Budget 2026 में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए घोषित प्रावधानों पर प्रतिक्रिया देते हुए Rubix Data Sciences के फाउंडर और सीईओ मोहन रामास्वामी ने कहा कि प्रशासन ने इस बार सिर्फ कर्ज बढ़ाने के बजाय MSME सेक्टर की असली समस्या, नकदी प्रवाह (कैश फ्लो) के तनाव को समझते हुए नीतिगत कदम उठाए हैं.
उनके अनुसार, इकोनॉमिक सर्वे यह साफ संकेत देता है कि MSME को मिलने वाला कर्ज बढ़ रहा है, ज्यादा उद्यम औपचारिक क्रेडिट सिस्टम में आ रहे हैं, लेकिन इसके साथ ही भुगतान में देरी की समस्या भी गंभीर बनी हुई है. आज भी करीब ₹8.1 लाख करोड़ की राशि MSME के लिए डिले पेमेंट के रूप में अटकी हुई है, जो सेक्टर की वित्तीय सेहत पर बड़ा दबाव डालती है.
TReDS को मजबूत बनाकर भुगतान की गारंटी पर जोर
रामास्वामी ने कहा कि बजट में TReDS (ट्रेड्स) की भूमिका को मजबूत करने का फैसला बेहद अहम है. इसे केवल एक प्लेटफॉर्म न रखकर अब सेटलमेंट बैकबोन के रूप में विकसित किया जा रहा है. इसके साथ गारंटी सपोर्ट बढ़ाना और TReDS को GeM (Government e-Marketplace) से जोड़ना, MSME के लिए भुगतान की निश्चितता सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम है. उनका मानना है कि इससे नीति का फोकस सिर्फ लोन डिस्बर्समेंट से हटकर समय पर भुगतान सुनिश्चित करने पर आ गया है, जिससे MSME के कैश फ्लो में संतुलन आएगा और उन पर बढ़ता वित्तीय दबाव कम होगा.
SME ग्रोथ फंड और डेटा-आधारित लेंडिंग से नई रफ्तार
बजट में घोषित ₹10,000 करोड़ के SME Growth Fund को लेकर रामास्वामी ने कहा कि यह उन MSME के लिए एक जरूरी इक्विटी सपोर्ट देगा, जो अब विस्तार और स्केल-अप के लिए तैयार हैं. केवल कर्ज के बजाय इक्विटी की उपलब्धता से ऐसे उद्यम ज्यादा स्थिर और दीर्घकालिक रूप से मजबूत बन सकेंगे. इसके साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा अपनाए जा रहे डेटा-आधारित क्रेडिट असेसमेंट मॉडल को उन्होंने एक सकारात्मक बदलाव बताया. इससे लेंडिंग प्रक्रिया ज्यादा ऑब्जेक्टिव, पारदर्शी और कुशल बनेगी.
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