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September 2, 2026

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बेटा बनेगा नन्हा कान्हा, बेटी लगेगी राधा रानी, जन्माष्टमी पर ऐसे करें बच्चों की तैयारी

Janmashtami Dress Ideas: जन्माष्टमी पर बच्चों को राधा-कृष्ण के रूप में सजाने का उत्साह ही अलग होता है. नन्हे कान्हा और राधा रानी के रूप में सजे शिशु घर की रौनक बढ़ा देते हैं. अगर आप भी इस बार अपने बेटे या बेटी को जन्माष्टमी के लिए खास अंदाज में तैयार करने की सोच रहे हैं, तो बहुत ज्यादा खर्च करने की जरूरत नहीं है. कुछ आसान चीजों की मदद से बच्चों को बेहद प्यारा पारंपरिक रूप दिया जा सकता है. बेटे को ऐसे बनाएं नन्हे कान्हा कान्हा का रूप तैयार करने के लिए सबसे पहले ऐसा पहनावा चुनें, जिसमें बच्चा आराम से रह सके. पीली, नीली या सफेद धोती के साथ छोटा सा कुर्ता काफी प्यारा लगेगा. बहुत छोटे शिशु के लिए धोती की जगह धोती जैसी दिखने वाली आरामदायक पोशाक भी चुनी जा सकती है. पीली धोती और कुर्ता पीली धोती के साथ नीला कुर्ता या नीली धोती के साथ पीला कुर्ता नन्हे कान्हा पर खूब जचेगा. कमर पर छोटा सा पटका बांध दें. इससे साधारण कपड़े भी जन्माष्टमी के लिए खास लगने लगेंगे. सिर पर सजाएं मोरपंख कान्हा के रूप में मोरपंख सबसे खास चीजों में से एक है. शिशु के सिर पर हल्का मुकुट लगाकर उसमें मोरपंख लगाया जा सकता है. अगर बच्चा मुकुट पहनकर परेशान हो तो मोरपंख वाली हल्की क्लिप भी लगा सकते हैं. हाथ में दें बांसुरी नन्हे कान्हा के हाथ में छोटी सी सजावटी बांसुरी देते ही उनका रूप और प्यारा लगने लगेगा. फोटो के लिए बांसुरी हाथ में पकड़ा सकते हैं. छोटे शिशु के साथ बांसुरी को मुंह में जाने से रोकने के लिए किसी बड़े की निगरानी जरूर रखें. हल्की सजावट रखें हाथों में छोटे कड़े, गले में हल्की माला और कमर में पतली कमरबंद लगाई जा सकती है. बच्चों को सजाने के चक्कर में बहुत ज्यादा गहने न पहनाएं. हल्की सजावट में भी कान्हा का रूप काफी सुंदर लगेगा. चेहरे पर लगाएं छोटा सा तिलक बच्चों के चेहरे पर ज्यादा रंग या मेकअप करने की जरूरत नहीं है. चेहरा साफ करके हल्का मॉइस्चराइजर लगाएं और माथे पर चंदन या कुमकुम से छोटा सा तिलक लगाएं. अगर गालों पर हल्का गुलाबी रंग लगाना चाहें तो बच्चों की त्वचा के लिए सुरक्षित उत्पाद ही इस्तेमाल करें. आंखों के आसपास काजल, गाढ़ा मेकअप या चमकीली चीजें लगाने से बचना बेहतर है. बेटी को ऐसे सजाएं राधा रानी नन्ही राधा रानी के लिए बहुत भारी कपड़े पहनाने की जरूरत नहीं है. हल्का लहंगा-चोली, घाघरा-कुर्ती या सुंदर पारंपरिक पोशाक चुनी जा सकती है. गुलाबी, लाल, पीला, हरा और नीला जैसे रंग राधा के रूप के लिए खूब प्यारे लगते हैं. लहंगा-चोली के साथ हल्का दुपट्टा बच्ची को हल्का लहंगा-चोली पहनाकर उसके साथ छोटा सा दुपट्टा रखा जा सकता है. बहुत छोटी बच्ची है तो दुपट्टे को अच्छी तरह से पिन कर दें, ताकि वह चलते समय उलझे नहीं. माथे पर बिंदी और मांग टीका राधा रानी के रूप को निखारने के लिए माथे पर छोटी सी बिंदी और हल्का मांग टीका लगाया जा सकता है. इसके साथ छोटी सी नथ या कानों में हल्की बालियां भी लगाई जा सकती हैं. बस ध्यान रखें कि गहने बहुत भारी न हों. बालों में लगाएं फूल राधा रानी के रूप में बालों को भी सुंदर तरीके से सजाया जा सकता है. लंबे बाल हैं तो छोटी चोटी बनाकर उसमें फूल लगाएं. छोटे बाल हैं तो फूलों वाली क्लिप या हल्की फूलों की माला लगाई जा सकती है. राधा रानी के लिए हल्की चेहरे की सजावट बच्ची के चेहरे पर भारी मेकअप करने की जरूरत नहीं है. चेहरे को साफ करके हल्का मॉइस्चराइजर लगाएं. माथे पर छोटी बिंदी या कुमकुम लगाया जा सकता है. अगर बच्ची बड़ी है और उसकी त्वचा पर पहले से कोई सुरक्षित उत्पाद इस्तेमाल होता है, तो गालों पर हल्का गुलाबी रंग और होंठों पर हल्का रंग वाला बाम लगाया जा सकता है. बहुत छोटे बच्चों की आंखों के आसपास काजल या अन्य मेकअप लगाने से बचें. भाई-बहन को बनाएं राधा-कृष्ण की जोड़ी अगर घर में बेटा और बेटी दोनों हैं, तो दोनों को राधा-कृष्ण के रूप में तैयार करना और भी खास लगेगा. दोनों के कपड़ों में एक जैसा रंग रखें. बेटे को पीली धोती और नीला कुर्ता पहनाएं, वहीं बेटी को पीले रंग का लहंगा और नीले रंग की चुनरी पहनाई जा सकती है. बेटे के हाथ में बांसुरी और बेटी के हाथ में फूलों की छोटी टोकरी देकर दोनों की तस्वीर खींचें. साथ में फूल, छोटा मटका और मोरपंख रखकर घर में ही सुंदर सा माहौल बनाया जा सकता है. घर की चीजों से तैयार करें पूरा रूप बच्चों के लिए हर बार नई पोशाक खरीदना जरूरी नहीं है. घर में रखे पीले, नीले, गुलाबी या लाल कपड़ों को थोड़ी सजावट के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है. पीले दुपट्टे को कमर पर पटके की तरह बांधा जा सकता है. पुराने कपड़े से छोटी कमरबंद बनाई जा सकती है. घर में मौजूद फूलों से बालों की सजावट की जा सकती है. बस कुछ छोटी चीजों को सही तरीके से जोड़कर बच्चों का पूरा रूप तैयार हो जाएगा. बच्चों को तैयार करते समय इन बातों का रखें ध्यान बच्चों के कपड़े हमेशा हल्के और आरामदायक रखें. बहुत ज्यादा गहने, भारी मुकुट या कसकर बांधी गई हेयर एक्सेसरीज से बचें. चेहरे पर भी कम से कम चीजें लगाएं और किसी भी रंग या सजावटी सामान को आंखों के पास लगाने से बचना बेहतर है. सबसे जरूरी बात, शिशु को तैयार करने के बाद उसे लंबे समय तक एक ही जगह बैठाने की कोशिश न करें. उसे स्पोर्ट्सने और अपनी मर्जी से चलने दें. आखिर राधा-कृष्ण के रूप में शिशु की प्यारी मुस्कान और मासूमियत ही सबसे सुंदर लगेगी. यह भी पढ़ें: लड्डू गोपाल को भोग में क्या चढ़ाएं? ये चीजें हैं कान्हा को प्रिय The post बेटा बनेगा नन्हा कान्हा, बेटी लगेगी राधा रानी, जन्माष्टमी पर ऐसे करें बच्चों की तैयारी appeared first on Naya Vichar.

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योगी vs शाह: क्या BJP की ‘सक्सेशन पॉलिटिक्स’ में सबसे बड़ा चेहरा योगी हैं? 4 पॉइंट में समझिए

बीजेपी में नरेंद्र मोदी के बाद नेतृत्व को लेकर अक्सर योगी आदित्यनाथ और अमित शाह के नामों की चर्चा होती है. लेकिन नेतृत्वक ऑप्टिक्स में योगी की ताकत सिर्फ मुख्यमंत्री की कुर्सी नहीं, बल्कि हिंदुत्व, जनाधार और स्वतंत्र नेतृत्वक पहचान का ऐसा कॉम्बिनेशन है, जो उन्हें बाकी नेताओं से अलग करता है. 1. योगी को हटाना सिर्फ CM बदलना नहीं, यूपी का नेतृत्वक समीकरण बदलना होगा योगी आदित्यनाथ की सबसे बड़ी नेतृत्वक ताकत सिर्फ यह नहीं है कि वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं. उनके पास तीन अलग-अलग तरह की Political Capital दिखाई देती है- धार्मिक वैधता, चुनावी विश्वसनीयता और स्वतंत्र हिंदुत्व की पहचान. गोरखनाथ पीठ के महंत के तौर पर उनकी अपनी सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान है. इसके अलावा गोरखपुर से लंबे समय तक सांसद रहने का चुनावी अनुभव और 2017 के बाद उत्तर प्रदेश की सत्ता में उनका लगातार बने रहना उन्हें बीजेपी के भीतर एक अलग कद देता है. यही वजह है कि योगी को किसी सामान्य मुख्यमंत्री की तरह देखना नेतृत्वक रूप से अधूरा होगा. उनका मॉडल सीधे Mass Politics से जुड़ता है- हिंदुत्व की स्पष्ट भाषा, कानून-व्यवस्था पर सख्त छवि और ‘बुलडोजर मॉडल’ की नेतृत्वक ब्रांडिंग. Political optics में संदेश साफ है: योगी की कुर्सी पर सवाल सिर्फ लखनऊ का सवाल नहीं बनता, बल्कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी के सामाजिक और नेतृत्वक आधार से भी जुड़ जाता है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह. 4. योगी के खिलाफ नैरेटिव भी उनकी ताकत का संकेत क्यों बन जाता है? नेतृत्वक ऑप्टिक्स में किसी नेता के बारे में चल रही चर्चाएं कभी-कभी उसके प्रभाव का संकेत भी बन जाती हैं. पिछले कुछ वर्षों में समय-समय पर योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने की अटकलें सामने आती रही हैं. 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी ऐसी चर्चाओं का नेतृत्वक इस्तेमाल देखने को मिला. लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है. अटकल और वास्तविक नेतृत्वक निर्णय एक चीज नहीं हैं. फिर भी, इन चर्चाओं का लगातार मौजूद रहना यह बताता है कि योगी अब सिर्फ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में नहीं देखे जाते. उनकी राष्ट्रीय नेतृत्वक क्षमता पर भी बहस होती है. यही कारण है कि योगी को हटाने की किसी भी चर्चा का नेतृत्वक असर सामान्य नेतृत्व परिवर्तन से बड़ा हो सकता है. खासकर उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में, जहां बीजेपी की राष्ट्रीय चुनावी ताकत का बड़ा हिस्सा जुड़ा हुआ है. Political optics में योगी की ताकत का सबसे बड़ा संकेत शायद यही है- उनके भविष्य की चर्चा अब सिर्फ यूपी तक सीमित नहीं रहती. Read more: हेमंत सोरेन नहीं आए, कांग्रेस छा गई! झारखंड की Tribal Politics में क्या होने वाला है? Bottom Line योगी आदित्यनाथ को अमित शाह का प्रतिद्वंद्वी मानना अभी एक नेतृत्वक नैरेटिव है, स्थापित तथ्य नहीं. लेकिन नेतृत्वक ऑप्टिक्स में योगी की बढ़ती अहमियत को नजरअंदाज करना भी मुश्किल है. उनकी असली ताकत दिल्ली की संगठनात्मक मशीनरी नहीं, बल्कि लखनऊ से लेकर गोरखपुर तक बना उनका अपना नेतृत्वक-सामाजिक आधार है. इसलिए भविष्य की बीजेपी की कहानी को सिर्फ ‘Yogi vs Shah’ के रूप में पढ़ना शायद जल्दबाजी होगी. असल कहानी शायद यह है कि नरेंद्र मोदी के बाद बीजेपी का सबसे बड़ा चेहरा कैसा होगा- एक Mass Leader, एक संगठनात्मक रणनीतिकार या कई ताकतवर नेताओं का Collective Model? The post योगी vs शाह: क्या BJP की ‘सक्सेशन पॉलिटिक्स’ में सबसे बड़ा चेहरा योगी हैं? 4 पॉइंट में समझिए appeared first on Naya Vichar.

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Venus Transit 2026: तुला राशि में शुक्र बनाएंगे शक्तिशाली राजयोग, जानें किन राशियों पर बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा

Venus Transit 2026: वैदिक ज्योतिष में शुक्र को धन, संपदा, सुख-सुविधा, प्रेम, कला और ऐश्वर्य का कारक ग्रह माना जाता है. 2 सितंबर 2026 को शुक्र अपनी राशि तुला में प्रवेश करेंगे और 5 नवंबर 2026 तक इसी राशि में रहेंगे. तुला शुक्र की स्वराशि है, इसलिए यहां उनकी स्थिति मजबूत मानी जाती है. ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा ने बताया कि ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार शुक्र के इस गोचर से मालव्य राजयोग जैसी शुभ स्थिति बनती है, जिसका प्रभाव कई राशियों पर देखने को मिल सकता है. कला और व्यापार से जुड़े लोगों को लाभ शुक्र का तुला राशि में गोचर विशेष रूप से कला, मीडिया, फैशन, मनोरंजन, सौंदर्य, लग्जरी और व्यापार से जुड़े क्षेत्रों के लिए शुभ माना जा रहा है. इस दौरान आर्थिक फैसलों, रचनात्मक कार्यों और साझेदारी से जुड़े मामलों में सकारात्मक अवसर मिल सकते हैं. हालांकि किसी भी निवेश या बड़े वित्तीय निर्णय से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहेगा. ये भी पढ़ें: Aaj Ka Rashifal 2 September 2026: बप्पा के आशीर्वाद से आज किस राशि को मिलेगी सफलता? पढ़ें 12 राशियों का आज का राशिफल वृषभ राशि: करियर और आर्थिक स्थिति में सुधार वृषभ राशि के स्वामी भी शुक्र हैं, इसलिए यह गोचर आपके लिए विशेष महत्व रखता है. पेशेवर जीवन में नए अवसर मिल सकते हैं और प्रभावशाली लोगों से संपर्क लाभ पहुंचा सकते हैं. नेटवर्किंग मजबूत होगी. क्रिएटिव, फैशन, मीडिया या लग्जरी क्षेत्र से जुड़े जातकों को नए प्रोजेक्ट या आय के अवसर मिलने की संभावना है. तुला राशि: बढ़ेगा आकर्षण और आत्मविश्वास तुला राशि में ही शुक्र का गोचर होने से जातकों को विशेष लाभ मिल सकता है. आत्मविश्वास और व्यक्तित्व का प्रभाव बढ़ेगा. व्यापारियों को लाभ के नए अवसर मिल सकते हैं. जीवनसाथी के साथ संबंध मधुर होंगे और साझेदारी से जुड़े कार्यों में सफलता मिलने की संभावना है. मकर राशि: नौकरी और संपत्ति में लाभ मकर राशि के लिए शुक्र दशम भाव में गोचर करेंगे, जिसे करियर और कर्म का भाव माना जाता है. नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति, वेतन वृद्धि या नई नौकरी का अवसर मिल सकता है. वाहन, प्रॉपर्टी या इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदने की इच्छा पूरी हो सकती है. सामाजिक प्रतिष्ठा में भी वृद्धि के संकेत हैं. शुक्र देव को प्रसन्न करने के उपाय शुक्रवार को ‘ॐ शुं शुक्राय नमः’ या ‘ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करें. जरूरतमंद व्यक्ति या कन्या को चावल, मिश्री, दूध, सफेद वस्त्र अथवा खीर का दान करना भी शुभ माना जाता है. मां लक्ष्मी को कमल या गुलाबी पुष्प अर्पित कर कपूर से आरती करें. नोट: यह लेख वैदिक ज्योतिष की मान्यताओं पर आधारित है. इसे निश्चित भविष्यवाणी या वित्तीय सलाह के रूप में न लें. The post Venus Transit 2026: तुला राशि में शुक्र बनाएंगे शक्तिशाली राजयोग, जानें किन राशियों पर बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा appeared first on Naya Vichar.

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बिहार में बढ़ रहा बाढ़ का खतरा, गंगा-गंडक के बाद सोन भी उफनाई, 56 गेट खुले, कई इलाकों में तबाही

Bihar Flood Alert: बिहार में बाढ़ का खतरा अब और बढ़ गया है. गंगा और गंडक के बाद सोन नदी भी उफान पर है. मंगलवार को सोन नदी का जलप्रवाह सवा पांच लाख क्यूसेक तक पहुंच गया. यह इस साल का अब तक का सबसे अधिक जलप्रवाह है. स्थिति को देखते हुए इंद्रपुरी बराज के 69 में से 56 गेट खोल दिए गए हैं. गंगा और गंडक पहले से ही कई जगहों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. राज्य में 10 जगहों पर अलग-अलग नदियां लाल निशान के ऊपर हैं. इसके चलते दक्षिण और पूर्वी बिहार के कई निचले इलाकों में पानी फैलने लगा है. सीएम सम्राट ने माना- बिहार में बनी बाढ़ की स्थिति मोतिहारी में एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी बिहार में बाढ़ की स्थिति को लेकर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि गंडक, कोसी, बागमती और गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी हुई है. इससे कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति बनी है. मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासन बाढ़ और जल प्रबंधन को लेकर लगातार काम कर रही है. प्रशासन को भी प्रभावित इलाकों में जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं. भागलपुर के राघोपुर में भीषण कटाव, तटबंध पर बढ़ा दबाव भागलपुर के नवगछिया स्थित राघोपुर में गंगा का कटाव बेहद खतरनाक हो गया है. तटबंध पर लगातार बढ़ते दबाव को देखते हुए उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह मंगलवार को नई दिल्ली में चल रही बैठक बीच में छोड़कर पटना लौट आए. इसके बाद जल संसाधन सचिव भागलपुर पहुंचे. उन्होंने तटबंध की सुरक्षा के लिए किए जा रहे कार्यों का जायजा लिया. अधिकारियों को मौके पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं. उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि राघोपुर में बांध की सुरक्षा और आगे के कटाव को रोकने के लिए सभी जरूरी और संभावित उपाय किए जा रहे हैं. नदी किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है. सोन में पहुंचा बाणसागर का पानी, तटवर्ती गांवों पर खतरा सोन नदी में जलस्तर बढ़ने की एक बड़ी वजह बाणसागर बांध से छोड़ा गया पानी भी है. रविवार को बाणसागर से छोड़ा गया पानी मंगलवार को सोन नदी में पहुंच गया. इसके बाद सोन के किनारे बसे गांवों में खतरा बढ़ गया है. मनेर में भी सोन नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है. जलस्तर बढ़ने के कारण आसपास के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है. गंडक में जारी है उतार-चढ़ाव जल संसाधन विभाग के अनुसार नेपाल में आई बाढ़ के बाद गंडक नदी में पानी का उतार-चढ़ाव लगातार जारी है. मंगलवार को वाल्मीकिनगर बराज से करीब सवा लाख से डेढ़ लाख क्यूसेक के बीच पानी छोड़ा गया. गंडक नदी डुमरियाघाट में खतरे के निशान से 56 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है. बंगराघाट के पास यह 24 सेंटीमीटर ऊपर है. वहीं, कोसी बलतारा में 1.11 मीटर और कुरसेला में 41 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है. बूढ़ी गंडक और गंगा भी खतरे के निशान से ऊपर खगड़िया में बूढ़ी गंडक नदी भी खतरे के निशान से 25 सेंटीमीटर ऊपर है. गंगा नदी का जलस्तर भी कई जगहों पर लाल निशान के ऊपर बना हुआ है. दीघा, गांधी घाट, हाथीदह और कहलगांव में गंगा खतरे के निशान से ऊपर बह रही है. पश्चिम चंपारण में भी गंडक का कटाव तेज हो गया है. मधुबनी की चिऊरही पंचायत के रेवहिया और योगापट्टी में नदी किनारे कटाव जारी है. बिहार की ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें गंगा में समा गए मंदिर, 350 मीटर तटबंध क्षतिग्रस्त भागलपुर के राघोपुर में गंगा का कटाव अब बेहद भयावह हो चुका है. मंगलवार सुबह राघोपुर-काजीकोरैया तटबंध के सी-नोज के पास अपस्ट्रीम में अचानक तेज कटाव शुरू हुआ. देखते ही देखते तटबंध का 100 मीटर से अधिक हिस्सा गंगा में समा गया. इसके साथ ही रेलवे लाइन के किनारे बने मां चैती दुर्गा मंदिर और बाबा बजरंगबली मंदिर भी नदी में विलीन हो गए. अब तक 350 मीटर से अधिक लंबाई में तटबंध क्षतिग्रस्त हो चुका है. पुरानी रेलवे लाइन की तरफ करीब 100 मीटर तटबंध ही बचा है. इससे रेलवे लाइन के अस्तित्व पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है. गंगा का पानी अब सीधे रेलवे लाइन से टकरा रहा है. मांझरकुंड जलप्रपात में पर्यटकों की एंट्री बंद लगातार बारिश का असर रोहतास के मांझरकुंड जलप्रपात पर भी पड़ा है. बारिश के कारण झरने का जलप्रवाह काफी बढ़ गया है. इसे देखते हुए प्रशासन ने पर्यटकों की सुरक्षा के लिए बड़ा फैसला लिया है. मांझरकुंड जलप्रपात में अगले आदेश तक पर्यटकों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है. प्रशासन ने लोगों से सुरक्षा को देखते हुए प्रतिबंध का पालन करने की अपील की है. Also Read: पटना में सुबह से तेज बारिश, बिहार के 31 जिलों में येलो अलर्ट, इस दिन तक बरसेंगे बादल The post बिहार में बढ़ रहा बाढ़ का खतरा, गंगा-गंडक के बाद सोन भी उफनाई, 56 गेट खुले, कई इलाकों में तबाही appeared first on Naya Vichar.

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$100 के करीब पहुंचा कच्चा तेल, US-Iran जंग ने बढ़ाई चिंता, जानें भारत पर कितना पड़ेगा असर

कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखने को मिल रही है. ब्रेंट क्रूड बुधवार को 1.1% चढ़कर 96.25 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड 1.46% बढ़कर 91.54 डॉलर प्रति बैरल हो गया. अब बाजार की नजर ब्रेंट के 100 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर पर है. तेल की कीमतों में यह उछाल ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव बढ़ गया है. ईरान से जुड़े इलाकों में अमेरिकी हमलों और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में जहाजों की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता ने कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर बाजार की टेंशन बढ़ा दी है. तेल के दाम अचानक क्यों चढ़ गए? मंगलवार को भी कच्चे तेल में तेज उछाल आया था. उस दिन ब्रेंट करीब 4.5% बढ़कर 94.52 डॉलर और WTI लगभग 5% चढ़कर 90.03 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया था. यह तेजी उस समय आई, जब अमेरिका ने ईरान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC से जुड़े ठिकानों पर नए हमले शुरू किए. US सेंट्रल कमांड के मुताबिक, यह कार्रवाई कमर्शियल शिपिंग और अमेरिकी सैनिकों पर IRGC की ओर से किए गए हमलों की कोशिश के बाद की गई. यानी अभी तेल बाजार में सबसे बड़ी चिंता सिर्फ युद्ध नहीं, बल्कि उससे तेल की सप्लाई और समुद्री आवाजाही पर पड़ने वाला असर है. स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज इतना अहम क्यों है? कच्चे तेल के बाजार में सबसे ज्यादा चिंता स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर है. यह समुद्री रास्ता तेल की सप्लाई के लिए बेहद अहम है. यहां लंबे समय तक किसी तरह की रुकावट आती है, तो दुनिया के कई हिस्सों में तेल की सप्लाई पर दबाव बढ़ सकता है. सोमवार को स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से गुजर रहे एक टैंकर पर तीन अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ. UK मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस सेंटर के मुताबिक, इस घटना में किसी की जान नहीं गई. यही वजह है कि बाजार की नजर अब इस इलाके में होने वाली हर नई गतिविधि पर है. अगर जहाजों की आवाजाही पर लगातार खतरा बना रहा, तो कच्चे तेल की कीमतों में सप्लाई को लेकर चिंता और बढ़ सकती है. अमेरिका और ईरान के बीच अभी क्या चल रहा है? ईरान ने पहले लारक आइलैंड पर हुए अमेरिकी हमले के जवाब में जॉर्डन में मौजूद दो अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए. इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की ओर से अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किए गए हमलों का जवाब देने की चेतावनी दी. हालांकि, मौजूदा संकेतों के मुताबिक दोनों पक्ष फिलहाल पूरी तरह से फुल-स्केल वॉर की ओर लौटना नहीं चाहते. एनालिस्ट्स ने लारक आइलैंड पर अमेरिकी कार्रवाई को मौजूदा गतिरोध तोड़ने की कोशिश के तौर पर भी देखा है. हिंदुस्तान के लिए महंगा तेल क्यों है चिंता की बात? ब्रेंट के 100 डॉलर के करीब पहुंचने से हिंदुस्तान में ऑयल और गैस कंपनियों के शेयर भी फोकस में रहेंगे. निवेशक यह देखेंगे कि महंगे कच्चे तेल का कंपनियों के मार्जिन और फ्यूल कॉस्ट पर कितना असर पड़ता है. आम लोगों के लिए भी कच्चे तेल की कीमतों की चाल अहम है. अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो ईंधन की लागत पर दबाव बढ़ सकता है. फिलहाल बाजार की सबसे बड़ी नजर इस बात पर है कि अमेरिका-ईरान तनाव आगे कितना बढ़ता है और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में जहाजों की आवाजाही कितनी सुरक्षित रहती है. यही तय करेगा कि ब्रेंट 100 डॉलर के स्तर की ओर बढ़ता है या फिर तेजी पर ब्रेक लगता है. ये भी पढ़ें: ₹15408 हुआ सोना, चांदी भी ₹100 सस्ती, देखें 2 सितंबर के नए रेट The post $100 के करीब पहुंचा कच्चा तेल, US-Iran जंग ने बढ़ाई चिंता, जानें हिंदुस्तान पर कितना पड़ेगा असर appeared first on Naya Vichar.

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Nepal Flood : टनल रेस्क्यू में भारतीय दल 185 मीटर अंदर तक पहुंचा, 25 जिलों में फिर बाढ़ का अलर्ट

Nepal Flood : नेपाल में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,003 हो गयी है, जबकि करीब 4,000 लोग अब भी लापता हैं. जलप्रलय से तबाह पनबिजली परियोजनाओं की बंद सुरंगों में फंसे सैकड़ों मजदूरों को निकालने के लिए बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है. हिंदुस्तानीय तकनीकी व सुरंग विशेषज्ञ दल ने नेपाली सेना के साथ मिलकर लांगटांग परियोजना की टनल में 185 मीटर गहराई तक पहुंच बनाकर जांच पूरी कर ली है, वहीं चिलीमे टनल में रस्सियों के जरिए रास्ता बनाया गया है. अब तक 158 हिंदुस्तानीयों सहित 12,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है. इस बीच, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) ने रुक-रुक कर हो रही बारिश और नदियों के उफान को देखते हुए नुवाकोट, रसुवा और काठमांडू घाटी सहित 25 से अधिक जिलों में अचानक बाढ़ का नया अलर्ट जारी किया है. कितने मिले-कितने लापता 1,003 कुल मृतकों की संख्या (चितवन में सर्वाधिक 321, नवलपरासी पूर्व 216, नवलपरासी पश्चिम 170, नुवाकोट 95, गोरखा 65, धादिंग 57, रसुवा 41, तनहुन 38) 3,916 लोग अब भी लापता (583 विदेशी नागरिक शामिल) 12,000 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया 19 मुख्य मोटर पुल और कई प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग बह गए ये भी पढ़ें: VIDEO : नेपाल बाढ़ का खौफनाक मंजर, अस्पतालों में कम पड़ रही जगह; जंगलों में दफनाई जा रही लाशें एक शव पर तीन परिवारों का दावा पोखरा अस्पताल में रखे ‘शव नंबर 1003’ पर तीन परिवारों ने दावा कर दिया, जिससे पहचान का संकट गहरा गया है. अत्यधिक क्षत-विक्षत होने के कारण शवों की शिनाख्त के लिए पुलिस डीएनए नमूनों का सहारा ले रही है. चितवन में मिले 272 शवों में से सिर्फ 12 की पहचान हो सकी, जिसके बाद 199 अज्ञात शवों को डीएनए सुरक्षित रख दफना दिया गया. हिंदुस्तानीय दूतावास ने भी शवों की शिनाख्त व स्वदेश वापसी के लिए 9-चरणीय प्रक्रिया और हेल्पलाइन जारी की है. नेपाल में अब ‘मानसिक आघात’ का बड़ा संकट भौतिक तबाही के बाद प्रभावितों में गंभीर मनोवैज्ञानिक आघात (पीटीएसडी) देखा जा रहा है. शिशु रात में बाढ़ के डर से चीखकर जाग रहे हैं और वयस्क गहरे तनाव में हैं. प्रशासन ने सबसे प्रभावित रसुवा और नुवाकोट में 50 मनोचिकित्सक तैनात किए हैं तथा 1166 और 1115 हेल्पलाइन के जरिए चौबीसों घंटे टेली-काउंसलिंग शुरू की है. ये भी पढ़ें: जलाने के बदले दफनाया जा रहा नेपाल बाढ़ में जान गवाने वालों की लाश? ऐसा क्यों नेपाल ने कहा- प्रदूषण फैलाने वाले देश दें मुआवजा नेपाल की वन एवं पर्यावरण मंत्री गीता चौधरी ने कहा कि देश को वैश्विक मंचों पर ‘जलवायु न्याय’ (क्लाइमेट जस्टिस) को सर्वोच्च प्राथमिकता बनाना होगा. उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर प्रदूषण फैलाने वाले अमीर देशों से पर्वतीय देशों को हुए नुकसान का उचित मुआवजा मिलना चाहिए. The post Nepal Flood : टनल रेस्क्यू में हिंदुस्तानीय दल 185 मीटर अंदर तक पहुंचा, 25 जिलों में फिर बाढ़ का अलर्ट appeared first on Naya Vichar.

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हेमंत सोरेन नहीं आए, कांग्रेस छा गई! झारखंड की Tribal Politics में क्या होने वाला है?

रांची के मोराबादी मैदान में 30 अगस्त को हुआ ‘आदिवासी एकता महाजुटान’ सिर्फ परिसीमन के खिलाफ एक सामाजिक आंदोलन नहीं था. नेतृत्वक ऑप्टिक्स से देखें तो यह झारखंड कांग्रेस की एक बड़ी कोशिश भी नजर आती है- आदिवासी प्रतिनिधित्व के सवाल को अपने नेतृत्वक नैरेटिव के केंद्र में लाना. रैली का नेतृत्व कांग्रेस नेता बंधु तिर्की ने किया. मंच पर प्रदेश कांग्रेस के बड़े चेहरे मौजूद रहे और राहुल गांधी का संदेश भी पढ़ा गया. दूसरी ओर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन खुद रैली में नहीं पहुंचे, लेकिन JMM की ओर से विधायक विकास मुंडा मौजूद रहे. यही तस्वीर झारखंड की नेतृत्व में कई सवाल खड़े करती है. आखिर कांग्रेस इस मुद्दे को इतना बड़ा क्यों बना रही है? और क्या इसके पीछे सिर्फ आदिवासी अधिकारों की लड़ाई है? 2024 झारखण्ड विधान-सभा चुनाव पर एकलौती पुस्तक ‘ब्रांड हेमंत’ यहां से पढ़ सकते है 1. कांग्रेस का पहला संदेश: ‘आदिवासी प्रतिनिधित्व’ को राष्ट्रीय मुद्दा बनाना कांग्रेस की रणनीति को समझने के लिए सबसे पहले उसके मुद्दे को देखना जरूरी है. रैली में परिसीमन को सिर्फ सीटों की संख्या का सवाल नहीं बनाया गया. इसे आदिवासी नेतृत्वक प्रतिनिधित्व, संविधान और जल-जंगल-जमीन के अधिकार से जोड़ दिया गया. कांग्रेस के झारखंड प्रभारी के. राजू ने रैली में BJP और RSS पर आदिवासी प्रतिनिधित्व कमजोर करने की साजिश का आरोप लगाया और कहा कि पार्टी आदिवासी समाज के नेतृत्वक अधिकारों की रक्षा के लिए खड़ी रहेगी. यानी कांग्रेस का नैरेटिव साफ है- Delimitation → Tribal Representation → Constitutional Rights → BJP/NDA की नीतियां नेतृत्वक रूप से यह कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे परिसीमन जैसे तकनीकी और जटिल मुद्दे को सीधे आदिवासी पहचान और नेतृत्वक भविष्य से जोड़ा जा सकता है. हालांकि, यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि भविष्य के परिसीमन में झारखंड की ST आरक्षित सीटें वास्तव में कितनी बदलेंगी, यह अभी तय नहीं है. फिलहाल झारखंड में 81 विधानसभा सीटों में 28 ST आरक्षित और 14 लोकसभा सीटों में 5 ST आरक्षित हैं. रांची के मोरहाबादी मैदान में आदिवासी महाजुटान के मंच पर झारखंड के विधायक और समाज के नेता. फोटो: नया विचार 2. राहुल गांधी की एंट्री: बिना आए भी राष्ट्रीय चेहरा राहुल गांधी खुद मोराबादी मैदान नहीं पहुंचे, लेकिन उनका संदेश मंच से पढ़ा गया. नेतृत्वक ऑप्टिक्स में यह छोटा संकेत नहीं है. राहुल गांधी का संदेश आदिवासी अधिकारों, जल-जंगल-जमीन, पांचवीं अनुसूची, PESA और वनाधिकार जैसे मुद्दों से जुड़ा था. इससे कांग्रेस दो स्तरों पर संदेश देने की कोशिश करती दिखाई देती है. झारखंड में: कांग्रेस खुद को आदिवासी अधिकारों की नेतृत्वक आवाज के रूप में स्थापित करना चाहती है. दिल्ली में: परिसीमन के सवाल को BJP बनाम विपक्ष की बड़ी संवैधानिक बहस से जोड़ना चाहती है. यानी मोराबादी का मंच स्थानीय था, लेकिन संदेश राष्ट्रीय बनाने की कोशिश की गई. 3. असली नेतृत्वक प्रतियोगिता BJP से ज्यादा JMM से भी है यहीं इस पूरी कवायद की सबसे दिलचस्प परत सामने आती है. झारखंड में आदिवासी नेतृत्व का सबसे मजबूत नेतृत्वक ब्रांड लंबे समय से JMM और सोरेन परिवार के आसपास रहा है. ऐसे में कांग्रेस के लिए चुनौती केवल BJP नहीं है. उसे आदिवासी वोटर के बीच अपनी स्वतंत्र नेतृत्वक पहचान भी मजबूत करनी है. मोराबादी महाजुटान में कांग्रेस के कई बड़े नेताओं की मौजूदगी इसी दृष्टि से महत्वपूर्ण है. प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, प्रभारी के. राजू, रमेश्वर उरांव, शिल्पी नेहा तिर्की, सुबोधकांत सहाय समेत कई कांग्रेस नेता मंच पर मौजूद थे. दूसरी तरफ हेमंत सोरेन ने कार्यक्रम में व्यक्तिगत रूप से शामिल होने के बजाय अपना प्रतिनिधि भेजा और संदेश के जरिए समर्थन दिया. नेतृत्वक संदेश पढ़ें तो तस्वीर कुछ ऐसी बनती है: Congress: ‘आदिवासी अधिकारों की लड़ाई में हमारी भी केंद्रीय भूमिका है.’ JMM: ‘आंदोलन का समर्थन हमारा भी है, लेकिन मंच कांग्रेस का है.’ यही अंतर भविष्य में दोनों सहयोगी दलों के बीच आदिवासी नेतृत्वक स्पेस को लेकर प्रतिस्पर्धा का संकेत दे सकता है. Read more: ‘मेरी नौकरी जाएगी या बचेगी?’ JPSC/JSSC विवाद से जुड़े सबसे जरूरी 7 सवाल और जवाब 4. ‘जल-जंगल-जमीन’ के साथ Sarna Code: कांग्रेस का बड़ा सामाजिक गठजोड़ अगर कांग्रेस केवल परिसीमन पर बात करती तो इसका असर सीमित रह सकता था. लेकिन महाजुटान में Sarna Code, CNT-SPT Act, Fifth Schedule, PESA, Forest Rights और जल-जंगल-जमीन जैसे मुद्दों को भी जोड़ा गया. यही कांग्रेस की नेतृत्वक ऑप्टिक्स का दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा है. कांग्रेस एक ऐसा मुद्दा-संग्रह तैयार करती दिखती है जिसमें अलग-अलग आदिवासी समूहों की चिंताओं को एक साझा नेतृत्वक फ्रेम में रखा जा सके. Sarna identity → सांस्कृतिक पहचान CNT-SPT → जमीन PESA/Fifth Schedule → संवैधानिक स्वायत्तता Forest Rights → जंगल Delimitation → नेतृत्वक प्रतिनिधित्व Jal-Jungal-Zameen → व्यापक आदिवासी अधिकार यानी लक्ष्य सिर्फ एक चुनावी मुद्दा बनाना नहीं, बल्कि एक व्यापक tribal rights narrative तैयार करना है. 5. कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा सवाल: क्या यह वोट में बदलेगा? यही पूरी रणनीति की असली परीक्षा है. मोराबादी में बड़ी भीड़ जुटना नेतृत्वक रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन भीड़ और वोट बैंक एक ही चीज नहीं हैं. कांग्रेस के सामने तीन लक्ष्य हो सकते हैं: पहला: आदिवासी समाज में BJP के खिलाफ नेतृत्वक ध्रुवीकरण को मजबूत करना. दूसरा: JMM के पारंपरिक आदिवासी नेतृत्वक स्पेस में कांग्रेस की हिस्सेदारी बढ़ाना. तीसरा: राष्ट्रीय स्तर पर राहुल गांधी और कांग्रेस को आदिवासी अधिकारों के मुद्दे से जोड़ना. रैली में कांग्रेस की मजबूत मौजूदगी और राहुल गांधी के संदेश ने इन तीनों लक्ष्यों को एक ही मंच पर जोड़ दिया. वहीं JMM की ओर से हेमंत सोरेन के प्रतिनिधि की मौजूदगी ने यह भी दिखाया कि मुद्दा इतना महत्वपूर्ण है कि सत्तारूढ़ गठबंधन इससे दूरी नहीं बना सकता. कांग्रेस की पूरी नेतृत्वक तस्वीर क्या कहती है? मोराबादी महाजुटान को सिर्फ ‘परिसीमन विरोधी रैली’ मानना शायद इसकी पूरी नेतृत्वक कहानी नहीं बताता. कांग्रेस के नजरिए से देखें तो यह एक narrative-building exercise है. परिसीमन को आदिवासी प्रतिनिधित्व से जोड़ना, प्रतिनिधित्व को संविधान से जोड़ना, संविधान को जल-जंगल-जमीन से जोड़ना और फिर इन मुद्दों के साथ राहुल गांधी के राष्ट्रीय नेतृत्व को जोड़ना- यह एक स्पष्ट नेतृत्वक संचार रणनीति दिखाई देती है. लेकिन इसके साथ एक नेतृत्वक जोखिम भी है. यदि आदिवासी संगठन इसे कांग्रेस के नेतृत्वक मंच के रूप में देखने लगते हैं, तो कांग्रेस

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झारखंड के थानों में CCTV नहीं लगाने पर हाईकोर्ट सख्त, DGP से कहा- क्यों न आपके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की जाए

रांची. झारखंड के सभी पुलिस थानों में CCTV कैमरे लगाने के हाईकोर्ट के बार-बार दिये गये निर्देशों का पालन नहीं हुआ है. इस पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई है. मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने पुलिस अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाये. DGP को कारण बताओ नोटिस जारी अदालत ने टिप्पणी की कि ऐसा प्रतीत होता है कि पुलिस अधिकारियों की रुचि थानों में CCTV कैमरे लगाने में नहीं है. मामले को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने वर्तमान DGP तदाशा मिश्रा को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. उनसे पूछा गया है कि उनके खिलाफ अदालत के आदेश की अवमानना की कार्रवाई क्यों नहीं शुरू की जाये. कई बार दिया गया निर्देश खंडपीठ ने कहा कि 18 जून के आदेश के अलावा हाईकोर्ट की विभिन्न पीठें पहले भी कई बार पुलिस थानों में CCTV कैमरे लगाने का निर्देश दे चुकी हैं. इसके बावजूद आदेश का पालन नहीं होना गंभीर मामला है. सुनवाई के दौरान राज्य प्रशासन की ओर से बताया गया कि थानों में CCTV लगाने के लिए टेंडर जारी किया गया था. बाद में इस टेंडर को रद्द कर दिया गया. प्रशासन की ओर से आदेश का पालन नहीं होने के अन्य कारण भी अदालत के सामने रखे गये. ये भी पढ़ें: JSSC CGL Paper Leak: CID ने की 20 संदिग्धों से पूछताछ, अब तक 8 अभ्यर्थी गिरफ्तार बहाने संतोषजनक नहीं : हाईकोर्ट अदालत ने राज्य प्रशासन की ओर से बताये गये कारणों को प्रथम दृष्टया संतोषजनक नहीं माना. खंडपीठ ने कहा कि आदेश के अनुपालन के लिए पर्याप्त अवसर दिये जाने के बावजूद अब तक किसी भी पुलिस थाने में CCTV लगाने की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है. ये भी पढ़ें: झारखंड का रेवेन्यू कलेक्शन बेपटरी, 5 माह में हासिल हुआ महज एक-तिहाई लक्ष्य, जानिए कहां फंसा गणित? अगली सुनवाई 24 सितंबर को अदालत ने यह भी याद दिलाया कि 18 जून को ही DGP के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी करने पर विचार किया गया था. अब DGP को जारी कारण बताओ नोटिस के बाद मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर को होगी. The post झारखंड के थानों में CCTV नहीं लगाने पर हाईकोर्ट सख्त, DGP से कहा- क्यों न आपके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की जाए appeared first on Naya Vichar.

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“टाइगर को कोर्ट-कचहरी दौड़ा कर रहेंगे”, पुलिस एसोसिएशन की जयराम महतो को चेतावनी, अदालत से भी झटका

रांची से अभिषेक आनंद की रिपोर्ट रांची : झारखंड के डुमरी विधायक जयराम महतो और पुलिस एसोसिएशन के बीच छिड़ा विवाद अब चरम पर पहुंच गया है. बरवाअड्डा थाना प्रभारी रवि कुमार और विधायक के बीच बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग वायरल होने के बाद पुलिस एसोसिएशन ने विधायक के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कड़ा रुख अपनाया है. उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि वे उन्हें कोर्ट कचहरी दौड़ा कर ही रहेंगे. दूसरी तरफ अदालत से भी विधायक जयराम महतो को फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है. पुलिस एसोसिएशन की चेतावनी झारखंड पुलिस एसोसिएशन के अध्यक्ष राहुल कुमार मुर्मू ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर पुलिस महकमे के कड़े रुख का स्पष्ट संकेत दिया है. उन्होंने कहा कि उन्हें क्या सजा देना है ये माननीय न्यायालय समझेगा. लेकिन हमारी जो प्रक्रिया है वह हम कर रहे हैं. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि हम आपको (जयराम को) कोर्ट तक जरूर पहुंचाएंगे. आपको भाग-दौड़ करनी पड़ेगी. उन्होंने पत्रकारों से कहा कि प्रेस के साथी जो कहते हैं कि टाइगर यहां घूमता है, वहां घूमता है. एसोसिएशन के तरफ वे कहना चाहते हैं कि वे उन्हें भाग दौड़ करवा के ही मानेंगे. पुलिस एसोसिएशन बेहद मजबूत संगठन है. हम बस उन्हें इतना कह देना चाहते हैं आपने (जयराम ने) गलत जगह हाथ डाल दिया है. ये भी पढ़ें: मूसलाधार बारिश ने खोली पतरातू की पोल, भगत सिंह चौक की दुकानों में घुसा नाले का पानी; सड़क बनी तालाब गिरफ्तारी की प्रक्रिया को तेज करने की मांग राहुल कुमार मुर्मू ने आगे कहा कि धनबाद एसएसपी को विधायक की गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के लिए 5 दिनों का अल्टीमेटम दिया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है. एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि झारखंड पुलिस एसोसिएशन, पुलिस मेंस एसोसिएशन और चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी संघ इस मुद्दे पर पूरी तरह से एकमंच पर हैं. संगठन किसी भी सूरत में पीछे नहीं हटेगा और विधायक को कानून व अदालत के कटघरे में खड़ा करके ही रहेगा. जयराम को अदालत से झटका कानूनी मोर्चे पर भी विधायक जयराम महतो की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं. धनबाद की विशेष एमपी-एमएलए (MP-MLA) अदालत ने विधायक की अग्रिम जमानत याचिका पर फैसला फिलहाल टाल दिया है. अदालत ने पुलिस से केस डायरी तलब करते हुए जयराम महतो की गिरफ्तारी पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है. मामले की अगली सुनवाई अब 10 सितंबर को तय की गई है. विधायक जयराम महतो बोले- ‘भ्रष्ट सिस्टम से लड़ाई’ दूसरी ओर, पुलिस की चेतावनी और अदालती झटके के बावजूद विधायक जयराम महतो अपने रुख पर अड़े हुए हैं. उन्होंने इसे व्यक्तिगत लड़ाई के बजाय “भ्रष्ट सिस्टम के खिलाफ संग्राम” करार दिया है. विधायक का तर्क है कि वायरल कॉल रिकॉर्डिंग उनकी निजी बातचीत थी, जिसे बरवाअड्डा थाना प्रभारी ने बिना अनुमति सोशल मीडिया पर लीक किया. उन्होंने थाना प्रभारी से सार्वजनिक माफी की मांग की है. डुमरी विधायक ने थाना प्रभारी पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनके निजी ड्राइवर के माध्यम से अवैध उगाही के दावे किए हैं. साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि पुलिस एसोसिएशन एक दागी अधिकारी के बचाव में क्यों खड़ा है? ये भी पढ़ें: झारखंड का रेवेन्यू कलेक्शन बेपटरी, 5 माह में हासिल हुआ महज एक-तिहाई लक्ष्य, जानिए कहां फंसा गणित? The post “टाइगर को कोर्ट-कचहरी दौड़ा कर रहेंगे”, पुलिस एसोसिएशन की जयराम महतो को चेतावनी, अदालत से भी झटका appeared first on Naya Vichar.

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Mirzapur: The Movie : झारखंड की लड़की कैसे बनी कालीन भैया की बीवी, लास्ट मोमेंट पर रसिका दुग्गल की लगी थी लॉटरी

Rasika Dugal in Mirzapur: The Movie: एक्ट्रेस रसिका दुग्गल उन अभिनेत्रियों में शामिल हैं, जिन्होंने अपने किरदारों के जरिए दर्शकों के सामने स्त्रीओं की अलग-अलग परतें पेश की हैं. चाहे वह ‘मिर्जापुर’ की बीना त्रिपाठी हो या ‘दिल्ली क्राइम’ की नीती सिंह, रसिका ने हमेशा ऐसे किरदार चुने हैं जो सिर्फ एक तय छवि में फिट नहीं बैठते. अब एक बार फिर वह ‘मिर्जापुर: द मूवी’ में बीना त्रिपाठी के किरदार में नजर आने वाली हैं. उन्होंने अपने स्ट्रांग किरदार से आज भी दर्शकों के दिलों में छाप छोड़ा है और कालीन भइया की बीवी  बनकर राज किया है. आइये जानते है कालीन भैया की बीना जी के किरदार और उनकी निजी जिंदगी से जुड़े कई पहलुओं के बारे में. Rasika Dugal Belongs to Jharkhand: झारखंड से बिलॉन्ग करती हैं रसिका दुग्गल रसिका दुग्गल झारखंड से बिलॉन्ग करती हैं का जन्म और बचपन झारखंड के जमशेदपुर में बीता है. वह 18 साल की उम्र तक वहीं रहीं, जिसके बाद पढ़ाई के लिए शहर से बाहर चली गईं. उनके माता-पिता आज भी झारखंड में रहते हैं. उन्होंने हिंदुस्तानी और हर्ष के एक पॉडकास्ट में बताया था कि वह झारखंड को बहुत मिस करती हैं और जब भी मौका मिलता है, वह अपने घर झारखंड निकल जाती हैं. रसिका दुग्गल, फोटो- इंस्टाग्राम उस समय रासिका ने सोचा कि अगर करण उन्हें कास्ट करना चाहते  होते, तो खुद उनसे कांटेक्ट कर लेते. हालांकि, उनके एक दोस्त ने उन्हें सलाह दी कि उन्हें करण को एक मैसेज करना चाहिए. इसके बाद उन्होंने करण को मैसेज किया. इस मैसेज का जवाब उन्हें महज एक मिनट के अंदर मिल गया. करण ने उनसे मिलने और शो के बारे में बात करने के लिए कहा. View on Instagram मिलने के बाद दोनों की सीरीज को लेकर बात हुई और रसिका ने रोल देखकर तुरंत हां कर दिया था. हालांकि, किरदार उनके पहले के लुक और इमेज से काफी अलग था. इसी वजह से उनके मन में थोड़ी घबराहट भी थी. उन्हें यह भी डर रहता था कि कहीं मेकर्स को ऐसा न लगे कि वह इस किरदार को निभाने में सक्षम नहीं हैं. वह इस बात को लेकर काफी नर्वस थीं कि क्या वह अपने किरदार के साथ न्याय कर पाएंगी या नहीं. आज जब वह पीछे मुड़कर देखती हैं, तो उन्हें लगता है कि उनका एक छोटा-सा फैसला उनके करियर के लिए बहुत बड़ा साबित हुआ. Bina Tripathi is More than Strong Women: बीना को सिर्फ मजबूत स्त्री’ कहना सही नहीं होगा  रसिका दुग्गल ने एक इंटरव्यू में मिर्जापुर में बीना त्रिपाठी के किरदार को लेकर बताया कि बीना को किसी एक खांचे में फिट नहीं किया जा सकता. वह न तो पूरी तरह पीड़ित है और न ही पारंपरिक अर्थों में नायिका.रसिका का मानना है कि लंबे समय तक फिल्मों और सीरीज में ‘मजबूत स्त्री किरदार’ को ही वीमेन एम्पावरमेंट का प्रतीक माना गया. लेकिन उनके अनुसार असली स्त्रीएं इससे कहीं ज्यादा जटिल होती हैं. View on Instagram कोई स्त्री एक पल इमोशनल और दूसरे पल रणनीतिक हो सकती है. वह संवेदनशील होने के साथ-साथ महत्वाकांक्षी हो सकती है और अच्छे इरादों के बावजूद गलत फैसले भी ले सकती है. इसलिए स्त्री किरदारों को भी पुरुष किरदारों की तरह भावनात्मक और नैतिक जटिलताएं दी जानी चाहिए. यह भी पढ़ें: Postcard From Jharkhand: मिर्जापुर फेम रसिका दुग्गल ने की झारखंड की तारीफ, बोली- अब दुनिया देखेगी… Why Bina Tripathi is Challenging? बीना निभाना क्यों है चुनौतीपूर्ण? रसिका ने बीना को अपने करियर के सबसे चुनौतीपूर्ण किरदारों में से एक बताया है. उनके लिए यह किरदार इसलिए खास है क्योंकि बीना को हर सीजन में एक नए तरीके से समझने का मौका मिला. अब बड़े पर्दे पर कहानी को आगे बढ़ाते हुए दर्शकों को उसके व्यक्तित्व की कुछ और परतें देखने को मिल सकती हैं. View on Instagram एक इंटरव्यू में बातचीत में रसिका ने बताया कि बीना को निभाना उनके लिए लगातार चुनौतीपूर्ण रहा है और यह किरदार उन्हें अपने अलग अंदाज से जोड़ता है. इतना ही नहीं फिल्म रिलीज होने वाली हैं और वह काफी नर्वस है और दर्शकों के रिस्पांस देखने के लिए. Rashika Dugal on Onscreen Relation With Pankaj Tripathi urf Kaleen Bhaiya: कालीन भैया के साथ कैसा हैं ऑनस्क्रीन रिश्ता रसिका दुग्गल ने एक इंटरव्यू में मिर्जापुर में  पंकज त्रिपाठी के साथ ऑनस्क्रीन कमेस्ट्री को लेकर बात की. उन्होंने बताया कि पंकज बहुत अच्छे इंसान हैं. उनकी सबसे खास बात यह है कि वह जैसे हैं, वैसे ही रहते हैं. रसिका ने बताया की उनका मिजाज भी काफी मजाकिया हैं और वह मिर्जापुर से पहले टेलीविजन सीरीज ‘पाउडर’ में साथ काम कर चुके हैं. पंकज त्रिपाठी और रसिका दुग्गल, फोटो- इंस्टाग्राम रसिका ने जिक्र किया कि, ‘मिर्जापुर’ के पहले सीजन की शूटिंग के दौरान जब हम सेट पर मिले थे, तो हमारी बातचीत ‘पाउडर’ के एक सीन को लेकर शुरू हो गई थी. वह सीन आज भी हम दोनों को अच्छी तरह याद था. उन्होंने आगे बताया  इतने सालों में एक अभिनेता के तौर पर उन दोनों में काफी बदलाव आया है. यह भी पढ़ें: मिर्जापुर’ में रसिका दुग्गल की एंट्री की कहानी, एक मैसेज ने बदल दी थी पूरी जिंदगी, कहा- डर था कहीं रोल न चला जाए The post Mirzapur: The Movie : झारखंड की लड़की कैसे बनी कालीन भैया की बीवी, लास्ट मोमेंट पर रसिका दुग्गल की लगी थी लॉटरी appeared first on Naya Vichar.

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