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रानीगंज में हड़ताल के समर्थन में उतरे श्रमिक और किसान, चार वामपंथी हुए अरेस्ट, फिर छूटे

रानीगंज.

केंद्र की भाजपा प्रशासन की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ देशभर में श्रमिक, किसान और खेतमजदूरों ने बुधवार को देशव्यापी हड़ताल में शामिल होकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया.भारी बारिश और खराब मौसम के बावजूद रानीगंज क्षेत्र में श्रमजीवी जनता सुबह से ही सड़कों पर उतर आई. असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों, किसानों और खेत-मजदूरों ने काम पर न जाकर हड़ताल का पूर्ण समर्थन किया. रानीगंज बाजार के हृदयस्थल नेताजी मूर्ति के पास शांतिपूर्ण पिकेटिंग कर रहे प्रदर्शनकारियों पर राज्य प्रशासन की पुलिस ने हस्तक्षेप किया. हड़तालियों ने केंद्र प्रशासन की नई श्रम संहिता (लेबर कोड) को रद्द करने, आवश्यक वस्तुओं की मूल्यवृद्धि पर रोक लगाने, किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य दिलाने, 100 दिनों का काम फिर से चालू करने, न्यूनतम मजदूरी, रोजगार की गारंटी, और जीवन-यापन के अधिकार की मांग को लेकर ज़ोरदार नारेबाज़ी की.नेशनल हाइवे 60 अवरोध किये.पुलिस द्वारा उन्हें हटाने के क्रम में धक्का-मुक्की हुई.

पिकेटिंग में शामिल गौरव ढल्ल, रामशंकर दास, राजू केवड़ा और सुकांत चटर्जी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. इसके बाद श्रमिक नेता रुनु दत्त, सुप्रियो राय, अनुप मित्रा और किसान नेता मलय मंडल ने उनकी निःशर्त रिहाई की मांग की.

स्थानीय जनता ने सवाल उठाया कि जब नारे भाजपा प्रशासन के खिलाफ थे, तब तृणमूल कांग्रेस की पुलिस को इतनी आपत्ति क्यों हुई? प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि तृणमूल प्रशासन हड़ताल तोड़ने के लिए पुलिस का इस्तेमाल कर रही थी. उन्होंने बताया कि दुकानें जबरन खुलवायी जा रही थीं और बसों को चलाने के लिए परिवहन कर्मचारियों पर दबाव डाला जा रहा था. पुलिस ने कुछ घंटों की हिरासत के बाद चारों कार्यकर्ताओं को रिहा कर दिया. उसके बाद मजदूरों व किसानों का एक विशाल जुलूस तारबांग्ला मोड़ तक निकाला गया.

अन्य क्षेत्रों में भी व्यापक असर

सियारशोल राजबाड़ी मोड़ और जेकेनगर में भी लाल झंडा लिए श्रमिकों ने पिकेटिंग, जुलूस और सड़क जाम किया. पुलिस ने इन इलाकों में भी प्रदर्शनकारियों को हटाने की कोशिश की, लेकिन श्रमिकों का दृढ़ संकल्प बरकरार रहा. बाज़ारों में अधिकांश दुकानें बंद रहीं,हालांकि तृणमूल कांग्रेस समर्थकों ने कुछ दुकानदारों पर दुकान खोलने का दबाव डाला, लेकिन ग्राहक नदारद रहे.

सब्ज़ी बाजार में किसान अपनी उपज बेचने नहीं आये, जिससे बाज़ार बंद जैसा हो गया. खेतमजदूरों ने खेतों में काम नहीं किया, जिससे कृषि कार्य ठप पड़ गया.रानीगंज की केवल एक बैंक को छोड़कर सभी सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकें बंद रहीं.तृणमूल नेताओं ने बैंक मैनेजरों पर दबाव डाला, लेकिन बैंक कर्मचारी हड़ताल पर कायम रहे .

स्कूल-कॉलेजों में छात्र उपस्थिति बहुत कम रही और प्रशासनी कार्यालयों में कामकाज लगभग ठप रहा। मंगलपुर औद्योगिक क्षेत्र की 10 लोहे-इस्पात की फैक्ट्रियों में हड़ताल को सीआईटीयू से संबद्ध श्रमिक यूनियनों का पूरा समर्थन मिला

यूनियन नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष भाजपा की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ है और जब तक ये नीतियां वापस नहीं ली जातीं, तब तक संघर्ष जारी रहेगा.

डिस्क्लेमर: यह नया विचार समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे नया विचार डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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