट कोटा और नए स्पेशल बस संचालन के जरिए यात्रियों को ज्यादा विकल्प देने की कोशिश की जा रही है. अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो आने वाले महीनों में दिल्ली और बिहार के बीच बस सेवा का नेटवर्क और बड़ा हो सकता है. Also Read: बाहुबली सूरजभान सिंह की पूरी कहानी: पिता चाहते थे कि बेटा बने फौजी, फिर जुर्म की दुनिया में रखा कदम और ऐसे बदल गई पूरी जिंदगी The post Bihar-Delhi Bus: दशहरा-दीपावली-छठ पर दिल्ली से बिहार आना होगा आसान, 120+ स्पेशल बसें चलेंगी, जानें किराया और रूट appeared first on Naya Vichar.

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हरियाणवी सिंगर अंकित बालियान हत्याकांड में पुलिस की कार्रवाई, दो शूटर एनकाउंटर में ढेर

पुलिस के मुताबिक, मुठभेड़ में दो शूटर सुमित और मोहित मारे गए. दोनों अंकित की हत्या में शामिल चार शूटरों में शामिल थे. अभी तक की जांच में इस हत्याकांड में कुल छह लोगों के शामिल होने की बात सामने आयी है. इनमें चार आरोपियों पर सिंगर अंकित बालियान पर गोली चलाने का शक है. वहीं, दो अन्य लोगों ने हमले से पहले रेकी की थी. पुलिस अब सभी आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है और बाकी संदिग्धों की तलाश जारी है. 35 वर्षीय हरियाणवी सिंगर अंकित बालियान की शामली में जिम के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी. वह इलाके में काफी लोकप्रिय थे और उनके कई गाने लोगों के बीच चर्चित थे. इनमें ‘भरी कोर्ट में गोली मारेंगे मेरी जान’ भी शामिल है, जिसे क्षेत्र में खूब पसंद किया गया था. ये भी पढ़ें: Ankit Baliyan Last Instagram Post: मौत से चंद घंटे पहले ‘मर्डर’ वाला गाना गा रहे थे अंकित बालियान, आखिरी इंस्टाग्राम वीडियो देख हो जाएंगे इमोशनल पुलिस की जवाबी कार्रवाई में दोनों ढेर हो गए यूपी पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि हरियाणवी सिंगर और यूट्यूबर अंकित बालियान हत्याकांड में यूपी एसटीएफ ने बड़ी कार्रवाई की है. शामली में पुलिस के साथ मुठभेड़ में दो शूटर सुमित और मोहित मारे गए. बताया जा रहा है कि दोनों सोनीपत के रहने वाले थे और अंकित की हत्या में शामिल थे. पुलिस के अनुसार, होटल राजमहल के पास बदमाशों ने पुलिस टीम पर फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में दोनों ढेर हो गए. मौके पर एसपी समेत पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. 26 अगस्त को अंकित को मारी गई थी गोली 26 अगस्त को शामली में जिम के बाहर अंकित बालियान की गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी. इसके बाद से पुलिस और एसटीएफ लगातार आरोपियों की तलाश कर रही थी. अंकित के पिता सतबीर सिंह ने क्या कहा? घटना के बाद अंकित के पिता सतबीर सिंह ने पुलिस और प्रशासन पर कार्रवाई में देरी का आरोप लगाया था. उन्होंने कहा कि परिवार ने चार दिन का समय दिया था, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. एसपी और डीएम ने और समय मांगा, जिसे परिवार ने दे दिया. सतबीर सिंह ने कहा कि उनका बेटा चला गया, बहू की हालत खराब है और उसे रोज डॉक्टर के पास ले जाना पड़ रहा है. उन्होंने भावुक होकर कहा कि परिवार बेहद मुश्किल दौर से गुजर रहा है और उन्हें डर है कि कार्रवाई का इंतजार करते-करते कहीं उनकी भी जान न चली जाए. The post हरियाणवी सिंगर अंकित बालियान हत्याकांड में पुलिस की कार्रवाई, दो शूटर एनकाउंटर में ढेर appeared first on Naya Vichar.

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बाहुबली सूरजभान सिंह की पूरी कहानी: पिता चाहते थे कि बेटा बने फौजी, फिर जुर्म की दुनिया में रखा कदम और ऐसे बदल गई पूरी जिंदगी

Surajbhan Singh Story: बिहार की सियासत में कुछ नाम ऐसे रहे हैं, जिनकी कहानी नेतृत्व से ज्यादा उनके बाहुबल और अपराध की चर्चाओं से जुड़ी रही. सूरजभान सिंह भी ऐसा ही एक नाम हैं. कभी मोकामा और आसपास के इलाकों में दबदबे के लिए चर्चित रहे सूरजभान ने बाद में चुनावी नेतृत्व में कदम रखा और सांसद तक का सफर तय किया. उनकी जिंदगी में अपराध के आरोप, गैंगवार, जेल, चुनावी नेतृत्व और सत्ता के गलियारों तक पहुंचने की कहानी एक साथ दिखाई देती है. बृजबिहारी प्रसाद हत्याकांड से लेकर उत्तर प्रदेश के कुख्यात अपराधी श्रीप्रकाश शुक्ला से उनके संबंधों तक की चर्चा लंबे समय तक होती रही. हालांकि, बृजबिहारी प्रसाद हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने 2024 में सूरजभान सिंह को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था. अब जब उनकी तबीयत बिगड़ने की समाचार सामने आई है, तो एक बार फिर सूरजभान सिंह चर्चा में हैं. करीब एक सप्ताह पहले पटना स्थित आवास पर सीने में तेज दर्द के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया. इसके बाद उन्हें दिल्ली ले जाया गया और अब चेन्नई रेफर किए जाने की जानकारी सामने आई है. लेकिन उनकी कहानी सिर्फ आज की समाचार तक सीमित नहीं है. आइए जानते हैं मोकामा के एक किसान परिवार के इस लड़के के बाहुबली बनने और फिर सांसद की कुर्सी तक पहुंचने की पूरी कहानी. पिता चाहते थे बेटा फौज में जाए सूरजभान सिंह का जन्म 5 मार्च 1965 को पटना जिले के मोकामा के शंकरबाग टोले में हुआ था. परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी. उनके पिता एक स्थानीय कारोबारी की दुकान पर काम करते थे. सूरजभान के बड़े भाई CRPF में भर्ती हो गए. इसके बाद परिवार की आर्थिक स्थिति कुछ बेहतर हुई. पिता चाहते थे कि छोटा बेटा भी सेना में जाए. बताया जाता है कि एक दिन पिता ने सूरजभान से कहा कि उनकी लंबी कद-काठी है और वह दौड़-भाग भी कर लेते हैं. इसलिए उन्हें सेना की तैयारी करनी चाहिए. लेकिन सूरजभान का मन कुछ और करने का था. उन्होंने सेना में भर्ती होने की बजाय अपनी अलग राह चुन ली. यहीं से उनकी जिंदगी धीरे-धीरे उस रास्ते पर बढ़ने लगी, जिसने आगे चलकर उन्हें बिहार के चर्चित बाहुबलियों में शामिल कर दिया. 18 साल की उम्र से पहले अपराध की दुनिया में कदम सूरजभान के बारे में प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक, कम उम्र में ही उनका नाम छोटे-मोटे अपराधों में आने लगा था. बाद में वह मोकामा के प्रभावशाली नेता और बाहुबली दिलीप सिंह के संपर्क में आए. उस दौर में मोकामा की नेतृत्व और अपराध की दुनिया एक-दूसरे से जुड़ी हुई मानी जाती थी. जमीन विवाद, रंगदारी और वर्चस्व की लड़ाई आम चर्चा का हिस्सा थे. सूरजभान भी इसी माहौल में आगे बढ़ते गए. धीरे-धीरे उनका प्रभाव बढ़ा और मोकामा में उनका नाम दबदबे के साथ लिया जाने लगा. परिवार उनके रास्ते से परेशान था सूरजभान के अपराध की दुनिया में बढ़ते कदमों का असर उनके परिवार पर भी पड़ा. एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक बार उनके पिता के परिचित और कारोबारी से रंगदारी मांगे जाने की बात सामने आई. कहा जाता है कि वह कारोबारी सूरजभान के पिता के पास पहुंचे और बेटे को समझाने की गुहार लगाई. पिता ने बेटे से नाराजगी जताई और उसे इस रास्ते से लौटने को कहा. लेकिन सूरजभान नहीं माने. रिपोर्टों में दावा किया गया है कि इस घटना का उनके पिता पर गहरा असर पड़ा और बाद में उन्होंने आत्महत्या कर ली. उनके बड़े भाई भी इस घटना और परिवार की परिस्थितियों से बेहद परेशान थे. कुछ समय बाद उनके बड़े भाई की भी आत्महत्या की समाचार सामने आई. यह सूरजभान की जिंदगी का बेहद दुखद दौर था. मोकामा में बढ़ता गया दबदबा 1990 के दशक में मोकामा की नेतृत्व में बड़े बदलाव हो रहे थे. दिलीप सिंह ने चुनाव जीतकर नेतृत्व में मजबूत जगह बनाई और प्रशासन में मंत्री बने. इसके बाद उनके लिए सीधे तौर पर अपराध की दुनिया में सक्रिय रहना मुश्किल था. ऐसे में उनके पुराने सहयोगी सूरजभान का प्रभाव और बढ़ा. इसी दौर में सूरजभान का नाम कई आपराधिक मामलों में सामने आया. हालांकि, हर मामले में आरोप साबित नहीं हुए और कई मामलों में उन्हें अदालतों से राहत भी मिली. उनका नाम जमीन विवाद से लेकर हत्या और अन्य आपराधिक मामलों में सामने आता रहा. श्रीप्रकाश शुक्ला से जुड़ा नाम सूरजभान सिंह की कहानी का एक बड़ा अध्याय उत्तर प्रदेश के कुख्यात अपराधी श्रीप्रकाश शुक्ला से उनके संबंधों को लेकर है. पूर्व IPS अधिकारी राजेश पांडेय ने एक इंटरव्यू में सूरजभान और श्रीप्रकाश शुक्ला के संबंधों के बारे में कई बातें बताई थीं. उनके मुताबिक, रेलवे ठेकों को लेकर उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में सूरजभान की दिलचस्पी थी. राजेश पांडेय के मुताबिक, सूरजभान की मुलाकात श्रीप्रकाश शुक्ला से इसी दौर में हुई. दोनों के बीच नजदीकी बढ़ी और हथियारों को लेकर भी चर्चा हुई. पांडेय के अनुसार, सूरजभान ने श्रीप्रकाश शुक्ला को एक नहीं बल्कि दो AK-47 देने की बात कही थी. बदले में वीरेंद्र प्रताप शाही को रास्ते से हटाने की बात कही गई थी. बाद की घटनाओं में शाही पर हमला हुआ, जिसमें उनका गनर मारा गया और शाही घायल हुए. यह पूरा घटनाक्रम पूर्व IPS अधिकारी के बयानों और उनकी किताब वर्चस्व में भी लिखा गया है. यही वह दौर था जब उत्तर हिंदुस्तान की अपराध की दुनिया में AK-47 का इस्तेमाल भी चर्चा में आने लगा था. वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के हवाले से रिपोर्टों में सूरजभान को श्रीप्रकाश शुक्ला तक हथियार पहुंचाने वाले प्रमुख लोगों में बताया गया है. पुलिस से मुठभेड़ और पैर में लगी गोली 1997 के आसपास मोकामा में पुलिस की एक कार्रवाई के दौरान सूरजभान और पुलिस के बीच गोलीबारी की घटना भी सामने आई थी. इस दौरान सूरजभान के पैर में गोली लगी थी. इलाज के लिए उन्हें छिपते हुए अलग-अलग जगहों पर जाना पड़ा. बताया जाता है कि पटना में इलाज के बाद भी उनका पैर पूरी तरह ठीक नहीं हुआ. संक्रमण बढ़ने की वजह से उनकी हालत बिगड़ती गई. इलाज के लिए उन्हें उत्तर प्रदेश ले जाया गया. वहां भी पुलिस को उनके ठिकाने की जानकारी मिल गई. पुलिस

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ईरान-अमेरिका भिड़े तो महंगा हुआ तेल, Brent $89.18 और WTI $84.32 पर

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर एक बार फिर इंटरनेशनल क्रूड ऑयल प्राइस पर दिखा है. सोमवार को कच्चे तेल की कीमतें 1 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा चढ़ गईं. अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में मौजूद ईरान के लारक आइलैंड पर हमला किया, जिसके बाद ईरान की तरफ से जवाबी कार्रवाई हुई. मिडिल ईस्ट में चल रहा संघर्ष अब छठे महीने में पहुंच गया है. सोमवार को ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 1.08 डॉलर यानी 1.23% बढ़कर 89.18 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. वहीं, यूएस वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) 92 सेंट यानी 1.10% चढ़कर 84.32 डॉलर प्रति बैरल हो गया. अमेरिका ने ईरान के किस हिस्से पर हमला किया? अमेरिकी सेना ने रविवार को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में स्थित ईरान के लारक आइलैंड पर दो लॉन्चरों को निशाना बनाया. जुलाई के आखिर के बाद गल्फ क्षेत्र में अमेरिका की यह पहली ज्ञात सैन्य कार्रवाई बताई गई है. इस बीच संघर्ष खत्म करने को लेकर चल रही बातचीत भी फिलहाल अटक गई है. मध्यस्थ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन किसी समझौते तक पहुंचने का रास्ता अभी साफ नहीं है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज इतना अहम क्यों है? स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम ऑयल रूट्स में से एक है. युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया के करीब पांचवें हिस्से का तेल इसी रास्ते से गुजरता था. इसलिए यहां तनाव बढ़ने पर ग्लोबल ऑयल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ जाती है. हालांकि अभी तेल की आवाजाही में बढ़ोतरी ने सप्लाई में रुकावट की चिंता को कुछ हद तक काबू में रखा है. Reuters से बात करने वाले एनालिस्ट्स ने भी बताया कि स्ट्रेट के जरिए ऑयल फ्लो बढ़ने से सप्लाई को लेकर दबाव सीमित रहा है. क्या होर्मुज से जहाजों की आवाजाही घटी है? तनाव के बीच शिपिंग कंपनियां अब ज्यादा सावधानी बरत रही हैं. सोमवार को सामने आए शिपिंग डेटा के मुताबिक, सप्ताहांत में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले दिखाई देने वाले कमोडिटी वेसल्स की संख्या घटकर एक दिन में पांच रह गई. इसका असर उस घटना से भी समझा जा सकता है, जब यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस ने रविवार को बताया कि शनिवार को स्ट्रेट से गुजरते समय एक टैंकर पर प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ था. अगस्त में क्रूड ऑयल का क्या रहा हाल? दिलचस्प बात यह है कि हालिया तेजी के बावजूद ब्रेंट और WTI दोनों अगस्त में मामूली गिरावट दर्ज कर सकते हैं. पिछले सप्ताह दोनों क्रूड ऑयल बेंचमार्क में 4% से ज्यादा की गिरावट आई थी. यह तीन सप्ताह में उनकी पहली वीकली गिरावट थी. वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा कि वेनेजुएला के साथ हाल में हुए एक समझौते से मिलने वाले ऑयल का इस्तेमाल अमेरिका के स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व को फिर भरने में किया जाएगा. यह रिजर्व 44 साल के अपने सबसे निचले स्तर के करीब पहुंच चुका है. The post ईरान-अमेरिका भिड़े तो महंगा हुआ तेल, Brent $89.18 और WTI $84.32 पर appeared first on Naya Vichar.

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