Shikhar Mohan Story: पिता का अधूरा सपना अक्सर बेटे के कंधे पर सवार होकर मंजिल तक पहुंचता है. रांची के डोरंडा में पले-बढ़े 21 साल के बाएं हाथ के ओपनर शिखर मोहन की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. उनके पिता खुद तेज गेंदबाज ऑलराउंडर थे, लेकिन क्रिकेटर नहीं बन पाए. उन्होंने ठान लिया कि बेटे को क्रिकेटर बनाएंगे और पहली क्लास में ही शिखर को क्रिकेट एकेडमी में डाल दिया.
आज वही शिखर झारखंड क्रिकेट का सबसे बड़ा नाम बनकर उभरा है. पिछले रणजी सत्र में 613 रन ठोककर सुर्खियां बटोरने वाले शिखर ने नए सीजन 2026-27 की शुरुआत भी केरल के खिलाफ जमशेदपुर के कीनन स्टेडियम में 143 रन की धमाकेदार पारी से की है.
13 साल की उम्र में मिला था झारखंड की टीम में मौका
दलीप ट्रॉफी फाइनल में लाल मिट्टी की पिच शिखर के लिए नया चैलेंज थी. तब ईस्ट जोन के कप्तान और झारखंड के सीनियर ईशान किशन ने उनकी मदद की. ईशान ने उन्हें गैरजरूरी शॉट से बचने की सलाह दी. दोनों ने पहली पारी में 94 और दूसरी में 126 रन की साझेदारी भी की.
सीने पर गेंद लगी, फिर भी जड़ा नाबाद शतक
शिखर के लिए सबसे यादगार पारी रणजी वाली नहीं, बल्कि अंडर-19 में यूपी के खिलाफ वाली है. 20 रन पर सीने पर गेंद लगने से उन्हें रिटायर्ड हर्ट होना पड़ा. दो विकेट गिरने पर वह दर्द के बावजूद लौटे और 400 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए नाबाद शतक जड़ा. टीम 40 रन से हारी, पर ये पारी उनके जज्बे की पहचान बन गई.
मुंबई इंडियंस के ट्रायल में भी ले चुके हैं हिस्सा
घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छे प्रदर्शन के बाद शिखर की नजर आईपीएल पर भी है. वह पांच बार की चैंपियन मुंबई इंडियंस के ट्रायल में हिस्सा ले चुके हैं. हालांकि, फिलहाल उनका ध्यान घरेलू क्रिकेट में लगातार रन बनाने और झारखंड को खिताब दिलाने पर है. शिखर ने अभी हिंदुस्तानीय टीम के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण नहीं किया है. इसलिए टीम इंडिया में जगह बनाना उनके लिए अगला बड़ा लक्ष्य है.
ये भी पढ़ें: Ranji Trophy : शिखर मोहन के शतक से झारखंड ने केरल को बैकफुट पर धकेला, जानें पहले दिन का स्कोरकार्ड
The post पिता नहीं बन पाए क्रिकेटर, बेटे को पहली क्लास में ही भेजा एकेडमी; रणजी में धमाल मचा रहा रांची का शिखर मोहन appeared first on Naya Vichar.

