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October 13, 2026

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Video: जंतर-मंतर का गेट फांदकर अंदर पहुंचे सौरव दास और आशुतोष रांका, पुलिस ने हिरासत में लिया

CJP Protest Video: मंगलवार (13 अक्टूबर) को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका अपने समर्थकों के साथ गेट फांदकर जंतर-मंतर के अंदर पहुंच गए. इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है. हालांकि, कुछ देर बाद दिल्ली पुलिस ने दोनों नेताओं को हिरासत में ले लिया. उनके साथ CJP कार्यकर्ता अजिंक्य शिंदे और अन्य समर्थकों को भी पकड़ा गया. गेट फांदकर जंतर-मंतर में कैसे पहुंचे CJP नेता? सीजेपी नेता सौरभ दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसका एक वीडियो भी शेयर किया है. वीडियो में सौरव दास, आशुतोष रांका और उनके साथी जंतर-मंतर के गेट को लांघकर अंदर जाते दिखाई दे रहे हैं. उन्होंने वीडियो के साथ कैप्शन भी लिखा- जंतर-मंतर से हाथ हटाओ. इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और अंदर मौजूद लोगों को हिरासत में ले लिया. सीजेपी के नेता जनता दल यूनाइटेड (JDU) कार्यालय की तरफ से अंदर पहुंचे थे. सभी ने गेट फांदकर परिसर में प्रवेश किया. इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाते दिखे सीजेपी कार्यकर्ता सौरव दास ने भी एक्स पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें CJP के कार्यकर्ता इंकलाब जिंदाबाद और ‘हिंदुस्तान माता की जय’ के नारे लगाते दिखाई दिए. दास ने दावा किया कि उन्होंने जंतर-मंतर को दोबारा हासिल कर लिया है. उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि अगर वे ठान लें तो ऐसा कर सकते हैं. इस दौरान उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी इस्तीफा दो का नारा लगाया. जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की जगह अब कहां मिलेगी? दिल्ली पुलिस ने सोमवार को जंतर-मंतर को आधिकारिक प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया था. इसके बदले राजधानी में तीन जगहें तय की गई हैं. इनमें रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी ग्राउंड शामिल हैं. पुलिस का यह आदेश 28 अप्रैल 2022 के पुराने आदेश में आंशिक बदलाव करता है. नई जगहों पर प्रदर्शन करने के लिए संशोधित नियम और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) अलग से जारी की जाएगी. CJP ने पुलिस को दिया था 24 घंटे का समय इससे पहले सोमवार को CJP के नेताओं ने पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पहुंचकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी. संगठन के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने बताया था कि पुलिस को शांतिपूर्ण प्रदर्शन की जानकारी पहले ही दे दी गई थी, लेकिन उन्हें कोई तारीख नहीं बताई गई. दास ने कहा था कि संगठन ने दिल्ली पुलिस को 24 घंटे का समय दिया है. अगर इस दौरान प्रदर्शन की तारीख नहीं बताई गई तो CJP अपने अगले कदम की घोषणा करेगी. संगठन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित गड़बड़ियों को लेकर विरोध कर रहा है. Also Read: CJP Protest: जंतर-मंतर पर फिर पुलिस की कार्रवाई, हिरासत में सौरव दास और आशुतोष रांका The post Video: जंतर-मंतर का गेट फांदकर अंदर पहुंचे सौरव दास और आशुतोष रांका, पुलिस ने हिरासत में लिया appeared first on Naya Vichar.

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प्रभात खबर का असर: रिम्स के कैंसर भवन में बढ़ेगी सुरक्षा, दवा दलालों की दखलअंदाजी रोकने की तैयारी

रांची. कैंसर मरीजों से मनमाना पैसा वसूलने की समाचार नया विचार में प्रकाशित होने के बाद रिम्स प्रबंधन ने मामले की जांच के लिए टीम गठित की थी. रिम्स की आंतरिक कमिटी ने जांच में पाया है कि कैंसर भवन में दवा प्रतिनिधियों और दलालों की दखलअंदाजी है. इसमें रिम्स के कुछ कर्मियों की संलिप्तता का अंदेशा भी जताया गया है. ऐसे में जांच कमिटी ने पूरे कैंसर भवन में सुरक्षा कर्मियों और सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाने का सुझाव दिया है. जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने का सुझाव जांच कमिटी ने प्रबंधन से यह भी आग्रह किया है कि ऐसी जीवनरक्षक दवाओं की सूची तैयार की जाये, जो रिम्स की फार्मेसी में उपलब्ध नहीं हैं. इन दवाओं को जन औषधि और अमृत फार्मेसी में उपलब्ध कराने की व्यवस्था करने का सुझाव दिया गया है, ताकि मरीजों को जरूरी दवाएं आसानी से मिल सकें. दवाओं की कीमत में अंतर का फायदा उठाते हैं दलाल जानकारों ने बताया कि दलाल दवाओं की खरीद कीमत और अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) के बीच भारी अंतर का फायदा उठाते हैं. इससे उन्हें मरीजों के परिजनों से अधिक पैसे वसूलने का मौका मिलता है. बता दें कि नया विचार के 3 दिसंबर के अंक में कैंसर की दवाओं के लिए चार गुना तक पैसा वसूलने से संबंधित समाचार प्रकाशित की गयी थी. इसके बाद रिम्स प्रबंधन ने अधीक्षक डॉ. हिरेंद्र बिरुआ की अध्यक्षता में जांच टीम गठित की थी. टीम में चार सदस्यों को शामिल किया गया था और एक सप्ताह के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपने को कहा गया था. ये भी पढ़ें: 70 साल से मां दुर्गा की पूजा, 37 साल से मुस्लिम अफरोज आलम हैं संरक्षक! रांची के इस मंदिर की कहानी जीत लेगी दिल कैंसर भवन में प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खोलने की तैयारी कैंसर मरीजों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कैंसर भवन में प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खोलने पर विचार किया जा रहा है. इसके लिए कैंसर के इलाज में उपयोग होने वाली दवाओं की सूची तैयार कर उनकी उपलब्धता सुनिश्चित करने की योजना है. वहीं, दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र से इस सूची के आधार पर दवाएं उपलब्ध कराने का आग्रह किया जायेगा. इससे कैंसर मरीजों को कम कीमत पर जरूरी दवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है. ये भी पढ़ें: जाम में फंसे नगर आयुक्त तो एक घंटे में पहुंचीं 5 JCB! डोरंडा बाजार में 2 घंटे चला बुलडोजर, 50 से ज्यादा निर्माण ध्वस्त The post नया विचार का असर: रिम्स के कैंसर भवन में बढ़ेगी सुरक्षा, दवा दलालों की दखलअंदाजी रोकने की तैयारी appeared first on Naya Vichar.

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CJP Protest: जंतर-मंतर पर दिल्ली पुलिस का एक्शन, हिरासत में सौरव दास और आशुतोष रांका

CJP Protest: दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के बीच एक बार फिर पुलिस ने कार्रवाई की है. CJP के नेता सौरव दास और सह-संयोजक आशुतोष रांका को दिल्ली पुलिस ने दोबारा हिरासत में ले लिया है. जानकारी के मुताबिक, सौरव दास अपने कुछ साथियों के साथ जंतर-मंतर पहुंचे थे. इसी दौरान पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया. उनके साथ मौजूद आशुतोष रांका को भी पुलिस अपने साथ ले गई. सौरव दास ने अपने सोशल मीडिया एक्स पर जारी बयान में कहा गया कि वे जंतर-मंतर में प्रवेश करने में सफल रहे, लेकिन इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया. हालांकि, पुलिस की ओर से इस ताजा कार्रवाई के कारण और दोनों नेताओं को कहां ले जाया गया है, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी नहीं मिली है. दो दिन पहले भी हिरासत में लिए गए थे दोनों नेता इससे पहले 10 अक्टूबर को दिल्ली में CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन के दौरान सौरव दास, आशुतोष रांका और अभिजीत दीपके को पुलिस ने हिरासत में लिया था. बाद में तीनों की एहतियातन गिरफ्तारी की गई थी. रविवार को दिल्ली कैंट पुलिस स्टेशन में कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए जाने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया था. जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर विवाद जारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ CJP लगातार प्रदर्शन कर रही है. संगठन ने जंतर-मंतर पर विरोध जताने की अनुमति देने की मांग भी की थी. The post CJP Protest: जंतर-मंतर पर दिल्ली पुलिस का एक्शन, हिरासत में सौरव दास और आशुतोष रांका appeared first on Naya Vichar.

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CJP Protest: दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के बीच एक बार फिर पुलिस ने कार्रवाई की है. CJP के नेता सौरव दास और सह-संयोजक आशुतोष रांका को दिल्ली पुलिस ने दोबारा हिरासत में ले लिया है. जानकारी के मुताबिक, सौरव दास अपने कुछ साथियों के साथ जंतर-मंतर पहुंचे थे. इसी दौरान पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया. उनके साथ मौजूद आशुतोष रांका को भी पुलिस अपने साथ ले गई. सौरव दास ने अपने सोशल मीडिया एक्स पर जारी बयान में कहा गया कि वे जंतर-मंतर में प्रवेश करने में सफल रहे, लेकिन इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया. हालांकि, पुलिस की ओर से इस ताजा कार्रवाई के कारण और दोनों नेताओं को कहां ले जाया गया है, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी नहीं मिली है. दो दिन पहले भी हिरासत में लिए गए थे दोनों नेता इससे पहले 10 अक्टूबर को दिल्ली में CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन के दौरान सौरव दास, आशुतोष रांका और अभिजीत दीपके को पुलिस ने हिरासत में लिया था. बाद में तीनों की एहतियातन गिरफ्तारी की गई थी. रविवार को दिल्ली कैंट पुलिस स्टेशन में कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए जाने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया था. जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर विवाद जारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ CJP लगातार प्रदर्शन कर रही है. संगठन ने जंतर-मंतर पर विरोध जताने की अनुमति देने की मांग भी की थी. The post CJP Protest: जंतर-मंतर पर दिल्ली पुलिस का एक्शन, हिरासत में सौरव दास और आशुतोष रांका appeared first on Naya Vichar.

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सऊदी अरब, इजरायल, इरबिल… क्या मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सुरक्षा व्यवस्था बिखर रही है?

मध्य पूर्व का मौजूदा संकट अब केवल अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच सैन्य टकराव नहीं रह गया है. होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधित जहाजरानी, इराक के कुर्द इलाकों में ड्रोन हमले, सऊदी अरब पर हूती हमले और सीरिया की बदलती क्षेत्रीय भूमिका- ये सभी घटनाएं एक ऐसे क्षेत्रीय संकट की तस्वीर पेश करती हैं, जिसमें एक मोर्चे पर लिया गया फैसला दूसरे मोर्चे की रणनीति बदल सकता है. 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों के बाद शुरू हुआ संघर्ष अब वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार के लिए भी गंभीर चुनौती बन गया है. होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) के बड़े हिस्से का परिवहन होता है. यहां जहाजों की आवाजाही में गिरावट का असर केवल खाड़ी देशों तक सीमित नहीं रहता; इसका प्रभाव ऊर्जा कीमतों, बीमा लागत और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं पर भी पड़ता है. Read more: The post सऊदी अरब, इजरायल, इरबिल… क्या मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सुरक्षा व्यवस्था बिखर रही है? appeared first on Naya Vichar.

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JPSC-JSSC Exam Scam: CID जांच में खुलासा, झारखंड से नेपाल तक फैला पेपर लीक सिंडिकेट, पैसे लेकर रटवाए गए थे उत्तर

JSSC JPSC Exam Scam: जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों की जांच में सीआइडी इस निष्कर्ष तक पहुंची है कि जेएसएससी और जेपीएससी की परीक्षाओं में व्यापक स्तर पर गड़बड़ियां हुई हैं. पहले कुछ प्रारंभिक तथ्यों के आधार पर सीआइडी ने गड़बड़ियां मानी थी पर अब कई पुख्ता तथ्य सीआइडी को मिले हैं. इन तथ्यों का आरोपियों के बैंक खाते और उनके मोबाइल लोकेशन से मिलान किया गया है. ये सभी तथ्य एक बड़े गिरोह के होने के संकेत दे रहे हैं. गिरोह कई छोटे-छोटे समूह में बंटा हुआ था. ये लोग परीक्षा के अभ्यर्थियों की तलाश करते थे, उन्हें सिंडिकेट तक पहुंचाते थे और पैसे लेकर उन्हें सफल कराया जाता था. नेपाल तक फैला था नेटवर्क, पैसे लेकर रटवाये उत्तर जेएसएससी के मामले में सीआइडी ने कोर्ट को बताया है कि झारखंड में बोकारो के दुग्धा, पटना, कोलकाता, आसनसोल, दुर्गापुर और नेपाल में अभ्यर्थियों को सीजीएल परीक्षा के उत्तर रटवाये गये. सीजीएल पेपर लीक मामले में गिरफ्तार एक आरोपी मुन्ना सिंह ने माना है कि उसने अभ्यर्थियों से अपने एकाउंट में जनवरी 2026 में पांच लाख रुपये लिये थे. प्रारंभ में उसने सीआइडी के समक्ष बताया था कि यह पैसे उसने अपने पिता के इलाज के मकसद से लिये थे. सीआइडी ने जांच में पाया कि मुन्ना ने अभ्यर्थियों को कोलकाता एक होटल में परीक्षा से पहले उत्तर रटवाये थे. इसके साथ अमित सिंह, कुंदन कुमार और अमित लकड़ा नाम के लोग थे, जो इस गिरोह के हिस्सा थे. इन आरापियों के खातों की जांच में भी सीआइडी को पैसों की लेन-देन के तथ्य मिले है. सीआइडी ने पिछले दिनों संदीप कुमार और राजेश प्रसाद यादव को भी गिरफ्तार किया था, जिन्होंने अभ्यर्थियों से पैसों की लेन-देन की जानकारी दी है. रिट याचिकाओं को अपील से जोड़ने का आग्रह खारिज झारखंड हाइकोर्ट ने जेपीएससी परीक्षाओं को रद्द करने की चुनौती देने वाली रिट याचिकाओं को अपील याचिका के साथ संबद्ध करने के विशेष आग्रह को खारिज कर दिया. चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस अरुण कुमार राय की खंडपीठ ने सोमवार को इस मामले में सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता के आग्रह को स्वीकार करने से इनकार कर दिया. इससे पूर्व अयूब तिर्की की ओर से अधिवक्ता सुभाशिष रसिक सोरेन ने रिट याचिकाओं को अपील के साथ टैग करने का आग्रह किया. सफल अभ्यर्थियों की ओर से उपस्थित अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने इसका विरोध किया. उन्होंने दलील दी कि एकल पीठ में मामले की सुनवाई अंतिम दौर में है. ऐसे में रिट याचिकाओं को खंडपीठ में भेजने से याचिकाकर्ताओं के कानूनी अधिकार प्रभावित होंगे. उन्होंने कहा कि हाइकोर्ट के नियमों के तहत प्रत्येक नागरिक को अपीलीय फोरम का अधिकार प्राप्त है. इस स्थिति में याचिकाओं को अपील के साथ संबद्ध करना नियमों के अनुरूप नहीं होगा. इसे भी पढ़ें: JPSC परीक्षा में गड़बड़ी पर झारखंड प्रशासन का कबूलनामा, हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान क्या हुआ, जानें पूरा मामला दो आरोपियों की जमानत याचिका खारिज अपर न्यायायुक्त योगेश कुमार की अदालत ने जेएसएससी सीजीएल परीक्षा गड़बड़ी मामले में दो आरोपी मिथिलेश कुमार पांडेय और मनु कुमार सिंह की जमानत याचिका खारिज कर दी है. दोनों ने बीते पांच अक्तूबर को याचिका दाखिल कर कोर्ट से जमानत की गुहार लगाई थी. सीआइडी ने तीन अक्तूबर को मिथिलेश कुमार पांडेय को और मनु कुमार सिंह को पांच अक्तूबर को गिरफ्तार किया था. दोनों पर अपने संपर्क के जरिए कई परीक्षार्थियों की सेटिंग करने का आरोप है. आरोपियों ने अभ्यर्थियों को धनबाद और बोकारो में परीक्षा के प्रश्न और उसके उत्तर रटवाने मे मदद की थी. इसे भी पढ़ें: JPSC परीक्षा धांधली मामले में दो फाड़ हुए आंदोलनकारी छात्र, उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन पर हाईकोर्ट में I.A. दाखिल The post JPSC-JSSC Exam Scam: CID जांच में खुलासा, झारखंड से नेपाल तक फैला पेपर लीक सिंडिकेट, पैसे लेकर रटवाए गए थे उत्तर appeared first on Naya Vichar.

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14 खामियां, 220 रुपये फीस कम… सुप्रीम कोर्ट में क्यों अटकी राहुल गांधी की याचिका?

Rahul Gandhi SIR Petition: कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्ष के अन्य नेताओं की ओर से चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में कई कमियां सामने आई हैं. सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने इस याचिका पर 14 आपत्तियां दर्ज की हैं. इनमें जरूरी दस्तावेजों की कमी, कुछ पक्षकारों को लेकर स्पष्टीकरण और 220 रुपये की फीस कम जमा होने जैसे मामले शामिल हैं. सभी आपत्तियां याचिका दाखिल करने की प्रक्रिया से जुड़ी हैं. 12 अक्टूबर को दाखिल हुई थी याचिका राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने सोमवार (12 अक्तूबर) को चुनाव आयोग के खिलाफ संयुक्त रिट याचिका दाखिल की थी. उसी दिन विपक्षी नेताओं ने दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च भी किया था. याचिका एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड एस. प्रसन्ना के माध्यम से दाखिल की गई है. इस मामले को राहुल गांधी बनाम हिंदुस्तान निर्वाचन आयोग के नाम से दर्ज किया गया है. इसका डायरी नंबर 64196/2026 है. याचिका में हिंदुस्तान निर्वाचन आयोग (ECI), मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी को प्रतिवादी बनाया गया है. राहुल गांधी की SIR याचिका में सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने बताईं ये 14 कमियां राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं की ओर से चुनाव आयोग के खिलाफ दाखिल याचिका में सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने 14 कमियां बताई हैं. इनमें जरूरी दस्तावेजों का नहीं होना, कुछ जानकारियों का गलत दर्ज होना और कोर्ट फीस में 220 रुपये की कमी शामिल है. लॉ चक्र के मुताबिक रजिस्ट्री ने सोमवार (12 अक्तूबर) को ये आपत्तियां दर्ज की हैं. जानिए याचिका में कौन-कौन सी 14 कमियां मिलीं प्रतिवादी का नाम गलत: याचिका की लिस्टिंग के लिए दिए गए फॉर्म में प्रतिवादी का नाम ठीक करने को कहा गया है. पक्षकारों की जानकारी में गलती: याचिका के पेज नंबर 9 पर प्रतिवादियों की जानकारी सही नहीं है. निजी लोगों को पक्षकार बनाने पर सवाल: रजिस्ट्री ने पूछा है कि इस याचिका में निजी लोगों को प्रतिवादी क्यों बनाया गया है. इसका कारण स्पष्ट करना होगा. पहले की याचिका से जुड़ी जानकारी नहीं: याचिका में वह जरूरी पैराग्राफ नहीं है, जिसमें पहले दाखिल समान मामलों से संबंधित जानकारी दी जाती है. मांग वाले हिस्से में गलत नंबर: याचिका में अदालत से जो राहत मांगी गई है, उस हिस्से में प्रतिवादी का नंबर गलत है. इसे सुधारना होगा. पुराने फैसले की कॉपी नहीं: याचिका में 24 जून 2025 के जिस फैसले का जिक्र किया गया है, उसकी कॉपी संलग्न नहीं है. दस्तावेज की तारीख में अंतर: याचिका के साथ लगाए गए अनुबंध P2 की तारीख मेल नहीं खा रही है. दो पन्नों की रंगीन कॉपी जरूरी: पेज नंबर 57 और 64 की रंगीन प्रतियां जमा करने को कहा गया है. केस नंबर में गड़बड़ी: अनुबंध P5 में दर्ज मामले का नंबर संबंधित जानकारी से मेल नहीं खा रहा है. पेन ड्राइव जमा करनी होगी: अनुबंध P6 से जुड़ी सामग्री पेन ड्राइव में उपलब्ध कराने को कहा गया है. नौ याचिकाकर्ताओं के वकालतनामे नहीं: याचिकाकर्ता संख्या 3 से 11 तक के वकालतनामे जमा नहीं किए गए हैं. ये दस्तावेज वकील को अदालत में पैरवी करने की अनुमति देते हैं. मल्लिकार्जुन खरगे का पहचान पत्र स्पष्ट नहीं: याचिकाकर्ता संख्या 2 कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के पहचान पत्र की साफ कॉपी मांगी गई है. 220 रुपये की फीस कम: रजिस्ट्री ने बताया है कि निर्धारित कोर्ट फीस में 220 रुपये और जमा करने होंगे. दस्तावेजों की छपाई और पेज नंबर में कमियां: कुछ पन्नों की लिखावट हल्की है, कुछ का फॉन्ट छोटा है और कुछ दस्तावेज पढ़ने में स्पष्ट नहीं हैं. SIR पर रोक लगाने की मांग याचिका में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया गया है. विपक्षी नेता इन आरोपों को वोट चोरी का नाम दे रहे हैं. याचिकाकर्ताओं ने चुनाव आयोग से संबंधित रिकॉर्ड अदालत में पेश कराने की मांग की है. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समिति बनाने का अनुरोध किया गया है, जो SIR के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों की जांच करे. विपक्षी नेताओं ने सभी राज्यों में SIR की प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने की मांग भी की है. सुप्रीम कोर्ट में कब होगी सुनवाई? फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस याचिका की सुनवाई के लिए किसी पीठ का गठन नहीं किया गया है और न ही सुनवाई की तारीख तय हुई है. चुनाव आयोग और अन्य प्रतिवादियों का जवाब भी आना बाकी है. Also Read: SIR के खिलाफ 7 दिन में 5वां प्रदर्शन… इंडिया ब्लॉक की नैरेटिव जीत या अभी बाकी है लड़ाई? The post 14 खामियां, 220 रुपये फीस कम… सुप्रीम कोर्ट में क्यों अटकी राहुल गांधी की याचिका? appeared first on Naya Vichar.

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पिता नहीं बन पाए क्रिकेटर, बेटे को पहली क्लास में ही भेजा एकेडमी; रणजी में धमाल मचा रहा रांची का शिखर मोहन

Shikhar Mohan Story: पिता का अधूरा सपना अक्सर बेटे के कंधे पर सवार होकर मंजिल तक पहुंचता है. रांची के डोरंडा में पले-बढ़े 21 साल के बाएं हाथ के ओपनर शिखर मोहन की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. उनके पिता खुद तेज गेंदबाज ऑलराउंडर थे, लेकिन क्रिकेटर नहीं बन पाए. उन्होंने ठान लिया कि बेटे को क्रिकेटर बनाएंगे और पहली क्लास में ही शिखर को क्रिकेट एकेडमी में डाल दिया. आज वही शिखर झारखंड क्रिकेट का सबसे बड़ा नाम बनकर उभरा है. पिछले रणजी सत्र में 613 रन ठोककर सुर्खियां बटोरने वाले शिखर ने नए सीजन 2026-27 की शुरुआत भी केरल के खिलाफ जमशेदपुर के कीनन स्टेडियम में 143 रन की धमाकेदार पारी से की है. 13 साल की उम्र में मिला था झारखंड की टीम में मौका ईशान किशन और शिखर मोहन (फोटो- सोशल मीडिया) दलीप ट्रॉफी फाइनल में लाल मिट्टी की पिच शिखर के लिए नया चैलेंज थी. तब ईस्ट जोन के कप्तान और झारखंड के सीनियर ईशान किशन ने उनकी मदद की. ईशान ने उन्हें गैरजरूरी शॉट से बचने की सलाह दी. दोनों ने पहली पारी में 94 और दूसरी में 126 रन की साझेदारी भी की. सीने पर गेंद लगी, फिर भी जड़ा नाबाद शतक शिखर के लिए सबसे यादगार पारी रणजी वाली नहीं, बल्कि अंडर-19 में यूपी के खिलाफ वाली है. 20 रन पर सीने पर गेंद लगने से उन्हें रिटायर्ड हर्ट होना पड़ा. दो विकेट गिरने पर वह दर्द के बावजूद लौटे और 400 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए नाबाद शतक जड़ा. टीम 40 रन से हारी, पर ये पारी उनके जज्बे की पहचान बन गई. मुंबई इंडियंस के ट्रायल में भी ले चुके हैं हिस्सा घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छे प्रदर्शन के बाद शिखर की नजर आईपीएल पर भी है. वह पांच बार की चैंपियन मुंबई इंडियंस के ट्रायल में हिस्सा ले चुके हैं. हालांकि, फिलहाल उनका ध्यान घरेलू क्रिकेट में लगातार रन बनाने और झारखंड को खिताब दिलाने पर है. शिखर ने अभी हिंदुस्तानीय टीम के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण नहीं किया है. इसलिए टीम इंडिया में जगह बनाना उनके लिए अगला बड़ा लक्ष्य है. ये भी पढ़ें: Ranji Trophy : शिखर मोहन के शतक से झारखंड ने केरल को बैकफुट पर धकेला, जानें पहले दिन का स्कोरकार्ड The post पिता नहीं बन पाए क्रिकेटर, बेटे को पहली क्लास में ही भेजा एकेडमी; रणजी में धमाल मचा रहा रांची का शिखर मोहन appeared first on Naya Vichar.

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सलमान खान संग अफेयर की चर्चा, प्रभास से अनबन के किस्से, जानें पूजा हेगड़े की जिंदगी का अनसुना चैप्टर

सलमान खान जब पूजा हेगड़े के भाई की शादी के रिसेप्शन में पहुंचे, तो हर तरफ उनके रिश्ते की चर्चाएं शुरू हो गईं. हर कोई यह जानना चाहता था कि क्या दोनों के बीच सच में कुछ चल रहा है. लेकिन जब इस बारे में पूजा से सवाल किया गया, तो उन्होंने एक ऐसा जवाब दिया जिसने सबको हैरान कर दिया. ‘बुट्टा बोम्मा’ जैसे जादुई गाने से लोगों के दिलों पर राज करने वाली पूजा हेगड़े की जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. मिस इंडिया के मंच से मॉडलिंग और फिर फिल्मों तक पहुंचने वाली पूजा का सफर जितना चमक-धमक से भरा रहा, उनके जीवन के उतार-चढ़ाव और विवाद भी उतने ही चर्चा में रहे. आज उनके जन्मदिन पर आइए जानते हैं कि उस अफेयर की चर्चाओं के पीछे की असली कहानी क्या थी और उनके सफर के सभी अनसुने किस्से- मुंबई में जन्म, मिस इंडिया से मॉडलिंग तक का सफर पूजा हेगड़े का जन्म 13 अक्टूबर 1990 को मुंबई में हुआ था, हालांकि उनका परिवार मूल रूप से कर्नाटक के उडुपी से है. उन्होंने अपनी पूरी पढ़ाई मुंबई में ही रहकर पूरी की. बचपन से ही उन्हें ग्लैमर और फैशन की दुनिया आकर्षित करती थी, जिसके चलते उन्होंने मॉडलिंग में किस्मत आजमाने का फैसला किया. पूजा हेगड़े और सलमान खान प्रभास के साथ अनबन और साउथ सिनेमा पर बयान का विवाद प्रभास के साथ अनबन की समाचारें: साल 2021 में फिल्म ‘राधे श्याम’ के दौरान पूजा हेगड़े और प्रभास के बीच अनबन की समाचारें सामने आई थीं. 19 सितंबर 2021 को ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि पूजा के कथित तौर पर शूटिंग पर देर से पहुंचने से प्रभास नाराज थे. हालांकि, एक सूत्र ने इन समाचारों को अफवाह बताया. इसके बाद फिल्म के निर्माता यूवी क्रिएशंस ने भी इन समाचारों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि दोनों कलाकार एक-दूसरे का सम्मान करते हैं और पूजा हमेशा समय पर शूटिंग के लिए पहुंचती थीं. साउथ इंडस्ट्री पर बयान: साल 2020 में उनके एक पुराने इंटरव्यू का क्लिप वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने साउथ फिल्मों में ग्लैमर और शरीर के प्रदर्शन को लेकर कुछ ऐसा कह दिया जिससे फैंस भड़क गए. बाद में पूजा ने सफाई देते हुए कहा कि उनकी बात को गलत तरीके से पेश किया गया था और वह तेलुगु सिनेमा का बेहद सम्मान करती हैं. उतार-चढ़ाव के बीच आज भी छाई हैं पूजा ‘हाउसफुल 4’, ‘सर्कस’ और कई सुपरहिट साउथ फिल्मों का हिस्सा रहीं पूजा हेगड़े ने हर असफलता से सीख लेकर खुद को साबित किया है. आज जन्मदिन के मौके पर उनकी कहानी यही सिखाती है कि ग्लैमर की दुनिया में टिके रहने के लिए सिर्फ खूबसूरती काफी नहीं, बल्कि हर विवाद का सामना करना और अपने काम पर ध्यान देना ही असली सफलता है. ये भी पढ़ें: ‘स्टारडम नहीं, मुझे आज भी याद आती है कंडक्टर की वो नौकरी’, रजनीकांत बोले- ‘मैं खुद को कभी स्टार मान ही नहीं पाया’ ये भी पढ़ें: ‘समाज बिग लॉस में, छपरी बिग बॉस में’: मनोज तिवारी की बेटी रीति पर भड़के कॉमेडियन सुनील पाल; बनाया मजाक The post सलमान खान संग अफेयर की चर्चा, प्रभास से अनबन के किस्से, जानें पूजा हेगड़े की जिंदगी का अनसुना चैप्टर appeared first on Naya Vichar.

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CJI ने राहुल गांधी-खरगे को मिलने का समय क्यों नहीं दिया? जानें क्या है प्रोटोकॉल

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने विपक्षी नेताओं को मिलने का समय देने से इनकार कर दिया. सीजेआई सूर्यकांत ने 11 अक्टूबर को लिखे पत्र में स्पष्ट किया कि विपक्षी नेताओं की ओर से उठाए गए मुद्दे पहले से ही सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन हैं. ऐसे मामलों पर प्रशासनिक स्तर पर बैठक करना उचित नहीं होगा. उन्होंने कहा कि शक्तियों का पृथक्करण संविधान की एक महत्वपूर्ण विशेषता है और लंबित मामलों पर इस तरह की बैठक करना स्थापित न्यायिक मर्यादाओं के अनुकूल नहीं होगा. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या नेतृत्वक दलों के प्रतिनिधियों से CJI की मुलाकात के लिए कोई तय प्रोटोकॉल है? क्या न्यायिक व्यवस्था या चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर नेताओं को मुख्य न्यायाधीश से मिलना चाहिए या इन मामलों को संसद और अदालत के जरिए उठाना उचित होगा? इन सवालों पर सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता ने अपनी राय रखी है. {“type”:”faq”,”question”:”सवाल 1: हिंदुस्तान के मुख्य न्यायाधीश के नेतृत्वक दलों से मिलने का क्या प्रोटोकॉल है?”,”answer”:”जवाब: संविधान के अनुच्छेद 50 में न्यायपालिका और कार्यपालिका को अलग रखने की व्यवस्था की गई है. शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत को सुप्रीम कोर्ट ने 1973 में केशवानंद हिंदुस्तानी मामले में दिए गए ऐतिहासिक फैसले में भी मान्यता दी थी. तत्कालीन यूपीए प्रशासन में विधि मंत्री रहे वीरप्पा मोइली ने 2010 में न्यायिक मानकों और जवाबदेही से संबंधित विधेयक पेश किया था, लेकिन यह संसद से पारित नहीं हो सका.nnइस विधेयक में सुप्रीम कोर्ट की ओर से 1997 में अपनाए गए फुल कोर्ट के प्रस्ताव का उल्लेख था. इसका उद्देश्य न्यायाधीशों के आचरण और न्यायिक स्वतंत्रता से जुड़े मानकों को स्पष्ट करना था. न्यायपालिका की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए न्यायाधीशों को नेतृत्वक गतिविधियों से दूरी बनाए रखनी चाहिए. ऐसे में नेतृत्वक दलों के नेताओं से मुलाकात के मामले में भी न्यायिक निष्पक्षता और संस्थागत मर्यादा का ध्यान रखना जरूरी है.”}{“type”:”faq”,”question”:”सवाल 2: विपक्ष के नेता न्यायिक सुनवाई के बजाय प्रशासनिक बैठक पर जोर क्यों दे रहे हैं?”,”answer”:”जवाब: संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत सभी नागरिकों को कानून के समक्ष समानता का अधिकार प्राप्त है. किसी नेतृत्वक नेता को केवल अपने पद के कारण कोई विशेष कानूनी अधिकार नहीं मिल जाता. यदि किसी नेता के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है, तो वह संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है.nnन्यायपालिका या चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में सुधार से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जाना चाहिए. यदि किसी कानून में बदलाव की जरूरत है, तो विपक्षी दल संसद में बहस के जरिए यह मांग उठा सकते हैं. ऐसे मामलों में मुख्य न्यायाधीश से प्रशासनिक स्तर पर मुलाकात करने के बजाय न्यायिक प्रक्रिया और विधायी व्यवस्था के माध्यम से समाधान तलाशना अधिक उचित होगा.”}{“type”:”faq”,”question”:”सवाल 3: क्या पहले भी CJI या सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की नेतृत्वक प्रतिनिधियों से मुलाकात को लेकर विवाद हुआ है?”,”answer”:”जवाब: हाल ही में ‘एक देश, एक चुनाव’ से जुड़ी समिति के सदस्यों और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के बीच बैठक को लेकर भी विवाद सामने आया था. इस समिति की अध्यक्षता पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद कर रहे हैं.nnइस मुद्दे पर विवाद की आशंका को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट के फुल कोर्ट ने समिति के सदस्यों से मुलाकात नहीं करने का फैसला किया था. इसकी एक वजह यह भी बताई गई कि भविष्य में इस विषय से जुड़ा कोई मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने सुनवाई के लिए आ सकता है. ऐसी स्थिति में न्यायाधीशों की निष्पक्षता और न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखना महत्वपूर्ण हो जाता है.”}{“type”:”faq”,”question”:”सवाल 4: चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. इस पर क्या कहना है?”,”answer”:”जवाब: संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं. चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया और चयन समिति की संरचना को लेकर लंबे समय से बहस होती रही है.nnसंसद ने वर्ष 2023 में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित कानून पारित किया था. इस कानून के तहत चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री की ओर से नामित एक केंद्रीय मंत्री शामिल होते हैं. इस व्यवस्था में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को शामिल नहीं किया गया है.nnचयन प्रक्रिया में न्यायपालिका की भूमिका को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी कानूनी विवाद उठा है. ऐसे संवेदनशील मामलों में न्यायपालिका और नेतृत्वक संस्थाओं के बीच स्पष्ट सीमाएं बनाए रखना जरूरी है. खासकर तब, जब चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता जैसे मुद्दे अदालत के विचाराधीन हों.”}{“type”:”faq”,”question”:”सवाल 5: क्या ऐसी मुलाकातें संविधान के मूलभूत ढांचे पर आघात मानी जा सकती हैं?”,”answer”:”जवाब: न्यायाधीशों के परिजनों को प्रशासनी पैनल में शामिल किए जाने जैसे मुद्दों पर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं. ऐसे माहौल में सत्ता पक्ष या विपक्ष के नेताओं की न्यायाधीशों से मुलाकात को लेकर भी निष्पक्षता और न्यायिक स्वतंत्रता से संबंधित चिंताएं पैदा हो सकती हैं.nnकेशवानंद हिंदुस्तानी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के मूलभूत ढांचे के सिद्धांत को स्थापित किया था. न्यायपालिका की स्वतंत्रता इसी संवैधानिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है. यदि नेतृत्वक मामलों में न्यायाधीशों पर किसी तरह का अनुचित दबाव बनाने की कोशिश होती है, तो इसे न्यायिक स्वतंत्रता और संस्थागत मर्यादा के लिए चिंता का विषय माना जा सकता है.nnविपक्षी दल संविधान और कानून के शासन की बात करते हैं. ऐसे में उन्हें भी संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और न्यायिक प्रक्रिया की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए. नेतृत्वक विवादों के समाधान के लिए मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात पर दबाव बनाने के बजाय संसद, अदालत और अन्य संवैधानिक मंचों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए.”} ये भी पढ़ें: CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सारी याचिकाएं मंजूर, 27 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई The post CJI ने राहुल गांधी-खरगे को मिलने का समय क्यों नहीं दिया? जानें क्या है प्रोटोकॉल appeared first on Naya Vichar.

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