संवाददाता, कोलकाता
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के दौरान विधानसभा में नेता, प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने सत्यापन प्रक्रिया में हेराफेरी के गंभीर आरोप लगाये हैं. उन्होंने दावा किया कि अधिकारियों की ओर से गैर-कानूनी निर्देश जारी किये गये हैं, जो तृणमूल कांग्रेस और प्रशासन के बीच गठजोड़ को उजागर करते हैं. शुक्रवार को शुभेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक स्क्रीनशॉट साझा करते हुए लिखा कि एसआइआर प्रक्रिया में चौंकाने और बेशर्म तृणमूल-ममता प्रशासन का गठजोड़ सामने आया है. उनके अनुसार, दक्षिण 24 परगना के अतिरिक्त जिलाधिकारी (एडीएम) की ओर से भेजा गया एक कथित व्हाट्सएप संदेश मतदाता सूची के चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण के पीछे की सच्चाई को उजागर करता है.
शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि कथित संदेश में अधिकारियों को निर्देश दिये गये हैं कि वे अपनी टीम को यह स्पष्ट कर दें कि किसी भी परिस्थिति में ‘नॉट वेरिफाइड’ विकल्प पर क्लिक न किया जाये. संदेश में यह भी कहा गया है कि किसी भी भ्रम की स्थिति में संबंधित अधिकारी एडीएम या ओसी इलेक्शन से संपर्क करें और हर हाल में प्रतिदिन 3000 सत्यापन का लक्ष्य पूरा किया जाए.
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि यह सत्यापन प्रक्रिया में हेराफेरी करने का सीधा और गैर-कानूनी आदेश है. अधिकारियों से कहा जा रहा है कि वे जानबूझकर ‘नॉट वेरिफाइड’ का चिह्न न लगाएं, भले ही सत्यापन सही तरीके से न हुआ हो. उन्होंने कहा कि यह प्रशासनिक अधिकारों का खुला दुरुपयोग है, जिसे तृणमूल कांग्रेस के इशारे पर अयोग्य मतदाताओं और फर्जी प्रविष्टियों को बचाने व छिपाने के लिए किया जा रहा है. ऐसे मतदाताओं को व्यवस्थित तरीके से सूची में शामिल कर तृणमूल की वोटबैंक नेतृत्व को बनाये रखा जा रहा है.
शुभेंदु ने चुनाव आयोग से अपील की कि वह इस तरह के अनौपचारिक प्रशासनिक दबाव के तरीकों के पैटर्न का तत्काल संज्ञान ले. साथ ही एडीएम और इन गैर-कानूनी निर्देशों को जारी करने या उनका पालन करने में शामिल अन्य अधिकारियों की भूमिका की उच्च-स्तरीय जांच शुरू की जाये. उन्होंने सत्ताधारी पार्टी के इशारे पर लोकतंत्र को कमजोर करने वाले सभी दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की भी मांग की.
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