खास बातें
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले जारी वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) पर हमलावर है. बंगाल से लेकर दिल्ली तक मुख्यमंत्री आंदोलन कर रहीं हैं. ममता बनर्जी ने विपक्षी दलों से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की अपील की है. दूसरी तरफ, पश्चिम बंगाल में ही उनको इस मुद्दे पर तगड़ा झटका लगा है. पश्चिम बंगाल विधानसभा में स्पीकर ने इस विषय पर चर्चा की अनुमति देने से इनकार कर दिया है.
विधानसभा में दिखी तीखी नेतृत्वक खींचतान
पश्चिम बंगाल विधानसभा में इस मुद्दे पर बृहस्पतिवार को तीखी नेतृत्वक खींचतान देखने को मिली. हालांकि, विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी ने यह कहते हुए सदन में इस विषय पर चर्चा करने की अनुमति नहीं दी कि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने एसआईआर की प्रक्रिया पर चर्चा का अनुरोध किया था. कहा था कि एसआईआर की वजह से 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले मतदाताओं को उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है.
स्पीकर बोले- चर्चा राज्यपाल के संबोधन तक ही सीमित रहेगी
तृणमूल कांग्रेस के प्रस्ताव पर स्पीकर ने कहा कि सदन इस मुद्दे पर विचार नहीं करेगा, क्योंकि यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है. उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि चर्चा राज्यपाल के संबोधन तक ही सीमित रहेगी.
शुभेंदु अधिकारी बोले- बीएसी के प्रस्ताव को बदला गया
विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने प्रशासन पर अंतिम समय में कार्य मंत्रणा समिति (बीएसी) के प्रस्ताव को बदलने का आरोप लगाया. शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि बीएसी का प्रस्ताव सुबह बताया गया था, लेकिन उसमें बदलाव कर दिया गया है. हमें बताया गया था कि एसआईआर पर चर्चा होगी और हम तैयारी के साथ आये थे. अब इसमें बदलाव किया जा रहा है.
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कार्यसूची फिर से सदन में रखने का शुभेंदु अधिकारी ने किया अनुरोध
शुभेंदु अधिकारी ने अध्यक्ष से अनुरोध किया कि वे कार्यसूची को फिर से सदन के समक्ष रखें. इससे पूर्व राज्य के संसदीय कार्य मंत्री शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने एसआईआर प्रक्रिया पर चर्चा की मांग करते हुए एक प्रस्ताव पढ़ा. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया.
टीएमसी का दावा – एसआईआर की वजह से 107 लोगों की हुई मौत
नियम 169 के तहत प्रस्ताव पेश करते हुए शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने दावा किया कि एसआईआर प्रक्रिया से मतदाताओं को परेशान किया गया और मानसिक तनाव के कारण 107 लोगों की मौत हो गयी. निर्वाचन आयोग की आलोचना करते हुए उन्होंने दावा किया कि राज्य में विधानसभा चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग ‘परेशान करने का आयोग’ बन गया है.
टीएमसी-बीजेपी के बीच विवाद का मुख्य मुद्दा बना एसआईआर
स्पीकर ने प्रस्ताव को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में है. विधानसभा चुनाव में 3 महीने से भी कम समय बचा है. ऐसे में एसआईआर का मुद्दा तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी दल हिंदुस्तानीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच विवाद का प्रमुख मुद्दा बनकर उभरा है.
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