जंतर-मंतर अब बना इतिहास का हिस्सा. किसान आंदोलन, अन्ना के भूख हड़ताल से लेकर CJP Protest तक की पूरी कहानी
सत्ता के खिलाफ प्रदर्शन, जिंदाबाद-मुर्दाबाद के नारे, मंत्रियों के इस्तीफे की मांग, भूख हड़ताल और लाठीचार्ज. विरोध की ये तस्वीरें जेहन में आते ही दिल्ली के जंतर-मंतर की याद आती है. अन्ना आंदोलन, लोकपाल की मांग, पहलवानों का धरना और CAA विरोध जैसे कई बड़े आंदोलनों का गवाह रहा दिल्ली का जंतर-मंतर अब निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से बाहर हो गया है. आखिर, यह जगह विरोध की आवाज का प्रमुख केंद्र कैसे बनी और यहां कौन-कौन से बड़े आंदोलन हुए? जानिए पूरी कहानी. {“type”:”faq”,”question”:”बोट क्लब से जंतर-मंतर तक कैसे पहुंची विरोध की आवाज?”,”answer”:”1988 में किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में हजारों किसानों ने दिल्ली के बोट क्लब पर डेरा डाला. करीब एक सप्ताह चले इस आंदोलन में लगभग पांच लाख किसानों के शामिल होने का उल्लेख मिलता है. प्रशासन से आश्वासन मिलने के बाद आंदोलन खत्म हुआ, लेकिन इसने दिल्ली में प्रदर्शनों के लिए तय जगहों की व्यवस्था बदलने की नींव रखी.nn1993 में जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शनों के प्रमुख केंद्र के रूप में उभरा. इसके बाद तीन दशक से ज्यादा समय तक यहां किसानों, छात्रों, खिलाड़ियों और सामाजिक संगठनों ने अपनी मांगें उठाईं.”}{“type”:”faq”,”question”:”1993 में जंतर-मंतर कैसे बना विरोध प्रदर्शनों का केंद्र?”,”answer”:”18वीं सदी में जयपुर के महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने जंतर-मंतर का निर्माण खगोलीय गणनाओं के लिए कराया था. लेकिन समय के साथ यह जगह विरोध प्रदर्शनों के प्रमुख केंद्र के रूप में पहचान बनाने लगी.n1988 में किसानों के बड़े आंदोलन के बाद दिल्ली के बोट क्लब पर प्रदर्शनों को लेकर सख्ती बढ़ा दी गई. ऐसे में प्रदर्शनकारियों को अपनी मांगें उठाने के लिए वैकल्पिक जगह की जरूरत थी. संसद और प्रशासनी कार्यालयों के नजदीक होने के कारण जंतर-मंतर इसके लिए उपयुक्त जगह बनकर उभरा. यहां से प्रदर्शनकारी अपनी आवाज प्रशासन और मीडिया तक पहुंचा सकते थे. इसी वजह से 1993 से जंतर-मंतर पर धरने, भूख हड़ताल और जन आंदोलन होने लगे. हालांकि, इसे औपचारिक रूप से धरना स्थल घोषित करने को लेकर लंबे समय तक स्थिति स्पष्ट नहीं थी.”}{“type”:”faq”,”question”:”अन्ना आंदोलन से AAP के गठन तक, कैसे बदली देश की नेतृत्व?”,”answer”:”5 अप्रैल 2011 को सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार के खिलाफ और जन लोकपाल विधेयक की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल शुरू की. इस आंदोलन को देशभर में समर्थन मिला. अरविंद केजरीवाल, प्रशांत भूषण और कई अन्य सामाजिक कार्यकर्ता इससे जुड़े. आंदोलन ने भ्रष्टाचार और प्रशासनी जवाबदेही को राष्ट्रीय बहस का प्रमुख मुद्दा बना दिया. nnहालांकि, आंदोलन के दौरान ही इसके समर्थकों के बीच नेतृत्वक रास्ता अपनाने को लेकर मतभेद सामने आए. इसके बाद अरविंद केजरीवाल समेत कुछ कार्यकर्ताओं ने नेतृत्व में उतरने का फैसला किया. नवंबर 2012 में आम आदमी पार्टी (AAP) का गठन हुआ, जिसने आगे चलकर दिल्ली की नेतृत्व में अहम भूमिका निभाई.”}{“type”:”faq”,”question”:”निर्भया केस से CAA विरोध तक, जंतर-मंतर पर कब-कब हुए प्रदर्शन?”,”answer”:”2012 में दिल्ली के निर्भया गैंगरेप मामले के बाद जंतर-मंतर पर न्याय की मांग को लेकर प्रदर्शन हुए. 2014 में अरुणाचल प्रदेश के छात्र नीडो तानिया की मौत के बाद भी यहां विरोध दर्ज कराया गया. इन प्रदर्शनों ने स्त्री सुरक्षा, नस्लीय भेदभाव और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर देश का ध्यान खींचा.nnमार्च-अप्रैल 2017 में तमिलनाडु के किसानों ने कर्ज माफी, सूखा राहत और कावेरी प्रबंधन बोर्ड के गठन की मांग को लेकर करीब 40 दिनों तक धरना दिया. दिसंबर 2019 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ भी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन हुए. इस तरह यह जगह अलग-अलग सामाजिक और नेतृत्वक मुद्दों पर विरोध की अहम आवाज बनी रही.”}{“type”:”faq”,”question”:”NGT ने क्यों लगाया प्रदर्शनों पर रोक?”,”answer”:”अक्टूबर 2017 में NGT ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शनों पर रोक लगाने और प्रदर्शनकारियों को रामलीला मैदान में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया. स्थानीय निवासियों ने शोर और गंदगी की शिकायत की थी. इस फैसले के बाद प्रदर्शनकारियों के विरोध के अधिकार को लेकर बहस तेज हो गई और मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा.nnजुलाई 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर और बोट क्लब क्षेत्र में प्रदर्शनों पर पूर्ण प्रतिबंध को स्वीकार नहीं किया. अदालत ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और आम लोगों की सुविधा के बीच संतुलन बनाने पर जोर दिया. साथ ही प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए उचित दिशा-निर्देश तय करने की जरूरत भी बताई.”}{“type”:”faq”,”question”:”पहलवानों के धरने से CJP Protest तक, जंतर-मंतर पर किन मुद्दों ने खींचा देश का ध्यान?”,”answer”:”अप्रैल 2023 में ओलंपिक पदक विजेता साक्षी मलिक, विनेश फोगाट और बजरंग पूनिया समेत कई पहलवानों ने जंतर-मंतर पर धरना दिया. उन्होंने हिंदुस्तानीय कुश्ती महासंघ के तत्कालीन अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की. इस प्रदर्शन ने स्पोर्ट्स प्रशासन और स्त्री खिलाड़ियों की सुरक्षा को राष्ट्रीय बहस का मुद्दा बना दिया.nn2026 में कॉकक्रोच जनता पार्टी (CJP) ने परीक्षा संबंधी कथित अनियमितताओं को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई. इसके बाद पार्टी ने 10 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के विरोध में दूसरा प्रदर्शन प्रस्तावित किया. हालांकि, पुलिस से अनुमति नहीं मिलने के कारण प्रदर्शन नहीं हो सका और कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की समाचारें सामने आईं.”}{“type”:”faq”,”question”:”अब दिल्ली में कहां कर सकेंगे प्रदर्शन?”,”answer”:”दिल्ली पुलिस ने 12 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया. पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार के आदेश के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से गठित समिति की सिफारिशों के आधार पर प्रदर्शन के लिए तीन नए स्थान तय किए गए हैं.nnइनमें मध्य दिल्ली का रामलीला मैदान, उत्तर दिल्ली का बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी मैदान शामिल हैं. इन जगहों पर प्रदर्शन आयोजित करने के लिए संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की जाएगी. इसके तहत प्रदर्शनों की अनुमति और आयोजन से जुड़े नियम तय होंगे.”} The post जंतर-मंतर अब बना इतिहास का हिस्सा. किसान आंदोलन, अन्ना के भूख हड़ताल से लेकर CJP Protest तक की पूरी कहानी appeared first on Naya Vichar.

