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45 डिग्री से ऊपर की गर्मी में इलेक्ट्रिक कार कितनी सेफ होती है? जानें यहां हर एक बात

Electric Cars In High Temperature: पिछले कुछ सालों में इलेक्ट्रिक कारों में आग लगने की कई घटनाएं सामने आई हैं, जिसके बाद नए कस्टमर्स के मन में सेफ्टी को लेकर सवाल उठना बिल्कुल लाजमी है. हालांकि, यह समझना जरूरी है कि सिर्फ EV ही नहीं, बल्कि किसी भी तरह की कार में आग लग सकती है. इसके पीछे कई वजहें हो सकती हैं, जैसे तकनीकी खराबी, शॉर्ट सर्किट या फिर बेहद ज्यादा गर्मी. यही कारण है कि बहुत से लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि क्या इलेक्ट्रिक गाड़ियां उन इलाकों में सेफ हैं, जहां टेम्परेचर काफी ज्यादा रहता है. आइए जानते हैं.

क्या इलेक्ट्रिक गाड़ियां हाई टेम्परेचर में सेफ तरीके से काम कर सकते हैं?

हिंदुस्तान के कई हिस्सों में गर्मियों के दौरान टेम्परेचर 45 डिग्री सेल्सियस से भी ऊपर पहुंच जाता है. ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल आना बिल्कुल जायज है. तो इसका सीधा जवाब बिल्कुल हां है. EVs यानी इलेक्ट्रिक गाड़ियां हाई टेम्परेचर में भी सेफ तरीके से काम करने के लिए डिजाइन किए जाते हैं. 45 डिग्री से ज्यादा गर्मी में भी ये अच्छी तरह ऑपरेट कर सकते हैं.

हालांकि, यहां एक बात समझना जरूरी है कि हर इलेक्ट्रिक कार सेफ ऑपरेटिंग लिमिट अलग-अलग हो सकती है. यानी कुछ मॉडल्स बेहद गर्म मौसम को बेहतर तरीके से संभाल लेते हैं, जबकि कुछ में परफॉर्मेंस पर थोड़ा असर देखने को मिल सकता है.

उदाहरण के तौर पर, Tata Nexon EV और Tata Punch EV जैसी इलेक्ट्रिक कारें माइनस 22 डिग्री सेल्सियस से लेकर 55 डिग्री सेल्सियस तक के टेम्परेचर में सेफ तरीके से काम कर सकती हैं. हालांकि, हर EV की टेम्परेचर सहने की क्षमता अलग-अलग हो सकती है.

लेकिन एक बात लगभग सभी इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर लागू होती है. यही कि जब मौसम जरूरत से ज्यादा गर्म या बेहद ठंडा हो जाता है, तो उसका सीधा असर गाड़ी की परफॉर्मेंस पर पड़ता है. ऐसे हालात में बैटरी की एफिशिएंसी, ड्राइविंग रेंज और चार्जिंग स्पीड पर असर पड़ सकता है.

क्या होता है बैटरी थर्मल मैनेजमेंट सिस्टम?

EV में बैटरी को सेफ और सही टेम्परेचर पर रखने के लिए एक खास सिस्टम होता है, जिसे बैटरी थर्मल मैनेजमेंट सिस्टम (Battery Thermal Management System) कहते हैं. इसे आप ऐसे समझिए जैसे कार की बैटरी के लिए एक कूलिंग गार्ड हो, जो हर वक्त उसका ध्यान रखता है. जैसे ही बैटरी का टेम्परेचर बढ़ने लगता है, ये सिस्टम अपने आप एक्टिव हो जाता है और उसे वापस सेफ लेवल पर लाने की कोशिश करता है. अगर कभी टेम्परेचर जरूरत से ज्यादा बढ़ जाए, तो बैटरी को नुकसान से बचाने के लिए सिस्टम उसे अस्थायी रूप से बंद भी कर देता है.

आजकल की नई EVs में ज्यादातर लिक्विड कूलिंग सिस्टम यूज होता है. यह बैटरी को ज्यादा एफिशिएंट तरीके से ठंडा करता है. वहीं, पुराने या बजट वाले मॉडल्स में आमतौर पर एयर कूलिंग सिस्टम मिलता है. यह हवा के जरिए बैटरी का टेम्परेचर कंट्रोल करता है.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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